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  • मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर

    मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है जहां एक ओर मराठा समाज ने आरक्षण को लेकर मुंबई मार्च की तैयारी शुरू कर दी है वहीं दूसरी ओर मुंबई के मालाड इलाके में जमीन आवंटन में कथित गड़बड़ी को लेकर सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं

    मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कहा है कि समुदाय अब दोबारा मुंबई की ओर कूच करने के लिए तैयार है उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे उनका कहना है कि अगर सरकार आरक्षण देने के पक्ष में नहीं थी तो पहले ही संबंधित आदेश जारी नहीं किए जाने चाहिए थे

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठा समाज अब पूरी तरह संगठित और जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाला नहीं है इससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य में एक बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है

    इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के मालाड इलाके में प्रोजेक्ट प्रभावित व्यक्तियों के लिए जमीन आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं यह मामला तब सामने आया जब विधानसभा में इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए गए

    राज्य की शहरी विकास मंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव के नेतृत्व में की जाएगी और जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी

    यह मुद्दा कांग्रेस नेता असलम शेख द्वारा उठाया गया था जिसके बाद भाजपा के योगेश सागर और मुर्जी पटेल ने भी इस पर सवाल खड़े किए

    विधानसभा में आरोप लगाया गया कि जमीन आवंटन के दौरान डेवलपर को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स और प्रीमियम सामान्य दर से कहीं अधिक दिया गया जिससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है

     महाराष्ट्र इस समय दो बड़े मुद्दों से जूझ रहा है एक तरफ मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन की आहट तेज हो रही है और दूसरी तरफ जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं आने वाले दिनों में इन दोनों मामलों का राजनीतिक और सामाजिक असर और गहरा होने की संभावना है

  • मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

    मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई


    नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।

    विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।

    2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

  • रैपर बादशाह के ‘टटीरी’ गाने पर विवाद, हरियाणा में FIR दर्ज; जानिए क्या है पूरा मामला

    रैपर बादशाह के ‘टटीरी’ गाने पर विवाद, हरियाणा में FIR दर्ज; जानिए क्या है पूरा मामला


    मुंबई। मशहूर रैपर और सिंगर Badshah अपने नए हरियाणवी गाने Tattiri को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस गाने के खिलाफ हरियाणा में शिकायत दर्ज होने के बाद पंचकुला के सेक्टर-20 स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गाने के म्यूजिक वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्दों, इशारों और कुछ विजुअल्स पर आपत्ति जताई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई गई लड़कियों के साथ कुछ दृश्य और जेस्चर आपत्तिजनक हैं, जो समाज में गलत संदेश दे सकते हैं।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर बादशाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 296 और Indecent Representation of Women (Prohibition) Act, 1986 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि गाने के जरिए अश्लीलता को बढ़ावा दिया गया और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    महिला आयोग में भी पहुंची शिकायत

    बताया जा रहा है कि पानीपत की सविता आर्य और रोहतक के वकील राज नारायण पंघाल ने भी इस गाने के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। सविता आर्य ने हरियाणा महिला आयोग में शिकायत की, जबकि पंघाल ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में मामला उठाया है।

    शिकायतकर्ताओं ने गाने की एक लाइन—“आया बादशाह डोली चढ़ाने, इन सबकी घोड़ी बनाने”—पर भी आपत्ति जताई है।

    13 मार्च को होगी सुनवाई

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में बादशाह को 13 मार्च 2026 को सुबह 11:30 बजे सुनवाई के लिए पानीपत में बुलाया गया है।

    ‘टटीरी’ शब्द का मतलब क्या है?
    हरियाणवी बोलचाल में “टटीरी” शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर एक चंचल या आकर्षक लड़की के लिए किया जाता है। हालांकि कई लोग इसे आपत्तिजनक या दोहरे अर्थ वाला शब्द मानते हैं, जिसकी वजह से गाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी

    घुटी गुं घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी गुं घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी

    आया बादशाह डोली चढ़ाने
    इन सबकी घोड़ी बनाने
    थोड़े पागल थोड़े सयाने
    हम आये इनके प्लांस के घोड़े लगाने

    ऐ.. लौंडे करते बकबक
    हम शत प्रतिशत ये लडके लगभग
    हम पूरी दुनिया में देखो करते करतब
    पर इश बॉय दिल्ली है मरते दम तक

    मैं ही शॉन मैं ही वेन
    मैं ही सीन मैं ही गेम
    मेरे खून में है जीत देख पास आके पेन
    कलाकार का है ब्रेन डबल आर की है क्रेन
    औडेमार्स का है टाइम बुल्गारी की चेन

    इंसान इनसाने मेरा काम इनसाने
    दो ही दोस्त हैं मेरे
    मेरा पेन मेरा पेन मेरी बंदी कोकेन
    मेरे गाने प्रोपेन
    मेरे सर पे है क्राउन मेरे मुँह पे है फेम

    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    कल्चर किंग!

    अरे छोरा अपनी आली पे आया होया है
    पंजा रेस पे पूरा ही दबाया होया है
    इन गमरों का गेम बजाया होया है
    अकेले ने ही सिस्टम हिलाया होया है

    यह… बिन दानो की चल्ली
    तु भी नल्ला तेरी गैंग भी नल्ली
    तु वेल कनेक्टेड पोलिटिकली
    मैं वेल कनेक्टेड स्पिरिचुअली

    मेन स्ट्रीम कमर्शियल में लिरिकली
    अभी अंडररेटेड मैं क्रिमिनली
    इनकी डाल नहीं गली इनकी ग***े

    जल्ली
    इश साल पूरी कर दूंगा तसल्ली मैं

    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    कल्चर किंग
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    क्या है टटीरी का अर्थ

    अगर आप टटीरी शब्द को गूगल करें तो पाएंगे टटीरी एक मध्यम आकार का जलचर पक्षी होता है। यह पक्षी अपनी खास अवाजा के लिए जाना जाता है। एआई के मुताबिक, “घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटेरी” का अर्थ है- टिटहरी, तू ऐसी दबी-दबी या घुटती हुई आवाज़ में क्यों बोल रही है?

    फिलहाल यह मामला कानूनी जांच के दायरे में है और आगे की कार्रवाई जांच और सुनवाई के बाद तय होगी।

  • मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी

    मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी



    नई दिल्ली। ईरानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मंदाना करीमी ने बड़ा बयान दिया है कि वह जल्द ही भारत छोड़कर अपने देश ईरान लौटने का निर्णय कर चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि भारत में अब उनकी कोई आवाज़ नहीं बची है और उन्हें ‘भारत ने धोखा दिया’ जैसा महसूस हो रहा है।

    मंदाना, जिन्होंने कई फिल्मों और रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाई थी, ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने अपना सारा सामान पहले से ही पैक कर लिया है और जैसे ही ईरान में मौजूदा शासन बदलने का ऐलान होगा, वह तुरंत वहीं लौट जाएँगी। उन्होंने कहा कि वह भारत से अब अपना नाता तोड़ रही हैं।

    क्या कहा मंदाना ने?
    मंदाना ने कहा, “मैं भारत से ब्रेकअप कर रही हूँ। भारत ने मुझे मॉडलिंग और एक्टिंग करियर दिया, लेकिन अब मुझे लगता है कि यहाँ मेरी आवाज़ नहीं सुनी जाती।
    उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्हें काम बिल्कुल नहीं मिल रहा और उनके कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं। इसका कारण वह अपनी खुली राय और ईरान के समर्थन में प्रदर्शन मानती हैं।

    मंदाना ने कहा कि मुंबई में अकेलापन महसूस हुआ, और कुछ पुराने दोस्त भी उनसे दूर हो गए क्योंकि उन्होंने बहुत खुले तौर पर राय व्यक्त की।

    ईरान के प्रति उनकी राय
    मंदाना ने कहा कि उनका सपना एक ऐसा ईरान है जहाँ महिलाएं आज़ाद हों, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकें और किसी भी यूनिवर्सिटी में पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि ईरान में राजनीतिक बदलाव आने पर वह तुरंत वापस चली जाएँगी।

    काम और मीडिया में गिरावट
    एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया, और कई कॉन्ट्रैक्ट भी कैंसिल हो गए। मंदाना ने यह अपने राजनीतिक बयान और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से जोड़कर बताया।
    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उन्होंने भारतीय मीडिया पर ‘एकतरफ़ा कवरेज़’ का आरोप लगाया है और चाहती हैं कि वैकल्पिक आवाज़ों को भी मंच मिले।


    उनका बॉलीवुड सफर
    मंदाना करीमी का जन्म तेहरान, ईरान में हुआ।
    वह 2010 में मॉडलिंग के लिए भारत आईं और 2013 से मुंबई में ही बस गईं।
    उन्होंने ‘क्या कूल हैं हम 3’, ‘मैं और चार्ल्स’, ‘भाग जॉनी’ जैसी फिल्मों में काम किया और ‘बिग बॉस’ और ‘लॉकअप’ जैसे रियलिटी शो में भी हिस्सा लिया।
    2017 में उनका भारतीय बिजनेसमैन गौरव गुप्ता से विवाह हुआ, लेकिन 2021 में उनका तलाक हो गया था।
    मंदाना करीमी ने कहा है कि वह भारत छोड़ेंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि यहाँ उनकी आवाज़ दब गई है और उन्हें धोखा महसूस हुआ है। उन्होंने कहा है कि काम मिलना बंद हो गया है और कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो गए हैं। वह ईरान में बदलाव आने पर वापस लौटना चाहती हैं, खासकर महिलाओं के अधिकारों और आज़ादी के लिए।उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की है कि रिपोर्टिंग एकतरफ़ा है।
  • फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

    फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

    भोपाल। साेशल मीडिया प्लेटफार्म ओटीटी पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक दिन पहले हुए प्रदर्शन के बाद भोपाल में ब्राह्मण समाज ने शुक्रवार को एक बार फिर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

    एमपी नगर इलाके में हुए इस प्रदर्शन में फिल्म के टाइटल, संवाद, निर्देशन और कलाकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी तरह की सफाई स्वीकार नहीं करेंगे और फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज नहीं होने देंगे।

    प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिल्मों को समाज का दर्पण कहा जाता है, लेकिन इस फिल्म के जरिए एक पूरे समाज को गलत और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना जिम्मेदारी के इस तरह का कंटेंट लॉन्च करना गंभीर चूक है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सरकार पर भी निशाना

    पुष्पेंद्र मिश्रा ने सरकार और प्रशासन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एफआईआर की मांग के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर “सोए हुए हैं”। यूजीसी नियमों और सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियां समाज को बांटने का काम कर रही हैं।

    मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़ा

    प्रदर्शन के दौरान फिल्म से जुड़े कलाकारों के खिलाफ नारे लगाए गए। इसी बीच अभिनेता मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़कर प्रतीकात्मक विरोध किया गया, जिससे मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।

  • AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान

    AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media post) को लेकर जबरदस्त विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला देश के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Former President Barack Obama.) और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) से जुड़ा है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में ओबामा दंपति को बंदर के रूप में दिखाए जाने के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस कथित नस्लभेदी कंटेंट को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर जमकर निशाना साधा है।

    दरअसल, गुरुवार रात ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट साझा किए। इन्हीं में से एक 62 सेकंड का वीडियो क्लिप सबसे ज्यादा चर्चा में है। शुरुआती जांच में यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया प्रतीत होता है। वीडियो में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह दावा किया गया है कि कुछ अहम राज्यों में वोटिंग मशीनों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी।


    वीडियो में क्या दिखाया गया?

    इस क्लिप के एक हिस्से में दो चिम्पैंजी नजर आते हैं, जिन पर बराक ओबामा और मिशेल ओबामा के मुस्कुराते हुए चेहरे एडिट कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह दृश्य एक लंबे वीडियो से लिया गया है, जिसे पहले एक मीम पेज पर शेयर किया गया था। उसी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को खुद को “जंगल का राजा” बताते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत कई अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं को भी जानवरों के रूप में पेश किया गया है। बाइडेन को केले खाते हुए चिम्पैंजी के रूप में दर्शाया गया, जिससे डेमोक्रेटिक खेमे में नाराजगी और बढ़ गई।


    डेमोक्रेट्स का तीखा पलटवार

    देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और उनकी पत्नी के खिलाफ इस तरह के चित्रण को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे नस्लवादी और अपमानजनक करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ने वाला है।

    कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ोम ने इस पोस्ट की कड़ी निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “राष्ट्रपति का यह व्यवहार बेहद शर्मनाक है। हर एक रिपब्लिकन को इसकी निंदा करनी चाहिए। अभी।” वहीं, बराक ओबामा के पूर्व वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने भी ट्रंप पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतिहास डोनाल्ड ट्रंप को एक नकारात्मक और विभाजनकारी व्यक्ति के रूप में याद रखेगा।


    पहले भी रहे हैं विवाद

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ओबामा परिवार को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह बराक ओबामा और मिशेल ओबामा पर व्यक्तिगत हमले कर चुके हैं और कई मौकों पर उनके बयानों को भड़काऊ और नस्लभेदी बताया गया है। फिलहाल इस वीडियो को लेकर अमेरिका की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। एक ओर ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे खुले तौर पर नस्लभेदी मानसिकता का उदाहरण बता रहे हैं।

  • RJD में अंदरूनी बगावत: भाई वीरेंद्र ने टिकट कटने पर उठाए तीखे सवाल, कहा- यादव उम्मीदवार ही देना था तो विजय मंडल क्यों हटाए?

    RJD में अंदरूनी बगावत: भाई वीरेंद्र ने टिकट कटने पर उठाए तीखे सवाल, कहा- यादव उम्मीदवार ही देना था तो विजय मंडल क्यों हटाए?



    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सीधे सवाल उठाए हैं। पटना से सामने आए एक वीडियो में वे साफ तौर पर नाराज दिखे और पार्टी के फैसलों पर आपत्ति जताई।

    भाई वीरेंद्र ने दिनारा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वे और विजय मंडल एक साथ विधायक रहे हैं।

    उन्होंने पूछा कि जब यादव समाज के उम्मीदवार को ही टिकट देना था, तो फिर सिटिंग विधायक विजय मंडल का टिकट क्यों काटा गया? उन्होंने यह भी पूछा कि विजय मंडल में ऐसी क्या कमी थी, जिसके कारण उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।

    उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के अंदर विजय मंडल का टिकट बचाने के लिए संघर्ष किया था और उनका मानना है कि टिकट कटना गलत फैसला था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने स्थानीय और मजबूत नेताओं को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों से आए नेताओं को टिकट दिया, जिससे जमीनी पकड़ कमजोर हुई।

    भाई वीरेंद्र ने कुछ नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा,
    “पार्टी में कुछ लोग सिर्फ नाम के समाजवादी हैं।

    ये एक साथ दो–तीन जिलों की राजनीति करते हैं। जब तक ऐसे लोग टिकट तय करते रहेंगे, तब तक पार्टी को नुकसान होता रहेगा।”

    उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि RJD में अंदरूनी तनाव और असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी नेतृत्व ने पहले ही हार के लिए वोट चोरी का आरोप लगाया था, लेकिन अब टिकट वितरण को लेकर उठ रहे सवालों से राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

    गौरतलब है कि दिनारा सीट से विजय मंडल 2020 में RJD के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उन्होंने LJP के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह को 8,228 वोटों से हराया था। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD ने उनका टिकट काटकर शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

  • BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल

    BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल



    नई दिल्ली। नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 से पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय क्रिकेट कोच गौतम गंभीर के साथ सेल्फी शेयर की और उनकी तारीफ की, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। BJP का आरोप है कि थरूर की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस की राजनीति के खिलाफ है और अब उन्हें पार्टी से ‘फतवा’ मिल सकता है।

    भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को थरूर की नागपुर यात्रा, गंभीर से मुलाकात या उनकी प्रशंसा में से कौन सी बात ज्यादा खलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या थरूर के खिलाफ एक और “कांग्रेस फतवा” जारी होने वाला है।

    थरूर ने गंभीर को “प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे कठिन काम करने वाला इंसान” बताया और कहा कि लाखों लोग उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं, फिर भी वह शांत रहते हैं और आगे बढ़ते हैं। उन्होंने गंभीर की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    गंभीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब समय आएगा, तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ पर सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने लिखा कि खुद के खिलाफ खड़ा देखकर उन्हें हंसी आ रही है।

    यह विवाद राजनीतिक स्तर पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि थरूर की आलोचना और प्रशंसा दोनों ही पक्षों के बीच नई बहस का कारण बन गई है।

  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • स्वर्ण मंदिर के सरोवर को अपवित्र करने पर बवाल… मुस्लिम शख्स ने हाथ-पैर धोए… कुल्ला किया

    स्वर्ण मंदिर के सरोवर को अपवित्र करने पर बवाल… मुस्लिम शख्स ने हाथ-पैर धोए… कुल्ला किया


    अमृतसर।
    पंजाब के अमृतसर (Amritsar) शहर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर (Famous Golden Temple) में एक मुस्लिम युवक (Muslim youth) न पवित्र सरोवर के पानी से वुजू किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में युवक को सरोवर में पैर डुबोए, मुंह कुल्ला करते और नाक साफ करते देखा जा सकता है, जिससे कई लोगों ने इसे सरोवर को गंदा करने और सिख मर्यादा का उल्लंघन बताया। सिख समुदाय और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे पवित्र स्थल के प्रति अपमान करार दिया, क्योंकि सरोवर केवल स्नान और धार्मिक डुबकी के लिए है, जबकि वुजू के लिए अलग से बहते पानी की व्यवस्था मौजूद है।

    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मानन ने कहा कि हिंदू और सिख समुदाय मर्यादा जानते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के लोग कभी-कभी गलती कर बैठते हैं। एसजीपीसी ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है और ऐसे मामलों पर पहले भी चर्चा की जा चुकी है। आरोपी युवक की पहचान दिल्ली निवासी सुभान रंगरेज के रूप में हुई, जो खुद को मुस्लिम शेर कहता है। विवाद बढ़ने के बाद उसने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उसने वीडियो जारी कर कहा कि उसे स्वर्ण मंदिर की मर्यादा के बारे में जानकारी नहीं थी और न ही वहां मौजूद किसी ने उसे रोका या बताया।


    वीडियो वायरल होने पर क्या बोला आरोपी

    आरोपी ने बताया कि वह लंबे समय से स्वर्ण मंदिर घूमना चाहता था और सिख धर्म के प्रति गहरा सम्मान रखता है। एक अन्य वीडियो में उसने स्वर्ण मंदिर को भारत की एकता का प्रतीक बताया, जहां सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सब भाई-भाई की तरह रहते हैं। उसने टोपी पहनने के बावजूद किसी की ओर से आपत्ति न करने की बात कही और कहा कि वह दोबारा जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगेगा। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे भक्ति का प्रदर्शन बताया, लेकिन अधिकांश ने इसे अनजान होने के बावजूद गलत करार दिया। एसजीपीसी ने सभी से अपील की है कि वे मर्यादा का पालन करें और स्थल को पर्यटन स्थल की तरह न इस्तेमाल करें।