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  • रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

    रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के मशहूर और विवादित रियलिटी शो ‘लॉकअप 2’ का आगामी एपिसोड बेहद धमाकेदार और भावनाओं से भरपूर होने वाला है। शो के मेकर्स द्वारा जारी किए गए नए प्रोमो वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में टीवी जगत के मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना विजिटर के तौर पर अपनी पत्नी आकांक्षा चमोला से मिलने के लिए जेल के भीतर दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं। पिछले काफी समय से अपनी निजी जिंदगी और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चा में चल रहे इस कपल का शो के भीतर आमना-सामना होते ही माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया। लंबे समय बाद एक-दूसरे को अपने सामने पाकर दोनों ही कलाकार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।

    गौरव खन्ना की इस शो में एंट्री को बेहद फिल्मी और भव्य अंदाज में फिल्माया गया है। प्रोमो में गौरव खन्ना का चेहरा सामने आने से पहले बैकग्राउंड में उनकी ही आवाज में एक बेहद दर्दभरी और दिल छू लेने वाली शायरी गूंजती है। गौरव कहते हैं कि एक समंदर है जो काबू में है, लेकिन एक कतरा है जो मुझसे संभाला नहीं जाता। एक उम्र बितानी है उसके बगैर और एक लम्हा है जो मुझसे गुजारा नहीं जाता। इस बेहद भावुक शायरी के बाद गौरव खन्ना सीधे कैदियों की सेल की तरफ कदम बढ़ाते हैं और अपनी पत्नी आकांक्षा की सेल के पास जाकर रुक जाते हैं। आकांक्षा को देखते ही उनके मुंह से पहला वाक्य निकलता है कि ‘बैंड बजा दिया तूने’, जिसे सुनकर आकांक्षा खुद को संभाल नहीं पाती हैं।

    दरअसल, गौरव खन्ना के जेल में पहुंचने से ठीक पहले वाले एपिसोड में आकांक्षा चमोला का एक बेहद उग्र और हिंसक रूप दर्शकों को देखने को मिला था। जेल के अंदर सह-प्रतियोगी श्रेया कालरा और आकांक्षा चौधरी के बीच किसी बात को लेकर तगड़ी बहस शुरू हो गई थी। यह आपसी विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि इस हाथापाई के दौरान आकांक्षा के चेहरे पर गंभीर चोट लग गई। चेहरे पर चोट लगते ही आकांक्षा ने पूरी तरह से अपना आपा खो दिया और जेल के नियमों को ताक पर रखकर भारी बवाल काट दिया। उन्होंने गुस्से में आकर श्रेया का पूरा बिस्तर बेड से उठाकर नीचे फेंक दिया और वहां मौजूद माधुरी के बेड को भी पानी डालकर पूरी तरह गीला कर दिया।

    आकांक्षा का यह हिंसक और आक्रामक रवैया देखकर जेल में मौजूद अन्य सभी कैदी और टीवी दर्शक पूरी तरह हैरान रह गए। इतना ही नहीं, उन्होंने शिल्पा शिंदे और श्रेया पर बेहद तीखे पर्सनल अटैक भी किए। आकांक्षा ने शिल्पा के अतीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर उनके खुद के बच्चे होते तो उन्हें समझ आता कि एक मां पर क्या बीतती है। वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने श्रेया को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि वह उनके सारे राज दुनिया के सामने खोल देंगी और उनके बाहरी संबंधों का पर्दाफाश कर देंगी। जेल में मचे इस अभूतपूर्व उपद्रव के बाद जब शो की होस्ट फराह खान वहां पहुंचीं, तो उन्होंने सभी कैदियों को कड़ी फटकार लगाई और साफ किया कि इस दुर्व्यवहार के लिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और इसका फैसला जजमेंट डे पर होगा।

    मध्य प्रदेश। जेल के भीतर मचे इस भारी बवाल के तुरंत बाद गौरव खन्ना की एंट्री ने इस शो के रोमांच को दोगुना कर दिया है। दर्शक इस कड़वे मोड़ पर गौरव के आने से बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि इसी शो के दौरान आकांक्षा ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वह और गौरव खन्ना पिछले एक साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। आकांक्षा ने शो के सह-प्रतियोगी राम कपूर से बात करते हुए यह भी साफ कर दिया था कि गौरव से तलाक लेने के बाद वह अपनी पूरी जिंदगी अकेले गुजारेंगी और दोबारा कभी शादी नहीं करेंगी। उन्होंने राम कपूर से इंडस्ट्री में दोबारा काम शुरू करने के लिए मार्गदर्शन और मदद भी मांगी थी, जिस पर राम कपूर ने उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया था।

    अब जब गौरव खन्ना खुद इस शो का हिस्सा बनकर आकांक्षा के सामने आ चुके हैं, तो हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि वह अपनी टूटती शादी और तलाक के फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या इस शो के मंच पर दोनों के बीच की कड़वाहट दूर होगी या फिर दूरियां और ज्यादा बढ़ जाएंगी, यह आने वाले एपिसोड में साफ हो जाएगा। फिलहाल, गौरव को अपनी सेल के सामने खड़ा देखकर आकांक्षा बुरी तरह टूट गईं और रोते हुए अपने आंसू पोंछती नजर आईं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और पारिवारिक इमोशन्स के कॉम्बिनेशन ने ‘लॉकअप 2’ की टीआरपी और दर्शकों की उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

  • मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' के डीसीपी बिल माफी को लेकर विवादों में आए शाहरुख खान, डायरेक्टर बोले- "अच्छा इंसान सिर्फ इंसान होता है"

    मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' के डीसीपी बिल माफी को लेकर विवादों में आए शाहरुख खान, डायरेक्टर बोले- "अच्छा इंसान सिर्फ इंसान होता है"


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान इन दिनों एक मराठी फिल्म की मदद करने को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के निशाने पर आ गए हैं। हाल ही में रिलीज हुई सुपरहिट मराठी फिल्म ‘देऊल बंद 2’ के डिजिटल सिनेमा पैकेज (डीसीपी) के लाखों रुपये के बिल को अपनी कंपनी के माध्यम से माफ करने के बाद शाहरुख खान को ट्रोल किया जा रहा है। कुछ कट्टरपंथी यूज़र्स ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाने शुरू कर दिए कि एक मुस्लिम अभिनेता ने हिंदू देवता और संस्कृति पर आधारित फिल्म की वित्तीय सहायता क्यों की। इस पूरे विवाद और बढ़ती बहस को देखते हुए अब फिल्म के निर्देशक प्रवीण तारडे खुलकर शाहरुख खान के समर्थन में आ गए हैं और उन्होंने नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है।

    यह कोई पहला मौका नहीं है जब शाहरुख खान को इस फिल्म से जुड़े किसी मामले में निशाना बनाया गया हो। इससे पहले जब फिल्म के डायरेक्टर प्रवीण तारडे ने एक इंटरव्यू के दौरान सुपरस्टार की इस दिलदारी और आर्थिक मदद का पहली बार खुलासा किया था, तब भी सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर काफी हंगामा हुआ था कि आखिर शाहरुख को इस फिल्म की सफलता का श्रेय क्यों दिया जा रहा है। अब एक बार फिर जब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर गरमाया, तो प्रवीण तारडे ने एक पॉडकास्ट के जरिए ट्रोल्स की क्लास लगाते हुए अभिनेता का बचाव किया और फिल्म उद्योग के भीतर के भाईचारे को सर्वोपरि बताया।

    प्रवीण तारडे ने एक प्रसिद्ध पॉडकास्ट में बात करते हुए साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले में हिंदू और मुस्लिम का मुद्दा कहां से आ जाता है। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान भी इसी फिल्म इंडस्ट्री का एक सम्मानित हिस्सा हैं और वह खुद भी इसी बिरादरी से आते हैं। तारडे ने फिल्म के निर्माण के समय आए आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए बताया कि जब फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी, तब उनकी टीम के पास सिर्फ 12 से 13 लाख रुपये ही बचे थे, जबकि तकनीकी काम का कुल बिल लगभग 43 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया था। ऐसी विकट स्थिति में वे मदद की उम्मीद लेकर शाहरुख खान की कंपनी के पास पहुंचे थे।

    डायरेक्टर ने आगे बताया कि जब यह मामला शाहरुख खान के सामने आया, तो उन्होंने सबसे पहले अपनी तकनीकी टीम से फिल्म की गुणवत्ता और उसकी कहानी के बारे में फीडबैक मांगा। टीम की ओर से फिल्म को बेहद शानदार बताए जाने के बाद शाहरुख ने बिना किसी देरी के अपनी टीम को आदेश दिया कि फिल्म की डीसीपी तुरंत निर्माताओं को सौंप दी जाए ताकि फिल्म की रिलीज में कोई बाधा न आए। शाहरुख ने साफ कहा था कि पैसों का हिसाब-किताब बाद में आराम से देख लिया जाएगा। प्रवीण तारडे ने सवाल किया कि क्या किसी संकटग्रस्त फिल्म निर्माता के लिए ऐसा सोचना और तुरंत मदद करना एक बड़े दिल वाले इंसान की दरियादिली को नहीं दर्शाता है।

    ट्रोल्स को आड़े हाथों लेते हुए प्रवीण तारडे ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इतने बड़े और साफ दिल से किसी की मदद के लिए आगे आता है, तो क्या सिर्फ उसकी जाति या मजहब देखकर उसकी भलाई और अच्छाई को नजरअंदाज कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर मदद करने वाले इंसान का शुक्रिया अदा करना हर किसी का नैतिक कर्तव्य बनता है। जहां तक हिंदुत्व या अपनी विचारधारा का सवाल है, उन्हें समाज में किसी भी व्यक्ति के सामने खुद को सही साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। शाहरुख खान का आभार व्यक्त करने का उनकी व्यक्तिगत विचारधारा से कोई टकराव नहीं है, क्योंकि एक अच्छा इंसान हमेशा अच्छा इंसान ही रहता है।

    गौरतलब है कि तमाम विवादों और सोशल मीडिया पर चल रही नकारात्मकता के बावजूद फिल्म ‘देऊल बंद 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया है। धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस मराठी फिल्म ने दुनिया भर के सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस बिजनेस किया है। इसके साथ ही यह फिल्म मराठी सिनेमा के इतिहास की सबसे सफल और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चुनिंदा फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है, जिसने यह साबित कर दिया है कि कला और अच्छी कहानी को दर्शकों के बीच किसी भी प्रकार के विवाद से प्रभावित नहीं किया जा सकता।

  • दिलजीत दोसांझ की प्रतिबंधित फिल्म 'सतलुज' के लेखक ने तोड़ी चुप्पी; सीबीएफसी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    दिलजीत दोसांझ की प्रतिबंधित फिल्म 'सतलुज' के लेखक ने तोड़ी चुप्पी; सीबीएफसी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों देश के सिनेमा जगत और दर्शकों के बीच गंभीर चर्चा का विषय बनी हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘ज़ी5’ पर रिलीज होने के महज दो दिनों के भीतर ही इस फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद से इसके कंटेंट और प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ रखा गया था, जिसे सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद बदलकर ‘सतलुज’ किया गया था। अब इस फिल्म के सह-लेखक निरेन भट्ट ने फिल्म को बिना किसी स्पष्ट कारण के हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    फिल्म के सह-लेखक निरेन भट्ट ने हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार में फिल्म को हटाए जाने की प्रक्रिया और सिस्टम की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सिस्टम में बैठे कुछ लोगों को इस फिल्म की कहानी से बहुत बड़ी दिक्कत है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस पूरे मामले पर संबंधित विभागों की ओर से बातचीत का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी की तरफ से साधी गई लंबी चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड कभी यह स्पष्ट नहीं करता कि उन्हें फिल्म के किस हिस्से से आपत्ति है या ये फैसले आखिर किस स्तर पर लिए जा रहे हैं।

    प्रशासनिक हलकों और रिपोर्ट्स में यह अंदेशा जताया गया था कि इस संवेदनशील फिल्म को भारत विरोधी तत्वों द्वारा एक एजेंडे या प्रोपेगैंडा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए निरेन भट्ट ने देश में हाल ही में रिलीज हुई अन्य राजनीतिक और संवेदनशील फिल्मों का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरला स्टोरी’ जैसी फिल्में बिना किसी रुकावट के रिलीज हो सकती हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हथियार क्यों नहीं माना गया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ एक बायोग्राफी को दबाने के लिए काल्पनिक आशंकाओं के आधार पर फैसला लेना बिल्कुल अतार्किक है।

    उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है। जसवंत सिंह खालड़ा पेशे से एक बैंक कर्मचारी थे, जिन्होंने साल 1984 से 1994 के बीच पंजाब के अशांत दौर में मारे गए और लापता घोषित किए गए लगभग 25 हजार लोगों के लावारिस अंतिम संस्कार के मामलों की स्वतंत्र जांच शुरू की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन लोगों को फर्जी पुलिस मुठभेड़ों में मारा गया था। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकारों को लेकर काम करने वाले संगठनों के बीच यह मामला हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है क्योंकि इस मामले की जांच के दौरान ही खालड़ा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे और बाद में उनका शव सतलुज नदी से बरामद हुआ था।

  • रियलिटी शो में छिड़ा जुबानी युद्ध: पुराने विवादों को लेकर घिरीं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे, बेबाक अंदाज में जवाब देकर गोविंदा की पत्नी सुनीता ने बटोरीं सुर्खियां

    रियलिटी शो में छिड़ा जुबानी युद्ध: पुराने विवादों को लेकर घिरीं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे, बेबाक अंदाज में जवाब देकर गोविंदा की पत्नी सुनीता ने बटोरीं सुर्खियां

    नई दिल्ली । रियलिटी टीवी शो ‘लॉकअप सीजन 2’ इन दिनों दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शो में कंटेस्टेंट्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप ने मनोरंजन के पारे को काफी बढ़ा दिया है। इस शो में मशहूर अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा अपने प्रवेश के बाद से ही अपने बेबाक और स्पष्टवादी अंदाज के लिए लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। उन्होंने शो के दौरान अपनी व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़े कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे दर्शक उनकी तरफ काफी आकर्षित हुए हैं।

    इसी बीच शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के रूप में शामिल हुईं टेलीविजन अभिनेत्री शिल्पा शिंदे के आने से माहौल और भी गरमा गया है। ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े रियलिटी शो का हिस्सा रह चुकीं शिल्पा शिंदे ने जेल में एंट्री लेते ही अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन बहुत ही कम समय में उनका मुकाबला सुनीता आहूजा के साथ हो गया। दोनों के बीच हुई इस तीखी भिड़ंत का एक नया प्रोमो वीडियो भी सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही तहलका मचा दिया है।

    इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिल्पा शिंदे ने सुपरस्टार गोविंदा की विशाल फैन फॉलोइंग का हवाला देते हुए सुनीता आहूजा पर उनके बयानों को लेकर सवाल उठाए। शिल्पा ने सीधे तौर पर सुनीता को घेरते हुए पूछा कि वह सार्वजनिक मंच पर गोविंदा के बारे में इस तरह की बातें कैसे कह सकती हैं और क्या उनके फैसले पूरी तरह से उनके अपने होते हैं। शिल्पा के इन तीखे सवालों का सुनीता आहूजा ने बेहद कड़े और बेबाक लहजे में जवाब दिया। सुनीता ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब किसी पर खुद ऐसी परिस्थितियां गुजरती हैं, तभी सच्चाई का अहसास होता है, इसलिए बिना सोचे-समझे बकवास करने की जरूरत नहीं है।

    सुनीता आहूजा द्वारा बिना समय गंवाए शिल्पा शिंदे को दिए गए इस करारे जवाब को सोशल मीडिया पर दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। इंटरनेट यूजर्स सुनीता के इस व्यावहारिक और आक्रामक दृष्टिकोण की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कमेंट सेक्शन में लोग सुनीता के समर्थन में उतर आए हैं और उनका मानना है कि शिल्पा को इस तरह का कड़ा जवाब मिलना बेहद जरूरी था। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग सुनीता की इस बेबाकी को सही ठहरा रहा है और उनके आत्मविश्वास की सराहना कर रहा है।

    इस पूरे विवाद के बीच शिल्पा शिंदे के पुराने बयानों को लेकर भी सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। हाल ही में शिल्पा शिंदे अपने उस कबूलनामे के कारण विवादों में घिर गई थीं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि अतीत में एक मशहूर टीवी शो के निर्माता पर लगाए गए उनके यौन उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह से असत्य और मनगढ़ंत थे। इस खुलासे के बाद से ही जनता का एक बड़ा हिस्सा उनके प्रति नाराजगी जता रहा है।

    दर्शकों का कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित सार्वजनिक मंच पर इस तरह के गंभीर और झूठे आरोप लगाने वाले व्यक्ति को जगह नहीं मिलनी चाहिए। यही कारण है कि शो के भीतर जब सुनीता आहूजा ने शिल्पा को आड़े हाथों लिया, तो दर्शकों ने इसे एक सही कार्रवाई के रूप में देखा। फिलहाल इस शो में दोनों के बीच की यह जंग आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • 127 कट्स के विवाद के बाद रिलीज हुई 'सतलुज', 48 घंटों में लगा बैन, खालड़ा की पत्नी बोलीं- यही वो असली फिल्म

    127 कट्स के विवाद के बाद रिलीज हुई 'सतलुज', 48 घंटों में लगा बैन, खालड़ा की पत्नी बोलीं- यही वो असली फिल्म


    नई दिल्ली। लंबे समय से विवादों में रही दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब 95’, जिसे बाद में ‘सतलुज’ नाम से रिलीज किया गया, आखिरकार दर्शकों तक पहुंची। कई वर्षों की देरी और सेंसर संबंधी विवादों के बाद फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया, लेकिन स्ट्रीमिंग शुरू होने के करीब 48 घंटे के भीतर ही इसे भारत में हटा दिया गया और फिल्म पर रोक लगा दी गई।

    फिल्म की खास बात यह रही कि इसे बिना किसी कट के मूल संस्करण में रिलीज किया गया था। इसकी जानकारी निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने साझा की थी। फिल्म को जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार का भी समर्थन मिला। उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने कहा कि ओटीटी पर रिलीज हुई ‘सतलुज’ वही मूल फिल्म है, जो सबसे पहले उनके परिवार को दिखाई गई थी और जिसे उन्होंने मंजूरी दी थी। हालांकि, उनका यह बयान फिल्म पर रोक लगाए जाने से पहले का है।

    परमजीत कौर खालड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर खुशी जताई कि वर्षों की मुश्किलों के बाद उनके पति के जीवन, संघर्ष और न्याय की लड़ाई पर आधारित फिल्म दर्शकों तक पहुंच सकी। उन्होंने लिखा कि यह वही मूल संस्करण है, जिसे सबसे पहले उनके परिवार ने देखा था। उनके मुताबिक, तमाम दबाव और बदलाव की कोशिशों के बावजूद फिल्म की सच्चाई और मूल भावना को बरकरार रखा गया।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह था कि जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी को बिना किसी समझौते और तथ्यों से छेड़छाड़ किए ईमानदारी से प्रस्तुत किया जाए।

    अपने पोस्ट में परमजीत कौर खालड़ा ने दावा किया कि फिल्म में 25 हजार से अधिक लावारिस शवों के मामले और जसवंत सिंह खालड़ा की कानूनी लड़ाई को पूरी सच्चाई के साथ दिखाया गया है। उन्होंने निर्देशक हनी त्रेहान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारी दबाव के बावजूद फिल्म की ऐतिहासिक और कलात्मक सत्यता से समझौता नहीं किया। साथ ही उम्मीद जताई कि यह फिल्म लोगों को सच, न्याय, जवाबदेही और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित करेगी।

    यह फिल्म वर्षों तक सेंसर प्रक्रिया में अटकी रही। निर्देशक हनी त्रेहान के मुताबिक, इसे वर्ष 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास भेजा गया था, लेकिन करीब तीन साल तक प्रमाणपत्र नहीं मिला। मेकर्स का दावा था कि बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया था। इसके अलावा 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रस्तावित प्रीमियर भी भारतीय अधिकारियों की आपत्तियों के बाद रद्द कर दिया गया था।

    <blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”en” dir=”ltr”>On the release of <a href=”https://x.com/hashtag/Punjab95?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw”>#Punjab95</a> under the name of <a href=”https://x.com/hashtag/Satluj?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw”>#Satluj</a> <a href=”https://t.co/QASNh6Y9Fm”>pic.twitter.com/QASNh6Y9Fm</a></p>&mdash; Paramjit Kaur Khalra (@KaurKhalra) <a href=”https://x.com/KaurKhalra/status/2073120269271785885?ref_src=twsrc%5Etfw”>July 3, 2026</a></blockquote> <script async src=”https://platform.x.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>

    हनी त्रेहान ने बताया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के पहले शीर्षक ‘गल्लूघारा’ पर भी आपत्ति जताई थी और शुरुआती क्रेडिट्स से ‘Inspired by True Events’ हटाने के लिए कहा था। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया।

    फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है। उनके अलावा कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं।

    कई वर्षों के विवाद, सेंसर विवाद और लंबी प्रतीक्षा के बाद रिलीज हुई ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हालांकि, भारत में रिलीज के कुछ ही समय बाद फिल्म पर लगी रोक ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है।

  • आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    नई दिल्ली । कन्नड़ सिनेमा से निकलकर देशव्यापी पहचान बनाने वाले सुपरस्टार यश इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद से ही अभिनेता को लेकर सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, फिल्म की चर्चाओं के बीच अभिनेता का एक दशक पुराना बयान इंटरनेट पर अचानक दोबारा वायरल हो गया है, जिसने फिल्म जगत और दर्शकों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    यह पूरा मामला साल 2014 का है, जब अभिनेता यश ने मशहूर टॉक शो ‘वीकेंड विद रमेश’ में शिरकत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्मों में अपनी सीमाओं, ऑन-स्क्रीन रोमांटिक दृश्यों और अपने पारिवारिक मूल्यों को लेकर खुलकर बात की थी। उस समय दिए गए अपने इंटरव्यू में यश ने स्वीकार किया था कि सेट पर रोमांटिक सीन फिल्माते समय वह काफी असहज और नर्वस हो जाते थे। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी बताया था कि उनके इन दृश्यों को देखकर उनकी पत्नी राधिका और खुद उनकी मां भी उन पर हंसती थीं और कहती थीं कि उन्हें ठीक से रोमांस करना नहीं आता।

    इसी टॉक शो के दौरान यश ने एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत का जिक्र किया था, जिसे वह अपने अभिनय करियर में हमेशा लागू करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि वह आज भी जीवन में एक कड़ा नियम फॉलो करते हैं कि अगर वह किसी दृश्य को अपने माता-पिता के साथ बैठकर आराम से नहीं देख सकते, तो वह वैसा सीन स्क्रीन पर कभी नहीं करेंगे। उनका मानना था कि जिन दृश्यों को देखकर अभिनेता स्वयं या उसका परिवार असहज हो, उससे आम दर्शकों को भी परदे पर देखते समय निश्चित रूप से असहजता महसूस होती है।

    अब जबकि फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर दर्शकों के सामने आ चुका है, तो यश के इसी पुराने बयान के स्क्रीनशॉट और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स इस बयान को उनकी नई फिल्म के संदर्भ से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ प्रशंसकों का कहना है कि यश हमेशा से अपनी फिल्मों की पारिवारिक मर्यादा को लेकर बेहद सतर्क रहे हैं और वे ‘टॉक्सिक’ में भी अपने इसी पुराने वादे और मूल्यों पर कायम रहेंगे।

    दूसरी तरफ, इस पुराने बयान के दोबारा सामने आने से इंटरनेट पर एक अलग सामाजिक और लैंगिक बहस भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का एक धड़ा इस फिल्म से जुड़ी उनकी सह-कलाकार कियारा आडवाणी को लेकर की जा रही टिप्पणियों और आलोचनाओं पर सवाल उठा रहा है। कई यूजर्स ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि जब यश खुद किसी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और बोल्ड या एक्शन दृश्यों का हिस्सा बनते हैं, तो समाज उनके पारिवारिक जीवन, उनकी शादी या उनके बच्चों को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता।

    इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मनोरंजन उद्योग में आज भी मौजूद दोहरे मापदंडों को रेखांकित किया है। लोगों का कहना है कि यश के शादीशुदा और दो बच्चों के पिता होने के बावजूद समाज पुरुषों से उनके ऑन-स्क्रीन किरदारों को लेकर कम सवाल पूछता है, जबकि महिला अभिनेत्रियों को उनके दृश्यों के लिए आज भी अधिक जज किया जाता है। फिलहाल, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज से पहले वायरल हुआ यह बयान फिल्म के प्रचार के साथ-साथ सिनेमा में कलाकारों की व्यक्तिगत सीमाओं और सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार करने का एक नया जरिया बन गया है।

  • पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई

    पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई


    नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों पर सरकार ने विस्तृत सफाई दी है। कई पोस्टों में इंजन खराब होने, माइलेज घटने और बीमा रद्द होने जैसे दावे किए जा रहे थे, जिन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूरी तरह भ्रामक बताया है।

    मंत्रालय के अनुसार, E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध और कई देशों के लंबे अनुभव पर आधारित है। सरकार ने कहा कि वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह ईंधन मानकों के अनुरूप सुरक्षित है।

    सरकार ने 10 बिंदुओं में दी स्पष्ट जानकारी
    सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलतफहमियों का जवाब देते हुए कई अहम तथ्य सामने रखे:-

    – एक लीटर एथेनॉल उत्पादन में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा गलत है। सरकार के अनुसार, उत्पादन प्रक्रिया में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है और कई प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक से काम करते हैं।

    – E20 कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इसका उपयोग अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से किया जा रहा है।
    – इंजन खराब होने का दावा गलत है। ARAI और अन्य संस्थाओं के अध्ययन में E20 से इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है, हालांकि पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
    – परीक्षणों में केवल मामूली माइलेज बदलाव देखा गया है, जिससे वाहन की सामान्य कार्यक्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
    – E20 के लिए डिजाइन या स्वीकृत वाहनों की वारंटी और बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता।
    – फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में चीनी नहीं होती और इसमें डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं, जिससे पेट्रोल की गंध हावी रहती है। इसलिए चींटियों या मधुमक्खियों के आकर्षित होने का दावा गलत है।
    – अदालत में E20 कार्यक्रम की वैधता पर नहीं, बल्कि एथेनॉल खरीद अनुबंधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई हो रही थी।
    – आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों की संरचना ऐसी है कि फ्यूल टैंक में पानी जाने की संभावना न्यूनतम रहती है।
    – सोशल मीडिया पर वायरल ‘रस मिलाने’ वाला वीडियो फर्जी बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल औद्योगिक मानकों के तहत ही तैयार होता है।
    – सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की आय मिली है, कच्चे तेल के आयात में 310 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है और प्रदूषण में भी गिरावट दर्ज की गई है।
  • 'हेरा फेरी 3' को लेकर नया विवाद, प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा, बोले- निर्माता के व्यवहार से आहत होकर छोड़ी फिल्म, बड़े दावे भी किए

    'हेरा फेरी 3' को लेकर नया विवाद, प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा, बोले- निर्माता के व्यवहार से आहत होकर छोड़ी फिल्म, बड़े दावे भी किए

    मुंबई। बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। कलाकारों और निर्माण से जुड़े विवादों के बीच अब निर्देशक प्रियदर्शन ने पहली बार खुलकर बताया है कि उन्होंने इस फिल्म से खुद को अलग करने का फैसला क्यों लिया। उनके हालिया बयान ने फिल्म को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रियदर्शन ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फिल्म के निर्माता ने स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी थी कि फिल्म का निर्माण तो उनके अधिकारों के तहत होगा, लेकिन निर्देशन उनके हाथों में नहीं होना चाहिए। निर्देशक के अनुसार, यह बात उनके लिए बेहद निराशाजनक थी और इसी कारण उन्होंने परियोजना से दूरी बनाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अतीत में भी निर्माता की ओर से कई बार उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।

    निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में रिलीज हुई ‘हेरा फेरी’ के समय भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। उनका दावा है कि फिल्म देखने के बाद निर्माता ने उसकी प्रस्तुति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। प्रियदर्शन के अनुसार, उस वक्त उन्हें फिल्म के लंबे संस्करण को काफी संपादित कर छोटा करना पड़ा, ताकि इसे निर्धारित प्रारूप में रिलीज किया जा सके।

    प्रियदर्शन ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में केवल अभिनेता अक्षय कुमार के आग्रह और विश्वास के कारण ‘हेरा फेरी 3’ का निर्देशन करने में रुचि दिखाई थी। उनका मानना था कि इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे सफल कॉमेडी सीरीज में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें फिल्म बनाने का अवसर मिलता तो वह इसे और अधिक बड़े स्तर पर प्रस्तुत करते।

    निर्देशक के अनुसार, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल तीनों चाहते थे कि वही फिल्म का निर्देशन करें। उन्होंने कहा कि कलाकारों का उन पर भरोसा उनके लिए महत्वपूर्ण था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि परियोजना से अलग होना पड़ा। इस बयान के बाद फिल्म के निर्माण से जुड़े घटनाक्रम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ‘हेरा फेरी 3’ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। पहले कलाकारों के फिल्म से जुड़ने और अलग होने की खबरें सामने आईं, वहीं अब निर्देशन और निर्माण को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इससे फिल्म के भविष्य और निर्माण प्रक्रिया को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की सफलता केवल कलाकारों पर ही नहीं, बल्कि मजबूत निर्देशन और टीमवर्क पर भी निर्भर करती है। ऐसे में निर्माण से जुड़े मतभेद किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की गति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि फिल्म से जुड़े सभी विवादों के बीच ‘हेरा फेरी 3’ की आगे की दिशा क्या होगी और निर्माण प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।

  • 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' को लेकर नया दावा, सुनील पाल बोले- ₹25 लाख का ऑफर ठुकराया; कहा- गाली-गलौज वाली कॉमेडी का हिस्सा नहीं बनूंगा

    'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' को लेकर नया दावा, सुनील पाल बोले- ₹25 लाख का ऑफर ठुकराया; कहा- गाली-गलौज वाली कॉमेडी का हिस्सा नहीं बनूंगा


    नई दिल्ली ।
    कॉमेडी जगत में सुनील पाल और समय रैना के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। इस बार सुनील पाल ने दावा किया है कि उन्हें लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ का हिस्सा बनने के लिए 25 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह ऑफर स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वह अपनी कॉमेडी शैली और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहते थे।

    सुनील पाल के अनुसार, शो की टीम ने उनसे संपर्क कर कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह मंच पर किसी भी प्रकार की गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका कहना है कि इसके जवाब में उन्हें बताया गया कि उन्हें स्वयं ऐसा करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागी अपनी शैली में प्रस्तुति देंगे। इसके बावजूद उन्होंने शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

    फिलहाल समय रैना या उनकी टीम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सुनील पाल के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि, उनके इस बयान ने दोनों कॉमेडियनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाल ने समय रैना या उनके शो की सार्वजनिक रूप से आलोचना की हो। इससे पहले भी वह कई अवसरों पर आधुनिक स्टैंड-अप कॉमेडी में बढ़ती अभद्र भाषा और विवादित कंटेंट पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना रहा है कि हास्य का उद्देश्य स्वस्थ मनोरंजन होना चाहिए और मंच पर प्रस्तुत सामग्री समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने वाली होनी चाहिए।

    इससे पहले शो के पहले सीजन को लेकर भी सुनील पाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि अश्लील भाषा और आपत्तिजनक प्रस्तुति को कॉमेडी का नाम देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे प्रयोग दर्शकों के बीच गलत संदेश पहुंचाते हैं और पारिवारिक मनोरंजन की परंपरा को प्रभावित करते हैं। उनके इन बयानों ने उस समय भी सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था।

    हाल के महीनों में दोनों कलाकार एक डिजिटल मनोरंजन कार्यक्रम में भी साथ दिखाई दिए थे। उस दौरान मंच पर दोनों ने एक-दूसरे पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणियां की थीं, लेकिन दर्शकों ने इसे उनके पुराने विवाद से जोड़कर देखा। इसके बाद भी समय-समय पर दोनों के बयानों ने यह संकेत दिया कि उनके विचारों में मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

    कॉमेडी की बदलती शैली और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर मनोरंजन जगत में लगातार चर्चा होती रही है। एक ओर कुछ कलाकार प्रयोगधर्मी और बेबाक प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की पसंद बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ कलाकार मर्यादित और पारिवारिक हास्य को अधिक उपयुक्त मानते हैं। सुनील पाल का ताजा बयान भी इसी बहस को एक बार फिर सामने लेकर आया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि समय रैना या उनकी टीम इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

  • अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

    अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की आगामी एक्शन फिल्म ‘चौहान’ अपने आधिकारिक घोषणा वीडियो के रिलीज होते ही बड़े विवादों के केंद्र में आ गई है। फिल्म के शुरुआती टीज़र में अजय देवगन को एक सैन्य अधिकारी के रूप में दिखाया गया है, जो कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटता नजर आ रहा है। इस वीडियो में दिखाए गए कुछ दृश्यों और संवादों ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से कश्मीर की संवेदनशीलता और राजपूत समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को लेकर फिल्म के निर्माताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्यधारा के सिनेमा में संवेदनशील मुद्दों के प्रस्तुतीकरण को लेकर यह विवाद अब गहराता जा रहा है।

    फिल्म के टीज़र में कश्मीरी युवाओं द्वारा की जाने वाली पत्थरबाजी और उसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को जिस अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नाराज कर दिया है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फिल्म में दिखाए गए पैलेट गन और सैन्य बल के दृश्य कश्मीर के लोगों के पुराने जख्मों और दर्दनाक अतीत को हरा करने वाले हैं। उन्होंने मुख्यधारा के सिनेमा की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीर के दर्द और वहां की त्रासदी का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक और मनोरंजन के उद्देश्यों के लिए एक एक्शन बैकग्राउंड के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए संवेदनशीलता और गरिमा की आवश्यकता है।

    इस फिल्म को लेकर विवाद केवल कश्मीर की छवि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है। ‘क्षत्रिय परिषद’ नामक एक प्रमुख संगठन ने फिल्म के शीर्षक और उसमें क्षत्रिय पहचान के इस्तेमाल पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि फिल्म निर्माता नीरज यादव और अभिनेता अजय देवगन राजनीतिक व वैचारिक हितों के लिए चौहान वंश के ऐतिहासिक गौरव का अनुचित उपयोग कर रहे हैं। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राजपूत इतिहास संपूर्ण देश की धरोहर है और इसे किसी सांप्रदायिक विमर्श, चुनावी लाभ या व्यावसायिक फिल्म का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।

    यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसने अजय देवगन की ही पूर्व में आई फिल्म ‘सिंघम अगेन’ की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें कश्मीर की एक बिलकुल अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की थी। उस फिल्म में कश्मीर के युवाओं को विकास, शांति और देश के साथ चलते हुए दिखाया गया था, जिसकी दर्शकों और समीक्षकों ने काफी सराहना की थी। वहीं, दूसरी ओर ‘चौहान’ में फिर से उसी पुरानी और नकारात्मक छवि को उभारा गया है, जिसे लेकर कश्मीरी समाज लंबे समय से असहज रहा है। एक ही अभिनेता द्वारा कश्मीर की दो विपरीत छवियों को पर्दे पर उतारने के इस विरोधाभास ने भी विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।

    वर्तमान में फिल्म ‘चौहान’ का केवल शुरुआती प्रचार वीडियो ही सामने आया है और इसकी पूरी शूटिंग तथा निर्माण कार्य होना अभी बाकी है। ऐसे में फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि निर्माताओं को व्यावसायिक सफलता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी। राष्ट्रवाद और वीरता के नाम पर बनने वाली फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों और क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी माना जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बढ़ते देशव्यापी विवाद के बाद फिल्म के निर्माता-निर्देशक अपनी कहानी और दृश्यों की प्रस्तुतीकरण शैली में किसी प्रकार का बदलाव करते हैं या नहीं।