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  • दिल्ली में जुटेंगे ब्रिक्स देशों के नेता… पश्चिम एशिया संघर्ष पर टकराव की आशंका!

    दिल्ली में जुटेंगे ब्रिक्स देशों के नेता… पश्चिम एशिया संघर्ष पर टकराव की आशंका!


    नई दिल्ली।
    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia Conflict) को लेकर सदस्य देशों में टकराव की आशंका है लेकिन भारत (India) ने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। भारत की कोशिश है कि सभी मुद्दों पर सहमति से संयुक्त बयान जारी हो।

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित हो रहा। भारत की अध्यक्षता में चौथी बार आयोजित हो रहे सम्मेलन का विषय, ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है।

    सम्मेलन के लिए भारत ने बाकी 10 सदस्य देशों के अलावा दस पार्टनर देशों को भी आमंत्रित किया है। इसमें में बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाइलैंड, युगांडा, उजबेकिस्तान एवं वियतनाम शामिल हैं।


    बांग्लादेश को भी आमंत्रित किया गया

    इसके अलावा बिमस्टेक चेयर के नाते बांग्लादेश को भी आमंत्रित किया गया है। सूत्रों के अनुसार ईरान की कोशिश रहेगी कि संयुक्त बयान में अमेरिका और इजरायल के हमले की निंदा की जाए क्योंकि यह एक ब्रिक्स सदस्य देश की संप्रभुता पर हमला है।

    दूसरे, उसका आरोप है कि एक दूसरे सदस्य यूएई ने हमलों में अमेरिका का साथ दिया तथा अपनी भूमि का इस्तेमाल होने दिया। इसी के चलते मई में विदेश मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे पर बयान जारी नहीं हो सका। यह स्थिति शिखर सम्मेलन में भी हो सकती है।


    ब्रिक्स मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं

    विदेश मंत्रालय के अनुसार यूरो की तर्ज पर ब्रिक्स मुद्रा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। दरअसल, इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति आक्रामक हैं और वे बार-बार ब्रिक्स देशों को चेतावनी दे रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के दौरान लेन-देन की कीमत को कम करने के लिए व्यवहारिक तरीके अपनाने पर बातचीत चल रही है। इनमें स्थानीय मुद्रा में कारोबार जैसे विकल्प शामिल हैं। सितंबर में ब्रिक्स वित्त मंत्रियों की बैठक की जाएगी।


    भारत हमेशा कूटनीति के पक्ष में रहा

    सूत्रों ने कहा कि संयुक्त बयान में ईरान पर हमले की निंदा को शामिल करना संभव नहीं होगा। इसके पीछे वजह यह है कि एक तो ब्रिक्स सुरक्षा से जुड़ा मंच नहीं है। दूसरे, भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहेगा जिससे पश्चिम को नाराजगी हो। सूत्रों ने कहा कि भारत हमेशा कूटनीति के पक्ष में रहा है। सभी सदस्य चाहते हैं कि संकट जल्द खत्म हो और जलमार्गों से निर्बाध नौवहन शुरू हो। इस विषय को शामिल किया जा सकता है।

  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    नई दिल्ली । टाटा संस के चेयरमैन पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले एन चंद्रशेखरन का नाम अब केंद्र सरकार में संभावित मंत्री पद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहा है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह अटकल तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संभावित फेरबदल के दौरान चंद्रशेखरन को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।

    राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार चंद्रशेखरन को कॉर्पोरेट मामलों या शिक्षा जैसे किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर बात हो रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि उन्होंने इस तरह की चर्चा सुनी है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक नियुक्ति से जुड़ी अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    चंद्रशेखरन ने हाल में टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने की इच्छा जताई थी। बताया गया कि उन्होंने 12 अगस्त को इस्तीफा दिया था और उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त होना था। उनके इस्तीफे के पीछे टाटा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्यों के साथ मतभेदों की चर्चा भी सामने आई है।

    चंद्रशेखरन की उम्र 63 वर्ष है। राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में यह उम्र अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी में वरिष्ठ पदों के लिए 75 वर्ष की आयु सीमा का नियम चर्चा में रहा है, हालांकि अलग-अलग परिस्थितियों में इसके अपवाद भी देखे गए हैं। इसी वजह से उनकी उम्र को संभावित जिम्मेदारी के रास्ते में बड़ी बाधा के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

    शिक्षा मंत्रालय को लेकर चंद्रशेखरन का नाम सामने आने की चर्चा ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी कई नेताओं के पास रही है। स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान इस पद पर रह चुके हैं। अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में इन सभी को बाद में पद से हटना पड़ा।

    शिक्षा क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों ने भी संभावित बदलाव को लेकर चर्चाओं को बढ़ाया है। परीक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की जिम्मेदारी इंफोसिस के पूर्व सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को दिए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता रखने वाले गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को अधिक भूमिका देने पर विचार कर रही है।

    इसी संदर्भ में चंद्रशेखरन की संभावित नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो रही है। उद्योग और प्रबंधन क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्हें प्रशासनिक और आर्थिक मामलों की समझ रखने वाला व्यक्ति माना जाता है। यदि सरकार उन्हें कोई जिम्मेदारी देती है तो यह पारंपरिक राजनीतिक नियुक्तियों से अलग एक महत्वपूर्ण प्रयोग हो सकता है।

    फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अंतरिम रूप से प्रह्लाद जोशी के पास है। यह व्यवस्था उस समय बनी थी जब NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सवाल उठे और धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। ऐसे में अब निगाहें संभावित कैबिनेट फेरबदल और शिक्षा मंत्रालय के लिए सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। चंद्रशेखरन के नाम पर चल रही चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि उनकी नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पांच सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई जाएगी।

    जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि संगठन लंबे समय से संबंधित परिवारों के लिए मुआवजे और छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर पांच सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।

    दीपके ने मुआवजे की मांग के पीछे परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में कई लोग सीमित आय वाले हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। उन्होंने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था और अब परिवार आर्थिक तथा पारिवारिक संकट से गुजर रहा है।

    उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करने के लिए कोचिंग और अन्य खर्चों में बड़ी रकम लगती है। ऐसे में किसी परिवार के बच्चे के खोने के बाद आर्थिक सहायता उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन इसी आधार पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग कर रहा है।

    दूसरी प्रमुख मांग छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की है। दीपके ने कहा कि छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सामने आए थे। संगठन का दावा है कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस होनी चाहिए। पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च में इन्हीं दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जयपुर में हुई घटना के संदर्भ में भी नेताओं से सवाल किया गया। आशुतोष रांका ने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर उन्हें अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पीछे हटने की चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटनाक्रम के बाद भी संगठन के लोग राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए और आगे भी लोगों के बीच जाने की योजना है।

    रांका ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य चुनाव में लोगों से वोट मांगना नहीं है। उन्होंने राजस्थान में स्कूलों की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए और स्कूलों का संचालन उचित परिस्थितियों में होना चाहिए।

    हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने अपने और आशुतोष रांका के साथ पहले हुई कथित मारपीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे विरोध के दौरान मारपीट का सामना कर चुके हैं और अब सौरव दास की बारी आने की बात कही। हालांकि, संगठन ने पांच सितंबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मार्च बताया है।

    सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से पहले किए गए वादों और अदालत में हुई कार्यवाही को संगठन महत्वपूर्ण मानता है। उनका दावा है कि छात्रों से जुड़े मामलों की प्राथमिकी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर अभी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं।

    अब पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी। इसमें छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने की बात कह रहा है।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अभद्र शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने प्रधानमंत्री की माता के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, उसने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रा और उसके माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया कि उससे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रा ने इसके बाद माफी भी मांगी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान की गई उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग भारत के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

    उन्होंने इस संदर्भ में अर्बन नक्सलियों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके हाथों देश के भविष्य को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री की टिप्पणी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के साथ राजनीतिक परिस्थितियों का भी संदर्भ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के भटकाव से बचाना आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके बीच जिम्मेदारी तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों की जनता ने हमेशा राजनीतिक घटनाक्रमों को समझते हुए अपना फैसला दिया है। इन इलाकों का राजनीतिक महत्व लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में रहा है और चुनावी परिस्थितियों में यहां के मतदाताओं के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में मुख्यमंत्री ने छात्रा की ओर से बाद में माफी मांगे जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्रा और उसके माता-पिता ने गलती स्वीकार की और इसके बाद माफी मांगी गई।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में एक ओर छात्रा की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके सामने सही दिशा और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार की जरूरत बताई।

    इस पूरे घटनाक्रम में छात्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी, छात्रा की ओर से माफी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया प्रमुख बिंदु रहे। साथ ही मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी के संदर्भ में भी अपनी बात रखी।

  • नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रीमियर और वित्त मंत्री नतालियो डी. व्हीटली से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय एवं आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन, निवेश प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

    नतालियो व्हीटली भारत की यात्रा पर वित्तीय सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के साथ आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में नई दिल्ली के अलावा गिफ्ट सिटी, मुंबई और बेंगलुरु का दौरा भी शामिल है।

    बैठक के दौरान व्हीटली ने भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने वित्तीय सेवाओं के साथ फिनटेक, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, व्यापार, निवेश संवर्धन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

    वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और डिजिटल माध्यमों के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए फिनटेक सहयोग को दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। डिजिटल परिवर्तन के साथ वित्तीय सेवाओं में नवाचार और निवेश के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं। क्षमता निर्माण के जरिए विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने की संभावनाएं भी इस साझेदारी को मजबूत कर सकती हैं।

    निर्मला सीतारमण ने भारत को वित्तीय सेवाओं और निवेश के लिए दुनिया के सबसे बड़े तथा तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया। उन्होंने साझा हित वाले क्षेत्रों में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का स्वागत किया। बैठक में दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।

    गिफ्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर से जुड़े अवसर भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल का गिफ्ट सिटी दौरा वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े संभावित सहयोग को समझने का अवसर प्रदान कर सकता है। मुंबई और बेंगलुरु में होने वाली बातचीत से वित्तीय क्षेत्र और तकनीकी क्षमताओं से जुड़े अन्य अवसरों पर भी चर्चा आगे बढ़ सकती है।

    इस बीच, निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ दोनों देशों की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना तथा वैश्विक आर्थिक प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाना है।

    कनाडा के टोरंटो में सीतारमण कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी। इस दौरान व्यापक आर्थिक विकास, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।

    कनाडा यात्रा के दौरान वित्त मंत्री एक विशेष निवेश राउंडटेबल में भी शामिल होंगी। इसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बातचीत का उद्देश्य नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

    भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में निवेश की संभावनाएं भी चर्चा का हिस्सा रहेंगी। इस तरह ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ हुई बैठक और आगामी विदेश यात्रा, दोनों ही वित्तीय सेवाओं, निवेश और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को विस्तार देने की व्यापक दिशा से जुड़ी हैं।

  • राखी बाजार में बढ़ी त्योहारी खरीदारी, दिल्ली समेत देशभर में स्वदेशी और थीम आधारित राखियों की मांग में तेजी

    राखी बाजार में बढ़ी त्योहारी खरीदारी, दिल्ली समेत देशभर में स्वदेशी और थीम आधारित राखियों की मांग में तेजी

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन से पहले देशभर के बाजारों में त्योहारी खरीदारी तेज हो गई है और कारोबारियों को इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर बिक्री की उम्मीद है। व्यापारिक संगठनों के आकलन के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है। इसमें अकेले राखियों की बिक्री करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

    त्योहार में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में राखियों, मिठाइयों, कपड़ों, उपहारों और अन्य त्योहारी सामान की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले अंतिम दिनों में बिक्री की रफ्तार और बढ़ेगी।

    दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में रक्षाबंधन से जुड़ी खरीदारी का असर दिखाई दे रहा है। स्थानीय बाजारों के अलावा छोटे और मध्यम व्यापारियों को भी त्योहार के कारण कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।

    अनुमान के मुताबिक, देशभर में सिर्फ राखियों का कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। दिल्ली में राखियों की बिक्री लगभग चार हजार करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई गई है। राखियों के अलावा मिठाई, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुएं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य उपहारों की बिक्री को जोड़ने पर रक्षाबंधन से संबंधित कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

    इस वर्ष बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ अलग-अलग विषयों और संदेशों वाली राखियां भी दिखाई दे रही हैं। विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र गौरव और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाले संदेशों से जुड़ी राखियों की मांग को लेकर व्यापारिक क्षेत्र में उत्साह है।

    विकसित भारत राखी, मोदी गारंटी राखी, ब्रह्मोस राखी, नारी वंदन राखी, आत्मनिर्भर भारत राखी और वोकल फॉर लोकल राखी जैसे डिजाइन बाजार में उपलब्ध हैं। इसके अलावा भारत गौरव राखी, लखपति दीदी राखी, नमामि गंगे राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और अमृतकाल राखी भी ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

    बच्चों और युवाओं में ब्रह्मोस राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और विकसित भारत राखी को लेकर खास रुचि बताई जा रही है। वहीं महिलाओं के बीच नारी वंदन और लखपति दीदी जैसी थीम वाली राखियों को पसंद किए जाने की बात सामने आई है। इससे राखी बाजार में डिजाइन और संदेश आधारित उत्पादों की विविधता बढ़ी है।

    व्यापारिक क्षेत्र का कहना है कि स्वदेशी राखियों की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और कुटीर उद्योगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की बिक्री त्योहार के दौरान छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन रही है।

    रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख भारतीय त्योहार है, लेकिन इसके साथ जुड़ा बाजार भी लगातार विस्तृत हो रहा है। अब राखी के साथ उपहार, मिठाई, कपड़े और अन्य सामान की खरीदारी त्योहार के कारोबार को व्यापक बनाती है। इस बार बाजार में स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय स्तर पर तैयार सामान को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कारोबारी वर्ग को उम्मीद है कि रक्षाबंधन से पहले खरीदारी के अंतिम दौर में बाजारों में भीड़ और बिक्री दोनों बढ़ेंगी। यदि राखियों और अन्य त्योहारी वस्तुओं की मांग अनुमान के अनुरूप रहती है, तो इस वर्ष रक्षाबंधन का कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जा सकता है।

  • दिल्ली में छोटे सैलेलाइट बनाएगी फिनलैंड की दिग्गज स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी

    दिल्ली में छोटे सैलेलाइट बनाएगी फिनलैंड की दिग्गज स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी


    नई दिल्ली।
    फिनलैंड (Finland) की अंतरिक्ष-आधारित खुफिया तकनीक (Space-based Intelligence Technology) की वैश्विक कंपनी आईसीईवाईई (ICEYE) ने भारत (India) में अपना कामकाज शुरू करने का एलान किया है। यह कंपनी देश में छोटे उपग्रहों के निर्माण के लिए एक स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने की संभावनाएं तलाश रही है। ये उपग्रह रक्षा, चौकसी और पर्यावरणीय निगरानी में इस्तेमाल किए जाएंगे।

    आईसीईवाईई इंडिया नई दिल्ली से संचालित होगी। यह कंपनी की भारत जैसे अहम रक्षा और अंतरिक्ष बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी के सैटेलाइट का समूह का इस्तेमाल पहले से ही रक्षा, खुफिया, बीमा और आपातकालीन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में हो रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध समेत दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कंपनी की तकनीक की मांग भी बढ़ी है।


    कंपनी के सीईओ ने क्या कहा?

    कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक राफल मोड्रजेव्स्की ने कहा कि कंपनी भारत में वास्तविक इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि आईसीईवाईई भारत सरकार और स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर देश की संप्रभु खुफिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उत्साहित है। आईसीईवाईई की प्राथमिकता भारतीय रक्षा व खुफिया ग्राहकों को उन्नत खुफिया हल मुहैया कराना होगी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूती बढ़ेगी। कंपनी भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है।

    इसमें लॉन्च प्रदाता, इलेक्ट्रॉनिक्स व कंपोनेंट निर्माता और तकनीकी साझेदार शामिल हैं। कंपनी का स्थानीय औद्योगिक क्षमता विकसित करने का मॉडल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से मेल खाता है। इसके पास दुनिया का सबसे उन्नत सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) सैटेलाइट समूह है। दुनिया भर में कंपनी के 1,000 से अधिक कर्मचारी हैं इस साल कंपनी का राजस्व लगभग 280 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,680 करोड़ रुपये) को पार कर गया है।

  • दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1,777 मामलों से बढ़ी चिंता, सरकार ने अस्पतालों को सतर्क रहने और इलाज की तैयारियां मजबूत रखने के निर्देश दिए

    दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1,777 मामलों से बढ़ी चिंता, सरकार ने अस्पतालों को सतर्क रहने और इलाज की तैयारियां मजबूत रखने के निर्देश दिए

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में इन्फ्लूएंजा ए के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इन्फ्लूएंजा ए के 2,392 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 1,777 मामले एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के बताए गए हैं। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि फिलहाल अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए डॉक्टर, बेड और जरूरी दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।

    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एच1एन1 के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शुक्रवार तक राजधानी में 1,777 से अधिक लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। केवल गुरुवार को ही 114 नए मामले सामने आए। लगातार बढ़ रहे संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को स्थिति पर निगरानी रखने और अस्पतालों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है और इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। बुखार, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द और शरीर में दर्द इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। कुछ लोगों में थकान और कमजोरी भी महसूस हो सकती है। सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    स्वास्थ्य संबंधी सावधानी के तौर पर लोगों से साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना जरूरी है। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोने की सलाह दी गई है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से भी बचने की सलाह दी गई है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक आंख, नाक और मुंह को बार-बार हाथ लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि दूषित हाथों के संपर्क में आने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना और थूकने से बचना भी जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहना शरीर में पानी की कमी से बचाने में मदद करता है।

    जिन लोगों में बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या स्थिति बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना किसी दवा का सेवन करने से बचना चाहिए।

    सरकार की ओर से अस्पतालों को उपचार व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में भी चिकित्सा सेवाओं पर अचानक दबाव न पड़े। स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की स्थिति पर नजर रख रहा है और अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    राजधानी में एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चुनौती संक्रमण की रफ्तार को नियंत्रित करना है। लोगों की सतर्कता, व्यक्तिगत स्वच्छता, भीड़भाड़ में सावधानी और लक्षण सामने आने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह संक्रमण के प्रभाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। दिल्ली सरकार ने भी लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की है।

  • सीमा पार अफीम तस्करी और ड्रग्स के बदले हथियार भेजने वाले नेटवर्क के चार कथित सदस्य गिरफ्तार, फंडिंग कनेक्शन की जांच

    सीमा पार अफीम तस्करी और ड्रग्स के बदले हथियार भेजने वाले नेटवर्क के चार कथित सदस्य गिरफ्तार, फंडिंग कनेक्शन की जांच

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी और ड्रग्स के बदले हथियारों की आपूर्ति से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क के तार नामित खालिस्तानी आतंकवादी अरशदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले में चार कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान कुल 5.138 किलोग्राम अफीम बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने की भी कोशिश की जा रही थी। जांच में ड्रग्स की तस्करी और हथियारों की आपूर्ति के बीच कथित संबंध सामने आया है। बताया जा रहा है कि नेटवर्क सीमा पार से अफीम की तस्करी करता था और इसके बदले हथियार भेजने की गतिविधियों में भी शामिल था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

    क्राइम ब्रांच की द्वारका यूनिट ने यह कार्रवाई की। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए चारों कथित सदस्यों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क और नेटवर्क के दूसरे हिस्सों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि बरामद नशीले पदार्थों को कहां से लाया गया था और इन्हें आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। इसके अलावा हथियारों की कथित आपूर्ति से जुड़े संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।

    नार्को-टेरर नेटवर्क में नशीले पदार्थों की तस्करी से हासिल धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किए जाने का आरोप है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां तस्करी के रास्तों, आर्थिक लेनदेन, संपर्कों और सीमा पार मौजूद नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करती हैं। दिल्ली में सामने आया यह मामला भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पुलिस ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित कथित नेटवर्क से जोड़कर जांच शुरू की है।

    पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी को सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है। जांच एजेंसियों के लिए इस तरह के नेटवर्क का पता लगाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशीले पदार्थों से मिलने वाले धन का इस्तेमाल हिंसक और आपराधिक गतिविधियों में किए जाने की आशंका रहती है।

    फिलहाल गिरफ्तार चारों कथित आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस उनके मोबाइल फोन, संपर्कों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकती है, ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाई जा सके। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इस मॉड्यूल में कितने लोग सक्रिय थे और इसका संचालन किन स्थानों से किया जा रहा था।

    पुलिस की जांच में यदि सीमा पार संपर्क, हथियारों की आपूर्ति और आतंकी फंडिंग से जुड़े अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल 5.138 किलोग्राम अफीम की बरामदगी और चार कथित सदस्यों की गिरफ्तारी को शुरुआती कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों, तस्करी के रास्तों और कथित आतंकी फंडिंग की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।

  • पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई

    पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई


    नई दिल्ली । 
    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला शुक्रवार को उस समय और गरमा गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचव के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। कांग्रेस ने छात्र की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

    साहिल लोचव का दावा है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उस पर पैलेट गन से हमला हुआ था। उसके अनुसार, घटना के बाद उसे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से आगे एम्स रेफर किया गया। एम्स में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन उसकी आंख की रोशनी अब भी स्पष्ट नहीं है। साहिल ने बताया कि उसने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।

    राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की बात सामने आई है और कुछ छर्रे उसकी आंख में भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली पुलिस पैलेट गन चलाने से इनकार कर रही है तो फिर छात्र को चोट कैसे लगी। राहुल गांधी ने कहा कि मामले में अपराध हुआ है और इसकी जांच के लिए FIR दर्ज होना जरूरी है।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए साहिल और उसके वकील को अलग-अलग पुलिस अधिकारियों के पास भेजा गया। साहिल की वकील के मुताबिक, पहले कनॉट प्लेस और फिर संसद मार्ग थाने से संबंधित क्षेत्र को लेकर उन्हें भेजा गया। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें बताया गया कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि ऊपर से निर्देश मिले हैं। कांग्रेस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

    राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कुछ लोगों ने भजन गाते हुए तथा चरखे का इस्तेमाल करते हुए विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया और संसद मार्ग के दोनों ओर यातायात प्रभावित रहा।

    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है कि शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और उसका नंबर दिया जाए। उन्होंने कहा कि साहिल की शिकायत को लेकर राहुल गांधी उसके साथ खड़े हैं और प्राथमिकी दर्ज होने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे छात्रों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा मामला बताया।

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को लेकर पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। भाजपा ने राहुल गांधी पर न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले को देख रहा है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का औचित्य क्या है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि घटना की जांच चल रही है और कांग्रेस को कानून की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

    इस बीच कांग्रेस का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि घायल छात्र की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। पैलेट गन के इस्तेमाल और साहिल की चोटों से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होती है या नहीं और इस मामले में आगे पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।