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  • दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से मध्य प्रदेश के छात्र की जान गई, कटनी स्थित घर में पसरा गम का माहौल

    दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से मध्य प्रदेश के छात्र की जान गई, कटनी स्थित घर में पसरा गम का माहौल

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस क्षेत्र के सत्य निकेतन में हुई इमारत गिरने की घटना में मध्य प्रदेश के कटनी निवासी 19 वर्षीय छात्र अक्षत यादव की मौत हो गई। हादसे की जानकारी सामने आने के बाद कटनी स्थित उसके परिवार में शोक की स्थिति है। परिवार के सदस्य दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं और अब शव को गृह नगर लाने की तैयारी की जा रही है।

    मृतक छात्र की पहचान कटनी की दुबे कॉलोनी निवासी अक्षत यादव के रूप में हुई है। अक्षत दिल्ली में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था। परिवार के अनुसार वह उच्च शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली में रह रहा था। पढ़ाई के दौरान हुई इस दुर्घटना ने परिवार को गहरा सदमा दिया है।

    बताया गया कि रविवार को सत्य निकेतन क्षेत्र में करीब 40 वर्ष पुरानी इमारत अचानक ढह गई। इमारत गिरने के दौरान कई लोग मलबे की चपेट में आ गए। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया तथा मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इसी दौरान अक्षत को भी मलबे से निकाला गया।

    हादसे में अक्षत गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी जान बचाने की कोशिश की। हालांकि गंभीर चोटों के कारण उसकी हालत नहीं संभल सकी और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में शवों की पहचान की प्रक्रिया के दौरान अक्षत के परिजनों को उसकी मौत की पुष्टि हुई।

    इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी पहलुओं और हादसे के कारणों को लेकर जांच की जा रही है। संबंधित स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पुरानी इमारत की स्थिति कैसी थी और उसके गिरने के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

    अक्षत की मौत की खबर कटनी पहुंचते ही दुबे कॉलोनी में मातम छा गया। परिवार के घर पर रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। अचानक सामने आई इस दुखद खबर से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसियों के मुताबिक अक्षत पढ़ाई के लिए दिल्ली गया था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं।

    परिजन अब दिल्ली पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि अक्षत के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द कटनी लाया जा सके, ताकि अंतिम संस्कार गृह नगर में किया जा सके। हादसे की खबर के बाद स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर चिंता और दुख का माहौल है।

    सत्य निकेतन जैसे छात्र बहुल क्षेत्र में पुरानी इमारतों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना ने ऐसे भवनों की सुरक्षा और उनकी नियमित जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। फिलहाल हादसे के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। अक्षत की मौत ने उसके परिवार के सामने ऐसी क्षति छोड़ दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

  • MP से लेकर यूपी-बिहार और दिल्ली तक आज भारी बारिश के आसार…. अलर्ट जारी

    MP से लेकर यूपी-बिहार और दिल्ली तक आज भारी बारिश के आसार…. अलर्ट जारी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में सितंबर महीना शुरू होने के साथ सुबह का नजारा शीत ऋतु के आगमन की आहट देने लगा है. हालांकि, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) अभी कमजोर पड़ता नहीं दिख रहा है. मौसम विभाग (IMD) ने 7 सितंबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

    कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र और इंडो-गंगेटिक प्लेन में सक्रिय ट्रफ की वजह से उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में मॉनसूनी गतिविधियां बनी हुई हैं. अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश जारी रहने का अनुमान है।


    दिल्ली-NCR में तेज हवा, बारिश का अलर्ट

    दिल्ली में 7 सितंबर को आसमान में बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है. इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. राजधानी में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. हरियाणा-चंडीगढ़, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान में भी 7 सितंबर को बारिश की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मौसम खराब रह सकता है।


    यूपी में भी आंधी, तेज बारिश का अनुमान

    उत्तर प्रदेश में 7 सितंबर को पश्चिमी हिस्सों में बारिश के साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 7 और 8 सितंबर को कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं. लखनऊ में 7 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. राज्य के कई जिलों में भारी बारिश के साथ जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।


    उत्तराखंड में लैंडस्लाइड का खतरा

    उत्तराखंड में 7 सितंबर को कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है. इसके अलावा 10 से 12 सितंबर के दौरान भी राज्य के कई हिस्सों में मॉनसूनी गतिविधियां तेज रह सकती हैं. देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रपुर, काशीपुर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल समेत कई इलाकों में बारिश हो सकती है. पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और मिट्टी के कटाव का खतरा बना हुआ है।


    मध्य भारत में भी बारिश का दौर

    मध्य प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों तक मॉनसूनी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में 7 सितंबर को और पूर्वी मध्य प्रदेश में 7-8 सितंबर तथा 11-12 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है. विदर्भ में 10 से 12 सितंबर के दौरान भारी बारिश का अनुमान है. छत्तीसगढ़ में 8 से 12 सितंबर के बीच कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है. भोपाल में 7 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।


    बिहार, झारखंड, बंगाल में बारिश

    बिहार में 7 सितंबर को कई इलाकों में बारिश के साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना है. पटना में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

    झारखंड में 8 से 11 सितंबर के दौरान बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है. रांची में अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में 7 से 10 सितंबर के दौरान बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 7-8 सितंबर तथा 11-12 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है. ओडिशा में 10 से 12 सितंबर के दौरान बारिश का अनुमान है. राज्य के कुछ इलाकों में पहले से बने बाढ़ जैसे हालात के बीच बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है।


    महाराष्ट्र में भी बारिश की संभावना

    महाराष्ट्र में 7 से 12 सितंबर के दौरान कोंकण और गोवा के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है. गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में भी कुछ जगहों पर बारिश का अनुमान है. कोंकण तट पर कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. मुंबई में 7 सितंबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रह सकता है.


    पूर्वोत्तर राज्यों में भी मॉनसून सक्रिय

    पूर्वोत्तर भारत में भी मॉनसून की गतिविधियां जारी रहेंगी. अरुणाचल प्रदेश में 7 से 12 सितंबर तक बारिश का अनुमान है. नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी इस दौरान कई इलाकों में बारिश हो सकती है. असम और मेघालय में 9-10 सितंबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने इन राज्यों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।


    दक्षिण भारत में हल्की बारिश

    दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं. 7 से 12 सितंबर के बीच तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तटीय कर्नाटक, केरल और माहे, कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल तथा तेलंगाना में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 7 से 10 सितंबर के दौरान आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका है. तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11-12 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 7 से 10 सितंबर के दौरान तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।


    मछुआरों के लिए भी चेतावनी

    मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों के लिए भी अलर्ट जारी किया है. अरब सागर में 11 सितंबर तक सोमालिया और ओमान तट के आसपास के कुछ हिस्सों में जाने से बचने की सलाह दी गई है. बंगाल की खाड़ी में 8 से 11 सितंबर के दौरान दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व श्रीलंका के पास समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतने को कहा गया है।

  • दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    नई दिल्ली ।दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को देश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में स्टार्टअप और इनक्यूबेशन नीति 2026 के क्रियान्वयन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में नीति को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और उद्यमियों के अनुकूल बनाने को लेकर सुझाव लिए गए।

    सरकार की योजना दिल्ली में ऐसा स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें युवाओं को अपने कारोबारी विचारों को विकसित करने के साथ शुरुआती स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिल सके। इसके लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में स्टार्टअप से संबंधित बुनियादी ढांचा विकसित करने तथा इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने की दिशा में रोडमैप तैयार किया गया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई कंपनियों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके साथ युवाओं के लिए नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसर तैयार करना भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्योग जगत से मिले सुझावों को नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने में उपयोगी माना जा रहा है।

    शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल के दौरान 10 हजार से अधिक स्टार्टअप को समर्थन और प्रोत्साहन देने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से युवाओं के लिए चार लाख से अधिक रोजगार अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलने से रोजगार के साथ नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    बैठक में शामिल स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने नीति निर्माण में उद्यमियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। जिप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश गुप्ता ने कहा कि नए संस्थापकों को मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता उपलब्ध कराने से युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए ऐसी सुविधाओं को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

    एस्ट्रोटॉक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गुप्ता ने भी सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्थापकों से सीधे सुझाव लेने की प्रक्रिया की सराहना की। उनके अनुसार, कारोबार से जुड़े लोगों के अनुभवों को नीति निर्माण में शामिल करने से सरकारी योजनाओं को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है। उन्होंने रोजगार सृजन को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए स्टार्टअप क्षेत्र को शुरुआती स्तर पर सहयोग देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    कैशकरो और अर्नकरो की सह-संस्थापक स्वाति भार्गवा ने कहा कि नीति निर्माण में वास्तविक उद्यमियों की भागीदारी से उनकी चुनौतियों और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इससे नीतियों को जमीन पर लागू करने में भी मदद मिल सकती है।

    दिल्ली सरकार की योजना में शिक्षा संस्थानों को स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ना अहम है। स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर उद्यमिता की जानकारी और अपने विचारों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे नए संस्थापकों के लिए मार्गदर्शन और नेटवर्किंग का आधार भी तैयार होगा।

    10 हजार स्टार्टअप और चार लाख से अधिक रोजगार का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी तंत्र और उद्योग जगत के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होगा। वित्तीय सहायता, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं को मजबूत करना इस नीति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली सरकार की पहल का उद्देश्य आने वाले वर्षों में राजधानी को नवाचार और उद्यमिता के लिए मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है।

  • SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

    SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

    दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • दिल्ली में भारी बारिश से हवाई यातायात प्रभावित, आईजीआई एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें हुईं लेट, यात्रियों को एडवाइजरी जारी

    दिल्ली में भारी बारिश से हवाई यातायात प्रभावित, आईजीआई एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें हुईं लेट, यात्रियों को एडवाइजरी जारी

    नई दिल्ली । दिल्ली में शनिवार को तेज बारिश और खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर भी देखने को मिला। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 सितंबर को 200 से अधिक उड़ानों के देरी से संचालित होने की जानकारी सामने आई। मौसम की स्थिति के कारण आने और जाने वाली कई उड़ानों के समय में बदलाव हुआ, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    खराब मौसम के चलते कुछ उड़ानों के दिल्ली पहुंचने में एक घंटे से अधिक की देरी हुई, जबकि कई प्रस्थान करने वाली उड़ानें करीब डेढ़ घंटे तक विलंबित रहीं। बारिश की स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी उड़ान की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

    एयरलाइंस ने यात्रियों से कहा है कि वे घर से एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर देख लें। मौसम में बदलाव के कारण उड़ानों के समय में अचानक परिवर्तन हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जानकारी हासिल करने की सलाह दी गई है।

    इंडिगो ने भी खराब मौसम को लेकर यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। एयरलाइन ने बताया कि दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों पर मौसम का असर पड़ सकता है और कुछ फ्लाइट्स देरी से संचालित हो सकती हैं। यात्रियों से अपील की गई कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि कर लें।

    बारिश का असर केवल एयरपोर्ट के रनवे और हवाई संचालन तक सीमित नहीं है। दिल्ली में कई इलाकों में तेज बारिश के कारण सड़कों पर यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई है। एयरपोर्ट की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की संख्या बढ़ने और ट्रैफिक धीमा होने की स्थिति में यात्रियों को सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट के लिए घर से पर्याप्त समय लेकर निकलें। रास्ते में बारिश और ट्रैफिक के कारण होने वाली संभावित देरी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त समय रखना जरूरी है। इससे उड़ान के लिए निर्धारित चेक-इन और बोर्डिंग समय पर एयरपोर्ट पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    एयरलाइंस और एयरपोर्ट से जुड़ी टीमें मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिस्थितियों के अनुसार उड़ानों के संचालन और समय में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। खराब मौसम की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ानों के संचालन से जुड़े फैसले लिए जाते हैं।

    दिल्ली में बारिश के कारण शनिवार को हवाई यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे केवल टिकट पर दिए गए निर्धारित समय के आधार पर यात्रा की योजना न बनाएं। एयरपोर्ट रवाना होने से पहले फ्लाइट का लाइव स्टेटस जांचना और मौसम तथा सड़क यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

    यात्रियों से एयरलाइंस ने सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। मौसम सामान्य होने के साथ उड़ानों का संचालन भी धीरे-धीरे नियमित होने की उम्मीद है, लेकिन जिन यात्रियों की शनिवार को दिल्ली से उड़ान है, उन्हें एयरपोर्ट जाने से पहले ताजा अपडेट जरूर देखना चाहिए।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर 23 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इस घटना के बाद से ही स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

    बताया गया है कि झड़प के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही थी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर पर हुई घटना और संजय कुमार को लगी चोट का जिक्र करता नजर आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग फिर तेज हो गई।

    शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की और मामले में देरी पर सवाल उठाए।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को कार्रवाई के लिए 72 घंटे का भरोसा दिया गया था। हालांकि इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

    स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने भी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस पहले मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। 3 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई में देरी के पीछे किसी राजनीतिक दबाव से भी इनकार किया था।

    अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके आधार पर आरोपों की स्थिति और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

    घटना के बाद से प्रदर्शन से जुड़े पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गिरफ्तारी के साथ अब यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।

  • BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….

    BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं।

    जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है।


    बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं

    बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है।

    तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं।


    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

  • दिल्ली में जुटेंगे ब्रिक्स देशों के नेता… पश्चिम एशिया संघर्ष पर टकराव की आशंका!

    दिल्ली में जुटेंगे ब्रिक्स देशों के नेता… पश्चिम एशिया संघर्ष पर टकराव की आशंका!


    नई दिल्ली।
    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia Conflict) को लेकर सदस्य देशों में टकराव की आशंका है लेकिन भारत (India) ने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। भारत की कोशिश है कि सभी मुद्दों पर सहमति से संयुक्त बयान जारी हो।

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित हो रहा। भारत की अध्यक्षता में चौथी बार आयोजित हो रहे सम्मेलन का विषय, ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है।

    सम्मेलन के लिए भारत ने बाकी 10 सदस्य देशों के अलावा दस पार्टनर देशों को भी आमंत्रित किया है। इसमें में बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाइलैंड, युगांडा, उजबेकिस्तान एवं वियतनाम शामिल हैं।


    बांग्लादेश को भी आमंत्रित किया गया

    इसके अलावा बिमस्टेक चेयर के नाते बांग्लादेश को भी आमंत्रित किया गया है। सूत्रों के अनुसार ईरान की कोशिश रहेगी कि संयुक्त बयान में अमेरिका और इजरायल के हमले की निंदा की जाए क्योंकि यह एक ब्रिक्स सदस्य देश की संप्रभुता पर हमला है।

    दूसरे, उसका आरोप है कि एक दूसरे सदस्य यूएई ने हमलों में अमेरिका का साथ दिया तथा अपनी भूमि का इस्तेमाल होने दिया। इसी के चलते मई में विदेश मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे पर बयान जारी नहीं हो सका। यह स्थिति शिखर सम्मेलन में भी हो सकती है।


    ब्रिक्स मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं

    विदेश मंत्रालय के अनुसार यूरो की तर्ज पर ब्रिक्स मुद्रा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। दरअसल, इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति आक्रामक हैं और वे बार-बार ब्रिक्स देशों को चेतावनी दे रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के दौरान लेन-देन की कीमत को कम करने के लिए व्यवहारिक तरीके अपनाने पर बातचीत चल रही है। इनमें स्थानीय मुद्रा में कारोबार जैसे विकल्प शामिल हैं। सितंबर में ब्रिक्स वित्त मंत्रियों की बैठक की जाएगी।


    भारत हमेशा कूटनीति के पक्ष में रहा

    सूत्रों ने कहा कि संयुक्त बयान में ईरान पर हमले की निंदा को शामिल करना संभव नहीं होगा। इसके पीछे वजह यह है कि एक तो ब्रिक्स सुरक्षा से जुड़ा मंच नहीं है। दूसरे, भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहेगा जिससे पश्चिम को नाराजगी हो। सूत्रों ने कहा कि भारत हमेशा कूटनीति के पक्ष में रहा है। सभी सदस्य चाहते हैं कि संकट जल्द खत्म हो और जलमार्गों से निर्बाध नौवहन शुरू हो। इस विषय को शामिल किया जा सकता है।

  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    नई दिल्ली । टाटा संस के चेयरमैन पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले एन चंद्रशेखरन का नाम अब केंद्र सरकार में संभावित मंत्री पद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहा है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह अटकल तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संभावित फेरबदल के दौरान चंद्रशेखरन को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।

    राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार चंद्रशेखरन को कॉर्पोरेट मामलों या शिक्षा जैसे किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर बात हो रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि उन्होंने इस तरह की चर्चा सुनी है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक नियुक्ति से जुड़ी अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    चंद्रशेखरन ने हाल में टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने की इच्छा जताई थी। बताया गया कि उन्होंने 12 अगस्त को इस्तीफा दिया था और उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त होना था। उनके इस्तीफे के पीछे टाटा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्यों के साथ मतभेदों की चर्चा भी सामने आई है।

    चंद्रशेखरन की उम्र 63 वर्ष है। राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में यह उम्र अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी में वरिष्ठ पदों के लिए 75 वर्ष की आयु सीमा का नियम चर्चा में रहा है, हालांकि अलग-अलग परिस्थितियों में इसके अपवाद भी देखे गए हैं। इसी वजह से उनकी उम्र को संभावित जिम्मेदारी के रास्ते में बड़ी बाधा के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

    शिक्षा मंत्रालय को लेकर चंद्रशेखरन का नाम सामने आने की चर्चा ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी कई नेताओं के पास रही है। स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान इस पद पर रह चुके हैं। अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में इन सभी को बाद में पद से हटना पड़ा।

    शिक्षा क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों ने भी संभावित बदलाव को लेकर चर्चाओं को बढ़ाया है। परीक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की जिम्मेदारी इंफोसिस के पूर्व सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को दिए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता रखने वाले गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को अधिक भूमिका देने पर विचार कर रही है।

    इसी संदर्भ में चंद्रशेखरन की संभावित नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो रही है। उद्योग और प्रबंधन क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्हें प्रशासनिक और आर्थिक मामलों की समझ रखने वाला व्यक्ति माना जाता है। यदि सरकार उन्हें कोई जिम्मेदारी देती है तो यह पारंपरिक राजनीतिक नियुक्तियों से अलग एक महत्वपूर्ण प्रयोग हो सकता है।

    फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अंतरिम रूप से प्रह्लाद जोशी के पास है। यह व्यवस्था उस समय बनी थी जब NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सवाल उठे और धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। ऐसे में अब निगाहें संभावित कैबिनेट फेरबदल और शिक्षा मंत्रालय के लिए सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। चंद्रशेखरन के नाम पर चल रही चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि उनकी नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।