Tag: delhi

  • बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा और पान मसाला बिक्री पर लगाई रोक

    बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा और पान मसाला बिक्री पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली में स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा, पान मसाला और अन्य किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने कहा कि बच्चों की आसान पहुंच से तंबाकू उत्पादों को दूर रखना सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है और इस दिशा में सभी संबंधित एजेंसियों को प्रभावी कदम उठाने होंगे।

    यह आदेश एक वेंडर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वैध वेंडिंग प्रमाणपत्र होने के बावजूद उसे बार-बार कारोबार करने से रोका जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अदालत को बताया कि संबंधित वेंडर स्कूल के निकट तंबाकू उत्पादों की बिक्री कर रहा था, जो बच्चों के हितों के विपरीत है। साथ ही निगम ने यह भी कहा कि वेंडिंग स्थल पर स्वच्छता संबंधी नियमों का भी पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा था।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल के आसपास तंबाकू, पान मसाला, गुटखा और सिगरेट जैसे उत्पादों की बिक्री स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि स्कूल ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन आते-जाते हैं और उनके आसपास इस प्रकार के उत्पादों की उपलब्धता उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए ऐसे मामलों में बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

    अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि संबंधित वेंडर को निर्धारित नियमों के अनुसार तीन दिन के भीतर वैकल्पिक वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक नया स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक वेंडर को न्यायालय द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करते हुए अपना कारोबार करने दिया जा सकता है। हालांकि यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसी भी स्थिति में स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं होगी।

    हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के निर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूलों के प्रवेश और निकास द्वार के आसपास अवरोध पैदा करने वाली गतिविधियों से बचना आवश्यक है। अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि स्कूल परिसरों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही वेंडरों को केवल निर्धारित स्थान पर ही कारोबार करने, अतिरिक्त सार्वजनिक स्थान पर कब्जा न करने और फुटपाथों पर अतिक्रमण से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

    न्यायालय ने यह भी दोहराया कि वेंडिंग स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना सभी विक्रेताओं की जिम्मेदारी है। डस्टबिन की व्यवस्था, साफ-सफाई और सार्वजनिक स्थानों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक होगा ताकि स्कूलों के आसपास का वातावरण सुरक्षित और स्वच्छ बना रहे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार रहेगा।

    यह फैसला बच्चों को तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता से दूर रखने और स्कूलों के आसपास स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैध वेंडरों के आजीविका के अधिकार और बच्चों के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वैकल्पिक वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

  • 44 साल के अभिनय सफर के बाद भी नई कहानियों की तलाश में अनु कपूर, 'उत्तर का पुत्तर' से फिर दिखेगा दिल्ली और संवेदनाओं का अनोखा संगम

    44 साल के अभिनय सफर के बाद भी नई कहानियों की तलाश में अनु कपूर, 'उत्तर का पुत्तर' से फिर दिखेगा दिल्ली और संवेदनाओं का अनोखा संगम

    नई दिल्ली । वरिष्ठ अभिनेता अनु कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘उत्तर का पुत्तर’ के माध्यम से एक बार फिर ऐसे किरदार में दिखाई देंगे, जो मनोरंजन के साथ जीवन का सार्थक संदेश भी प्रस्तुत करता है। इस फिल्म में वह एक अनुभवी भौतिकी शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं, जो विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता है, लेकिन निजी जीवन में वास्तु सिद्धांतों पर गहरा विश्वास रखता है। कहानी इसी विश्वास और वास्तविक जीवन के बीच पैदा होने वाली परिस्थितियों को हल्के-फुल्के अंदाज में प्रस्तुत करती है।

    अनु कपूर का कहना है कि फिल्म की कहानी पढ़ते ही उन्हें महसूस हुआ कि यह आम लोगों की सोच और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार कई लोग जीवन की समस्याओं का समाधान बाहरी परिस्थितियों, दिशाओं या मान्यताओं में खोजते हैं, जबकि वास्तविक परिवर्तन व्यक्ति के विचार, निर्णय और कर्म से आता है। यही संदेश फिल्म को अलग पहचान देता है और इसी कारण उन्होंने इस परियोजना का हिस्सा बनने का निर्णय लिया।

    उन्होंने बताया कि उनका किरदार विज्ञान का शिक्षक होने के बावजूद वास्तु में विश्वास रखता है। यह विरोधाभास ही कहानी को रोचक बनाता है। फिल्म किसी की आस्था का उपहास नहीं उड़ाती, बल्कि यह दिखाने का प्रयास करती है कि विश्वास अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सफलता और संतुलित जीवन का आधार ईमानदार प्रयास, सकारात्मक सोच और सही निर्णय ही होते हैं।

    लगभग चार दशक से अधिक लंबे अभिनय करियर में अनु कपूर ने अनेक यादगार फिल्मों में विविध भूमिकाएं निभाई हैं। उनका मानना है कि दर्शकों तक वही कहानियां सबसे अधिक पहुंचती हैं जिनमें मनोरंजन के साथ विचार करने की प्रेरणा भी हो। उनके अनुसार ‘उत्तर का पुत्तर’ भी हास्य के माध्यम से एक गंभीर सामाजिक संदेश देने का प्रयास करती है, जिससे हर वर्ग का दर्शक स्वयं को जोड़ सकेगा।

    फिल्म का बड़ा हिस्सा दिल्ली के प्रमुख स्थलों पर फिल्माया गया है। शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से जोड़ा गया है। करोल बाग, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट, कुतुब मीनार और अन्य प्रसिद्ध स्थानों की झलक फिल्म को वास्तविक वातावरण प्रदान करती है। निर्माताओं का मानना है कि दिल्ली की जीवंत ऊर्जा और स्थानीय परिवेश कहानी को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

    अनु कपूर के लिए दिल्ली केवल एक शहर नहीं बल्कि उनके अभिनय जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआत का केंद्र भी है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में बिताए गए वर्षों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहीं से उन्हें अभिनय की बारीकियां, अनुशासन और जीवन को गहराई से समझने की सीख मिली। मंडी हाउस, बंगाली मार्केट और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी अनेक यादें आज भी उनके मन में ताजा हैं और हर बार दिल्ली लौटने पर वे फिर जीवंत हो उठती हैं।

    उन्होंने कहा कि रंगमंच के दिनों में लोगों के व्यवहार, भावनाओं और समाज को करीब से देखने का अवसर मिला, जिसने उनके अभिनय को नई दिशा दी। यही अनुभव आज भी हर नए किरदार को निभाने में उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। उनका मानना है कि एक कलाकार के लिए निरंतर सीखना और स्वयं को नए विषयों के अनुरूप ढालना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

    फिल्म ‘उत्तर का पुत्तर’ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। निर्माताओं को उम्मीद है कि पारिवारिक मनोरंजन, हल्के हास्य और सकारात्मक संदेश का यह मिश्रण दर्शकों को पसंद आएगा। साथ ही दिल्ली की खूबसूरत लोकेशन और अनु कपूर का अनुभवी अभिनय फिल्म को एक अलग पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • 2020 दिल्ली दंगा साजिश केस में अदालत का बड़ा फैसला, UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी नामंजूर

    2020 दिल्ली दंगा साजिश केस में अदालत का बड़ा फैसला, UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी नामंजूर

    नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों आरोपियों ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज मामले में ट्रायल कोर्ट से नियमित जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की प्रकृति को देखते हुए फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

    यह मामला दिल्ली दंगा साजिश केस की एफआईआर संख्या 59/2020 से संबंधित है। इस प्रकरण की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की आड़ में व्यापक स्तर पर हिंसा भड़काने की कथित साजिश रची गई थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर UAPA तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

    अदालत के समक्ष दायर जमानत याचिकाओं में दोनों आरोपियों की ओर से नियमित जमानत देने का अनुरोध किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    दिल्ली दंगा साजिश मामला पिछले कई वर्षों से देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ विस्तृत जांच की गई है और विभिन्न चरणों में अदालत के समक्ष आरोपपत्र भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं। कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई बार जमानत और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई होती रही है, जिससे यह मामला लगातार न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।

    फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। हिंसा के दौरान अनेक मकान, दुकानें, वाहन और अन्य संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू की और कथित बड़ी साजिश के पहलू को भी जांच के दायरे में शामिल किया।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि UAPA के तहत दर्ज मामलों में जमानत संबंधी प्रावधान सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक कठोर होते हैं। ऐसे मामलों में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपों की गंभीरता और कानून में निर्धारित शर्तों के आधार पर निर्णय लेती है। इसलिए प्रत्येक जमानत याचिका का मूल्यांकन मामले के तथ्यों और न्यायिक मानकों के अनुरूप किया जाता है।

    अदालत के ताजा फैसले के बाद दोनों आरोपियों के लिए फिलहाल ट्रायल कोर्ट से राहत का रास्ता बंद हो गया है। हालांकि भारतीय न्यायिक व्यवस्था के तहत उनके पास उच्च न्यायालय अथवा अन्य सक्षम न्यायिक मंचों पर कानूनी उपाय अपनाने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। मामले की आगे की सुनवाई और ट्रायल निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा।

  • ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

    ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली। ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सामने आए मामलों के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऐसे मोबाइल ऐप, जिनके जरिए ब्लूटूथ समर्थित ई-रिक्शा बैटरियों को दूर से नियंत्रित किए जाने की आशंका जताई गई थी, उन्हें प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और तकनीकी खामियों के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर वाहन को अचानक बंद कर दे रहे हैं। इन वीडियो ने ई-रिक्शा चालकों, बैटरी डीलरों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। कई मामलों में चालक बीच सड़क पर वाहन बंद हो जाने के कारण असहाय नजर आए और उन्हें ई-रिक्शा को धक्का देकर सुरक्षित स्थान तक ले जाना पड़ा।

    घटनाओं के सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी जांच शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित मोबाइल ऐप वास्तव में किस प्रकार कार्य करते हैं और उनके फीचर्स का दुरुपयोग किस सीमा तक संभव है। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि ये ऐप ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से सीमित दूरी के भीतर मौजूद संगत लिथियम बैटरियों से वायरलेस तरीके से जुड़ सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए विकसित किए जाते हैं। इनके माध्यम से बैटरी का वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है, जिससे बैटरी की कार्यक्षमता और रखरखाव में सुविधा मिलती है। हालांकि यदि सुरक्षा मानकों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया जाए तो इसी नियंत्रण प्रणाली का गलत इस्तेमाल कर बैटरी के संचालन को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे वाहन अचानक रुक सकता है।

    सरकार ने इसी संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित ऐप को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है। यदि बैटरी प्रबंधन प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं होगी तो भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। इससे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा बैटरी तक पहुंच बनाने और नियंत्रण हासिल करने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। निर्माता कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी।

    ई-रिक्शा देश के अनेक शहरों में सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी कमजोरी को समय रहते दूर करना आवश्यक माना जा रहा है। सरकार की ताजा कार्रवाई को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में चालकों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

  • Delhi: तकिया काले खान इलाके में बाल्मीकि बस्ती में लगी भीषण आग…. कई झुग्गियां जलीं

    Delhi: तकिया काले खान इलाके में बाल्मीकि बस्ती में लगी भीषण आग…. कई झुग्गियां जलीं


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में एक बार फिर आग की घटना सामने आई है. मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (Maulana Azad Medical College) के पीछे, तकिया काले खान इलाके (Takiya Kale Khan area) की बाल्मीकि बस्ती (Valmiki Basti) की झुग्गियों में भीषण आग लग गई. घटना की जानकारी मिलते ही दमकल की 24 गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं।

    कड़ी मशक्कत के बाद अब आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है. राहत की बात ये है कि इस हादसे में फिलहाल किसी के हताहत होने या किसी की जान जाने की कोई खबर नहीं है।

    फायर ब्रिगेड अधिकारी ने बताया कि उन्हें 11 बजकर 22 मिनट पर आग की जानकारी मिली थी. आग की गंभीरता देखते हुए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बढ़ाई गईं और मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।


    रात करीब 11 बजे भड़की आग

    घटना के एक चश्मदीद मोहम्मद फैजान ने मीडिया को बताया, ‘रात के पौने 11 बज रहे थे. हम सामने बैठे थे और हमने आग की लपटें उठती हुई देखीं. तो हम इधर की तरफ भागकर आए तो देखा कि आग लग गई थी और आग ऐसी थी कि बुझाए नहीं बुझ रही थी. हम अंदर जा रहे थे तो उसकी लपटें हमारे ऊपर आ रही थीं।

    चश्मदीद ने आगे बताया, ‘एक बिल्डिंग में 8 लोग फंसे हुए थे, जिन्हें अंडरग्राउंड रास्ते से उन्हें निकाला गया. उनके बाहर आते ही सिलेंडर फटने लगे और आग बढ़ती चली गई. फिर फोन करने के 5 मिनट बाद ही एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड आ गईं. जब हम बाहर निकल रहे थे, तब तक आग बेकाबू हो चुकी थी. फिर बिजली के खंभों में आग लगने लगी और आग बढ़ते-बढ़ते चारों तरफ फैल गई।


    लकड़ियों की भारी मात्रा के चलते बेकाबू हुई आग

    दूसरे चश्मदीद मोहम्मद यूसुफ ने बताया, ‘जब आग लगी तो हमने हल्की आग समझी और ड्रमों से पानी डालकर बुझाने की कोशिश की. हमने ऊपर सो रहे लोगों को बचाया, फिर लकड़ियां हटवाईं. लेकिन लकड़ियां बहुत थीं, लकड़ी की और पक्की झुग्गियां थीं लेकिन आग काबू नहीं आई. फिर हमें फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग से बाहर निकाला क्योंकि बिजली के तारों में भी आग लगी थी. हमने 5-10 लोगों को बचाया।

  • पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । देश की राजधानी में एक बेहद हैरान करने वाला और अब तक का सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के परिवार और उनकी कंपनी को निशाना बनाकर साइबर अपराधियों ने करीब 7.8 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय चूना लगाया है। शातिर ठगों ने इस पूरे स्कैम को व्हाट्सएप मैसेंजर के जरिए बेहद चालाकी और लंबी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया। इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर कॉर्पोरेट जगत और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

    इस बेहद शातिर ठगी की शुरुआत नरेश गुजराल की कंपनी में कार्यरत एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी के मोबाइल पर आए एक अज्ञात व्हाट्सएप मैसेज से हुई। ठगों ने चालाकी का परिचय देते हुए उस अनजान नंबर पर पूर्व सांसद नरेश गुजराल की ही प्रोफाइल फोटो यानी डीपी लगा रखी थी। वरिष्ठ अधिकारी ने जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर अपने बॉस की तस्वीर देखी, उन्हें रत्ती भर भी अंदेशा नहीं हुआ कि यह कोई जालसाज हो सकता है। ठग ने खुद को नरेश गुजराल के रूप में पेश करते हुए बेहद कड़क और पेशेवर अंदाज में अधिकारी से चैट शुरू की और कंपनी के काम का हवाला देते हुए एक अज्ञात बैंक खाते में तुरंत एक बड़ी रकम ट्रांसफर करने का सख्त निर्देश दे दिया।

    व्हाट्सएप पर मिले इस कथित निर्देश के बाद अधिकारी ने बिना कोई प्रामाणिक जांच किए तुरंत पहली किश्त के रूप में करीब 1.5 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से बताए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। ठगों का हौसला यहीं नहीं रुका; उन्होंने अधिकारी के इसी अटूट भरोसे का फायदा उठाते हुए अगले चार दिनों तक लगातार सिलसिलेवार ढंग से अलग-अलग बहानों से और पैसों की मांग की। बॉस की डीपी और उनके बात करने के लहजे से पूरी तरह आश्वस्त अधिकारी लगातार ट्रांजैक्शन करता रहा, जिसके चलते महज 96 घंटों के भीतर कंपनी के खाते से कुल 7.8 करोड़ रुपये ठगों के हवाले कर दिए गए।

    इस अभूतपूर्व वित्तीय धोखाधड़ी के दौरान सुरक्षा के तमाम दावों के बीच बैंक और कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी सीएफओ भी गच्चा खा गए। लगातार हो रहे करोड़ों रुपये के इस बड़े लेन-देन को देखकर बैंक प्रबंधन को कुछ संदेह अवश्य हुआ था, जिसके बाद उन्होंने तत्काल कंपनी के सीएफओ से इस संबंध में संपर्क भी साधा। हालांकि, सीएफओ ने भी आंतरिक रूप से बिना किसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के यह मान लिया कि यह वित्तीय निर्देश स्वयं नरेश गुजराल की ओर से ही जारी किए गए हैं, जिसके कारण यह संदिग्ध ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के जारी रहा।

    इस पूरे काले खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब 16 जून को लगातार पैसे भेजने से परेशान वरिष्ठ अधिकारी को कुछ गंभीर संदेह हुआ। उन्होंने सीधे नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता लगातार बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दे रहे हैं। यह सुनते ही दीक्षा के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई भी संदेश नहीं भेजा था। परिवार को तुरंत साइबर फ्रॉड का अहसास हुआ और उन्होंने बिना समय गंवाए उसी दिन दिल्ली पुलिस में ई-एफआईआर दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल साइबर टीम आईएफएसओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तकनीकी जांच शुरू की और उस बैंक खाते को ट्रैक कर लिया, जिसमें पैसे भेजे गए थे। पुलिस की तत्परता के चलते ठगी गई कुल राशि में से करीब 4 करोड़ रुपये को उसी खाते में समय रहते फ्रीज कर दिया गया है, जबकि शेष राशि की रिकवरी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए देशव्यापी छापेमारी जारी है।

  • पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे को WhatsApp जालसाजों ने बनाया निशाना, 7.8 करोड़ की साइबर ठगी से मचा हड़कंप

    पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे को WhatsApp जालसाजों ने बनाया निशाना, 7.8 करोड़ की साइबर ठगी से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में सामने आए एक बड़े साइबर फ्रॉड ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन पहचान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के पुत्र और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश कुमार गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गए। जालसाजों ने बेहद सुनियोजित तरीके से उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस मामले में करीब 7.8 करोड़ रुपये की रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिसके बाद पुलिस और साइबर एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने नरेश गुजराल की तस्वीर का उपयोग कर व्हाट्सऐप पर एक फर्जी प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद ठगों ने उनके स्टाफ के एक सदस्य से संपर्क किया और खुद को नरेश गुजराल बताकर बातचीत शुरू की। संदेशों के माध्यम से यह विश्वास दिलाया गया कि वह किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल एक वित्तीय लेनदेन कराना आवश्यक है। इसी बहाने स्टाफ को एक निर्धारित बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए बड़ी राशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए।

    ठगों की योजना इतनी सुनियोजित थी कि शुरुआती स्तर पर किसी को संदेह नहीं हुआ। व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगी होने और संवाद की शैली विश्वसनीय लगने के कारण संबंधित कर्मचारी निर्देशों का पालन करता रहा। हालांकि बाद में लेनदेन की प्रकृति और रकम को लेकर संदेह पैदा हुआ, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ लिया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब संबंधित कर्मचारी ने पूरे मामले की जानकारी नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल को दी। उन्हें लेनदेन में कुछ असामान्य लगा और उन्होंने तत्काल अपने पिता से संपर्क कर भुगतान संबंधी निर्देशों की पुष्टि की। बातचीत के दौरान स्पष्ट हो गया कि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई संदेश या आदेश जारी नहीं किया था। इसके बाद परिवार को एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही साइबर विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों ने मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी। बैंक खातों और लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगालते हुए अधिकारियों ने तेजी से कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा समय रहते फ्रीज कराया जा सका। शुरुआती कार्रवाई में लगभग चार करोड़ रुपये को सुरक्षित कर लिया गया, जिससे संभावित नुकसान को काफी हद तक सीमित करने में मदद मिली।

    पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ठगों ने व्यक्तिगत जानकारी और संपर्क विवरण कैसे प्राप्त किए। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस धोखाधड़ी के पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है या नहीं। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संचार माध्यमों का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि आज के समय में केवल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर किसी की पहचान का दुरुपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय निर्देश को केवल मैसेज के आधार पर स्वीकार करने के बजाय स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है। विशेष रूप से बड़ी रकम के लेनदेन से पहले फोन कॉल या प्रत्यक्ष पुष्टि जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक हो गया है।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच यह प्रकरण आम लोगों और संस्थानों दोनों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सतर्कता, पहचान की पुष्टि और त्वरित शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जा रही है।

  • दिल्ली में अवैध निर्माण पर नगर निगम का हथौड़ा: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एमसीडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 217 इमारतें ध्वस्त और 237 संपत्तियां सील

    दिल्ली में अवैध निर्माण पर नगर निगम का हथौड़ा: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एमसीडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 217 इमारतें ध्वस्त और 237 संपत्तियां सील

    नई दिल्ली । दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में अवैध निर्माण और भवन नियमों के गंभीर उल्लंघन के खिलाफ अपने अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक और दंडात्मक अभियान को तेज कर दिया है। शहर के रिहाइशी और व्यावसायिक इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बनाई गई इमारतों पर निगम का डंडा पूरी ताकत से चला है। हाल ही में मालवीय नगर के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद नींद से जागे नागरिक प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित और निर्मित संपत्तियों को लक्षित करते हुए चौबीसों घंटे की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत तोड़फोड़ और सीलिंग का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

    प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को ही निगम की प्रवर्तन टीमों ने शहर के विभिन्न कोनों में चौदह अवैध संपत्तियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, जबकि पच्चीस अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मौके पर ही सील कर दिया गया। पिछले दस दिनों के भीतर राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमों ने पूरी दिल्ली में सात सौ सत्तर से अधिक संदिग्ध और अनियमित प्रतिष्ठानों के खिलाफ औचक निरीक्षण कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की है, जिससे नियम तोड़ने वाले भवन स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है।

    जून महीने की शुरुआत में हुए मालवीय नगर अग्निकांड को एक टर्निंग पॉइंट मानते हुए नगर निकाय ने पिछले दो हफ्तों के भीतर कुल दो सौ सत्रह अवैध संपत्तियों को मलबे में तब्दील कर दिया है, जबकि दो सौ सैंतीस अन्य विवादित संपत्तियों पर सरकारी ताला लटकाया जा चुका है। इस अभूतपूर्व कार्रवाई के दौरान निगम ने कानूनसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए अवैध निर्माण के मामलों में तीन सौ तीस कारण बताओ नोटिस और संपत्तियों को कुर्क या सील करने के लिए एक सौ एकावन वैधानिक नोटिस जारी किए हैं, जिसके साथ ही इक्यानवे पक्के विध्वंस आदेश भी पारित किए जा चुके हैं।

    राजस्व विभाग की दैनिक निरीक्षण रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के सभी बारह जोनों में विशेष टीमें लगातार ग्राउंड सर्वे कर रही हैं। उत्तरी जिले, नई दिल्ली जिले और दक्षिण-पश्चिम जिले में जिलाधिकारियों और निगम अभियंताओं की संयुक्त टीमों ने औचक निरीक्षण किए हैं, जहां पाई गई भारी अनियमितताओं के दस्तावेज नजफगढ़ जोन को आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए सौंपे गए हैं। इसी तरह दक्षिण-पूर्व और पश्चिमी जिलों में भी दर्जनों ऐसी इमारतों को चिन्हित किया गया है जो बिना स्वीकृत मानचित्र या बिना फायर एनओसी के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रही थीं।

    दिल्ली में नागरिक बुनियादी ढांचे की विफलता, अग्नि सुरक्षा नियमों के खुले उल्लंघन और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई के कारण पूर्व में हुए कई हादसों को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठकों में यह सख्त नीति तैयार की गई है। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दिल्ली में जहां भी सुरक्षा मानकों के साथ समझौता पाया जाएगा, वहां बुलडोजर की कार्रवाई और सीलिंग की प्रक्रिया को बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के अंजाम दिया जाता रहेगा।

  • दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट

    दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) और एनसीआर (NCR) में गुरुवार रात तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश (Strong Winds, Thunderstorms Rain) के साथ मौसम ने अचानक करवट ले ली. दिनभर की भीषण गर्मी (Scorching heat) और उमस के बाद आई बारिश ने लोगों को राहत दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर दिया।

    दिल्ली के कई इलाकों में देर रात तेज हवाएं चलीं, आसमान में घने बादल छा गए और बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और उनके झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है.

    IMD ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा खुले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति जान-माल के लिए खतरा पैदा कर सकती है और तत्काल सावधानी बरतना जरूरी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ी है. इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है.


    दिल्ली समेत इन राज्यों में आज भी बारिश

    शुक्रवार को भी उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहेगा. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में गरज-चमक, तेज हवाओं और धूल भरी आंधी की संभावना है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. केरल, तटीय कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, सिक्किम और पश्चिमी असम में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।

    हालांकि बारिश के बावजूद राजस्थान और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उमस के कारण महसूस किया जाने वाला तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

  • दिल्ली में धरना…. कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द को बताया सीट चोरी.. EC से भिड़ गए रमेश

    दिल्ली में धरना…. कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द को बताया सीट चोरी.. EC से भिड़ गए रमेश


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में होने वाले राज्य सभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन खारिज कर दिया गया है। उन पर आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने के आरोप हैं। इस घटना से नाराज कांग्रेस नेताओं ने जहां इसे सीट चोरी बताया है, वहीं इसकी शिकायत करने सीधे चुनाव आयोग के दफ्तर जा पहुंचे। मामले में शिकायत दर्ज करवाने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंगलवार (9 जून) की शाम नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचे तो उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इस दौरान कांग्रेस महासिव जयराम रमेश को आयोग के सुरक्षा अधिकारियों से भिड़ते हुए देखा गया। रमेश ने धौंस दिखाते हुए सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि कहानी मत बनाओ, 35 साल से सांसद हूं। अंदर आयोग के वेटिंग रूम में जाने दो, जब इसके बाद भी उन्हें इजाजत नहीं मिली तो कांग्रेस नेता मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए।

    जयराम रमेश के साथ कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सचिन पायलट तथा कुछ अन्य नेता मंगलवार देर शाम आयोग के मुख्यालय पहुंचे थे। कांग्रेस का आरोप है कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज कर दिया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। वेणुगोपाल ने संवाददाताओं ने कहा कि जब तक कांग्रेस नेताओं को आयोग के भीतर जाने की इजाजत नहीं मिलती, तब तक धरना जारी रहेगा। हालांकि, कुछ देर बाद आयोग की ओर से पार्टी के दो नेताओं को ज्ञापन सौंपने की अनुमति मिली और फिर वेणुगोपाल एवं बघेल ने अंदर जाकर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद घरना खत्म कर दिया गया।


    इंसाफ दीजिए, नहीं तो जाएंगे कोर्ट

    वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ”शाम 7.25 बजे हमने निर्वाचन आयोग को शिकायत दर्ज कराने के मकसद से मुलाकात के वक्त के लिए पत्र दिया। अब निर्वाचन आयोग के अंदर हमें जाने नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने सवाल किया, ”इस देश में क्या हो रहा है? क्या यह ‘बनाना रिपब्लिक’ है?” वेणुगोपाल का कहना था, ”हमें इंसाफ चाहिए, (हम) कानूनी कदम उठाएंगे, हम अदालत भी जाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि बिना किसी कारण के नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है।


    ऐसा पहले कभी नहीं हुआ

    वहीं सचिन पायलट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ न तो कोई मामला दर्ज है, न आरोप-पत्र दाखिल हुआ है और न ही किसी मामले में सजा हुई है, इसके बावजूद एक नोटिस मिलने का हवाला देकर नामांकन खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई षड्यंत्र है और इसपर निर्वाचन आयोग को ध्यान देना चाहिए। पायलट का कहना था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि एक राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन बिना किसी कारण के खारिज कर दिया गया हो।


    नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा की साजिश

    इससे पहले, वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है। उनके नामांकन में किसी भी त्रुटि या कोई जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण है और कांग्रेस से एक सीट छीनने का यह हताशापूर्ण प्रयास है।” उनका कहना था, ”जब उन्हें (भाजपा को) एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका (मीनाक्षी नटराजन का) नामांकन खारिज करवा दिया।”

    वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह संविधान और लोकतंत्र के प्रति भाजपा की खोखली प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वह हर कदम पर किसी न किसी तरह “वोट चोरी” पर आमादा है। कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ कानूनी तथा सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।”