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  • सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद

    सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद

    नई दिल्ली ।1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे सज्जन कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन के बाद परिवार के सदस्य अस्पताल पहुंचे।

    जानकारी के अनुसार, जेल में सज्जन कुमार के शरीर में कोई हलचल नहीं मिलने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे जग प्रवेश कुमार भी निधन की जानकारी मिलने के बाद सफदरजंग अस्पताल पहुंचे।

    सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे। दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में 1 नवंबर 1984 को हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इस घटना में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या हुई थी।

    इस मामले में सज्जन कुमार पर हिंसा के दौरान भीड़ को उकसाने का आरोप था। अदालत ने उन्हें दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, हत्या और अन्य संबंधित अपराधों की धाराओं के तहत दोषी माना था। मामले की सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया गया और इसके बाद उन्हें दोषी करार दिया गया।

    फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया, जहां वह अपनी सजा काट रहे थे। 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में यह उनके खिलाफ सुनाई गई महत्वपूर्ण सजा में शामिल थी।

    इससे पहले भी सज्जन कुमार को 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। वर्ष 2018 में उन्हें पांच सिखों की हत्या और एक धार्मिक स्थल को आग लगाए जाने से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस दोषसिद्धि के बाद उनके राजनीतिक जीवन को भी बड़ा झटका लगा था।

    सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति की शुरुआत की। शुरुआती दौर में वह दिल्ली नगर निगम के पार्षद बने और बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे दिल्ली की राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ता गया और वह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।

    सज्जन कुमार वर्ष 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा सांसद चुने गए। वह संजय गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते थे। कई वर्षों तक उन्होंने दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक पहचान बनाई।

    वर्ष 2018 में 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषसिद्धि के बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन मुख्य रूप से दंगा मामलों में चल रही न्यायिक प्रक्रिया और सजा से जुड़ा रहा।

    सज्जन कुमार के निधन के साथ उनके लंबे राजनीतिक सफर और 1984 के दंगा मामलों से जुड़े कानूनी घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। उनके निधन की खबर के बाद परिवार और समर्थकों के बीच शोक का माहौल है।

  • रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नई बसों के साथ राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगभग 5,000 तक पहुंच गई है। सरकार ने इस अवसर पर महिलाओं और छात्राओं के लिए विशेष बस सेवाओं की भी शुरुआत की है।

    नई व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए 28 अलग अलग रूटों पर 56 डेडिकेटेड लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें दिल्ली परिवहन निगम के अधिक मांग वाले 15 रूटों पर 30 विशेष ट्रिप संचालित होंगी। इन सेवाओं के माध्यम से आवासीय क्षेत्रों को नेहरू प्लेस, एम्स, साउथ एक्सटेंशन, आरके पुरम, कनॉट प्लेस, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय, करोल बाग, कश्मीरी गेट और शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख इलाकों से जोड़ा जाएगा।

    विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत 13 रूटों पर 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल ट्रिप संचालित की जाएंगी। इन सेवाओं में दिल्ली के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इनमें हिंदू कॉलेज, रामजस कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, हंसराज कॉलेज और श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स जैसे संस्थान शामिल हैं।

    नई बसों के बेड़े में अलग अलग क्षमता और आकार की इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इनमें 12 मीटर लंबी 88 इलेक्ट्रिक बसें और 9 मीटर लंबी 112 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनके शामिल होने के बाद दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में बसों की कुल संख्या करीब 6,800 तक पहुंचने की बात कही गई है। इसमें लगभग 4,938 इलेक्ट्रिक बसें और करीब 1,750 सीएनजी बसें शामिल हैं।

    सरकार के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति में सहायता के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। बसों को लो फ्लोर और वातानुकूलित बनाया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, छात्रों और अन्य यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।

    दिल्ली और हरियाणा के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए दिल्ली करनाल अंतरराज्यीय ई बस सेवा भी शुरू की जा रही है। इस मार्ग पर पांच नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित होंगी। करीब 133 किलोमीटर लंबे इस रूट पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन 10 10 फेरे चलाने की योजना है।

    इस पहल के साथ राजघाट डिपो एक में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की शुरुआत भी की गई है। इससे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण के साथ साथ स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    महिलाओं और छात्राओं के लिए निर्धारित विशेष सेवाओं से दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और व्यस्त इलाकों तक आवागमन आसान होने की उम्मीद है। वहीं अंतरराज्यीय ई बस सेवा से दिल्ली और करनाल के बीच यात्रियों को एक अतिरिक्त पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा।

  • जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी टीम से जुड़ा दिल्ली का एक मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार दीपके अपनी टीम के कुछ सदस्यों और समर्थकों के साथ दिल्ली की एक रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क में जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी को लेकर बैठक कर रहे थे। इसी दौरान सोसाइटी के कई निवासी वहां पहुंच गए और बैठक का विरोध किया।

    बताया गया कि दीपके के साथ सौरभ दास, आशुतोष रंका और कुछ समर्थक मौजूद थे। बैठक के दौरान आगामी कार्यक्रम की रणनीति पर चर्चा की जा रही थी। इसी बीच स्थानीय लोगों को वहां राजनीतिक बैठक होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई निवासी पार्क में पहुंचे और टीम से बैठक बंद कर वहां से जाने को कहा।

    स्थानीय लोगों की आपत्ति का आधार यह बताया गया कि सोसाइटी का पार्क निवासियों के घूमने और सामान्य गतिविधियों के लिए है। उनका कहना था कि पार्क में धरना या राजनीतिक प्रदर्शन की योजना नहीं बनाई जानी चाहिए। विरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिसकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और दीपके तथा उनके साथ मौजूद लोगों को पार्क से जाना पड़ा।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके जंतर-मंतर सीजन 2 शुरू करने की बात कह चुके हैं। इससे पहले जून में CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। उस दौरान संगठन की ओर से केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था। दीपके ने बाद में आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए थे।

    पार्क में बैठक करने की वजह को लेकर दीपके की ओर से कहा गया कि टीम को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स के साथ बैठक करनी थी। उनके अनुसार इसके लिए इनडोर स्थान तलाशने का प्रयास किया गया था, लेकिन हॉल उपलब्ध कराने में कठिनाई आई। उनका दावा है कि पहले एक हॉल की व्यवस्था हुई थी, लेकिन बाद में वहां भी बैठक की अनुमति नहीं मिली।

    इसके बाद टीम ने सोसाइटी के पार्क में बैठक करने का फैसला किया। दीपके के अनुसार बैठक के दौरान समर्थकों से आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इसी दौरान उन्होंने समर्थकों से पूछा कि अब किसके इस्तीफे की मांग की जानी चाहिए। समर्थकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया गया।

    पार्क में हुए विरोध के बाद दीपके ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को बैठक करने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसके पीछे बीजेपी का हाथ होने का दावा किया। उनका आरोप है कि लोगों को CJP से दूरी बनाए रखने के लिए डराया धमकाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    पूरे घटनाक्रम में एक तरफ सार्वजनिक स्थान के इस्तेमाल को लेकर सोसाइटी के निवासियों की आपत्ति सामने आई, तो दूसरी तरफ CJP ने इसे अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को रोकने की कोशिश बताया। मामले में किसी बड़ी झड़प की जानकारी नहीं है और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई।

    अभिजीत दीपके की टीम अब जंतर-मंतर सीजन 2 की आगे की रणनीति पर काम करने की बात कह रही है। ऐसे में दिल्ली में उनके अगले कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, सोसाइटी पार्क की घटना ने राजनीतिक बैठकों के लिए सार्वजनिक और निजी सामुदायिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी घमासान, केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप

    सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी घमासान, केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ACB की कार्रवाई के बाद राजधानी की राजनीति गरमा गई है। जांच एजेंसी ने आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदित प्रकाश राय भी शामिल हैं। कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।

    मामला दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं के विस्तार और सुधार से संबंधित बताया गया है। आरोप है कि इन परियोजनाओं के लिए जारी टेंडर की शर्तों में बदलाव किए गए और निर्धारित नियमों तथा प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर 11 मई 2024 को मामला दर्ज किया गया था।

    जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों तथा अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी क्रम में ACB ने छह लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी ने मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि वह दिल्ली सरकार में मंत्री रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं।

    आम आदमी पार्टी ने गिरफ्तारी की टाइमिंग और मामले में सत्येंद्र जैन की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने कहा कि जिस टेंडर को मामले का आधार बनाया जा रहा है, वह अक्टूबर 2022 में हुआ था। उनका दावा है कि उस समय सत्येंद्र जैन पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में थे। इसी आधार पर पार्टी ने जैन की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव का हिस्सा है। AAP नेताओं का कहना है कि विपक्ष से जुड़े नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। पार्टी ने मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

    सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जैन को दोबारा गिरफ्तार कराया गया है। केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन से जुड़े पुराने मामले का उल्लेख करते हुए जेल में उनके साथ कथित व्यवहार पर भी सवाल उठाए।

    केजरीवाल ने दावा किया कि जैन के खिलाफ पिछला मामला भी गलत था और मौजूदा मामले में भी जांच आगे बढ़ने के बाद आरोप सही साबित नहीं होंगे। उनके बयान के बाद AAP और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

    दूसरी ओर, ACB की कार्रवाई का आधार दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच है। जांच एजेंसी ने जिन आरोपों के आधार पर गिरफ्तारियां की हैं, उनकी पुष्टि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगी। फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका तथा टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी है।

    इस कार्रवाई ने दिल्ली में सरकारी टेंडर, भ्रष्टाचार के आरोप और जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है। अब मामले में आगे होने वाली जांच और अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि आरोपों से जुड़े तथ्यों और गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका के संबंध में क्या स्थिति सामने आती है।

  • कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    नई दिल्ली ।मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाली एक दुखद घटना राजधानी के कालकाजी थाना क्षेत्र में सामने आई है। यहां गोविंदपुरी एक्सटेंशन स्थित एक किराए के मकान में रहने वाले 64 वर्षीय संगीतकार रवि डे का शव उनके घर में लगभग पांच दिनों तक संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि मृतक के दो बेटे महज साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी पर लाजपत नगर में रहते हैं, लेकिन पिता की मृत्यु की सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने शुरुआत में आने से साफ इनकार कर दिया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों को बंद मकान से असहनीय बदबू आने लगी। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही कालकाजी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मकान का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर खोला। अंदर का दृश्य अत्यंत भयावह था, जहां बुजुर्ग का शव बाथरूम के पास गंभीर रूप से क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा हुआ था।

    पुलिस ने तत्काल परिजनों की जानकारी जुटाई और लाजपत नगर में रह रहे उनके दोनों बेटों से संपर्क साधकर घटना की जानकारी दी। हालांकि, बेटों ने मौके पर आने में कोई रुचि नहीं दिखाई और आने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया।

    पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार समझाने-बुझाने और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देने के बाद आखिरकार परिजन 16 अगस्त को अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया और अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।

    यह घटना समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा और टूटते पारिवारिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी समय-समय पर बुजुर्गों के एकाकीपन और अपनों से दूरी की ऐसी दुखद खबरें सामने आती रही हैं। कालकाजी थाना पुलिस ने इस पूरे मामले में केस दर्ज कर आसपास के लोगों और परिजनों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच पेजेशकियान की भारत यात्रा अहम, BRICS बैठक में क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर होगी चर्चा

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच पेजेशकियान की भारत यात्रा अहम, BRICS बैठक में क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली । ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सितंबर में भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत राजधानी में इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठक का आयोजन किया जा रहा है।

    पेजेशकियान की प्रस्तावित भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ईरानी राष्ट्रपति का नई दिल्ली पहुंचना भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर संबंध रहे हैं।

    भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS सम्मेलन की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रिजीलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनिबिलिटी’ रखी गई है। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन व्यवस्था, विकास, तकनीक और साझा चुनौतियों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ईरान की भागीदारी से पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियां भी बैठक के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हो सकती हैं।

    ईरान वर्ष 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। उसके साथ मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात भी संगठन के पूर्ण सदस्य बने थे। ईरान के शामिल होने के बाद BRICS का दायरा पश्चिम एशिया तक भी व्यापक हुआ है। भारत और ईरान दोनों के लिए संगठन के मंच पर आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर बढ़े हैं।

    मसूद पेजेशकियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली महत्वपूर्ण मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई थी। बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

    पेजेशकियान की आगामी भारत यात्रा के दौरान भी द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत की संभावना बनी हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार, चाबहार बंदरगाह, संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। भारत के लिए ईरान के साथ संपर्क बनाए रखना पश्चिम और मध्य एशिया तक पहुंच के दृष्टिकोण से भी उपयोगी माना जाता है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की संभावित कूटनीतिक भूमिका भी चर्चा का विषय बन सकती है। जून में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा था कि नई दिल्ली क्षेत्रीय संकट को कम करने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।

    ईरानी पक्ष का रुख रहा है कि संघर्ष का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से होना चाहिए। ऐसे में पेजेशकियान की नई दिल्ली यात्रा BRICS के बहुपक्षीय मंच के साथ-साथ भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संवाद का अवसर भी प्रदान कर सकती है।

    भारत की BRICS अध्यक्षता में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे दौर में आयोजित हो रहा है, जब वैश्विक राजनीति में पश्चिम एशिया का संकट, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। ईरानी राष्ट्रपति की भागीदारी से सम्मेलन में इन विषयों पर चर्चा को अतिरिक्त महत्व मिलने की संभावना है।

  • घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत

    घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत


    नई दिल्ली ।
    देशभर में रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 14 अगस्त को राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के साथ 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी आज स्थिर रखे गए हैं। ऐसे में दिल्ली से पटना और मुंबई से हैदराबाद तक ग्राहकों को आज सिलेंडर के लिए वही कीमत चुकानी होगी जो पहले लागू थी।

    दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये पर बना हुआ है। मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,691.50 रुपये में उपलब्ध है। नोएडा में घरेलू LPG की कीमत 939.50 रुपये, जबकि कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये है।

    जयपुर में घरेलू LPG सिलेंडर के लिए 945.50 रुपये देने होंगे। यहां 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,765.50 रुपये है। हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर का भाव 994 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,985 रुपये है। वहीं पटना में घरेलू LPG सिलेंडर 1,031.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3,018 रुपये में मिल रहा है।

    चंडीगढ़ में 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत 951.50 रुपये है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,760 रुपये है। कोलकाता में घरेलू LPG सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,872.50 रुपये में उपलब्ध है। अलग-अलग शहरों में कीमतों में अंतर स्थानीय करों और अन्य लागतों के कारण देखने को मिलता है।

    महीने की शुरुआत में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी। इसके बाद 14 अगस्त को कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू LPG की कीमतों को स्थिर रखने से आम परिवारों के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा है।

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत LPG की आपूर्ति को लेकर भी अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भारत अलग-अलग देशों से LPG आपूर्ति हासिल करने पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है।

    अमेरिका से LPG आयात भी भारत की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस वर्ष अगस्त तक अमेरिका से भारत को करीब 3.9 मिलियन टन LPG की आपूर्ति हो चुकी है। भारत 2027 के लिए अमेरिकी LPG की दीर्घकालिक आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

    सरकारी तेल कंपनियां संभावित आपूर्तिकर्ताओं और उनके प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रही हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतों, आयात लागत तथा वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतों में बदलाव हो सकता है। फिलहाल 14 अगस्त को देश के प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर के दाम स्थिर हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

  • दिल्ली में नितिन नवीन से मिले हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और आगामी रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा

    दिल्ली में नितिन नवीन से मिले हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और आगामी रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा

    नई दिल्ली / मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक में मध्य प्रदेश भाजपा संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें प्रदेश में पार्टी की मौजूदा गतिविधियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

    हेमंत खंडेलवाल और नितिन नवीन के बीच हुई मुलाकात को औपचारिक रूप से सौजन्य भेंट बताया गया है। हालांकि, बैठक के दौरान प्रदेश संगठन की गतिविधियों, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक कामकाज और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार साझा किए।

    मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन लगातार अपनी गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दे रहा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष की राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हुई बैठक को संगठन के अगले चरण की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में प्रदेश में चल रहे संगठनात्मक कार्यक्रमों की स्थिति और पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान प्रदेश संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ साझा की गई।

    मध्य प्रदेश भाजपा के सामने संगठनात्मक गतिविधियों को लगातार सक्रिय बनाए रखने के साथ आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच बेहतर समन्वय पार्टी की रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करने में मददगार हो सकता है। बैठक में इसी समन्वय और संगठनात्मक दिशा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

    मुलाकात के दौरान आगामी रणनीति को लेकर भी मंथन किया गया। प्रदेश में पार्टी की आगे की गतिविधियों, संगठनात्मक कार्यक्रमों और भविष्य में होने वाले अभियानों को लेकर दोनों नेताओं ने विचारों का आदान-प्रदान किया। हालांकि, बैठक के बाद किसी विशेष अभियान या कार्यक्रम को लेकर विस्तृत घोषणा सामने नहीं आई है।

    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल संगठन को मजबूत करने और पार्टी की गतिविधियों को गति देने पर लगातार जोर दे रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी बैठक से प्रदेश संगठन की प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर भी मिला। इसके साथ ही प्रदेश में संगठन के स्तर पर आगे की कार्ययोजना को लेकर मार्गदर्शन और समन्वय की संभावना बनी है।

    भाजपा के लिए प्रदेश संगठन की मजबूती का सीधा संबंध कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियों से है। इसलिए संगठनात्मक बैठकों में स्थानीय स्तर की गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और आगामी कार्यक्रमों की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर आगे की दिशा पर नजर रहेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई चर्चा से यह संकेत मिला है कि प्रदेश संगठन की गतिविधियों और आगामी रणनीति को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ नियमित समन्वय जारी है।

    बैठक का मुख्य फोकस संगठन को मजबूत करने, आगामी गतिविधियों की तैयारी और प्रदेश में पार्टी की कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर रहा। आने वाले समय में इन चर्चाओं के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर नई गतिविधियां और कार्यक्रम सामने आ सकते हैं।

  • पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने लोकसभा में अंतिम रिपोर्ट पेश की

    पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने लोकसभा में अंतिम रिपोर्ट पेश की

    नई दिल्ली ।हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ गठित जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश कर दी। समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सिद्ध पाया है। रिपोर्ट में अघोषित नकदी, साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही तथा जांच के दौरान दिए गए टालमटोल वाले और असंतोषजनक जवाब से जुड़े आरोप शामिल हैं।

    जांच समिति ने मामले से संबंधित कार्यवाही का रिकॉर्ड, जरूरी दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य सक्षम प्राधिकारी को भी सौंप दिए हैं। अब समिति की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच का औपचारिक चरण पूरा हो गया है।

    पहले आरोप के तहत नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवासीय परिसर के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले की जांच की गई। समिति के अनुसार, वहां 500 रुपये के नोटों के रूप में रखी गई नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।

    समिति ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अघोषित नकदी से संबंधित आरोप को सिद्ध माना। जांच में नकदी के संबंध में स्पष्ट और संतोषजनक जवाब का अभाव महत्वपूर्ण आधारों में शामिल रहा। इस निष्कर्ष के साथ समिति ने पहले आरोप को अपनी अंतिम रिपोर्ट में प्रमाणित माना है।

    दूसरा आरोप मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों के संरक्षण में कथित लापरवाही से संबंधित था। समिति ने पाया कि संबंधित स्टोररूम की स्थिति को कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले बदले जाने की बात सामने आई। इसके अलावा बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने को लेकर भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिल सका।

    समिति ने इस स्थिति को साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और विफलता के रूप में देखा। हालांकि, रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही का यह मतलब नहीं है कि जज ने स्वयं किसी नोट को हटाया था। आरोप का आधार साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित रखने में हुई विफलता से जुड़ा रहा।

    तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और जांच के दौरान उनके रुख से संबंधित था। समिति ने विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार, उनके जवाब में अपेक्षित स्पष्टता का अभाव था और उनका रुख टालमटोल वाला पाया गया।

    समिति ने स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस आरोप को भी सिद्ध माना। उसके अनुसार, मामले में जज से संस्थागत जिम्मेदारी के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक जवाब की अपेक्षा थी, लेकिन प्रस्तुत स्पष्टीकरण उस कसौटी पर खरा नहीं उतरा।

    तीनों आरोपों के सिद्ध पाए जाने के बाद समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट संबंधित प्रक्रिया के लिए सक्षम प्राधिकारी को सौंप दी है। अब रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी तथा संस्थागत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अंतिम कदम संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होंगे।

  • मानसून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, जानिए किन लोगों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है और कब लें चिकित्सा मदद

    मानसून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, जानिए किन लोगों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है और कब लें चिकित्सा मदद

    नई दिल्ली ।देश के कुछ हिस्सों में मानसून और बदलते मौसम के बीच इन्फ्लूएंजा ए H1N1, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दिल्ली में भी इस साल संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 6 अगस्त 2026 तक राजधानी में H1N1 के 1,349 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे। इसके बाद कुछ अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

    स्वाइन फ्लू एक वायरल श्वसन संक्रमण है, जिसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई दे सकते हैं। मानसून के दौरान मौसम में बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव और लोगों के बीच संपर्क बढ़ने जैसी परिस्थितियां श्वसन संक्रमण के फैलाव के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में बीमारी हल्की रहती है और उचित आराम, निगरानी तथा चिकित्सकीय सलाह से मरीज ठीक हो जाते हैं।

    स्वाइन फ्लू का खतरा सभी लोगों को हो सकता है, लेकिन कुछ समूहों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग विशेष सावधानी की श्रेणी में आते हैं। इनके अलावा पहले से फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, डायबिटीज या किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या वाले मरीजों में भी जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

    H1N1 संक्रमण होने पर अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक से संबंधित परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। कुछ मरीजों में लक्षण अपेक्षाकृत हल्के होते हैं, जबकि जोखिम वाले लोगों में बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। इसलिए लगातार बने रहने वाले या बढ़ते लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    विशेष रूप से सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, सीने में बेचैनी, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य रूप से ज्यादा नींद आना या तेजी से बिगड़ती तबीयत गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी वाले मरीजों में लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    स्वाइन फ्लू के उपचार में मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर चिकित्सा प्रबंधन किया जाता है। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर शुरुआती चरण में ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवा की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, दवा की जरूरत, उसकी मात्रा और उपचार की अवधि मरीज की स्थिति देखकर चिकित्सक तय करते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर खुद से एंटीवायरल या अन्य दवाएं लेना उचित नहीं है।

    संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा बीमार व्यक्ति के संपर्क में अनावश्यक रूप से आने से बचना महत्वपूर्ण है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति को भी दूसरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके।

    फ्लू से बचाव के लिए टीकाकरण भी एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे लेकर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बदलते मौसम के दौरान सावधानी, शुरुआती लक्षणों पर निगरानी और जोखिम वाले लोगों की समय पर चिकित्सकीय जांच संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकती है।