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  • Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    नई दिल्ली । देश के कई राज्यों में मानसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में लगातार बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं।

    राजस्थान के झालावाड़ में भारी बारिश के कारण मनोहर थाना क्षेत्र के झीकनी गांव स्थित सरकारी स्कूल में पानी भर गया। स्कूल में मौजूद 30 से अधिक विद्यार्थी पानी के बीच फंस गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। क्षेत्र में पानी की स्थिति को देखते हुए कालीसिंध बांध के 12 गेट भी खोले गए हैं।

    राजस्थान के बाड़मेर और बीकानेर में भी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बाड़मेर में रविवार रात करीब ढाई घंटे हुई तेज बारिश के बाद निचले इलाकों में दुकानों और घरों तक पानी पहुंच गया। श्रीडूंगरगढ़ में सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। कई प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर भी जलभराव हुआ।

    उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, शारदा और सरयू समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। फर्रुखाबाद और बिजनौर क्षेत्रों में गंगा का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। कई सड़कें डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है। करीब 40 गांवों के बाढ़ की चपेट में होने की जानकारी है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों तक पहुंचने वाले कई रास्ते जलमग्न हो गए हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के छह प्रवेश द्वारों में से मुख्य गंगा द्वार को भी बढ़ते जलस्तर के कारण बंद किया गया है। मणिकर्णिका घाट तक पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार और अन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

    मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर कई जिलों में देखने को मिल रहा है। भोपाल में लगातार बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया है। डिंडौरी में नर्मदा नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की स्थिति बनी हुई है। राजगढ़ में निर्माणाधीन पुल से एक कार बह जाने की घटना में नौ लोगों की मौत हुई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण 124 सड़कें बंद हैं और 255 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं। मंडी में सबसे अधिक 51 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें बंद होने से आवाजाही प्रभावित है। इस मानसून में प्रदेश में बारिश और अन्य संबंधित घटनाओं से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।

    सिक्किम में तेज बारिश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग दस पर मलबा आने से सड़क बंद हो गई। यह मार्ग सिक्किम को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

    उत्तराखंड के सभी जिलों में बारिश का दौर जारी है और चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट की स्थिति बताई गई है। वहीं बिहार के 12 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी है। ओडिशा में भी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना के कारण 16 अगस्त तक भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

    दिल्ली में भी अगले कुछ घंटों के दौरान तेज आंधी और भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को जलभराव, बाढ़ और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    नई दिल्ली । मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।

    रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा से पीछे हटने का सवाल नहीं है। छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर सदन में विस्तार से बातचीत होगी और उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब गृह मंत्री सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे तो विपक्षी सांसदों को उनका जवाब सुनना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही के दौरान व्यवधान पैदा नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए चर्चा को हंगामे में बदलने के बजाय संसदीय तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार चाहती है कि मुद्दे पर पूरी चर्चा हो और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

    वहीं विपक्ष ने छात्र आंदोलन के साथ अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि गृह मंत्री छात्रों के मामले में सदन में बयान देने के लिए तैयार हैं, तो राम मंदिर से जुड़े मामले पर भी उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। विपक्ष ने दोनों मुद्दों पर जवाब की मांग को संसद में जारी गतिरोध से जोड़ दिया है।

    संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सोमवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग की।

    हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और कार्यवाही सामान्य तरीके से चलाने में बाधा आई। इससे पहले विपक्षी दल संसद परिसर में भी अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन करते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद सोमवार को पानी और दूध लेकर परिसर में पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी कहा है कि जब तक गृह मंत्री दोनों प्रमुख मुद्दों पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक गतिरोध समाप्त होने की संभावना कम है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार संसद के भीतर इन मामलों पर स्पष्ट स्थिति रखे।

    अब सरकार की ओर से छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए सहमति जताए जाने के बाद सदन की अगली कार्यवाही पर सभी की नजरें हैं। हालांकि विपक्ष की दूसरी मांग को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या इन मुद्दों पर संसद में टकराव आगे भी जारी रहता है।

  • फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़

    फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़


    नई दिल्ली । 
    फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में हुई तेज टर्बुलेंस की घटना की जांच के बीच मामले में नया पहलू सामने आया है। 4 अगस्त को हुई इस घटना के बाद विमान के कैप्टन का साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन को लेकर पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक टेस्ट में कैप्टन के पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि एयरलाइन ने इस नतीजे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

    एयर इंडिया के मुताबिक संबंधित फ्लाइट के क्रू सदस्यों का तय नियमों के तहत फ्लाइट के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। एयरलाइन का कहना है कि इन टेस्ट के नतीजे उसके साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। एयरलाइन ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारियों की जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

    यह वही एयरबस A320 विमान था, जिसमें कुल 145 लोग सवार थे। यात्रा के दौरान ओडिशा के पास विमान को तेज एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। झटकों के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे की ओर चला गया। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी और कई लोगों को चोटें आईं।

    दिल्ली पहुंचने के बाद 13 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद विमान की उड़ान, टर्बुलेंस की प्रकृति और क्रू द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके समेत कई पहलुओं पर सवाल उठे। अब कैप्टन के कथित पॉजिटिव डोप टेस्ट ने जांच के दायरे में एक और महत्वपूर्ण पहलू जोड़ दिया है।

    नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टर्बुलेंस किस वजह से हुआ और क्या मौसम संबंधी परिस्थितियां इसकी वजह थीं। इसके अलावा विमान पर टर्बुलेंस के संभावित तकनीकी प्रभाव की भी जांच की जा रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि झटकों के कारण किसी हाइड्रोलिक सिस्टम पर असर पड़ा था या नहीं।

    जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि टर्बुलेंस के बाद विमान को दिल्ली तक ले जाना उचित निर्णय था या उसे किसी नजदीकी हवाई अड्डे पर उतारा जाना चाहिए था। वाराणसी और लखनऊ जैसे वैकल्पिक हवाई अड्डों पर विमान को डायवर्ट किए जाने की संभावना पर भी जांच में विचार किया जा रहा है।

    नियमों के तहत जांच पूरी होने तक संबंधित फ्लाइट क्रू को उड़ान ड्यूटी से हटाया जाता है। इस मामले में भी पायलट फिलहाल उड़ान नहीं भर रहे हैं। साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े डोप टेस्ट के नियमों के अनुसार पहली बार पॉजिटिव पाए जाने वाले क्रू सदस्य को नशामुक्ति और पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसके बाद निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट मिलने पर ही सक्रिय ड्यूटी पर लौटने की अनुमति मिल सकती है।

    अगर उड़ान ड्यूटी पर लौटने के बाद वही व्यक्ति दूसरी बार ऐसे पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसके लाइसेंस को तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में फ्लाइंग लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।

    अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुसार किसी भी लाइसेंसधारी पायलट को ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में उड़ान संचालन नहीं करना चाहिए, जिनसे सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ विमान उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अब इस मामले में टर्बुलेंस की वजह, विमान की तकनीकी स्थिति और कैप्टन के कथित डोप टेस्ट समेत सभी पहलुओं की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

  • राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब

    राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली । 
    रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों तथा उनके सरपरस्तों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

    राजनाथ सिंह दिल्ली कैंट स्थित सेना के बेस अस्पताल में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की नारी शक्ति के सिंदूर की रक्षा के लिए भी भारत किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    रक्षामंत्री ने इस अवसर पर आयोजित रक्तदान कार्यक्रम को ‘सिंदूर’ महारक्तदान यात्रा का नाम दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नाम अपने भीतर एक प्रतीकात्मक संदेश रखता है और रक्तदान का आयोजन मानवता, सहृदयता तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने कहा कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने या प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता। यह स्वस्थ मानव शरीर में ही बनता है और एक व्यक्ति ही दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त देकर उसकी सहायता कर सकता है। इसी वजह से रक्तदान को जीवनदान और महादान के रूप में देखा जाता है।

    राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान में सांगली से आए सैकड़ों खिलाड़ी भी रक्तदान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस पहल के माध्यम से एक ऐसा रक्त भंडार तैयार होगा, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

    रक्षामंत्री ने रक्तदान करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों की पहचान उनकी शारीरिक क्षमता से होती है, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की शक्ति का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों और जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस आयोजन में एथलीटों और अन्य प्रतिभागियों की ओर से करीब एक हजार यूनिट रक्तदान किया गया। राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय सेना के जवानों और उनके परिवारों के प्रति भरोसे का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय राष्ट्र उनके साथ खड़ा रहेगा और इससे बड़ी राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण मुश्किल है।

    रक्षामंत्री ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान को केवल किसी विशेष कार्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे समाज की नियमित संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की ओर से फिटनेस को लेकर दिए गए संदेश और खेलो इंडिया तथा फिटनेस से जुड़े अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि नागरिक जितने अधिक फिट रहेंगे, उतना ही वे समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे और रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकेंगे।

  • दिल्ली में बारिश से बढ़ा यमुना का जलस्तर, असम में बाढ़ से 98 मौतें, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    दिल्ली में बारिश से बढ़ा यमुना का जलस्तर, असम में बाढ़ से 98 मौतें, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय है। रविवार को दिल्ली समेत उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिणी राज्यों के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना है। राजधानी में पिछले आठ दिनों से बारिश का दौर जारी है, जिसके चलते यमुना नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, असम में बाढ़ के कारण अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश और केरल में भी बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

    कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी ओडिशा के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम 8 अगस्त को विकसित हुआ और अब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    रविवार को छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा असम, मेघालय, बिहार, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, केरल, तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी बारिश हो सकती है।

    दिल्ली में हल्की बारिश, यमुना का जलस्तर बढ़ा
    राजधानी दिल्ली में लगातार बारिश के चलते यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को दिल्ली में हल्की बारिश का अनुमान है। हरियाणा और पंजाब में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। लगातार हो रही बारिश के कारण राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है।

    ओडिशा-छत्तीसगढ़ में ऑरेंज अलर्ट
    IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा में भारी बारिश की संभावना है। इसे देखते हुए ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    हिमालयी राज्यों में भी अगले दिनों बारिश
    जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय रहेगा। रविवार को तटीय कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप और माहे में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में पूर्वी, मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

  • Independence Day 2026: आजादी का इतिहास जानना है तो इन ऐतिहासिक संग्रहालयों और स्थलों पर जरूर जाएं

    Independence Day 2026: आजादी का इतिहास जानना है तो इन ऐतिहासिक संग्रहालयों और स्थलों पर जरूर जाएं

    नई दिल्ली । 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। देश की स्वतंत्रता के पीछे लंबे समय तक चला संघर्ष, आंदोलनों और अनगिनत लोगों का त्याग जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने परिवार, सुख-सुविधाओं और निजी जीवन की परवाह किए बिना देश के लिए संघर्ष किया। कई लोगों ने जेल की यातनाएं सहीं और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

    आजादी के इस इतिहास को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय ऐतिहासिक स्थलों और संग्रहालयों में जाकर भी समझा जा सकता है। यहां स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज, चिट्ठियां, वस्तुएं और अन्य ऐतिहासिक सामग्री सुरक्षित रखी गई है। स्वतंत्रता दिवस के आसपास परिवार के साथ इन जगहों की यात्रा बच्चों के लिए भी इतिहास को करीब से समझने का अच्छा अवसर हो सकती है।

    दिल्ली में क्रांति मंदिर स्वतंत्रता आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस तथा आजाद हिंद फौज से जुड़े इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। यहां नेताजी से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज और विभिन्न ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित की गई है। कुछ घटनाओं और प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से भी प्रस्तुत किया गया है, जिससे आगंतुकों को उस दौर को समझने में मदद मिलती है।

    दिल्ली की गांधी स्मृति भी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। महात्मा गांधी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन यहां बिताए थे। परिसर में उनसे जुड़ी तस्वीरें, पत्र और उनके इस्तेमाल की गई वस्तुएं सुरक्षित हैं। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ी स्मृतियों को भी यहां संरक्षित किया गया है।

    अमृतसर का जलियांवाला बाग भी भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जगह है। 13 अप्रैल 1919 को यहां एकत्रित लोगों पर गोलीबारी की गई थी। इस घटना ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा प्रभाव डाला। आज यहां उस घटना से संबंधित जानकारी के साथ शहीद कुआं और दीवारों पर गोलीबारी के निशान देखे जा सकते हैं। यह स्थान उस दौर की कठिन परिस्थितियों और स्वतंत्रता संघर्ष की गंभीरता को समझने का अवसर देता है।

    कोलकाता का नेताजी भवन भी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को जानने के लिए महत्वपूर्ण है। यहां नेताजी की कार, निजी वस्तुएं, चिट्ठियां और आजाद हिंद फौज से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। संग्रहित सामग्री के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को समझा जा सकता है।

    अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की सेल्युलर जेल को भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। इसे आमतौर पर काला पानी के नाम से भी जाना जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान कई स्वतंत्रता सेनानियों को यहां कैद रखा गया था। जेल की पुरानी कोठरियां आज भी उस दौर की कठिन परिस्थितियों की याद दिलाती हैं।

    सेल्युलर जेल में आयोजित होने वाला लाइट एंड साउंड शो भी यहां के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को दर्शाता है। इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर इन स्थानों की यात्रा केवल घूमने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम को करीब से समझने का अवसर भी बन सकती है।

  • सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल

    सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल


    नई दिल्ली ।
    सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक हाईटेक नकल गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में उम्मीदवारों को नकल कराने का काम करता था।

    पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य ChatGPT, स्पाई कैमरा, GSM डिवाइस और नैनो ईयरबड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। परीक्षा केंद्र में बैठे उम्मीदवारों को ऐसे उपकरण दिए जाते थे, जिनकी मदद से प्रश्न बाहर बैठे लोगों तक पहुंचाए जाते थे और फिर उनके जवाब उम्मीदवारों तक पहुंचाए जाते थे।

    मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 26 जुलाई को सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान दो उम्मीदवारों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा गया। परीक्षा में नकल की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।

    जांच के दौरान पुलिस ने हेमंत शर्मा, आरती, सनी, दीपक, वेद प्रकाश, वीरेंद्र और सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इस गिरोह का मुख्य संचालक था। वह चंडीगढ़ में सरकारी विभाग में फायरमैन के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। आरोप है कि नौकरी के दौरान ही उसने परीक्षा में नकल कराने का नेटवर्क तैयार किया।

    पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह पहले सरकारी नौकरियों की भर्तियों पर नजर रखता था। इसके बाद नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं से संपर्क कर उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके लिए उम्मीदवारों से 8 से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी।

    गिरोह की कार्यप्रणाली काफी आधुनिक थी। उम्मीदवारों को विशेष GSM डिवाइस, मॉडिफाइड मोबाइल फोन, शर्ट के बटन में छिपा कैमरा और छोटे आकार के ईयरबड उपलब्ध कराए जाते थे। परीक्षा के दौरान कैमरे की मदद से प्रश्नों की तस्वीरें बाहर बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थीं।

    पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इन सवालों के जवाब तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद लेता था। इसके बाद तैयार जवाबों को नैनो ईयरबड के जरिए परीक्षा दे रहे उम्मीदवारों तक पहुंचाया जाता था। पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक कार में विशेष तकनीकी व्यवस्था भी बनाई गई थी।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डिजिटल एप्लीकेशन की मदद से मोबाइल स्क्रीन और कैमरे से भेजी गई तस्वीरों को नियंत्रित करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, GSM डिवाइस, नैनो ईयरबड, टैबलेट, कार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कई उम्मीदवारों को इस तरीके से परीक्षा पास कराने में मदद कर चुके हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े मामलों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। जांच एजेंसियां बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही हैं, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    पुलिस के अनुसार, यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके संपर्क अन्य राज्यों तक फैले होने की जानकारी मिली है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।

  • सीजेपी प्रदर्शन के दौरान बढ़ीं चोरी की वारदातें, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से सैकड़ों संदिग्ध पुलिस के रडार पर

    सीजेपी प्रदर्शन के दौरान बढ़ीं चोरी की वारदातें, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से सैकड़ों संदिग्ध पुलिस के रडार पर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन के दौरान आपराधिक तत्वों द्वारा चोरी और जेबतराशी की घटनाओं को अंजाम देने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 177 से अधिक चोरी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद दिल्ली पुलिस ने अत्याधुनिक फेस रिकॉग्निशन सिस्टम की मदद से व्यापक अभियान चलाकर 717 संदिग्धों को चिन्हित किया है।

    प्रदर्शन और मार्च के दौरान सबसे अधिक शिकायतें कीमती स्मार्टफोन्स, पर्स और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के गायब होने से संबंधित प्राप्त हुई हैं। विशेषकर जब जंतर-मंतर और आसपास के मुख्य मार्गों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा चरम पर था, तब शातिर जेबतराशों ने अव्यवस्था का फायदा उठाकर दर्जनों लोगों को अपना शिकार बनाया। पीड़ित नागरिकों की लगातार आती शिकायतों को देखते हुए स्थानीय थाना पुलिस और विशेष शाखाओं ने संयुक्त रूप से मामले की पड़ताल शुरू की है।

    जांच प्रक्रिया के तहत दर्ज एफआईआर और ऑनलाइन ई-दर्ज रिपोर्टों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई नागरिकों ने सीधे तौर पर चोरी का मामला दर्ज कराया, जबकि कुछ ने अपने कीमती सामान के खोने की सूचना दर्ज कराई है। प्राथमिक आकलन के आधार पर पुलिस का मानना है कि गुमशुदगी की अधिकांश घटनाएं संगठित जेबतराशी गिरोहों का परिणाम हो सकती हैं, जिसके चलते सभी मामलों का एक साथ अध्ययन किया जा रहा है।

    वारदातों को सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस ने तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया है। कार्यक्रम स्थल और पहुंच मार्गों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त फुटेज को फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्कैन किया गया। इस डिजिटल जांच के दौरान हजारों चेहरों का मिलान पुलिस के पुराने आपराधिक डेटाबेस से कराया गया, जिसके बाद 717 संदिग्ध व्यक्तियों की संदिग्ध उपस्थिति और संलिप्तता की पुष्टि हुई है।

    पहचाने गए संदिग्धों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई समर्पित टीमों का गठन किया गया है। चिन्हित किए गए आरोपियों के रिकॉर्ड और उनके संबंधित इलाकों की पुलिस इकाइयों के साथ डेटा साझा किया गया है। अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य चोरी किए गए मोबाइल और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की जल्द से जल्द बरामदगी सुनिश्चित करना तथा भीड़ का फायदा उठाने वाले ऐसे अंतरराज्यीय गिरोहों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

    फिलहाल तकनीकी साक्ष्यों और सीडीआर के आधार पर संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। सुरक्षा तंत्र ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने वाले नागरिकों से अपनी निजी वस्तुओं के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के उपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी धाराओं के तहत निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

  • आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    नई दिल्ली । पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से सीमा पार संचालित एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े दो अलग-अलग आतंकी मॉड्यूल को निष्क्रय करते हुए राजधानी दिल्ली में एक संभावित भीषण हमले की योजना को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार यह नेटवर्क काफी समय से देश के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में समानांतर गतिविधियां चलाने का प्रयास कर रहा था।

    प्रारंभिक तफ्तीश में इस बात की पुष्टि हुई है कि इस साजिश का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए छात्र आंदोलनकारियों को निशाना बनाना था। आतंकियों की मंशा भीड़भाड़ वाले इलाके में अफरा-तफरी और अशांति फैलाकर व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की थी। सुरक्षा बलों द्वारा सही समय पर की गई त्वरित और सटीक कार्रवाई के चलते किसी भी तरह की अनहोनी घटना को होने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस सिलसिले में विभिन्न स्थानों से कुल नौ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों में चार नाबालिग भी शामिल पाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल आकाओं द्वारा मोहरे के रूप में किया जा रहा था। तलाशी अभियान के दौरान संदिग्धों के कब्जे से कई अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गई हैं। पूछताछ में सामने आया है कि इन सभी को सरहद पार बैठे हैंडलरों के माध्यम से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त हो रहे थे।

    सुरक्षा तंत्र के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मॉड्यूल के कुछ सदस्यों ने पहले ही जंतर-मंतर पहुंचकर वहां का जायजा ले लिया था। उन्हें इस गतिविधि को अंजाम देने के लिए जरूरी संसाधन और सहायता मुहैया कराई जा रही थी। हालांकि, निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी के सटीक विश्लेषण के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर ली गई। इस घटनाक्रम के उपरांत दिल्ली समेत देश के अन्य संवेदनशील राज्यों में सुरक्षा ढांचा और मजबूत किया जा रहा है।

    जांच में यह पहलू भी उजागर हुआ है कि गिरोह के सदस्यों को विभिन्न रणनीतिक स्थानों और सुरक्षा बलों के काफिलों की गतिविधियों की रेकी करने का जिम्मा सौंपा गया था। वे अपने डिजिटल उपकरणों से गोपनीय वीडियो तैयार कर विदेशी हैंडलरों को भेज रहे थे। इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल एक तात्कालिक हमला करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक देश में अस्थिरता का माहौल बनाए रखना था, जिसके चलते अब जांच का दायरा कई अन्य राज्यों तक विस्तृत कर दिया गया है।

    मामले में नाबालिगों की मौजूदगी ने सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। गिरोह के सरगना युवाओं और किशोरों को भड़काकर तथा पैसों का लालच देकर गैरकानूनी गतिविधियों में धकेल रहे थे। इसके अलावा, अवैध बैंकिंग मार्गों और हवाला के माध्यम से पैसों के लेन-देन की बात भी सामने आई है। वित्तीय जांच एजेंसियां इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की तह तक जाने के लिए बैंक खातों और विदेशी संपर्कों की सूक्ष्म पड़ताल में जुटी हुई हैं।

    पुलिस और जांच एजेंसियां वर्तमान में गिरफ्तार किए गए सभी नौ आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर विस्तृत पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अंतर-राज्यीय और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का समय पर पर्दाफाश संभव हो सका है। आने वाले दिनों में इस मामले की विस्तृत जांच के आधार पर कई अन्य महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और नए तथ्य सामने आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

  • राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप

    राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्र-छात्राओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं के साथ कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के बावजूद उन्हें देशद्रोही कहा गया। उनका आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया गया और उन्हें शारीरिक चोटें भी आईं। छात्रा ने कहा कि वे केवल अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना चाहते थे।

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और वे केवल शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर दबाव बनाने और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष हो और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। एक छात्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की।

    एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी। वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके नाम और पहचान के आधार पर अलग व्यवहार किया गया। इन सभी आरोपों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि इस पूरे मामले पर आगे संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष का भी इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।