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  • संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    नई दिल्ली । संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर उन प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार कर रहे चिकित्सकों से भी पूरे घटनाक्रम तथा इलाज की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब संसद मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।

    संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवा राजधानी की सड़कों पर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, वहीं ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। झड़प के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे राजधानी के प्रमुख इलाकों में कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    घटनाक्रम के बाद सरकार की ओर से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिशें भी देखने को मिलीं। जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और शिकायतों को भी सुना था। इसके बाद घायलों से सीधे मिलना सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाने की पहल माना जा रहा है। अस्पताल में उन्होंने चिकित्सकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी और सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग उचित नहीं था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि संसद में ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होगा।

    वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक था ताकि किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़े प्रभाव की भी समीक्षा की जा रही है। राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम का आकलन कर रही हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    संसद मार्च के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर सरकार घायलों के उपचार और संवाद के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता के बीच उठाकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • जजों पर बेबुनियाद आरोपों के गंभीर परिणाम, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; गुलशन पाहुजा को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह

    जजों पर बेबुनियाद आरोपों के गंभीर परिणाम, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; गुलशन पाहुजा को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह

    नई दिल्ली । यूट्यूबर गुलशन पाहुजा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ बिना ठोस आधार लगाए जाने वाले आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायिक अधिकारी पर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप बिना पर्याप्त साक्ष्य के लगाना उचित नहीं है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने इस स्तर पर किसी भी प्रकार की तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को राहत के लिए पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।

    मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध लगाए जाने वाले आरोपों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी जज या न्यायिक अधिकारी पर बिना प्रमाण के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं तो इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और तथ्यों का विशेष महत्व होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। अदालत का कहना था कि याचिकाकर्ता पहले ही आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण भी कर चुके हैं। ऐसे में वर्तमान परिस्थिति में तत्काल राहत प्रदान करना उचित नहीं माना जा सकता।

    पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया कि पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा के निलंबन से जुड़ी अर्जी पर विचार किया था। हालांकि बाद में आत्मसमर्पण की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने न्यायिक आदेश का पालन करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि सजा के निलंबन या अन्य अंतरिम राहत की आवश्यकता है तो इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट के समक्ष आवेदन करना उचित कानूनी प्रक्रिया होगी।

    अदालत ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा आपराधिक अवमानना की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील अभी नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। इसके पीछे याचिका में मौजूद कुछ तकनीकी कमियों का समय पर निराकरण नहीं होना बताया गया। अदालत ने संकेत दिया कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अपील पर आगे विचार किया जा सकेगा।

    मामला उन वीडियो से जुड़ा है जिन्हें यूट्यूबर गुलशन पाहुजा ने अपने डिजिटल मंच पर प्रकाशित किया था। आरोप था कि इन वीडियो में न्यायपालिका और कुछ न्यायिक अधिकारियों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इस मामले में कुछ न्यायिक अधिकारियों ने अदालत का रुख करते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी। सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित वीडियो में शामिल दो अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली थी। उन्होंने कहा था कि वीडियो के प्रकाशन और उसके साथ लगाए गए शीर्षकों की जानकारी उन्हें नहीं थी। अदालत ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी, जबकि मुख्य मामले में यूट्यूबर के खिलाफ कार्रवाई जारी रही।

    यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की गरिमा और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को सामने लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर किए जाने वाले दावों और आरोपों के लिए तथ्यात्मक आधार और कानूनी जिम्मेदारी दोनों का पालन आवश्यक है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के बीच संतुलन बना रहे।

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  • जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल

    जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के प्रदर्शन को सोमवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का समर्थन मिला। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान अब केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष भी संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

    तुषार गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार यह अब केवल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि आंदोलन का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है।

    उन्होंने अपने परिवार की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद मार्च में शामिल हुए। उनके अनुसार दोनों ने परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लिया। तुषार गांधी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा बताया और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी किसी भी जन आंदोलन को व्यापक स्वरूप देती है।

    तुषार गांधी ने अपने वक्तव्य में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद जनभागीदारी के कारण आंदोलन जारी रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

    अपने वक्तव्य में तुषार गांधी ने अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म “3 इडियट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि सोनम वांगचुक के संदर्भ में “इडियट” शब्द का उपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित था कि फिल्म सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं थी।

    दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर अलग-अलग मत व्यक्त किए जा रहे हैं। तुषार गांधी के समर्थन और उनके परिवार की भागीदारी ने इस आंदोलन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और इससे जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं के बीच पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर नया घटनाक्रम सामने आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की और इसी दौरान एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

    जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह पुलिस की एक टीम सिविल ड्रेस में जंतर-मंतर पहुंची। चिकित्सकीय सलाह और बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक को एंबुलेंस के माध्यम से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। मौके पर कुछ देर तक बहस और नारेबाजी भी हुई, हालांकि बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

    अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की हालत पर डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर में डिहाइड्रेशन, पोटैशियम की कमी और कीटोन का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की स्थिति में शरीर में कीटोन बढ़ना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि इसके साथ गंभीर डिहाइड्रेशन भी हो तो किडनी और शरीर की चयापचय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण चिकित्सकों ने तत्काल उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक के परिजनों से भी उपचार शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से संभावित जटिलताओं को रोका जा सकता है। अस्पताल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक परीक्षण किए जा रहे हैं।

    इस बीच जंतर-मंतर पर वांगचुक के समर्थन में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान एक महिला अचानक उनके पास पहुंची और उन पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों ने तुरंत स्थिति संभाली। इस घटनाक्रम का वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा।

    घटना के बाद अभिजीत दीपके ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर स्याही से रंगे कपड़ों की तस्वीर और वीडियो साझा करते हुए लिखा, “नीला मेरा रंग है… जय भीम।” उनके इस संदेश पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने घटना की आलोचना की, जबकि अन्य लोगों ने पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग राजनीतिक टिप्पणियां कीं।

    पूरे घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन स्थल पर हुई स्याही फेंकने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के स्वरूप को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी जारी है और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी अनशन के बीच शनिवार को उस समय नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा दिया। लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उनकी सेहत लगातार कमजोर हो रही थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों और समर्थकों ने विरोध जताया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर दी।

    सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका अनशन देश में पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।

    शनिवार सुबह पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो रही थी और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। इससे पहले न्यायालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पर टिप्पणी की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

    वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

    इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजी दीपके ने घोषणा की कि वह स्वयं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।

    घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाना आवश्यक था, वहीं आंदोलन से जुड़े संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है, जबकि सभी की नजर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगामी दिशा पर बनी हुई है।

  • 20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि वह किसी भी हालत में उस दिन तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे और यदि मार्च सफल नहीं हुआ तो “भूत बनकर” लोगों के बीच वापस आएंगे। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों और समर्थकों के बीच वांगचुक की मौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

    वायरल वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वह 20 जुलाई तक स्वस्थ रहकर प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी कारण से यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर” वापस आएंगे। उनका यह बयान गंभीर घोषणा के बजाय एक हल्का-फुल्का और प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है, जिसे वहां मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए सुना।

    लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 20 दिनों में उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक कम हो चुका है। बीते 24 घंटों में भी वजन में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत भी सामने आए हैं। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं।

    इस बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर आंदोलनकारी अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के कारण जंतर-मंतर पर लगातार समर्थकों की आवाजाही बनी हुई है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समय-समय पर वहां पहुंच रहे हैं।

    सोनम वांगचुक का ताजा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है। उनका संदेश समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनकी सेहत पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन और प्रस्तावित संसद मार्च की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    नई दिल्ली ।राजधानी दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों को जनता के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शकूरपुर से इन स्वास्थ्य केंद्रों का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसके घर और कॉलोनी के नजदीक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नए केंद्रों के शुरू होने से राजधानी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और क्षमता दोनों में विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय स्तर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों का लगातार विस्तार किया जा रहा है, ताकि लोगों को छोटी बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि इन केंद्रों के माध्यम से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सरकार के अनुसार, राजधानी में वर्तमान समय में 415 से अधिक आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 1,100 से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के विस्तार के साथ दिल्ली के अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

    इन स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा लगभग 80 प्रकार की निशुल्क जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों का उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार केंद्र नहीं होंगे, बल्कि बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य जागरूकता और शुरुआती स्तर पर रोगों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समय पर चिकित्सा सलाह और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों की संभावना को शुरुआती स्तर पर ही कम किया जा सके।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बड़ी संख्या में अर्बन सब हेल्थ सेंटर और अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक मोहल्ले और कॉलोनी तक पहुंचाना है, ताकि लोगों को रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का कहना है कि दिल्ली में आधुनिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए लगातार बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन केंद्रों का विस्तार राजधानी की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देगा और लोगों को उनके घर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

  • 'रामायण' ट्रेलर लॉन्च से पहले रणबीर कपूर की तबीयत बिगड़ी, आंखों के संक्रमण के बावजूद इवेंट में होंगे शामिल

    'रामायण' ट्रेलर लॉन्च से पहले रणबीर कपूर की तबीयत बिगड़ी, आंखों के संक्रमण के बावजूद इवेंट में होंगे शामिल

    नई दिल्ली । अभिनेता रणबीर कपूर की तबीयत को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इन दिनों कंजंक्टिवाइटिस यानी आंखों के संक्रमण से जूझ रहे हैं। यह खबर ऐसे समय आई है जब उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ के मेगा ट्रेलर लॉन्च की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद रणबीर के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि फिल्म का भव्य ट्रेलर लॉन्च नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की गई है, जिसमें फिल्म से जुड़े प्रमुख कलाकारों और निर्माताओं की मौजूदगी रहने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणबीर कपूर भी अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद इस आयोजन में शामिल होकर अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता निभाने का फैसला कर चुके हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, आंखों के संक्रमण की शुरुआत सबसे पहले रणबीर कपूर की बेटी राहा को हुई थी। बाद में यह संक्रमण रणबीर तक भी पहुंच गया। हालांकि उनकी स्थिति गंभीर नहीं बताई जा रही है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान संक्रमण को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    ‘रामायण: पार्ट 1’ इस समय हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। लंबे समय से इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है और ट्रेलर लॉन्च को भी एक बड़े सिनेमाई आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से रणबीर की तबीयत से जुड़ी खबर ने प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    फिल्म के ट्रेलर को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से ‘यू’ सर्टिफिकेट मिल चुका है। इसका अर्थ है कि ट्रेलर सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त माना गया है। जानकारी के अनुसार, ट्रेलर के दो अलग-अलग संस्करण प्रमाणन के लिए भेजे गए थे, जिनकी अवधि लगभग चार मिनट के आसपास है। माना जा रहा है कि इनमें से एक संस्करण सिनेमाघरों में भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण नमित मल्होत्रा के नेतृत्व में किया जा रहा है। ट्रेलर लॉन्च समारोह में फिल्म की प्रमुख स्टारकास्ट के शामिल होने की संभावना है। हालांकि फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे यश और हनुमान के किरदार में नजर आने वाले सनी देओल की उपस्थिति को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ‘रामायण’ को दो भागों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। पहला भाग दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 में दर्शकों के सामने आएगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह बना हुआ है। अब सभी की नजर ट्रेलर लॉन्च और रणबीर कपूर की उपस्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि यह आयोजन फिल्म के प्रचार अभियान का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

  • दिल्ली में महिलाओं के लिए 56 स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों की तैयारी, व्यस्त रूटों पर मिलेगी सुरक्षित और सुविधाजनक सफर की सुविधा

    दिल्ली में महिलाओं के लिए 56 स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों की तैयारी, व्यस्त रूटों पर मिलेगी सुरक्षित और सुविधाजनक सफर की सुविधा


    नई दिल्ली ।
    राजधानी में महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस योजना के तहत दिल्ली परिवहन निगम महिलाओं के लिए 56 विशेष इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इनमें 30 लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बसें और 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल (यू-एसपीएल) बसें शामिल होंगी। इस पहल का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को दैनिक आवागमन के दौरान सुरक्षित, समयबद्ध और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना है।

    सरकार के अनुसार इन विशेष बसों का संचालन राजधानी के 28 प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर किया जाएगा। ऐसे रूटों का चयन किया गया है जहां कार्यालय जाने वाली महिलाओं और शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या अधिक रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में सामान्य बसों में बढ़ने वाली भीड़ को कम करने के साथ महिलाओं को अधिक भरोसेमंद परिवहन उपलब्ध कराना इस योजना की प्रमुख प्राथमिकता है।

    लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क राजधानी के प्रमुख कार्यालय क्षेत्रों, व्यावसायिक केंद्रों, संस्थागत परिसरों और महत्वपूर्ण मेट्रो इंटरचेंज को आपस में जोड़ेगा। इन बसों का संचालन विशेष रूप से कार्यालय आने-जाने वाली महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय समय के अनुसार किया जाएगा। सुबह लगभग 7:52 बजे से 9:00 बजे तक और शाम 4:32 बजे से 6:15 बजे तक इन बसों की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे पीक आवर्स के दौरान महिला यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।

    दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल बसें दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस तथा अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों को राजधानी के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों से जोड़ेंगी। इन बसों का लाभ नजफगढ़, रोहिणी, जनकपुरी, मुंडका, मयूर विहार, कालकाजी, पल्ला और धौलाकुआं सहित कई इलाकों में रहने वाली छात्राओं को मिलेगा। इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय आने-जाने वाली छात्राओं के लिए यात्रा अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनने की उम्मीद है।

    योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा से जुड़ा है। सभी 56 बसें पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस रहेंगी। इनमें सीसीटीवी कैमरे, ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से जुड़े पैनिक बटन, लो-फ्लोर रैंप जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आवश्यकता के अनुसार बस मार्शल या महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जा सकेगी। साथ ही इन बसों की अलग पहचान के लिए विशेष ब्रांडिंग की जाएगी, ताकि महिला यात्री इन्हें आसानी से पहचान सकें।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन विशेष बसों को पिंक स्मार्ट कार्ड प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से पात्र महिला यात्रियों को कैशलेस और निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे यात्रा प्रक्रिया अधिक सरल और डिजिटल बनेगी तथा महिलाओं को टिकट संबंधी औपचारिकताओं से भी राहत मिलेगी। इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से प्रदूषण में कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार यह विशेष बस नेटवर्क महिला यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की जा रही यह पहल राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाएगी। साथ ही इससे कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के दैनिक सफर को अधिक सहज, भरोसेमंद और आरामदायक बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

  • दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे

    दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर में रहने के लिहाज से सबसे अच्छे शहरों (Best Cities) की ताजा लिस्ट आ गई है। इस हफ्ते ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ ने अपनी नई ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026’ (Global Liveability Index 2026) रिपोर्ट जारी की है। इस सूचकांक में कुल 173 शहरों को वहां मौजूद सुविधाओं और रहने की स्थितियों के अलग-अलग पैमानों पर परखा गया है। अगर भारतीय शहरों की बात करें तो नई दिल्ली (New Delhi) को 120वां स्थान मिला है। वहीं, डेनमार्क का शहर कोपेनहेगन (Copenhagen) दुनिया के सबसे बेहतरीन और रहने लायक शहरों की लिस्ट में नंबर वन पर बरकरार है। कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना को पीछे छोड़ते हुए अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। द इकोनॉमिस्ट मैगजीन की सहयोगी संस्था ईआईयू ने दुनिया भर के 173 शहरों को शिक्षा, स्थिरता, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्कृति जैसे पैमानों पर परखा है।


    भारतीय शहरों की रैंकिंग

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रमुख शहरों की रैंकिंग कुछ इस प्रकार है:
    – नई दिल्ली: 120वें पायदान पर
    – मुंबई: 121वें पायदान पर
    – चेन्नई: 123वें पायदान पर
    – बेंगलुरु: 127वें पायदान पर

    गौर करने वाली बात यह है कि देश की राजधानी नई दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई की रैंकिंग में पिछले साल के मुकाबले कोई बदलाव नहीं आया है। ये दोनों शहर अपनी पुरानी स्थिति पर ही बने हुए हैं।


    दुनिया के 10 सबसे बेहतरीन शहर

    रहने के लिहाज से डेनमार्क के कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है:


    कोपेनहेगन क्यों है नंबर वन?

    रिपोर्ट के मुताबिक, कोपेनहेगन को स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के मामले में “परफेक्ट” स्कोर मिला है। ईआईयू के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस शहर की शानदार स्थिरता और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ बेहतरीन संस्कृति, पर्यावरण और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक सेवाओं के बेजोड़ तालमेल ने इसे शीर्ष पर बनाए रखा है।


    अमेरिका और कनाडा का क्या है हाल?

    टॉप-10 की ग्लोबल लिस्ट में उत्तरी अमेरिका का केवल एक शहर जगह बना पाया है, और वह है कनाडा का वैंकूवर (9वां स्थान)। अगर अमेरिकी शहरों की बात करें तो न्यूयॉर्क तीन पायदान की छलांग लगाकर 66वें नंबर पर आ गया है। अपराध दर में कमी और आतंकी घटनाओं के कम होते खतरे की वजह से इसके ‘स्टेबिलिटी स्कोर’ में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, दो पायदान नीचे खिसकने के बावजूद होनोलूलू (25वां स्थान) अभी भी अमेरिका का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला शहर बना हुआ है।


    एशिया के स्कोर में सुधार, यूरोप में ठहराव

    इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे शानदार क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि अब इसके औसत स्कोर में एक ठहराव आ गया है। इसके उलट, एशिया के औसत स्कोर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2025 की तुलना में इस बार चीन के 10 शहरों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि ईरान युद्ध की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हुई है।


    एशिया के हेल्थकेयर में सुधार से रैंकिंग उछली

    इस साल एशिया के औसत लिवेबिलिटी स्कोर में 0.3 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह 73.9 हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां की स्वास्थ्य सेवाओं (हेल्थकेयर) का मजबूत होना है। चीन के कई शहरों की रैंकिंग में भी उछाल आया है, जैसे फुझोऊ सात पायदान चढ़कर 93वें नंबर पर पहुंच गया है। ईआईयू की इंडस्ट्री डायरेक्टर एना निकोल्स के मुताबिक, एशिया के स्कोर में बढ़ोतरी का नतीजा यह है कि अब टॉप-20 में यूरोप के सात शहरों के साथ एशिया के नौ शहर शामिल हो गए हैं। वहीं, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से सबसे मजबूत क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसका औसत स्कोर थोड़ा गिरकर 91.7 हो गया है।


    युद्ध की वजह से खाड़ी देशों को भारी नुकसान

    ईरान युद्ध के नतीजे खाड़ी (गल्फ) क्षेत्र के शहरों की रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहे हैं, जहां स्थिरता स्कोर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मस्कट 14 पायदान गिरकर 123वें नंबर पर और कुवैत सिटी 12 स्थान खिसककर 105वें नंबर पर आ गया है। लिस्ट में सबसे नीचे सीरिया का दमिश्क शहर है, जो अभी भी दुनिया में रहने के लिहाज से सबसे खराब शहर माना गया है। इसके अलावा, युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान खिसककर 164वें और यूक्रेन का कीव 166वें नंबर पर पहुंच गया है।