Tag: delhi

  • यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 26 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। मुलाकात के कारण राज्य की राजनीति में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच इससे पहले भी इस साल मुलाकातें हो चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में मुलाकात के एजेंडे को लेकर सामने आई अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याओं को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक ने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बीच चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मुलाकात से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में शामिल हुए थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रूस, वियतनाम, बेलारूस, जापान और सिंगापुर सहित भागीदार देशों की कंपनियों के साथ बैठक की थी और प्रदेश में रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, विमानन, मेडिकल डिवाइस, कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया था।

    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की केंद्रीय नेतृत्व के साथ अन्य बैठकों की भी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात प्रस्तावित थी।

    योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के बीच उत्तर प्रदेश को लेकर संवाद पहले भी होता रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। इससे पहले 8 अगस्त 2026 को भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इन मुलाकातों की आधिकारिक जानकारी में मुख्य रूप से दोनों नेताओं के मिलने की पुष्टि की गई थी।

    वर्तमान दिल्ली दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों को इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    फिलहाल 26 सितंबर की मुलाकात में किन-किन विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बैठक को लेकर सामने आ रही चुनावी रणनीति संबंधी चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और यह मुलाकात उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है।

  • सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। सोने की कीमत में 390 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी का भाव करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।

    सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद 22 कैरेट गोल्ड का भाव अधिकांश प्रमुख शहरों में 1,39,060 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,750 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम हो गई है। अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर दर्ज किया गया है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में दोनों कैरेट के भाव में गिरावट के बाद ये कीमतें सामने आई हैं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,51,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें प्रमुख शहरों के करीब रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज कमजोरी आई है। पिछले दिन की तुलना में चांदी की कीमत में करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

    24 सितंबर को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में आई गिरावट से सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं के भाव नीचे आए हैं। अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर है, जबकि चांदी का भाव अधिकांश शहरों में करीब 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में लागू ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि शहर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

  • 200 करोड़ रंगदारी मामले में जैकलीन को आरोपी बनाने की मांग, अदालत ने याचिका खारिज की

    200 करोड़ रंगदारी मामले में जैकलीन को आरोपी बनाने की मांग, अदालत ने याचिका खारिज की

    नई दिल्ली । दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 200 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी से जुड़े मामले में अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस और लीपाक्षी एलावाड़ी को अतिरिक्त आरोपी के तौर पर तलब करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका सुकेश चंद्रशेखर के कथित करीबी सहयोगी नवास कक्कट की ओर से दायर की गई थी।

    विशेष न्यायाधीश गगनदीप सिंह की अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इसमें जिन लोगों को अतिरिक्त आरोपी बनाए जाने की मांग की गई है, उनके खिलाफ इस स्तर पर पर्याप्त आधार सामने नहीं आता। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों और उपलब्ध बयानों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया।

    याचिकाकर्ता का मामला मुख्य रूप से सह-आरोपी पिंकी ईरानी के उस बयान पर आधारित था, जो महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका की धारा 18 के तहत दर्ज किया गया था। अदालत ने इस बयान को आधार मानते हुए याचिका में लगाए गए दावों की जांच की।

    अदालत ने कहा कि यदि पिंकी ईरानी के बयान को पूरी तरह सही मान भी लिया जाए, तब भी उसमें उन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने नहीं आती, जिन्हें सुकेश के निर्देश पर महंगे उपहार दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में केवल इस बयान के आधार पर जैकलीन फर्नांडीस और लीपाक्षी एलावाड़ी को नए आरोपी के तौर पर तलब करने का आधार नहीं बनता।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने लीपाक्षी एलावाड़ी के बयान का भी उल्लेख किया। कोर्ट के मुताबिक, मामले में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने के लिए आवश्यक आधार इस स्तर पर स्थापित नहीं होता।

    नवास कक्कट की ओर से दायर याचिका में अपने ऊपर लगे आरोपों से संबंधित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया था। दावा किया गया कि वह सुकेश चंद्रशेखर के निर्देश पर कथित अपराध से जुड़ी रकम को अलग-अलग स्थानों पर रखने, उसे स्थानांतरित करने और उसके लेनदेन को संभालने में मदद करता था।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि बॉलीवुड से जुड़े लोगों के लिए महंगे उपहार और अन्य कीमती सामान खरीदने के भुगतान की व्यवस्था में भी उसकी भूमिका थी। इसके लिए बैंक खातों में लेनदेन से संबंधित प्रविष्टियां कराने की बात कही गई थी।

    मामले में जैकलीन फर्नांडीस का नाम पहले भी सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े विवाद में सामने आता रहा है। हालांकि, मौजूदा सुनवाई में अदालत के सामने सवाल यह था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर उन्हें इस मामले में अतिरिक्त आरोपी के तौर पर तलब किया जा सकता है या नहीं।

    अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए आधारों और संबंधित बयानों पर विचार करने के बाद माना कि अतिरिक्त आरोपी को तलब करने के लिए जरूरी कानूनी आधार मौजूद नहीं है। इसी के साथ जैकलीन फर्नांडीस और लीपाक्षी एलावाड़ी को आरोपी बनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई।

  • दिल्ली SIR में आडवाणी और जयशंकर समेत कई प्रमुख नामों को नोटिस, खरगे ने प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    दिल्ली SIR में आडवाणी और जयशंकर समेत कई प्रमुख नामों को नोटिस, खरगे ने प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस प्रक्रिया के तहत पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू समेत कई प्रमुख मतदाताओं को विवरणों में विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।

    चुनावी अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में SIR के तहत 33.13 लाख से अधिक मतदाताओं को उनके विवरण में मिली विसंगतियों के संबंध में नोटिस भेजे गए हैं। इनमें कई मामलों में मौजूदा विवरणों का वर्ष 2002 के पिछले गहन पुनरीक्षण के रिकॉर्ड से मेल नहीं होना सामने आया है। नोटिस जारी होने का अर्थ सीधे तौर पर मतदाता सूची से नाम हटाया जाना नहीं है।

    इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया अब दिल्ली तक पहुंच गई है और प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस इस प्रक्रिया को शुरुआत से ही त्रुटिपूर्ण क्यों बता रही थी।

    खरगे ने SIR को ‘फ्रैंकनस्टीन मॉन्स्टर’ बताते हुए कहा कि जिस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पहले से सवाल उठाती रही है, वह अब उन्हीं लोगों को प्रभावित कर रही है, जिनके राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रहे हैं। उन्होंने इस संदर्भ में लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर और अन्य प्रमुख लोगों को मिले नोटिस का उल्लेख किया।

    उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख जैसे लोगों को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। खरगे ने सवाल उठाया कि जब प्रमुख लोगों के मतदाता विवरण में भी विसंगतियां पाई जा रही हैं, तो SIR की प्रक्रिया को किस तरह देखा जाना चाहिए।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की ओर से ‘VIP’ या ‘मार्क्ड’ मतदाताओं के संदर्भ का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश की सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार व्यवस्था में अब VIP मतदाता और सामान्य मतदाता जैसी अलग-अलग श्रेणियां बनाई जा रही हैं।

    खरगे ने संविधान में निहित ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या किसी विशेष श्रेणी के मतदाता को अलग महत्व दिया जा सकता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि सभी नागरिकों का मताधिकार समान है तो मतदाता सूची की जांच और उससे जुड़े संचार में अलग-अलग व्यवहार क्यों दिखाई देता है।

    उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों का भी उल्लेख किया। खरगे के मुताबिक, जिन मामलों में अपील पर फैसला हो चुका है, उनमें 93 प्रतिशत मामलों में अपील करने वालों के पक्ष में निर्णय हुआ है। उनके अनुसार, इससे 1,13,943 लोगों के दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने का रास्ता साफ हुआ है।

    खरगे ने SIR के पहले तीन चरणों से जुड़े आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए, जो 94.78 करोड़ मतदाताओं की कुल संख्या का लगभग 14.61 प्रतिशत है।

    हालांकि, SIR के तहत नोटिस मिलने को लेकर चुनावी प्रक्रिया में यह स्पष्ट किया गया है कि नोटिस अंतिम कार्रवाई नहीं है। संबंधित मतदाताओं को अपने दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। दस्तावेजों के सत्यापन और आपत्तियों पर विचार के बाद ही मतदाता सूची में अंतिम निर्णय लिया जाता है।

    दिल्ली में SIR को लेकर जारी यह विवाद अब मतदाता सूची के सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दों तक पहुंच गया है। एक तरफ कांग्रेस ने प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं चुनावी प्रक्रिया के तहत नोटिस को विवरणों के सत्यापन का हिस्सा बताया जा रहा है।

  • त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    नई दिल्ली । देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ हवाई यात्रियों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। विमान टिकटों के किराए में अचानक तेज बढ़ोतरी का दावा किया गया है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और विमान कंपनियों के किराए पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की मांग की है।

    CTI के अनुसार, कुछ दिन पहले जिन घरेलू उड़ानों के टिकट अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध थे, उनके किराए में अब 50 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। संगठन का कहना है कि त्योहारी मौसम में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने वाली है और इसी दौरान किराए में इतनी बड़ी वृद्धि आम यात्रियों, खासकर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।

    त्योहारी सीजन गणपति महोत्सव से शुरू होकर दिवाली और छठ पूजा तक जारी रहने वाला है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों तक पहुंचने के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। बढ़ती मांग के बीच टिकटों के दाम में तेज वृद्धि यात्रियों के यात्रा बजट को प्रभावित कर सकती है।

    किराए में बढ़ोतरी का असर प्रमुख घरेलू रूटों पर भी बताया गया है। कुछ समय पहले दिल्ली और मुंबई के बीच आने-जाने का हवाई किराया करीब 10 हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 18 हजार से 25 हजार रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसी तरह दिल्ली-अहमदाबाद रूट पर पहले करीब 10 से 12 हजार रुपये का किराया था, जो अब 18 से 20 हजार रुपये तक बताया जा रहा है।

    दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर भी किराए में बड़ा अंतर सामने आया है। पहले जहां आने-जाने का टिकट करीब 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहीं अब इसके लिए 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दिल्ली-कोलकाता रूट पर भी पहले लगभग 11 हजार रुपये का किराया था, जो अब करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

    CTI ने विमान कंपनियों की क्षमता में कमी का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, सितंबर में घरेलू उड़ानों की सीट क्षमता में 5.6 फीसदी की कमी आई है। इसमें इंडिगो की क्षमता 4.5 फीसदी और एयर इंडिया की 8.8 फीसदी कम होने का दावा किया गया है। CTI का कहना है कि बड़ी विमान कंपनियों के पास घरेलू बाजार का बड़ा हिस्सा होने के कारण सीटों की उपलब्धता में कमी का सीधा असर किराए पर पड़ता है।

    इसके अलावा छोटे बच्चों के हवाई किराए में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया है। CTI के मुताबिक, तीन दिन से दो साल तक के बच्चों का शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि इस आयु वर्ग के बच्चों को अलग सीट उपलब्ध नहीं कराई जाती।

    CTI ने सरकार से मांग की है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत देने के लिए विमान कंपनियों के किराए की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएं।

  • दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से रह रहे 40 विदेशी नागरिकों की पहचान, 31 नाइजीरियाई नागरिक शामिल

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से रह रहे 40 विदेशी नागरिकों की पहचान, 31 नाइजीरियाई नागरिक शामिल

    नई दिल्ली । दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर पुलिस ने अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान द्वारका जिले में 43 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ जांच की गई। पुलिस के अनुसार, अभियान में 40 विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन किया गया। इनमें 30 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल हैं।

    जांच के दौरान सबसे अधिक संख्या नाइजीरियाई नागरिकों की सामने आई। कुल 31 नाइजीरियाई नागरिकों का सत्यापन किया गया, जिनमें 28 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा युगांडा के चार नागरिक भी जांच के दायरे में आए, जो सभी महिलाएं हैं। तंजानिया की तीन महिलाओं और आइवरी कोस्ट के दो पुरुष नागरिकों का भी सत्यापन किया गया।

    इस अभियान को अंजाम देने के लिए द्वारका जिले के सभी थानों और विशेष इकाइयों के पुलिसकर्मियों को मिलाकर 25 टीमों का गठन किया गया था। करीब 150 पुलिसकर्मी इस कार्रवाई में शामिल रहे। टीमों ने पहले से जुटाई गई स्थानीय जानकारी, फील्ड वेरिफिकेशन और मानव सूचना के आधार पर चिन्हित ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की।

    पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित विदेशी नागरिक दिल्ली में किस आधार पर रह रहे हैं। इसके साथ ही उनके पास वैध पासपोर्ट, वीजा और भारत में रहने के लिए जरूरी अन्य दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं, इसकी भी जांच की गई।

    सत्यापन के दौरान पुलिस ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि संबंधित विदेशी नागरिक अपने वीजा की शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा उनके दस्तावेजों की वैधता और उनके किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने की संभावना की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों और रहने की स्थिति की जांच के बाद नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य दिल्ली में विदेशी नागरिकों के वैध दस्तावेजों और उनके रहने की स्थिति का सत्यापन करना है।

    जांच के बाद 10 विदेशी नागरिकों के खिलाफ निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कार्रवाई की गई है। इनमें पांच नाइजीरियाई नागरिक, चार युगांडा के नागरिक और एक तंजानियाई नागरिक शामिल हैं। इन 10 लोगों में छह महिलाएं और चार पुरुष हैं।

    पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान अलग-अलग देशों के नागरिकों की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से इस बात पर रहा कि संबंधित विदेशी नागरिकों के पास भारत में रहने के लिए आवश्यक वैध दस्तावेज हैं या नहीं और वे वीजा से जुड़ी शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

    द्वारका जिले में एक साथ कई स्थानों पर की गई इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों और उनके भारत में रहने की स्थिति की जांच की। जिन मामलों में नियमों के उल्लंघन की जानकारी सामने आई है, उनमें आगे की कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया और एजेंसियों के समन्वय के आधार पर की जाएगी।

  • DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद ABVP के खाते में गए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। परिणाम सामने आने के बाद छात्र राजनीति के साथ-साथ राजनीतिक दलों के बीच भी इस चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की। उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस तरह डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी विजयी रहीं, जबकि संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की।

    उपाध्यक्ष पद का परिणाम हालांकि बाकी तीन पदों से अलग रहा। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। ABVP के ईशु मौर्या को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट प्राप्त हुए। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

    चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 रहा। चार केंद्रीय पदों के लिए हुए मुकाबले में ABVP ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि NSUI किसी भी केंद्रीय पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। वर्ष 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI चार प्रमुख पदों में से कोई भी पद हासिल नहीं कर पाई है।

    नतीजों के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने चुनाव को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष से जुड़े छात्र संगठनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। उनके अनुसार, अगर ये संगठन एक साथ चुनाव मैदान में उतरते तो परिणाम अलग हो सकता था और इंडिया गठबंधन से जुड़े पक्ष को अधिक सफलता मिल सकती थी।

    राजीव शुक्ला की प्रतिक्रिया के बाद DUSU चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चा का एक और पहलू सामने आया। उनके बयान का आधार यह था कि अलग-अलग उम्मीदवारों के मैदान में होने से संबंधित वोटों का बंटवारा हुआ और इसका चुनावी परिणाम पर असर पड़ा।

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय के केंद्रीय पैनल के चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों के लिए मुकाबला होता है। इन चुनावों में छात्र मुद्दों के साथ विभिन्न छात्र संगठनों की राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई देती है।

    इस बार चुनाव के दौरान छात्रों से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे। इनमें हॉस्टल, पीजी व्यवस्था और सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। चुनाव परिणामों ने एक ओर ABVP को तीन केंद्रीय पद दिए, वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने अलग तस्वीर पेश की।

    इस परिणाम के बाद छात्र संगठनों के बीच रणनीति और चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन और वोटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक नेताओं की व्याख्या उनके अपने आकलन पर आधारित है। DUSU के ताजा परिणामों ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अलग-अलग संगठनों की स्थिति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर 21 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

    दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर 21 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

    नई दिल्ली ।दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दायर याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई होगी। याचिका में दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों और इस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए नोटिस को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    31 अगस्त को SIR के तहत दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख नाम हटा दिए गए। नामों को हटाने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 43.32 लाख से अधिक मतदाता ऐसे पाए गए जो या तो स्थानांतरित हो चुके थे या अपने दर्ज पते पर मौजूद नहीं मिले।

    इसके अलावा करीब 2.82 लाख मतदाताओं को मृत पाया गया, जबकि 1.41 लाख से अधिक मतदाता एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। इन आंकड़ों के आधार पर बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। इस प्रक्रिया को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

    मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत के समक्ष दावा किया कि दिल्ली में करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से करीब 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

    याचिका में नोटिस से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नोटिस पाने वाले लोगों के नाम और मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस वजह से प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष होगी। अदालत ने इस मामले से संबंधित सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है। पीठ ने यह भी कहा कि अगले सप्ताह इस विषय से जुड़े कई मामले सूचीबद्ध हैं।

    SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट सूची में नाम शामिल नहीं होने से जुड़े मामलों पर आगे की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं होती और इसमें नाम से संबंधित आपत्ति या दावा दर्ज कराने की प्रक्रिया का प्रावधान रहता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से प्रभावित मतदाता अपना पक्ष रख सकते हैं।

    दिल्ली की मतदाता सूची में SIR के तहत हुए इस पुनरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों ने बड़ी संख्या में नामों के ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का मुद्दा सामने रखा है। एक तरफ नाम हटाए जाने के लिए स्थानांतरण, पते पर मौजूद नहीं होना, मृत्यु और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण जैसे कारण बताए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ याचिका में नोटिस पाने वाले लोगों और नाम हटाने के आधार को सार्वजनिक करने से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

    अब 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में इस मामले से जुड़े पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। सुनवाई के दौरान दिल्ली की SIR प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों और नोटिस से जुड़े मुद्दों पर अदालत के समक्ष पक्ष रखा जाएगा।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस तीन इटालियन नागरिक म्यूनिख रवाना, एयर इंडिया को नोटिस

    दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस तीन इटालियन नागरिक म्यूनिख रवाना, एयर इंडिया को नोटिस

    नई दिल्ली ।दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चूक का मामला सामने आया है। तीन इटालियन नागरिक बिना दिल्ली में अनिवार्य डिपार्चर इमिग्रेशन कराए ही विदेश रवाना हो गए। तीनों यात्री दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हुए। मामले के सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और संबंधित व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी गई है।

    मामला 3 और 4 सितंबर की दरमियानी रात का बताया गया है। तीनों इटालियन नागरिक अमृतसर से एयर इंडिया की हब-एंड-स्पोक उड़ान AI-1115 से दिल्ली पहुंचे थे। यह विमान रात करीब 12:50 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा। दिल्ली पहुंचने के बाद तीनों यात्रियों को डोमेस्टिक बोर्डिंग पास जारी किया गया था।

    इसके बावजूद यात्रियों को गलत तरीके से इंटरनेशनल ट्रांसफर क्षेत्र में पहुंचा दिया गया। वहां से वे सीधे अंतरराष्ट्रीय डिपार्चर जोन तक पहुंच गए। इसके बाद 4 सितंबर की तड़के करीब 1:45 बजे तीनों लुफ्थांसा की उड़ान LH-763 से म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने दिल्ली में डिपार्चर इमिग्रेशन क्लीयरेंस नहीं कराया।

    मामले में सबसे बड़ा सवाल एयरपोर्ट पर लागू मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP को लेकर उठ रहा है। यात्रियों के पास डोमेस्टिक बोर्डिंग पास होने के बावजूद वे इंटरनेशनल डिपार्चर क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए और उन्हें वहां जाने से रोकने वाली व्यवस्था ने काम क्यों नहीं किया, इसकी जांच की जा रही है।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन से संबंधित SOP में पांच व्यवस्थाओं के कथित उल्लंघन को चिन्हित किया है। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग रखना, केवल ‘I’ बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर डेस्क तक जाने की अनुमति देना और हब तथा स्पोक एयरपोर्ट पर चौबीसों घंटे नोडल अधिकारी एवं मॉनिटरिंग टीम की व्यवस्था शामिल है।

    मंत्रालय के अनुसार इस मामले में यात्रियों की निगरानी और उन्हें निर्धारित मार्ग से भेजने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर सकी। इसी वजह से तीन यात्री उस प्रक्रिया को पार कर अंतरराष्ट्रीय उड़ान तक पहुंच गए, जिसे उनके लिए लागू नहीं होना चाहिए था।

    घटना को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से जवाब मांगा है। एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी कर मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यात्रियों के गलत मार्ग से इंटरनेशनल डिपार्चर तक पहुंचने के पीछे किस स्तर पर चूक हुई।

    मामले में गृह मंत्रालय ने भी गंभीरता दिखाई है। गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की मंगलवार शाम एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में घटना से जुड़े सुरक्षा और इमिग्रेशन पहलुओं पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि तीनों यात्रियों को घरेलू बोर्डिंग पास के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में एयरलाइन स्टाफ की लापरवाही थी या एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा और संबंधित एजेंसियों की व्यवस्था में कमी रही।

    मामला सामने आने के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की आवाजाही, बोर्डिंग पास की जांच और घरेलू से अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और आगे ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • भारत-चीन हवाई संपर्क बहाली की दिशा में कदम, 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच रोजाना उड़ान चलेगी

    भारत-चीन हवाई संपर्क बहाली की दिशा में कदम, 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच रोजाना उड़ान चलेगी


    नई दिल्ली । 
    भारत और चीन के बीच लंबे समय से प्रभावित हवाई संपर्क अब दोबारा बहाल होने जा रहा है। चाइना सदर्न एयरलाइंस ने 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच नियमित सीधी यात्री उड़ान सेवा फिर शुरू करने का ऐलान किया है। करीब छह साल के अंतराल के बाद शुरू होने वाली यह सेवा दोनों देशों के बीच यात्रियों की आवाजाही के साथ व्यापार और पर्यटन संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे और BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दोनों देशों के बीच गतिविधियां बढ़ी हैं। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। ऐसे समय में दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क बहाल करने का फैसला आपसी संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के बाद प्रभावित हुई थीं। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा तनाव के कारण भी हवाई संपर्क सामान्य नहीं हो सका। लंबे समय तक सीधी उड़ानें बंद रहने से यात्रियों को दोनों देशों के बीच यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ा।

    चाइना सदर्न एयरलाइंस के मुताबिक, ग्वांगझू-नई दिल्ली मार्ग पर बोइंग 737 सीरीज के विमानों से रोजाना एक उड़ान संचालित की जाएगी। ग्वांगझू इंटरनेशनल एयरपोर्ट से विमान स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 3:35 बजे रवाना होगा और शाम 7 बजे नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेगा।

    नई दिल्ली से वापसी की उड़ान रात 8:20 बजे रवाना होगी। यह विमान अगले दिन तड़के 4:15 बजे ग्वांगझू एयरपोर्ट पर पहुंचेगा। इस तरह दोनों दिशाओं में नियमित सीधी सेवा उपलब्ध होने से भारत और चीन के बीच यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिलने की संभावना है।

    हवाई संपर्क बहाल होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही पर्यटन और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है। लंबे समय से बाधित सीधी उड़ान सेवा शुरू होने से यात्रियों के लिए दोनों देशों के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा आसान होगी।

    चाइना सदर्न एयरलाइंस के इस ऐलान के साथ वह दोनों देशों के बीच उड़ान सेवाएं बहाल करने वाली प्रमुख चीनी एयरलाइनों में शामिल हो गई है। इससे पहले चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस और एयर चाइना भी भारत और चीन के बीच अपनी सेवाएं बहाल कर चुकी हैं।

    भारत और चीन के बीच संबंधों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच हवाई संपर्क की बहाली को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच रोजाना सीधी उड़ान शुरू होने से दोनों देशों के नागरिकों, कारोबारियों और पर्यटकों के लिए सीधा संपर्क फिर मजबूत होने की दिशा में कदम बढ़ेगा।