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  • दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर 21 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

    दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर 21 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

    नई दिल्ली ।दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दायर याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई होगी। याचिका में दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों और इस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए नोटिस को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    31 अगस्त को SIR के तहत दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख नाम हटा दिए गए। नामों को हटाने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 43.32 लाख से अधिक मतदाता ऐसे पाए गए जो या तो स्थानांतरित हो चुके थे या अपने दर्ज पते पर मौजूद नहीं मिले।

    इसके अलावा करीब 2.82 लाख मतदाताओं को मृत पाया गया, जबकि 1.41 लाख से अधिक मतदाता एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। इन आंकड़ों के आधार पर बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। इस प्रक्रिया को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

    मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत के समक्ष दावा किया कि दिल्ली में करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से करीब 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

    याचिका में नोटिस से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नोटिस पाने वाले लोगों के नाम और मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस वजह से प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष होगी। अदालत ने इस मामले से संबंधित सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है। पीठ ने यह भी कहा कि अगले सप्ताह इस विषय से जुड़े कई मामले सूचीबद्ध हैं।

    SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट सूची में नाम शामिल नहीं होने से जुड़े मामलों पर आगे की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं होती और इसमें नाम से संबंधित आपत्ति या दावा दर्ज कराने की प्रक्रिया का प्रावधान रहता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से प्रभावित मतदाता अपना पक्ष रख सकते हैं।

    दिल्ली की मतदाता सूची में SIR के तहत हुए इस पुनरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों ने बड़ी संख्या में नामों के ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का मुद्दा सामने रखा है। एक तरफ नाम हटाए जाने के लिए स्थानांतरण, पते पर मौजूद नहीं होना, मृत्यु और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण जैसे कारण बताए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ याचिका में नोटिस पाने वाले लोगों और नाम हटाने के आधार को सार्वजनिक करने से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

    अब 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में इस मामले से जुड़े पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। सुनवाई के दौरान दिल्ली की SIR प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों और नोटिस से जुड़े मुद्दों पर अदालत के समक्ष पक्ष रखा जाएगा।

  • राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी के दो उम्मीदवारों को मिला सिर्फ एक-एक वोट, अपने ही वार्डों में नतीजे बने चर्चा का विषय

    राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी के दो उम्मीदवारों को मिला सिर्फ एक-एक वोट, अपने ही वार्डों में नतीजे बने चर्चा का विषय

    नई दिल्ली ।राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजों में दो वार्डों के परिणाम खास तौर पर चर्चा में हैं। राज्य के अलग-अलग निकायों में भारतीय जनता पार्टी के दो उम्मीदवारों को सिर्फ एक-एक वोट मिला। इनमें डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 से चुनाव लड़ने वाले कैलाशचंद और धौलपुर जिले की सैपऊ नगरपालिका के वार्ड 19 के उम्मीदवार लक्ष्मण कोली शामिल हैं।

    कैलाशचंद ने परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 से चुनाव लड़ा था। इस वार्ड में कांग्रेस उम्मीदवार हीना खानम ने 376 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार राशिद खान को 195 वोट मिले। बीजेपी उम्मीदवार कैलाशचंद के खाते में केवल एक वोट आया।

    कैलाशचंद ने बताया कि वह परबतसर नगरपालिका के वार्ड 12 के मतदाता हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें वार्ड 13 से उम्मीदवार बनाया था। उनके मुताबिक उन्हें सिर्फ एक वोट मिला और वह भी संभवतः वार्ड 13 के किसी मतदाता ने दिया। कैलाशचंद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका अपना वोट वार्ड 12 में है, जहां वह मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं।

    दूसरी ओर, धौलपुर जिले की सैपऊ नगरपालिका के वार्ड 19 में बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मण कोली को भी सिर्फ एक वोट मिला। इस वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार अजय कुमार ने 108 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार राजेश कुमार 69 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

    लक्ष्मण कोली के नतीजे को लेकर यह बात भी सामने आई कि उनके परिवार के कुछ सदस्य, जिनमें पत्नी, बेटा और बहू शामिल हैं, वार्ड 19 के मतदाता हैं। इसके बावजूद उनके खाते में सिर्फ एक वोट आया। हालांकि, मतदान की गोपनीयता के कारण यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि परिवार के किसी सदस्य ने उन्हें वोट नहीं दिया। मतदाता ने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती।

    राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों में चुनाव हुए थे। सोमवार को इनके नतीजे सामने आए। इन चुनावों में पार्षद के 10 हजार से अधिक पदों के लिए मतदान हुआ था। ऐसे में बीजेपी के दो उम्मीदवारों को केवल एक-एक वोट मिलने का मामला खास तौर पर चर्चा में आ गया।

    परबतसर नगरपालिका का परिणाम भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। यहां कुल 25 वार्ड हैं। कांग्रेस ने 13 वार्डों में जीत दर्ज कर साधारण बहुमत हासिल किया, जबकि बीजेपी 12 वार्डों में विजयी रही। कैलाशचंद का एक वोट वाला परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि राजस्थान में बीजेपी की सरकार है और इसके बावजूद पार्टी के उम्मीदवार को अपने चुनावी वार्ड में बेहद कम समर्थन मिला।

    दोनों मामलों में उपलब्ध नतीजे यह बताते हैं कि अलग-अलग वार्डों में उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर काफी बड़ा रहा। परबतसर में कांग्रेस की हीना खानम ने 376 वोट के साथ जीत हासिल की, जबकि सैपऊ में निर्दलीय अजय कुमार 108 वोट लेकर विजयी हुए। वहीं बीजेपी उम्मीदवारों के खाते में केवल एक-एक वोट दर्ज हुआ।

  • उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 9 अक्टूबर को सभी सीटों के नतीजे आएंगे

    उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 9 अक्टूबर को सभी सीटों के नतीजे आएंगे

    नई दिल्ली । भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की विधानसभा सीटों के साथ असम की एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना के बाद 9 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव की अधिसूचना 9 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित की गई है।

    उपचुनाव के तहत तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट और पश्चिम बंगाल की रेजीनगर तथा नंदीग्राम विधानसभा सीट भी इस चुनाव में शामिल हैं। इसके अलावा असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव की पूरी प्रक्रिया 11 अक्टूबर 2026 से पहले पूरी कर ली जाएगी।

    उपचुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित जिलों में चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है। आयोग ने मतदाता सूची को लेकर भी जानकारी दी है। उसके मुताबिक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित आवेदन नामांकन की समयसीमा से कम से कम 10 दिन पहले प्राप्त हो जाएं।

    मतदान के दौरान एपिक कार्ड मुख्य पहचान दस्तावेज बना रहेगा। इसके साथ मतदाता आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड और पासपोर्ट का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपेट के जरिए मतदान कराया जाएगा।

    असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के कारण हो रहा है। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को जारी की गई थी। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, जबकि नंदीग्राम विधानसभा सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। दोनों सीटों की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।

    तमिलनाडु की मदुरांतकम विधानसभा सीट मरागथम कुमारवेल के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। वहीं धारापुरम विधानसभा सीट पी. सत्यबामा के इस्तीफे के चलते रिक्त हुई। इन दोनों सीटों की अंतिम मतदाता सूची 23 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।

    पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की गई थी। अब निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी रिक्त सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और 9 अक्टूबर को परिणाम सामने आएंगे।

    नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी और 16 सितंबर तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने का कार्यक्रम तय किया है। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है और मतदान के लिए ईवीएम तथा वीवीपेट का इस्तेमाल किया जाएगा।

  • भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव जीतकर नवंबर मुकाबले का रास्ता साफ किया

    भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव जीतकर नवंबर मुकाबले का रास्ता साफ किया


    नई दिल्ली ।
    भारतीय मूल की पिया डांडिया ने अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राथमिक चुनाव जीत लिया है। पूर्व स्कूल प्रिंसिपल डांडिया ने वकील कायसिया अर्ली को हराकर नवंबर में होने वाले आम चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ कर लिया है। प्राथमिक चुनाव में डांडिया को 68.6 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अर्ली को 31.4 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।

    डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने प्राथमिक चुनाव में जीत के बाद पिया डांडिया को बधाई दी। पार्टी ने उनके लंबे समय से शिक्षा और समुदाय से जुड़े नेतृत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वह लोगों के लिए नए अवसर बढ़ाने और कामकाजी परिवारों के हितों के लिए काम करने के उद्देश्य से चुनाव मैदान में उतरी हैं।

    अब पिया डांडिया का मुकाबला नवंबर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार पूर्व नौसैनिक कैसी असकर से होगा। यह चुनाव फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला होगा। इस सीट को चुनावी क्षेत्र के नए परिसीमन के बाद बनाया गया है और प्राथमिक चुनाव के समय यहां कोई मौजूदा सांसद चुनाव मैदान में नहीं था।

    पिया डांडिया इससे पहले फ्लोरिडा के 21वें जिले से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ब्रायन मास्ट को चुनौती देने की कोशिश कर चुकी हैं। ब्रायन मास्ट विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। बाद में डांडिया दक्षिण फ्लोरिडा के 22वें जिले में चली गईं और उन्होंने इसी क्षेत्र से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी की।

    डांडिया की राजनीतिक पृष्ठभूमि से पहले उनका पेशेवर जीवन शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा रहा है। वह अमेरिका में हाई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। शिक्षा क्षेत्र में काम करने के दौरान छात्रों और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उनका अनुभव रहा है। इसी पृष्ठभूमि को वह अपने राजनीतिक अभियान में भी प्रमुखता से सामने रख रही हैं।

    पिया डांडिया के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के कारण उनकी राजनीतिक यात्रा अमेरिकी समुदाय के साथ-साथ भारतीय मूल के लोगों के बीच भी रुचि का विषय बनी हुई है। प्राथमिक चुनाव में मिली स्पष्ट जीत ने नवंबर के आम चुनाव के लिए उनकी स्थिति मजबूत की है।

    जीत के बाद डांडिया ने अपने संदेश में अभियान पर भरोसा जताने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह अपने छात्रों, अपने बेटे और जिले में बड़े हो रहे उन बच्चों के लिए चुनाव में उतरी हैं, जो बेहतर भविष्य के हकदार हैं। उन्होंने अपने अभियान को आम परिवारों की आर्थिक चुनौतियों से जोड़ते हुए खर्च कम करने और भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कही।

    डांडिया ने कहा कि उनका उद्देश्य वॉशिंगटन को फिर से आम लोगों के लिए काम करने वाला बनाना है। उनके अभियान में परिवारों के लिए रोजमर्रा के खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास की लागत जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी इन्हीं मुद्दों को दक्षिण फ्लोरिडा के परिवारों से जोड़ते हुए डांडिया के समर्थन को आगे बढ़ाने की बात कही है।

    नवंबर में होने वाला चुनाव पिया डांडिया के राजनीतिक करियर के लिए अगली बड़ी परीक्षा होगा। प्राथमिक चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के बाद अब उन्हें रिपब्लिकन उम्मीदवार कैसी असकर का सामना करना है। चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि फ्लोरिडा का 22वां कांग्रेस क्षेत्र अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में किस दल का प्रतिनिधित्व करेगा। डांडिया की जीत के साथ भारतीय मूल के उम्मीदवार के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है।

  • PoK में विरोध के बीच तीसरे चरण का मतदान टला, PML-N ने 24 सीटें जीतीं और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.

    PoK में विरोध के बीच तीसरे चरण का मतदान टला, PML-N ने 24 सीटें जीतीं और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 10 अगस्त को होने वाले विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। तीसरे चरण में 11 सीटों पर मतदान होना था। चुनाव टलने से पहले दो चरणों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज यानी PML-N ने कुल 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन नतीजों के बाद पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई थी, लेकिन तीसरे चरण की प्रक्रिया रुकने से चुनावी घटनाक्रम फिलहाल प्रभावित हुआ है।

    PoK विधानसभा में कुल 45 सीटें हैं। पहले दो चरणों में PML-N के पक्ष में आए नतीजों ने पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, तीसरे चरण के मतदान से पहले क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन और तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसी कारण सोमवार को होने वाला मतदान टालने का फैसला लिया गया।

    चुनावी प्रक्रिया के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं। पहले चरण के चुनाव के दौरान अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई। कई स्थानों पर मतदान केंद्रों के आसपास झड़पों और विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनावी प्रक्रिया में धांधली के आरोप भी लगाए गए।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। संगठन के समर्थकों ने सरकार की नीतियों और चुनावी व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज कराया है। संगठन की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में लोगों की मौत हुई। हालांकि, इन आरोपों को संबंधित घटनाक्रम के संदर्भ में जांच और स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत है।

    JAAC की मांगें केवल महंगाई और स्थानीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं हैं। संगठन अब PoK को अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकार देने की मांग भी उठा रहा है। उसकी प्रमुख मांग विधानसभा की 45 सीटों में से 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की है।

    ये 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं। JAAC का तर्क है कि PoK से बाहर रहने वाले लोगों को क्षेत्र की सरकार चुनने की प्रक्रिया में इस तरह की भूमिका नहीं मिलनी चाहिए। संगठन का मानना है कि आरक्षित सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं के राजनीतिक प्रभाव में कमी आती है।

    भारत ने PoK में चल रही चुनावी प्रक्रिया को मान्यता देने से इनकार किया है। भारत का आधिकारिक रुख है कि पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र में राजनीतिक प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार नहीं है, जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। भारत ने PoK में होने वाले चुनावों को पाकिस्तान के कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश के तौर पर खारिज किया है।

    इस बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PML-N अध्यक्ष नवाज शरीफ का बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी PoK में जीत हासिल करती है तो वह शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे। हालांकि, PoK के मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार प्रधानमंत्री का चुनाव विधानसभा के मुस्लिम सदस्यों में से होता है।

    PoK विधानसभा का सदस्य बनने के लिए संबंधित व्यक्ति का स्थायी निवासी होना और मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है। नवाज शरीफ इस चुनाव में किसी विधानसभा सीट से उम्मीदवार नहीं हैं। ऐसे में केवल PML-N अध्यक्ष होने या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सहमति से वह सीधे PoK के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।

    फिलहाल तीसरे चरण के मतदान के स्थगित होने से चुनावी प्रक्रिया की अगली तारीख स्पष्ट नहीं है। विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक मांगों के बीच चुनाव आयोग तथा संबंधित प्रशासन के सामने मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। वहीं PML-N पहले दो चरणों के परिणामों के आधार पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन अंतिम चुनावी तस्वीर तीसरे चरण की 11 सीटों पर मतदान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

  • यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली बड़ी चुनावी घोषणा करते हुए अयोध्या विधानसभा सीट से तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले का ऐलान किया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी अयोध्या जैसी महत्वपूर्ण सीट पर एक बार फिर अनुभवी और पुराने चेहरे पर भरोसा जता रही है।

    उम्मीदवार की घोषणा ऐसे समय की गई है जब प्रदेश में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पवन पांडे जनता का भरोसा एक बार फिर जीतेंगे। उन्होंने कहा कि पवन पांडे का क्षेत्र से मजबूत जुड़ाव है और उन्होंने पहले भी यहां के लोगों का विश्वास हासिल किया है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    तेज नारायण पांडे, जिन्हें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में पवन पांडे के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने युवाओं से जुड़े विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन में लगातार जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी पहचान बनाई। छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति में रहने के कारण उन्हें संगठनात्मक कार्यों का भी व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।

    पवन पांडे पहली बार व्यापक चर्चा में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आए, जब उन्होंने अयोध्या विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। विधायक रहने के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसी राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने एक बार फिर उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।

    अयोध्या विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। ऐसे में इस सीट पर प्रत्याशी की घोषणा को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती चरण में उम्मीदवार घोषित कर समाजवादी पार्टी ने चुनावी तैयारियों का स्पष्ट संदेश दिया है और संगठन को समय रहते सक्रिय करने की कोशिश की है।

    पार्टी की इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख दलों की ओर से भी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की जा सकती हैं। फिलहाल समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडे को उम्मीदवार बनाकर चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अन्य राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण सीट पर किस चेहरे को मैदान में उतारते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • Update: तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम : दतिया में Congress, गुजरात में BJP, बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीते

    Update: तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम : दतिया में Congress, गुजरात में BJP, बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीते

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट से जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की है।

    बांकीपुर से प्रशांत किशोर जीते
    बिहार के बांकीपुर में नितिन नवीन की सीट पर प्रशांत किशोर जीत गए हैं। जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत
    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदान
    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • PoK चुनाव पर पाकिस्तान में बढ़ा सियासी घमासान, PML-N ने बहुमत का दावा किया तो बिलावल ने उठाए गंभीर सवाल

    PoK चुनाव पर पाकिस्तान में बढ़ा सियासी घमासान, PML-N ने बहुमत का दावा किया तो बिलावल ने उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। मतगणना पूरी होने से पहले ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने साधारण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा कर दिया है। दूसरी ओर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और विवादित सीटों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है।

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्ला ने दावा किया कि 45 सदस्यीय विधानसभा में उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन मिल चुका है। उनके अनुसार दूसरे चरण में पीएमएल-एन ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है और मुजफ्फराबाद क्षेत्र की सात सीटों में से चार पर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि पार्टी कुल 23 सीटों तक पहुंच गई है, जिससे उसे साधारण बहुमत प्राप्त हो गया है। वहीं पीपीपी के हिस्से में मुजफ्फराबाद की तीन सीटें आने का दावा किया गया।

    इन दावों के बीच बिलावल भुट्टो जरदारी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के दूसरे चरण में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका आरोप है कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष कई शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई करता तो उसकी विश्वसनीयता बनी रहती। बिलावल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी चुनाव परिणामों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और जिन निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली के आरोप हैं वहां पुनर्मतदान की मांग करेगी।

    चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली। मतदान केंद्रों तक चुनाव कर्मियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचाया गया। सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस के साथ पंजाब और सिंध से अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई। इसके बावजूद कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध कर मतदान प्रक्रिया का विरोध किया। कुछ इलाकों में मतदान प्रभावित होने की भी खबरें सामने आईं।

    प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। संगठन का कहना है कि इन सीटों के जरिए राजनीतिक समीकरण प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। चुनाव के पहले चरण के दौरान भी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ था।

    पीओके की 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं। पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद और शरणार्थी सीटों पर वोट डाले गए। तीसरे चरण का मतदान पुंछ डिवीजन की नौ सीटों पर निर्धारित है। इस बीच भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित पाकिस्तान के कब्जे वाले सभी क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं तथा वहां कराया जा रहा चुनाव भारत के दृष्टिकोण से वैध नहीं माना जाता। ऐसे में चुनावी परिणामों के साथ-साथ राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

  • ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक सर्वे ने मुरादाबाद मंडल के कई विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के लिए कराए गए सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए सर्वे एजेंसी ने करीब 35 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदलने का सुझाव दिया है।

    तीन सर्वे पूरे, चौथा अगस्त-सितंबर में संभव
    भाजपा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत अब तक तीन चरणों में सर्वे करा चुकी है। बताया जा रहा है कि तीनों सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति असंतोष एक समान रूप से सामने आया है। अगस्त-सितंबर में चौथे चरण का सर्वे भी कराए जाने की संभावना है, जिसके बाद पार्टी आगे की रणनीति तय कर सकती है।

    मुरादाबाद मंडल में बढ़ी बेचैनी
    मुरादाबाद मंडल को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां की 27 विधानसभा सीटों में से फिलहाल भाजपा के पास 12 सीटें हैं, जबकि 14 सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। रामपुर की स्वार सीट भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) के खाते में है।

    मंडल के 12 भाजपा विधायकों में से 10 लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। केवल रामवीर सिंह (कुंदरकी) और आकाश सक्सेना (रामपुर) उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।

    35% टिकट बदलने की चर्चा
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, सर्वे एजेंसी ने जिन क्षेत्रों में जन असंतोष अधिक पाया है, वहां नए उम्मीदवार उतारने की सिफारिश की है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किन विधायकों के नाम इस सूची में हैं, लेकिन यह चर्चा तेज है कि मुरादाबाद मंडल के कुछ विधायक भी इस दायरे में आ सकते हैं। इससे संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच हलचल बढ़ गई है।

    भाजपा का आधिकारिक रुख
    भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर ने कहा कि पार्टी समय-समय पर सर्वे कराती रहती है। फिलहाल विधानसभा चुनाव के लिए टिकट आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और पार्टी का मुख्य फोकस एमएलसी चुनाव पर है।

    मंडल के लगातार दूसरी बार चुने गए भाजपा विधायक

    बलदेव सिंह औलख (बिलासपुर)
    राजबाला (मिलक)
    गुलाब देवी (चंदौसी)
    रितेश गुप्ता (मुरादाबाद नगर)
    राजीव तरारा (मंडी धनौरा)
    महेंद्र खड़गवंशी (हसनपुर)
    सुचि चौधरी (बिजनौर)
    सुशांत सिंह (बढ़ापुर)
    अशोक राणा (धामपुर)
    ओम कुमार (नहटौर)

    मंडल में भाजपा की स्थिति

    जिला भाजपा विधायक
    बिजनौर 4
    रामपुर 3
    मुरादाबाद 2
    अमरोहा 2
    संभल 1

    हालांकि टिकटों को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन आंतरिक सर्वे की चर्चाओं ने चुनाव से करीब एक साल पहले ही भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

  • यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया

    यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के चुनाव की शुरुआती प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने बढ़त हासिल कर ली है। सुरक्षा परिषद के पहले अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल में ग्रिनस्पैन सबसे आगे रहीं, जबकि गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट दूसरे स्थान पर रहीं। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार किसी महिला को महासचिव बनाने की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी पकड़ रही है।

    राजनयिक सूत्रों के अनुसार, 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुए अनौपचारिक मतदान में रेबेका ग्रिनस्पैन को 10 सकारात्मक वोट, एक नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। ग्रिनस्पैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं और वर्तमान में यूएनसीटीएडी की महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों के आधार पर शुरुआती चरण में मजबूत स्थिति बनाई है।

    गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट सात उम्मीदवारों में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्हें नौ सकारात्मक वोट, दो नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। हालांकि सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जेनॉन मुकोंगो ने आधिकारिक तौर पर मतदान के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन राजनयिक सूत्रों के जरिए वोटों की जानकारी सामने आई।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद पहले एक उम्मीदवार का चयन करती है, जिसे बाद में महासभा के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। परंपरा के अनुसार महासभा आमतौर पर सुरक्षा परिषद की सिफारिश को स्वीकार कर लेती है। उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और स्थायी सदस्यों की सहमति जांचने के लिए सुरक्षा परिषद में कई दौर के अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल आयोजित किए जाते हैं।

    इस प्रक्रिया में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पांच स्थायी सदस्यों की भूमिका बेहद अहम होती है। किसी उम्मीदवार को अंतिम समर्थन हासिल करने के लिए यह जरूरी होता है कि स्थायी सदस्य उसके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करने की स्थिति में न हों। अंतिम दौर के मतदान में स्थायी सदस्यों के रुख को अलग-अलग रंगों वाले बैलेट के जरिए समझा जाता है।

    इस दौड़ में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी तीसरे स्थान पर रहे। अर्जेंटीना से आने वाले ग्रॉसी को दो नकारात्मक वोट मिले। उन्होंने यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को लेकर रूस की आलोचना की थी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से अलग रुख भी अपनाया था। इसके अलावा चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट भी प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। उन्हें पांच नकारात्मक वोट मिले।

    सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा भी इस दौड़ में शामिल हैं। एस्पिनोसा को केवल दो नकारात्मक वोट मिले, जबकि कई देशों ने उनके पक्ष में कोई स्पष्ट राय नहीं दी, जिससे उनके पास आगे समर्थन जुटाने का अवसर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेबेका ग्रिनस्पैन, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और एस्पिनोसा को महिला महासचिव की मांग और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के मुद्दे से फायदा मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के करीब 80 वर्षों के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है। इसके अलावा 1991 में जेवियर पेरेज दे कुएलार के कार्यकाल के बाद से लैटिन अमेरिका को इस शीर्ष पद का प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

    यूएन के पूर्व अवर महासचिव और युगांडा के पूर्व विदेश मंत्री ओलारा ओतुनु भी उम्मीदवारों में शामिल हैं, लेकिन शुरुआती पोल में उन्हें सबसे कम समर्थन मिला। आने वाले दौर के मतदान यह तय करेंगे कि कौन सा उम्मीदवार स्थायी सदस्यों की सहमति हासिल कर अंतिम दौड़ में आगे बढ़ता है।