"जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

नई दिल्ली जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में साध्वी और कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने उनके अनुयायियों और ग्रामीण समाज को गहरे शोक में डुबो दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही पलों बाद तबीयत बिगड़ना, अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया जाना और सोशल मीडिया पर उठे सवाल उनकी मौत को रहस्यमयी और चिंता का विषय बना रहे हैं।
हर घटना की कड़ी अपने आप में गंभीर सवाल खड़े कर रही है और लोग इस हादसे की सही वजह जानने के लिए बेसब्र हैं।

पार्थिव शरीर परेऊ गांव पहुंचा, शोक और न्याय की मांग
आज साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। सैकड़ों अनुयायी, ग्रामीण और संत समाज के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजनों ने परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि देने का निर्णय लिया, लेकिन इस बीच न्याय की मांग भी जोर पकड़ने लगी, क्योंकि लोग चाहते हैं कि उनकी मौत के रहस्यमयी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो।

साध्वी पूरी तरह स्वस्थ, हल्का जुकाम ही था शिकायत
साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण थकान जरूर थी, लेकिन स्वास्थ्य सामान्य था। 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई। वीरम नाथ के अनुसार, “मैंने कहा कि अस्पताल चल लेते हैं, लेकिन उसने कहा कि यह मामूली जुकाम है, डॉक्टर को घर ही बुला लो।”

इंजेक्शन के 30 सेकंड में तबीयत बिगड़ी
कंपाउंडर ने शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन लगाया, लेकिन महज 30 सेकंड में ही साध्वी की हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी ने सबको हैरान कर दिया। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जोधपुर के प्रेक्षा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए-क्या यह एलर्जिक रिएक्शन था, क्या बिना जरूरी जांच के दवा दी गई, या यह मेडिकल लापरवाही थी।

अंतिम शब्द और न्याय की पुकार
वीरम नाथ की आंखें भर आती हैं, जब वह अपनी बेटी के अंतिम शब्द याद करते हैं। साध्वी ने कहा था, “मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।” परिवार का कहना है कि वे किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया विवाद ने बढ़ाई पीड़ा
सोशल मीडिया पर इस मामले में आग में घी डालने का काम हुआ। तरह-तरह की पोस्ट, अफवाहें और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। कुछ पोस्टों में निजी रिश्तों और भगवे को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिससे संत समाज में नाराजगी फैली। मेवाड़ से श्रद्धांजलि देने पहुंचे महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि बिना तथ्य जाने साधु-संतों की छवि खराब की जा रही है और बाप-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करना शर्मनाक है।

उन्होंने पुलिस से मांग की कि मौत की निष्पक्ष जांच हो और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

संत समाज की एक सुर में मांग
संत समाज भी एक सुर में यही मांग कर रहा है

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की सच्चाई सामने लाई जाए। कई संतों का कहना है कि बिना प्रमाण की टिप्पणियां न केवल दिवंगत साध्वी का अपमान हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।
कंपाउंडर आया और शुरुआती जांच के बाद उसने इंजेक्शन लगाया गया.
परेऊ गांव में अंतिम दर्शन का भावुक माहौल
गांव परेऊ में अंतिम दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं भजन गा रही थीं, पुरुषों की आंखों में आंसू थे। हर कोई यही कह रहा था कि प्रेम बाईसा का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था।
समाधि देने के फैसले को लेकर गांव में भावनात्मक माहौल था। अनुयायियों का मानना है कि यह कदम साध्वी की साधना और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।

आश्रम से कैमरे हटने और पिछले विवाद की जांच जरूरी
साध्वी के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने कहा कि पूरी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं, जो संदेह पैदा करते हैं। मृत्यु के बाद डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करवाने को कहा, लेकिन पिता ने मना कर दिया। गत वर्ष जुलाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पुलिस की कार्रवाई ने भी साध्वी पर दबाव बनाए रखा।