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  • इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल

    इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल


    मध्य प्रदेश
    के इंदौर में एक शराब कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के बीच विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की विशेष चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि ब्लैकमेलिंग और कथित रंगदारी की शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही पहले मामला दर्ज हो गया, जबकि उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शराब कारोबारी सूरज रजक ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि उनसे कथित रूप से बड़ी धनराशि की मांग की गई और भुगतान नहीं करने पर और अधिक सामग्री सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई।

    कारोबारी का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से ब्लैकमेलिंग, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

    इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। कारोबारी का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले पुलिस को शिकायत दी थी और अपनी बात रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया था। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई लंबित रहने के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुए मामले ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है। वहीं दूसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर दर्ज प्रकरण अब जांच का विषय बना हुआ है।

    मामले में दोनों पक्षों के आरोप और प्रत्यारोपों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और किस आधार पर दूसरे पक्ष की शिकायत पर पहले प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    विवाद के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता को लेकर भी विभिन्न प्रकार के दावे सामने आए हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार उन पर पूर्व में भी सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने तक प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेजों, शिकायतों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस बीच यह मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

  • बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

    बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। विभागीय कार्रवाई के तहत पहले निलंबित किए गए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अब पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिससे पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल की जा सके।

    बीकेटीसी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत मंदिर अधिकारी की लिखित तहरीर पर दर्ज हुई, जिसके बाद मामला विभागीय जांच से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की सूचना मिलने के बाद मंदिर समिति ने प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना मंदिर की धनराशि के साथ कथित अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ। इसी आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, चढ़ावे की गिनती, धनराशि के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

    बताया गया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को भी संज्ञान में लिया गया था। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आने का उल्लेख किया गया, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई आवश्यक समझी गई। इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    बीकेटीसी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। समिति का मानना है कि यदि संबंधित कर्मचारी को पद पर बनाए रखा जाता तो जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रहती। इसी कारण पहले प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निलंबन किया गया और बाद में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

    अब पुलिस जांच और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त तथ्य या अन्य संबंधित पहलू सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। फिलहाल प्रशासन और मंदिर समिति दोनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय किए जाएंगे और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू

    IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू


    नई दिल्ली। भोपाल में आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ कुक से कथित मारपीट और गाली गलौज के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। रातीबड़ थाना पुलिस ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    शिकायतकर्ता रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया है कि उन्हें परिचित के माध्यम से भोपाल बुलाया गया था। उनके अनुसार उन्हें शैलेष सिंह के घर खाना बनाने की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया था और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा भी दिया गया था। तय वेतन के साथ रहने और खाने की व्यवस्था का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने काम शुरू किया।

    विपेंद्र का आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उनसे लगातार काम कराया जाने लगा। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने काम छोड़ने की इच्छा जताई तो उनके साथ गाली गलौज की गई। शिकायत के अनुसार उनका मोबाइल भी छीन लिया गया और उन्हें जबरन काम करने के लिए कहा गया। पीड़ित का कहना है कि वह डरकर कमरे में चला गया था लेकिन बाद में उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई।

    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान शैलेष सिंह उनके बेटे शशांक सिंह और एक कर्मचारी ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने शरीर और चेहरे पर चोट आने का भी दावा किया है। घटना के बाद विपेंद्र ने रोते हुए एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई कथित घटना का जिक्र किया। हालांकि वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    रातीबड़ थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद फरियादी और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शैलेष सिंह शशांक सिंह और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

    इस मामले में एक और पहलू भी सामने आया है। इससे पहले विदिशा निवासी एक युवक ने भी रिटायर्ड अधिकारी शैलेष सिंह के खिलाफ नौकरी के दौरान कथित रूप से बंधक बनाने मारपीट करने और धमकी देने जैसी शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में भी मोबाइल और सामान वापस नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि उन आरोपों की कानूनी स्थिति और अंतिम निष्कर्ष अलग जांच प्रक्रिया का विषय हैं।

    क्रिकेट की बात करें तो शशांक सिंह ने आईपीएल में पंजाब किंग्स सहित कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें 2024 सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद पहचान मिली थी जबकि 2026 का सीजन उनके लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने इस सीजन में सीमित रन बनाए और टीम के लिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके।

    फिलहाल इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच जारी है। आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भोपाल में IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और पूर्व IPS पिता पर FIR, कुक से मारपीट का आरोप

    भोपाल में IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और पूर्व IPS पिता पर FIR, कुक से मारपीट का आरोप


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें IPL खिलाड़ी शशांक सिंह और उनके रिटायर्ड IPS पिता शैलेश सिंह पर अपने घरेलू रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज और अवैध रूप से बंधक बनाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में परिवार के ड्राइवर को भी सह-आरोपी बनाया गया है। घटना भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के मेंदोरी गांव स्थित आवास की बताई जा रही है।

    कुक ने दर्ज कराई शिकायत
    रीवा जिले के रहने वाले 31 वर्षीय कुक विपेंद्र सिंह तोमर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उन्हें 15,000 रुपये मासिक वेतन, रहने-खाने की सुविधा और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने के आश्वासन पर नौकरी पर रखा गया था।

    शिकायत के अनुसार, काम शुरू होने के कुछ ही घंटों में खाने की गुणवत्ता को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उन पर दबाव बनाया गया और गाली-गलौज की गई।

    मोबाइल छीना, कमरे में बंद होने का आरोप
    पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने नौकरी छोड़कर घर लौटने की बात कही तो स्थिति बिगड़ गई। उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें। इसके बाद उन्हें जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया।

    कुक के अनुसार, खुद को बचाने के लिए उन्होंने एक कमरे में खुद को बंद कर लिया, लेकिन आरोप है कि पिता-पुत्र और ड्राइवर ने दरवाजा खोलकर उनके साथ मारपीट की। पुलिस के अनुसार, मेडिकल जांच में पीड़ित के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे मारपीट की पुष्टि हुई है।

    FIR दर्ज, BNS की धाराएं लागू
    रातीबड़ पुलिस ने शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(B), 115(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

  • अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज

    अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई राजस्व टीम पर खनन माफिया द्वारा खुलेआम धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है। बदरवास तहसील के सड़बूड़ गांव में हुई इस घटना में तहसीलदार सचिन भार्गव और उनकी टीम को जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि सिंध नदी के पास सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। इस पर तहसीलदार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि भारी मशीनों की मदद से मिट्टी निकाली जा रही थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए उसका अवैध परिवहन किया जा रहा था। टीम ने मौके पर कार्रवाई शुरू की, तभी स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने विरोध शुरू कर दिया और सरकारी अमले के साथ अभद्रता की। इसी दौरान मुख्य आरोपी जयमंडल यादव ने तहसीलदार को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह गोली चला देगा और जेल जाने के लिए भी तैयार है। इसके साथ ही उसने अपने बेटे को घर से हथियार लाने के लिए भी कहा, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दहशत में आ गए।

    घटना के दौरान अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और आरोपी पक्ष ने मौके से हाइड्रा मशीन और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को भगा दिया। हालांकि राजस्व टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर बदरवास थाने में खड़ा करा दिया। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भूमि पर करीब 15-15 फीट गहरे गड्ढे बनाकर अवैध खनन किया गया था, जिससे बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन सामने आया है।

    कोटवार और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने भी इस पूरी घटना की पुष्टि की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि जान से मारने की धमकी देकर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में चिंता बढ़ गई है और अवैध खनन पर कार्रवाई को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।

    यह मामला राज्य में अवैध खनन पर बढ़ते दबाव और प्रशासनिक टीमों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

  • तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज

    तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश:
    की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारिक निवेश के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। तुअर दाल के कारोबार में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर एक कारोबारी से 65 लाख रुपए की राशि हासिल कर ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो माल की आपूर्ति की गई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी कारोबारी गिरीश रामनानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पहचान महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी गुरुशांतलिंग कुंभार और सोमनाथ हलगोदे से कई वर्ष पहले हुई थी। दोनों व्यापारियों से पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक लेन-देन हो चुका था। इसी पुराने परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें नए व्यापारिक निवेश का प्रस्ताव दिया।

    शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को तुअर दाल के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी फर्म के माध्यम से व्यापार में निवेश करने पर आकर्षक मुनाफा मिलने का दावा किया। फरवरी 2026 में एक आरोपी इंदौर पहुंचा और कारोबारी से मुलाकात की। इस दौरान उसने मोबाइल फोन पर बड़े पैमाने पर तुअर दाल के स्टॉक की तस्वीरें और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विवरण दिखाए। साथ ही निवेश करने पर कम समय में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा भी दिलाया।

    व्यापारिक अवसर को लाभदायक मानते हुए गिरीश रामनानी ने निवेश का निर्णय लिया। शिकायत के अनुसार उन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर कुल 65 लाख रुपए की व्यवस्था की। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में यह पूरी राशि आरोपियों द्वारा संचालित फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लेन-देन के दौरान कारोबारी को भरोसा दिलाया गया था कि तय समय के भीतर माल की आपूर्ति कर दी जाएगी और व्यापारिक लाभ भी मिलेगा।

    फरियादी का आरोप है कि रकम जमा होने के बाद आरोपियों का व्यवहार बदलने लगा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद तुअर दाल की खेप नहीं भेजी गई। जब माल की आपूर्ति को लेकर लगातार संपर्क किया गया तो आरोपियों ने विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगना शुरू कर दिया। कई बार बातचीत के बावजूद न तो व्यापार पूरा हुआ और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई।

    समय बीतने के साथ कारोबारी को संदेह हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने अपने स्तर पर आरोपियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और उपलब्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब धनराशि के लेन-देन, व्यापारिक दस्तावेजों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।

    यह मामला व्यापारिक निवेश के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति, फर्म और कारोबार की स्वतंत्र जांच करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका तथा धनराशि के उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार

    हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार




    नई दिल्ली। हापुड़ में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर एक दर्दनाक वारदात सामने आई है, जहां सोमवार रात शादी समारोह से लौट रहे प्रॉपर्टी डीलर अतुल तोमर (32) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पिलखुआ थाना क्षेत्र के रिलायंस रोड इलाके में हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

    जानकारी के अनुसार अतुल तोमर गाजियाबाद के भोजपुर में एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी रास्ते में बाइक सवार बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले कार का शीशा तोड़ने की कोशिश की और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली अतुल के सीने में लग गई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    परिजनों का आरोप है कि पिछले तीन साल से एक प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था, जिसमें कुछ स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर शामिल थे। इसी रंजिश के चलते हत्या को अंजाम दिया गया है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि धमकियों के बावजूद पुलिस ने पहले गंभीरता से कार्रवाई नहीं की।

    इस मामले में पुलिस ने बीजेपी जिला मंत्री नवीन तोमर समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य आरोपी मंजीत सहित अन्य फरार हैं। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है और सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    परिजनों में गुस्सा है और उन्होंने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग करते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब

    सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब


    नई दिल्ली।
    पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

    न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने यह आदेश असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल को चुनौती दी गई थी।

    कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस आदेश से उस प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।

    असम सरकार की दलील

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट को सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि एफआईआर और कथित अपराध दोनों असम में दर्ज हुए हैं। उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताते हुए कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

    क्या है पूरा मामला

    यह विवाद हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।

    खेड़ा का पक्ष

    खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और अधिकतम मानहानि का मामला बनता है, जिसमें गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।

    पहले क्या हुआ था

    तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इसी आदेश को चुनौती देते हुए असम सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

    राजनीतिक माहौल गर्म

    इस मामले ने राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि बीजेपी ने खेड़ा के बयान को गैरजिम्मेदार और मानहानिकारक करार दिया है।

  • Punjab: वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक सुसाइड केस में पूर्व मंत्री भुल्लर के खिलाफ FIR…. हो सकती है गिरफ्तारी

    Punjab: वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक सुसाइड केस में पूर्व मंत्री भुल्लर के खिलाफ FIR…. हो सकती है गिरफ्तारी


    चंडीगढ़।
    पंजाब (Punjab) के अमृतसर (Amritsar) में पंजाब वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (Punjab Warehousing Corporation) के जिला प्रबंधक (District Manager) गगनदीप सिंह रंधावा (Gagandeep Singh Randhawa) की आत्महत्या के मामले ने एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अमृतसर पुलिस ने इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पंजाब के पूर्व परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और निजी सहायक (PA) दिलबाग सिंह उर्फ बागा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें आत्महत्या के लिए उकसाना (धारा 108), आपराधिक धमकी (धारा 351) और समान मंशा (धारा 3(5)) शामिल हैं।

    मृतक की पत्नी उपिंदर कौर ने अपनी शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, पिछले कई महीनों से वेयरहाउस टेंडर के आवंटन को लेकर उनके पति पर भारी दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी उन पर नियमों के विरुद्ध जाकर अपने पक्ष में टेंडर अलॉट करने का दबाव डाल रहे थे। आरोप है कि पूर्व मंत्री और उनके सहयोगियों ने रंधावा के साथ मारपीट की और उन पर पिस्तौल से वार भी किया। उन्हें इस हद तक अपमानित किया गया कि वे टूट गए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि रंधावा को बंदूक की नोक पर एक झूठा वीडियो बयान रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया गया था। रंधावा को धमकाया गया था कि यदि उन्होंने बात नहीं मानी, तो गैंगस्टरों के जरिए उन्हें और उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।


    सोशल मीडिया पर आया आखिरी वीडियो

    लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर रंधावा ने शनिवार तड़के करीब 5:30 बजे जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। अपनी मृत्यु से ठीक पहले उन्होंने एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसी वीडियो और पत्नी के बयानों को पुलिस ने जांच का मुख्य आधार बनाया है।


    विपक्ष ने खोला मोर्चा

    इस घटना के बाद पंजाब की विपक्षी पार्टियों ने ‘आप’ सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रंजीत एवेन्यू स्थित रंधावा के आवास पर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और रविवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। रंधावा की आत्महत्या ने राज्य में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

    इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

    भोपाल । भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है जहां कथित फर्जी सेल डीड के आधार पर मसूद और अमन एजुकेशन सोसाइटी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी। हाईकोर्ट ने पहले पुलिस कमिश्नर को मसूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर शामिल थे ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार का जवाब आए बिना ऐसा अंतरिम आदेश देना उचित नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए सख्त निर्देश पहली नजर में उचित नहीं लगते।

    आरिफ मसूद की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने की। तंखा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने ही एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए सभी पक्ष जल्द अपनी दलीलें प्रस्तुत करें। इसके बाद ही हाईकोर्ट मामले में मेरिट के आधार पर निर्णय लेगा।

    मामला इस प्रकार शुरू हुआ कि मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने 9 जून 2025 को इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी। कॉलेज का संचालन अमन एजुकेशन सोसाइटी करती है और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस सोसाइटी के सचिव हैं। मसूद ने मान्यता रद्द होने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

    पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच के दौरान आयुक्त उच्च शिक्षा ने पाया कि अमन एजुकेशन सोसाइटी ने कॉलेज के संचालन के लिए फर्जी दस्तावेजों पर एनओसी और मान्यता ली थी। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सेल डीड तैयार करवाई गई और इसे पंजीयन कार्यालय में फर्जी तरीके से दर्ज किया गया।

    इस मामले से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई थी क्योंकि मसूद कांग्रेस विधायक हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूद को फिलहाल कानूनी राहत मिल गई है लेकिन हाईकोर्ट में मामला अब भी लंबित है और वहीं अंतिम निर्णय होगा।

    राजनीतिक और शिक्षा जगत दोनों में इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बिना पक्षकार की सुनवाई के सख्त आदेश देना न्यायसंगत नहीं होता जिससे राज्य के प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। अब हाईकोर्ट मामले में दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर निर्णय करेगा।