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  • परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड

    परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का फैसला लिया जाएगा।

    सूत्रों का कहना है उसके इस रुख का मतलब है कि यदि बिल में यह प्रावधान होता है कि राज्यों में विधानसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50% की वृद्धि होगी तो द्रमुक समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। अप्रैल में जो बिल सरकार ने पेश किया था, तब ऐसी बात कही गई थी लेकिन यह विधेयक में नहीं थी। वह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।


    पहले विरोध में थी DMK

    सरकार पिछले सत्र में जब यह बिल लाई थी तो द्रमुक ने इसका खुलकर विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। तब विधेयक के प्रावधानों की बात पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के दबाव में ही तब इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक का विरोध किया था। तब सरकार को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाली कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि जो रुख पहले था, वह अब नहीं है। अब हम कह रहे हैं कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने हो, उसके बाद निर्णय करेंगे।

    द्रमुक के लोकसभा में 22 सदस्य हैं जो सरकार को दो तिहाई बहुमत से इस विधेयक को पारित कराने में अहम साबित हो सकते हैं। इस बिल को पारित करने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी तक एनडीए के पास 326 तक की संख्या हुई है। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराज द्रमुक इंडिया गठबंधन से अलग हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें उससे बढ़ी हैं।


    विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार मौजूदा मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की नए सिरे से कोशिश कर रही है। इस विधेयक का मकसद 2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।

    कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक फिर से पेश किए जा सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर रीजीजू ने विशेष सत्र के किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया।

  • E20 पर सरकार का जवाब, इथेनॉल मिश्रण ने बचाए उपभोक्ताओं के हजारों करोड़, पेट्रोल 125 रुपये लीटर तक जाने से रुका

    E20 पर सरकार का जवाब, इथेनॉल मिश्रण ने बचाए उपभोक्ताओं के हजारों करोड़, पेट्रोल 125 रुपये लीटर तक जाने से रुका


    नई दिल्ली। इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि यदि देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता तो पश्चिम एशिया में ईरान संकट के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ता और दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। सरकार के अनुसार E20 नीति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की महंगाई का प्रभाव काफी हद तक कम करने में मदद की है।

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाली E20 नीति का उद्देश्य केवल वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना नहीं है बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना भी है। मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं तब इथेनॉल मिश्रण की वजह से पेट्रोल की लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिली और उपभोक्ताओं को संभावित भारी मूल्य वृद्धि से राहत मिली।

    सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल पुराने वाहनों के लिए नुकसानदायक है या इससे बड़ी संख्या में वाहन अनुपयोगी हो जाएंगे। मंत्रालय के अनुसार E20 को लागू करने से पहले विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों और तकनीकी संस्थानों द्वारा व्यापक परीक्षण किए गए थे। सरकार का कहना है कि यह ईंधन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और कई देशों में लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है।

    मंत्रालय के मुताबिक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का एक बड़ा फायदा विदेशी मुद्रा की बचत भी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल में आयातित ईंधन की हिस्सेदारी कम होती है जिससे आयात बिल घटाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलती है।

    हालांकि E20 को लेकर कुछ वाहन मालिकों और विशेषज्ञों ने माइलेज तथा पुराने इंजनों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल भी उठाए हैं। सरकार का कहना है कि E20 अनुकूल वाहनों में माइलेज पर प्रभाव सीमित है और यह वाहन की तकनीक रखरखाव तथा ड्राइविंग परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट दावों और भ्रामक सूचनाओं के बजाय आधिकारिक तकनीकी जानकारी पर भरोसा करें।

    सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन लागत नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है बल्कि इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध होता है पर्यावरणीय दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है। इसी कारण केंद्र सरकार आने वाले समय में भी इथेनॉल आधारित ईंधन नीति को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

  • E20 पेट्रोल से खराब हो जाएंगे इन गाड़ियों के कल-पुर्जे…. सरकार ने संसद में दी बड़ी जानकारी

    E20 पेट्रोल से खराब हो जाएंगे इन गाड़ियों के कल-पुर्जे…. सरकार ने संसद में दी बड़ी जानकारी


    नई दिल्ली।
    E20 पर जारी बहस के बीच केंद्र ने इस मुद्दे पर संसद (Parliament) में बड़ी जानकारी दी है। सरकार ने बुधवार को कहा कि एक अप्रैल, 2005 से पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले बनी बीएस-थ्री (BS-III) गाड़ियों को ई-20 ईंधन से चलाने पर उसके कुछ रबर पुर्जे बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

    राज्यसभा (Rajya Sabha) में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ई-20 ईंधन (E-20 fuel) के इस्तेमाल से गाड़ियों के ‘माइलेज’ पर पड़ने वाले असर को लेकर जताई गई चिंता के बारे में ऑटोमोबाइल कंपनियों और गाड़ियों व इंजन की जांच करने वाली एजेंसियों ने साफ किया है कि गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन के प्रकार के अलावा कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।


    सरकार ने बताया- स्टडी की गई थी

    गडकरी ने कहा कि दो-पहिया और चार-पहिया गाड़ियों पर ई-20 के असर का पता लगाने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) देहरादून, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने मिलकर एक अध्ययन किया था।


    इंजन में बदलाव की जरूरत नहीं

    उन्होंने कहा कि अध्ययन में कार और दो-पहिया गाड़ियों के इंजन में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं पाई गई। उनके अनुसार, इन अध्ययनों से पुष्टि हुई कि पुरानी गाड़ियों के प्रदर्शन में भी कोई खास अंतर नहीं आया और न ही ई-20 इंधन के साथ चलाने पर उनमें कोई असामान्य टूट-फूट देखी गई।

    मंत्री ने कहा कि गाड़ी चलाने में आसानी, स्टार्ट होने की क्षमता (स्टार्टबिलिटी), मेटल के साथ तालमेल (मेटल कम्पैटिबिलिटी) और प्लास्टिक के साथ तालमेल (प्लास्टिक कम्पैटिबिलिटी) जैसे पैमानों पर कोई समस्या नहीं देखी गई।


    इन गाड़ियों में बदलने पड़ सकते हैं रबर पार्ट्स

    उन्होंने कहा, ‘सिर्फ एक अप्रैल, 2005 से पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले बनी बीएस-थ्री गाड़ियों के परीक्षण के मामले में, रबर के कुछ पुर्जे और गास्केट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जिसे गाड़ी की नियमित होने वाली सर्विसिंग के दौरान आसानी से ठीक किया जा सकता है।’


    कंपनियां वारंटी क्लेम देती रहेंगी

    गाड़ी चलाने, स्टार्ट होने की क्षमता, मेटल और प्लास्टिक के साथ तालमेल जैसे पैमानों पर कोई समस्या नहीं देखी गई। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कहा है कि वे ई-20 ईंधन का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों के लिए वारंटी क्लेम देती रहेंगी।

    खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब आने वाले दिनों में करीब 3 बड़े आयोजन ई20 के खिलाफ होने जा रहे हैं। वहीं, आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 पेट्रोल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने इसके लिए 1 अगस्त को संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया है। जबकि, 4 अगस्त को परिवहन यूनियन संसद तक मार्च की तैयारी में हैं।

  • MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित

    MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाने वाली मूंग की मात्रा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है। वहीं, खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर उसकी समीक्षा कराने का फैसला लिया गया है।

    कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बैठक के बाद बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। इसी के अनुरूप पहले प्रत्येक पात्र किसान से उसकी उपज का 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की मांग और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह औसतन लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ के बराबर उपार्जन होगा।

    सरकार ने उपार्जन प्रक्रिया में अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है। इसी प्रकार, मूंग खरीदी की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त के बजाय अब 20 अगस्त निर्धारित की गई है।

    बैठक में किसानों ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगी, जिनके आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट आने तक खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था स्थगित रहेगी और किसानों को पूर्व की व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जाएगा।

    बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    प्रमुख निर्णय

    • प्रत्येक पात्र किसान से मूंग उपज का 25 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत तक उपार्जन।
    • निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू।
    • स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त।
    • मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त।
    • खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित।
    • कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति करेगी ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा।
    • समिति की अनुशंसा मिलने तक खाद का वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा।

  • सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभिन्न विभागों में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकारी वाहनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वन ऑफिसर, वन कार’ यानी एक अधिकारी को केवल एक ही सरकारी वाहन आवंटित करने की नीति को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इस नए कदम से सरकारी तंत्र में अतिरिक्त गाड़ियों के अनधिकृत उपयोग पर पूरी तरह विराम लगने की उम्मीद है।

    नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, सरकारी वाहन की पात्रता रखने वाले किसी भी अधिकारी को एक से अधिक कार आवंटित नहीं की जाएगी। यदि किसी अफसर को अपने मूल पद के साथ किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्वायत्त निकाय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा जाता है, तब भी वह केवल एक ही आधिकारिक वाहन का उपयोग करने का हकदार होगा। अतिरिक्त दायित्व के आधार पर दूसरी गाड़ी हासिल करने की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र के अधीन कार्यरत अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों या स्वायत्त संस्थाओं के बेड़े में शामिल वाहनों को अपने दैनिक या नियमित इस्तेमाल के लिए अपने पास नहीं रख सकेंगे। इस तरह की कार्यप्रणाली पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हालांकि, अंतर-राज्यीय या विभागीय आधिकारिक दौरों के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों को इन संस्थाओं के वाहनों का उपयोग करने की विशेष छूट दी जाएगी, ताकि शासकीय कार्यों में कोई बाधा न आए।

    नए परिपत्र में सभी मंत्रालयों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस्तेमाल में न आ रहे या अधिशेष वाहनों को तुरंत सुरक्षित कस्टडी में लिया जाए। यह निर्देश पूर्व में जारी उन नियमों को और मजबूती प्रदान करता है, जिनमें अधिकारियों द्वारा तय शुल्क देकर सीमित दायरे में सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ वाहनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ में भी बड़ी कमी आएगी।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल


    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र को मीडिया के सामने पेश किया और उसकी चोटें दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए मंत्री जिम्मेदार हैं और इसी कारण हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

    घायल छात्र की चोटें दिखाईं
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्र के हाथ, पीठ और छाती पर लगी चोटों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी पैलेट गन से घायल हो गया।

    20 जुलाई की झड़प का मामला
    गौरतलब है कि 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में 100 से अधिक छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

    छात्र की आंख की रोशनी पर संकट
    राहुल गांधी के साथ मौजूद छात्र की पहचान साहिल लोचाब (19) के रूप में हुई, जो दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का निवासी है। परिवार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से उसकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका उपचार एम्स के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हुआ, जहां सर्जरी भी की गई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी लौटने की संभावना करीब एक प्रतिशत ही है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर क्षति पहुंची है।

    पुलिस अधिकारी बनने का था सपना
    साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र है। उसकी मां ज्योति ने बताया कि वह पहले भी CJP के प्रदर्शनों में शामिल हो चुका था। 20 जुलाई को भी वह यह कहकर घर से निकला था कि यह उसकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि साहिल का सपना पुलिस अधिकारी बनने का था।

  • सरकार और CJP के बीच नहीं बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी, कल होगी अगली बैठक

    सरकार और CJP के बीच नहीं बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी, कल होगी अगली बैठक


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले तीन सप्ताह से आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की वार्ता किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि CJP का दावा है कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। इस मुद्दे पर सरकार ने शनिवार तक का समय मांगा है। अब दोनों पक्षों के बीच अगली बैठक शनिवार दोपहर करीब 12 बजे होगी।

    करीब 50 मिनट चली बैठक
    दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक लगभग 50 मिनट तक चली। CJP की ओर से प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका मौजूद रहे, जबकि सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया।

    इस्तीफे की मांग पर कायम CJP
    बैठक के बाद CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि मंत्रियों के साथ हुई चर्चा में सरकार उनकी तीन मांगों में से दो पर सकारात्मक नजर आई। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के मुद्दे पर सरकार का रुख सकारात्मक रहा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर संगठन किसी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

    दो मांगों पर मिली सैद्धांतिक सहमति
    CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द इस पर निर्णय लेगी। रंका के मुताबिक, सरकार ने दो मांगों पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इनमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व अन्य कानूनी कार्रवाई वापस लेने का प्रस्ताव शामिल है।

    20 जुलाई को भी हुई थी बातचीत
    इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सरकारी आवास पर CJP प्रतिनिधियों और सरकार के बीच दो दौर की बैठक हुई थी, जिसमें भी सौरभ दास और आशुतोष रंका शामिल हुए थे। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के विठ्ठलभाई पटेल हाउस में दोनों पक्षों के बीच यह नई बैठक आयोजित की गई।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    CJP ने पहले ही सरकार के मंत्रियों के आवास या कार्यालय में वार्ता करने से इनकार कर दिया था और किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग की थी। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।

    संगठन की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी कार्रवाई वापस लेना शामिल है।

  • बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सिर्फ प्रीमियम ग्रेड में, E0-E10 की वापसी पर सरकार ने दिया स्‍पष्‍ट जवाब

    बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सिर्फ प्रीमियम ग्रेड में, E0-E10 की वापसी पर सरकार ने दिया स्‍पष्‍ट जवाब


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल देश में E0 (बिना एथेनॉल) और E10 (10% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की दोबारा सप्लाई शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी तेल कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट नहीं की जाती और फिलहाल पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि इंडियन ऑयल का XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का poWer100 और भारत पेट्रोलियम का Speed100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल पूरी तरह एथेनॉल मुक्त हैं। इनमें बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष एडिटिव्स का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इनकी बिक्री देश में कुल पेट्रोल खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत ही है।

    प्रीमियम पेट्रोल की कीमत कितनी?
    सरकार के मुताबिक, बिना एथेनॉल वाले इन प्रीमियम फ्यूल की कीमत करीब 160 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य पेट्रोल की कीमत लगभग 102.12 रुपये प्रति लीटर है। मौजूदा समय में सामान्य पेट्रोल में अधिकतम 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रित किया जा रहा है।

    E20 पर सरकार का भरोसा
    सरकार ने कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन पूरे होंगे। इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और शोध संस्थानों से भी सलाह ली जाएगी।

    सरकार ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में न्यूनतम 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) वाले E20 पेट्रोल को अधिसूचित किया गया है और सभी सार्वजनिक एवं निजी तेल कंपनियों को इसे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    इंजन पर नहीं पड़ा कोई बड़ा असर
    सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने या वाहन की उम्र घटने जैसी कोई व्यापक और प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। प्रयोगशाला परीक्षणों, फील्ड ट्रायल और वास्तविक परिचालन के आंकड़ों में भी इसके नकारात्मक प्रभाव के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।

    मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रही हैं और बड़े पैमाने पर इंजन संबंधी कोई समस्या दर्ज नहीं हुई है।

    E0 और E10 दोबारा क्यों नहीं आएंगे?
    सरकार ने कहा कि E0, E10 और E20 तीनों तरह के पेट्रोल की अलग-अलग आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग भंडारण, परिवहन और वितरण प्रणाली तैयार करने से लागत और संचालन संबंधी चुनौतियां काफी बढ़ जाएंगी।

    सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। इसी नीति के तहत E20 को व्यापक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी इसे स्वीकार किया है।

  • बातचीत को तैयार सरकार, चार बार भेजा न्योता, CJP बोली- जंतर-मंतर आएं, नड्डा के घर नहीं जाएंगे

    बातचीत को तैयार सरकार, चार बार भेजा न्योता, CJP बोली- जंतर-मंतर आएं, नड्डा के घर नहीं जाएंगे


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार किसी भी समय वार्ता के लिए तैयार है और पिछले 24 घंटे में CJP को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में चर्चा के लिए चार बार आमंत्रित किया गया, लेकिन संगठन ने सभी प्रस्ताव अस्वीकार कर दिए।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बातचीत करना चाहती है तो उसके प्रतिनिधि जंतर-मंतर आएं या किसी तटस्थ स्थान पर बैठक करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी राजनीतिक नेता के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएगा।

    इधर, प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने कनॉट प्लेस स्थित दुकानों, दफ्तरों और रेस्तरां संचालकों से गुरुवार शाम 6:30 बजे तक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की है।

    जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन 20 जून से लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं।

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेपर लीक मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP का प्रदर्शन 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है। वहीं, सोनम वांगचुक का अनशन भी 26 दिन से जारी है और उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा है।

    धरनास्थल पर देशभर से लोगों का समर्थन भी देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों के लिए विभिन्न राज्यों से भोजन भेजा जा रहा है, जबकि छात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।

  • देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    नई दिल्ली । महान क्रांतिकारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर गुरुवार को पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा, स्वाभिमान और समर्पण का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

    नई दिल्ली से जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि आजाद ने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी और उनका संकल्प आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए उनका संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया और भारतीयों के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास तथा राष्ट्रचेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि आजाद ने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की तथा युवाओं के हृदय में मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाई। उनका बलिदानी जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आजाद ने त्याग, संघर्ष और बलिदान की जो अमर गाथा लिखी, वह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने उन्हें भारत माता का अनन्य उपासक और महान क्रांतिकारी बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

    देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने संदेशों में चंद्रशेखर आजाद के जीवन और योगदान को याद किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके प्रसिद्ध उद्घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रहित में कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके साहस, स्वाभिमान और सर्वोच्च बलिदान को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चंद्रशेखर आजाद को प्रदेश की माटी का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति देशवासियों को हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते रहेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उनके बलिदान और क्रांतिकारी जीवन को नमन करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

    चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान सेनानियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से देश की आजादी की लड़ाई को नई गति दी। उनका जीवन केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और देश के प्रति समर्पण का ऐसा संदेश है, जो आज भी देश के युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।