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  • बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने निकाला प्याज का बफर स्टॉक…. 10 दिन में ही बिक गई 4000 टन

    बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने निकाला प्याज का बफर स्टॉक…. 10 दिन में ही बिक गई 4000 टन


    नई दिल्ली। ए
    क ओर जहां चीनी की कीमतों (Sugar prices) में बीते दिनों त्योहारों पर मिठास कम करने का काम किया, तो वहीं प्याज (Onion Price) लोगों की आंख से आंसू निकालती हुई नजर आई. देशभर में प्याज की कीमतों (Onion Price ) में तेज उछाल देखने मिला था. इसे देखते हुए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस (Kanda Express) के जरिए तमाम बड़े शहरों में प्याज का बफर स्टॉक रिलीज किया। सरकार ने सिर्फ 10 दिनों में ही 4000 टन बफर स्टॉक प्याज बेच दिया है।


    17 शहरों में सस्ता बेचा प्याज

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंज्यूमर अफेयर्स सेक्रेटरी निधि खरे ने रविवार को इस बारे में जानकारी शेयर करते हुए बताया कि सरकार ने आसमान छूती प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य इसकी रियायती बिक्री शुरू की. बफर स्टॉक से निकाले गए इस प्याज को पहले 10 दिनों में 17 शहरों में पहुंचाया गया और करीब 4,000 टन बफर प्याज बेचा जा चुका है. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अपनी एजेंसियों NCCF और NAFED के जरिए 2026 के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक जमा रखा है।


    35 रुपये प्रति किलो भाव पर बेचा

    NCCF-NAFED द्वारा प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इस बफर स्टॉक को रिटेल बिक्री के लिए निकाला गया. प्लान के तहत उत्पादक राज्यों से उपभोग केंद्रों तक प्याज को थोक में या तो कांदा एक्सप्रेस नामक स्पेशल ट्रेन से और ट्रकों द्वारा पहुंचाया जा रहा है. चुने गए प्राइस सेंसिटिव शहरों में बफर स्टॉक वाली प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेची जा रही है।

    सेक्रेटरी ने बताया कि भारी मात्रा में माल कांदा एक्सप्रेस के माध्यम से दिल्ली और चेन्नई पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में गुवाहाटी भेजने के लिए तीसरी खेप लोड की जा रही है. उन्होंने कहा कि बफर स्टॉक वाली प्याज के डिस्ट्रीब्यूशन से उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत मिली है और कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है.


    NCCF ने कितना बेचा सस्ता प्याज?

    रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीसीएफ की प्रबंध निदेशक एनीस जोसेफ चंद्र ने बताया है कि फेडरेशन द्वारा ने अब तक 35 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर रिटेल बिक्री करते हुए देश के विभिन्न शहरों में 1,500 टन बफर प्याज बेचा गया है. इसके अलावा कुछ राज्यों के साथ अपने स्टोर, मोबाइल वैन, सहकारी समितियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा पहचाने गए अन्य प्लेटफार्मों के जरिए बिक्री करने के लिए समझौता किया गया है।


    अभी भी कई राज्यों में 60 के पार कीमत

    उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से साफ पता चलता है कि बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री से प्याज के अखिल भारतीय रिटेल प्राइस में गिरावट जरूर देखने को मिली है और ये रिलीज से पहले के 50.79 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में बीते 28 अगस्त को 48.5 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

    हालांकि, 5 सितंबर को देश के तमाम शहरों में Onion Price पर नजर डालें, तो इसकी कीमत दिल्ली में 58 रुपये प्रति किलो, मुंबई में 53 रुपये प्रति किलो, चेन्नई में 63 रुपये प्रति किलो और रांची में 40 रुपये प्रति किलो थी, जबकि औसत थोक मूल्य 42.79 रुपये प्रति किलो था।

  • सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश

    सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश


    सिंगापुर।
    सिंगापुर (Singapore ) के गृह मंत्री के. शनमुगम (Home Minister K. Shanmugam) ने भारतीयों (Indians) को लेकर इंटरनेट पर की जा रही नस्ली और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चीन-नेपाल (China-Nepal) में आई भीषण बाढ़ और एयर इंडिया (Air India) में सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines- SIA) के निवेश से जुड़े मामलों को लेकर कुछ लोगों ने बेहद घटिया और नस्ली टिप्पणियां की हैं। शनमुगम ने कहा कि उन्होंने पुलिस से इन टिप्पणियों की जांच करने को कहा है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों को इंटरनेट की गुमनामी के पीछे छिपने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

    शनमुगम ने कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जब कई सिंगापुरवासी लापता हैं, तब भी सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नस्ली टिप्पणियां की गईं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ लोगों ने लापता सिंगापुरवासियों को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक बातें लिखीं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब 1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। शनमुगम ने कहा कि ज्यादातर सिंगापुरवासी ऐसी सोच नहीं रखते। उन्होंने बताया कि सिंगापुर रेड क्रॉस ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए 30 लाख सिंगापुर डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। सिंगापुर के लोग अलग-अलग समुदायों से होने के बावजूद जरूरत के समय एक-दूसरे और दूसरे देशों के लोगों की मदद करते हैं।


    एयर इंडिया से जुड़ा क्या है मामला

    एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश को लेकर भी सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ नस्ली टिप्पणियों की नई लहर देखने को मिली। शनमुगम ने कहा कि कुछ लोगों ने भारतीयों को लेकर सांप, करी, पराठा और काले जादू जैसी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर टेमासेक के सीईओ और सीनियर अधिकारियों को भी उनकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह कहना कि किसी अधिकारी की भारतीय मूल की वजह से वह एयर इंडिया के पक्ष में फैसला करेगा, गलत और बदनाम करने वाली बात है।

    के. शनमुगम ने जोर देकर कहा कि संबंधित अधिकारी सिंगापुर में पैदा हुए, वहीं पढ़े और पूरी तरह सिंगापुरवासी हैं। किसी व्यक्ति को उसकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एयर इंडिया की ओर से अपने शेयरधारकों से करीब 1.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी मांगे जाने की खबरों के बीच सिंगापुर एयरलाइंस को निवेश पर फैसला करना है। शनमुगम ने साफ कहा कि एयर इंडिया में निवेश जारी रखना है या नहीं, इसका फैसला सिंगापुर एयरलाइंस के निदेशक मंडल और मैनेजमेंट को करना चाहिए।

  • NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार

    NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) (National Testing Agency -NTA) की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, परिणाम तैयार करने और शिकायतों के निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा (Review) की जा रही है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी (Pralhad Joshi) लगातार विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रहे हैं। मंत्रालय का जोर एनटीए के पूरे परीक्षा तंत्र को अधिक मजबूत, विश्वसनीय, तकनीक-सक्षम और पारदर्शी बनाने पर है। इसके लिए देश और दुनिया में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं यानी ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन किया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण बदलावों की तैयारी है। इनमें परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षित संचालन, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही, तकनीकी सुरक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया को और मजबूत करना शामिल है।


    बेस्ट प्रैक्टिसेज होंगी साझा

    एनटीए में सुधार के लिए विभिन्न संस्थानों, परीक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों से बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने को कहा जा रहा है। उद्देश्य विश्वसनीयता कायम रखना है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में एक संयुक्त सचिव, तीन निदेशक और एक संयुक्त निदेशक की नियुक्ति की है।

    कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, 2005 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) अधिकारी अंशुमान शर्मा को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए एनटीए में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्रालय की ओर से 27 अगस्त को जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार, भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के अधिकारी सत्या एस., भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रवि कुमार सिंह और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी. को निदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं, 2016 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) के अधिकारी अमित समदरिया को संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया है।

    मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार, नियुक्त अधिकारियों को आदेश जारी होने के तीन सप्ताह के भीतर अपना नया पद संभालना होगा। हाल ही में सरकार ने एनटीए की परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलावों की घोषणा की थी।


    कौन से बदलाव संभावित

    – प्रश्नपत्र सुरक्षा : प्रश्नपत्रों की डिजिटल एन्क्रिप्शन, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा शुरू होने तक बहु-स्तरीय एक्सेस कंट्रोल।
    – अभ्यर्थी की पहचान : आधार/डिजिटल आईडी के साथ बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी बहु-स्तरीय पहचान व्यवस्था।
    – परीक्षा केंद्रों की निगरानी : सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग, एआई आधारित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और केंद्रों की रियल टाइम निगरानी।
    – परीक्षा केंद्रों का चयन : केंद्रों की रैंकिंग और जोखिम के आधार पर उनकी नियमित ऑडिटिंग, ताकि संदिग्ध या कमजोर केंद्रों को हटाया जा सके।
    – चार-स्तरीय जांच : प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, वितरण और परीक्षा संचालन तक अलग-अलग स्तरों पर स्वतंत्र सत्यापन।
    – तकनीकी सुरक्षा : सर्वर, परीक्षा सॉफ्टवेयर और डेटा के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑडिट, लॉग मॉनिटरिंग और बैकअप व्यवस्था।

  • सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम

    सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम


    नई दिल्ली।
    चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) को काबू में करने के लिए सरकार (Government) की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र (Southern Maharashtra) में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

    ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।


    रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी

    ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।


    चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट

    अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।


    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

    स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

    जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

    ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

    त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर
    अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • प्याज महंगा हुआ तो सरकार ने बढ़ाई सप्लाई, बफर स्टॉक खोला, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से ढुलाई शुरू

    प्याज महंगा हुआ तो सरकार ने बढ़ाई सप्लाई, बफर स्टॉक खोला, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से ढुलाई शुरू


    नई दिल्ली। प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। नासिक से देश के प्रमुख खपत केंद्रों तक प्याज की ढुलाई शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही बफर स्टॉक से भी नियंत्रित मात्रा में प्याज बाजार में उतारा जा रहा है। सरकार का मकसद पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अचानक होने वाली तेजी को रोकना है।

    अगस्त-सितंबर में बढ़ती है प्याज की मांग

    सरकार के मुताबिक, अगस्त और सितंबर में प्याज की कीमतों में मौसमी तेजी आमतौर पर देखी जाती है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के अलावा मौसम और सप्लाई-चेन से जुड़ी दिक्कतों का भी कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में बाजार में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए पहले से कदम उठाए जा रहे हैं।

    पहले चरण में 5 बड़े शहरों पर फोकस

    शुरुआती चरण में सरकार ने पांच बड़े खपत केंद्रों को चुना है। इनमें चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी शामिल हैं। नासिक से इन शहरों तक प्याज पहुंचाया जाएगा और मांग के अनुसार बाजार में इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

    सरकार के अनुसार, यदि किसी अन्य शहर में भी कीमत या सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो उसे भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

    देश में प्याज की कमी नहीं

    सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों की घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त प्याज उपलब्ध है। वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है।

    ऐसे में मौजूदा स्थिति को बड़े सप्लाई संकट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सरकार का फोकस बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने पर है।

    बफर स्टॉक से भी प्याज बाजार में उतारा

    बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की नियंत्रित मात्रा में रिलीज शुरू कर दी गई है। जरूरत के हिसाब से आगे भी इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

    प्याज की ढुलाई में रेलवे की ‘कांदा एक्सप्रेस’ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार के मुताबिक, 2025-26 में इसके जरिए करीब 88 हजार मीट्रिक टन प्याज देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया गया।

    86 रेलवे रैक से 16 शहरों तक पहुंचा प्याज

    रेलवे के 86 रैक के जरिए प्याज को देश के 16 बड़े शहरों तक पहुंचाया गया है। सरकार का कहना है कि बाजार की स्थिति और मांग के अनुसार आगे भी प्याज की ढुलाई और बफर स्टॉक से रिलीज का दायरा बढ़ाया जाएगा।

    नासिक से बड़े खपत केंद्रों तक सप्लाई बढ़ाने और बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने से आने वाले दिनों में उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। अब इसका असर अलग-अलग शहरों की खुदरा कीमतों पर कितना पड़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

  • चीनी की किल्लत के बीच सरकार बोली- हमारे पास 20-25 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक… आयात की भी तैयारी

    चीनी की किल्लत के बीच सरकार बोली- हमारे पास 20-25 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक… आयात की भी तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में चीनी की किल्लत (Sugar Crisis) की खबरों के बीच अब सरकार (Government) एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने रविवार को कहा है कि त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है। जोशी ने कहा कि रेड रॉट (गन्ने की फसल में होने वाली बीमारी) और अल नीनो की स्थितियों के कारण चीनी के उत्पादन में कमी आई है। इससे न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में चीनी सहित कुल कृषि उत्पादन में कमी आई है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि सरकार इसे लेकर चिंतित है और इसीलिए सरकार ने तुरंत कई कदम उठाए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया है कि भारत की जरूरत लगभग 280 लाख टन है और आज की स्थिति में हमारे पास 20 से 25 लाख टन से ज्यादा का अतिरिक्त स्टॉक है।


    ब्राजील से आएगी चीनी

    वहीं सहकारी चीनी मिलों की संस्था एनएफसीएसएफ के प्रमुख ने कहा कि भारत आने वाली चीनी की कुछ खेप 15 अक्तूबर से पहले देश में पहुंच सकती है। हालांकि अभी इसकी सही मात्रा का अंदाजा लगाना मुश्किल है। वहीं, जमाखोरी के खिलाफ सरकार की सख्ती से कीमतों में कुछ कमी आने लगी है।

    एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवारे ने रविवार को बताया कि फिलहाल आयात के लिए ब्राजील ही एकमात्र व्यावहारिक स्रोत है, क्योंकि पारंपरिक आपूर्तिकर्ता थाईलैंड खुद चीनी की कमी से जूझ रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सप्लाई सबसे पहले पहुंचेगी। ब्राजील से भारत तक सामान आने में 40-45 दिन लगते हैं।


    कीमतों में आ रही गिरावट

    नायकनवरे ने कहा कि केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने फेडरेशन और इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। उन्होंने बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने और कीमतों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इससे पहले चीनी की कीमत 65-67 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई थी, हालांकि शनिवार को खुले टेंडरों में 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई।

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    नई दिल्ली । उत्तराखंड सरकार राज्य की स्वास्थ सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को शाम के समय अस्पताल परिसर के भीतर ही निजी प्रैक्टिस करने की सशर्त छूट प्रदान की जाएगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मरीजों को किफायती दर पर शाम के वक्त भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    वर्तमान में राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू है, जिसके एवज में सरकार उन्हें नियमित वेतन के साथ नॉन प्रैक्टिस अलाउंस का भुगतान करती है। हालांकि, कतिपय व्यावहारिक समस्याओं और मरीजों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शाम के समय अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए यह सुविधा देने का मॉडल तैयार किया है।

    इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से ऐच्छिक रखा जाएगा और इसके संचालन के लिए तीन प्रमुख शर्तें अनिवार्य की गई हैं। पहली शर्त के अनुसार डॉक्टरों को मरीजों से बेहद न्यूनतम परामर्श शुल्क लेने की अनुमति होगी। दूसरी शर्त यह है कि परामर्श के दौरान डॉक्टर बाहर की दवाइयां नहीं लिख सकेंगे, बल्कि अस्पताल में उपलब्ध या जेनेरिक दवाएं ही सुझानी होंगी। तीसरी शर्त के तहत यदि मरीज को किसी प्रकार के ऑपरेशन या गंभीर इलाज की आवश्यकता होती है, तो वह प्रक्रिया केवल सरकारी अस्पताल में ही पूरी की जाएगी।

    स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है और जल्द ही इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से डॉक्टरों को अस्पताल परिसर के बाहर अनधिकृत क्लिनिक चलाने की आवश्यकता नहीं होगी और अस्पताल के संसाधनों का भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    विशेष रूप से पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में दोपहर दो बजे के बाद सरकारी अस्पतालों में सेवाएं सीमित हो जाती थीं। नई नीति लागू होने से पर्वतीय जिलों के निवासियों को शाम के समय भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही प्राप्त हो सकेगा। इससे निजी अस्पतालों और महंगे क्लीनिकों पर मरीजों की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा भी इस प्रकार के हाइब्रिड हेल्थकेयर मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की दक्षता को बढ़ाया जा सके। उत्तराखंड में इस निर्णय के लागू होने से न केवल आम मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि सरकारी डॉक्टरों की कार्यक्षमता का भी राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के हित में सही उपयोग हो सकेगा।

  • US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम

    US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड (Green Card Applications) पाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक बोझ से जुड़े नियमों का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियम के तहत सरकारी आर्थिक मदद लेने वाले कुछ प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन (Green Card Applications) पर सवाल उठ सकते हैं और आवेदन खारिज भी किया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (U.S. Citizenship and Immigration Services) का यह नियम 18 सितंबर से लागू होगा। इसका असर अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है।


    क्या सरकारी मदद लेने से ग्रीन कार्ड पर असर पड़ेगा?

    पहले सार्वजनिक बोझ का आकलन मुख्य रूप से दो तरह की सरकारी मदद के आधार पर किया जाता था। नए नियम में अधिकारियों को ज्यादा पहलुओं को देखने का अधिकार दिया गया है। अब आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक हालत और शिक्षा को भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा आवेदक पर निर्भर लोगों की ओर से ली गई कुछ सरकारी मदद को भी आवेदन पर फैसला करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।


    भारतीयों पर कितना पड़ सकता है असर?
    वर्ष 2023 में 78,100 भारतीयों को अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला था। इनमें करीब 60 प्रतिशत भारतीयों ने परिवार के किसी सदस्य या अमेरिकी नागरिक रिश्तेदार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल किया था। नए नियम के कारण ऐसे परिवारों में सरकारी सहायता लेने की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर परिवार का कोई सदस्य सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल करता है तो अधिकारी आवेदक की आयु, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए आवेदन पर फैसला कर सकते हैं।


    क्या अधिकारियों को आवेदन खारिज करने की ज्यादा ताकत मिलेगी?

    आव्रजन मामलों के जानकारों के अनुसार नए नियम से अधिकारियों के पास आवेदन को लेकर फैसला करने की गुंजाइश बढ़ जाएगी। यानी केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि आवेदक ने सरकारी मदद ली है या नहीं। अधिकारी उसकी पूरी परिस्थिति को देखकर यह आकलन कर सकते हैं कि वह भविष्य में सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। इससे ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो सकती है।


    किन लोगों को नियम से छूट मिलेगी?

    नए नियम का असर सभी प्रवासियों पर एक जैसा नहीं होगा। शरणार्थियों, उत्पीड़न के पीड़ितों और कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदकों को इससे छूट दी गई है। यानी इन लोगों के आवेदन पर सार्वजनिक बोझ से जुड़े नए नियम उसी तरह लागू नहीं होंगे। हालांकि सामान्य ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए उम्र, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और परिवार की परिस्थितियां अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


    18 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?
    यह नया नियम 2022 में बाइडन प्रशासन के दौरान लागू किए गए नियम को रद्द करने के बाद आया है। 18 सितंबर से इसके लागू होने के बाद ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच में सरकारी सहायता के साथ आवेदक की व्यक्तिगत और पारिवारिक स्थिति को भी ज्यादा महत्व दिया जाएगा। भारतीयों की बड़ी संख्या परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी नागरिकता हासिल करती है। ऐसे में नए नियम के बाद भारतीय आवेदकों को अपनी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

  • चीनी के दाम आसमान पर… सरकार ने तय की लिमिट, 15 दिन का स्टॉक नहीं रख सकेंगे कारोबारी

    चीनी के दाम आसमान पर… सरकार ने तय की लिमिट, 15 दिन का स्टॉक नहीं रख सकेंगे कारोबारी


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी (Sugar Stock Limit) इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती (Rising Sugar Demand) है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं।


    चीनी स्टॉक पर किस कारण लिया गया फैसला?

    सरकार के मुताबिक रिकॉर्ड चीनी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए नया आदेश जारी किया गयाहै। इस आदेश के तहत, 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख पाएंगे। यह सरकारी आदेश बुधवार को सामने आया। नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।


    कीमतों में उछाल से चिंता, जुलाई में चीनी को लेकर क्या फैसला हुआ?

    दरअसल, पिछले महीने, भारत ने डीलरों को 30 दिन से अधिक स्टॉक न रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, भारतीय चीनी की कीमतें पिछले महीने 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है। इससे पहले मंगलवार को आई रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत चीनी आपूर्ति बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहा है। खबर के मुताबिक सरकार सीमित शुल्क-मुक्त आयात और थोक व्यापारियों के लिए सख्त स्टॉक सीमा जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।


    चीनी की मांग और आपूर्ति की स्थिति कैसी?

    गौरतलब है कि भारत में अगस्त से नवंबर तक चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। बिस्किट और कन्फेक्शनरी निर्माता जैसे थोक उपभोक्ता त्योहारों से पहले स्टॉक बनाते हैं। अनियमित बारिश और शुष्क मौसम ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। चीनी भारत में राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यह कई गरीब परिवारों के लिए कैलोरी का एक सस्ता स्रोत है।


    भारत से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों?

    इससे पहले मई में चीनी निर्यात पर रोक लगाई गई थी। सरकार ने कहा था कि निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है।