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  • तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां

    तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां


    ग्वालियर । ग्वालियर के स्वदेशी मेले में इस बार धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में रखी गई मैग्नेटिक रामायण लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस खास पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लिखी रामचरितमानस की चौपाइयों और श्रीमद्भागवत के श्लोकों को छूते ही उनका पाठ सुनाई देने लगता है। इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के साथ साथ सुनने का अवसर भी मिल रहा है। पारंपरिक धार्मिक साहित्य को तकनीक की मदद से लोगों तक पहुंचाने का यह प्रयास खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    छूते ही सुनाई देने लगता है चौपाइयों का पाठ

    बोलने वाली रामायण की खासियत के बारे में वंदना भदौरिया ने बताया कि इसमें रामचरितमानस की चौपाइयां और श्रीमद्भागवत के श्लोक मुद्रित हैं। पुस्तक में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके माध्यम से पाठक किसी चौपाई या श्लोक को छूते हैं तो उससे संबंधित पाठ सुनाई देने लगता है। इस सुविधा के कारण लोगों को धार्मिक ग्रंथों का पाठ सुनने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी पसंद की चौपाई या श्लोक चुनकर उसका पाठ सुन सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों में कई बार शब्दों के सही उच्चारण और उनके भाव को समझना लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। पाठ सुनने से लोगों को शब्दों का उच्चारण समझने और धार्मिक साहित्य से जुड़ने में मदद मिलती है। जो लोग नियमित रूप से रामचरितमानस या श्रीमद्भागवत का पाठ करना चाहते हैं उनके लिए भी यह पुस्तक एक अलग अनुभव प्रदान करती है।

    बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास सुविधा

    मैग्नेटिक रामायण की यह तकनीक अलग अलग उम्र के लोगों के लिए उपयोगी है। छोटे बच्चों को धार्मिक चौपाइयों और श्लोकों से परिचित कराने में यह तरीका मददगार हो सकता है। बच्चे पुस्तक में लिखे पाठ को देखकर और उसे सुनकर धार्मिक साहित्य के प्रति रुचि विकसित कर सकते हैं। वहीं बुजुर्गों और उन लोगों के लिए भी यह सुविधा लाभकारी है जिन्हें धार्मिक ग्रंथ पढ़ने में कठिनाई होती है।

    पुस्तक को छूकर पाठ सुनने की सुविधा धार्मिक साहित्य को अधिक सहज और सरल बनाती है। इसमें पाठक अपनी पसंद के हिस्से को सुन सकते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार समय दे सकते हैं। इस तरह पढ़ने और सुनने का मेल धार्मिक ग्रंथों को समझने का एक नया तरीका प्रस्तुत करता है।

    परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास

    आमतौर पर धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन पढ़कर या किसी व्यक्ति से पाठ सुनकर किया जाता है। लेकिन मैग्नेटिक रामायण इस अनुभव को तकनीक के माध्यम से अलग रूप देती है। इसमें धार्मिक ग्रंथों की पारंपरिक सामग्री के साथ ऐसी सुविधा जोड़ी गई है जिससे पाठक सीधे चौपाइयों और श्लोकों का पाठ सुन सकते हैं।

    स्वदेशी मेले में इस पुस्तक को देखने और इसकी कार्यप्रणाली समझने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। मैग्नेटिक रामायण केवल एक पुस्तक के रूप में ही नहीं बल्कि पढ़ने और सुनने को जोड़ने वाले माध्यम के रूप में भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

  • ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में 3 हजार लीटर दूध की खीर का महाभोग, 20 हजार श्रद्धालुओं को मिलेगा प्रसाद

    ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में 3 हजार लीटर दूध की खीर का महाभोग, 20 हजार श्रद्धालुओं को मिलेगा प्रसाद


    ग्वालियर । शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ग्वालियर के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान अचलनाथ को मेवा और केसर से तैयार विशेष खीर का महाभोग लगाया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां की गई हैं। खीर बनाने के लिए ग्वालियर चंबल अंचल के 50 से अधिक गांवों से करीब 3 हजार लीटर दूध एकत्र किया गया है। इस महाभोग के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर समिति को उम्मीद है कि आयोजन में 15 से 20 हजार श्रद्धालु पहुंचेंगे। शरद पूर्णिमा पर भगवान शिव के दर्शन और विशेष प्रसाद पाने के लिए भक्तों में उत्साह है।

    अचलेश्वर मंदिर में खीर तैयार करने का काम रात 12 बजे से शुरू किया जाएगा। इसके लिए करीब 40 हलवाई और अन्य कर्मचारियों की टीम लगाई जाएगी। खीर बनाने में लगभग 300 किलो चावल और 500 किलो शक्कर का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा मेवा और केसर भी मिलाए जाएंगे ताकि प्रसाद को विशेष रूप दिया जा सके। इतनी बड़ी मात्रा में खीर तैयार करने के लिए सामग्री की व्यवस्था पहले से की गई है। आयोजन की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके लिए आसपास के दर्जनों गांवों से दूध एकत्र करने की व्यवस्था बनाई गई।

    मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश ऐरन के मुताबिक आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों के लिए अलग अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर समिति के करीब 3800 सदस्यों के लिए विशेष इंतजाम रहेगा। प्रत्येक सदस्य को 500 ग्राम खीर देने की व्यवस्था बनाई गई है। इसके अतिरिक्त अन्य श्रद्धालुओं के लिए 5000 कूपन तैयार किए गए हैं। प्रसाद वितरण के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोकन प्रणाली अपनाई जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को प्रसाद प्राप्त करने में सुविधा होने की उम्मीद है।

    शरद पूर्णिमा पर खीर का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन खीर बनाकर भगवान को अर्पित की जाती है और फिर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इसी आस्था के चलते देश के कई हिस्सों में मंदिरों और घरों में विशेष पूजा की जाती है। ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव मंदिर में होने वाला यह आयोजन भी श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है। यहां भगवान अचलनाथ को खीर का महाभोग लगाने के बाद भक्तों के बीच प्रसाद बांटा जाएगा।

    आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रसाद वितरण को व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मंदिर समिति की ओर से सदस्यों दानदाताओं और श्रद्धालुओं के सहयोग से कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने की तैयारी है। खीर की उपलब्धता से लेकर पैकिंग और वितरण तक की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन के दौरान कतारों के प्रबंधन और टोकन व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी ताकि भीड़ के बीच अव्यवस्था न हो।

    करीब 3 हजार लीटर दूध और बड़ी मात्रा में अन्य सामग्री से तैयार होने वाला यह महाभोग अचलेश्वर मंदिर के शरद पूर्णिमा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। 50 से अधिक गांवों के सहयोग से जुटाई गई सामग्री इस आयोजन में स्थानीय सहभागिता को भी दर्शाती है। मंदिर समिति को उम्मीद है कि श्रद्धालु भगवान अचलनाथ के दर्शन कर खीर का प्रसाद प्राप्त करेंगे और धार्मिक आयोजन में शामिल होंगे। शरद पूर्णिमा के अवसर पर ग्वालियर में यह आयोजन आस्था और सामूहिक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बनने जा रहा है।

  • ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन फिर टला, अमित शाह का दौरा अब दिवाली के बाद

    ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन फिर टला, अमित शाह का दौरा अब दिवाली के बाद


    ग्वालियर । ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के भूमिपूजन का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 29 अक्टूबर को प्रस्तावित ग्वालियर दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन किया जाना था। दौरा दूसरी बार टलने से आयोजन की तैयारियों पर भी असर पड़ा है। अब दिवाली के बाद कार्यक्रम की नई तारीख तय होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन के अनुसार एक से दो दिन में नई प्रस्तावित तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    ग्वालियर के साडा क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना औद्योगिक विकास और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके लिए पहले 12 अक्टूबर को भूमिपूजन का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था लेकिन अमित शाह की व्यस्तता के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 29 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। इस बार भी कार्यक्रम आगे बढ़ने से परियोजना के औपचारिक शुभारंभ का इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयोजन की नई तारीख अभी अंतिम रूप से घोषित नहीं हुई है।

    अमित शाह के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। एयरपोर्ट से मेला ग्राउंड तक सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की योजना बनाई जा रही थी। वीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों के बीच समन्वय और आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा था। कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी साडा के साथ मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई है। दौरा स्थगित होने के बाद अब नई तारीख के अनुसार व्यवस्थाओं को दोबारा तैयार करना होगा।

    प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार और तकनीकी क्षेत्र पर केंद्रित होना है। योजना के तहत साडा क्षेत्र में करीब 170 एकड़ जमीन पर टेलीकॉम टेक्नोलॉजी से जुड़ा एकीकृत इकोसिस्टम विकसित किया जाना है। मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य दूरसंचार उपकरणों के निर्माण और आधुनिक डिजिटल तकनीक से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

    परियोजना में 5जी और भविष्य की 6जी तकनीक से संबंधित उपकरणों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा। शुरुआती स्तर पर करीब 2000 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 4500 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों की घोषणा की गई है। भविष्य में इस क्षेत्र में आठ से नौ हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित करने का लक्ष्य भी रखा गया है। यदि योजना के मुताबिक औद्योगिक गतिविधियां आगे बढ़ती हैं तो ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में तकनीकी कौशल वाले युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ आपूर्ति श्रृंखला और सहायक कारोबार के विस्तार की भी संभावना है। हालांकि इन संभावित लाभों को जमीन पर उतारने के लिए परियोजना का समय पर विकास और निवेश का वास्तविक क्रियान्वयन अहम होगा। फिलहाल सभी की नजर भूमिपूजन की नई तारीख पर टिकी है। दिवाली के बाद अमित शाह के ग्वालियर दौरे की तारीख तय होने के साथ ही आयोजन और परियोजना के अगले चरण को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

  • मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान

    मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान


    ग्वालियर । ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों ने कथित प्रताड़ना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें 18 बालक और 8 बालिकाएं शामिल हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति की कार्रवाई के बाद बच्चों के बयान दर्ज किए गए। अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते समय कई बच्चे भावुक हो गए। बच्चों ने बताया कि वे अब मदरसे में नहीं रहना चाहते और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करना चाहते हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने मदरसे की इमारत सील कर दी है और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की है।

    बच्चों के आरोपों के मुताबिक मामूली गलती होने पर उन्हें लोहे की रॉड पर लटकाकर पीटा जाता था। कुछ बच्चों ने घंटों मुर्गा बनाकर रखने की बात भी कही है। उनका कहना है कि इस तरह की सजा से उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी। बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि वे वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी लेकिन बच्चों के बयान के आधार पर प्रशासन और बाल अधिकार से जुड़ी एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    बच्चों ने भोजन को लेकर भी शिकायत की है। उनके मुताबिक सुबह और शाम उन्हें दो-दो रोटियां दी जाती थीं और अधिक खाना मांगने पर मना कर दिया जाता था। बालिकाओं ने आरोप लगाया कि मदरसे में आने वाली एक महिला जिन्हें वे बाजी कहती थीं उनसे घरेलू काम करवाती थीं। उनके अनुसार उन्हें झाड़ू-पोछा लगाने बर्तन और कपड़े धोने तथा टॉयलेट साफ करने के लिए कहा जाता था। छत से कपड़े उतारने में देरी होने पर मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

    बालिकाओं ने कपड़े पहनने को लेकर दबाव बनाने की बात भी कही है। उनके आरोपों के मुताबिक उन पर हिजाब पहनने के लिए जोर दिया जाता था और विरोध करने पर डराने वाली बातें कही जाती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित महिला के बेटे की ओर से रात में खिड़की से ताक-झांक की जाती थी। बच्चों का कहना है कि शिकायत के बावजूद उनकी बात पर कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।

    प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मदरसे से इस्लामिक किताबें और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने इमारत को सील करते हुए संचालक से मदरसा चलाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। झांसी रोड के एसडीएम अतुल सिंह के मुताबिक मदरसे को सील कर नोटिस जारी किया गया है। बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की जांच और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। रेस्क्यू किए गए बच्चों ने अधिकारियों के सामने मदरसे में वापस नहीं जाने की इच्छा जताई है। अब संबंधित विभागों के सामने उनकी सुरक्षित देखभाल शिक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना भी जरूरी होगा। फिलहाल मदरसे की इमारत सील है और प्रशासन दस्तावेजों तथा बच्चों के बयानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया कर रहा है।

  • पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए

    पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए


    ग्वालियर। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर एक शादीशुदा महिला से करीब 2 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले मोबाइल नंबर से महिला को फोन किया और खुद को विदेशी नागरिक बताकर बातचीत शुरू की। कुछ समय तक दोस्ती का भरोसा जीतने के बाद उसने महिला को भारी मात्रा में सोना गिफ्ट करने का लालच दिया। इसके बाद आरोपी ने कहानी बनाई कि वह सोना लेकर भारत आ रहा था लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने खुद को छुड़ाने के लिए 2 लाख रुपए की जरूरत बताई। उसकी बातों में आकर महिला ने अलग-अलग ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए 12 बार में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में आरोपी ने और पैसे मांगने शुरू किए तो महिला को ठगी का शक हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना बताई। शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार गेरू वाले बंगले के पास त्यागी नगर मुरार निवासी 25 वर्षीय गजल बाथम सोशल मीडिया पर एक अनजान व्यक्ति के संपर्क में आई थी। आरोपी पिछले कुछ दिनों से उसकी पोस्ट पर कमेंट कर रहा था। इसी दौरान 3 अक्टूबर 2026 को महिला के मोबाइल पर पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले एक अनजान नंबर से कॉल आया। महिला को शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि नंबर पाकिस्तान के कंट्री कोड से जुड़ा है। फोन करने वाले ने खुद को विदेशी नागरिक बताया और मीठी बातें करके उससे दोस्ती बढ़ाने की कोशिश की।

    अगले दिन 4 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने दोबारा फोन किया। उसने महिला से आधार कार्ड मांगा लेकिन महिला ने अपना आधार कार्ड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी ने दोस्ती का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह उसे बड़ी मात्रा में सोना गिफ्ट करना चाहता है और खुद लेकर भारत आ रहा है। सोना मिलने की उम्मीद में महिला उसकी बातों पर भरोसा करने लगी।

    कुछ देर बाद आरोपी ने घबराए हुए अंदाज में फोन किया और दावा किया कि वह सोना लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन एयरपोर्ट पर एयरफोर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने महिला को बताया कि अधिकारियों ने उसे छोड़ने के लिए 2 लाख रुपए मांगे हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि उसके पास करीब 20 लाख रुपए का सोना है और यदि वह रकम भेज देगी तो वह इस परेशानी से बाहर निकल जाएगा। पुलिस के मुताबिक इसी कहानी के जरिए आरोपी ने महिला को पैसे भेजने के लिए तैयार किया।

    इसके बाद आरोपी ने महिला को अलग-अलग दुकानों के ऑनलाइन क्यूआर कोड भेजे। महिला ने उन कोड पर कुल 12 ट्रांजेक्शन में 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम कई हिस्सों में भेजी गई जिसमें 19 हजार रुपए से लेकर 36 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन शामिल थे। पैसे मिलने के बाद भी आरोपी नहीं रुका और उसने महिला से और रकम की मांग शुरू कर दी।

    जब महिला ने बताया कि उसके पास अब पैसे नहीं हैं तो आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करने लगा। इसके बाद महिला को संदेह हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना की जानकारी दी। ठगी का अहसास होने पर साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।

    मुरार थाना प्रभारी गोविंद बगोली के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए रकम ट्रांसफर की गई है उनकी बैंकिंग और तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार

    ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार


    ग्वालियर। ग्वालियर में लापता और अपहृत बालक-बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा को हरियाणा से बरामद कर लिया है। छात्रा करीब डेढ़ महीने पहले कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान छात्रा के मोबाइल की लोकेशन हरियाणा के कैथल में मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और 23 अक्टूबर को आजाद कॉलोनी स्थित एक कमरे से उसे बरामद कर लिया। पुलिस के मुताबिक एक युवक छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वह मौके से फरार हो गया। अब पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस के अनुसार ग्वालियर के उपनगर मुरार निवासी एक व्यक्ति ने 7 सितंबर 2026 को थाने में अपनी 21 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। परिजन ने बताया था कि छात्रा सुबह करीब 9 बजे मुरार स्थित गर्ल्स कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह कॉलेज से लौट आएगी लेकिन देर रात तक उसके घर नहीं पहुंचने पर चिंता बढ़ गई। परिजनों ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।

    शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देश पर और सीएसपी मुरार संदीप बांगरे के मार्गदर्शन में छात्रा की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व मुरार थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद बल्लभ बगोली ने किया। पुलिस ने संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाने के साथ ही मुखबिर तंत्र और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

    तलाश के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्रा का मोबाइल हरियाणा के कैथल में सक्रिय हुआ है। इस सुराग के आधार पर पुलिस टीम तत्काल कैथल के लिए रवाना हुई। स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद टीम ने 23 अक्टूबर 2026 को शुगर मिल के पास स्थित आजाद कॉलोनी में एक कमरे पर दबिश दी। इसी दौरान छात्रा को बरामद कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक छात्रा को सुरक्षित ग्वालियर लाया गया है। उसे 24 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे ग्वालियर पहुंचाया गया।

    पुलिस का कहना है कि छात्रा को अपने साथ ले जाने वाला युवक कार्रवाई के दौरान मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। फिलहाल पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आ सके और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

    एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार से लापता कॉलेज छात्रा को हरियाणा के कैथल से बरामद किया गया है। पुलिस अब छात्रा के बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अगला कदम उठाएगी।

  • से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण

    से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण


    ग्वालियर । दीपावली के त्योहार पर ग्वालियर शहर में घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे का समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। त्योहार के दौरान बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। टिपर वाहनों से रात में भी कचरा उठाया जाएगा और जरूरत के अनुसार प्रत्येक वाहन के दो से तीन फेरे लगवाए जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान किसी भी वार्ड में कचरा जमा न हो और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न होने पाए।

    अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डिपो प्रभारियों के साथ सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखे जाएं ताकि टिपर वाहनों को कचरा खाली करने के लिए इंतजार न करना पड़े। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ड्राइवरों की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे रात में कचरा संग्रहण का काम जारी रखने और वाहनों के अतिरिक्त फेरे लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों को ग्रीन नेट से ढककर ले जाने के निर्देश भी दिए हैं।

    सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम 29 नए टिपर वाहन अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इन वाहनों के जुड़ने के बाद सक्रिय वाहनों की संख्या बढ़कर 286 होने की बात कही गई है। अतिरिक्त वाहनों से कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ सकती है और अलग-अलग वार्डों में सफाई कार्य को गति मिल सकती है। हालांकि केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ नियमित फेरे लगाना और कचरे को समय पर ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाना भी जरूरी रहेगा।

    नगर निगम ने कचरा संग्रहण में लापरवाही रोकने के लिए वाहनों के वजन की जांच करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टिपर वाहन कम कचरा लेकर ट्रांसफर स्टेशन न पहुंचें। इसके लिए कचरा संग्रहण के बाद वाहन का वजन कराया जाएगा और ट्रांसफर स्टेशन पहुंचने पर दोबारा वजन जांचने की व्यवस्था की जाएगी। यदि दोनों वजन में अंतर पाया जाता है तो संबंधित ड्राइवर हेल्पर और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा संग्रहण की निगरानी करना और जिम्मेदारी तय करना है।

    दीपावली के दौरान बाजारों में खरीदारी और घरों की सफाई के कारण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कचरा निकल सकता है। ऐसे में समय पर कचरा नहीं उठने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ने की आशंका रहती है। नगर निगम ने इसी चुनौती को देखते हुए रात में भी सफाई कार्य जारी रखने की योजना बनाई है। अतिरिक्त फेरे और देर रात तक खुले रहने वाले ट्रांसफर स्टेशन इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे।

    हालांकि शहर के कई इलाकों में पहले से कचरे के ढेर लगे होने और सड़कों पर गंदगी फैलने की शिकायतों के बीच निगम की तैयारियों की प्रभावशीलता पर भी नजर रहेगी। नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों का पालन कितना नियमित रूप से होता है और प्रत्येक वार्ड में कचरे का उठाव समय पर हो पाता है या नहीं। दीपावली से पहले नगर निगम के सामने सफाई व्यवस्था सुधारने और त्योहार के दौरान शहर को साफ रखने की चुनौती है।

  • 16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च

    16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक हादसे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए ग्राम सातऊं शीतला माता कल्याण समिति आगे आई है। समिति ने मृतकों के परिजनों और घायलों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही हादसे से प्रभावित 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने की भी घोषणा की गई है। इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो हादसे के बाद आर्थिक और पारिवारिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया जबकि घायल लोगों और उनके परिजनों के सामने इलाज तथा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं। पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सहायता देने की योजना तैयार की है। इसके लिए अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहत संबंधी निर्णय लिए।

    समिति के फैसले के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं हादसे में घायल हुए लोगों के परिवारों को 10 हजार रुपये की मदद देने का निर्णय लिया गया है। इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देना है। किसी परिवार के लिए अचानक अपने कमाने वाले सदस्य या प्रियजन को खो देना बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की ओर से मिलने वाली सहायता उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

    समिति ने प्रभावित परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 40 प्रभावित परिवारों को लाभ देने की बात कही गई है। शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। हादसे के बाद जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों की पहचान और खर्च से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    इस संबंध में आयोजित बैठक में समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर के साथ मजबूत सिंह गजराज सिंह जितेंद्र सिंह और कृष्णकांत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में हादसे से प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों पर चर्चा की गई और उनकी मदद के लिए सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया गया। समिति के सदस्यों ने सहायता संबंधी निर्णय सर्वसम्मति से लिए ताकि पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई जा सके।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने ग्वालियर में कई परिवारों को गहरे दुख और कठिनाइयों में डाल दिया है। ऐसे में आर्थिक मदद के साथ बेटियों की शादी का खर्च उठाने का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग का उदाहरण है। अब सहायता किस प्रक्रिया के तहत और कब तक परिवारों तक पहुंचाई जाएगी इस पर नजर रहेगी। फिलहाल समिति के इस निर्णय से हादसे के पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। 

  • ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा

    ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन घटना के कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाने में जुट गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर जिला दंडाधिकारी यानी ADM सीबी प्रसाद को सौंपी है। प्रशासन ने आम लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से अपील की है कि वे घटना से जुड़ी जानकारी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराएं ताकि जांच में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया जा सके।

    यह हादसा 18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ था। जानकारी के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के पास तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से 16 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद से ही हादसे की परिस्थितियों और संभावित चूक को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मजिस्ट्रियल जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कौन से कारण जिम्मेदार रहे। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रशासन ने हादसे से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 26 से 28 अक्टूबर तक तीन दिन निर्धारित किए हैं। जांच अधिकारी ADM सीबी प्रसाद के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनका मामले से कोई व्यक्तिगत हित या विवाद नहीं है वे घटना से संबंधित जानकारी और साक्ष्य दे सकते हैं। इसके लिए प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित लोग 26 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ADM न्यायालय कक्ष क्रमांक 201 ग्वालियर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकेंगे। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी एकत्र करना है।

    जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हादसे के समय मंदिर के आसपास मौजूद लोगों के पास घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसके अलावा उपलब्ध दस्तावेज तस्वीरें और वीडियो भी जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खबर में लाइव वीडियो को भी जांच का संभावित आधार बताया गया है। ऐसे दृश्य उपलब्ध होने पर उनसे हादसे के समय ट्रक की स्थिति घटनास्थल की परिस्थितियों और घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी वीडियो या अन्य सामग्री की प्रामाणिकता और उपयोगिता जांच के दौरान परखी जाएगी।

    मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य केवल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाना ही नहीं बल्कि संभावित लापरवाही और सुरक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल करना भी है। मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है इसलिए प्रवेश द्वार के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की आवाजाही जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ेंगे। प्रशासन की अपील है कि जिन लोगों के पास घटना से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी है वे निर्धारित तारीख और समय पर अपने साक्ष्य प्रस्तुत करें।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब लोगों की नजर मजिस्ट्रियल जांच पर रहेगी कि हादसे के वास्तविक कारण क्या सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम सुझाए जाते हैं। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी संभावित कारण या जिम्मेदारी को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।