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  • ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था

    ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विजयादशमी के अवसर पर दशहरा जुलूस रावण दहन और नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मंगलवार को शहर में धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और कुछ रास्तों को बंद रखने की व्यवस्था की है। ऐसे में घर से निकलने वाले वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित मार्गों की जानकारी जरूर लें और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

    दशहरा जुलूस अचलेश्वर मंदिर से शुरू होकर फूलबाग मैदान तक पहुंचेगा। जुलूस के निर्धारित मार्ग में दाल बाजार लोहिया बाजार ऊंट पुल पाटनकर चौराहा दौलतगंज महाराज बाड़ा सराफा बाजार गश्त का ताजिया राम मंदिर छप्परवाला पुल शिंदे की छावनी और गुरुद्वारा शामिल हैं। इन रास्तों से जुलूस गुजरने के दौरान यातायात नियंत्रित रहेगा। इस वजह से संबंधित क्षेत्रों में वाहन चालकों को इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरे रास्तों से जाना पड़ सकता है। खासकर बाजार और प्रमुख चौराहों के आसपास निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना चाहिए।

    यातायात व्यवस्था के तहत जलालपुर से सागरताल होते हुए बहोड़ापुर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को रितुराज होटल और मोतीझील वाले रास्ते से जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा चार शहर का नाका से सागरताल रोड और ट्रांसपोर्ट नगर से सागरताल की ओर जाने वाले मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। इन बदलावों का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ वाले इलाकों में यातायात को व्यवस्थित रखना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    दशहरे पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के फूलबाग मैदान पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मैदान के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक रावण दहन में शामिल होने वाले लोगों के लिए मैदान नंबर दो और चिड़ियाघर के सामने पार्किंग की सुविधा रखी गई है। वाहन चालकों को कोशिश करनी चाहिए कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही वाहन खड़े करें ताकि आयोजन स्थल के आसपास अनावश्यक जाम न लगे और पैदल आने जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।

    शहर में दशहरा जुलूस के साथ नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के चलते भी कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में वाहन चालकों को पुलिस के निर्देशों का पालन करना चाहिए और बैरिकेडिंग वाले रास्तों में जबरन प्रवेश करने से बचना चाहिए। जिन लोगों को महाराज बाड़ा दाल बाजार फूलबाग या सागरताल क्षेत्र की ओर जाना है उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग पहले से तय कर लेना चाहिए। आपात स्थिति में पुलिसकर्मियों के निर्देशों के अनुसार रास्ता बदलना भी जरूरी होगा।

    दशहरा शहर में धार्मिक उत्साह और सामूहिक आयोजन का अवसर है लेकिन बड़ी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में लोगों की सावधानी और प्रशासन के निर्देशों का पालन जाम और अव्यवस्था को कम करने में मदद कर सकता है। घर से निकलने से पहले ट्रैफिक रूट की जानकारी लेना और निर्धारित पार्किंग का इस्तेमाल करना ही बेहतर रहेगा।

  • 15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात

    15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सातऊ गांव के शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले मेले में खिलौनों प्रसाद झूलों और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी होती है। इसी उम्मीद के साथ दूरदराज के जिलों और दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अक्टूबर की रात मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर से लोग दुखी हैं और इसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक दो दिनों में 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है और नवमी से पहले ही करीब 80 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर लौटने लगे।

    सोमवार को दुर्गा नवमी के दिन मेले का नजारा सामान्य वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों पर ग्राहकों की चहल पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा था। कई दुकानदार सामान पैक करते नजर आए तो कुछ आखिरी समय तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नौ दिनों तक चलने वाले मेले के लिए पहले से सामान खरीदा था और दुकान लगाने के लिए किराया तथा परिवहन पर भी खर्च किया था। लेकिन हादसे के बाद लोगों के नहीं पहुंचने से उनकी कमाई की उम्मीद टूट गई। कुछ व्यापारियों के लिए तो दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भी मेले में कारोबार की ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।

    हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर छोटे और बड़े व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। इस बार भी दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद थी लेकिन हादसे के बाद मेले में आने वालों की संख्या बेहद कम रह गई। छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पिछले पांच साल से यहां खिलौनों की दुकान लगाती हैं। उन्हें इस बार भी अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन ग्राहकों की कमी ने उन्हें निराश कर दिया। वहीं दतिया से पहली बार दुकान लगाने आईं दामिनी को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि कारोबार नहीं होने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ गया है।

    ग्वालियर की मंजिता देवी के मुताबिक उन्होंने करीब एक लाख रुपये का सामान बिक्री के लिए रखा था लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण सामान नहीं बिक सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक जाने में रोक लगाई जाती है तो भारी ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी भी नुकसान से परेशान हैं। वे हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं और उनके मुताबिक सामान्य सोमवार को भी इस बार की तुलना में ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 50 हजार रुपये का कर्ज है और अब कारोबार ठप होने से इसकी भरपाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने भी हादसे पर दुख जताया। उनका कहना है कि मंदिर के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उनके मुताबिक नवमी पर इस बार सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर का मजबूत प्रवेश द्वार पहले भी कई लोगों की जान बचाने में मददगार रहा है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करेगा।

    इस बीच कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपये और बिजली के लिए प्रतिदिन 200 रुपये मांगने के आरोप भी लगाए हैं। कुछ ने धमकी और मारपीट की शिकायतें भी बताई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के बाद मेले में पसरे सन्नाटे ने व्यापारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने बचा हुआ सामान वापस ले जाने और हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा

    ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा


    ग्वालियर। ग्वालियर में बदहाल सड़कों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। शहर के प्रमुख मार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण करने के लिए 108 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुल 28 सड़कों को विकसित करने की तैयारी है। हालांकि शहर में सड़क सुधार की नई योजना के बीच निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं तो कुछ स्थानों पर निर्माण के बाद सड़कें दोबारा धंसने की शिकायतें सामने आई हैं। सड़क सुधार का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अब नगर निगम की कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
    नगर निगम की प्रस्तावित योजना में शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें एजी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट तक का मार्ग होटल सनबीम से मानसिंह चौराहे तक की सड़क टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहा भिंड रोड से सेंट्रल एकेडमी हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल और चार शहर का नाका लधेड़ी से जलालपुर तथा कम्पू थाना से गुड़ी-गुड़ी का नाका तक के मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा माधोगंज थाना से हेमसिंह की परेड और महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया तक की सड़क का भी विकास किया जाना है। सहायक नगर निवेशक अमित गुप्ता के अनुसार नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के प्रयासों से प्रदेश सरकार की द्वारका योजना के तहत इन मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना का उद्देश्य शहर में आवागमन को बेहतर बनाना और लोगों को खराब सड़कों से राहत दिलाना है।
    शहर में सड़क निर्माण की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गोले का मंदिर चेतकपुरी शताब्दीपुरम और दीनदयाल नगर जैसे इलाकों में लोग लंबे समय से सड़क संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है वहीं वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाती है। सिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्र की सड़कें भी इन समस्याओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसके धंसने की शिकायतें निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के बीच सड़कों की जिम्मेदारी को लेकर भी खींचतान की स्थिति सामने आती रही है।
    ग्वालियर में इससे पहले भी धूल से राहत दिलाने के लिए डस्ट फ्री रोड योजना घोषित की गई थी। इस योजना के तहत करीब 40 किलोमीटर लंबाई की 18 सड़कों को धूल मुक्त बनाने के साथ पानी का छिड़काव करने और एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि इस योजना के परिणामों को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नई सड़क विकास योजना को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। वहीं फूलबाग से गिरवाई तक प्रस्तावित 926 करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना के निर्माण से भी शहर में धूल बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं।
    अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नई सड़कें बनाना नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। सड़क निर्माण में मानकों का पालन समय पर मरम्मत और काम की नियमित निगरानी जरूरी होगी। यदि नई सड़कें कुछ ही समय में खराब होने लगती हैं तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल पाएगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि 108 करोड़ रुपये की इस कार्ययोजना से आवागमन सुगम होगा और गड्ढों तथा धूल की समस्या कम होगी। अब देखना होगा कि योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और ग्वालियर की सड़कों की स्थिति में वास्तव में कितना सुधार आता है।

  • ग्वालियर में बादलों का डेरा, सुबह हुई बूंदाबांदी, अगले दो दिन बारिश और तेज हवाओं से बदलेगा मौसम

    ग्वालियर में बादलों का डेरा, सुबह हुई बूंदाबांदी, अगले दो दिन बारिश और तेज हवाओं से बदलेगा मौसम


    ग्वालियर। ग्वालियर में शनिवार सुबह मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच हुई हल्की बूंदाबांदी ने वातावरण में ठंडक घोल दी। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और गर्मी का सामना कर रहे लोगों को सुबह के समय राहत महसूस हुई। ठंडी हवाओं और बढ़ी हुई नमी के कारण मौसम सुहावना बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 48 घंटों के दौरान ग्वालियर और आसपास के इलाकों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में अगले दो दिन शहर के मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
    शनिवार सुबह दर्ज किए गए मौसम के आंकड़ों के मुताबिक ग्वालियर का न्यूनतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक था। सुबह 5:30 बजे तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि सुबह 8:30 बजे यह बढ़कर 23.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 93 प्रतिशत रही जो सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक थी। वातावरण में नमी बढ़ने और बादल छाए रहने के कारण सुबह मौसम में ठंडक महसूस हुई। इस दौरान शहर में 0.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
    पिछले कुछ दिनों के तापमान पर नजर डालें तो ग्वालियर में मौसम लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मानसून की विदाई के बाद शहर में तेज धूप के कारण अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा था। इससे लोगों को दिन के समय गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि पिछले दो दिनों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस था जबकि शुक्रवार को यह घटकर 30.3 डिग्री सेल्सियस रह गया। यानी एक ही दिन में अधिकतम तापमान में 4.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। इस बदलाव के बाद शनिवार सुबह हुई बूंदाबांदी ने मौसम में ठंडक बढ़ने के संकेत दिए।
    मौसम में आए इस बदलाव के पीछे बादलों की सक्रियता और हवाओं की दिशा में परिवर्तन को प्रमुख वजह माना जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसमी गतिविधियां बनी हुई हैं। इसका असर ग्वालियर चंबल संभाग के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। बादलों की आवाजाही के कारण धूप का असर कम हो रहा है और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की स्थिति बन रही है। हालांकि दिन के समय बादल छंटने और धूप निकलने पर तापमान में बढ़ोतरी भी हो सकती है। इसलिए पूरे दिन मौसम एक जैसा रहने की संभावना नहीं है।
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों में ग्वालियर सहित आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। बारिश और हवाओं के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लोगों को बदलते मौसम के बीच स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। फिलहाल शनिवार सुबह हुई बूंदाबांदी ने गर्मी से कुछ राहत जरूर दी है। अब आने वाले दो दिनों में बादलों की सक्रियता और बारिश की स्थिति तय करेगी कि ग्वालियर में ठंडक कितनी बढ़ती है और दिन के तापमान पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • ग्वालियर में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हथकड़ी सहित भागा चोरी का आरोपी, होटल में खाना खिलाने के बाद फ्लैट पर सो गए जवान

    ग्वालियर में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हथकड़ी सहित भागा चोरी का आरोपी, होटल में खाना खिलाने के बाद फ्लैट पर सो गए जवान


    ग्वालियर । ग्वालियर में पुलिस की लापरवाही का एक मामला सामने आया है जहां चोरी के आरोप में पकड़ा गया एक बंदी हथकड़ी सहित पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। आरोपी को हाथ में चोट लगने के बाद इलाज कराने के लिए छतरपुर से ग्वालियर लाया गया था। लेकिन अस्पताल में उपचार नहीं मिलने पर पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में सुरक्षित रखने के बजाय अपने एक रिश्तेदार के फ्लैट पर ले जाने का फैसला किया। आरोप है कि रात में पुलिसकर्मी बंदी को होटल भी लेकर गए जहां उसने खाना खाया। इसके बाद सभी विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित लोटस विला के एक फ्लैट पर पहुंचे और सो गए। सुबह जब पुलिसकर्मियों की नींद खुली तो आरोपी वहां से गायब था जबकि उसकी हथकड़ी मौके पर ही पड़ी मिली। घटना के बाद पुलिस विभाग में सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी के दौरान बरती गई सावधानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    सीएसपी विश्वविद्यालय रवि भदौरिया के मुताबिक छतरपुर पुलिस में पदस्थ आरक्षक विजय यादव शुभम शर्मा और संदीप चोरी के आरोप में पकड़े गए बंदी सन्नी पाल को इलाज के लिए ग्वालियर लेकर आए थे। करीब 30 वर्षीय सन्नी पाल उत्तराखंड का निवासी बताया जा रहा है। उसके हाथ में चोट लगी थी जिसके उपचार के लिए पुलिसकर्मी उसे तड़के करीब चार बजे ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे सुबह आने की सलाह दी गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों के सामने बंदी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि उन्होंने उसे किसी नजदीकी थाने में रखने के बजाय आरक्षक शुभम शर्मा के भाई गौरव शर्मा के फ्लैट पर ले जाने का निर्णय लिया। यह फ्लैट विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लोटस विला में स्थित है।
    मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार पुलिसकर्मी बंदी को फ्लैट पर ले जाने से पहले एक होटल में भी पहुंचे थे। वहां बंदी को खाना खिलाया गया। घटना से संबंधित एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें आरोपी होटल में खाना खाता दिखाई दे रहा है। इसके बाद पुलिसकर्मी बंदी को लेकर फ्लैट पर पहुंचे। आरोप है कि रात में सभी वहीं रुक गए और सो गए। इस दौरान बंदी की निगरानी में लापरवाही हुई जिसका फायदा उठाकर वह मौके से भाग निकला। सुबह करीब सात बजे जब पुलिसकर्मियों की नींद खुली तो सन्नी पाल वहां मौजूद नहीं था। उसकी हथकड़ी मौके पर पड़ी हुई थी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
    आरोपी के फरार होने के बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और विश्वविद्यालय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार बंदी की तलाश शुरू कर दी है। उसकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों और आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी किस रास्ते से फरार हुआ और घटना के समय उसकी निगरानी में किस स्तर पर चूक हुई इसकी भी जांच की जा सकती है।
    इस घटना ने बंदियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस हिरासत में रखे गए किसी भी आरोपी की निगरानी और उसकी सुरक्षित अभिरक्षा संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बंदी को अस्पताल से थाने ले जाने के बजाय निजी फ्लैट पर ठहराने के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं। ड्यूटी के दौरान हुई इस लापरवाही को लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार सन्नी पाल को पकड़ना और पूरे घटनाक्रम की जांच करना है।

  • ग्वालियर में 35 वर्षीय किसान की कुल्हाड़ी से हत्या, शव के पास मिला डॉट पेन, 3.32 लाख के हिसाब वाली पर्ची की जांच में जुटी पुलिस

    ग्वालियर में 35 वर्षीय किसान की कुल्हाड़ी से हत्या, शव के पास मिला डॉट पेन, 3.32 लाख के हिसाब वाली पर्ची की जांच में जुटी पुलिस


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक किसान की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। झांसी रोड थाना क्षेत्र के केदारपुर छोटी मढ़ैया में 35 वर्षीय किसान पुरुषोत्तम गुर्जर का शव बुधवार सुबह एक पड़ोसी के खेत में मिला। किसान के गले और सिर पर धारदार हथियार से गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। घटनास्थल के पास एक डॉट पेन मिला है जबकि मृतक की जेब से 3.32 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब लिखी पर्ची बरामद हुई है। किसान का मोबाइल फोन भी मौके से गायब बताया जा रहा है। पुलिस इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए हत्या की जांच कर रही है।

    परिजनों के मुताबिक मंगलवार को पुरुषोत्तम की पत्नी एक रिश्तेदार के यहां शोक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। घर पर पुरुषोत्तम अपने दो बेटों और दो बेटियों के साथ था। मंगलवार देर रात उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया। फोन पर बातचीत करने के बाद वह घर से बाहर निकल गया। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिवार के लोगों को उस समय अंदाजा नहीं था कि पुरुषोत्तम के साथ कोई अनहोनी हो सकती है। बुधवार सुबह जब उसका शव घर से करीब 300 मीटर दूर पड़ोसी के खेत में मिला तो इलाके में हड़कंप मच गया।

    घटना की सूचना मिलने पर झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए। शुरुआती जांच में सामने आया कि पुरुषोत्तम के गले पर कुल्हाड़ी के पांच और सिर पर एक गहरा घाव था। इन चोटों से आशंका जताई जा रही है कि उस पर धारदार हथियार से हमला किया गया। हालांकि हमले में कितने लोग शामिल थे और वारदात किस परिस्थिति में हुई इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस को मृतक की जेब से एक पर्ची मिली है जिस पर 1.32 लाख रुपये और 2 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब लिखा होने की जानकारी सामने आई है। दोनों रकम का कुल योग 3.32 लाख रुपये है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह हिसाब किस व्यक्ति या कारोबार से जुड़ा था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस लेनदेन का हत्या से कोई संबंध है या यह किसी अन्य मामले से जुड़ा दस्तावेज है। फिलहाल केवल पर्ची मिलने के आधार पर हत्या की वजह तय नहीं की गई है।

    घटनास्थल के पास डॉट पेन मिलने और पुरुषोत्तम का मोबाइल गायब होने से भी जांच के कई पहलू सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पेन मृतक का था या किसी अन्य व्यक्ति का। वहीं मंगलवार देर रात आए फोन की जानकारी जुटाना भी अहम माना जा रहा है। मृतक के मोबाइल की उपलब्ध जानकारी और आखिरी बातचीत से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

    मृतक के ससुर पूरन सिंह गुर्जर ने बताया कि पुरुषोत्तम का गांव या बाहर किसी से विवाद होने की जानकारी परिवार को नहीं थी। उन्होंने जमीन या संपत्ति को लेकर किसी झगड़े से भी इनकार किया। परिजनों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हत्या किसने और क्यों की। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    झांसी रोड थाने के सब इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के मुताबिक पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेनदेन की पर्ची गायब मोबाइल फोन देर रात आया कॉल और घटनास्थल से मिले साक्ष्य जांच के अहम बिंदु हैं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है। फिलहाल हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों की पहचान स्पष्ट नहीं हुई है।

  • 6 दिन से लापता 18 वर्षीय सुहाना की तलाश में जुटी पुलिस, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं और दोनों के मोबाइल बंद, 5 किलोमीटर के CCTV फुटेज खंगाले

    6 दिन से लापता 18 वर्षीय सुहाना की तलाश में जुटी पुलिस, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं और दोनों के मोबाइल बंद, 5 किलोमीटर के CCTV फुटेज खंगाले


    ग्वालियर । ग्वालियर में चिड़ियाघर घूमने पहुंची 18 वर्षीय नवविवाहिता सुहाना जाटव के लापता होने का मामला छह दिन बाद भी सुलझ नहीं पाया है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है लेकिन अब तक सुहाना और उसके साथ जाने की बात सामने आए युवक अरमान खान का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने चिड़ियाघर के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में लगे 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं। इसके बावजूद दोनों किस रास्ते से गए और इसके बाद कहां पहुंचे इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। मामले में सबसे बड़ी परेशानी उस बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होना है जिस पर सुहाना के बैठकर जाने की बात सामने आई है। दोनों के मोबाइल फोन भी बंद बताए जा रहे हैं।
    जानकारी के मुताबिक शिवपुरी निवासी सुहाना जाटव की शादी कुछ महीने पहले करण जाटव से हुई थी। घटना वाले दिन पति-पत्नी किसी रिश्तेदार से मिलने के लिए ग्वालियर आए थे। इसके बाद सुहाना ने चिड़ियाघर घूमने की इच्छा जताई। दोनों दोपहर करीब 1:25 से 1:35 बजे के बीच चिड़ियाघर पहुंचे। पुलिस के अनुसार जब करण अपनी बाइक पार्क करने के लिए आगे गया तो सुहाना वहीं रुक गई। इसी दौरान कथित तौर पर अरमान खान वहां बाइक लेकर पहुंचा और सुहाना उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। करण जब बाइक खड़ी करके वापस लौटा तो सुहाना वहां नहीं थी। उसने आसपास तलाश की और कुछ दूरी तक उनका पीछा करने की कोशिश भी की लेकिन दोनों का पता नहीं चल पाया।
    घटना के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से घटनाक्रम और संभावित रास्तों की जांच शुरू की। पांच किलोमीटर के दायरे में 100 से अधिक कैमरों के फुटेज देखे गए। फुटेज में सुहाना के दूसरी बाइक पर बैठकर जाने से जुड़े दृश्य सामने आने की बात कही गई है। हालांकि इसके बाद दोनों किस दिशा में गए और उन्होंने आगे कौन सा रास्ता चुना इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। महल गेट के आगे कुछ रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से पुलिस की जांच प्रभावित हो रही है। बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होने के कारण वाहन की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है।
    पड़ाव थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव के मुताबिक सुहाना और अरमान के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर रखे गए हैं। लेकिन दोनों के फोन लगातार बंद आ रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल दोबारा चालू होने पर उनकी लोकेशन से जुड़ा कोई सुराग मिल सकता है। जांच टीम ने मुरैना जिले के जरैना गांव में भी उनके रिश्तेदारों के यहां तलाश की लेकिन वहां भी दोनों नहीं मिले। पुलिस अब उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारियों को जोड़कर उनके आने-जाने के संभावित रास्तों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
    इस बीच करण जाटव अपनी पत्नी की तलाश में रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क कर रहा है। घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी परिवार को सुहाना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि तलाश जारी है और दोनों की गतिविधियों से जुड़े संभावित सुरागों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सुहाना और अरमान कहां हैं और वे चिड़ियाघर से निकलने के बाद किस स्थान पर पहुंचे। मामले की जांच पूरी होने और संबंधित लोगों के मिलने के बाद ही घटनाक्रम की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां

    भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश में आगजनी की बड़ी घटनाओं से निपटने और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए अग्निशमन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदेश के 16 नगर निगमों और पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 12 हजार लीटर पानी की क्षमता वाले 21 आधुनिक वाटर बाउजर तैनात किए जाएंगे। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी ने इन वाहनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन वाहनों के मिलने से शहरी इलाकों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी आग लगने की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
    इन आधुनिक वाहनों को विशेष रूप से बड़ी आग की घटनाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें हाई प्रेशर पंप वाटर मॉनिटर और फोम सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी। इनकी सहायता से आग पर पानी और फोम की तेज बौछार डालकर उसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। बहुमंजिला इमारतों औद्योगिक इकाइयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आग लगने की स्थिति में ये वाहन उपयोगी साबित हो सकते हैं।
    योजना के तहत ग्वालियर भोपाल इंदौर जबलपुर उज्जैन देवास मुरैना सतना सागर रतलाम रीवा कटनी सिंगरौली छिंदवाड़ा बुरहानपुर और खंडवा नगर निगमों को आधुनिक वाटर बाउजर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा पीथमपुर मंडीदीप बानमोर मालनपुर और मेघनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के चलते आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत रहती है।
    इन वाटर बाउजर की क्षमता 12 हजार लीटर होगी और इनका कुल भार करीब 28 टन रहने का उल्लेख किया गया है। वाहनों में 304 ग्रेड स्टेनलेस स्टील से बने टैंक लगाए जाएंगे। टैंक के भीतर 10 कंपार्टमेंट और बाफल प्लेट्स होंगी जो वाहन चलते समय पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद करेंगी। इससे वाहन का संतुलन बनाए रखने और संचालन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
    वाहनों में हाई प्रेशर सेंट्रीफ्यूगल पंप लगाए जाएंगे। सामान्य दबाव पर ये पंप प्रति मिनट 3000 लीटर पानी उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे जबकि हाई प्रेशर मोड में इनकी क्षमता 250 लीटर प्रति मिनट होगी। सामान्य मोड में दबाव 10 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर और हाई प्रेशर मोड में 40 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर आग बुझाने की कार्रवाई की जा सकेगी।
    आधुनिक वाटर बाउजर में जीपीएस मोबाइल डेटा टर्मिनल लाइट मास्ट और ऑटोमैटिक प्राइमिंग सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाएं भी दी जाएंगी। जीपीएस से वाहन की लोकेशन जानने में मदद मिलेगी जबकि लाइट मास्ट रात के समय या कम रोशनी वाले स्थानों पर बचाव कार्यों को आसान बना सकता है। वाटर मॉनिटर के जरिए आग की ओर पानी की तेज बौछार छोड़ी जा सकेगी।
    योजना में केवल वाहन खरीदने पर ही जोर नहीं दिया गया है बल्कि कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था भी रखी गई है। अनुबंध होने के 10 महीने के भीतर वाहनों की आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद 12वें महीने तक संबंधित नगरीय निकायों के अग्निशमन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक संबंधित फायर स्टेशन पर कम से कम दो प्रायोगिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वाहन चलाने उपकरणों के इस्तेमाल रखरखाव और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने की जानकारी दी जाएगी।
    बड़े वाटर बाउजर के साथ प्रदेश के 90 नगरीय निकायों के लिए 111 मिनी वाटर टेंडर खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही है। इनकी क्षमता 550 लीटर होगी जिसमें 500 लीटर पानी और 50 लीटर फोम शामिल रहेगा। छोटे आकार के ये वाहन संकरी गलियों घनी बस्तियों और ऐसे स्थानों पर पहुंचने में मदद करेंगे जहां बड़े फायर ब्रिगेड वाहनों को ले जाना मुश्किल होता है।
    ग्वालियर इंदौर भोपाल जबलपुर और उज्जैन नगर निगमों को तीन-तीन मिनी वाटर टेंडर देने की योजना है। अन्य नगर निगमों को दो-दो वाहन मिलेंगे जबकि शेष नगरीय निकायों के लिए भी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बड़े वाटर बाउजर और छोटे मिनी टेंडर की खरीद से प्रदेश में अग्निशमन संसाधनों का विस्तार करने की तैयारी है। हालांकि इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ वाहनों की समय पर आपूर्ति कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जरूरत के समय त्वरित तैनाती पर निर्भर करेगा।
  • राशन के चावल की गड़बड़ी का खुलासा, लोडिंग वाहन से 30 बोरी जब्त, खाद्य विभाग की कार्रवाई तेज

    राशन के चावल की गड़बड़ी का खुलासा, लोडिंग वाहन से 30 बोरी जब्त, खाद्य विभाग की कार्रवाई तेज


    ग्वालियर । ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सरकारी उचित मूल्य दुकान से चावल की बोरियां लोडिंग वाहन में भरे जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद खाद्य विभाग की टीम ने रात के समय मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। टीम ने चावल से भरे लोडिंग वाहन को जब्त कर लिया है। वाहन में करीब 30 बोरी चावल मिला है। मामले में वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। फिलहाल खाद्य विभाग पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाने में जुटा है कि चावल दुकान से किस उद्देश्य से बाहर ले जाया जा रहा था।

    जानकारी के मुताबिक यह मामला बंसीपुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में स्थित वार्ड 16 की सरकारी उचित मूल्य दुकान से जुड़ा है। इस दुकान का संचालन नीरज शर्मा द्वारा किया जाता है। बताया गया है कि दुकान से चावल के कट्टे एक लोडिंग वाहन में भरे जा रहे थे। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी। सूचना मिलने के बाद खाद्य विभाग के फूड इंस्पेक्टर अरविंद सिंह भदौरिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

    खाद्य विभाग की टीम ने वहां पहुंचकर लोडिंग वाहन की जांच की। प्राथमिक जांच के दौरान वाहन में सरकारी चावल की करीब 30 बोरियां मिलीं। इसके बाद अधिकारियों ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। चावल की बोरियों को लेकर दस्तावेज और परिवहन से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है। चालक से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उसे चावल कहां ले जाने के लिए कहा गया था और वाहन में सरकारी राशन लोड करने की अनुमति किस आधार पर दी गई थी।

    इस मामले में मुरार थाना पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना के बाद पुलिस ने वाहन को पकड़ा था लेकिन बाद में वाहन को छोड़ दिए जाने की बात सामने आई। मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद खाद्य विभाग और पुलिस की टीम ने दोबारा कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त किया और चालक को हिरासत में लिया।

    अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि उचित मूल्य दुकान से निकाला जा रहा चावल आखिर कहां ले जाया जा रहा था। खाद्य विभाग दुकान संचालक और वाहन चालक से पूछताछ कर रहा है। अधिकारियों द्वारा यह भी जांच की जा रही है कि चावल का परिवहन किसी वैध प्रक्रिया के तहत किया जा रहा था या फिर इसमें सरकारी राशन की अनियमितता अथवा कालाबाजारी से जुड़ा कोई मामला है।

    फूड इंस्पेक्टर अरविंद सिंह भदौरिया के अनुसार सूचना मिलने पर विभाग की टीम ने लोडिंग वाहन को जब्त किया है। वाहन में करीब 30 बोरी चावल मिला है और चालक से पूछताछ की जा रही है। अधिकारी के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल वाहन जब्त होने और चालक के हिरासत में लिए जाने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। खाद्य विभाग चावल के रिकॉर्ड और उसके परिवहन से जुड़ी जानकारी की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी राशन का चावल नियमों के तहत भेजा जा रहा था या फिर इस मामले में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है।

  • बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी

    बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी


    ग्वालियर । रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग अपने परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकालते हैं लेकिन ग्वालियर के रिटायर्ड बैंक मैनेजर एमएल अहिरवार ने अपनी जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया। पत्नी के निधन के बाद जब उनके जीवन में अकेलापन और गहरा दुख आया तो उन्होंने खुद को उस दर्द में समेटने के बजाय जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी संवारने का फैसला किया। आज करीब छह साल से वे झुग्गी बस्तियों और मजदूर परिवारों के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं। उनकी यह पहल अब 400 से 500 बच्चों तक पहुंच चुकी है।

    अहिरवार के जीवन में यह बदलाव कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आया। करीब 2 मई 2021 को उनकी पत्नी का निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। जीवन में अचानक ऐसा खालीपन आया जिसे भरना आसान नहीं था। इसी दौर में उनकी मुलाकात शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त ओपी दीक्षित से हुई। दीक्षित पहले से ही झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे थे। पत्नी के निधन के करीब चार से पांच महीने बाद अहिरवार भी उनके साथ बच्चों को पढ़ाने लगे। शुरुआत में उनके पास सिर्फ 12 से 13 बच्चे आते थे लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती चली गई।

    अहिरवार का फोकस उन बच्चों पर है जिनके माता-पिता मजदूरी या दूसरे छोटे-मोटे कामों में व्यस्त रहते हैं। आर्थिक मजबूरियों के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे बच्चे स्कूल से दूर होने के साथ गलत संगत में पड़ने के खतरे का भी सामना करते हैं। अहिरवार का प्रयास है कि इन बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखा जाए और उन्हें ऐसा माहौल दिया जाए जिसमें वे अपने भविष्य के बारे में सोच सकें।

    ग्वालियर में काम की तलाश में आने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे भी उनकी कक्षा का हिस्सा हैं। टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे इलाकों से परिवार रोजी-रोटी के लिए दूसरे शहरों में आते हैं। बार-बार जगह बदलने के कारण बच्चों की पढ़ाई टूट जाती है। ऐसे बच्चों को लगातार पढ़ाई से जोड़े रखना अहिरवार की पहल का अहम हिस्सा है।

    सिर्फ पढ़ाने तक ही उनकी जिम्मेदारी सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद बच्चों को कॉपी किताब और स्टेशनरी जैसी पढ़ाई की सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं। जिन बच्चों के सामने स्कूल की फीस भरने की समस्या आती है वहां वे अपनी क्षमता के अनुसार मदद करते हैं। समाजसेवी और कुछ संगठन भी समय-समय पर इस काम में सहयोग करते हैं। कई बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने में भी उन्होंने मदद की है ताकि उनकी शिक्षा बीच में न छूटे।

    शुरुआत में परिवार को भी चिंता थी कि अहिरवार अपना इतना समय बच्चों के बीच क्यों दे रहे हैं लेकिन जब इस पहल का असर दिखाई देने लगा तो परिवार ने उनका साथ देना शुरू कर दिया। अब उनके बच्चे भी इस काम में उनका समर्थन करते हैं। अहिरवार के लिए किसी बच्चे का पढ़ाई जारी रखना और आगे बढ़ना ही सबसे बड़ी खुशी है।

    उनका मानना है कि जरूरतमंद की आर्थिक मदद करना निश्चित रूप से जरूरी है लेकिन शिक्षा का दान किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी बदल सकता है। इसी सोच के साथ रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने अपने जीवन के खालीपन को बच्चों के भविष्य की रोशनी से भर दिया। 12 बच्चों से शुरू हुई उनकी छोटी सी पहल आज सैकड़ों बच्चों तक पहुंच चुकी है और यही उनके लिए पत्नी की याद को एक सार्थक दिशा देने का सबसे बड़ा जरिया बन गई है।