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  • शिवपुरी में हादसे से मचा हड़कंप बाइक सवार पिता-पुत्र को कार ने कुचला नाबालिग के वाहन चलाने का दावा

    शिवपुरी में हादसे से मचा हड़कंप बाइक सवार पिता-पुत्र को कार ने कुचला नाबालिग के वाहन चलाने का दावा


    शिवपुरी । शिवपुरी में गुरुवार को तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा विष्णु मंदिर के पास पुलिया पर हुआ जहां नीलगर चौराहे की तरफ से आ रही कार ने बाइक को साइड से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार दोनों सड़क पर गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद दोनों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद पिता की हालत गंभीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

    हादसे में घायल धर्मेंद्र रजक उम्र 38 वर्ष ने बताया कि वह इंद्रा कॉलोनी में रहते हैं और अपनी बाइक से न्यू ब्लॉक स्थित दुकान की ओर जा रहे थे। उनके पिता भजनलाल रजक बाइक की पिछली सीट पर बैठे थे। दोनों सामान्य तरीके से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। इसी दौरान विष्णु मंदिर के पास पुलिया पर सामने से आ रही कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

    धर्मेंद्र के मुताबिक कार तेज रफ्तार में थी और चालक ने वाहन को लापरवाही से चलाते हुए बाइक को टक्कर मारी। दुर्घटना में धर्मेंद्र के बाएं पैर में गंभीर चोट लगी और काफी खून बहने लगा। वहीं उनके पिता भजनलाल के पसली के अलावा दोनों पैरों और कंधे में भी गंभीर चोटें आई हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया और आसपास मौजूद लोगों की मदद से घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

    धर्मेंद्र ने हादसे की जानकारी अपने बड़े भाई परमानंद रजक को दी। इसके बाद दोनों घायलों को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने दोनों का उपचार शुरू किया। धर्मेंद्र के पैर में गंभीर चोट होने के कारण प्लास्टर चढ़ाया गया जबकि उनके पिता की हालत अधिक गंभीर बताई गई। प्राथमिक उपचार के बाद भजनलाल को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

    घायल धर्मेंद्र ने पुलिस को दिए बयान में एक अहम आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जिस समय कार ने उनकी बाइक को टक्कर मारी उस वक्त कार एक नाबालिग लड़की चला रही थी। हालांकि पुलिस ने अभी इस आरोप की पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने कार नंबर MP 33 C 9001 और अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    पुलिस अब दुर्घटना की परिस्थितियों के साथ कार कौन चला रहा था और हादसे के समय वाहन की रफ्तार कितनी थी जैसे बिंदुओं की जांच करेगी। साथ ही घायल पिता-पुत्र के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हादसे के कारण बाइक सवार परिवार में चिंता का माहौल है और घायल पिता को ग्वालियर रेफर किए जाने के बाद परिजन उनके इलाज को लेकर परेशान हैं।

  • जर्जर मकान की छत ने उजाड़ दिया परिवार 2 साल के बेटे और मां की मौत पिता समेत दो बेटियां अस्पताल में भर्ती

    जर्जर मकान की छत ने उजाड़ दिया परिवार 2 साल के बेटे और मां की मौत पिता समेत दो बेटियां अस्पताल में भर्ती


    ग्वालियर । ग्वालियर के डबरा में बुधवार रात बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जंगीपुरा इलाके में एक जर्जर दो मंजिला कच्चे मकान की छत अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। उस समय परिवार के पांच सदस्य घर के अंदर मौजूद थे और सो रहे थे। छत का मलबा सीधे उनके ऊपर जा गिरा जिससे सभी लोग उसमें दब गए। हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला गया।
    हादसे के बाद घायलों को तत्काल डबरा सिविल अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में दो साल के आदित्य रजक उर्फ गुन्नू ने दम तोड़ दिया। उसकी मां सीमा को भी गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं परिवार के मुखिया जागेंद्र रजक उम्र 38 वर्ष और उनकी बेटियां वैशाली उम्र 5 वर्ष तथा रागनी उम्र 8 वर्ष गंभीर रूप से घायल हैं। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है।

    हादसे की सूचना मिलते ही परिवार के रिश्तेदार और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए। इसी दौरान परिजनों और पड़ोसियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। पड़ोसी वीरू रजक का दावा है कि जब सीमा को अस्पताल लाया गया था तब उनकी सांसें चल रही थीं। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर उपचार मिलता तो शायद सीमा की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि इलाज में लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

    अस्पताल में हंगामे की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम नवकिरण कौर एसडीओपी सौरभ कुमार और तहसीलदार नवीन भारद्वाज ने अस्पताल पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। अधिकारियों ने परिजनों को मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। साथ ही परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने की बात भी कही गई।

    बताया जा रहा है कि रजक परिवार करीब 15 साल से इसी मकान में किराए पर रह रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। जागेंद्र ग्वालियर की एक जूता फैक्ट्री में काम करते थे और रोजाना ट्रेन से आना जाना करते थे। उनकी पत्नी सीमा घरों में झाड़ू पोंछा लगाने का काम करती थीं। लंबे समय से जर्जर हालत में रह रहे मकान की छत आखिरकार बारिश के दौरान परिवार पर ही कहर बनकर टूट पड़ी।

    इस हादसे में परिवार की दो बेटियां नैंसी और गौरी सुरक्षित बच गईं। हादसे के समय दोनों अपने चाचा राघवेंद्र रजक के घर पर थीं। अगर वे भी उसी मकान में मौजूद होतीं तो हादसे का असर और भयावह हो सकता था।

    बारिश के मौसम में जर्जर मकानों को लेकर लगातार खतरा बना रहता है। डबरा की यह घटना एक बार फिर ऐसे मकानों की सुरक्षा जांच और कमजोर परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब प्रशासनिक जांच के साथ अस्पताल में लगाए गए आरोपों की जांच का इंतजार है। वहीं परिवार के लिए यह हादसा ऐसा दुख छोड़ गया है जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।

  • 120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे

    120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में इस बार जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। 4 सितंबर को भगवान राधा-कृष्ण का राजसी श्रृंगार बेशकीमती सोने चांदी हीरे मोती और पन्नों से जड़े आभूषणों से किया जाएगा। इन आभूषणों की कुल कीमत 120 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। साल में चुनिंदा विशेष अवसरों पर ही बैंक लॉकर से बाहर निकाले जाने वाले इन गहनों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस बार करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    जन्माष्टमी के दिन सुबह करीब 10 बजे आभूषणों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से गठित विशेष समिति बैंक पहुंचेगी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच आभूषणों को मंदिर तक लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी गहनों की सफाई की जाएगी और इसके बाद इन्हें भगवान राधा-कृष्ण के श्रृंगार में शामिल किया जाएगा।

    गोपाल मंदिर में रखे इन आभूषणों की खासियत सिर्फ उनकी कीमत नहीं बल्कि उनका ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में सोने का मुकुट शामिल किया जाता है जिसमें पुखराज माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्न जड़े हैं। वहीं राधारानी का करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहता है।

    इन आभूषणों में सबसे ज्यादा चर्चा सात लड़ियों वाले उस हार की होती है जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इस हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए बताई जाती है। भगवान के श्रृंगार में शामिल सोने के मुकुट की कीमत भी करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई है। अलग अलग आभूषणों में जड़े कीमती रत्न इस पूरे श्रृंगार को और भव्य बना देते हैं।

    जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर की सजावट भी खास अंदाज में की जाएगी। गोपाल मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाने के साथ फूल बंगला और रंगोली तैयार की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के जरिए भगवान के दर्शन का लाइव प्रसारण किया जाएगा ताकि भीड़ के कारण सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचने में परेशानी न हो।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के आने और जाने के लिए अलग अलग व्यवस्था रखने की तैयारी है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    गोपाल मंदिर का इतिहास भी बेहद खास है। इस मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने वर्ष 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली के साथ यूरोपीय प्रभाव भी नजर आता है। मंदिर के गर्भगृह में चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

    जन्माष्टमी पर जब इन दुर्लभ आभूषणों से राधा-कृष्ण का श्रृंगार होगा तो गोपाल मंदिर में राजसी परंपरा और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। यही वजह है कि इस विशेष दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

  • NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच

    NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच


    ग्वालियर । ग्वालियर में लगातार खराब हो रही सड़कों को लेकर उठ रहे सवाल अब नेशनल हाईवे तक पहुंच गए हैं। शहर में एक साल के भीतर 12 से ज्यादा सड़कें धंसने और कई मार्गों की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने आगरा मुंबई हाईवे के एक हिस्से की गहन जांच शुरू की। गुरुवार को टीम की मौजूदगी में मेहरा टोल प्लाजा और सिकरौदा चौराहे के बीच सड़क को जेसीबी की मदद से खुदवाया गया। सड़क की ऊपरी सतह हटाने के बाद अलग अलग परतों से डामर गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए हैं।

    इन नमूनों को अब प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों के मुताबिक सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। इसके साथ ही डामर की मात्रा गिट्टी की गुणवत्ता सड़क की अलग अलग परतों की मजबूती और कॉम्पैक्शन जैसे तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण में कहीं गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।

    हाईकोर्ट के निर्देश पर नेशनल हाईवे की सड़क को मौके पर खुदवाकर उसकी वास्तविक स्थिति जांचने की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे सरकारी दस्तावेजों में दर्ज तकनीकी जानकारी का जमीन पर हुए निर्माण से मिलान किया जा सकेगा। जांच टीम की निगरानी में सड़क की परतें हटाई गईं और जरूरी स्थानों से सैंपल लिए गए। इससे केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर गुणवत्ता का आकलन करने के बजाय वास्तविक निर्माण की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

    मामला शहर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने सड़कों के बार बार धंसने गड्ढों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय रिपोर्टों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए चार सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई।

    यह टीम इससे पहले ग्वालियर की कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण कर चुकी है। विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड चेतकपुरी से सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी से एजी ऑफिस पुल मार्ग समेत कई हिस्सों में सड़क की स्थिति डामर की मोटाई और क्षति का परीक्षण किया गया। 19 अगस्त को गुढ़ी गुढ़ा का नाका और बेटी बचाओ चौराहे के आसपास से भी कोर सैंपल लिए गए थे।

    जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सैंपलिंग की लोकेशन पहले से सार्वजनिक नहीं की जा रही है। सड़क का चयन सैंपल लेने से कुछ समय पहले किया जाता है ताकि संबंधित निर्माण एजेंसी को पहले से तैयारी करने का अवसर न मिले। टीम इससे पहले लेजर कैमरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग भी कर चुकी है। इससे सड़क की सतह समतलीकरण और डामर की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया।

    अब नेशनल हाईवे से लिए गए सैंपलों की जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला ग्वालियर में की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट के समक्ष तथ्य रखे जाएंगे। इसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और यदि कोई तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • सुपरफास्ट ट्रेन के सामने कूदी किशोरी, युवक की बहादुरी ने बचाई जिंदगी

    सुपरफास्ट ट्रेन के सामने कूदी किशोरी, युवक की बहादुरी ने बचाई जिंदगी

    ग्वालियर। ग्वालियर में बुधवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने कुछ क्षणों के लिए लोगों की सांसें थाम दीं। शहर के एजी ऑफिस पुल के नीचे स्थित रेलवे ट्रैक पर एक किशोरी ने कथित रूप से आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन एक युवक की सतर्कता और साहस के कारण उसकी जान बच गई। इस घटना ने जहां लोगों को भावुक कर दिया, वहीं युवक की बहादुरी की हर तरफ सराहना हो रही है।

    जानकारी के अनुसार दोपहर के समय एक किशोरी अचानक रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई। उसी दौरान ट्रैक पर एक सुपरफास्ट ट्रेन तेज गति से आगे बढ़ रही थी। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार ट्रेन और किशोरी के बीच केवल कुछ सेकंड का ही फासला बचा था। हालात ऐसे थे कि किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता था और किशोरी की जान जा सकती थी।

    इसी बीच वहां मौजूद प्रहलाद सिंह तोमर नामक युवक की नजर किशोरी पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना अपनी जान की परवाह किए ट्रैक की ओर दौड़ पड़े। युवक ने तेजी दिखाते हुए किशोरी को पकड़कर पटरी से दूर खींच लिया। यह सब कुछ इतने कम समय में हुआ कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए।

    युवक की इस बहादुरी के बाद आसपास खड़े अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए। सभी ने मिलकर किशोरी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कुछ ही क्षण बाद सुपरफास्ट ट्रेन वहां से गुजर गई। यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो परिणाम बेहद दुखद हो सकते थे।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किशोरी को अपने संरक्षण में लिया। प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि किशोरी किसी पारिवारिक कारण से परेशान थी। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि वह अपने माता-पिता से किसी बात को लेकर नाराज थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोरी के परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनसे बातचीत की जा रही है। साथ ही यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में किशोरी ने इतना बड़ा कदम उठाने की कोशिश की। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा प्रहलाद सिंह तोमर की बहादुरी की हो रही है। उनकी सूझबूझ और साहस ने एक परिवार को गहरे दुख में डूबने से बचा लिया। स्थानीय लोगों ने युवक को सच्चा हीरो बताते हुए सम्मानित किए जाने की मांग भी की है।

    यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि संकट की घड़ी में दिखाई गई तत्परता और मानवता किसी की जिंदगी बचा सकती है। साथ ही मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए समय रहते संवाद और सहयोग कितना जरूरी है, यह भी इस घटना से स्पष्ट होता है।

  • साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी

    साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराधियों ने एक युवती को निशाना बनाते हुए उसके क्रेडिट कार्ड से करीब 1.48 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर पहले क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा दिया और बाद में राशि वापस दिलाने के नाम पर ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय अक्षिता बांगड़ के पास एक निजी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जो उन्हें फरवरी 2026 में प्राप्त हुआ था। हालांकि उन्होंने उस कार्ड को सक्रिय नहीं कराया था। 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को बैंक का प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की प्रक्रिया समझाने लगा।

    कॉल करने वाले व्यक्ति ने अक्षिता को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवती ने उसकी बातों पर भरोसा कर निर्देशों का पालन किया। इसके कुछ समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 99 हजार 861 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया। पीड़िता को इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता नहीं चला।

    करीब एक महीने बाद 4 मई को अक्षिता को फिर एक अन्य नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार बताते हुए पिछले ट्रांजेक्शन की जानकारी दी और कहा कि यदि वह चाहें तो निकाली गई राशि वापस दिलाई जा सकती है। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे ओटीपी साझा करने को कहा।

    पीड़िता ने जब ओटीपी बताया तो ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनके क्रेडिट कार्ड से दो और ट्रांजेक्शन कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद जब युवती को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, कार्ड विवरण, सीवीवी नंबर या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ग्राहकों से ओटीपी नहीं मांगते। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा सकती है।

  • 7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी

    7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी



    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से रिश्तों और भरोसे को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म किए जाने का मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने न केवल नाबालिग को शादी का झूंठा दिलासा दिया, बल्कि समाज की नजरों से बचने के लिए उसे सात महीने तक एक किराए के कमरे में अपनी पत्नी बताकर रखा। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी अचानक उसे बेसहारा छोड़कर गायब हो गया और अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है।

    घटनाक्रम की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई थी। पीड़ित 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने हजीरा थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के मुताबिक, उसका भाई डीजे (DJ) संचालन का काम करता है। इसी काम के सिलसिले में हजीरा थाना क्षेत्र के यादव धर्मकांटा का रहने वाला राहुल राठौर नाम का युवक उसके भाई के साथ काम करता था। भाई के साथ दोस्ती होने के कारण राहुल का पीड़िता के घर पर अक्सर आना-जाना होने लगा। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गहरी पहचान और फिर दोस्ती में बदल गई। समय बीतने के साथ ही यह दोस्ती प्रेम संबंधों में तब्दील हो गई, जिसका फायदा उठाने की साजिश आरोपी ने पहले ही रच ली थी।

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी राहुल राठौर ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का पक्का वादा किया। इसके बाद वह उसे बहला-फुसलाकर धर्मकांटा इलाके के पास एक किराए के मकान में ले गया। बीते 2 अक्टूबर 2025 से वह नाबालिग को उसी कमरे में रखकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। शातिर आरोपी ने मकान मालिक को शक न हो, इसलिए नाबालिग का परिचय अपनी ‘पत्नी’ के रूप में कराया था। इस दौरान जब भी नाबालिग उस पर सामाजिक रीति-रिवाज से शादी करने का दबाव बनाती या शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करती, तो आरोपी राहुल जल्द ही शादी का मंडप सजाने की बात कहकर उसे चुप करा देता था। इसी बीच आरोपी ने डीजे का काम छोड़कर टमटम (ई-रिक्शा) चलाना भी शुरू कर दिया था ताकि वह गुजारा कर सके।

    विश्वासघात की पराकाष्ठा तब हुई जब बीते दिनों आरोपी राहुल अचानक नाबालिग को कमरे पर ही छोड़कर लापता हो गया। पीड़िता ने जब उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी का मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा। खुद को ठगा और अकेला पाकर पीड़िता न्याय की गुहार लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची। महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण तुरंत ऐक्शन लिया। पुलिस ने आरोपी राहुल राठौर के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

  • 26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा

    26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फिजिकल थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने ग्वालियर जिले के एक कथित स्मैक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ, नकदी और वाहन बरामद किए गए हैं।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामनिवास उर्फ करुआ रावत (35) निवासी ग्राम पाटई, थाना आरोन, जिला ग्वालियर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 106 ग्राम स्मैक, 52 हजार रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही मोटरसाइकिल जब्त की है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 28 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।

    मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
    फिजिकल थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि करवला पुलिया के पास एक व्यक्ति स्मैक बेचने की फिराक में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा। घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया।

    पूछताछ में बड़ा खुलासा: फैला था नेटवर्क
    पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने साथी राजेंद्र रावत के साथ मिलकर स्मैक तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, राजेंद्र बड़े सप्लायरों से नशीला पदार्थ लाकर दोनों मिलकर उसे ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं था, बल्कि शिवपुरी, करेरा, सुभाषपुरा और बैराड़ जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ था।

    युवाओं को बनाया जा रहा था निशाना
    पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने कई गांवों में युवाओं को निशाना बनाकर स्मैक की सप्लाई शुरू कर दी थी, जिससे क्षेत्र में नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा था।

    पहले से दर्ज हैं मामले, एनडीपीएस एक्ट में केस
    फिजिकल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और मुख्य सप्लायरों की तलाश में जुटी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी रामनिवास के खिलाफ पहले भी बैराड़ थाना में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है।

    पुलिस का सख्त संदेश
    थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

  • समय पर रिन्यूअल न कराने से दस्तावेज बेकार, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक प्रभावित

    समय पर रिन्यूअल न कराने से दस्तावेज बेकार, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक प्रभावित


    मध्य प्रदेश । ग्वालियर में पासपोर्ट रिन्यूअल को लेकर बरती गई लापरवाही अब हजारों लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। शहर में करीब 6500 लोगों के पासपोर्ट की वैधता समाप्त हो चुकी है, लेकिन उन्होंने अब तक उसे रिन्यू नहीं कराया है। इसके चलते ये सभी लोग विदेश यात्रा या उससे जुड़े किसी भी काम के लिए अब इन दस्तावेजों का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

    पासपोर्ट सेवा केंद्र के आंकड़ों के अनुसार एक्सपायर पासपोर्ट धारकों में लगभग 2500 बच्चे, 2500 युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग तथा करीब 1500 बुजुर्ग शामिल हैं। यानी समाज के हर वर्ग के लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। पासपोर्ट, जो विदेश यात्रा के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, अब इनके लिए बेकार साबित हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार जनवरी 2024 से अप्रैल 2026 के बीच ग्वालियर पासपोर्ट सेवा केंद्र में कुल 23,144 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 6787 आवेदन रिन्यूअल से जुड़े थे। वहीं वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 4571 नए आवेदन दर्ज किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

    पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों का पासपोर्ट 10 साल तक और बच्चों का 5 साल तक वैध रहता है। इसके समाप्त होने से पहले ही रिन्यूअल कराना जरूरी होता है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्सपायर पासपोर्ट अब किसी भी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय यात्रा या पहचान दस्तावेज के रूप में मान्य नहीं होता, इसलिए समय रहते इसका नवीनीकरण कराना बेहद जरूरी है।

    इस पूरे मामले में लोगों की लापरवाही सामने आने के बाद पासपोर्ट विभाग ने अपील की है कि नागरिक समय रहते अपने दस्तावेजों को अपडेट कराएं, ताकि अचानक विदेश यात्रा या आपात स्थिति में किसी भी तरह की परेशानी न हो।

  • शादी समारोह में हत्या केस: ग्वालियर में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

    शादी समारोह में हत्या केस: ग्वालियर में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के सिंधिया नगर स्थित “गड्ढे वाला मोहल्ला” में वर्ष 2024 में हुए चर्चित सोनू आदिवासी हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अठारहवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पारस कुमार जैन की अदालत ने मामले में पिता-पुत्र समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

    यह मामला 25-26 अप्रैल 2024 की दरमियानी रात का है, जब सोनू आदिवासी अपने रिश्तेदार की बेटी की शादी समारोह में शामिल होने के लिए सिंधिया नगर पहुंचा था। शादी का माहौल चल रहा था, लेकिन इसी दौरान पुरानी रंजिश ने एक दर्दनाक वारदात का रूप ले लिया।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनू शादी समारोह के दौरान टेंट के पीछे स्थित किराना दुकान के पास गया था, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आरोपी उसे धमकाते हुए कह रहे थे कि “तू दूसरों के मामलों में ज्यादा नेता बनता है, आज तुझे सबक सिखाते हैं।”

    जांच में यह सामने आया कि घटना से लगभग 15-20 दिन पहले आरोपियों का किसी अन्य व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसमें सोनू ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया था। इसी बात को लेकर आरोपी उससे रंजिश रखने लगे थे और बाद में इस हत्या की योजना बनाई गई।

    घटना के दौरान अनिल आदिवासी और उसके पिता वीरू आदिवासी ने सोनू के हाथ पकड़ लिए, ताकि वह किसी तरह बचाव न कर सके। इसी बीच मुख्य आरोपी सुनील आदिवासी ने लोहे का धारदार चाकू निकालकर सोनू के सीने और पसलियों पर कई वार कर दिए। हमले के बाद सोनू गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा और शादी समारोह स्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। परिजन घायल सोनू को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन गंभीर आंतरिक चोटों के कारण डॉक्टरों ने उसे बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    इस जघन्य हत्या के मामले में अदालत में पेश गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी पाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और बदले की भावना से किया गया था। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने राहत की सांस ली है, जबकि पुलिस और प्रशासन ने भी अदालत के निर्णय को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।