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  • ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

    ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा सहायक कुल सचिव परीक्षा-2025 का आयोजन आज रविवार को ग्वालियर में किया जा रहा है। इस परीक्षा में शहर के तीन केंद्रों पर कुल 1277 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा एक ही सत्र में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सख्त नियम लागू
    परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार बेहद सख्त नियम लागू किए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए कई वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है-
    जूते और मोजे पहनकर प्रवेश नहीं मिलेगा
    मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर प्रतिबंध
    बेल्ट, क्लचर, बक्कल और हाथ के बैंड भी वर्जित
    केवल पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति
    उम्मीदवारों को केवल चप्पल या सैंडल पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा है।

    त्रिस्तरीय जांच और CCTV निगरानी
    परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों की त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई है।
    पहले चरण में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन
    सभी केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी
    कलेक्टर कार्यालय में डिजिटल कंट्रोल रूम की स्थापना
    यह कंट्रोल रूम सुबह 8 बजे से परीक्षा समाप्ति तक सक्रिय रहेगा।

    शिकायत के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय
    परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या शिकायत के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है।
    दूरभाष: 0751-2446214
    मोबाइल: 9425135143
    निगरानी की जिम्मेदारी अधीक्षक आर.आई. भगत के निर्देशन में की जा रही है।

    ग्वालियर में आयोजित यह परीक्षा कड़े सुरक्षा इंतजामों और डिजिटल निगरानी के बीच संपन्न हो रही है। सख्त नियमों का उद्देश्य केवल एक ही है-निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

  • बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक

    बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।

    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।

    कहां-कहां किया जा चुका है इस्तेमाल?
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है। इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा

    वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को शनि जयंती के अवसर पर धार्मिक उत्साह चरम पर रहा। न्याय और कर्मफल के देवता भगवान शनिदेव की जयंती इस बार अमावस्या और वट सावित्री व्रत के दुर्लभ संयोग के साथ मनाई जा रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सुबह से ही शहर के सभी प्रमुख शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने काले तिल, सरसों का तेल और फूल चढ़ाकर शनिदेव से अपने परिवार में सुख-शांति और लंबी आयु की कामना की।

    नवग्रह मंदिर बना आस्था का केंद्र
    ग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिली। यह लगभग 150 साल पुराना मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु शनि देव सहित सभी नवग्रहों की पूजा कर रहे हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिलती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर शनिवार यहां आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

    तेल,   और दान का विशेष महत्व
    शनि जयंती पर भक्तों ने विशेष रूप से सरसों का तेल और काले तिल अर्पित किए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कंबल, अन्न, तिल और दक्षिणा का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य रोहित उपाध्याय के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इस दिन पूजा और मंत्रोच्चारण से शनि दोष में राहत मिलती है और जीवन में बाधाएं कम होती हैं।

    वट सावित्री व्रत में महिलाओं की आस्था
    इस अवसर पर महिलाओं ने वट सावित्री व्रत भी रखा, जो पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री और यमराज का स्मरण कर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल और अन्न का त्याग किया जाता है।

     धार्मिक संयोग ने बढ़ाया महत्व
    शनि जयंती, अमावस्या और वट सावित्री व्रत का एक साथ पड़ना इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहा है। इस दुर्लभ संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा।

    ग्वालियर में शनि जयंती का यह अवसर सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का संगम बन गया। मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई है।

  • मामूली विवाद बना खूनी संघर्ष: ग्वालियर में सूजे से वार, पुलिस ने दर्ज किया केस

    मामूली विवाद बना खूनी संघर्ष: ग्वालियर में सूजे से वार, पुलिस ने दर्ज किया केस


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में नशे के दौरान हुआ एक विवाद गंभीर हिंसा में बदल गया। थाटीपुर थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हुई, जिसमें एक युवक पर बर्फ फोड़ने वाले सूजे से हमला कर दिया गया और वह घायल हो गया।

    घटना बुधवार शाम की बताई जा रही है और यह विवेकानंद चौराहे के पास हुई। जानकारी के अनुसार, थाटीपुर निवासी बाबा वाल्मीकि और दिव्यांशु हमाल तथा कुमारपुर निवासी गोलू भदौरिया एक साथ द्वारकाधीश मंदिर के पास बैठकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    शुरुआत में विवाद केवल गाली-गलौज तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह झगड़े में बदल गया। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर गोलू भदौरिया के साथ मारपीट शुरू कर दी और उसे जमीन पर पटक दिया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान पास में रखा बर्फ फोड़ने वाला सूजा (आइस पिक) उठा लिया गया और उसी से गोलू पर हमला किया गया। इस हमले में वह घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी वहां से फरार हो गए।

    घायल युवक किसी तरह थाटीपुर थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    थाटीपुर थाना प्रभारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि घटना शराब पीने के दौरान हुए विवाद का परिणाम थी। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    Gwalior में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि नशे में छोटी सी कहासुनी भी गंभीर अपराध में बदल सकती है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश कर रही है और घायल का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है।

  • SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला

    SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने एसएएफ (स्पेशल आर्म्ड फोर्स) के एक आरक्षक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इनकार करने का आरोप लगाया है। मामला माधौगंज थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह एमए अंतिम वर्ष की छात्रा है। उसके अनुसार 15 फरवरी को हिंदू रीति-रिवाज से उसका रोका हुआ था और 20 मार्च को परिवार की सहमति से उसकी सगाई अंकित ओझा नाम के युवक से हुई थी, जो एसएएफ सेकेंड बटालियन में आरक्षक के पद पर पदस्थ है और तिलक नगर स्थित सरकारी आवास में रहता है।

    युवती का आरोप है कि सगाई के बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ गई और वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। इसी दौरान 5 मई को दोनों की शादी तय की गई थी। शिकायत के अनुसार 3 मार्च को आरोपी ने तिलक नगर स्थित सरकारी आवास पर पहली बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद 9 मार्च और 18 मार्च को भी ऐसे संबंध बने, जिसमें आरोपी ने यह भरोसा दिलाया कि शादी निश्चित है, इसलिए इसमें कोई समस्या नहीं है।

    पीड़िता का कहना है कि जब परिवार ने शादी की रस्मों को आगे बढ़ाने के लिए लगन की बात की, तो आरोपी ने अचानक शादी से इनकार कर दिया। काफी समझाने और बातचीत के बावजूद आरोपी अपने फैसले पर अड़ा रहा और शादी करने से साफ मना कर दिया।

    इसके बाद पीड़िता ने माधौगंज थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

    माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    Gwalior में सामने आया यह मामला एक बार फिर रिश्तों में भरोसे और कानूनी जटिलताओं को लेकर चर्चा में आ गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • स्विमिंग पूल में बड़ा हादसा: छलांग लगाने के बाद नहीं निकल पाया बच्चा, सुरक्षा पर सवाल

    स्विमिंग पूल में बड़ा हादसा: छलांग लगाने के बाद नहीं निकल पाया बच्चा, सुरक्षा पर सवाल


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior से सामने आया यह मामला पूरे राज्य को झकझोर देने वाला है। एक होटल में स्विमिंग पूल पार्टी के दौरान 7 साल के बच्चे वेद की डूबने से मौत हो गई, और घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    यह दर्दनाक हादसा 11 मई की रात का बताया जा रहा है, जब वेद अपने परिवार के साथ होटल में आयोजित एक पूल पार्टी में शामिल था। फुटेज में साफ दिखाई देता है कि बच्चा पहले पूल से बाहर निकलता है, लेकिन कुछ ही मिनट बाद वह दोबारा पानी में कूद जाता है। इसी दौरान वह गलती से उथले हिस्से की बजाय गहरे हिस्से में चला जाता है।

    करीब 5 फीट गहरे पानी में फंसने के बाद बच्चा बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, लेकिन वह लगातार संघर्ष करते हुए डूबने लगता है। CCTV में यह भी दिखाई देता है कि आसपास कई लोग मौजूद थे, लेकिन किसी का ध्यान तुरंत उस पर नहीं गया। कुछ लोग उसके पास से गुजरते रहे, लेकिन स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ सके।

    परिजनों का आरोप है कि होटल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। उनका कहना है कि पूल में गहराई को दर्शाने के लिए कोई स्पष्ट संकेत नहीं थे और न ही बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई गई थी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मौके पर कोई प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद नहीं था।

    घटना के बाद परिजनों ने पहले बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन बाद में मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। इसके बाद शव को दोबारा निकाला गया और पोस्टमॉर्टम कराया गया, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सके।

    Gwalior पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि होटल मैनेजमेंट, पूल पार्टी आयोजकों और मौजूद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वीडियो फुटेज का मिलान कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर होटल और सार्वजनिक स्विमिंग पूल्स में सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है, जबकि परिवार गहरे सदमे में है।

  • स्विमिंग पूल में डूबने से मासूम की मौत, ग्वालियर में दफनाने के बाद पोस्टमॉर्टम की उठी मांग

    स्विमिंग पूल में डूबने से मासूम की मौत, ग्वालियर में दफनाने के बाद पोस्टमॉर्टम की उठी मांग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Gwalior में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया है, जहां एक होटल के स्विमिंग पूल में डूबने से 7 वर्षीय बच्चे वेद पाल की मौत हो गई। घटना गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित एबी रोड के एक होटल में सोमवार रात हुई, जब परिवार डिनर और पूल पार्टी के लिए वहां पहुंचा था। जानकारी के अनुसार, बच्चा पहले बच्चों के पूल में खेल रहा था, लेकिन कुछ समय बाद वह अचानक वहां से गायब हो गया। तलाश के दौरान वह बड़े स्विमिंग पूल की गहराई में मिला, जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
    हादसे के बाद परिवार पूरी तरह सदमे में था और देर रात लगभग 1 बजे बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन अगले दिन मामला तब पलटा जब लोगों ने परिजनों को होटल प्रबंधन की संभावित लापरवाही के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने दोबारा मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से संपर्क किया।
    परिजनों का आरोप है कि होटल में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और न ही लाइफगार्ड मौजूद था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। इसी आधार पर उन्होंने शव को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है, ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके।
    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत दफनाए गए शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा, जो कि इस तरह का एक दुर्लभ मामला माना जा रहा है।
    घटना के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह जांच का विषय है कि क्या स्विमिंग पूल के पास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी संकेत और निगरानी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
    पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    फिलहाल यह पूरा मामला जांच के दायरे में है और एक मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को गम और सवालों से भर दिया है।
  • ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता

    ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता


    नई दिल्ली। ग्वालियर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 10 के घासमंडी मिर्जापुर मस्जिद इलाके में स्थित पानी की टंकी में मरा हुआ सांप मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह वही टंकी है जिससे करीब 19 हजार लोगों को पेयजल की सप्लाई होती है।
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं की गई थी, जिसके कारण अंदर गंदगी जमा हो गई और अंततः मरा हुआ सांप पानी में पाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि लोग कई दिनों से इसी पानी का उपयोग कर रहे थे, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
    वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
    इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक युवक लकड़ी की मदद से टंकी के अंदर से मरा हुआ सांप बाहर निकालता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना शनिवार की है, लेकिन इसका वीडियो रविवार को सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
    वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ लापरवाही के आरोप लगाए।
    नगर निगम पर गंभीर सवाल
    रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार टंकी की सफाई और पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि निगम की लापरवाही के कारण वे दूषित पानी पीने को मजबूर थे, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
    हालांकि इस मामले पर अभी तक नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है।
    स्थानीय प्रतिनिधियों को भी नहीं जानकारी
    वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद शकील मंसूरी ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उन पर हमला हुआ था और वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए वे क्षेत्र की स्थिति पर पूरी तरह अपडेट नहीं हैं।
    पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी लापरवाहियां
    यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में पानी की टंकी को लेकर सवाल उठे हों। दो महीने पहले भी मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी टंकी में पांच मरी हुई छिपकलियां मिलने का मामला सामने आया था, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए थे।
    लोगों की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
    घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों ने टंकी की तुरंत सफाई, पानी की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
  • ग्वालियर में वर्दी की साख पर सवाल: नशे में धुत होमगार्ड सिपाही सड़क पर बेसुध

    ग्वालियर में वर्दी की साख पर सवाल: नशे में धुत होमगार्ड सिपाही सड़क पर बेसुध


    नई दिल्ली।  मध्यप्रदेश के ग्वालियर में शनिवार दोपहर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने वर्दीधारी सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के सिटी सेंटर इलाके में एक होमगार्ड सिपाही शराब के नशे में इस कदर धुत मिला कि वह सड़क पर ही बेसुध होकर गिर पड़ा। राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो हैरान रह गए, वहीं एक युवक ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

    बताया जा रहा है कि घटना दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच की है। वर्दी पहने यह सिपाही सड़क पर लोटपोट होता नजर आया और खुद को संभालने की स्थिति में नहीं था। राहगीरों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक युवक उससे उसका नाम और स्थिति पूछने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सिपाही ठीक से बोल भी नहीं पा रहा—सिर्फ इशारे करता और बड़बड़ाता नजर आता है।

    सबसे हैरानी की बात यह है कि सिपाही की वर्दी से नेम प्लेट भी गायब बताई जा रही है, जिससे उसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है। यही वजह है कि मामला और गंभीर हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और होमगार्ड विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक यह मामला पहुंच गया है, जिससे महकमे में हलचल मच गई है।

    इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं क्या सिपाही ड्यूटी पर था? अगर नहीं, तो वर्दी में इस हालत में सार्वजनिक स्थान पर कैसे पहुंचा? और यदि ड्यूटी पर था, तो यह अनुशासनहीनता किस स्तर की है? साथ ही, नेम प्लेट का गायब होना भी संदेह को और गहरा करता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ विभाग की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करती हैं। फिलहाल, प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन माना जा रहा है कि वीडियो के आधार पर जल्द ही संबंधित सिपाही की पहचान कर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

    यह घटना फिलहाल पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

  • डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा

    डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा


    नई दिल्ली। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक अहम मानवीय निर्णय लिया गया। इस मौके पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। शासन द्वारा यह निर्णय उनके अच्छे आचरण और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए लिया गया।

    14 साल से अधिक सजा काट चुके थे सभी बंदी
    रिहा किए गए सभी बंदी हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके थे। वे एक ही प्रकरण से जुड़े थे और लंबे समय से उनके व्यवहार और सुधार को लगातार परखा जा रहा था।

    शासन की मंजूरी के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
    जेल प्रशासन ने इन बंदियों के नाम और आचरण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल अधीक्षक विदित सरवईया के अनुसार, सभी बंदियों का आचरण संतोषजनक रहा, जिसके आधार पर उनकी शेष सजा माफ की गई।

    परिजनों से मिलकर भावुक हुए बंदी
    जेल से बाहर आते ही बंदियों ने अपने परिवारजनों से मुलाकात की। लंबे समय बाद मिलन के इस भावुक क्षण में कई बंदी और उनके परिजन भावुक नजर आए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जताई।

    सम्मान के साथ दी गई विदाई
    रिहाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अब अन्य अवसरों पर भी मिल रही राहत
    पहले केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही इस तरह की सजा माफी दी जाती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सुधार की दिशा में बंदियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    रिहा हुए बंदियों के नाम
    रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।