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  • एनर्जी ड्रिंक से मिलती है फुर्ती या बढ़ता है खतरा, रोज पीने से पहले जान लें शरीर पर होने वाले असर और जरूरी सावधानियां

    एनर्जी ड्रिंक से मिलती है फुर्ती या बढ़ता है खतरा, रोज पीने से पहले जान लें शरीर पर होने वाले असर और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। एनर्जी ड्रिंक आज युवाओं और कामकाजी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। थकान महसूस होने पर तुरंत ऊर्जा पाने और लंबे समय तक एक्टिव रहने के लिए कई लोग इनका सेवन करते हैं। पढ़ाई के दौरान जागने से लेकर जिम और खेल गतिविधियों तक एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल बढ़ गया है। इन पेय पदार्थों में आमतौर पर कैफीन के साथ चीनी और दूसरे उत्तेजक पदार्थ शामिल हो सकते हैं। इनकी वजह से कुछ समय के लिए व्यक्ति को अधिक सतर्क और ऊर्जावान महसूस हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनर्जी ड्रिंक शरीर की थकान का स्थायी समाधान है।

    एनर्जी ड्रिंक में मौजूद कैफीन दिमाग और नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है। इससे नींद कम महसूस हो सकती है और व्यक्ति कुछ समय के लिए ज्यादा एक्टिव नजर आ सकता है। इसी कारण लंबे समय तक काम करने या रात में पढ़ाई करने वाले लोग इनका सेवन करते हैं। हालांकि ज्यादा कैफीन लेने से बेचैनी घबराहट दिल की धड़कन तेज होना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कैफीन का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को जितनी मात्रा आसानी से सहन हो जाती है जरूरी नहीं कि उतनी मात्रा सभी के लिए सुरक्षित हो।

    एनर्जी ड्रिंक में चीनी की मात्रा भी कई बार काफी अधिक हो सकती है। नियमित रूप से ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन वजन बढ़ने और दांतों से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही अधिक मीठे खाद्य पदार्थ और पेय ले रहा है तो एनर्जी ड्रिंक उसके कुल चीनी सेवन को और बढ़ा सकता है। इसलिए केवल पेय के नाम में एनर्जी शब्द देखकर इसे स्वास्थ्यवर्धक समझना सही नहीं है।

    खास सावधानी बच्चों और किशोरों को लेकर बरतनी चाहिए। कम उम्र में कैफीन का अधिक सेवन नींद और व्यवहार से जुड़ी परेशानियां पैदा कर सकता है। गर्भवती महिलाओं और कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को भी ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है। इसी तरह जिन लोगों को दिल से जुड़ी समस्या है या जो किसी विशेष बीमारी की दवा ले रहे हैं उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के अधिक कैफीन वाले पेय से बचना चाहिए।

    एनर्जी ड्रिंक और शराब को मिलाकर पीना भी जोखिम बढ़ा सकता है। कैफीन व्यक्ति को कुछ समय के लिए कम नशे में महसूस करा सकता है जबकि शराब का असर शरीर पर बना रहता है। इससे व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति को कम आंक सकता है और जोखिम भरे फैसले ले सकता है। इसलिए दोनों को मिलाकर सेवन करना उचित नहीं माना जाता।

    अगर थकान दूर करनी है तो पर्याप्त नींद संतुलित भोजन पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि ज्यादा बेहतर आधार हैं। एनर्जी ड्रिंक को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी कभार भी सेवन करना हो तो लेबल पर कैफीन और चीनी की मात्रा जरूर देखनी चाहिए। किसी भी पेय को लेकर सबसे जरूरी बात उसकी मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति है। यदि एनर्जी ड्रिंक लेने के बाद लगातार दिल की धड़कन तेज होना चक्कर घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  • सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके

    सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। काम का दबाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। ऐसे में Health Care को केवल बीमारी होने के बाद इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान देना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और जरूरत से ज्यादा नमक लेने से बचना भी जरूरी है।

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। पानी की जरूरत उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकती है। इसलिए पूरे दिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके साथ ही रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना चाहिए। तेज चलना योग हल्की एक्सरसाइज साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने वालों को बीच बीच में उठकर चलना भी चाहिए।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग निश्चित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल कम करना भी नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी Health Care का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार तनाव महसूस होने पर अपनी दिनचर्या में आराम मनोरंजन परिवार के साथ समय और पसंदीदा गतिविधियों के लिए जगह बनाएं। जरूरत महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित कदम हो सकता है।

    इसके अलावा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या परिवार में किसी बीमारी का इतिहास रहा है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो खुद से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की कोशिश से नहीं बल्कि रोजाना अपनाई गई छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश और समय पर स्वास्थ्य सलाह लेने जैसी आदतें स्वस्थ जीवनशैली का आधार बन सकती हैं।

  • बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

    बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं


    नई दिल्ली। बवासीर यानी पाइल्स एक आम समस्या है जिससे बड़ी संख्या में लोग परेशान रहते हैं। इसमें गुदा या मलाशय के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है। कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहना मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना टॉयलेट में अधिक देर तक बैठे रहना और खाने में फाइबर की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। बवासीर होने पर दर्द खुजली जलन सूजन और मल त्याग के दौरान खून आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते और बवासीर भी मुख्य रूप से दो प्रकार की मानी जाती है।

    पहली होती है आंतरिक बवासीर। यह मलाशय के अंदर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। शुरुआती स्थिति में इसमें आमतौर पर दर्द बहुत कम होता है या बिल्कुल नहीं होता। हालांकि मल त्याग के दौरान ताजा लाल खून दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण हो सकता है। जैसे जैसे समस्या बढ़ती है वैसे वैसे सूजी हुई नसें मलाशय से बाहर की ओर आने लग सकती हैं। आंतरिक बवासीर को गंभीरता के आधार पर चार ग्रेड में बांटा जाता है। शुरुआती ग्रेड में नसें अंदर रहती हैं जबकि आगे की स्थिति में वे बाहर निकल सकती हैं और कुछ मामलों में उन्हें हाथ से वापस अंदर करना पड़ सकता है।

    दूसरी तरह की बवासीर बाहरी बवासीर होती है। यह गुदा के बाहर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। इसमें दर्द खुजली और सूजन जैसी समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सूजी हुई नस के भीतर खून का थक्का बन जाता है। इसे थ्रॉम्बोस्ड हेमोरॉयड कहा जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज दर्द हो सकता है और गुदा के पास गांठ जैसी महसूस हो सकती है। यह स्थिति आमतौर पर जानलेवा नहीं होती लेकिन अचानक तेज दर्द या सूजन होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

    आमतौर पर बवासीर को जानलेवा बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लगातार होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए। खासकर लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में रक्तस्राव होने पर शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। इससे कमजोरी थकान और चक्कर जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव चिंता का कारण बन सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि मल के साथ खून आने का कारण हर बार बवासीर ही हो यह जरूरी नहीं है। गुदा में दरार यानी फिशर आंतों से जुड़ी दूसरी समस्याएं और कुछ गंभीर बीमारियां भी रक्तस्राव का कारण हो सकती हैं। इसलिए बार बार खून आने पर खुद से इसे बवासीर मानकर इलाज करना सही नहीं है।

    अगर गुदा से लगातार या ज्यादा खून निकल रहा है और इसके साथ चक्कर कमजोरी बेहोशी जैसा महसूस होना तेज दर्द या काला मल आने जैसी समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई दिनों तक कब्ज दर्द खुजली या मल के साथ खून आने की समस्या बनी रहने पर भी जांच कराना जरूरी है।

    बवासीर से बचाव के लिए कब्ज को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। भोजन में फल सब्जियां साबुत अनाज और दालों जैसी फाइबर वाली चीजें शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से बचें। टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा देर तक बैठने की आदत भी छोड़नी चाहिए। समय रहते ध्यान देने से बवासीर की समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

  • दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें

    दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें


    नई दिल्ली।
    अच्छी सेहत हर व्यक्ति की सबसे बड़ी जरूरत है लेकिन व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। काम का तनाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। स्वस्थ रहने के लिए हमेशा कठिन नियम अपनाने की जरूरत नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों में बदलाव करके भी शरीर को बेहतर तरीके से स्वस्थ रखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता किसी बीमारी के बाद नहीं बल्कि पहले से शुरू होनी चाहिए।

    स्वस्थ रहने के लिए संतुलित भोजन सबसे अहम माना जाता है। रोज के भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। अधिक तला हुआ भोजन ज्यादा नमक और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर होता है। पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह ताजा और घर का बना भोजन प्राथमिकता देने से खानपान को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। भोजन की मात्रा के साथ खाने का समय भी नियमित रखना जरूरी है।

    पर्याप्त पानी पीना भी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान कमजोरी और सिरदर्द जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। इसलिए दिनभर अपनी जरूरत के अनुसार पानी पीते रहना चाहिए। हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत उसकी उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना हल्की एक्सरसाइज करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत से बचना भी महत्वपूर्ण है। काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना शरीर के लिए बेहतर हो सकता है।

    स्वास्थ्य के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। देर रात तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित हो सकती है इसलिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करनी चाहिए। तनाव को नियंत्रित करना भी स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है। ध्यान योग किताब पढ़ना या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। हाथों की नियमित सफाई साफ कपड़े और आसपास की स्वच्छता कई संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है। समय समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी हो सकता है ताकि किसी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

    ध्यान रखना चाहिए कि ये सामान्य स्वास्थ्य सुझाव हैं और किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। अगर शरीर में लगातार कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें या पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। स्वस्थ जीवन का आधार संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद मानसिक शांति और साफ सफाई जैसी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदतें हैं। इन्हें रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • उम्र कम है तो कैंसर का खतरा नहीं ऐसा सोचना पड़ सकता है भारी 20 से 30 की उम्र में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    उम्र कम है तो कैंसर का खतरा नहीं ऐसा सोचना पड़ सकता है भारी 20 से 30 की उम्र में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में यह धारणा बनती है कि यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों को ही होती है। हालांकि कुछ प्रकार के कैंसर कम उम्र के लोगों में भी हो सकते हैं। 20 से 30 साल की उम्र में कैंसर का खतरा आमतौर पर उम्र बढ़ने के मुकाबले कम होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि युवाओं को शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। कई बार सामान्य लगने वाले लक्षण किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की वजह से भी हो सकते हैं लेकिन अगर कोई बदलाव लगातार बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    शरीर में अचानक कोई गांठ महसूस होना ऐसा संकेत है जिस पर ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर अगर गांठ लंबे समय तक बनी रहे या उसके आकार में बदलाव दिखाई दे तो इसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। हर गांठ कैंसर नहीं होती क्योंकि शरीर में कई तरह की गैर कैंसरकारी गांठ भी बन सकती हैं। इसलिए खुद से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    बिना किसी स्पष्ट वजह के लगातार वजन कम होना भी ऐसा बदलाव है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर खानपान या व्यायाम में कोई बड़ा बदलाव किए बिना वजन तेजी से कम हो रहा है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव संक्रमण हार्मोन संबंधी समस्या या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं। लगातार वजन घटने पर डॉक्टर से जांच कराना सही कदम माना जाता है।

    लगातार थकान महसूस होना भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। पर्याप्त आराम और नींद के बावजूद कमजोरी बनी रहती है तो इसके कारणों की जांच जरूरी हो सकती है। इसी तरह लंबे समय तक रहने वाला बुखार रात में अत्यधिक पसीना आना या शरीर में लगातार कमजोरी जैसी समस्या होने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    कुछ मामलों में शरीर से असामान्य रक्तस्राव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। मल या पेशाब में खून दिखाई देना या बिना सामान्य कारण के रक्तस्राव होना ऐसी स्थिति है जिसमें देरी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी आवाज में लगातार बदलाव निगलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की भी जांच कराना जरूरी हो सकता है।
    कुछ मामलों में शरीर से असामान्य रक्तस्राव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। मल या पेशाब में खून दिखाई देना या बिना सामान्य कारण के रक्तस्राव होना ऐसी स्थिति है जिसमें देरी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी आवाज में लगातार बदलाव निगलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की भी जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    यह समझना बेहद जरूरी है कि इन लक्षणों में से किसी एक का होना कैंसर होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे कई लक्षण सामान्य संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। कैंसर की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच और जरूरी टेस्ट के बाद ही हो सकती है। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी का अनुमान लगाने से बचना चाहिए।

    युवाओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अपने शरीर में होने वाले लगातार और असामान्य बदलावों को लेकर जागरूक रहें। संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू और धूम्रपान से दूरी तथा समय पर स्वास्थ्य जांच बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर कोई लक्षण लगातार बना रहता है या तेजी से बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना समझदारी है। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से बीमारी का कारण समझने और जरूरत पड़ने पर उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

  • छाले मुंह में और दर्द कान में आखिर ऐसा क्यों होता है शरीर की नसों का ये कनेक्शन आपको हैरान कर देगा

    छाले मुंह में और दर्द कान में आखिर ऐसा क्यों होता है शरीर की नसों का ये कनेक्शन आपको हैरान कर देगा


    नई दिल्ली । मुंह में छाले होना एक आम समस्या है और ज्यादातर लोग इसे कुछ दिनों में अपने आप ठीक होने वाली परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार मुंह में छाले होने के साथ कान में भी दर्द महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब परेशानी मुंह के अंदर है तो कान में दर्द आखिर क्यों हो रहा है। दरअसल मुंह कान गले और चेहरे के आसपास के हिस्सों के बीच नसों का जटिल नेटवर्क मौजूद होता है। इसी वजह से एक जगह होने वाली परेशानी का असर दूसरी जगह दर्द के रूप में महसूस हो सकता है।

    मुंह में मौजूद छाले खासतौर पर जीभ के पीछे या मुंह के ऐसे हिस्से में हों जहां नसों की संवेदनशीलता अधिक हो तो उनका दर्द आसपास के हिस्सों तक महसूस हो सकता है। इसे referred pain यानी दूसरी जगह महसूस होने वाला दर्द कहा जाता है। ऐसे मामलों में दर्द का वास्तविक स्रोत मुंह में हो सकता है लेकिन व्यक्ति को उसका असर कान के आसपास महसूस होता है। यह स्थिति हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती और दर्द की तीव्रता भी अलग हो सकती है।

    कान में दर्द के पीछे केवल मुंह के छाले ही जिम्मेदार नहीं होते। दांतों में संक्रमण मसूड़ों की परेशानी गले में सूजन टॉन्सिल की समस्या या जबड़े के आसपास होने वाली दिक्कत भी कान तक दर्द पहुंचा सकती है। कई बार कान में संक्रमण होने पर भी दर्द आसपास के चेहरे और जबड़े के हिस्से में महसूस होता है। इसलिए केवल कान में दर्द होने के आधार पर इसका कारण तय करना सही नहीं है।

    मुंह के छाले कई वजहों से हो सकते हैं। तनाव नींद की कमी मुंह में चोट बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन या पोषण संबंधी कमी कुछ लोगों में छालों की समस्या से जुड़ी हो सकती है। आमतौर पर छोटे छाले कुछ समय में ठीक हो जाते हैं। इस दौरान बहुत ज्यादा तीखा या खट्टा भोजन खाने से बचना राहत दे सकता है। पर्याप्त पानी पीना और मुंह की साफ सफाई बनाए रखना भी जरूरी है।

    अगर छाले के साथ कान में हल्का दर्द है और कुछ दिनों में दोनों समस्याएं कम हो रही हैं तो आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर दर्द लगातार बढ़ रहा है या छाला बार बार हो रहा है तो इसकी वजह समझना जरूरी है। खासतौर पर यदि छाला लंबे समय तक ठीक न हो मुंह में लगातार सूजन या खून आए निगलने में परेशानी हो तेज बुखार हो या कान से संबंधित अन्य लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

    बार बार होने वाले मुंह के छालों को भी केवल सामान्य समस्या मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में डॉक्टर जांच के बाद पोषण संबंधी कमी संक्रमण या किसी अन्य कारण की पहचान कर सकते हैं। इसी तरह लगातार कान दर्द होने पर ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

    कुल मिलाकर मुंह के छाले और कान के दर्द के बीच सीधा संबंध हर मामले में नहीं होता लेकिन शरीर में नसों और आसपास के अंगों के आपसी कनेक्शन के कारण एक जगह की समस्या का दर्द दूसरी जगह महसूस हो सकता है। इसलिए दर्द की सही वजह समझना सबसे जरूरी है। घरेलू उपायों से राहत न मिले या लक्षण लगातार बने रहें तो विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

  • रात में अचानक पैर पकड़ लेता है दर्द तो न करें नजरअंदाज, इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह

    रात में अचानक पैर पकड़ लेता है दर्द तो न करें नजरअंदाज, इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह


    नई दिल्ली। पैरों में दर्द होना आम समस्या है लेकिन अगर बिना किसी चोट या ज्यादा मेहनत के अचानक पैर में दर्द ऐंठन या खिंचाव होने लगे तो इसे सिर्फ सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी का असर मांसपेशियों और नसों पर पड़ सकता है। खासतौर पर बार बार होने वाली ऐंठन या दर्द शरीर में पोषण से जुड़ी किसी कमी की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि पैर में दर्द के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं इसलिए लगातार परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    विटामिन डी शरीर में हड्डियों के साथ मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए भी जरूरी माना जाता है। इसकी कमी होने पर शरीर में कमजोरी और दर्द जैसी शिकायत हो सकती है। कुछ लोगों में पैरों के अलावा कमर और पीठ में भी दर्द महसूस हो सकता है। शरीर को विटामिन डी का एक प्रमुख स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा डाइट और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट के जरिए इसकी कमी को दूर किया जा सकता है। बिना जांच के खुद से हाई डोज सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।

    कैल्शियम को आमतौर पर हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इसका संबंध मांसपेशियों के सामान्य संकुचन और तंत्रिका तंत्र के कामकाज से भी है। शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने पर कुछ लोगों को मांसपेशियों में खिंचाव ऐंठन या असहजता महसूस हो सकती है। डाइट में दूध दही पनीर तिल और कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति में लगातार कमी बनी हुई है तो डॉक्टर उचित जांच के बाद इसकी वजह और उपचार तय कर सकते हैं।

    विटामिन बी12 की कमी भी नसों से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है। इसकी कमी होने पर हाथ पैर में झनझनाहट सुन्नपन कमजोरी या असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों को पैरों में खिंचाव या दर्द की शिकायत भी हो सकती है। खासकर लंबे समय से बनी रहने वाली ऐसी समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी सही वजह पता करना जरूरी है। विटामिन बी12 मुख्य रूप से दूध अंडे मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों में इसके स्रोत सीमित होने के कारण डॉक्टर की सलाह से इसकी जांच और जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट की सलाह दी जा सकती है।

    पैरों में अचानक ऐंठन और दर्द का कारण सिर्फ विटामिन या मिनरल्स की कमी ही नहीं होता। शरीर में पानी की कमी लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना अधिक शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों पर दबाव या कुछ दवाओं के प्रभाव से भी ऐसी परेशानी हो सकती है। इसलिए केवल लक्षण देखकर किसी एक पोषक तत्व की कमी मान लेना सही नहीं है।

    शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने के लिए संतुलित आहार लेना सबसे महत्वपूर्ण है। खाने में हरी सब्जियां मौसमी फल दूध दही अंडे दालें सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना और नियमित हल्की एक्सरसाइज भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। अगर पैर का दर्द बार बार हो रहा है रात में लगातार ऐंठन होती है पैर में सुन्नपन या कमजोरी रहती है या दर्द काफी ज्यादा है तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा। जरूरत पड़ने पर जांच के जरिए विटामिन और मिनरल्स के स्तर के साथ समस्या की दूसरी संभावित वजहों का भी पता लगाया जा सकता है।

  • मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद

    मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी जुकाम खांसी और गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या अचानक ठंडी और गर्म जगह के बीच जाना भी परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि केवल बारिश में भीगना ही सर्दी जुकाम का सीधा कारण नहीं होता बल्कि वायरल संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देकर संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले शरीर को गीला होने से बचाना जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो घर पहुंचने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से असहजता बढ़ सकती है और शरीर को ठंड महसूस हो सकती है। बारिश के दिनों में बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना भी उपयोगी आदत है।

    मानसून के दौरान हाथों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचें क्योंकि वायरस और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कण हाथों के जरिए शरीर तक पहुंच सकते हैं। अगर आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उसके बेहद करीब जाने से बचना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

    खानपान भी मानसून में सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौसम में ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीते रहें और डाइट में फल सब्जियां दालें और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। बहुत ज्यादा तला भुना या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना भी बेहतर है।

    मानसून में पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। लगातार कम नींद और खराब दिनचर्या से शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और बहुत ज्यादा ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।

    अगर सर्दी जुकाम हो भी जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन मददगार हो सकता है। गले में खराश या नाक बंद होने जैसी परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द या लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मानसून में थोड़ी सावधानी और अच्छी स्वच्छता की आदतें अपनाकर सर्दी जुकाम समेत कई संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।