Tag: health tips

  • मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद

    मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी जुकाम खांसी और गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या अचानक ठंडी और गर्म जगह के बीच जाना भी परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि केवल बारिश में भीगना ही सर्दी जुकाम का सीधा कारण नहीं होता बल्कि वायरल संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देकर संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले शरीर को गीला होने से बचाना जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो घर पहुंचने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से असहजता बढ़ सकती है और शरीर को ठंड महसूस हो सकती है। बारिश के दिनों में बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना भी उपयोगी आदत है।

    मानसून के दौरान हाथों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचें क्योंकि वायरस और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कण हाथों के जरिए शरीर तक पहुंच सकते हैं। अगर आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उसके बेहद करीब जाने से बचना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

    खानपान भी मानसून में सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौसम में ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीते रहें और डाइट में फल सब्जियां दालें और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। बहुत ज्यादा तला भुना या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना भी बेहतर है।

    मानसून में पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। लगातार कम नींद और खराब दिनचर्या से शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और बहुत ज्यादा ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।

    अगर सर्दी जुकाम हो भी जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन मददगार हो सकता है। गले में खराश या नाक बंद होने जैसी परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द या लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मानसून में थोड़ी सावधानी और अच्छी स्वच्छता की आदतें अपनाकर सर्दी जुकाम समेत कई संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज

    रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज


    नई दिल्ली । रक्तदान को जीवन बचाने वाला सबसे बड़ा सामाजिक योगदान माना जाता है। एक यूनिट रक्त को अलग अलग घटकों में इस्तेमाल किया जाए तो इससे एक से अधिक मरीजों की मदद हो सकती है। यही वजह है कि अस्पतालों और ब्लड बैंकों की ओर से लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि रक्तदान करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर व्यक्ति ब्लड डोनेट करने के लिए योग्य नहीं होता। शरीर की सामान्य स्थिति उम्र वजन और स्वास्थ्य से जुड़े कई मानकों की जांच के बाद ही रक्तदान की अनुमति दी जाती है। भारत सरकार के e-RaktKosh के अनुसार सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना चाहिए।

    रक्तदान से पहले ब्लड बैंक में व्यक्ति की सामान्य स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें मेडिकल हिस्ट्री के साथ ब्लड प्रेशर पल्स और शरीर का तापमान देखा जाता है। इसके अलावा उंगली से लिए गए रक्त के नमूने से हीमोग्लोबिन या आयरन की पर्याप्तता की जांच की जाती है। यदि जांच में कोई ऐसी स्थिति सामने आती है जिसमें रक्तदान करना सुरक्षित नहीं है तो व्यक्ति को उस समय रक्तदान से रोक दिया जाता है। इसलिए केवल उम्र और वजन सही होना ही पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।

    आम तौर पर स्वस्थ वयस्क रक्तदान कर सकते हैं लेकिन यदि किसी व्यक्ति को गंभीर एनीमिया है या वह किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो उसे रक्तदान से बचना चाहिए। हाल ही में हुई सर्जरी या कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद भी कुछ समय तक रक्तदान टाला जा सकता है। इसी तरह कुछ संक्रमणों और स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर या ब्लड बैंक की मेडिकल टीम रक्तदान को अस्थायी या स्थायी रूप से रोक सकती है। इसलिए यदि आप किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं या नियमित दवाएं लेते हैं तो रक्तदान से पहले इसकी जानकारी ब्लड बैंक के चिकित्सकीय स्टाफ को देना जरूरी है।

    गर्भावस्था के दौरान रक्तदान नहीं किया जाता। डिलीवरी के बाद भी महिला को तुरंत रक्तदान नहीं करना चाहिए और उचित समय तथा स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार ही दोबारा रक्तदान किया जाना चाहिए। इसी तरह हाल में टीकाकरण या टैटू जैसी कुछ परिस्थितियों में भी रक्तदान कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इन मामलों में प्रतीक्षा की अवधि हर स्थिति के लिए एक जैसी नहीं होती इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित ब्लड सेंटर की मेडिकल स्क्रीनिंग के आधार पर लिया जाना चाहिए।

    रक्तदान से पहले कुछ सामान्य सावधानियां भी मददगार होती हैं। खाली पेट रक्तदान करने से बचना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए। अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। रक्तदान से पहले हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर माना जाता है। शराब का सेवन करके रक्तदान करने से बचना चाहिए। रक्तदान के बाद भी शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना चाहिए। e-RaktKosh के अनुसार रक्तदान के बाद अगले 24 से 48 घंटे तक तरल पदार्थ बढ़ाने और कुछ समय तक भारी शारीरिक मेहनत तथा वजन उठाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    रक्तदान के दौरान किसी तरह की कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताना चाहिए। रक्तदान के बाद कुछ देर आराम करना और उपलब्ध कराए गए हल्के जलपान का सेवन करना उपयोगी होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्तदान नेक काम जरूर है लेकिन इसे केवल उत्साह में आकर नहीं करना चाहिए। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सही जानकारी देकर ही रक्तदान करें। अंतिम पात्रता का निर्णय ब्लड बैंक की मेडिकल स्क्रीनिंग और लागू रक्तदान दिशानिर्देशों के अनुसार होता है।

  • मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं बदलता मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान तापमान में उतार चढ़ाव नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने के कारण संक्रमण फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं। यही वजह है कि इन दिनों वायरल बुखार सर्दी जुकाम खांसी गले में खराश सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। खासतौर पर बच्चे बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर को तापमान के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है और संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

    वायरल बुखार होने पर आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ना थकान कमजोरी सिरदर्द बदन दर्द ठंड लगना भूख कम लगना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में खांसी और नाक बहने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि हर बुखार वायरल ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में भी बुखार हो सकता है इसलिए लगातार तेज बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर में किसी व्यक्ति को सर्दी खांसी या बुखार हो तो उसके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचना और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना भी संक्रमण के प्रसार को कम कर सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से बचना चाहिए। गीले कपड़े तुरंत बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहतर होता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और आसपास की खाली जगहों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। इससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

    अगर बुखार हो जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि हर बुखार का कारण बैक्टीरियल संक्रमण नहीं होता। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे बहुत तेज हो जाए या उसके साथ सांस लेने में परेशानी लगातार उल्टी अत्यधिक कमजोरी बेहोशी त्वचा पर दाने या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर बारिश और बदलते मौसम में वायरल बुखार से बचाव के लिए साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद सुरक्षित पानी और आसपास की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मानसून का मौसम स्वस्थ रहते हुए बिताया जा सकता है।

  • आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान

    आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान


    नई दिल्ली । चेहरा सिर्फ हमारी पहचान और खूबसूरती का हिस्सा नहीं है बल्कि कई बार यह शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के संकेत भी दे सकता है। आंखों का रंग बदलना हो या त्वचा का असामान्य रूप से पीला पड़ना होंठों का नीला दिखना या आंखों के आसपास लगातार सूजन रहना इन बदलावों को हमेशा केवल कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में होने वाले कई बदलाव चेहरे और आंखों पर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि केवल चेहरे के लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन ऐसे बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    सबसे पहले बात आंखों और त्वचा के पीले पड़ने की करें तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है। शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखाई देने लगती है। इसके पीछे हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी पित्त की पथरी या पित्त की नलियों से जुड़ी समस्या समेत कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में इसके साथ पेशाब का रंग गहरा और मल का रंग सामान्य से हल्का भी दिखाई दे सकता है। इसलिए आंखों में अचानक पीलापन नजर आए तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।

    इसी तरह चेहरे या त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा फीका या पीला नजर आना भी शरीर में आयरन की कमी से जुड़े एनीमिया का संकेत हो सकता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है और हीमोग्लोबिन शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर त्वचा के रंग में बदलाव के साथ लगातार थकान कमजोरी या थोड़ी मेहनत में सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

    चेहरे और होंठों का नीला पड़ना भी गंभीर संकेत हो सकता है। होंठ जीभ या चेहरे का अचानक नीला दिखना सायनोसिस कहलाता है और यह रक्त में ऑक्सीजन की कमी या रक्त संचार से जुड़ी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है। फेफड़ों की बीमारी वायुमार्ग में रुकावट कुछ हृदय संबंधी समस्याएं या रक्त प्रवाह में बाधा इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। ऐसा बदलाव अचानक दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    आंखों की पलकों के आसपास छोटे पीले या पीले-सफेद उभार भी ध्यान देने लायक होते हैं। इन्हें जैंथेलाज्मा कहा जाता है और ये कुछ लोगों में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से लिपिड प्रोफाइल जैसी जांच कराई जा सकती है।

    चेहरे पर लगातार सूजन भी शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। आंखों के आसपास सूजन कई कारणों से हो सकती है और कुछ मामलों में यह किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी देखी जाती है। वहीं चेहरे का फूला हुआ दिखना अंडरएक्टिव थायरॉयड जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। दूसरी ओर एलर्जी या किसी दवा की प्रतिक्रिया के कारण भी चेहरे और आंखों के आसपास सूजन आ सकती है।

    खास बात यह है कि चेहरे में दिखने वाले हर बदलाव का मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता। मौसम त्वचा की सामान्य स्थिति एलर्जी खानपान या दूसरी वजहों से भी बदलाव हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई असामान्य बदलाव अचानक दिखाई दे लगातार बना रहे या उसके साथ कमजोरी सांस लेने में परेशानी दर्द अथवा अन्य लक्षण भी मौजूद हों तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। आईना बीमारी की पुष्टि नहीं करता लेकिन शरीर के संकेतों पर समय रहते ध्यान देने में जरूर मदद कर सकता है।

  • मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी

    मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी


    नई दिल्ली। मोटापा आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है और इसके कारण डायबिटीज दिल की बीमारी फैटी लिवर नींद के दौरान सांस रुकने जैसी कई गंभीर परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए पिछले कुछ समय में GLP-1 दवाओं की चर्चा तेजी से बढ़ी है। इन दवाओं ने मोटापे के इलाज में एक नया विकल्प जरूर दिया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वजन घटाने वाली सर्जरी की जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए मोटापे का इलाज अलग हो सकता है और इसका फैसला उसकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर किया जाना चाहिए।

    GLP-1 दवाएं शरीर में भूख और खाने की इच्छा को नियंत्रित करने वाले तंत्र पर असर डालती हैं। इनसे कुछ लोगों को कम खाने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करने में मदद मिल सकती है। इसके कारण वजन कम करने में सहायता मिलती है। यही वजह है कि जो लोग वजन घटाने की सर्जरी से बचना चाहते हैं उनके लिए GLP-1 दवाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई हैं। हालांकि इन दवाओं को किसी आसान या जादुई तरीके के रूप में देखना सही नहीं है।

    मोटापे के इलाज में केवल वजन कम करना ही लक्ष्य नहीं होता बल्कि व्यक्ति की पूरी सेहत में सुधार करना भी जरूरी होता है। अगर किसी व्यक्ति को गंभीर मोटापे के साथ टाइप 2 डायबिटीज दिल से जुड़ी समस्या फैटी लिवर या स्लीप एपनिया जैसी बीमारी है तो डॉक्टर इलाज के दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में वजन घटाने की सर्जरी अब भी प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि GLP-1 दवाओं के आने के बाद सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है।

    GLP-1 दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दवा शुरू करने से पहले व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री वजन बढ़ने के कारण दूसरी बीमारियों और इस्तेमाल की जा रही दवाओं की जानकारी लेना जरूरी होता है। दवा की मात्रा और उपचार की अवधि भी डॉक्टर ही तय करते हैं। कुछ लोगों में दवा से पाचन संबंधी परेशानी सहित अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं इसलिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।

    वजन कम करने के दौरान खानपान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रहती है। GLP-1 दवाओं से भूख कम हो सकती है लेकिन शरीर को पर्याप्त प्रोटीन फाइबर विटामिन खनिज और पानी मिलना जरूरी है। केवल कम खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि पौष्टिक भोजन लेना भी जरूरी है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि अच्छी नींद और तनाव को नियंत्रित करना वजन को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।


    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।

    कुल मिलाकर GLP-1 दवाओं ने मोटापे के इलाज के क्षेत्र में नई संभावनाएं जरूर खोली हैं लेकिन हर मरीज के लिए यही सबसे अच्छा विकल्प हो ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को दवाओं से अच्छा लाभ मिल सकता है जबकि गंभीर मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों में सर्जरी की भूमिका बनी रह सकती है। इसलिए वजन घटाने के लिए किसी भी दवा या सर्जरी का फैसला खुद से लेने के बजाय योग्य डॉक्टर से पूरी जांच और सलाह के बाद ही करना चाहिए। सही इलाज के साथ संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनाना ही लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रखने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • Flu Vaccine Alert: फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी हर साल वैक्सीन लगवाकर खुद और परिवार को रखें सुरक्षित

    Flu Vaccine Alert: फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी हर साल वैक्सीन लगवाकर खुद और परिवार को रखें सुरक्षित


    नई दिल्ली । मौसम बदलते ही सर्दी खांसी और बुखार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। अधिकतर लोग इन्हें सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कई बार यही फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। खासकर बुजुर्ग छोटे बच्चे गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए फ्लू खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके और गंभीर जटिलताओं से बचाव हो सके।

    फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होने वाला संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने या उसके संपर्क में आने से तेजी से फैलता है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार शरीर में दर्द सिरदर्द गले में खराश खांसी कमजोरी और थकान शामिल हैं। कई मामलों में यह संक्रमण निमोनिया फेफड़ों के संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू वायरस समय के साथ अपना स्वरूप बदलता रहता है। यही कारण है कि हर साल नई वैक्सीन तैयार की जाती है ताकि उस समय सक्रिय वायरस से बेहतर सुरक्षा मिल सके। पिछले साल लगवाई गई वैक्सीन अगले साल पूरी तरह प्रभावी नहीं मानी जाती इसलिए हर वर्ष नया टीका लगवाना जरूरी होता है।

    फ्लू वैक्सीन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। यदि वैक्सीन लगवाने के बाद भी संक्रमण हो जाए तो बीमारी की गंभीरता काफी कम रहती है और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। इससे अस्पताल में भर्ती होने और जानलेवा जटिलताओं का खतरा भी घट जाता है।

    डॉक्टरों के अनुसार छह महीने से अधिक उम्र के लगभग सभी लोगों को फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए। हालांकि बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं मधुमेह हृदय रोग अस्थमा किडनी और लिवर की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह टीका विशेष रूप से जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्यकर्मी और ऐसे लोग जो रोज बड़ी संख्या में लोगों के संपर्क में रहते हैं उन्हें भी हर साल फ्लू वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

    फ्लू से बचाव केवल वैक्सीन तक सीमित नहीं है। नियमित रूप से हाथ धोना भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढंकना तथा बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखना भी संक्रमण रोकने में मदद करता है। संतुलित आहार पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम से भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है।

    कई लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि फ्लू वैक्सीन लगाने से फ्लू हो जाता है जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है। वैक्सीन केवल शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करती है। कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह हल्का दर्द या एक दो दिन तक मामूली बुखार महसूस हो सकता है लेकिन यह सामान्य प्रतिक्रिया होती है और जल्द ठीक हो जाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लू को सामान्य बीमारी समझकर अनदेखा करना सही नहीं है। समय पर वैक्सीन लगवाकर और जरूरी सावधानियां अपनाकर न केवल खुद को बल्कि अपने परिवार और समाज को भी संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सकता है। हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाना स्वस्थ जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

  • महिलाएं रहें सतर्क पीरियड्स जैसा दर्द भी हो सकता है हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

    महिलाएं रहें सतर्क पीरियड्स जैसा दर्द भी हो सकता है हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं


    नई दिल्ली। हार्ट अटैक को अक्सर सीने में तेज दर्द और बाएं हाथ में झनझनाहट से जोड़कर देखा जाता है लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग भी हो सकते हैं। कई मामलों में हार्ट अटैक से पहले महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में ऐसा दर्द महसूस होता है जो बिल्कुल पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन जैसा लगता है। यही कारण है कि कई महिलाएं इसे सामान्य मासिक धर्म का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देती हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान शरीर हमेशा एक जैसे संकेत नहीं देता। कुछ महिलाओं को पेट में भारीपन कमर में दर्द मतली थकान सांस फूलना ठंडा पसीना और कमजोरी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। कई बार पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द इतना सामान्य लगता है कि मरीज उसे गैस बदहजमी या पीरियड्स की समस्या मान लेता है जबकि वास्तव में यह हृदय से जुड़ी गंभीर परेशानी का संकेत हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यदि समय रहते उपचार न मिले तो हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर के किसी भी असामान्य दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए विशेष रूप से तब जब उसके साथ सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक थकान चक्कर या सीने में दबाव जैसा महसूस हो।

    महिलाओं में हार्ट अटैक के कई लक्षण पुरुषों की तुलना में अलग हो सकते हैं। इनमें गर्दन कंधे पीठ या जबड़े में दर्द अत्यधिक पसीना उल्टी जैसा महसूस होना अचानक कमजोरी बेचैनी और बिना किसी कारण सांस फूलना शामिल है। यदि पीरियड्स जैसा दर्द सामान्य समय से अलग महसूस हो रहा हो या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा धूम्रपान तनाव अनियमित जीवनशैली और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि इस समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी माना जाता है।

    हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव पर नियंत्रण और धूम्रपान तथा शराब से दूरी बनाए रखना सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच भी करानी चाहिए। यदि परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास है तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

    ध्यान रखें कि हर पेट दर्द या पीरियड्स जैसा दर्द हार्ट अटैक का संकेत नहीं होता लेकिन यदि यह दर्द असामान्य हो और उसके साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दबाव ठंडा पसीना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार ही हार्ट अटैक से होने वाले गंभीर नुकसान और जान के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

  • Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

    Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, पसीना और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में सिर्फ ज्यादा पानी पीना ही काफी नहीं होता, बल्कि खानपान में भी ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दें और जरूरी पोषक तत्व भी पहुंचाएं। मौसमी फल और प्राकृतिक पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और तरोताजा रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करें।

    तरबूज बनाए शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड
    गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा तरबूज में विटामिन A, विटामिन C और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। दोपहर या शाम के समय ताजा तरबूज खाना शरीर को ठंडक देने का आसान और स्वादिष्ट तरीका है।

    खरबूजा देगा पोषण और ताजगी
    खरबूजा भी गर्मियों का एक बेहतरीन फल है। इसमें पानी के साथ फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन मौजूद होते हैं। इसे खाने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बेहतर बना रहता है और पाचन भी ठीक रहता है। अगर आपको गर्मी में थकान या कमजोरी महसूस होती है तो नाश्ते या शाम के स्नैक में खरबूजा शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

    खीरा रखें रोज की डाइट का हिस्सा
    खीरा गर्मी के मौसम में सबसे आसान और हेल्दी विकल्पों में से एक है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट भी हल्का महसूस करता है। सलाद के रूप में या हल्के मसालों के साथ खीरा खाने से पाचन बेहतर रहता है और गर्मी की वजह से होने वाली बेचैनी भी कम महसूस होती है। नियमित रूप से खीरा खाने से त्वचा में भी प्राकृतिक निखार बना रहता है।

    आम का स्वाद लें, लेकिन सीमित मात्रा में
    गर्मी का मौसम आम के बिना अधूरा माना जाता है। आम में विटामिन A, विटामिन C और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है। दिन में एक मध्यम आकार का आम या सीमित मात्रा में आम खाना पर्याप्त माना जाता है। खासतौर पर मधुमेह या वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही आम का सेवन करना चाहिए।

    नारियल पानी से मिलेगी प्राकृतिक ऊर्जा
    गर्मी में शरीर से पसीने के साथ कई जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में नारियल पानी एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। तेज धूप से लौटने के बाद या सुबह के समय नारियल पानी पीना शरीर को ताजगी और ऊर्जा देने का आसान तरीका है।

    गर्मी में रखें खानपान का खास ध्यान
    गर्मी के मौसम में सही खानपान अपनाने से कई मौसमी समस्याओं से बचा जा सकता है। अपनी रोज की डाइट में तरबूज, खरबूजा, खीरा, सीमित मात्रा में आम और नारियल पानी शामिल करके आप शरीर को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रख सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजों से बचें और ताजे मौसमी फलों को प्राथमिकता दें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें गर्मियों को आरामदायक और सेहतमंद बना सकती हैं।