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  • Immunity Booster Foods: गर्मी में सेहत को मजबूत बनाने वाले 7 प्राकृतिक आहार

    Immunity Booster Foods: गर्मी में सेहत को मजबूत बनाने वाले 7 प्राकृतिक आहार


    नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में शरीर जल्दी कमजोर हो जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थ इम्यूनिटी को मजबूत बनाकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं।

     गर्मी में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले 7 सुपरफूड-


    1. आम (Mango)

    आम सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि विटामिन A और C से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

    2. तरबूज (Watermelon)

    तरबूज शरीर को हाइड्रेट रखता है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करते हैं।

    3. खीरा (Cucumber)

    खीरा शरीर को ठंडक देता है और पानी की कमी दूर करता है। इसमें मौजूद मिनरल्स शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं।

    4. दही (Curd)

    दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आंतों को स्वस्थ रखते हैं और इम्यूनिटी को प्राकृतिक रूप से मजबूत करते हैं।

    5. नारियल पानी (Coconut Water)

    नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है, जो शरीर को एनर्जी देता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।

    6. लहसुन (Garlic)

    लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं।

    7. नींबू (Lemon)

    नींबू विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से बढ़ाता है और स्किन को भी हेल्दी रखता है।

    गर्मी में सही खानपान अपनाकर आप अपने शरीर को अंदर से मजबूत बना सकते हैं। ये प्राकृतिक खाद्य पदार्थ न केवल इम्यूनिटी बढ़ाते हैं बल्कि शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी देते हैं।

  • दूध वाली नहीं, रोज पिएं लेमन ग्रास की चाय, शरीर को मिलेंगे जबरदस्त फायदे

    दूध वाली नहीं, रोज पिएं लेमन ग्रास की चाय, शरीर को मिलेंगे जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । आजकल लोग फिट और हेल्दी रहने के लिए अपनी डाइट में हर्बल चीजों को शामिल कर रहे हैं। ऐसे में लेमन ग्रास की चाय तेजी से लोगों की पसंद बनती जा रही है। यह सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में लेमन ग्रास को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। अगर आप रोज सुबह दूध वाली चाय की जगह लेमन ग्रास टी पीते हैं, तो शरीर को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं।
    पाचन तंत्र को बनाती है मजबूत
    लेमन ग्रास की चाय पेट के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण पेट में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद कर सकते हैं। यह गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायक होती है। रोजाना इसका सेवन करने से डाइजेशन बेहतर बना रहता है।
    शरीर की सूजन और इंफ्लेमेशन करे कम
    लेमन ग्रास में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। जो लोग जोड़ों के दर्द या शरीर में सूजन की समस्या से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह चाय काफी लाभकारी मानी जाती है।
    इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार
    मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लेमन ग्रास की चाय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद कर सकती है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और संक्रमण से लड़ने में सहायता करते हैं।
    तनाव कम कर देती है राहत
    भागदौड़ भरी जिंदगी और काम का दबाव मानसिक तनाव बढ़ा देता है। लेमन ग्रास की चाय दिमाग को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकती है। इसे पीने से शरीर रिलैक्स महसूस करता है और नींद भी बेहतर आती है।
    वजन घटाने में भी हो सकती है मददगार
    अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो लेमन ग्रास टी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करती है और फैट बर्निंग प्रक्रिया को तेज कर सकती है।
    ऐसे बनाएं लेमन ग्रास की हेल्दी चा
    1 कप पानी लें
    उसमें 4 से 5 ताजी लेमन ग्रास की पत्तियां डालें
    5 मिनट तक अच्छी तरह उबालें
    चाहें तो इसमें थोड़ा शहद और नींबू मिला सकते हैं
    छानकर गर्मागर्म सेवन करें

    ध्यान रखें
    ज्यादा मात्रा में लेमन ग्रास टी पीने से कुछ लोगों को एलर्जी या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। किसी गंभीर बीमारी या प्रेग्नेंसी के दौरान सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • जिम सप्लीमेंट लेने वाले हो जाएं सावधान! लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये आदतें

    जिम सप्लीमेंट लेने वाले हो जाएं सावधान! लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये आदतें


    नई दिल्ली। आजकल फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। जिम जाने वाले कई लोग जल्दी रिजल्ट पाने के लिए प्रोटीन पाउडर, फैट बर्नर और दूसरे फिटनेस सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि गलत तरीके से लिए गए फिटनेस सप्लीमेंट्स लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना हो सकता है खतरनाक
    विशेषज्ञों के मुताबिक कई फिटनेस सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट्स का सेवन करता है, तो इससे लिवर डैमेज का खतरा बढ़ सकता है।

    खासतौर पर
    स्टेरॉयड बेस्ड सप्लीमेंट्स
    बिना लाइसेंस वाले प्रोडक्ट
    अनजान ब्रांड्स के सप्लीमेंट्स
    ऑनलाइन बिकने वाले नकली प्रोडक्ट
    सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक माने जाते हैं।
    शरीर में दिख सकते हैं ये खतरनाक संके
    पेट दर्द
    उल्टी या मितली
    लगातार थकान
    भूख कम लगना
    आंखों या त्वचा का पीला पड़ना
    लिवर इंफेक्शन
    अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना जाता है।

    इन गलतियों से बचने की सलाह

    डॉक्टरों और फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
    इसके अलावा इन बातों का भी ध्यान रखना जरूरी है:
    जरूरत से ज्यादा डोज न लें
    कई सप्लीमेंट्स एक साथ न लें
    पर्याप्त पानी पिएं
    जरूरत से ज्यादा वर्कआउट से बचें
    केवल भरोसेमंद ब्रांड का इस्तेमाल करें

    फिट रहने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?
    हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अच्छी फिटनेस के लिए सिर्फ सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और सही लाइफस्टाइल ही शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

    सावधानी जरूरी
    फिटनेस सप्लीमेंट्स सही मात्रा और सही सलाह के साथ लिए जाएं तो मददगार हो सकते हैं, लेकिन लापरवाही और गलत इस्तेमाल से यही सप्लीमेंट्स शरीर के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसलिए फिटनेस के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

  • डिहाइड्रेशन से बचने का आसान उपाय ORS, शरीर में बनाए रखता है नमक-पानी का संतुलन

    डिहाइड्रेशन से बचने का आसान उपाय ORS, शरीर में बनाए रखता है नमक-पानी का संतुलन


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम आते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। तेज धूप, ज्यादा पसीना, उल्टी-दस्त और लंबे समय तक बाहर रहने के कारण शरीर से पानी के साथ जरूरी नमक और मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इससे कमजोरी, चक्कर आना, थकान और कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसी स्थिति में सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी उपाय है-ओआरएस (ORS – Oral Rehydration Solution)।

     क्यों जरूरी है ORS?
    डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर से ज्यादा मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम बाहर निकल जाते हैं, तो केवल साधारण पानी पीना पर्याप्त नहीं होता। पानी प्यास तो बुझा देता है, लेकिन शरीर में जरूरी नमक और मिनरल्स की कमी पूरी नहीं कर पाता।
    यहीं ORS शरीर में नमक और पानी का सही संतुलन बनाकर तेजी से राहत पहुंचाने का काम करता है।

     ORS कैसे करता है काम?
    ओआरएस शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है और खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है। इससे शरीर की कमजोरी कम होती है और मरीज जल्दी रिकवर करने लगता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, दस्त या उल्टी शुरू होते ही ORS का सेवन शुरू कर देना चाहिए ताकि शरीर में पानी और नमक का संतुलन बना रहे।

     बच्चों से बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित
    ORS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों—सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन जल्दी गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए समय रहते ORS देना बेहद जरूरी होता है।

    घर पर कैसे बनाएं ORS?
    ORS को घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए-
    एक लीटर उबले और ठंडे पानी में ORS पाउच मिलाएं
    इसे अच्छी तरह घोल लें
    दस्त या उल्टी के दौरान थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीते रहें
    बाजार में उपलब्ध पैकेट वाले ORS का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और आसान माना जाता है।

    गर्मियों में ORS के फायदे

    शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है
    कमजोरी और थकान कम करता है
    पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है
    डिहाइड्रेशन से बचाव करता है
    अस्पताल जाने की जरूरत कम कर सकता है

    कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
    अगर ORS लेने के बाद भी लगातार उल्टी, तेज बुखार, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या दस्त की समस्या बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    छोटी सावधानी, बड़ा बचाव
    गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ORS बेहद जरूरी और प्रभावी उपाय माना जाता है। समय पर इसका सेवन शरीर को सुरक्षित रखने और गंभीर स्थिति से बचाने में मदद करता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जीवनरक्षक साबित हो सकता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ORS सबसे आसान और प्रभावी उपाय है, जो शरीर में पानी और जरूरी नमक का संतुलन बनाए रखता है।

  • गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या

    गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या


    नई दिल्ली ।  गर्मी के मौसम में नींबू पानी को एक प्राकृतिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ विटामिन C की पूर्ति भी करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता और कुछ लोगों को इसके सेवन के बाद सूजन या पेट फूलने जैसी समस्या का अनुभव हो सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू पानी में मौजूद साइट्रिक एसिड कुछ संवेदनशील लोगों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उनमें नींबू पानी के सेवन से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग यानी सूजन की शिकायत बढ़ सकती है।

    हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में नींबू पानी शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन सुधारने और गर्मी में थकान कम करने में मदद करता है। लेकिन इसका अत्यधिक या गलत समय पर सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू पानी हमेशा संतुलित मात्रा में और हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी में लिया जाना चाहिए। बहुत अधिक खट्टा या चीनी युक्त नींबू पानी भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे सूजन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    इसके अलावा, खाली पेट अत्यधिक नींबू पानी का सेवन कुछ लोगों में एसिडिटी को बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर पेट में सूजन और असहजता का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा समझदारी और संतुलन के साथ लेना चाहिए।

    डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को नींबू पानी पीने के बाद बार-बार सूजन या पेट दर्द की समस्या हो रही है, तो उसे इसका सेवन कम कर देना चाहिए या चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, नींबू पानी गर्मी में एक बेहतरीन पेय है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह लाभकारी है, जबकि असंतुलित सेवन सूजन जैसी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

    डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

    नई दिल्ली ।  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई लोग सुविधा के चलते रोजाना एक ही तरह का भोजन करने लगते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकत है, खासकर गट हेल्थ यानी आंतों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे पाचन तंत्र में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने और भोजन को पचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब डाइट में विविधता नहीं होती और लगातार एक ही तरह का खाना खाया जाता है, तो इन बैक्टीरिया की विविधता कम होने लगती है। इसका असर सीधे पाचन पर पड़ता है और गैस, कब्ज, ब्लोटिंग और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि ज्यादा समय तक ऑयली या प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। शरीर को संतुलित रूप से काम करने के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो एक ही तरह के भोजन से पूरी नहीं हो पाती।

    डॉक्टरों की सलाह है कि गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए डाइट में विविधता बेहद जरूरी है। रोजाना भोजन में अलग-अलग तरह के फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फर्मेंटेड फूड शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल मिलते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है।

    इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और हल्की शारीरिक गतिविधि करना भी आंतों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर सप्ताह डाइट में कुछ नई और हेल्दी चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें और स्वास्थ्य संतुलित बना रहे।


  • शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव

    शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव


    नई दिल्ली। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए इसका संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है, जो धीरे-धीरे कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।

    पानी की कमी का सबसे पहला असर शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। कई मामलों में ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत आने लगती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं।

    त्वचा पर भी डिहाइड्रेशन का सीधा असर दिखाई देता है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और डल हो सकती है। साथ ही होंठ फटने और आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ने की समस्या भी देखी जा सकती है।

    पाचन तंत्र पर भी इसका असर पड़ता है। पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज, पेट भारी लगना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पानी आंतों के सुचारू कामकाज में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी कमी पाचन को धीमा कर देती है।

    इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी से सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। आमतौर पर 7-8 गिलास पानी रोजाना पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह व्यक्ति की उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है।

    पानी की कमी से बचने के लिए सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, फलों का जूस और पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा भी डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है।

    गर्मियों के मौसम में पसीना ज्यादा निकलने के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष रूप से पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए।

    सही मात्रा में पानी पीना न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि त्वचा, पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

  • भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

    भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

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    नई दिल्ली। योग को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है और विश्व योग दिवस के करीब आते ही लोग योगासन के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों के सही अभ्यास और उनके लाभों के बारे में जानकारी साझा कर रहा है।

    हाल ही में मंत्रालय ने भुजंगासन को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें इसके सही तरीके और आम गलतियों पर विस्तार से बताया गया है।

    भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर की मुद्रा सांप की आकृति जैसी दिखाई देती है। यह आसन विशेष रूप से कमर, पीठ और कंधों को मजबूत बनाने के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। हालांकि, गलत तरीके से इसका अभ्यास करने पर यह कमर दर्द, गर्दन में खिंचाव और कंधों की समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, कई लोग भुजंगासन करते समय कुछ सामान्य लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। इनमें कोहनियों को बाहर की ओर फैला देना, कंधों को कानों की तरफ उठा लेना, नितंबों को अत्यधिक कस लेना, कमर को जरूरत से ज्यादा मोड़ना और एड़ियों को अनियंत्रित रूप से फैलाना शामिल है। ये सभी गलतियां शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है और पुराने दर्द की समस्या भी गंभीर हो सकती है।

    मंत्रालय ने भुजंगासन के सही अभ्यास को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, सबसे पहले पेट के बल आराम से लेट जाएं और पैरों को सीधा रखते हुए पंजों को पीछे की ओर फैलाएं। इसके बाद हथेलियों को छाती के दोनों ओर जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। इस दौरान ध्यान रखना चाहिए कि गर्दन रीढ़ की हड्डी के समानांतर रहे और दृष्टि सामने की ओर हो। कंधों को नीचे और पीछे की ओर खींचते हुए कानों से दूर रखना चाहिए।

    इसके साथ ही कोहनियों को शरीर के करीब रखना जरूरी है और शरीर का निचला हिस्सा यानी जांघ, घुटने और पैर पूरी तरह जमीन से जुड़े रहने चाहिए। आसन के दौरान सांस सामान्य रखनी चाहिए और शुरुआती लोग इसे 10 से 15 सेकंड तक ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास के समय को बढ़ाया जा सकता है।

    सही तरीके से भुजंगासन करने से न सिर्फ कमर मजबूत होती है, बल्कि रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर की मुद्रा में सुधार आता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।

    हालांकि, आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि योग हमेशा सही तकनीक और सावधानी के साथ ही करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कमर, गर्दन या कलाई में दर्द है तो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए। साथ ही, शरीर की क्षमता से अधिक खिंचाव देने से बचना चाहिए।

    योग का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके और अनुशासन के साथ किया जाए। भुजंगासन इसका एक अच्छा उदाहरण है, जो सही अभ्यास के साथ शरीर को मजबूत और स्वस्थ बना सकता है, लेकिन लापरवाही से यह नुकसान भी पहुंचा सकता है।

  • दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

    दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है


    नई दिल्ली। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए।

    दूध और दही साथ में खाने से बचें
    दूध और दही दोनों ही डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन इन्हें एक साथ या एक ही समय पर खाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि दोनों अलग-अलग तरीके से पचते हैं।

    मछली और दही का कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायक
    आयुर्वेद और एक्सपर्ट्स के अनुसार मछली और दही को साथ में नहीं खाना चाहिए। दोनों ही प्रोटीन से भरपूर होते हैं और इन्हें एक साथ लेने पर पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अपच और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    तला-भुना और ऑयली खाना बढ़ा सकता है परेशानी
    दही के साथ ज्यादा तला-भुना या ऑयली फूड लेने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    अचार और फर्मेंटेड फूड्स से दूरी रखें
    दही को अचार या अन्य फर्मेंटेड फूड्स के साथ खाना भी सही नहीं माना जाता। दोनों में बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है, जिससे आंतों का संतुलन बिगड़ सकता है और पेट खराब हो सकता है।

    कुछ फलों के साथ भी न खाएं दही
    तरबूज, खरबूजा जैसे अधिक पानी वाले फलों के साथ दही का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और गैस या फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।

    एक्सपर्ट्स की सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि दही को हमेशा हल्के और संतुलित भोजन जैसे रोटी, खिचड़ी या सब्जियों के साथ ही खाना चाहिए। सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर ही दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

  • बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स

    बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक बारिश और ठंडी हवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती हैं। ऐसे समय में मजबूत इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र ही शरीर की सबसे बड़ी सुरक्षा बनता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतों को अपनाया जाए तो इम्यूनिटी को प्राकृतिक तरीके से मजबूत बनाया जा सकता है।

    आयुष विभाग, छत्तीसगढ़ के अनुसार, इम्यून सिस्टम शरीर को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं पर निर्भर रहने से बेहतर है कि अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित बनाया जाए। छोटी-छोटी हेल्दी आदतें लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

    इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है पर्याप्त और गहरी नींद लेना। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर की रिकवरी और इम्यून सेल्स को सक्रिय रखने के लिए बेहद आवश्यक है। अनियमित नींद या देर रात तक जागना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है संतुलित और पौष्टिक आहार। फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और दही जैसी चीजें शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं। खासकर विटामिन-सी, विटामिन-डी, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। वहीं अधिक चीनी, तला-भुना और जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ नियमित व्यायाम को भी बेहद जरूरी मानते हैं। रोजाना 30 से 45 मिनट तक टहलना, योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और इम्यून सेल्स अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर में सूजन कम होती है और फिटनेस बनी रहती है।

    तनाव को नियंत्रित रखना भी मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। लगातार तनाव और चिंता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। ध्यान, मेडिटेशन, संगीत सुनना या पसंदीदा हॉबी अपनाने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

    इसके अलावा शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और शरीर की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं। नींबू पानी, छाछ और हर्बल टी जैसे हेल्दी ड्रिंक्स भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, तो इन उपायों को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।