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  • डिहाइड्रेशन से बचने का आसान उपाय ORS, शरीर में बनाए रखता है नमक-पानी का संतुलन

    डिहाइड्रेशन से बचने का आसान उपाय ORS, शरीर में बनाए रखता है नमक-पानी का संतुलन


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम आते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। तेज धूप, ज्यादा पसीना, उल्टी-दस्त और लंबे समय तक बाहर रहने के कारण शरीर से पानी के साथ जरूरी नमक और मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इससे कमजोरी, चक्कर आना, थकान और कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसी स्थिति में सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी उपाय है-ओआरएस (ORS – Oral Rehydration Solution)।

     क्यों जरूरी है ORS?
    डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर से ज्यादा मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम बाहर निकल जाते हैं, तो केवल साधारण पानी पीना पर्याप्त नहीं होता। पानी प्यास तो बुझा देता है, लेकिन शरीर में जरूरी नमक और मिनरल्स की कमी पूरी नहीं कर पाता।
    यहीं ORS शरीर में नमक और पानी का सही संतुलन बनाकर तेजी से राहत पहुंचाने का काम करता है।

     ORS कैसे करता है काम?
    ओआरएस शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है और खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है। इससे शरीर की कमजोरी कम होती है और मरीज जल्दी रिकवर करने लगता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, दस्त या उल्टी शुरू होते ही ORS का सेवन शुरू कर देना चाहिए ताकि शरीर में पानी और नमक का संतुलन बना रहे।

     बच्चों से बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित
    ORS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों—सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन जल्दी गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए समय रहते ORS देना बेहद जरूरी होता है।

    घर पर कैसे बनाएं ORS?
    ORS को घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए-
    एक लीटर उबले और ठंडे पानी में ORS पाउच मिलाएं
    इसे अच्छी तरह घोल लें
    दस्त या उल्टी के दौरान थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीते रहें
    बाजार में उपलब्ध पैकेट वाले ORS का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और आसान माना जाता है।

    गर्मियों में ORS के फायदे

    शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है
    कमजोरी और थकान कम करता है
    पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है
    डिहाइड्रेशन से बचाव करता है
    अस्पताल जाने की जरूरत कम कर सकता है

    कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
    अगर ORS लेने के बाद भी लगातार उल्टी, तेज बुखार, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या दस्त की समस्या बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    छोटी सावधानी, बड़ा बचाव
    गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ORS बेहद जरूरी और प्रभावी उपाय माना जाता है। समय पर इसका सेवन शरीर को सुरक्षित रखने और गंभीर स्थिति से बचाने में मदद करता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जीवनरक्षक साबित हो सकता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ORS सबसे आसान और प्रभावी उपाय है, जो शरीर में पानी और जरूरी नमक का संतुलन बनाए रखता है।

  • गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या

    गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या


    नई दिल्ली ।  गर्मी के मौसम में नींबू पानी को एक प्राकृतिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ विटामिन C की पूर्ति भी करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता और कुछ लोगों को इसके सेवन के बाद सूजन या पेट फूलने जैसी समस्या का अनुभव हो सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू पानी में मौजूद साइट्रिक एसिड कुछ संवेदनशील लोगों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उनमें नींबू पानी के सेवन से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग यानी सूजन की शिकायत बढ़ सकती है।

    हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में नींबू पानी शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन सुधारने और गर्मी में थकान कम करने में मदद करता है। लेकिन इसका अत्यधिक या गलत समय पर सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू पानी हमेशा संतुलित मात्रा में और हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी में लिया जाना चाहिए। बहुत अधिक खट्टा या चीनी युक्त नींबू पानी भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे सूजन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    इसके अलावा, खाली पेट अत्यधिक नींबू पानी का सेवन कुछ लोगों में एसिडिटी को बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर पेट में सूजन और असहजता का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा समझदारी और संतुलन के साथ लेना चाहिए।

    डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को नींबू पानी पीने के बाद बार-बार सूजन या पेट दर्द की समस्या हो रही है, तो उसे इसका सेवन कम कर देना चाहिए या चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, नींबू पानी गर्मी में एक बेहतरीन पेय है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह लाभकारी है, जबकि असंतुलित सेवन सूजन जैसी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

    डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

    नई दिल्ली ।  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई लोग सुविधा के चलते रोजाना एक ही तरह का भोजन करने लगते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकत है, खासकर गट हेल्थ यानी आंतों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे पाचन तंत्र में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने और भोजन को पचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब डाइट में विविधता नहीं होती और लगातार एक ही तरह का खाना खाया जाता है, तो इन बैक्टीरिया की विविधता कम होने लगती है। इसका असर सीधे पाचन पर पड़ता है और गैस, कब्ज, ब्लोटिंग और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि ज्यादा समय तक ऑयली या प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। शरीर को संतुलित रूप से काम करने के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो एक ही तरह के भोजन से पूरी नहीं हो पाती।

    डॉक्टरों की सलाह है कि गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए डाइट में विविधता बेहद जरूरी है। रोजाना भोजन में अलग-अलग तरह के फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फर्मेंटेड फूड शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल मिलते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है।

    इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और हल्की शारीरिक गतिविधि करना भी आंतों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर सप्ताह डाइट में कुछ नई और हेल्दी चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें और स्वास्थ्य संतुलित बना रहे।


  • शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव

    शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव


    नई दिल्ली। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए इसका संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है, जो धीरे-धीरे कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।

    पानी की कमी का सबसे पहला असर शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। कई मामलों में ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत आने लगती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं।

    त्वचा पर भी डिहाइड्रेशन का सीधा असर दिखाई देता है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और डल हो सकती है। साथ ही होंठ फटने और आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ने की समस्या भी देखी जा सकती है।

    पाचन तंत्र पर भी इसका असर पड़ता है। पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज, पेट भारी लगना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पानी आंतों के सुचारू कामकाज में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी कमी पाचन को धीमा कर देती है।

    इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी से सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। आमतौर पर 7-8 गिलास पानी रोजाना पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह व्यक्ति की उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है।

    पानी की कमी से बचने के लिए सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, फलों का जूस और पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा भी डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है।

    गर्मियों के मौसम में पसीना ज्यादा निकलने के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष रूप से पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए।

    सही मात्रा में पानी पीना न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि त्वचा, पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

  • भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

    भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

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    नई दिल्ली। योग को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है और विश्व योग दिवस के करीब आते ही लोग योगासन के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों के सही अभ्यास और उनके लाभों के बारे में जानकारी साझा कर रहा है।

    हाल ही में मंत्रालय ने भुजंगासन को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें इसके सही तरीके और आम गलतियों पर विस्तार से बताया गया है।

    भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर की मुद्रा सांप की आकृति जैसी दिखाई देती है। यह आसन विशेष रूप से कमर, पीठ और कंधों को मजबूत बनाने के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। हालांकि, गलत तरीके से इसका अभ्यास करने पर यह कमर दर्द, गर्दन में खिंचाव और कंधों की समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, कई लोग भुजंगासन करते समय कुछ सामान्य लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। इनमें कोहनियों को बाहर की ओर फैला देना, कंधों को कानों की तरफ उठा लेना, नितंबों को अत्यधिक कस लेना, कमर को जरूरत से ज्यादा मोड़ना और एड़ियों को अनियंत्रित रूप से फैलाना शामिल है। ये सभी गलतियां शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है और पुराने दर्द की समस्या भी गंभीर हो सकती है।

    मंत्रालय ने भुजंगासन के सही अभ्यास को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, सबसे पहले पेट के बल आराम से लेट जाएं और पैरों को सीधा रखते हुए पंजों को पीछे की ओर फैलाएं। इसके बाद हथेलियों को छाती के दोनों ओर जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। इस दौरान ध्यान रखना चाहिए कि गर्दन रीढ़ की हड्डी के समानांतर रहे और दृष्टि सामने की ओर हो। कंधों को नीचे और पीछे की ओर खींचते हुए कानों से दूर रखना चाहिए।

    इसके साथ ही कोहनियों को शरीर के करीब रखना जरूरी है और शरीर का निचला हिस्सा यानी जांघ, घुटने और पैर पूरी तरह जमीन से जुड़े रहने चाहिए। आसन के दौरान सांस सामान्य रखनी चाहिए और शुरुआती लोग इसे 10 से 15 सेकंड तक ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास के समय को बढ़ाया जा सकता है।

    सही तरीके से भुजंगासन करने से न सिर्फ कमर मजबूत होती है, बल्कि रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर की मुद्रा में सुधार आता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।

    हालांकि, आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि योग हमेशा सही तकनीक और सावधानी के साथ ही करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कमर, गर्दन या कलाई में दर्द है तो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए। साथ ही, शरीर की क्षमता से अधिक खिंचाव देने से बचना चाहिए।

    योग का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके और अनुशासन के साथ किया जाए। भुजंगासन इसका एक अच्छा उदाहरण है, जो सही अभ्यास के साथ शरीर को मजबूत और स्वस्थ बना सकता है, लेकिन लापरवाही से यह नुकसान भी पहुंचा सकता है।

  • दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

    दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है


    नई दिल्ली। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए।

    दूध और दही साथ में खाने से बचें
    दूध और दही दोनों ही डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन इन्हें एक साथ या एक ही समय पर खाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि दोनों अलग-अलग तरीके से पचते हैं।

    मछली और दही का कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायक
    आयुर्वेद और एक्सपर्ट्स के अनुसार मछली और दही को साथ में नहीं खाना चाहिए। दोनों ही प्रोटीन से भरपूर होते हैं और इन्हें एक साथ लेने पर पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अपच और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    तला-भुना और ऑयली खाना बढ़ा सकता है परेशानी
    दही के साथ ज्यादा तला-भुना या ऑयली फूड लेने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    अचार और फर्मेंटेड फूड्स से दूरी रखें
    दही को अचार या अन्य फर्मेंटेड फूड्स के साथ खाना भी सही नहीं माना जाता। दोनों में बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है, जिससे आंतों का संतुलन बिगड़ सकता है और पेट खराब हो सकता है।

    कुछ फलों के साथ भी न खाएं दही
    तरबूज, खरबूजा जैसे अधिक पानी वाले फलों के साथ दही का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और गैस या फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।

    एक्सपर्ट्स की सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि दही को हमेशा हल्के और संतुलित भोजन जैसे रोटी, खिचड़ी या सब्जियों के साथ ही खाना चाहिए। सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर ही दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

  • बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स

    बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक बारिश और ठंडी हवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती हैं। ऐसे समय में मजबूत इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र ही शरीर की सबसे बड़ी सुरक्षा बनता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतों को अपनाया जाए तो इम्यूनिटी को प्राकृतिक तरीके से मजबूत बनाया जा सकता है।

    आयुष विभाग, छत्तीसगढ़ के अनुसार, इम्यून सिस्टम शरीर को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं पर निर्भर रहने से बेहतर है कि अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित बनाया जाए। छोटी-छोटी हेल्दी आदतें लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

    इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है पर्याप्त और गहरी नींद लेना। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर की रिकवरी और इम्यून सेल्स को सक्रिय रखने के लिए बेहद आवश्यक है। अनियमित नींद या देर रात तक जागना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है संतुलित और पौष्टिक आहार। फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और दही जैसी चीजें शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं। खासकर विटामिन-सी, विटामिन-डी, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। वहीं अधिक चीनी, तला-भुना और जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ नियमित व्यायाम को भी बेहद जरूरी मानते हैं। रोजाना 30 से 45 मिनट तक टहलना, योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और इम्यून सेल्स अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर में सूजन कम होती है और फिटनेस बनी रहती है।

    तनाव को नियंत्रित रखना भी मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। लगातार तनाव और चिंता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। ध्यान, मेडिटेशन, संगीत सुनना या पसंदीदा हॉबी अपनाने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

    इसके अलावा शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और शरीर की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं। नींबू पानी, छाछ और हर्बल टी जैसे हेल्दी ड्रिंक्स भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, तो इन उपायों को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

  • भीषण गर्मी में लू से बचना है तो अपनाएं ये देसी उपाय, ये 5 पारंपरिक ड्रिंक देंगे ठंडक और ताकत

    भीषण गर्मी में लू से बचना है तो अपनाएं ये देसी उपाय, ये 5 पारंपरिक ड्रिंक देंगे ठंडक और ताकत

    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम इस बार अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। अप्रैल खत्म होते-होते ही तापमान 40 डिग्री के पार चला गया, और मई-जून में इसके और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में लू का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है, जो कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार लू को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है और पसीना आना बंद हो सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लू लगने पर व्यक्ति का रक्तचाप गिर सकता है और गंभीर मामलों में बेहोशी या कोमा जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि गर्मियों के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए और शरीर को ठंडा व हाइड्रेटेड रखा जाए।

    गर्मी से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है दिनचर्या में बदलाव करना। तेज धूप के समय, विशेष रूप से सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को ढककर और चेहरे को कपड़े से सुरक्षित करके निकलना चाहिए। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

    खानपान में भी कुछ पारंपरिक उपाय बेहद कारगर साबित होते हैं। गर्मियों में आम का पन्ना एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावी पेय माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है। इसी तरह बेल का शरबत भी शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

    सत्तू का सेवन भी गर्मियों में विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसमें थोड़ा सा नमक या भुना जीरा मिलाकर पीने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है।

    इसके अलावा कच्चा प्याज भी लू से बचाव में सहायक माना जाता है। पारंपरिक रूप से लोग गर्मियों में भोजन के साथ प्याज का सेवन करते हैं, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है और लू के प्रभाव को कम करता है। कुछ क्षेत्रों में चावल के आटे से बनी पतली पेज का सेवन भी किया जाता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ ठंडक भी प्रदान करती है।

    ग्रामीण इलाकों में महुआ से बनी राब भी एक पारंपरिक पेय है, जिसे लू से बचाने में प्रभावी माना जाता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखती है, बल्कि पोषण भी प्रदान करती है।

    कुल मिलाकर, गर्मियों में स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शरीर को ठंडा रखा जाए, पर्याप्त पानी और पोषक पेय का सेवन किया जाए और धूप से बचाव के उपाय अपनाए जाएं। पारंपरिक देसी पेय न केवल आसानी से उपलब्ध होते हैं, बल्कि इनके नियमित सेवन से लू जैसी गंभीर समस्या से भी काफी हद तक बचा जा सकता है।

  • गर्मियों में मेथी दाना खाना सही या गलत? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

    गर्मियों में मेथी दाना खाना सही या गलत? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसाले सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं। इन्हीं में से एक है मेथी दाना, जिसका इस्तेमाल सदियों से स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं क्या इसकी तासीर शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है?

    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना की तासीर गर्म (उष्ण) होती है। यह शरीर में वात और कफ दोष को संतुलित करने में मदद करता है। लेकिन गर्मियों में जब शरीर में पित्त पहले से ही बढ़ा होता है, तब इसका अधिक सेवन कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में ज्यादा मात्रा में मेथी लेने से पेट में जलन, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    इतना ही नहीं, जिन लोगों को मधुमेह (डायबिटीज) है, उनके लिए भी मेथी दाने का सेवन सोच-समझकर करना जरूरी है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए गर्मियों में इसका सेवन करने के तरीके और मात्रा दोनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, मेथी दाने को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी को छानकर पीना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है। ध्यान रहे कि गर्मियों में इसे उबालकर या गर्म करके सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर में अतिरिक्त गर्मी बढ़ सकती है।

    इसके अलावा, मेथी दाने की मात्रा सीमित रखना बेहद जरूरी है। गर्म मौसम में शरीर पहले से ही संवेदनशील होता है, इसलिए कम मात्रा में सेवन करने से ही लाभ मिलता है। आप चाहें तो मेथी दाने के पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे दही या छाछ में मिलाकर लेने से इसकी गर्म तासीर कम हो जाती है और पाचन तंत्र भी बेहतर रहता है।

    छाछ के साथ मेथी का सेवन करने से पेट की गर्मी कम होती है, साथ ही यह सूजन और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाता है। इस तरह मेथी दाना एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी की तरह काम करता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गर्मियों में मेथी दाना खाली पेट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गैस और असहजता हो सकती है। इसे भोजन के बाद लेना अधिक बेहतर माना जाता है।

    हालांकि, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, लो बीपी या मधुमेह के मरीजों को मेथी दाने का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, मेथी दाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन गर्मियों में इसे सही मात्रा और सही तरीके से लेने पर ही इसका पूरा लाभ मिल सकता है।


  • Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ

    Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली। आज के समय में तेजी से बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों में Type 2 Diabetes एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता तनाव इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि World Health Organization (WHO) का मानना है कि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।

    WHO के अनुसार, सबसे जरूरी है अपने शरीर के वजन को संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में नियमित रूप से वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। संतुलित वजन न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचाता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।

    तीसरा अहम पहलू है संतुलित और पौष्टिक आहार। WHO के अनुसार, अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वहीं, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। सही खानपान न केवल डायबिटीज के खतरे को कम करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा और पोषण भी देता है।

    चौथा और बेहद जरूरी उपाय है तंबाकू से दूरी बनाना। तंबाकू का सेवन न केवल डायबिटीज बल्कि दिल और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। WHO का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू छोड़ने से शरीर की ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है और कई बीमारियों से बचाव संभव होता है।

    आज के व्यस्त जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और तंबाकू से दूरी बनाकर न केवल Type 2 Diabetes बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

    कुल मिलाकर, अगर समय रहते जागरूकता दिखाई जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज जैसी बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।