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  • भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

    भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

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    नई दिल्ली। योग को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है और विश्व योग दिवस के करीब आते ही लोग योगासन के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों के सही अभ्यास और उनके लाभों के बारे में जानकारी साझा कर रहा है।

    हाल ही में मंत्रालय ने भुजंगासन को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें इसके सही तरीके और आम गलतियों पर विस्तार से बताया गया है।

    भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर की मुद्रा सांप की आकृति जैसी दिखाई देती है। यह आसन विशेष रूप से कमर, पीठ और कंधों को मजबूत बनाने के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। हालांकि, गलत तरीके से इसका अभ्यास करने पर यह कमर दर्द, गर्दन में खिंचाव और कंधों की समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, कई लोग भुजंगासन करते समय कुछ सामान्य लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। इनमें कोहनियों को बाहर की ओर फैला देना, कंधों को कानों की तरफ उठा लेना, नितंबों को अत्यधिक कस लेना, कमर को जरूरत से ज्यादा मोड़ना और एड़ियों को अनियंत्रित रूप से फैलाना शामिल है। ये सभी गलतियां शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है और पुराने दर्द की समस्या भी गंभीर हो सकती है।

    मंत्रालय ने भुजंगासन के सही अभ्यास को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, सबसे पहले पेट के बल आराम से लेट जाएं और पैरों को सीधा रखते हुए पंजों को पीछे की ओर फैलाएं। इसके बाद हथेलियों को छाती के दोनों ओर जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। इस दौरान ध्यान रखना चाहिए कि गर्दन रीढ़ की हड्डी के समानांतर रहे और दृष्टि सामने की ओर हो। कंधों को नीचे और पीछे की ओर खींचते हुए कानों से दूर रखना चाहिए।

    इसके साथ ही कोहनियों को शरीर के करीब रखना जरूरी है और शरीर का निचला हिस्सा यानी जांघ, घुटने और पैर पूरी तरह जमीन से जुड़े रहने चाहिए। आसन के दौरान सांस सामान्य रखनी चाहिए और शुरुआती लोग इसे 10 से 15 सेकंड तक ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास के समय को बढ़ाया जा सकता है।

    सही तरीके से भुजंगासन करने से न सिर्फ कमर मजबूत होती है, बल्कि रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर की मुद्रा में सुधार आता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।

    हालांकि, आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि योग हमेशा सही तकनीक और सावधानी के साथ ही करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कमर, गर्दन या कलाई में दर्द है तो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए। साथ ही, शरीर की क्षमता से अधिक खिंचाव देने से बचना चाहिए।

    योग का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके और अनुशासन के साथ किया जाए। भुजंगासन इसका एक अच्छा उदाहरण है, जो सही अभ्यास के साथ शरीर को मजबूत और स्वस्थ बना सकता है, लेकिन लापरवाही से यह नुकसान भी पहुंचा सकता है।

  • दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

    दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है


    नई दिल्ली। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए।

    दूध और दही साथ में खाने से बचें
    दूध और दही दोनों ही डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन इन्हें एक साथ या एक ही समय पर खाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि दोनों अलग-अलग तरीके से पचते हैं।

    मछली और दही का कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायक
    आयुर्वेद और एक्सपर्ट्स के अनुसार मछली और दही को साथ में नहीं खाना चाहिए। दोनों ही प्रोटीन से भरपूर होते हैं और इन्हें एक साथ लेने पर पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अपच और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    तला-भुना और ऑयली खाना बढ़ा सकता है परेशानी
    दही के साथ ज्यादा तला-भुना या ऑयली फूड लेने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    अचार और फर्मेंटेड फूड्स से दूरी रखें
    दही को अचार या अन्य फर्मेंटेड फूड्स के साथ खाना भी सही नहीं माना जाता। दोनों में बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है, जिससे आंतों का संतुलन बिगड़ सकता है और पेट खराब हो सकता है।

    कुछ फलों के साथ भी न खाएं दही
    तरबूज, खरबूजा जैसे अधिक पानी वाले फलों के साथ दही का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और गैस या फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।

    एक्सपर्ट्स की सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि दही को हमेशा हल्के और संतुलित भोजन जैसे रोटी, खिचड़ी या सब्जियों के साथ ही खाना चाहिए। सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर ही दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

  • बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स

    बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक बारिश और ठंडी हवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती हैं। ऐसे समय में मजबूत इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र ही शरीर की सबसे बड़ी सुरक्षा बनता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतों को अपनाया जाए तो इम्यूनिटी को प्राकृतिक तरीके से मजबूत बनाया जा सकता है।

    आयुष विभाग, छत्तीसगढ़ के अनुसार, इम्यून सिस्टम शरीर को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं पर निर्भर रहने से बेहतर है कि अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित बनाया जाए। छोटी-छोटी हेल्दी आदतें लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

    इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है पर्याप्त और गहरी नींद लेना। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर की रिकवरी और इम्यून सेल्स को सक्रिय रखने के लिए बेहद आवश्यक है। अनियमित नींद या देर रात तक जागना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है संतुलित और पौष्टिक आहार। फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और दही जैसी चीजें शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं। खासकर विटामिन-सी, विटामिन-डी, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। वहीं अधिक चीनी, तला-भुना और जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ नियमित व्यायाम को भी बेहद जरूरी मानते हैं। रोजाना 30 से 45 मिनट तक टहलना, योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और इम्यून सेल्स अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर में सूजन कम होती है और फिटनेस बनी रहती है।

    तनाव को नियंत्रित रखना भी मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। लगातार तनाव और चिंता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। ध्यान, मेडिटेशन, संगीत सुनना या पसंदीदा हॉबी अपनाने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

    इसके अलावा शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और शरीर की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं। नींबू पानी, छाछ और हर्बल टी जैसे हेल्दी ड्रिंक्स भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, तो इन उपायों को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

  • भीषण गर्मी में लू से बचना है तो अपनाएं ये देसी उपाय, ये 5 पारंपरिक ड्रिंक देंगे ठंडक और ताकत

    भीषण गर्मी में लू से बचना है तो अपनाएं ये देसी उपाय, ये 5 पारंपरिक ड्रिंक देंगे ठंडक और ताकत

    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम इस बार अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। अप्रैल खत्म होते-होते ही तापमान 40 डिग्री के पार चला गया, और मई-जून में इसके और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में लू का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है, जो कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार लू को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है और पसीना आना बंद हो सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लू लगने पर व्यक्ति का रक्तचाप गिर सकता है और गंभीर मामलों में बेहोशी या कोमा जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि गर्मियों के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए और शरीर को ठंडा व हाइड्रेटेड रखा जाए।

    गर्मी से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है दिनचर्या में बदलाव करना। तेज धूप के समय, विशेष रूप से सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को ढककर और चेहरे को कपड़े से सुरक्षित करके निकलना चाहिए। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

    खानपान में भी कुछ पारंपरिक उपाय बेहद कारगर साबित होते हैं। गर्मियों में आम का पन्ना एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावी पेय माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है। इसी तरह बेल का शरबत भी शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

    सत्तू का सेवन भी गर्मियों में विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसमें थोड़ा सा नमक या भुना जीरा मिलाकर पीने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है।

    इसके अलावा कच्चा प्याज भी लू से बचाव में सहायक माना जाता है। पारंपरिक रूप से लोग गर्मियों में भोजन के साथ प्याज का सेवन करते हैं, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है और लू के प्रभाव को कम करता है। कुछ क्षेत्रों में चावल के आटे से बनी पतली पेज का सेवन भी किया जाता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ ठंडक भी प्रदान करती है।

    ग्रामीण इलाकों में महुआ से बनी राब भी एक पारंपरिक पेय है, जिसे लू से बचाने में प्रभावी माना जाता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखती है, बल्कि पोषण भी प्रदान करती है।

    कुल मिलाकर, गर्मियों में स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शरीर को ठंडा रखा जाए, पर्याप्त पानी और पोषक पेय का सेवन किया जाए और धूप से बचाव के उपाय अपनाए जाएं। पारंपरिक देसी पेय न केवल आसानी से उपलब्ध होते हैं, बल्कि इनके नियमित सेवन से लू जैसी गंभीर समस्या से भी काफी हद तक बचा जा सकता है।

  • गर्मियों में मेथी दाना खाना सही या गलत? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

    गर्मियों में मेथी दाना खाना सही या गलत? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसाले सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं। इन्हीं में से एक है मेथी दाना, जिसका इस्तेमाल सदियों से स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं क्या इसकी तासीर शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है?

    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना की तासीर गर्म (उष्ण) होती है। यह शरीर में वात और कफ दोष को संतुलित करने में मदद करता है। लेकिन गर्मियों में जब शरीर में पित्त पहले से ही बढ़ा होता है, तब इसका अधिक सेवन कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में ज्यादा मात्रा में मेथी लेने से पेट में जलन, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    इतना ही नहीं, जिन लोगों को मधुमेह (डायबिटीज) है, उनके लिए भी मेथी दाने का सेवन सोच-समझकर करना जरूरी है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए गर्मियों में इसका सेवन करने के तरीके और मात्रा दोनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, मेथी दाने को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी को छानकर पीना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है। ध्यान रहे कि गर्मियों में इसे उबालकर या गर्म करके सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर में अतिरिक्त गर्मी बढ़ सकती है।

    इसके अलावा, मेथी दाने की मात्रा सीमित रखना बेहद जरूरी है। गर्म मौसम में शरीर पहले से ही संवेदनशील होता है, इसलिए कम मात्रा में सेवन करने से ही लाभ मिलता है। आप चाहें तो मेथी दाने के पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे दही या छाछ में मिलाकर लेने से इसकी गर्म तासीर कम हो जाती है और पाचन तंत्र भी बेहतर रहता है।

    छाछ के साथ मेथी का सेवन करने से पेट की गर्मी कम होती है, साथ ही यह सूजन और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाता है। इस तरह मेथी दाना एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी की तरह काम करता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गर्मियों में मेथी दाना खाली पेट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गैस और असहजता हो सकती है। इसे भोजन के बाद लेना अधिक बेहतर माना जाता है।

    हालांकि, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, लो बीपी या मधुमेह के मरीजों को मेथी दाने का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, मेथी दाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन गर्मियों में इसे सही मात्रा और सही तरीके से लेने पर ही इसका पूरा लाभ मिल सकता है।


  • Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ

    Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली। आज के समय में तेजी से बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों में Type 2 Diabetes एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता तनाव इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि World Health Organization (WHO) का मानना है कि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।

    WHO के अनुसार, सबसे जरूरी है अपने शरीर के वजन को संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में नियमित रूप से वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। संतुलित वजन न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचाता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।

    तीसरा अहम पहलू है संतुलित और पौष्टिक आहार। WHO के अनुसार, अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वहीं, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। सही खानपान न केवल डायबिटीज के खतरे को कम करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा और पोषण भी देता है।

    चौथा और बेहद जरूरी उपाय है तंबाकू से दूरी बनाना। तंबाकू का सेवन न केवल डायबिटीज बल्कि दिल और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। WHO का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू छोड़ने से शरीर की ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है और कई बीमारियों से बचाव संभव होता है।

    आज के व्यस्त जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और तंबाकू से दूरी बनाकर न केवल Type 2 Diabetes बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

    कुल मिलाकर, अगर समय रहते जागरूकता दिखाई जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज जैसी बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  • भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा: हीटवेव से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

    भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा: हीटवेव से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

    नई दिल्ली।International Workers’ Day के मौके पर जहां श्रमिकों के अधिकार और सम्मान की बात की जाती है, वहीं उनकी सेहत और सुरक्षा पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। देश के कई हिस्सों में बढ़ती भीषण गर्मी और Heatwave (लू) के चलते सबसे ज्यादा असर खुले में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और जागरूकता बेहद अहम हो जाती है।

    मेहनतकश हाथों की मेहनत से ही देश की तरक्की होती है, लेकिन तेज धूप और बढ़ते तापमान में काम करना उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। निर्माण कार्य में लगे मजदूर, खेतों में काम करने वाले किसान और सड़क किनारे काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं।

    National Health Mission के अनुसार, लू से बचाव के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले कोशिश करें कि काम के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय छाया में बिताया जाए। यदि धूप में काम करना जरूरी हो, तो सिर को टोपी, गमछा या कपड़े से ढककर रखें ताकि सीधे सूरज की किरणों से बचा जा सके।

    शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे महत्वपूर्ण है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और प्यास लगने का इंतजार न करें। छोटे-छोटे अंतराल में पानी पीना शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। वहीं, ज्यादा चीनी वाले ठंडे पेय, कोल्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स से दूरी बनाना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।

    कपड़ों का चुनाव भी गर्मी से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनना चाहिए, जो पसीने को सोखते हैं और शरीर को ठंडक देते हैं। इसके अलावा, लगातार धूप में काम करने से बचें और हर 45 से 60 मिनट के बीच 10-15 मिनट का आराम जरूर करें।

    खानपान का भी ध्यान रखना जरूरी है। गर्मी में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना शरीर की गर्मी को बढ़ा सकता है, जिससे परेशानी और बढ़ सकती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी को लू लग जाए तो चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। ऐसे में तुरंत व्यक्ति को छाया में ले जाकर ठंडे पानी से शरीर को ठंडा करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

    इसके साथ ही उद्योग संगठनों और ट्रेड यूनियनों की जिम्मेदारी भी बनती है कि वे श्रमिकों के लिए काम के समय को संतुलित करें, पर्याप्त पानी और छाया की व्यवस्था करें और उन्हें जागरूक बनाएं।

    कुल मिलाकर, इस भीषण गर्मी में श्रमिकों की सुरक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक जरूरत है। सही सावधानियां अपनाकर और जागरूक रहकर ही Heatwave के खतरे से बचा जा सकता है और श्रमिकों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।


  • हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है

    हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है


    नई दिल्ली| कई लोग अक्सर हाथ और पैरों के ठंडे या सुन्न रहने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल मौसम या सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कुछ समस्याओं का संकेत हो सकता है।
    डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में रक्त संचार सही तरीके से नहीं होता है, तो हाथ और पैरों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। इस वजह से ये हिस्से ठंडे महसूस होने लगते हैं। रक्त का सही प्रवाह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
    इसके अलावा खराब पाचन भी इस समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब शरीर को पूरी ऊर्जा और पोषण नहीं मिल पाता, तो इसका असर सबसे पहले हाथ-पैरों पर दिखाई देता है।
    तनाव और कमजोरी भी इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव रहने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो यह गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हाथ-पैर ठंडे रहने की स्थिति में रेनॉड्स डिजीज का खतरा हो सकता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे हाथ-पैरों में दर्द, सुन्नपन और अन्य जटिल समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
    इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं भी इस स्थिति से जुड़ी हो सकती हैं।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज और पैदल चलना चाहिए, ताकि रक्त संचार बेहतर बना रहे। हाथ-पैरों की हल्की मालिश और गर्म रखने के उपाय भी राहत दे सकते हैं।
    इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है, इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है।

  • मोटापे और बीमारियों की बड़ी वजह बना तेल, ऐसे करें नियंत्रण..

    मोटापे और बीमारियों की बड़ी वजह बना तेल, ऐसे करें नियंत्रण..


    नई दिल्ली।आज के समय में बदलती जीवनशैली और असंतुलित खानपान ने सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को तेजी से बढ़ा दिया है। इनमें सबसे बड़ी समस्या है भोजन में अधिक तेल का इस्तेमाल, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाकर कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन न केवल वजन बढ़ाता है, बल्कि यह हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा देता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा केवल दिखने की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर कई बीमारियों की शुरुआत का संकेत भी है। जब खाने में तेल की मात्रा अधिक होती है, तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। धीरे-धीरे यह स्थिति शरीर के अंगों पर दबाव डालने लगती है और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होती हैं।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। खाना बनाते समय तेल को मापकर इस्तेमाल करना, बिना जरूरत के तलने वाले भोजन से दूरी बनाना और हल्के पकाने के तरीकों को अपनाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।

    भाप में पकाए गए भोजन, ग्रिल्ड या कम तेल में बने व्यंजन न केवल शरीर के लिए हल्के होते हैं बल्कि इनमें पोषक तत्व भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा घर के खाने में संतुलन बनाए रखना और बार-बार तले हुए खाद्य पदार्थों से बचना लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तेल का पूरी तरह त्याग करना जरूरी नहीं है, बल्कि इसका संतुलित उपयोग सबसे महत्वपूर्ण है। सही मात्रा में लिया गया तेल शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत भी होता है, लेकिन जब यह सीमा से अधिक हो जाता है तो यही सेहत के लिए खतरा बन जाता है।

  • बार-बार गैस बनना सिर्फ पाचन नहीं, लिवर की समस्या का भी संकेत हो सकता है

    बार-बार गैस बनना सिर्फ पाचन नहीं, लिवर की समस्या का भी संकेत हो सकता है


    नई दिल्ली।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी समस्याओं को लोग अक्सर हल्के में ले लेते हैं। खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट फूलना या भारीपन महसूस होना आम बात मान ली जाती है, लेकिन बार-बार ऐसा होना शरीर के अंदर किसी गहरी समस्या का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल पाचन तंत्र की गड़बड़ी नहीं बल्कि लिवर की कार्यप्रणाली में कमी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

    पाचन और लिवर का गहरा संबंध

    बहुत से लोग यह नहीं जानते कि पाचन प्रक्रिया में लिवर की अहम भूमिका होती है। लिवर पित्त (बाइल) का निर्माण करता है, जो वसा को तोड़ने और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करता है। जब लिवर सही मात्रा में पित्त नहीं बना पाता या उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पचता। इसका परिणाम गैस, अपच, पेट में भारीपन और ब्लोटिंग के रूप में सामने आता है। यही कारण है कि लंबे समय तक गैस की समस्या बने रहना लिवर की कमजोरी का संकेत हो सकता है।

    इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    अगर आपको बार-बार गैस बनना, पेट फूलना, हल्का दर्द, भूख कम लगना या खाना खाने के बाद असहजता महसूस होती है, तो यह केवल सामान्य समस्या नहीं है। ये लक्षण बताते हैं कि आपका पाचन तंत्र और लिवर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। समय रहते इन संकेतों को पहचानना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर रूप न ले सके।

    खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह

    आजकल की अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान भी इस समस्या को बढ़ावा दे रहे हैं। देर रात खाना खाना, जंक फूड का अधिक सेवन, तला-भुना भोजन और अत्यधिक मीठा खाना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके कारण लिवर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और पाचन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर फैटी लिवर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय

    लिवर और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। सुबह खाली पेट गिलोय का रस पीना फायदेमंद माना जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ लिवर की कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा, आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना चाहिए। रिफाइंड शुगर का सेवन कम करना भी जरूरी है, क्योंकि यह लिवर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और नियमित व्यायाम करना भी लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    समय पर जांच और सावधानी है जरूरी

    यदि समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। केवल गैस की दवा लेने से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मूल कारण को समझना और उसका इलाज करना अधिक महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और सही उपचार से न केवल पाचन तंत्र बल्कि लिवर को भी स्वस्थ रखा जा सकता है।