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  • मुंह के छालों से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय दर्द जलन और खाने की तकलीफ से मिलेगी राहत

    मुंह के छालों से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय दर्द जलन और खाने की तकलीफ से मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । मुंह के छाले देखने में छोटे होते हैं लेकिन इनकी वजह से होने वाली तकलीफ काफी बड़ी हो सकती है। छाले होने पर खाना खाना पानी पीना और यहां तक कि सामान्य बातचीत करना भी दर्दनाक हो जाता है। कई बार यह समस्या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन इस दौरान जलन और दर्द व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित कर देते हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि यदि छाले लंबे समय तक बने रहें या बार बार होने लगें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार मुंह के छालों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में विटामिन बी 12 आयरन या फोलिक एसिड की कमी तनाव हार्मोनल बदलाव मुंह के अंदर चोट लगना या रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार अत्यधिक मसालेदार भोजन या दांतों की तेज धार भी छालों की वजह बन सकती है। इसलिए केवल घरेलू उपचार ही नहीं बल्कि सही खानपान और संतुलित जीवनशैली भी जरूरी है।

    मुंह के छालों में सबसे आसान और प्रभावी घरेलू उपाय नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला करना माना जाता है। नमक में मौजूद प्राकृतिक गुण मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं और सूजन को घटाने में सहायक होते हैं। नियमित कुल्ला करने से छाले वाली जगह साफ रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो सकता है।

    शहद भी मुंह के छालों में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण छाले पर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं जिससे जलन कम महसूस होती है। इसके अलावा शहद घाव भरने की प्रक्रिया को भी तेज करने में मदद कर सकता है। दिन में दो से तीन बार साफ उंगली या कॉटन की सहायता से शहद लगाने से आराम मिल सकता है।

    नारियल तेल भी इस समस्या में उपयोगी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला लॉरिक एसिड बैक्टीरिया और सूजन से लड़ने में सहायक होता है। यह छाले वाली जगह को नम बनाए रखता है जिससे दर्द और जलन कम महसूस होती है। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को नारियल तेल से एलर्जी हो या लगाने के बाद परेशानी बढ़े तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    बेकिंग सोडा का उपयोग भी कई लोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं। यह मुंह के अम्लीय वातावरण को संतुलित करने में मदद करता है जिससे जलन कम हो सकती है। इसके अलावा ठंडा पानी पीना या बर्फ की हल्की सिकाई भी कुछ समय के लिए दर्द से राहत देती है लेकिन बर्फ को सीधे लंबे समय तक छाले पर नहीं रखना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि छाले दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें बार बार निकलें तेज दर्द हो बुखार आए या खून निकलने जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही पर्याप्त पानी पीना हरी सब्जियां फल और विटामिन युक्त भोजन लेना तथा तनाव कम करना भी इस समस्या से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही देखभाल और समय पर उपचार से मुंह के छालों की परेशानी से जल्दी राहत पाई जा सकती है।

  • मलेरिया से बचाव के लिए जानिए जरूरी सावधानियां और घरेलू सुरक्षा उपाय जो रखेंगे पूरे परिवार को सुरक्षित

    मलेरिया से बचाव के लिए जानिए जरूरी सावधानियां और घरेलू सुरक्षा उपाय जो रखेंगे पूरे परिवार को सुरक्षित


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इनमें मलेरिया सबसे प्रमुख बीमारियों में शामिल है। यह बीमारी संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह गंभीर रूप भी ले सकती है। ऐसे में बरसात के मौसम में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर मलेरिया से बचाव किया जा सकता है।

    मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का सबसे बड़ा कारण होता है। कूलर गमले टायर बाल्टी और छत पर रखे बर्तनों का पानी नियमित रूप से बदलें। यदि कहीं लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो उसे तुरंत साफ करें।

    घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाना भी मच्छरों को अंदर आने से रोकने का अच्छा उपाय है। रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। बच्चों बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से मच्छरों से बचाकर रखना चाहिए क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है।

    शाम के समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी लाभदायक माना जाता है। हल्के रंग के पूरे बाजू के कपड़े और लंबे पायजामे पहनने से मच्छरों के काटने की संभावना कम हो जाती है। आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का भी उपयोग किया जा सकता है।

    घर और आसपास की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। नालियों की नियमित सफाई करें और कचरा खुले में जमा न होने दें। स्वच्छ वातावरण न केवल मलेरिया बल्कि डेंगू चिकनगुनिया जैसी कई बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।

    स्वस्थ शरीर संक्रमण से लड़ने में अधिक सक्षम होता है। इसलिए संतुलित आहार लें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और ताजे फल तथा हरी सब्जियों का सेवन करें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

    यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार ठंड लगना सिरदर्द शरीर में दर्द अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें और जांच कराएं। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही इलाज कराना चाहिए। अधूरा उपचार बीमारी को जटिल बना सकता है। साथ ही यदि परिवार के किसी सदस्य को मलेरिया हो जाए तो घर के अन्य लोगों को भी मच्छरों से बचाव के उपाय और अधिक सावधानी से अपनाने चाहिए।

    बरसात के मौसम में थोड़ी सी सतर्कता और नियमित स्वच्छता की आदत मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास सफाई बनाए रखे तथा मच्छरों को पनपने का अवसर न दे तो मलेरिया के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।

  • Health Alert: अगर बार बार सूज रहे हैं पैर तो हो जाएं सतर्क शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत

    Health Alert: अगर बार बार सूज रहे हैं पैर तो हो जाएं सतर्क शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत


    नई दिल्ली । पैरों में सूजन आना एक ऐसी समस्या है जिसे अधिकतर लोग थकान लंबे समय तक खड़े रहने या अधिक चलने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि यदि यह परेशानी बार बार हो रही है या कई दिनों तक बनी रहती है तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पैरों में लगातार रहने वाली सूजन शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है।

    पैरों में सूजन तब होती है जब शरीर के ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में एडिमा कहा जाता है। कई बार यह समस्या लंबे समय तक बैठे रहने यात्रा करने या अधिक नमक खाने के कारण भी हो सकती है लेकिन यदि सूजन रोजाना होने लगे दर्द के साथ हो या केवल एक पैर में दिखाई दे तो यह चिंता का विषय बन सकता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर में रक्त का संचार प्रभावित होता है जिससे पैरों और टखनों में सूजन दिखाई देने लगती है। इसी तरह किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने पर शरीर अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर नहीं निकाल पाता जिससे सूजन बढ़ सकती है। लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों में भी शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और पैरों में सूजन दिखाई देने लगती है।

    इसके अलावा नसों की कमजोरी वैरिकोज वेन्स लिम्फ संबंधी समस्याएं थायरॉयड की गड़बड़ी मोटापा मधुमेह और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी पैरों में सूजन का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी कई महिलाओं में पैरों में सूजन देखी जाती है लेकिन यदि इसके साथ सिरदर्द धुंधला दिखना या रक्तचाप बढ़ा हुआ हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।

    अगर सूजन के साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज बुखार त्वचा का रंग बदलना या अचानक वजन बढ़ने जैसी समस्याएं भी महसूस हों तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है।

    पैरों की सूजन से बचाव के लिए नियमित व्यायाम करना पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और नमक का सीमित सेवन करना लाभदायक माना जाता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने से बचें और बीच बीच में पैरों को हिलाते रहें। आराम करते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखकर लेटना भी सूजन कम करने में मदद कर सकता है। यदि डॉक्टर ने किसी विशेष बीमारी का इलाज बताया है तो दवाओं का नियमित सेवन और समय समय पर जांच कराना भी जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर अक्सर छोटी छोटी समस्याओं के जरिए बड़ी बीमारियों का संकेत देता है। इसलिए यदि पैरों की सूजन बार बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम है। समय पर पहचान और सही उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • महंगी क्रीम नहीं सही कारण पहचानिए तभी दूर होगा अंडरआर्म्स का जिद्दी कालापन

    महंगी क्रीम नहीं सही कारण पहचानिए तभी दूर होगा अंडरआर्म्स का जिद्दी कालापन


    नई दिल्ली । अंडरआर्म्स का काला पड़ना आज के समय में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक आम समस्या बन गया है। कई लोग इसे केवल साफ सफाई की कमी मान लेते हैं जबकि वास्तविकता इससे कहीं अलग है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार अंडरआर्म्स की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। यही कारण है कि इस हिस्से पर होने वाली हल्की जलन लगातार घर्षण या गलत स्किन केयर का असर जल्दी दिखाई देता है। यदि समय रहते सही कारण की पहचान कर ली जाए तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    अंडरआर्म्स के काले होने की सबसे आम वजह बार बार शेविंग करना मानी जाती है। रेजर से बाल हटाने पर बाल केवल ऊपर से कटते हैं जबकि उनकी जड़ त्वचा के भीतर बनी रहती है। इससे त्वचा गहरी दिखाई देने लगती है। लगातार शेविंग करने से त्वचा में सूक्ष्म जलन और रगड़ भी होती है जो समय के साथ पिग्मेंटेशन बढ़ा सकती है। ऐसे में यदि संभव हो तो त्वचा के अनुसार सुरक्षित हेयर रिमूवल तरीका अपनाना बेहतर माना जाता है।

    बहुत अधिक टाइट कपड़े पहनना भी अंडरआर्म्स के कालेपन की बड़ी वजह बन सकता है। लगातार घर्षण के कारण शरीर उस हिस्से में अधिक मेलानिन बनाना शुरू कर देता है जिससे त्वचा का रंग धीरे धीरे गहरा होने लगता है। अधिक वजन वाले लोगों में यह समस्या और अधिक देखने को मिलती है। इसलिए हल्के और सूती कपड़े पहनना त्वचा के लिए बेहतर माना जाता है।

    आजकल अधिकांश लोग रोजाना डिओडरेंट या एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करते हैं। कई उत्पादों में मौजूद अल्कोहल खुशबू वाले रसायन और अन्य केमिकल संवेदनशील त्वचा में एलर्जी या जलन पैदा कर सकते हैं। यदि लंबे समय तक ऐसा होता रहे तो त्वचा पर दाग और कालापन बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा अपनी त्वचा के अनुसार उत्पाद चुनें और किसी भी तरह की जलन महसूस होने पर उसका उपयोग बंद कर दें।

    डेड स्किन यानी मृत त्वचा कोशिकाओं का जमा होना भी अंडरआर्म्स को काला दिखा सकता है। जिस तरह चेहरे की नियमित सफाई जरूरी होती है उसी तरह इस हिस्से की भी हल्के तरीके से सफाई और एक्सफोलिएशन करना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए संतुलित देखभाल ही सबसे बेहतर उपाय है।

    कुछ मामलों में अंडरआर्म्स का कालापन केवल बाहरी कारणों से नहीं बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों से भी जुड़ा हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस या एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स जैसी त्वचा संबंधी स्थिति में अंडरआर्म्स और गर्दन की त्वचा मोटी और गहरे रंग की हो सकती है। यदि कालापन अचानक बढ़ जाए या इसके साथ खुजली मोटापन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

    स्वस्थ और साफ अंडरआर्म्स के लिए रोजाना सफाई करें त्वचा को बेवजह रगड़ने से बचें शेविंग के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं और अपनी त्वचा के अनुरूप स्किन केयर उत्पादों का ही इस्तेमाल करें। सही आदतें अपनाकर और समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

  • कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई

    कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । मेनोपॉज को लंबे समय तक केवल 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली सामान्य जैविक प्रक्रिया माना जाता रहा है लेकिन अब चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने एक नई और चिंताजनक तस्वीर उभर रही है। हाल के अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि समय से पहले मेनोपॉज यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर के मामले अब किशोरियों में भी सामने आने लगे हैं। कुछ मामलों में 13 वर्ष तक की लड़कियों में भी अंडाशय के समय से पहले काम करना बंद करने की समस्या दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे दुर्लभ जरूर मानते हैं लेकिन चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो भविष्य में प्रजनन क्षमता के साथ हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी किशोरी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहें या चार महीने अथवा उससे अधिक समय तक माहवारी बंद रहे तो इसे केवल हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक ऑटोइम्यून और अन्य चिकित्सकीय परीक्षण भी कराए जा सकते हैं ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

    यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस के विशेषज्ञों द्वारा किए गए रिव्यू अध्ययन में बताया गया है कि यदि अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है।

    अमेरिका के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किए गए शोध में 13 से 21 वर्ष की आयु की लड़कियों में ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई मरीजों में बीमारी की पहचान इसलिए देर से हुई क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल असंतुलन समझ लिया गया। यही कारण है कि विशेषज्ञ अब माता पिता और किशोरियों दोनों को मासिक धर्म में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज हो जाता है उनमें भविष्य में हार्ट अटैक स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध के अनुसार 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होने पर पहली बार हृदय रोग होने का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30 प्रतिशत और 45 से 49 वर्ष के बीच होने पर 12 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी मेनोपॉज से गहरा संबंध है। हिंसा मानसिक तनाव और लंबे समय तक चलने वाली भावनात्मक परेशानियां भी समय से पहले मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सकीय जांच महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि पीरियड्स लंबे समय तक बंद रहें या लगातार अनियमित हों तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम माना जाता है।

  • डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी

    डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी


    नई दिल्ली । डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है। अधिकांश लोग इसे केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित मानते हैं लेकिन इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। इनमें आंखें सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित रहने पर आंखों की बेहद महीन रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं जिससे धीरे धीरे नजर कमजोर होने लगती है और समय पर इलाज न मिलने पर अंधेपन तक का खतरा पैदा हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों की बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए अधिकांश मरीज तब तक अनजान रहते हैं जब तक आंखों की रोशनी प्रभावित नहीं होने लगती। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    यदि आपको धुंधला दिखाई देने लगा है आंखों के सामने काले धब्बे या फ्लोटर्स नजर आते हैं रात में देखने में परेशानी होती है या रंगों की पहचान करने में दिक्कत महसूस होती है तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण डायबिटिक रेटिनोपैथी या आंखों से जुड़ी किसी अन्य गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराने पर इन समस्याओं का उपचार संभव है और आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज केवल रेटिना तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इससे मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी आंखों की बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए केवल ब्लड शुगर की दवा लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना आंखों की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव को कम करता है और जटिलताओं का जोखिम घटाता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच जरूर करानी चाहिए। साथ ही नियमित रूप से HbA1c जांच कराकर ब्लड शुगर की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी आंखों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    धूम्रपान करने वाले लोगों में डायबिटीज के कारण आंखों की जटिलताओं का खतरा और अधिक बढ़ जाता है इसलिए धूम्रपान छोड़ना भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन करना और किसी भी तरह की दृष्टि संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच कराना भविष्य में गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डायबिटिक रेटिनोपैथी का समय रहते पता चल जाए और सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मामलों में आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपनी आंखों की नियमित जांच को उतनी ही प्राथमिकता देनी चाहिए जितनी वे ब्लड शुगर की जांच को देते हैं।

  • मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने गंदा पानी जमा होने और मच्छरों के तेजी से पनपने के कारण डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया टाइफाइड वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपकी और पूरे परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सबसे पहले साफ और सुरक्षित पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं क्योंकि दूषित पानी से टाइफाइड हेपेटाइटिस ए और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाहर खुले में मिलने वाले पेय पदार्थों और बर्फ का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

    बारिश के मौसम में ताजा और गर्म भोजन खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें तथा भोजन बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।

    मच्छरों से बचाव भी मानसून में बेहद जरूरी है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि यही डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल होता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी फायदेमंद रहता है।

    बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े पहनकर नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक नमी रहने से सर्दी जुकाम फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि गीले जूते और मोजे संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। मौसमी फल हरी सब्जियां दालें और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और नियमित व्यायाम या योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद भी शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है।

    यदि तेज बुखार लगातार सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में शुरुआती इलाज गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

    बरसात का मौसम आनंद और राहत लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छता संतुलित खानपान और समय पर सावधानी अपनाकर आप मानसून का भरपूर आनंद ले सकते हैं और खुद को कई मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।

  • स्वस्थ रहना है तो आज ही बदलें ये आदतें जानिए हेल्दी लाइफस्टाइल के आसान और असरदार उपाय

    स्वस्थ रहना है तो आज ही बदलें ये आदतें जानिए हेल्दी लाइफस्टाइल के आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । स्वस्थ शरीर ही सुखी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम के दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण अपनी सेहत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। इसका परिणाम मोटापा मधुमेह उच्च रक्तचाप हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है। यदि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाया जाए तो लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन जिया जा सकता है।

    अच्छी सेहत की शुरुआत संतुलित और पौष्टिक भोजन से होती है। रोजाना के भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल साबुत अनाज दालें दूध दही सूखे मेवे और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। तला भुना भोजन अधिक चीनी नमक और पैकेज्ड फूड का सेवन सीमित रखें। भोजन हमेशा समय पर करें और अधिक खाने से बचें।

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम भी उतना ही जरूरी है। प्रतिदिन कम से कम तीस से पैंतालीस मिनट तक तेज चलना योग दौड़ना साइकिल चलाना या कोई भी शारीरिक गतिविधि करने से शरीर फिट रहता है। व्यायाम न केवल वजन नियंत्रित रखता है बल्कि हृदय मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत बनाता है।

    पर्याप्त पानी पीना भी अच्छी सेहत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है पाचन बेहतर होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है।

    अच्छी नींद स्वस्थ जीवन की बुनियाद मानी जाती है। हर व्यक्ति को प्रतिदिन सात से आठ घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए। पर्याप्त नींद लेने से शरीर की मरम्मत होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।

    मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। तनाव को कम करने के लिए योग ध्यान प्राणायाम संगीत पढ़ाई या अपनी पसंद के किसी शौक के लिए समय निकालें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी मानसिक संतुलन बना रहता है।

    धूम्रपान शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। ये आदतें कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।

    समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी जरूरी है। रक्तचाप शुगर कोलेस्ट्रॉल और अन्य आवश्यक जांच नियमित रूप से करवाने से बीमारियों का समय रहते पता चल जाता है और उनका उपचार आसान हो जाता है।

    स्वस्थ जीवन का मतलब केवल बीमारी से बचना नहीं बल्कि शारीरिक मानसिक और सामाजिक रूप से संतुलित जीवन जीना है। यदि नियमित दिनचर्या पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद व्यायाम और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ सक्रिय और खुशहाल जीवन जी सकता है।

  • मौसम का दोहरा वार: धूप और बारिश से ऐसे करें बचाव, जानें जरूरी सावधानियां

    मौसम का दोहरा वार: धूप और बारिश से ऐसे करें बचाव, जानें जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कभी तेज धूप शरीर को झुलसा रही है तो कभी अचानक बारिश लोगों को भीगा रही है। इस दोहरे मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों पर पड़ रहा है। दिन के समय चिलचिलाती धूप जहां लू और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ा रही है, वहीं बारिश के बाद बढ़ी नमी सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण को जन्म दे रही है।

    तेज धूप में कैसे रखें खुद का ध्यान
    धूप से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचा जाए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को टोपी, छाता या गमछे से ढककर रखें। हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का प्रवाह बना रहे। पानी का अधिक सेवन करें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें। नींबू पानी, नारियल पानी और ओआरएस का सेवन लू से बचाव में मदद करता है।

    बारिश में संक्रमण से बचाव जरूरी
    बारिश में भीगने से सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में कोशिश करें कि बारिश में भीगने से बचें। यदि भीग जाएं तो तुरंत सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छे से सुखाएं। गीले जूते और कपड़े लंबे समय तक पहनने से त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और बाहर का खुला या बासी खाना खाने से बचें।

    खान-पान में रखें विशेष सावधानी
    मौसम बदलने के दौरान खान-पान का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे समय में तला-भुना और भारी भोजन कम करें। ताजे फल, सब्जियां और हल्का भोजन शरीर के लिए बेहतर होता है। स्ट्रीट फूड से दूरी बनाए रखें क्योंकि बारिश में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

    बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल
    बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है। बच्चों को धूप और बारिश दोनों से बचाकर रखें और बुजुर्गों को समय-समय पर पानी और हल्का भोजन देते रहें।

    लापरवाही बन सकती है बड़ी वजह
    मौसम की इस अस्थिरता को हल्के में लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी बीमारियों से बचा सकती है। इसलिए मौसम चाहे धूप वाला हो या बारिश वाला, सतर्क रहना ही सबसे अच्छा उपाय है।

    धूप और बारिश दोनों ही मौसम अपने साथ अलग-अलग खतरे लेकर आते हैं। सही सावधानी, संतुलित खान-पान और सतर्क जीवनशैली अपनाकर आप इन दोनों मौसमों के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रह सकते हैं।

  • थकान को कहें अलविदा! घर पर बनाएं नेचुरल एनर्जी बूस्टर ड्रिंक, दिनभर रहेंगे एक्टिव और फ्रेश

    थकान को कहें अलविदा! घर पर बनाएं नेचुरल एनर्जी बूस्टर ड्रिंक, दिनभर रहेंगे एक्टिव और फ्रेश


    नई दिल्ली । आज की व्यस्त जीवनशैली में थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी एक आम समस्या बन गई है। लंबे समय तक काम करना, पर्याप्त नींद न लेना, अनियमित भोजन और तनाव शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अधिकांश लोग बाजार में मिलने वाले एनर्जी ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद अधिक चीनी और कृत्रिम तत्व स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक और घर पर तैयार किए गए एनर्जी बूस्टर ड्रिंक शरीर के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी होते हैं।

    प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराते हैं। नींबू, शहद और पानी से तैयार किया गया पेय सबसे लोकप्रिय प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक्स में से एक माना जाता है। एक गिलास गुनगुने या सामान्य पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन-सी और प्राकृतिक शर्करा शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है।

    नारियल पानी भी एक बेहतरीन प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर माना जाता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को दूर कर ऊर्जा बनाए रखते हैं। गर्मियों के मौसम में इसका सेवन विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है।

    इसके अलावा केला और दूध से तैयार स्मूदी भी ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। केले में प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और पोटैशियम मौजूद होता है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है। व्यायाम करने वाले लोगों और खिलाड़ियों के लिए यह एक प्रभावी विकल्प माना जाता है।

    सूखे मेवे और खजूर से तैयार ड्रिंक भी शरीर को ताकत देने का काम करता है। रातभर भिगोए हुए बादाम, खजूर और दूध को मिलाकर तैयार किया गया पेय पोषण से भरपूर होता है। यह न केवल ऊर्जा बढ़ाता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और शारीरिक क्षमता को भी बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी आवश्यक है। यदि शरीर लगातार थकान महसूस कर रहा हो, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की संभावना भी हो सकती है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहेगा।

    कुल मिलाकर, प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर ड्रिंक शरीर को स्वस्थ तरीके से ऊर्जा प्रदान करने का बेहतर विकल्प हैं। इनका नियमित और संतुलित सेवन न केवल दिनभर ताजगी बनाए रखता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है। बाजार के कृत्रिम पेयों की बजाय घर पर तैयार प्राकृतिक पेय अपनाकर आप अपनी सेहत और ऊर्जा दोनों को बेहतर बना सकते हैं।