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  • तेज गर्मी से बचने का आसान तरीका, ये मसाले शरीर को रखते हैं अंदर से ठंडा और हल्का..

    तेज गर्मी से बचने का आसान तरीका, ये मसाले शरीर को रखते हैं अंदर से ठंडा और हल्का..

    नई दिल्ली । जैसे-जैसे गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है, वैसे-वैसे इसका असर लोगों के शरीर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान शरीर को तेजी से थका रहा है। इस मौसम में अक्सर लोग कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे हालात में केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि खानपान में ऐसे प्राकृतिक तत्वों को शामिल करना जरूरी हो जाता है जो शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान कर सकें।

    आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू नुस्खों में कुछ ऐसे मसालों का जिक्र मिलता है जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। ये मसाले न केवल पाचन को सुधारते हैं बल्कि शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखते हैं।

    इनमें सौंफ सबसे प्रमुख मानी जाती है। यह शरीर में ठंडक बनाए रखने में मदद करती है और पेट की गर्मी को कम करने का काम करती है। गर्मी के मौसम में इसका सेवन शरीर को हल्का और तरोताजा महसूस कराता है, साथ ही पाचन तंत्र को भी शांत रखता है।

    धनिया के बीज भी शरीर को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह शरीर में गर्मी और सूजन को कम करने में मदद करते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। गर्मी के कारण होने वाली पेट की समस्याओं में यह काफी लाभकारी माना जाता है।

    इलायची का उपयोग भी गर्मियों में काफी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ गैस, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। इसका सेवन शरीर में ताजगी बनाए रखने में सहायक होता है।

    पुदीना को तो लंबे समय से प्राकृतिक ठंडक का स्रोत माना जाता रहा है। इसमें मौजूद तत्व शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन सुधारने में भी मदद करते हैं। गर्मियों में होने वाली पेट की समस्याओं में यह काफी असरदार साबित होता है और शरीर को तुरंत राहत देता है।

    अमचूर भी इस सूची में शामिल एक महत्वपूर्ण मसाला है। यह पाचन को सक्रिय करने में मदद करता है और शरीर में ताजगी बनाए रखता है। इसके प्राकृतिक गुण गर्मी के असर को कम करने और भूख को संतुलित करने में सहायक होते हैं।

    अगर गर्मियों में खानपान में इन प्राकृतिक मसालों को शामिल किया जाए तो शरीर को अंदर से ठंडक मिल सकती है और कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है। यह सरल उपाय बिना किसी दवा के शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकता है।

  • विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी

    विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना और कम धूप के संपर्क में आना शरीर में विटामिन D की कमी का बड़ा कारण बन रहा है। हैरानी की बात यह है कि धूप से भरपूर देश में भी बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। विटामिन D हड्डियों की मजबूती, इम्यूनिटी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन इसकी कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक होता है और उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले वे लोग जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं और जिनकी त्वचा पर पर्याप्त धूप नहीं पड़ती। इसके अलावा गहरी त्वचा (डार्क स्किन) वाले लोगों में भी यह कमी अधिक देखी जाती है क्योंकि उनकी त्वचा में मेलेनिन अधिक होने से विटामिन D बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

    50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वहीं मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह विटामिन शरीर की फैट कोशिकाओं में फंस जाता है, जिससे इसकी उपलब्धता कम हो जाती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इसकी अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि इस दौरान शरीर की जरूरतें बढ़ जाती हैं।

    शाकाहारी या वीगन लोगों में भी विटामिन D की कमी आम है क्योंकि इसके प्रमुख प्राकृतिक स्रोत जैसे मछली और अंडे उनके आहार में शामिल नहीं होते। इसके अलावा किडनी या पाचन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में भी शरीर विटामिन D को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे कमी की संभावना बढ़ जाती है।

    विटामिन D की कमी के लक्षणों में लगातार थकान, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग शामिल हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है और इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह या दिन के समय थोड़ी देर धूप लेना, आहार में मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, अंडे की जर्दी और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि सप्लीमेंट लेने से पहले ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है, क्योंकि अधिक मात्रा में विटामिन D शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। कुल मिलाकर, सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर जांच के जरिए विटामिन D की कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

  • शुरुआती लोगों के लिए बेस्ट योग रूटीन, रोज 15 मिनट ,में पाएं फिट बॉडी और शांत मन

    शुरुआती लोगों के लिए बेस्ट योग रूटीन, रोज 15 मिनट ,में पाएं फिट बॉडी और शांत मन


    नई दिल्ली । अगर आप योग की शुरुआत करना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं पा रहे कि कौन से आसन से शुरुआत करें, तो आयुष मंत्रालय की सलाह आपके लिए एक बेहतरीन गाइड साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों के लिए ताड़ासन, वज्रासन और भुजंगासन सबसे सरल और प्रभावी योगासन हैं, जिन्हें घर पर आसानी से किया जा सकता है।

    योग विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना केवल 10 से 15 मिनट इन आसनों का अभ्यास करने से शरीर लचीला बनता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। योग की शुरुआत हमेशा धीरे-धीरे करनी चाहिए और सांसों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित अभ्यास से जल्दी ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

    ताड़ासन योग का सबसे बुनियादी आसन है, जो शरीर को संतुलन और मजबूती देता है। इसमें सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर उठाया जाता है और पूरे शरीर को खींचा जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है, शरीर की मुद्रा सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। शुरुआत में इसे 20 से 30 सेकंड तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

    वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है और शरीर को सीधा रखा जाता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, पेट की समस्याओं में राहत देता है और ध्यान के लिए आदर्श मुद्रा मानी जाती है। शुरुआती लोग इसे 3 से 5 मिनट तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

    भुजंगासन पीठ और रीढ़ के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें पेट के बल लेटकर छाती को ऊपर उठाया जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और तनाव को कम करता है। इसे 15 से 20 सेकंड तक रोककर 3 से 5 बार दोहराना चाहिए।

    इन तीनों आसनों का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आप लंबे समय तक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते हैं।

  • घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

    घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

    नई दिल्ली। गर्मियों में ठंडे पेय की चाह बढ़ जाती है, लेकिन बाजार में मिलने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद केमिकल्स सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में देसी पेय ‘लस्सी’ एक बेहतरीन और हेल्दी विकल्प है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि पोषण भी प्रदान करती है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी घर पर बनाना मुश्किल है, लेकिन सही तरीके और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

    अच्छी लस्सी के लिए दही का सही चयन जरूरी

    लस्सी बनाने के लिए ताजा और हल्का खट्टा दही सबसे उपयुक्त माना जाता है। बहुत ज्यादा खट्टा दही स्वाद को बिगाड़ सकता है। दही जितना फ्रेश होगा, लस्सी उतनी ही स्वादिष्ट बनेगी। लस्सी बनाने से पहले दही को अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे और टेक्सचर स्मूद बने।

    मीठी और नमकीन लस्सी का सही संतुलन
    लस्सी को अपनी पसंद के अनुसार मीठा या नमकीन बनाया जा सकता है।
    – मीठी लस्सी के लिए चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं।
    – नमकीन लस्सी के लिए काला नमक, भुना जीरा पाउडर और पुदीना डालने से स्वाद और बढ़ जाता है।
    लस्सी को मथते समय ध्यान रखें कि इसे ज्यादा देर तक ब्लेंड न करें, वरना इसका गाढ़ापन कम हो सकता है।

    ठंडक और परोसने का सही तरीका

    लस्सी को ठंडा बनाने के लिए बर्फ डाली जा सकती है, लेकिन अधिक बर्फ डालने से स्वाद हल्का हो जाता है। बेहतर है कि पहले से ठंडा दही इस्तेमाल करें। परोसते समय ऊपर से मलाई या ड्राय फ्रूट्स डालकर इसे और भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। अगर देसी अंदाज में लस्सी का मजा लेना चाहते हैं, तो इसे मिट्टी के कुल्हड़ में सर्व करना एक अच्छा विकल्प है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इस तरह कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसी गाढ़ी, ठंडी और स्वादिष्ट लस्सी तैयार कर सकते हैं।

  • हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

    हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

    नई दिल्ली:  टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस आज भी भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। बदलते मौसम में खांसी होना आम बात है, लेकिन हर खांसी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार साधारण दिखने वाली खांसी किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है

    सामान्य खांसी आमतौर पर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाती है, जो सर्दी, वायरल इंफेक्शन या एलर्जी के कारण होती है। लेकिन अगर खांसी 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है और दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है

    टीबी सिर्फ खांसी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे शाम के समय हल्का बुखार, रात में ज्यादा पसीना आना, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना और सीने में दर्द

    टीबी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और दूसरों में भी फैल सकती है। इसलिए अगर खांसी के साथ ये लक्षण नजर आएं, तो देरी न करें और तुरंत जांच कराएं

    विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता और समय पर इलाज ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। अगर शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है
    हर खांसी को नजरअंदाज न करें। अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे चेतावनी संकेत मानकर तुरंत मेडिकल सलाह लेना ही समझदारी है

  • नवरात्रि व्रत में मखाना: हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर, व्रत का सर्वोत्तम आहार

    नवरात्रि व्रत में मखाना: हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर, व्रत का सर्वोत्तम आहार


    नई दिल्ली । नवरात्रि के नौ दिवसीय व्रत में आहार का चुनाव बहुत मायने रखता है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि मखाना व्रत के लिए सबसे अच्छा और सात्विक आहार है। यह हल्का आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मखाने का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है थकान दूर करता है और व्रत के दौरान कमजोरी नहीं होने देता। उत्तर प्रदेश कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार व्रत का असली सार है आस्था अनुशासन और स्वास्थ्य का संतुलन। मखाना इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।

    मखाने के स्वास्थ्य लाभ

    ऊर्जा और ताकत: मखाना में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जिससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और व्रत के दौरान भूख और कमजोरी कम लगती है। पाचन स्वास्थ्य: इसमें हाई फाइबर पाया जाता है जिससे पाचन सुधरता है कब्ज नहीं होती और पेट हल्का रहता है।

    ब्लड शुगर नियंत्रण: मखाने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए यह डायबिटीज में भी फायदेमंद है। दिल और हड्डियां: पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखते हैं जबकि कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इम्यूनिटी और त्वचा: एंटीऑक्सीडेंट से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है सूजन कम होती है और त्वचा स्वस्थ रहती है। वजन नियंत्रण: कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण यह वजन बढ़ने नहीं देता।

    व्रत में मखाने का सेवन

    मखाना को कई तरीकों से खाया जा सकता है: घी में भूनकर: कुरकुरे और स्वादिष्ट स्नैक के रूप में।
     दूध में डालकर खीर: मीठा और पौष्टिक विकल्प। सादा स्नैक: हल्का और आसानी से पचने वाला।
    इस प्रकार मखाना न सिर्फ व्रत को सात्विक और पौष्टिक बनाता है बल्कि शरीर और मन को हल्का ऊर्जा से भरपूर और स्वस्थ रखता है।

  • बाल मृत्यु दर में बड़ी कमी भारत की वैश्विक सराहना संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में मिला बड़ा सम्मान

    बाल मृत्यु दर में बड़ी कमी भारत की वैश्विक सराहना संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में मिला बड़ा सम्मान


    नई दिल्ली :
    संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट ने भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि की पुष्टि की है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण और प्रभावशाली काम किया है।

    इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भारत की इस उपलब्धि को सराहा गया है और बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट देश के लिए गर्व का विषय है। पीएम मोदी ने इसे सरकार और देश के प्रयासों का परिणाम बताया।

    संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर अनुमान अंतर एजेंसी समूह यानी यूएनआईजीएमई की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर और निरंतर प्रयास किए हैं, जिनका सीधा असर जमीन पर दिखाई देता है।

    आंकड़ों के अनुसार 1990 में जहां नवजात शिशु मृत्यु दर 57 थी, वहीं 2024 में यह घटकर 17 रह गई है। यह लगभग 70 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। इसी तरह पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 1990 में 127 थी, जो 2024 में घटकर 27 रह गई है। यह लगभग 79 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है, जो भारत की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का प्रमाण है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में भी बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले दो दशकों में भारत ने इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुधार के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें टीकाकरण अभियान, संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    विशेष रूप से सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और नवजात देखभाल से जुड़ी नीतियों ने बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद की है। निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार इन प्रयासों ने लाखों बच्चों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी जा सकती हैं या उनका इलाज संभव है। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, बेहतर निगरानी और समय पर उपचार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से एनआईसीयू यानी नवजात गहन देखभाल इकाइयों के सुधार ने नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

    हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा हिस्सा होता है, लेकिन इस क्षेत्र ने सबसे तेजी से सुधार दिखाया है। यह इस बात का संकेत है कि सही नीतियों और प्रयासों से बड़े स्तर पर बदलाव संभव है।
     

    यह रिपोर्ट भारत के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है, जो देश की स्वास्थ्य नीतियों और प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है
  • आज का राशिफल 12 मार्च 2026: व्यापार में होगा लाभ, धन की होगी वर्षा; पढ़ें सभी राशियों की स्थिति

    आज का राशिफल 12 मार्च 2026: व्यापार में होगा लाभ, धन की होगी वर्षा; पढ़ें सभी राशियों की स्थिति


    नई दिल्ली । 12 मार्च 2026 का दिन ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कई राशियों के लिए शुभ और लाभदायक है। व्यापार करियर और आर्थिक मामलों में कुछ राशियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं जबकि कुछ को स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मेष

    आज का दिन शुभ रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा और परिवार में तालमेल बना रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में सम्मान बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी।

    वृषभ

    जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। परिवार में मतभेद संभव हैं। कार्यस्थल पर विरोधियों से सावधान रहें। व्यापार सामान्य रहेगा।

    मिथुन

    मन प्रसन्न रहेगा। किसी पुराने परिचित से मुलाकात हो सकती है। कार्यक्षेत्र में बदलाव लाभदायक साबित होगा। शेयर मार्केट से जुड़े लोगों के लिए दिन अनुकूल है।

    कर्क

    जीवनशैली में बदलाव करेंगे। व्यापार में लाभ की संभावना है। नई पार्टनरशिप के योग बन सकते हैं। यात्रा में सावधानी रखें।

    सिंह

    पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के योग हैं। व्यापार में सफलता मिलेगी। नई शुरुआत के लिए दिन अच्छा है। वाणी से रुके कार्य पूरे होंगे।

    कन्या

    दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में कुछ बाधाएं आ सकती हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यात्रा में सतर्क रहें।

    तुला

    स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। नया कार्य शुरू करने से पहले सोच समझकर निर्णय लें। व्यापार और नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी।

    वृश्चिक

    नई योजनाएं बन सकती हैं और मित्रों का सहयोग मिलेगा। किसी खास व्यक्ति से मतभेद हो सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

    धनु

    नई योजनाओं पर कार्य करेंगे। यात्रा के योग हैं। व्यापार में नए प्रयोग लाभ देंगे और अधिकारियों से सहयोग मिलेगा।

    मकर

    अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में कठिनाई हो सकती है। अनावश्यक धन हानि की संभावना रहेगी। सोच समझकर निर्णय लें।

    कुंभ

    महत्वपूर्ण निर्णय लेने का दिन है। नौकरीपेशा लोगों को लाभ मिलेगा। भूमि संबंधी मामलों में धन खर्च हो सकता है।

    मीन

    अपने विचारों से लोगों को प्रभावित करेंगे। व्यापार में लाभ और नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। किसी की बातों में आकर जल्दबाजी में निर्णय न लें।

    आज का राशिफल यह संकेत देता है कि आर्थिक मामलों और व्यापार में सफलता पाने के लिए समझदारी और धैर्य जरूरी है। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में सतर्क रहने से दिन बेहतर तरीके से बीतेगा।

  • सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

    सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान


    उज्जैन । अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में बीते डेढ़ माह के भीतर 11 बच्चों की मौत ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच हुई इन मौतों में अधिकांश बच्चे बहु-दिव्यांग थे और 10 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में आते थे। बच्चों को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान बचाई नहीं जा सकी।

    इस मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव आयुक्त कलेक्टर उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

    शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 और जनवरी 2026 में 2 बच्चों की मौत हुई। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि अधिकांश बच्चों में एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियां पाई गईं और कुछ को मृत अवस्था में लाया गया जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई।

    अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं जिनमें से 50 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे स्वयं चलने-उठने या भोजन करने में असमर्थ हैं।

    करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों के बाद प्रशासन ने उस आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया जिनमें अधिकांश मृतक भी शामिल थे।

    सुधीर भाई गोयल ने कहा कि मृतक बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। उनमें सांस लेने में कठिनाई खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों का इलाज पहले से ही विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा था और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा गया।

    मामले की संवेदनशीलता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत के नोटिस के बाद आश्रम और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी और कड़ी करने की संभावना जताई जा रही है।

  • किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है

    किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है


    नई दिल्ली । आज के समय में किडनी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और इसे अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लेकिन जैसे जैसे किडनी की कार्यक्षमता घटती है शरीर की त्वचा और नाखून कई संकेत देने लगते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम संकेतों में से एक है त्वचा का अत्यधिक रूखा होना। त्वचा खुरदुरी पपड़ीदार और तनी हुई महसूस हो सकती है कई बार इसमें दरारें भी पड़ जाती हैं और यह मछली की चमड़ी जैसी दिखने लगती है।

    लगातार खुजली भी किडनी रोग का बड़ा संकेत हो सकती है। यह खुजली कभी शरीर के एक हिस्से तक सीमित रहती है और कभी पूरे शरीर में फैल जाती है। अगर यह लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा पर खरोंच के निशान उभरने लगते हैं। कुछ जगहों पर त्वचा मोटी हो सकती है या सख्त गांठें बन सकती हैं जिससे इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।

    किडनी सही से काम न करे तो खून में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं। इसका असर त्वचा के रंग पर भी दिखाई देता है जो पीली धूसर या असामान्य रूप से फीकी नजर आ सकती है। कुछ लोगों में त्वचा पर मोटी और पीली परत भी बन जाती है। इसके अलावा नाखूनों में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। नाखूनों का ऊपरी हिस्सा सफेद और निचला हिस्सा भूरा या लाल दिख सकता है। कभी कभी नाखूनों पर सफेद रेखाएं भी उभर आती हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

    शरीर में सूजन यानी एडेमा भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है। पैरों टखनों हाथों या चेहरे पर सूजन आ सकती है और त्वचा तनी या चमकदार दिख सकती है। खून में टॉक्सिन बढ़ने से त्वचा पर छोटे दाने या रैशेज भी उभर सकते हैं जिनमें तेज खुजली होती है और ठीक होने के बाद भी यह दोबारा उभर सकते हैं।

    कुछ गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के फफोले भी पड़ सकते हैं। ये हाथ पैर या चेहरे पर दिखाई देते हैं और सूखने के बाद निशान छोड़ जाते हैं। पेट या कमर के आसपास कोई नई गांठ या सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या या कैंसर का संकेत भी हो सकता है।

    इसलिए अगर त्वचा में लगातार रूखापन खुजली दाने नाखूनों में बदलाव सूजन या किसी भी तरह की असामान्य गांठ नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से गंभीर किडनी समस्याओं और फेलियर को रोका जा सकता है। अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही अपने शरीर के छोटे छोटे संकेतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।