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  • सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी

    सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने परिवार की देखभाल करते करते खुद की सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इसका असर यह होता है कि उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और धीरे धीरे कमजोरी हार्मोन असंतुलन और कई गंभीर बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने दैनिक आहार में कुछ खास पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें ताकि उनका शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहे।

    सबसे पहले बात करें रागी की तो यह कैल्शियम आयरन और फाइबर से भरपूर होती है। रागी का नियमित सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। इसे रोटी चीला या लड्डू के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। इसके अलावा यह बाल और त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है।

    दूसरा महत्वपूर्ण आहार है आंवला जो विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। आंवले को जूस चटनी या मुरब्बे के रूप में रोजाना लिया जा सकता है।

    तीसरे स्थान पर चिया सीड्स आते हैं जो कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और वजन को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। चिया सीड्स को पानी दूध या स्मूदी में मिलाकर आसानी से सेवन किया जा सकता है।

    चौथे नंबर पर अलसी के बीज हैं जो ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत होते हैं। यह दिल को स्वस्थ रखते हैं और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही हार्मोन संतुलन में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह पीसीओडी जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माने जाते हैं।

    पांचवें स्थान पर कद्दू के बीज आते हैं जो मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं। यह शरीर की कई जरूरी क्रियाओं को संतुलित रखते हैं और थायराइड जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं। रोजाना एक चम्मच कद्दू के बीज का सेवन शरीर के लिए लाभदायक होता है।

    छठे नंबर पर अखरोट का नाम आता है जो मस्तिष्क को मजबूत बनाने और याददाश्त को बेहतर करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है और बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

    सातवें और आखिरी स्थान पर चुकंदर है जो शरीर में खून की कमी को दूर करने में बेहद कारगर माना जाता है। महिलाओं में एनीमिया की समस्या आम होती है ऐसे में चुकंदर का सेवन रक्त की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसे सलाद जूस या रोटी के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है।

    इन सात चीजों को अपने रोजाना के आहार में शामिल करके महिलाएं न केवल अपनी सेहत को बेहतर बना सकती हैं बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा और संतुलन बनाए रख सकती हैं। सही खानपान ही स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है और छोटी छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं।

  • बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें

    बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और अत्यधिक मसालेदार भोजन ने शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या को आम बना दिया है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है, जिनमें पित्त अग्नि और जल का मिश्रण है। जब यह असंतुलित हो जाता है, तो पाचन खराब होना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में समय रहते खानपान और जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पित्त को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले आहार को अपनाना चाहिए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण हैं हल्के और सुपाच्य अनाज जैसे जौ, चावल और गेहूं। ये न केवल पाचन को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद करते हैं। इसके विपरीत उड़द दाल और कुलथी जैसी गरम तासीर वाली चीजों से दूरी बनाना ही बेहतर होता है, क्योंकि ये पित्त को और बढ़ा सकती हैं।

    फलों में मीठे और रसीले विकल्प पित्त संतुलन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर और किशमिश जैसे फल शरीर को ठंडक देते हैं और पाचन को सुधारते हैं। हालांकि आमतौर पर खट्टे फलों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन आंवला और अनार सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं क्योंकि ये शरीर को पोषण देने के साथ पित्त को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।

    सब्जियों की बात करें तो खीरा, करेला, मटर और परवल जैसी ठंडी या कड़वी तासीर वाली सब्जियां पित्त को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। वहीं बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन और पालक जैसी गरम प्रकृति वाली सब्जियों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर की गर्मी को बढ़ा सकती हैं।

    किचन में मौजूद कुछ मसाले भी पित्त नियंत्रण में सहायक होते हैं। सौंफ, धनिया, इलायची और केसर जैसे मसाले शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इसके उलट हींग और काली मिर्च का अधिक सेवन जलन और एसिडिटी को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका उपयोग सीमित मात्रा में करना ही बेहतर है।

    डेयरी उत्पादों में ठंडा दूध, शुद्ध देसी घी और ताजी छाछ पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि पाचन को भी मजबूत बनाते हैं।

    हालांकि केवल डाइट ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। पित्त बढ़ने पर तेज धूप से बचना चाहिए और ठंडे वातावरण में समय बिताना लाभकारी होता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए हल्का संगीत सुनना और पानी के पास समय बिताना भी फायदेमंद होता है।

    कुल मिलाकर, अगर आप अपने शरीर के पित्त को संतुलित रखना चाहते हैं, तो सही खानपान और संतुलित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा, बल्कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।

  • मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण

    मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सुविधाओं के पीछे इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना लगभग भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि मोटापा अब केवल दिखने या शरीर की बनावट से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। बदलती जीवनशैली असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब शरीर का वजन सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है तो यह केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के अंदरूनी तंत्र को भी प्रभावित करता है। मोटापे के कारण शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ने लगती है जो धीरे धीरे इंसुलिन प्रतिरोध को जन्म देती है। यही स्थिति आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है जिनमें Type 2 Diabetes High Blood Pressure Thyroid Disease और धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसलिए विशेषज्ञ मोटापे को कई बीमारियों का प्रवेश द्वार भी मानते हैं।

    मोटापा बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आज का बदलता खानपान है। फास्ट फूड जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन शरीर में अनावश्यक कैलोरी जमा कर देता है। इन खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व कम और वसा व चीनी की मात्रा अधिक होती है जो वजन तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत भी मोटापे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऑफिस में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना और बच्चों का खेल के मैदान के बजाय मोबाइल या टीवी पर समय बिताना शारीरिक सक्रियता को कम कर देता है जिससे शरीर की कैलोरी खर्च नहीं हो पाती।

    इसके साथ ही मानसिक तनाव और अनियमित नींद भी वजन बढ़ने का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता या लगातार तनाव में रहता है तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोटापे को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों से अधिक जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली और आदतों में बदलाव करें।

    मोटापा नियंत्रित करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना साइकिल चलाना या योग करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। नियमित व्यायाम से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और वजन नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही आहार में भी बदलाव जरूरी है। घर का बना संतुलित और पौष्टिक भोजन हरी सब्जियां फल और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए जबकि चीनी और तेल का सेवन कम करना चाहिए।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए खासकर बच्चों के लिए। उन्हें अधिक समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर बैठने के बजाय शारीरिक खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छोटे छोटे बदलाव जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना हर एक घंटे के बाद कुछ मिनट टहलना और दैनिक काम खुद करना भी शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लें तो मोटापे से बचना संभव है और इसके कारण होने वाली कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम

    Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम


     नई दिल्ली।  उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं और अक्सर 30 से 35 साल के बाद लोग महसूस करने लगते हैं कि पहले जैसी ताकत और ऊर्जा नहीं रही। मांसपेशियां धीरे धीरे ढीली होने लगती हैं और शरीर की फिटनेस कम होने लगती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को सार्कोपेनिया कहा जाता है। इसमें उम्र बढ़ने के साथ मसल्स मास कम होने लगता है।

    मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा के अनुसार यदि सही डाइट और सही समय पर भोजन की आदत अपनाई जाए तो उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को लंबे समय तक मजबूत और फिट रखा जा सकता है। उनका कहना है कि मसल्स बनाने के लिए केवल अच्छा खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि भोजन का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    उनके अनुसार जब भी कोई व्यक्ति वर्कआउट करता है तो उसके बाद मांसपेशियों को रिपेयर और मजबूत होने के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसलिए एक्सरसाइज के एक से दो घंटे के भीतर 20 से 30 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन लेना जरूरी माना जाता है। इससे मसल्स की रिकवरी बेहतर होती है और शरीर की ताकत भी बढ़ती है।

    प्रोटीन के लिए कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं। अंडे और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध पनीर और दही शरीर को अच्छा प्रोटीन देते हैं। इसके अलावा चिकन और मछली जैसे लीन मीट भी मसल्स के लिए लाभदायक होते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए टोफू और दालें प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार वर्कआउट से पहले भी शरीर को थोड़ी ऊर्जा देना जरूरी होता है। एक्सरसाइज से 30 से 60 मिनट पहले हल्का स्नैक लेना फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए ग्रीक योगर्ट या एक मुट्ठी ड्राई फ्रूट जैसे बादाम और अखरोट अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इससे वर्कआउट के दौरान मसल्स को नुकसान कम होता है और शरीर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।

    अक्सर लोग वजन कम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट और फैट को पूरी तरह छोड़ देते हैं लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं। फल सब्जियां और साबुत अनाज शरीर में ग्लाइकोजन स्टोर को भरते हैं जिससे शरीर जल्दी थकता नहीं है।इसी तरह हेल्दी फैट भी शरीर के लिए जरूरी होते हैं। एवोकाडो जैतून का तेल और बादाम जैसे हेल्दी फैट्स हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करते हैं और मांसपेशियों को सुरक्षित रखते हैं।स्वस्थ शरीर के लिए पानी का सही मात्रा में सेवन भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर की परफॉर्मेंस बेहतर होती है और वर्कआउट के बाद रिकवरी भी तेजी से होती है।

    न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि दिन भर में तीन से पांच छोटे मील्स लेना चाहिए और हर मील में प्रोटीन जरूर शामिल होना चाहिए। इससे शरीर को लगातार अमीनो एसिड मिलते रहते हैं और मांसपेशियों की मरम्मत और विकास बेहतर तरीके से होता है।लवनीत बत्रा ने पनीर से जुड़ी एक आसान और स्वादिष्ट रेसिपी भी साझा की है। उन्होंने बताया कि घर में मौजूद पनीर की मदद से बिना किसी प्रोटीन पाउडर के लगभग 25 ग्राम प्रोटीन वाला पौष्टिक मील आसानी से तैयार किया जा सकता है।यदि सही डाइट सही समय और नियमित एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो 35 साल की उम्र के बाद भी शरीर को मजबूत स्वस्थ और फिट बनाए रखना संभव है।

  • सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

    सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका


    नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है।

    डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है।

    डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं।

    सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं।

    वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है।

    एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं।

    डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है।

    कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।

  • Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी

    Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाएं एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। घर संभालना, ऑफिस का काम करना और परिवार की देखभाल करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ऐसे में अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। दिनभर खड़े रहना, ज्यादा चलना या लंबे समय तक बैठकर काम करना पैरों में दर्द, सूजन और थकान का कारण बन सकता है।

    इन्हीं समस्याओं से राहत दिलाने के लिए एक बेहद आसान और असरदार एक्सरसाइज है टोगा योगा। यह एक सरल फुट एक्सरसाइज है जो पैरों की उंगलियों और तलवों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। टोगा शब्द Toe यानी पैर की उंगलियों और Yoga यानी योग से मिलकर बना है। इसे करने के लिए किसी विशेष उपकरण या ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। दिन में सिर्फ पांच मिनट इस एक्सरसाइज को करने से शरीर और दिमाग दोनों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

    टोगा योगा में पैरों की उंगलियों को अलग अलग तरीके से हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है। देखने में यह एक्सरसाइज बहुत आसान लगती है लेकिन इसके फायदे काफी प्रभावी होते हैं। हमारे पैरों में कई छोटी छोटी मांसपेशियां होती हैं जो शरीर के संतुलन, चलने फिरने और खड़े रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टोगा योगा इन मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाने में मदद करता है।

    इस एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब पैरों की मसल्स मजबूत होती हैं तो लंबे समय तक खड़े रहने या चलने के दौरान थकान कम महसूस होती है। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए यह एक्सरसाइज काफी फायदेमंद हो सकती है जिन्हें काम के दौरान लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है।

    टोगा योगा करने से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। जब पैरों की उंगलियों को हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है तो रक्त प्रवाह में सुधार होता है जिससे सूजन और भारीपन की समस्या कम हो सकती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन पूरे शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है।

    यह एक्सरसाइज मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक मानी जाती है। जब हम ध्यानपूर्वक पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करते हैं तो शरीर में रिलैक्सेशन का एहसास होता है। इससे दिनभर की थकान कम होती है और मन भी शांत महसूस करता है।

    टोगा योगा करने के लिए कुछ आसान एक्सरसाइज अपनाई जा सकती हैं। इसमें टो स्प्रेड एक्सरसाइज के तहत पैरों की सभी उंगलियों को फैलाकर कुछ सेकंड तक उसी स्थिति में रखा जाता है। बिग टो लिफ्ट में पैर की बाकी उंगलियों को जमीन पर रखते हुए केवल अंगूठे को ऊपर उठाने की कोशिश की जाती है। टो कर्ल एक्सरसाइज में पैरों की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़कर फिर सीधा किया जाता है। टो टैपिंग में उंगलियों को धीरे धीरे जमीन पर टैप किया जाता है। वहीं तौलिया ग्रिप एक्सरसाइज में जमीन पर रखे छोटे तौलिये को पैरों की उंगलियों से पकड़कर अपनी ओर खींचा जाता है।

    महिलाएं अक्सर अपने परिवार और काम की जिम्मेदारियों के बीच खुद को समय नहीं दे पातीं। लेकिन दिन में सिर्फ कुछ मिनट का यह छोटा सा प्रयास सेहत के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। टोगा योगा एक ऐसी आसान और प्रभावी एक्सरसाइज है जिसे रोजाना अपनाकर पैरों की मजबूती, बेहतर ब्लड सर्कुलेशन और मानसिक राहत हासिल की जा सकती है।

  • मांस नहीं, पौधों से बनेगी ताकत: जानिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के आसान तरीके

    मांस नहीं, पौधों से बनेगी ताकत: जानिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के आसान तरीके

    नई दिल्ली। शरीर को सुचारू रूप से चलाने मांसपेशियों को मजबूत रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी पोषक तत्व है। खासतौर पर जिम में कसरत करने वाले लोगों के लिए प्रोटीन मसल रिकवरी और ग्रोथ का आधार माना जाता है। आम धारणा यह है कि पर्याप्त प्रोटीन सिर्फ अंडा चिकन या मांसाहारी भोजन से ही मिल सकता है लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है।आज के समय में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन न सिर्फ शाकाहारी लोगों के लिए बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है। भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में लोग मांसाहारी प्रोटीन छोड़कर पौधों से मिलने वाले प्रोटीन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

    क्यों बेहतर है प्लांट-बेस्ड प्रोटीन?
    पौधों से मिलने वाला प्रोटीन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और पचने में आसान माना जाता है। जहां मांसाहारी प्रोटीन के साथ कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है वहीं प्लांट-बेस्ड प्रोटीन में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। यही वजह है कि यह दिल की सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स से जहां कैल्शियम मिलता है वहीं बहुत से लोगों को लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या भी होती है जिससे गैस पेट दर्द और अपच जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसके विपरीत बादाम तिल और हरी सब्जियां कैल्शियम के बेहतरीन प्लांट-बेस्ड स्रोत हैं।

    फाइबर और एनर्जी का डबल फायदा
    प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके साथ शरीर को भरपूर फाइबर भी मिलता है। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। यही कारण है कि ऐसे लोग जो पौधों से प्रोटीन लेते हैं उनमें मोटापा और हृदय रोग का खतरा कम देखा जाता है।

    किन चीजों से लें प्लांट-बेस्ड प्रोटीन?
    आप अपनी रोज़मर्रा की डाइट में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं-

    दालें मूंग मसूर अरहर
    सोया टोफू और सोया चंक्स

    राजमा चना और लोबिया

    सूखे मेवे और सीड्स बादाम कद्दू के बीज सूरजमुखी के बीज

    अंकुरित अनाज और साबुत अनाज

    हरी पत्तेदार सब्जियां

    कितना प्रोटीन है जरूरी?
    आम तौर पर शरीर के वजन के हिसाब से प्रोटीन की जरूरत तय की जाती है। यदि आपका वजन 50 किलोग्राम है तो रोजाना लगभग 50 ग्राम प्रोटीन लेना पर्याप्त माना जाता है। यह मात्रा आसानी से प्लांट-बेस्ड डाइट से पूरी की जा सकती है।

    डाइट में शामिल करने के आसान तरीके
    आप मूंग दाल को अंकुरित कर सलाद बना सकते हैं मूंग दाल या बेसन का चीला खा सकते हैं सब्जियों के साथ टोफू मिलाकर स्वादिष्ट भोजन बना सकते हैं या राजमा-बीन्स की टिक्की और कबाब ट्राय कर सकते हैं।कुल मिलाकर अगर आप बिना मांसाहार के भी मजबूत फिट और एनर्जेटिक रहना चाहते हैं तो प्लांट-बेस्ड प्रोटीन एक स्मार्ट और हेल्दी विकल्प है।

  • जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर

    जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर


    नई दिल्ली । वजन कम करने की प्रक्रिया अक्सर कठिन और उबाऊ लगती है। कई बार हम सोचते हैं कि हमें जिम में घंटों पसीना बहाना होगा और अपनी पसंदीदा चीज़ों को छोड़ना पड़ेगा। लेकिन असल में वजन घटाने की सफलता का सबसे बड़ा राज आपकी मानसिक सोच और मोटिवेशन में छिपा है। सही आदतें और सकारात्मक नजरिया ही इस सफर को आसान और मजेदार बना सकते हैं।अगर आप भी वजन घटाने के सफर की शुरुआत करना चाहते हैं तो इन 5 टिप्स को अपनाकर आप इसे सिर्फ प्रभावी नहीं बल्कि मजेदार भी बना सकते हैं।

    छोटे टारगेट से शुरुआत करें

    अगर आपने एक साथ 10 किलो वजन घटाने का सोच लिया तो यह आपको जल्दी ही हतोत्साहित कर सकता है। इसके बजाय छोटे और साप्ताहिक लक्ष्य तय करें जैसे कि हर हफ्ते 500 ग्राम वजन घटाना। शुरुआत में केवल 15-20 मिनट की एक्सरसाइज से शुरू करें। छोटे टारगेट पूरे होने पर मिलने वाली संतुष्टि आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

    फिजिकल एक्टिविटी को मजेदार बनाएं

    कभी-कभी वर्कआउट को बोझ जैसा महसूस करना स्वाभाविक है लेकिन इसे मजेदार बनाने की कोशिश करें। अपने पसंदीदा गानों की प्लेलिस्ट सुनते हुए वर्कआउट करें। म्यूजिक न केवल आपको ऊर्जा देगा बल्कि यह आपके मूड को भी बेहतर बनाएगा। इससे वर्कआउट की समय सीमा का पता भी नहीं चलेगा और आप आसानी से लंबे समय तक एक्टिव रहेंगे।

    वर्कआउट पार्टनर ढूंढें

    अकेले जिम जाने की सोच ही आलस को जन्म देती है। ऐसे में एक वर्कआउट पार्टनर का होना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को अपने साथ वर्कआउट करने के लिए प्रेरित करें। इससे न केवल आपको प्रेरणा मिलेगी बल्कि आप एक-दूसरे को उत्साहित और प्रोत्साहित भी करेंगे। इसके अलावा वर्कआउट पार्टनर के साथ करने से यह और भी मजेदार हो सकता है।

    आहार में बदलाव करें पर प्रतिबंध नहीं

    वजन घटाने के सफर में आहार को भी बदलना महत्वपूर्ण है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको अपनी पसंदीदा चीजें छोड़नी पड़ें। अगर आप बहुत सख्त आहार योजना का पालन करेंगे तो जल्दी ही वह आपके लिए बोरिंग और मुश्किल हो जाएगा। इसके बजाय छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे कि अधिक प्रोटीन और फाइबर का सेवन शक्कर और जंक फूड की मात्रा कम करना।

    अपने छोटे-छोटे प्रगति को सेलिब्रेट करें

    वजन घटाने का सफर लंबा हो सकता है और इसके दौरान किसी छोटे बदलाव को नजरअंदाज करना आसान होता है। लेकिन छोटी-छोटी प्रगति को सेलिब्रेट करना आपके मोटिवेशन को बढ़ा सकता है। जैसे ही आप कोई छोटा लक्ष्य हासिल करें अपने आप को सराहें या खुद को कोई छोटा इनाम दें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। वजन घटाने का सफर मानसिक दृष्टिकोण से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है। अगर आप इसे एक सकारात्मक और मजेदार अनुभव के रूप में देखेंगे तो यह सफर बेहद सफल और प्रेरणादायक बन सकता है। शुरुआत में छोटी शुरुआत करें इसे मजेदार बनाएं और साथ ही अपने आहार और आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें। जब आप इसे एक आदत के रूप में अपनाएंगे तो यह आसानी से आपका जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

  • हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक चुनौती जरूर है, लेकिन 2026 के हेल्दी ईटिंग और फूड ट्रेंड्स इसे पहले से कहीं आसान बना रहे हैं। अब हेल्दी खाना सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, दिनभर ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने का अहम जरिया बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल के साथ लोग अब ऐसे फूड ऑप्शन्स की तलाश में हैं जो नैचुरल हों, कम प्रोसेस्ड हों और शरीर को संपूर्ण पोषण दें।2026 के फूड ट्रेंड्स में नैचुरल इंग्रीडिएंट्स, लो-कार्ब डाइट और प्लांट-बेस्ड फूड्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है। लोग पैकेज्ड और जंक फूड से दूरी बनाकर घर के बने, ताज़े और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्विनोआ, ओट्स, मिलेट्स, मील शेक्स और वेजिटेबल-फ्रूट स्मूदीज़ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये पचाने में आसान होने के साथ लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं।

    रेसिपी ट्रेंड्स की बात करें तो इस साल स्वाद और सेहत के बीच बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। हल्दी, ग्रीन टी, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स जैसे सुपरफूड्स को रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करना अब आम हो गया है। ये न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, बल्कि हार्ट हेल्थ और पाचन के लिए भी फायदेमंद माने जा रहे हैं। डिनर में लो-कार्ब वेजिटेबल प्लेट्स और प्रोटीन रिच स्नैक्स का चलन भी बढ़ रहा है। बेक्ड स्वीट पोटैटो फ्राइज, पैन-ग्रिल्ड सब्जियां या हर्ब-ग्रिल्ड चिकन जैसे विकल्प स्वादिष्ट होने के साथ वजन कंट्रोल और मसल स्ट्रेंथ में मदद करते हैं।हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर भोजन करना और छोटे-छोटे पोर्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू पानी से करने, दिनभर पर्याप्त पानी पीने और हर 3-4 घंटे में हल्का व पौष्टिक स्नैक लेने से शरीर एक्टिव बना रहता है और थकान महसूस नहीं होती।

    फिट रहने के लिए अब लोग भारी-भरकम एक्सरसाइज की बजाय हल्की व नियमित गतिविधियों को अपनाने लगे हैं। योग, मॉर्निंग स्ट्रेचिंग और वर्क फ्रॉम होम के दौरान छोटे-छोटे वॉक ब्रेक्स शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही विटामिन और मिनरल्स के लिए सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। धूप से विटामिन डी, खट्टे फलों से विटामिन सी और हरी सब्जियों व बीन्स से आयरन लेना अब लोगों की डेली रूटीन का हिस्सा बनता जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी रूटीन की सफलता किसी एक बड़े बदलाव में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे सुधारों में छिपी होती है। अचानक डाइट बदलना या एक्सट्रीम फास्टिंग करने की बजाय धीरे-धीरे हेल्दी आदतें अपनाना लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है। 2026 के ये हेल्दी ईटिंग ट्रेंड्स यही संदेश देते हैं कि सेहतमंद जीवन कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं, बल्कि सही चुनावों से बना एक आसान सफर है।

  • ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर। नए साल 2026 की शुरुआत शहर में कुछ अलग अंदाज में हुई। इंदरगंज चौराहे पर आयोजित दूध अभियान में लोगों ने शराब छोड़कर दूध पीकर नववर्ष का स्वागत किया। एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयास से यह अनोखा अभियान चलाया गया।सुबह-सुबह पंडाल पर 2 क्विंटल केसरिया दूध तैयार कर निशुल्क वितरण किया गया। राहगीरों, वाहन चालकों, युवाओं और बुजुर्गों ने रुककर दूध पिया और अभियान का समर्थन किया। एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने खुद लोगों को दूध दिया और नशामुक्त नववर्ष का संदेश फैलाया। पंडाल के आसपास बड़े-बड़े बैनरों और साउंड सिस्टम के जरिए संदेश दिया गया-दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।

    आयोजकों का कहना है कि नए साल पर शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। युवाओं में नशे की लत चिंता का विषय है। इसी चुनौती के समाधान के लिए यह अभियान शुरू किया गया।दूध वितरण कार्यक्रम में लोगों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोगों ने इसे नए साल की सबसे अच्छी और सार्थक शुरुआत बताया। युवाओं ने कहा कि ऐसे अभियान नशे के प्रति सोच बदलने में मददगार हैं। स्थानीय निवासियों ने आयोजन की सराहना की और इसे आगे जारी रखने की मांग की।

    यातायात पुलिस ने भी मौके पर लोगों से नशे में वाहन न चलाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जश्न वही बेहतर है, जो खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।ग्वालियर की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सार्वजनिक जागरूकता का संदेश है। नए साल की सुबह दूध के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि जश्न और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। शहर की इस अनोखी शुरुआत ने साबित कर दिया कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है।