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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

     
    मध्य प्रदेश /मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एफ.आई.एच. हॉकी पुरुष जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय जूनियर हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने पर टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह उपलब्धि न केवल भारतीय हॉकी के लिए गौरवपूर्ण है बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपलब्धि ने दिखा दिया है कि समर्पण अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा -यह अभूतपूर्व उपलब्धि हमारे युवा खिलाड़ियों की मेहनत संघर्ष और टीम भावना का परिणाम है। जूनियर्स टीम ने हर मुकाबले में अपने कौशल और धैर्य का लोहा मनवाया और विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।-

    उन्होंने कहा कि यह पदक केवल एक जीत नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए नई प्रेरणा और उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे इसी उत्साह और मेहनत के साथ आगे बढ़ें और भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर और ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की उपलब्धियों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएँ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव सुनिश्चित करने में लगातार प्रयास कर रही है।एफ.आई.एच. जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय टीम ने कठिन मुकाबलों के बाद कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम ने सेमीफाइनल में चुनौतीपूर्ण मैचों का सामना किया और हार के बावजूद अपने आत्मविश्वास और सामूहिक रणनीति से कांस्य पदक जीतने में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि ने खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीम के प्रत्येक सदस्य का नाम लेते हुए उनके योगदान की सराहना की और कहा कि उनके खेल में अनुशासन और समर्पण ने ही टीम को इस सफलता तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि यह जीत भारतीय हॉकी के उज्जवल भविष्य की ओर संकेत करती है और आने वाले वर्षों में देश की हॉकी को और मजबूत बनाने में मदद करेगी। डॉ. यादव ने कहा कि सरकार खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केंद्र और अकादमिक कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके तहत खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाले कोचिंग आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में और अधिक युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस सफलता ने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है बल्कि पूरे देश में खेलों के प्रति उत्साह और विश्वास को भी बढ़ाया है। उन्होंने टीम के कोच और सपोर्ट स्टाफ को उनके समर्पण के लिए धन्यवाद दिया जिन्होंने खिलाड़ियों को हर स्थिति में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से कहाआपकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। यह दिखाती है कि मेहनत धैर्य और टीम भावना के साथ किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। हमें आप पर गर्व है और हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।-इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी और अन्य खेलों के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों की सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है और इसे राष्ट्रीय गौरव के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • Ind vs SA: दक्षिण अफ्रीका ने रचा इतिहास… भारत के खिलाफ जीत में ऑस्ट्रेलिया को पछाड़ बनी नंबर-1 टीम

    Ind vs SA: दक्षिण अफ्रीका ने रचा इतिहास… भारत के खिलाफ जीत में ऑस्ट्रेलिया को पछाड़ बनी नंबर-1 टीम

    नई दिल्ली। इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका (India vs South Africa) 5 मैच की टी20 सीरीज (T20 series) का दूसरा मुकाबला गुरुवार को न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविन्द्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, मुल्लांपुर में खेला गया था। इस मैच में मेहमान टीम ने जोरदार वापसी करते हुए भारत (India) को 51 रनों से धूल चटाई और सीरीज में 1-1 की बराबरी की। साउथ अफ्रीका (South Africa) की इस जीत के हीरो उनके सलामी बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक (Opening batsman Quinton de Kock) रहे, जिन्होंने 90 रनों की शानदार पारी खेल भारत के साथ 214 रनों का टारगेट रखने में अहम भूमिका निभाई। साउथ अफ्रीका के इस स्कोर के सामने टीम इंडिया पूरे 20 ओवर भी नहीं टिक पाई और 162 रनों पर ढेर हो गई। साउथ अफ्रीका ने भारत के खिलाफ इस जीत के साथ इतिहास रच दिया।

    साउथ अफ्रीका अब भारत के खिलाफ टी20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच जीतने वाली टीम बन गई है। जी हां, यह उनकी टी20 क्रिकेट में भारत के खिलाफ 13वीं जीत थी। भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा टी20 मैच जीतने वाली टीमों की इस लिस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों को पछड़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ अभी तक 12-12 मैच जीते हैं।


    T20I में भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत

    13 – साउथ अफ्रीका (33 मैच)*
    12 – ऑस्ट्रेलिया (37 मैच)
    12 – इंग्लैंड (29 मैच)
    10 – न्यूजीलैंड (25 मैच)
    10 – वेस्टइंडीज (30 मैच)


    5 ऐसे कप्तान जिनकी अगुवाई में भारत नहीं हारा एक भी T20I मैच, सहवाग भी लिस्ट में

    बात मैच की करें तो, सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था। उनके इस फैसले को क्विंटन डी कॉक ने पहले 6 ओवर में ही गलत साबित कर दिया था, जब साउथ अफ्रीका ने 1 विकेट के नुकसान पर 53 रन बोर्ड पर लगा दिए थे। डी कॉक 46 गेंदों पर 5 चौकों और 7 गगनचुंबी छक्कों के साथ 90 रनों की पारी खेल एक छोर से तबाही मचाते रहे, वहीं दूसरे छोर पर एडन मारक्रम (29), डोनोवन फरेरा (30) और डेविड मिलर (20) ने आकर छोटी मगर शानदार पारियां खेल उनका साथ दिया। साउथ अफ्रीका निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 213 रन बोर्ड पर लगाने में कामयाब रहा।

    214 के टारगेट का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत बेहद खराब रही। शुभमन गिल पहले ही ओवर में गोल्डन डक पर आउट हुए वहीं अभिषेक शर्मा भी उनके पीछे-पीछे 8 गेंदों पर 17 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वहीं कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी एक बार फिर निराश किया। पावरप्ले खत्म होने के बाद भारत का स्कोर 3 विकेट के नुकसान पर 51 रन था। नंबर-5 पर आए तिलक वर्मा ने जरूर एक छोर को संभालते हुए 34 गेंदों पर 2 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 62 रनों की पारी खेली, मगर उन्हें दूसरे छोर से किसी का साथ नहीं मिला। इस बार हार्दिक पांड्या भी अपना जलवा बिखेरने में नाकामयाब रहे। ओटनील बार्टमैन ने 4 विकेट के साथ साउथ अफ्रीका के स्टार बॉलर रहे। भारतीय टीम 19.1 ओवर में 162 के स्कोर पर सिमट गई।

  • भारत में 1.5 लाख करोड़ का निवेश करेगा माइक्रोसॉफ्ट, सत्य नडेला ने किया ऐलान

    भारत में 1.5 लाख करोड़ का निवेश करेगा माइक्रोसॉफ्ट, सत्य नडेला ने किया ऐलान


    नई दिल्ली।
    माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के सीईओ सत्य नडेला (CEO Satya Nadella) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के साथ अपनी मुलाकात के बाद भारत (India) के लिए बड़ा ऐलान किया है। सत्य नडेला ने कहा है कि टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट भारत में 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है, जो एशिया में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। सत्य नडेला के इस ऐलान से भारत के ‘AI ड्रीम’ को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

    सत्य नडेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस निवेश को लेकर जानकारी साझा की है। साथ ही उन्होंने PM मोदी के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की। सत्य नडेला ने लिखा, “भारत में AI के अवसरों पर प्रेरणादायक बातचीत के लिएधन्यवाद, PM नरेंद्र मोदी जी। देश की महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट 17.5 बिलियन डॉलर का निवेश करने जा रहा है।”

    सत्य नडेला ने बताया है कि यह कंपनी का एशिया में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने लिखा, “यह एशिया में हमारा अब तक का सबसे बड़ा निवेश है, जिससे भारत के AI फर्स्ट फ्यूचर के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा, कौशल और क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिल सके।”

    वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि भारत में माइक्रोसॉफ्ट का निवेश तीन स्तंभों पर केंद्रित है, जो प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप है। बयान के मुताबिक, “माइक्रोसॉफ्ट और साथ मिलकर आने वाले दशक में नए बेंचमार्क स्थापित करने और देश को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से AI पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर ले जाने के लिए तैयार हैं। हम एक ऐसे भविष्य को आकार दे रहे हैं जो ज्यादा न्यायसंगत है।” बयान में आगे कहा गया है, “भारत में माइक्रोसॉफ्ट का निवेश तीन स्तंभों, स्केल, स्किल और संप्रभुता, पर केंद्रित है, जो प्रधानमंत्री केविजन के अनुरूप है।”

  • सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में प्रतिदिन औसतन 485 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

    गडकरी ने कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में ‘स्टॉकहोम घोषणापत्र’ अपनाया गया था। इसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में सभी प्रकार की सड़कों पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी। इसमें ईडीएआर पोर्टल से प्राप्त पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस द्वारा कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हुई और 4,62,825 लोग घायल हुए।

    सड़क दुर्घटनाओं में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंताजनक बनी हुई है। ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024’ के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 है, अमेरिका में यह 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। यानी भारत का दर अमेरिका के बराबर करीब है और चीन से कई गुना अधिक।

    सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सरकार ने 4-‘ई’ रणनीति अपनाई है। इसका आधार चार स्तंभ हैं: एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की गुणवत्ता), एनफोर्समेंट (कानून का प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार)। इस बहुआयामी रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की गई हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने awareness कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। इंजीनियरिंग के तहत सड़कों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। एनफोर्समेंट के क्षेत्र में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, और इमरजेंसी केयर के तहत दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा को लेकर निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन सड़कों और क्षेत्रों में सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की यह पहल समय की मांग है, क्योंकि बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के कारण सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों को आधा करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी कदम है। इसके सफल होने के लिए जनता, सरकार और सड़क उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

    गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति ही सड़क दुर्घटनाओं की दर को घटा सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, हाईवे पर CCTV निगरानी, ट्रैफिक नियमों के कड़े प्रवर्तन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    सरकारी आंकड़े और वैश्विक तुलना यह दर्शाते हैं कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता की भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय से ही सड़क हादसों में मौत और चोटों को कम किया जा सकता है।

  • भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो

    भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो


    नई दिल्‍ली ।
    भारत से करोड़ों रुपए का गबन करके भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट ने झटका दिया है। कोर्ट ने माल्या की तरफ से फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट को दी गई चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस पर तभी कार्यवाही होगी, जब माल्या खुद भारत आकर कोर्ट में पेश होगा।

    मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकढ़ की खंडपीठ ने मामले को आगे बढ़ाते हुए 23 दिसंबर को फिर से सुनवाई की बात कही। पीठ ने माल्या के वकील से कहा,”पहले अपने मुवक्किल को कोर्ट में पेश कराइए, फिर इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। यह बताइए की वह कब तक भारत आएगा।”

    गौरतलब है कि नामी शराब कारोबारी और भारत के अरबपतियों में से एक विजय माल्या साल 2016 में देश छोड़कर भाग गया था। 2015 में ही सीबीआई ने माल्या के खिलाफ सिक्योरिटीज एवं फ्राड सेल के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें माल्या के ऊपर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और दुराचार का आरोप लगाया गया था। यह पूरा मामला 900 करोड़ रुपए के कर्ज से जुड़ा हुआ था, जिसे आईडीबीआई बैंक ने विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को दिया था। बाद में, एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के एक समूह ने माल्या के खिलाफ एक और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई।

    इसके बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस का चेयरमैन रहते हुए, लोन लेने के लिए कई फ्रॉड किए हैं। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    2018 में एफईओ एक्ट के लागू होने के बाद माल्या के खिलाफ इसी कानून के तहत कार्यवाही होनी शुरू हो गई। इसके विरोध में माल्या ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसकी सुनवाई जारी है। ईडी ने माल्या की इस याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि माल्या के भारत लौटे बिना उसे किसी भी तरह की सुरक्षा देना सही नहीं है। ईडी ने कहा कि विजय माल्या 2016 में जांच से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया, और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। नवंबर 2016 में उन्हें “घोषित अपराधी” घोषित किया गया। 2017 और 2018 में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ नए वारंट जारी किए, और उन्हें अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया, लेकिन माल्या भारत नहीं लौटे।

    2016 में इन केसों से बचने के लिए ब्रिटेन गए माल्या तब से वहीं भगोड़े के रूप में रह रहे हैं। हालांकि, जब भी उन्हें भारत वापस आने के लिए कहा गया, तब सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने इससे इनकार कर दिया। एक बार उन्होंने भारत आने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की मांग रखी थी, जिसे ईडी ने खारिज कर दिया था।

  • जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे

    जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे


    नई दिल्ली। बीते मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान झेलने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने हाल ही में संगठन की महिला विंग के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मसूद अजहर ने दावा किया है कि संगठन की महिला विंग में अब तक लगभग पांच हजार महिलाएं शामिल हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इन महिलाओं को कथित तौर पर आत्मघाती हमलों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    पिछले साल अक्टूबर में मसूद अजहर ने जैश की महिला ब्रिगेड की घोषणा की थी, जिसे जमात-उल-मोमिनात नाम दिया गया। इस महिला ब्रिगेड की जिम्मेदारी मसूद अजहर की बहन सईदा संभाल रही हैं। मसूद अजहर ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जमात-उल-मोमिनात का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और संगठन की रणनीति में इसका अहम स्थान है।

    मसूद अजहर ने बताया कि महिला विंग की गतिविधियों को और व्यवस्थित करने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर के विभिन्न जिलों में इसका विस्तार किया जा रहा है। उनका कहना है कि हर जिले में एक महिला प्रमुख, जिसे मुंतजिमा कहा जाएगा, नियुक्त की जाएगी। यह प्रमुख स्थानीय स्तर पर महिला विंग की गतिविधियों की निगरानी करेगी और भर्ती एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करेगी।

    महिला विंग की भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए संगठन ने ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। इसे ‘तुफात अल-मुमिनात’ नाम दिया गया है। इस ऑनलाइन कोर्स के तहत महिलाओं को जिहादी विचारधारा और फिदायीन हमलों के लिए मानसिक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। हर महिला के लिए इस कोर्स की फीस 500 रुपये रखी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चरमपंथी समूह महिलाओं का अकेले बाहर जाना मंजूर नहीं करते, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर महिलाओं की भर्ती और प्रशिक्षण कर रहा है। संगठन का उद्देश्य आईएसआईएस, हमास और लिट्टे जैसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संस्थाओं की तर्ज पर महिला आतंकी ब्रिगेड तैयार करना और उन्हें आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल करना है।

    मसूद अजहर के खुलासों से यह स्पष्ट होता है कि जैश-ए-मोहम्मद अपने संगठन को पुनः संगठित करने और महिला आतंकियों के माध्यम से नई रणनीतियों को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत महिलाओं को सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिला विंग की इस तरह की विस्तार योजना खतरे को और बढ़ा सकती है। महिलाओं के प्रशिक्षण और भर्ती के ऑनलाइन कार्यक्रम से संगठन न केवल अपनी पहुंच को बढ़ा रहा है, बल्कि उन्हें फिदायीन हमलों के लिए तैयार भी कर रहा है। यह कदम आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों के लिए नए खतरे पैदा कर सकता है।

    जैश-ए-मोहम्मद की इस नई रणनीति ने न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं कैसे आतंकवाद में शामिल हो रही हैं और उनका प्रशिक्षण किस हद तक जा रहा है।

    अंततः, मसूद अजहर द्वारा किए गए खुलासे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी महिला विंग के माध्यम से संगठन की ताकत बढ़ाने और नई रणनीतियों को लागू करने में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चुनौती पेश कर सकता है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतर्कता की आवश्यकता है।

  • भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन

    भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन


    नई दिल्ली।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच दो टूक कहा कि दुनिया का कोई भी देश भारत को आज से 77 साल पहले का हिन्दुस्तान समझने की भूल नहीं करे। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ आबादी वाले इस देश ने अतीत से सीख लेकर हर क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर कोई भी देश दबाव बनाकर अपनी बात नहीं मनवा सकता। राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी शर्तों पर किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाता है।

    एक इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया के सामने एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे और उस पर अमेरिका की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं कभी अपने सहयोगियों का चरित्र-चित्रण नहीं करता। उनका भी नहीं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया और खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों का तो बिलकुल नहीं।


    अमेरिका अब भी हमसे यूरेनियम खरीद रहा

    उन्होंने कहा कि मेरे विचार में ये आकलन उस देश के नागरिकों को करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है।लेकिन जहां तक भारत की ओर से रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद की बात है तो मैं साफ कर दूं कि अमेरिका अब भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे परमाणु ऊर्जा की खरीद करता है। इनमें अमेरिका में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम भी शामिल है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से यूरेनियम खरीद सकता है तो फिर भारत की खरीद को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की जरूरत है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा के लिए तैयार हैं।


    भारत यात्रा पर पहुंचे हैं पुतिन

    बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रणनीतिक और वाणिज्यिक समझौतों के लिए भारत यात्रा पर पहुंचे हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर भारत का दृष्टिकोण इन समझौतों से कहीं अलग और स्पष्ट है, जो मात्र औपचारिक कुटनीति से कहीं अधिक तेजी से खंडित होती वैश्विक व्यवस्था को बचाने से जुड़ा है। भारत के लिए रूस तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह वैश्विक स्तर पर टैरिफ की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है, कच्चे तेल का एक विश्वसनीय स्रोत है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत के पड़ोसी चीन को साधने में भूराजनैतिक कवच का काम करता है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा परिवर्तन
    पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के साथ अपनी बातचीत कर रहा है और यूरोप एक भयावह युद्ध से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं और यूक्रेन को थका देने वाला यह असमान युद्ध समाप्त हो जाता है, तो संभव है कि अमेरिका और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक नया दौर दुनिया के सामने आए। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत अपनी जरूरतों का केवल 2.5 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था लेकिन, प्रतिबंधों और यूरोपीय बाजारों द्वारा रूस के बहिष्कार के बाद भारत अपनी जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करने लगा है। इस प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।

  • पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…

    पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…


    नई दिल्ली।
    भारत दौरे (India Visit) पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अमेरिका (America) की नीतियों पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि अगर रूसी ईंधन (Russian fuel) अमेरिका (America) खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते भारत पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है।

    पुतिन ने कहा, ‘अमेरिका अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे न्यूक्लियर फ्यूल खरीदना जारी रखता है। वह भी तो ईंधन है। एनर्जी है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम है, जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका के पास हमसे फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो भारत को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जाना चाहिए। यह बहुत ही बारीकी से अध्ययन करने वाला मुद्दा है। हम राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और बहस करने के लिए तैयार हैं।’

    रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।’


    भारत की प्रगति से डरे देश
    पुतिन ने कहा कि कुछ वैश्विक ताकतें दुनिया के बाजारों में भारत की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिम की चिंताएं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ फैसला भारत के बढ़ते आर्थित प्रभाव के बारे में चिंता दिखाता है। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की बुनियाद लंबी है। उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ हमारे ऊर्जा सहयोग पर मौजूदा हालात, राजनीति या यूक्रेन में हो रही घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ा है।’ रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।’


    ट्रंप पर क्या बोले
    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।’ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में शायद सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है।

  • भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं

    भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं


    नई दिल्‍ली । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आ रहे हैं. अपने भारत दौरे के दौरान वो कई बड़े समझौते साइन कर सकते हैं. इसी बीच भारत पर अमेरिका की तरफ से लगाए टैरिफ को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं. यह बयान उन्होंने उस सवाल के जवाब में दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या अमेरिका भारत पर टैरिफ के जरिए दबाव डाल रहा है.

    पुतिन ने PM मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की
    पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस संबंधों के भविष्य के बारे में भी पूछा गया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की अडिग नीति देखी है और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए. पुतिन ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय लेन देन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं.

    मोदी से मित्रता और आगामी भारत दौरा
    पुतिन ने कहा कि उन्हें अपने मित्र, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए यात्रा करने में बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने अगली बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है.

    भारत-रूस सहयोग और ऐतिहासिक संबंध
    पुतिन ने कहा कि बहुत सारी बातें चर्चा के लिए हैं, क्योंकि भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा बहुत व्यापक है. उन्होंने दोनों देशों के बीच के विशिष्ट ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया. उन्होंने भारत की आजादी के बाद की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सिर्फ 77 साल के अल्प समय में, देश ने अद्भुत विकास हासिल किया है.

    बता दें कि पुतिन अब तक भारत के नौ दौरे कर चुके हैं, जिनमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018 और 2021) हुए. दिसंबर में यह उनका दसवां दौरा होगा. वहीं प्रधानमंत्री मोदी सात बार रूस जा चुके हैं.