Tag: India

  • LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज

    LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में एलपीजी (LPG) की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर है। ईरान युद्ध के बीच होर्मुज (Hormuz) से भारत के 9वें टैंकर को निकले की इजाजत मिल गई है। ‘ग्रीन आशा’ नाम का भारतीय झंडे वाला यह पोत बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इससे पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ को होर्मुज से निकलने की इजाजत मिली थी। इससे 46 हजार टन एलपीजी भारत पहुंच रही है। इससे कहा जा सकता है कि जल्द ही भारत में एलपीजी की किल्लत दूर होने वाली है।


    एक और एलपीजी टैंकर कर रहा इंतजार

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक और पोत ‘जग विक्रम’ अभी परमीशन का इंतजार कर रहा है। ये भी टैंकर होर्मुज से पहले ही रुककर इजाजत का इंतजार करते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इन्हें पास कराया जाता है। कच्चे तेल और एलपीजी वाले पोतों को प्राथमिकता दी जाती है। ईरान ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत के टैंकरों को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा अमेरिका और इजरायल का साथ देने वाले देशों के लिए होर्मुज बंद माना जाए।

    इससे पहले BW TYR टैंकर मुंबई पहुंचा है। शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज के पास अभी 16 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से पांच शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। ओमान की खाड़ी , अदन की खाड़ी और लाल सागर में भी कुछ भारतीय जहाज मौजूद हैं।


    खाड़ी में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक

    खाड़ी इलाकों में भारतीय नाविकों की संख्या भी काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में भारत के कम से कम 20 हजार 500 नाविक हैं। इनमें से 504 नाविक ही भारतीय शिप पर हैं। 3 अप्रैल को अलग-अलग शिपिंग कंपनियों द्वारा 1130 नाविकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ईरान की सरकार के साथ कूटनीतिक वार्ता भी कर रहा है। ईरान का भी रुख भारत के प्रति बेहद नरम है।

    डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि तेहरान में एक ‘भीषण हमले’ में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को ‘खत्म’ कर दिया गया है। उन्होने कहा कि अगर ईरान अब भी नहीं मानता है तो ऐसे अभियान चलते रहेंगे। उन्होंने कहा, “याद रखें जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था। अब समय खत्म हो रहा है-48 घंटे बचे हैं, इसके बाद उन पर चौतरफा आफत बरसेगी।”

  • पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें

    पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price Today) में आज फिर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर के रेट से बिक रहा है। वहीं, डीजल का रेट दिल्ली में आज शनिवार को 87.67 रुपये प्रति लीटर है। बता दें, दुनिया भर में इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में जारी तेजी की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, घरेलू स्तर पर भारत सरकार ने आम-आदमी को अबतक इससे बचा कर रखा है।


    पाकिस्तान में 458 रुपये प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल

    पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ाने की घोषणा की। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में क्रमश: 43 प्रतिशत और 55 प्रतिशत की भारी बढोतरी की है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये से 137.23 रुपये प्रति लीटर (करीब 42.7 प्रतिशत) बढ़ाकर 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। वहीं, हाई स्पीड डीजल की कीमत 335.86 रुपये से 184.49 रुपये प्रति लीटर (करीब 55 प्रतिशत) बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इसके साथ, केरोसिन तेल की कीमत भी 34.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 457.80 रुपये कर दी गई है।


    देश के अलग-अलग शहरों में किस रेट पर बिक रहा पेट्रोल (Petrol Rate)

    दिल्ली – 94.77 रुपये
    मुंबई – 104.21 रुपये
    कोलकाता – 103.94 रुपये
    चेन्नई – 100.75 रुपये
    अहमदाबाद – 94.49 रुपये
    बेंगलुरू – 102.92 रुपये
    हैदराबाद – 107.46 रुपये
    जयपुर – 104.72 रुपये
    लखनऊ – 94.69 रुपये
    पुणे – 104.04 रुपये
    चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
    इंदौर – 106.48 रुपये


    डीजल का क्या है अलग-अलग शहरों में रेट (Diesel Rate)

    मुंबई – 92.15 रुपये
    कोलकाता – 90.76 रुपये
    चेन्नई – 92.34 रुपये
    अहमदाबाद – 90.17 रुपये
    बेंगलुरू – 89.02 रुपये
    हैदराबाद – 95.70 रुपये
    जयपुर – 90.21 रुपये
    लखनऊ – 87.80 रुपये
    पुणे – 90.57 रुपये
    चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
    इंदौर – 91.88 रुपये
    पटना – 93.80 रुपये

    पिछले दिनों प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इंडियन ऑयल ने इजाफा किया था। जिसके बाद दिल्ली में XP100 पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल का रेट 91.49 रुपये से 92.99 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

  • भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद

    भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी आशंकाओं के बीच सरकार रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस बीच, सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल (Crude oil) की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार का दावा है कि करीब दो माह का कच्चा तेल मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत (India) के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है।

    उन्होंने कहा कि सभी घरों को ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक माह में तीन लाख 33 हजार पीएनजी कनेक्शन दिए गए। इनमें से दो लाख नब्बे हजार पीएनजी कनेक्शन घरेलू हैं। वहीं, करीब साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

    पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील पर 14 हजार चार सौ उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है। सुजाता शर्मा ने अपील करते हुए कहा कि पीएनजी कनेक्शन इस्तेमाल करने वाले दूसरे उपभोक्ता भी अपना एलपीजी कनेक्शन को वापस कर दे।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने व्यवसायिक गतिविधियों व औद्योगिक मांग को सुचारू बनाए रखने के लिए आठ राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के कोटे में दस फीसदी अतिरिक्त बढ़ोतरी की भी घोषणा की। सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार है।


    भारत समुद्र में प्रतिबंधों के खिलाफ

    होर्मुज जलमार्ग के मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा आहूत बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में बिना किसी रुकावट के आवागहन की नीति पर भारत का पक्ष रखा। भारत ने स्पष्ट तौर पर इस संकट से निकलने के लिए तनाव कम करने और कूटनीति रास्ता निकालने पर जोर दिया। ब्रिटेन द्वारा गुरुवार को बुलाई गई इस बैठक में 60 देशों ने हिस्सा लिया। बैठक वर्चुअल तरीके से हुई जिसमें होर्मुज को खोलने के लिए एक गठबंधन बनाने की दिशा में प्रगति होती हुई दिखी।

    विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बैठक को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि बैठक में विदेश सचिव मिसरी ने समुद्री परिवहन की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बिना किसी रुकावट के आने जाने के सिद्धांत के महत्व को रेखांकित किया।


    ईरान जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा

    बैठक में ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि हार्मुज को खोलने के लिए सैन्य आपरेशन के बजाय कूटनीतिक तरीके खोजने होंगे। बैठक को होर्मुज पोतों की सुरक्षित निकासी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की शुरुआती पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें 28 देशों के भाग लेने की उम्मीद थी लेकिन कहीं ज्यादा 48 देशों ने हिस्सा लिया है।

  • कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…

    कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…


    नई दिल्ली।
    ईरान और अमेरिका युद्ध (Iran and America war) के कारण आए ईंधन संकट (Fuel Crisis) का असर भारत के पड़ोसियों पर भी पड़ा है। खबर है कि श्रीलंका, नेपाल समेत कई देशों ने भारत से सप्लाई की गुहार लगाई है। वहीं, इनमें मालदीव (Maldives) भी शामिल है। खास बात है कि मालदीव सरकार कभी भारत के खिलाफ खुलकर बात कर रही थी। बहरहाल, भारत में इन अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में ईरान ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz.) से निकलने को लेकर भारत में हमारे दोस्तों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।


    किसने मांगा ईंधन

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल मालदीव भारत से ईंधन मांग रहा है। भारत अपने पड़ोसी देशों को लगातार ईंधन भेज रहा है। उन्होंने बताया कि भारत कॉमर्शियल समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की सप्लाई कर रहा है। खास बात है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है।


    मालदीव की मांग

    उन्होंने जानकारी दी कि मालदीव सरकार ने भी हमसे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई के लिए संपर्क किया है। मालदीव के इस अनुरोध पर हमारी अपनी उपलब्धता और हमारी अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है। विश्व बैंक के डाटा के अनुसार मालदीव आमतौर पर अपने ज्यादातर ईंधन की सप्लाई ओमान से लेता है।

    फिलहाल, मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू की सरकार है। वह चुनाव में जीतने से पहले ‘India Out’ का नारा लगा रहे थे। साथ ही उन्होंने भारतीय सैनिकों को वापस जाने के आदेश भी जारी कर दिए थे। हालांकि, अब मुइज्जू ने हाल में ही भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार करार दे दिया है। खबर है कि पर्यटन पर बड़े स्तर पर निर्भर देश उड़ानों पर पड़े प्रभाव के कारण भी मुश्किलों का सामना कर रहा है।


    बड़ी बैठक में शामिल हुआ भारत

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की आंशिक नाकेबंदी को लेकर भारत के रुख पर बात की। मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।

    विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया, ‘उन्होंने (मिसरी ने) इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।’ ईरान की तरफ से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलमार्ग को लगभग रोक दिए जाने के बाद वैश्विक तेल व गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

  • हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक

    हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में तनाव की वजह से लंबे समय बंद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने को लेकर गुरुवार को अहम बैठक हुई। ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक में भारत (India) समेत कई देशों को न्योता दिया गया था। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Foreign Secretary Vikram Misri) वर्चुअल मीटिंग में शामिल हुए। इस दौरान, भारत ने दो टूक कहा कि हम इकलौते देश हैं, जिसने अपने नाविक खोए हैं। भारत ने इस बैठक में होर्मुज को खोलने की वकालत की।

    मिसरी गुरुवार को ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अमेरिका को इस बैठक में शामिल नहीं होना था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, “ब्रिटेन ने होर्मुज पर बातचीत के लिए कई देशों को आमंत्रित किया था, जिसमें भारत भी शामिल है।”

    उन्होंने दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, मुक्त और खुले समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता है। जायसवाल ने कहा, “हम होर्मुज से सुरक्षित और मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने की मांग को प्राथमिकता के तौर पर लगातार उठाते रहे हैं।” ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक के नतीजों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस टीवी संबोधन के कुछ ही घंटों बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ अपने युद्ध के संदर्भ में कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा करना अन्य देशों की जिम्मेदारी है।

    इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई बैठक से तुरंत कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेट से भारत के जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता पक्का करना अभी भी एक पेचीदा मामला बना हुआ है, और यह पक्का करने के लिए कि जहाज बारूदी सुरंगों वाले इस जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सकें, ईरान की तरफ से करीबी तालमेल की जरूरत है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “जहां तक भारत की बात है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हम स्वतंत्र और खुले कमर्शियल शिपिंग के पक्ष में हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री सुरक्षा के पक्ष में हैं।” उन्होंने कहा, “हम प्राथमिकता के तौर पर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित करने की लगातार अपील कर रहे हैं।” ईरान द्वारा होर्मुज को लगभग बंद कर देने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा शिपिंग मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का परिवहन होता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

  • भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर

    भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर


    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में होने जा रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक कूटनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। खास बात यह है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक ही मंच पर बैठेंगे।
    यह बैठक 14 और 15 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता भारत करेगा।

    भारत ने इस बैठक के लिए रूस, ईरान, यूएई, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेजा है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर साबित हो सकती है, जहां टकराव की स्थिति में रहे देश भी एक साथ चर्चा करेंगे।

    ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। 2024 में इसका विस्तार कर मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें जुड़ गया।

    ब्रिक्स देशों की कुल आबादी करीब 3.9 अरब बताई जाती है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है।

    रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूसी मीडिया को बताया कि सर्गेई लावरोव बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आएंगे। इससे बैठक का महत्व और बढ़ गया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने भारत से अपील की है कि अध्यक्ष के तौर पर वह एक औपचारिक बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों की निंदा करे।

    हालांकि, समूह के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं और भारत के अमेरिका व इजरायल के साथ करीबी संबंधों को देखते हुए साझा रुख तैयार करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच एकमत होना आसान नहीं है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कुछ सदस्य सीधे इस संघर्ष से जुड़े हैं, जिसके कारण साझा बयान तैयार करना कठिन हो गया है।

    भारत फिलहाल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच संतुलन बनाते हुए किसी साझा रुख पर सहमति बनाई जाए।

  • फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी

    फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने सोमवार को एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि ऊर्जा उत्पादों से लदे और भारत (India) आ रहे 10 विदेशी झंडे वाले जहाज (10 Foreign-Flagged Ships) इस समय फारस की खाड़ी (Persian Gulf ) में फंसे हुए हैं। इसके अलावा, 18 भारतीय जहाज भी वर्तमान में इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। कुल मिलाकर 28 जहाजों पर संकट अभी भी मंडरा रहा है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात पर सवालों के जवाब देते हुए स्थिति को स्पष्ट किया।


    फंसे हुए विदेशी जहाजों की डिटेल

    विशेष सचिव ने बताया कि भारत आ रहे इन 10 विदेशी जहाजों में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पाद मौजूद हैं।
    3 जहाज: एलपीजी (LPG) से लदे हैं।
    4 जहाज: कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहे हैं।
    3 जहाज: एलएनजी (LNG) से भरे हुए हैं।

    इनके अलावा, भारतीय ध्वज वाले जहाज भी हैं। इनमें एलपीजी के तीन टैंकर, एक एलएनजी वाहक और कच्चे तेल के चार टैंकर शामिल हैं। एक खाली टैंकर में एलपीजी भरी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच संकरे जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 500 जहाजों में ये जहाज भी शामिल हैं। अब तक, भारतीय ध्वज वाले आठ जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज फंसे

    सिन्हा ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज हैं, जिनमें 485 नाविक सवार हैं। दो अन्य जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे हुए हैं। पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों में एलपीजी जहाज जग विक्रम, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी शामिल हैं। एक खाली जहाज में एलपीजी भरी जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों में एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद परिवहन करने वाला जहाज, तीन कंटेनर जहाज और दो ‘बल्क’ कैरियर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक जहाज ड्रेजर है और तीन जहाज नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं। जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा था, तब होर्मुज जलडमरूमध्य में मूल रूप से 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिनों में, पश्चिमी हिस्से से छह और पूर्वी हिस्से से दो जहाज सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में सफल रहे हैं।


    सरकार की प्राथमिकता

    राजेश सिन्हा ने जोर देकर कहा कि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय झंडे वाले जहाज जो भारत के लिए माल ला रहे हैं, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बिना किसी बाधा के गुजरने दिया जाए। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई ने जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को लगभग ठप कर दिया है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल और गैस के निर्यात का प्रमुख मार्ग है। हालांकि, ईरान ने पिछले सप्ताह कहा था कि ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद ‘गैर-शत्रु’ देशों के पोत जलमार्ग से गुजर सकते हैं।


    राहत की खबर: दो जहाज सुरक्षित निकले

    एक सकारात्मक अपडेट शेयर करते हुए बताया गया कि लगभग 94,000 टन रसोई गैस ले जाने वाले दो एलपीजी जहाजों ने शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। उम्मीद है कि ये दोनों जहाज अगले दो दिनों के भीतर मुंबई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट पर लंगर डालेंगे। इनमें दो एलपीजी वाहक पोत, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिनमें लगभग 94,000 टन एलपीजी का संयुक्त कार्गो है। ये पोत पिछले कुछ दिनों में युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    खाली जहाजों की वापसी पर स्थिति

    जब यह सवाल पूछा गया कि नए सिरे से माल लादने के लिए कितने खाली जहाजों को वापस फारस की खाड़ी भेजा जाएगा, तो सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात को देखते हुए खाली जहाजों को वापस भेजने का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने कहा- हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं जहां हम उन्हें (भारतीय झंडे वाले जहाजों को) वापस भेजना शुरू करें।


    बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी

    जहाजों के फंसे होने के अलावा, इस तनाव का सीधा असर व्यापारिक लागत पर भी पड़ रहा है। सिन्हा ने बताया कि खतरा केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आस-पास के बाहरी इलाके भी अब ‘हाई-रिस्क एरिया’ (HRA) की श्रेणी में आ गए हैं। युद्ध और तनाव से पहले कमर्शियल बीमा प्रीमियम बीमित राशि (Insured Value) का मात्र 0.04% हुआ करता था। लेकिन अब इसमें भारी वृद्धि हुई है। सिन्हा ने एक विशिष्ट मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि अब यह प्रीमियम बढ़कर बीमित राशि का 0.7% हो गया है, और आने वाले समय में इसके और भी अधिक बढ़ने की आशंका है।

  • पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताज़ा कड़ी में देशवासियों से जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और अब गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं और बारिश से पहले उनकी साफ-सफाई भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के गांवों में हुए प्रेरक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे प्रयास बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और वहां पहले पानी की कमी गंभीर समस्या थी। गर्मियों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। लेकिन गांववासियों ने मिलकर बारिश का पानी सहेजने का संकल्प लिया और अब लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित है। यह गांव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

    छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी किसानों ने छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी को खेतों में रोकने और धीरे-धीरे जमीन में जाने का असर सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपने क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में सफल रहे हैं। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों ने मिलकर अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का एक जन-आंदोलन खड़ा किया। इससे गांव का भूजल स्तर सुधरा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है।

    पीएम मोदी ने कहा कि जल संकट से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा और गांव-गांव में इस दिशा में किए गए छोटे प्रयासों को पूरे देश में प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के इलाकों में जल संचयन के उपाय अपनाएं और जल को बचाने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाएं।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 11 साल में जल संचय अभियान और अमृत सरोवर जैसी पहलें देशभर में व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। अब हर क्षेत्र में जल संरक्षण की नई मिसालें बन रही हैं और ये अनुभव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि जल हमारी जीवनधारा है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि जल संरक्षण के प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहें बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में भी इसका पालन किया जाए।

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में करीब एक महीने से भीषण संघर्ष जारी है। अमेरिका और इजरायल (America and Israel.) जैसे देश तेहरान पर रोज मिसाइल हमले कर रहे हैं। ईरान भी इसका माकूल जवाब दे रहा है। इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर दिखा है, जहां से कच्चे तेल के जहाज गुजरते हैं। भारत भी इसी रूट से खाड़ी देशों से तेल आयात करता है। पहले की तुलना में जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) शनिवार को जब उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर रहे थे तब उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई उथल-पुथल पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आखिर भारत में ईंधन की कीमतें कैसे स्थिर है।


    एथेनॉल मिश्रण से मिली राहत

    उन्होंने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण को एक अहम रणनीति बताया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति लागू नहीं होती तो भारत को हर साल अतिरिक्त 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता, जो करीब 700 करोड़ लीटर के बराबर है। उन्होंने किसानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से इस वैश्विक संकट के समय देश को बड़ी राहत मिली है।


    किसानों की भी बढ़ी आमदनी

    पीएम मोदी ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन ने न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की है। इस पहल के चलते भारत को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। जेवर क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक इलाकों के करीब है, जहां से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होता है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में दिए अपने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया था कि पिछले एक दशक में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भारत ने 2025 में ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पहले की उपलब्धि है।


    विद्युतीकरण से भी लाभ

    उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है, जबकि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत कम हुई है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें से 1,000 करोड़ लीटर से अधिक पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से जुड़े संघर्ष और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भारत सरकार ने ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि आम जनता पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने कहा, “हम भी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से ईंधन आयात करते हैं। हर देश इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठा रहा है और हम भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।” आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इसका सीधा असर देखने को नहीं मिला है।

    प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील समय में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से बचें।

  • सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान

    सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान


    शाजापुर । मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं और ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है जहां तेज रफ्तार का कहर एक और जान ले गया। सुसनेर से कुरावर जा रही एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे मौके पर अफरा तफरी और चीख पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार यह बस सुसनेर से कुरावर की ओर जा रही थी तभी बड़ागांव के पास चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख पुकार मच गई और कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।

    घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नलखेड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस उसकी शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बस की तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है हालांकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि यातायात नियमों का पालन और वाहनों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खासकर निजी बसों में ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं।

    जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लोगों में भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल इस दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है और लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।