निवेश का तरीका और प्रक्रिया
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नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पर फिक्स्ड रिटर्न और टैक्स छूट निवेश करने का बेहतरीन अवसर
नई दिल्ली । भारत सरकार की एक प्रमुख बचत योजना नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट भारतीय निवेशकों के लिए एक सुरक्षित निवेश विकल्प साबित हो रही है। इस स्कीम पर मिलने वाली ब्याज दर 7.7% सालाना है जो आपके निवेश पर अच्छा रिटर्न देती है। एनएससी की विशेष बात यह है कि इसका ब्याज हर साल कंपाउंड होता है और भुगतान पूरी तरह से मेच्योरिटी 5 साल के बाद ही किया जाता है।कंपाउंडिंग इंटरेस्ट से मिलने वाला फिक्स्ड रिटर्नएनएससी पर रिटर्न कंपाउंडिंग इंटरेस्ट फ़ॉर्मूला से कैलकुलेट किया जाता है। अगर आप ₹250000 का निवेश करते हैं तो पांच साल के बाद आपको ₹116062 का फिक्स रिटर्न मिलेगा। इसका मतलब है कि आपके ₹250000 निवेश के ऊपर 5 साल बाद ₹366062 तैयार होंगे। यह निवेश आपके भविष्य के लिए एक सुरक्षित और स्थिर विकल्प हो सकता है खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी बचत को सुरक्षित रखना चाहते हैं।टैक्स छूट का लाभएनएससी में निवेश करने पर आपको ₹1.5 लाख तक के निवेश पर 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि एनएससी पर मिलने वाला ब्याज आखिरी वर्ष तक टैक्स फ्री होता है इसके बाद उस पर टैक्स लगाया जाता है। इस तरह एनएससी निवेशकों को टैक्स छूट के रूप में अतिरिक्त लाभ देता है।कौन कर सकता है निवेशएनएससी स्कीम में कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। हालांकि नॉन-रेजिडेंट इंडियन्स एनआरआई इस स्कीम में निवेश नहीं कर सकते। यदि कोई निवासी भविष्य में एनआरआई बन जाता है तो वह अपने एनएससी निवेश को परिपक्वता तक रख सकता है। वयस्क नाबालिग और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के अभिभावक भी इस योजना में निवेश कर सकते हैं। 10 वर्ष से ऊपर के नाबालिग भी एनएससी में निवेश कर सकते हैं।
निवेश का तरीका और प्रक्रियाएनएससी में निवेश करने के लिए आपको नजदीकी डाकघर में जाकर आवेदन करना होगा। यहां आपको एक फॉर्म भरने के बाद अपनी पहचान पते और अन्य जरूरी दस्तावेज़ों की जानकारी देनी होगी। एनएससी पर निवेश करने की कोई भी अधिकतम सीमा नहीं है लेकिन आपको टैक्स लाभ 80C के तहत ₹1.5 लाख तक ही मिलेगा।नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट एक बेहतरीन निवेश विकल्प है जो आपको टैक्स लाभ सुरक्षित रिटर्न और कंपाउंडिंग इंटरेस्ट प्रदान करता है। यदि आप एक स्थिर और जोखिम-मुक्त निवेश की तलाश में हैं तो एनएससी एक आदर्श विकल्प हो सकता है। इसके साथ ही आप अपनी बचत को भी सुरक्षित रख सकते हैं और अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। -

जम्मू-कश्मीर को लेकर ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन का बड़ा बयान, PoK समेत पूरा..भारत के साथ होना चाहिए
नई दिल्ली। ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला PoK भी शामिल है, भारत का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। ब्लैकमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने की उनकी मांग नई नहीं है, बल्कि यह तीन दशक से अधिक पुरानी है। उनका रुख 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के फैसले से प्रेरित नहीं है, बल्कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद से उन्होंने इसे अपनाया था।जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित एक हाई-टी कार्यक्रम में बोलते हुए ब्लैकमैन ने कहा कि उनका यह दृष्टिकोण 1992 में बन गया था, जब कश्मीरी पंडितों को उनके पैतृक घरों से बाहर निकाल दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने ब्रिटेन में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्याय पर ध्यान आकर्षित करने के लिए कई प्रयास किए थे। ब्लैकमैन ने कहा, “हमने उस समय एक बड़ी बैठक आयोजित की थी ताकि यह बताया जा सके कि धर्म के आधार पर लोगों को उनके घरों से निकालना एक गंभीर अन्याय है।मैं हमेशा से मानता आया हूं कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत के शासन के तहत ही सुरक्षित और स्थिर रहेगा।”बॉब ब्लैकमैन ने इस क्षेत्र में आतंकवाद की लगातार निंदा की है और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले हिस्सों की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि पूरे जम्मू और कश्मीर रियासत को भारत के शासन में शामिल किया जाना चाहिए। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रोकना चाहिए।”
उन्होंने पहलागाम में हुए आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। ब्लैकमैन ने कहा कि ब्रिटेन की सरकार को आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
उनका मानना है कि भारत और पश्चिमी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रह सके।इससे पहले, जून में ऑपरेशन सिंदूर ग्लोबल आउटरीच के दौरान ब्लैकमैन ने पाकिस्तान को “नाकाम देश” करार दिया और वहां के नागरिक-सैन्य संतुलन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान के लोकतांत्रिक संस्थान कार्यरत हैं या सेना के जनरल शासन कर रहे हैं।
ब्लैकमैन ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भारत के साथ एकजुट होना अनिवार्य है।ब्लैकमैन का यह बयान दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का रुख जम्मू-कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दों पर मजबूत समर्थन पा रहा है। उनका यह दृष्टिकोण केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि मानवाधिकार और शांति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ जोड़ना न केवल न्यायसंगत है, बल्कि यह क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक जरूरी कदम भी है।
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भारत ने महिला T-20I में तीसरी बार किया क्लीन स्वीप…कप्तान ने कहा- बहुत अच्छा रहा साल 2025
नई दिल्ली। हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) की अगुवाई वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian women’s cricket team) ने श्रीलंका (Sri Lanka) का पांच मैचों की घरेलू टी20 सीरीज (India Women vs Sri Lanka Women) में क्लीन स्वीप किया। भारत ने तिरुवनंतपुरम में 175/7 का स्कोर बनाने के बाद श्रीलंका से आखिरी मैच 15 रनों से जीता। हरमनप्रीत ने 43 गेंदों में 9 चौकों और एक छक्के की मदद से 68 रनों की पारी खेली। वह प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं। महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 जीतने के बाद हरमन ब्रिगेड की यह पहली सीरीज थी। भारतीय कप्तान ने वनडे से टी20 मोड में शिफ्ट करने की सच्चाई से मुंह नहीं फेरा। भारत ने महिला टी20 इंटरनेशनल में तीसरी बार 5-0 से सीरीज अपने नाम की है। भारत ने इससे पहले 2019 में वेस्टइंडीज और 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ ऐसा किया था। वहीं, श्रीलंका टीम ने चार बार पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली और पहली बार 5-0 से हार झेली।
‘साल 2025 हमारे लिए बहुत अच्छा रहा’
श्रीलंका का सूपड़ा साफ करने के बाद हरमनप्रीत ने कहा, ”2025 हमारे लिए वाकई बहुत अच्छा रहा। हमें कड़ी मेहनत का परिणाम मिला। मुझे लगता है कि अब इन अच्छी आदतों को दोहराते रहना है। इस साल हमने जैसा किया, वैसा ही जीतते रहना है।” जब हरमनप्रीत से पूछा गया कि क्या वनडे वर्ल्ड कप जीतने के बाद सोच में बदलाव करना आसान था तो उन्होंने कहा, ”हम सबने एकसाथ काफी टी20 क्रिकेट खेला है और सभी को खुद पर विश्वास था कि हम यह कर सकते हैं। हर कोई बहुत सकारात्मक था और सच में खुश थे कि एकजुटता के साथ खेले। हम अपने लिए स्टैंडर्ड सेट करना चाहते थे। आगे बढ़ते हुए हम इस सीरीज को देख सकते हैं, सोच सकते हैं कि हमने क्या किया और हम भविष्य में क्या कर सकते हैं।”
‘टी20 मोड में शिफ्ट करना आसान नहीं था’
36 वर्षीय भारतीय कप्तान ने एक बैटर और लीडर के तौर पर अपने बारे में कहा, ”बतौर बल्लेबाज यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं टीम की बैटिंग लाइनअप को मजबूती दूं। मैं हमेशा टीम की जरूरत के मुताबिक योगदान देना चाहती हूं। बतौर कप्तान जिस तरह से हमने यह सीरीज खेली, उससे मैं वाकई में खुश हूं। वनडे क्रिकेट के बाद टी20 मोड में शिफ्ट करना आसान नहीं था, लेकिन सभी बहुत पॉजिटिव थे। वर्ल्ड कप के बाद यह सीरीज खेलने के लिए हर कोई उत्साहित था। चीजें जिस तरह से रही, उससे काफी खुश हूं। हमने जद्दोजहद की और अपना शत प्रतिशत दिया।”
‘उम्मीद है कि जिस तरह से वनडे क्रिकेट…’
अगले सात महीनों में बहुत सारा टी20 क्रिकेट खेला जाना है। हरमनप्रीत ने कहा, ”बिल्कुल। यह सीरीज हमारे लिए बहुत अहम थी। इसलिए हम चाहते थे कि सभी उपलब्ध रहें ताकि बाद में हम देख सकें कि चीजें हमारे लिए कैसी चल रही हैं। अब महिला प्रीमियर ली (WPL) होगा। सभी फिर से टी20 मोड में होंगे। उम्मीद है कि हम सभी अपना बेस्ट क्रिकेट खेलेंगे और लुत्फ उठाएंगे। अगले छह महीने हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। हम बस कड़ी मेहनत करते रहना चाहते हैं। उम्मीद है कि जिस तरह से वनडे क्रिकेट में चीजें हमारे लिए अच्छी रहीं, उसी तरह टी20 में भी चीजें अच्छी रहेंगी।” -

यशस्वी जायसवाल फॉर्म और किस्मत का सही संयोजन जरूरी
नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे यशस्वी जायसवाल ने खुद को एक शानदार बल्लेबाज के रूप में साबित किया है जो तीनों फॉर्मेट में शतक लगा चुका है। उनकी क्षमता किसी भी क्रिकेट फॉर्मेट में खेलने और प्रदर्शन करने की है लेकिन फिर भी उन्हें अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 24 साल के यशस्वी जायसवाल का जन्म 28 दिसंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में हुआ था। मुंबई में अपने परिवार के साथ बसीं जायसवाल ने यहां क्रिकेट में अपना करियर बनाने का सपना देखा और बेहद कठिन आर्थिक हालातों के बावजूद उन्होंने संघर्ष करके खुद को एक अच्छे बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया।घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 14 जुलाई 2023 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने उसी साल टी20 डेब्यू किया और 2025 में वनडे डेब्यू किया। जायसवाल ने अब तक तीनों फॉर्मेट में खुद को एक विस्फोटक और भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज के रूप में साबित किया है। वह उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में शतक लगाया है। हालांकि इसके बावजूद वनडे और टी20 में उनकी जगह अभी तक स्थिर नहीं हो पाई है।किस्मत का साथ जरूरी है
क्रिकेट में फॉर्म के साथ-साथ किस्मत का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। यशस्वी जायसवाल के पास फॉर्म तो है लेकिन उनकी किस्मत उनके साथ उतनी मेहरबान नहीं है जितनी होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर 2024 में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए उनका चयन तो किया गया था लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वहीं 2026 के टी20 विश्व कप के लिए उन्हें टीम में जगह नहीं मिली जो उनके लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।वनडे में भी जायसवाल को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गिल की चोट के कारण मौका मिला था और उन्होंने आखिरी वनडे मैच में शतक भी लगाया। हालांकि गिल की वापसी के बाद यह देखना होगा कि उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं।टेस्ट क्रिकेट में सफलता
टेस्ट क्रिकेट में जायसवाल का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। डेब्यू के बाद से ही उन्हें लगातार मौके मिलते रहे हैं और उन्होंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी चुनौतीपूर्ण पिचों पर भी रन बनाए हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी सफलता ने उन्हें भारतीय टीम में एक महत्वपूर्ण सदस्य बना दिया है।आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। वह राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं और वहां भी उन्होंने अपने आक्रामक खेल से अपनी पहचान बनाई है। आईपीएल में उनका रन-स्कोरिंग फॉर्म जबरदस्त रहा है जिससे उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता है।जायसवाल के आंकड़े
यशस्वी जायसवाल ने अब तक 28 टेस्ट मैचों में 7 शतकों के साथ 2511 रन बनाए हैं। वहीं 4 वनडे मैचों में 1 शतक के साथ 171 रन और 23 टी20 मैचों में 1 शतक और 5 अर्धशतकों के साथ 723 रन उनके नाम पर दर्ज हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि वह किसी भी फॉर्मेट में लगातार प्रदर्शन कर सकते हैं और भविष्य में भारतीय टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।भविष्य की उम्मीदें
यद्यपि यशस्वी जायसवाल को फिलहाल लगातार खेलने का मौका नहीं मिल रहा है लेकिन उनका भविष्य बेहद उज्जवल दिखता है। क्रिकेट में फॉर्म और किस्मत दोनों का साथ होना जरूरी होता है और जायसवाल के मामले में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे आने वाले समय में उन्हें और अधिक मौके मिलते हैं या नहीं। यशस्वी जायसवाल का क्रिकेट करियर अब तक शानदार रहा है और उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि वह भविष्य में तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर मैदान में अपना जलवा दिखाते रहेंगे। -

14 जनवरी 2026मकर संक्रांति के साथ कई बड़े त्योहारों का महासंयोग जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
नई दिल्ली । 14 जनवरी 2026मकर संक्रांति और अन्य प्रमुख त्योहारों का महासंयोग 14 जनवरी 2026 एक विशेष दिन साबित होने वाला है क्योंकि इस दिन न केवल मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी एक साथ पड़ रहे हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और साथ ही षटतिला एकादशी पोंगल और माघ बिहू जैसे प्रमुख त्योहारों का संगम भी होगा।
मकर संक्रांति का महत्व और शुभ मुहूर्तमकर संक्रांति का पर्व खासतौर पर सूर्य देव की पूजा दान और पुण्य के लिए प्रसिद्ध है। 14 जनवरी 2026 को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और यह दिन विशेष रूप से स्नान दान और पूजा के लिए उत्तम रहेगा। दान और पुण्य का समयदोपहर 0307 बजे से शाम 0602 बजे तक रहेगा।
शुभ कार्यइस अवधि में तिल गुड़ अन्न और वस्त्र दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना तिल और गुड़ का दान करना तथा पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।षटतिला एकादशी
माघ माह के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी 14 जनवरी को पड़ रही है जो भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन विशेष रूप से तिल का सेवन और तिल से संबंधित धार्मिक कार्य जैसे तिल का उबटन स्नान हवन और दान का महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और यह संयोग मकर संक्रांति के साथ बहुत लाभकारी माना जाता है।
पोंगल और माघ बिहू
14 जनवरी से पोंगल और माघ बिहू जैसे कृषि पर्वों का भी आरंभ होगा। ये पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। पोंगल तमिलनाडु यह चार दिनों तक चलने वाला एक प्रमुख कृषि पर्व है जिसमें सूर्य देव और इंद्र देव की पूजा की जाती है।माघ बिहू असम असम में यह पर्व अग्नि देव की पूजा और नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है।
इस महासंयोग पर क्या करें
इस दिन के धार्मिक महत्व को देखते हुए इन कार्यों को करना विशेष लाभकारी माना जाता हैमहा-दानतिल गुड़ खिचड़ी अन्न और गर्म कपड़ों का दान करें। यह आपके पुण्य को बढ़ाता है और पुराने पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।पवित्र स्नान गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करें। तर्पणपितरों की शांति के लिए तिल से तर्पण करना भी अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। यह आपके परिवार के लिए आशीर्वाद का कारण बनता है। -

गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली । पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखाश्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र प्रकाश उत्सव पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे साहस करुणा और बलिदान की मूर्ति हैं। उनका जीवन और शिक्षाएं हमें सच्चाई न्याय धर्म के लिए खड़े होने और मानवीय गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का विजन पीढ़ियों को सेवा और निस्वार्थ कर्तव्य के लिए मार्गदर्शन करता रहता है।उन्होंने इस साल की शुरुआत में तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की अपनी यात्रा की कुछ यादगार तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री को गुरुद्वारे में प्रार्थना करते जोड़ा साहिब के दर्शन करते और सेवादारों के साथ लंगर परोसते हुए देखा जा सकता है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखाअन्याय और दमन के विरुद्ध चेतना जागृत करने वाले खालसा पंथ के संस्थापक सरबंस दानी साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने आगे लिखागुरु साहिब का जीवन शौर्य त्याग और आध्यात्मिक उत्कर्ष का अद्वितीय समन्वय है। उन्होंने मानवता को यह संदेश दिया कि धर्म सत्य और मर्यादा की रक्षा हेतु सर्वस्व का समर्पण ही सर्वोच्च मानवीय कर्तव्य है। उनके आदर्श बलिदान और महान गुरु परंपरा के प्रति उनकी अडिग निष्ठा युगों-युगों तक समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करती रहेगी।सीएम रेखा गुप्ता ने दशम गुरु के चरणों के नमन करते हुए लिखाउनके सत्य सेवा और बलिदान के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। पटना साहिब वह पवित्र स्थल है जहां 1666 में गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो साहस समानता और न्याय का प्रतीक बना। मुगल अत्याचारों के खिलाफ उन्होंने योद्धा बनकर संघर्ष किया और पांच प्यारों को अमृत छकाकर खालसा का जन्म दिया।
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पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध
वाशिंगटन। भारत (India) और अमेरिका (America) के रिश्ते पिछले 6 महीनों से लगातार खराब स्थिति में हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत ने खुले तौर पर अमेरिकी बयानों का विरोध किया, जिसके परिणाम स्वरूप ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने पाकिस्तान (Pakistan) के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाते हुए भारत पर आर्थिक हमला करने की कोशिश की। राष्ट्रपति ट्रंप की इस नीति का अमेरिका में ही कई लोगों ने विरोध किया, यहां तक कि उनके सहयोगियों ने भी भारत को लेकर अपनाई जा रही इस नीति का विरोध ही किया। अब अमेरिकी वैश्विक मामलों के जानकार, लेखक और प्रोफेसर फ्रांसिस फुकुयामा ने ट्रंप की इस नीति को लेकर उन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपने निजी व्यवहार के लिए अमेरिका के हितों को दरकिनार कर दिया।एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर बात करते हुए प्रोफेसर ने कहा कि उनकी वैश्विक नीति क्या है इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “ट्रंप की वैश्विक नीति निजी लाभ पर आधारित है। उदाहरण के लिए पिछले 20 से 30 वर्षों में अमेरिका में किसी की भी सरकार रही हो, वह भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करती रही है। क्योंकि हम दक्षिण एशिया में चीन को काउंटर करना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों को केवल इसलिए खराब कर दिया क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन नहीं किया था।”
प्रोफेसर ने कहा, “ट्रंप के इस फैसले से आप पूरी तरह से समझ सकते हैं कि कैसे उन्होंने अपने निजी लाभ के लिए अमेरिकी हितों को अलग रख दिया। ऐसे में अगर कोई यह सोच रहा है कि ट्रंप प्रशासन की कोई वैश्विक नीति होगी, तो वह परेशान ही होगा।”
आपको बता दें, इस साल जनवरी में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आए थे, तो भारत में लोगों की राय यह थी कि भारत और अमेरिका के रिश्ते सही होंगे। ट्रंप और पीएम मोदी की निजी दोस्ती दोनों देशों के बीच में मजबूत साझेदारी का आधार बनेगी। शुरुआती समय में ऐसा दिखा भी। लेकिन मई के महीने में सबकुछ बदल गया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप टीम का बयान दोस्ती वाला नहीं था। भारत सरकार के ऐलान करने से पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए सीजफायर का ऐलान कर दिया। यह भारत सरकार के लिए असहज करने वाली स्थिति थी। इसके बाद ट्रंप लगातार इस बात को कहते रहे कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने सीजफायर करवाया है, जबकि भारत ने शुरुआत से ही इस बात को कहा कि सीजफायर के लिए पाकिस्तानी डीजीएमओ की तरफ से फोन आया था इसके बाद यह हुआ।
दोनों देशों के बीच बिगड़ती इस परिस्थिति का पाकिस्तान ने बड़ी अच्छी तरह से फायदा उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुले तौर पर इस सीजफायर के लिए ट्रंप को धन्यवाद किया और लगे हाथ उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन भी दे दिया। इस पूरे वाकये के बाद भारत और अमेरिका के संबंध लगातार गिरावट की तरफ जाने लगे। अमेरिका ने भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी की जाने लगी। भारत ने भी अपनी स्थिति को साफ किया और ट्रंप या अमेरिका के आगे किसी भी तरीके से झुकने से इनकार कर दिया।
दरअसल, कश्मीर और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय स्थिति पर भारत की स्थिति दशकों से साफ रही है कि भारत इसमें किसी भी तीसरे देश का दखल नहीं चाहता है। शिमला समझौते के तहत पाकिस्तान भी इस पर राजी है, लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही इस मुद्दे में तीसरे देश को शामिल करने के लिए तैयार रहता है। ऐसे में अगर पीएम मोदी नोबेल के लिए ट्रंप को समर्थन देते तो यह भारत की साख के लिए सही नहीं होता और न ही भारत के स्टैंड के मुताबिक होता।
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स्विट्जरलैंड भी लगेगा फीका! भारत के इन 5 रेलवे रूट्स पर दिखती है 'जन्नत' खिड़की से दिखेंगी बर्फीली वादियों का नजारा
नई दिल्ली । भारत में ट्रेन यात्राओं का अपना ही एक जादू हैपहियों की लयबद्ध खड़खड़ाहट खिड़की के बाहर लगातार बदलते नज़ारे और हर मील के साथ रोमांच का बढ़ता एहसास. विस्टाडोम कोच इस अनुभव को एक नए लेवल पर ले जाते हैं. घूमने वाली रिक्लाइनिंग सीटों कांच की छतों और बड़ी पैनोरमिक खिड़कियों के साथ ये कोच यात्रियों को प्रकृति की भव्यता में डूबने का मौका देते हैं. बर्फ से ढके पहाड़ों से लेकर हरी-भरी घाटियों और झरनों तक यहां भारत भर के कुछ सबसे खूबसूरत विस्टाडोम ट्रेन रूट दिए गए हैं. आइए जानते इन 5 रेलवे रूट्स के बारे में विस्तार से ।.
जम्मू और कश्मीर विस्टाडोम स्पेशल कोच बडगाम से बनिहाल तक की यह 90 किलोमीटर की यात्रा यात्रियों को कश्मीर घाटी की लुभावनी सुंदरता में डुबो देती है. श्रीनगर अवंतीपोरा अनंतनाग और काजीगुंड से गुज़रते हुए ट्रेन बर्फ से ढकी चोटियों चमकती धाराओं और हरे-भरे घास के मैदानों के मनोरम दृश्य दिखाती है. 2023 में लॉन्च किया गया यह कांच की छत वाला कोच यात्रियों को प्रकृति का एक अभिन्न हिस्सा होने का एहसास कराता है जिससे यात्रा उतनी ही मनमोहक हो जाती है जितनी कि मंज़िल ।डूअर्स न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस यह ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी से अलीपुरद्वार जंक्शन तक 169 किलोमीटर की दूरी तय करती है और पश्चिम बंगाल के डूअर्स इलाके से गुज़रती है. खिड़कियों के बाहर घने जंगल फैले हुए चाय के बागान और पूर्वी हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं. वन्यजीवों को देखने से अनुभव और भी बेहतर हो जाता है और यह यात्रा भूटान का रास्ता जैसी लगती है. विस्टाडोम कोच हर मोड़ पर एक नया मनमोहक नज़ारा दिखाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं ।हिमाचल प्रदेश कालका-शिमला NG एक्सप्रेस यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट कालका-शिमला लाइन इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता का एक शानदार उदाहरण है. 90 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी में ट्रेन 103 सुरंगों 800 पुलों और लगभग हज़ार मोड़ों से गुज़रती है. चीड़ के जंगल गहरी घाटियाँ और शानदार पहाड़ों के नज़ारे पूरे रास्ते की शोभा बढ़ाते हैं. विस्टाडोम कोच की चौड़ी कांच की छत और खिड़कियाँ इस ऐतिहासिक यात्रा को हिमाचली पहाड़ियों का एक शानदार पैनोरमिक अनुभव बना देती हैंगुजरात अहमदाबाद-केवडिया जन शताब्दी एक्सप्रेस यह रूट अहमदाबाद को एकता नगर से जोड़ता है जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का गेटवे है. यात्री नर्मदा नदी और आसपास के नज़ारों का शानदार व्यू देख सकते हैं. विस्टाडोम कोच इस अनुभव को और भी खास बनाते हैं जिससे एक आम ट्रेन यात्रा एक खूबसूरत एडवेंचर में बदल जाती है. भारत की सबसे ऊंची मूर्ति देखने जाने वालों के लिए यह यात्रा अपने आप में एक बड़ा आकर्षण बन जाती है ।असम न्यू हाफलोंग स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन गुवाहाटी से न्यू हाफलोंग तक की यह 269 किलोमीटर की यात्रा असम की प्राकृतिक सुंदरता के शानदार नज़ारे दिखाती है. पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों को घुमावदार पहाड़ियाँ हरी-भरी घाटियाँ और शांत नदियाँ देखने को मिलती हैं. माइबोंग में रुकने से यात्रा में सांस्कृतिक अनुभव जुड़ जाता है जबकि विस्टाडोम कोच की बड़ी खिड़कियाँ इस क्षेत्र की अनछुई सुंदरता को दिखाती हैं. यह सिर्फ़ यात्रा का एक ज़रिया नहीं है; यह नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के नज़ारों का एक चलता-फिरता कैनवस है । -

भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयास…. यूनुस सरकार ने 50000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh) की अंतरिम सरकार (Interim Government) के वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद (Finance Advisor Salehuddin Ahmed) ने मंगलवार को कहा कि मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को आसान बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन आर्थिक हितों को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखते हुए भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।अहमद ने यह टिप्पणी अपने कार्यालय में सरकारी खरीद से जुड़े सलाहकार परिषद समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में की। उन्होंने कहा कि मुख्य सलाहकार भारत के साथ राजनयिक रिश्तों में सुधार के लिए विभिन्न हितधारकों से संवाद कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या यूनुस ने सीधे भारत से बात की है, तो अहमद ने कहा कि मुख्य सलाहकार ने सीधे तौर पर नहीं, लेकिन इस मसले से जुड़े लोगों से बातचीत जरूर की है।
वित्त सलाहकार ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश की व्यापार नीति राजनीतिक कारणों से संचालित नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भारत से चावल आयात करना वियतनाम या अन्य देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है, तो आर्थिक दृष्टि से भारत से ही खरीदना उचित है। अहमद ने बताया कि भारत के बजाय वियतनाम से चावल मंगाने पर प्रति किलोग्राम लगभग 10 टका (0.082 अमेरिकी डॉलर) अधिक खर्च आता है।
इस बीच, बांग्लादेश सरकार ने मंगलवार को भारत से 50,000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अहमद ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों की दिशा में भी मददगार साबित हो सकता है, साथ ही इससे बांग्लादेश को आर्थिक लाभ भी होगा।
अहमद की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंध 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है और दोनों राजधानियों समेत विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं।
हालांकि, वित्त सलाहकार ने इन आकलनों से आंशिक रूप से असहमति जताई। उन्होंने कहा- स्थिति इतनी खराब नहीं हुई है। उनके अनुसार, बाहरी तौर पर भले ही ऐसा लगे कि कई तरह की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन कुछ बयान ऐसे होते हैं जिन्हें पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।
जब उनसे पूछा गया कि क्या लोग या बाहरी ताकतें भारत विरोधी बयान दे रही हैं, तो अहमद ने कहा कि बांग्लादेश किसी भी तरह की कड़वाहट नहीं चाहता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई बाहरी तत्व दोनों देशों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश कर रहा है, तो यह किसी के भी हित में नहीं है।
अहमद ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान या घटनाएं राष्ट्रीय अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि वे बांग्लादेश के लिए अनावश्यक रूप से जटिल हालात पैदा करती हैं। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य व्यावहारिक और आर्थिक तर्कों के आधार पर फैसले लेना और पड़ोसी देशों के साथ स्थिर तथा सहयोगपूर्ण रिश्ते बनाए रखना है।
बहरहाल, बांग्लादेश सरकार के इस रुख से संकेत मिलता है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देते हुए भारत के साथ संबंधों में सुधार की राह तलाश रही है, भले ही राजनीतिक बयानबाजी और कूटनीतिक तनावों की चुनौतियां बनी हुई हों।
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भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार
नई दिल्ली । 2025 का वर्ष वैश्विक व्यापार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हुआ खासकर भारत के लिए जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट नीति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए भारत पर 50% आयात शुल्क लगा दिए। इस टैरिफ ने भारत के निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था। खासकर कपड़ा रत्न-आभूषण दवा समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों पर इस फैसले का असर पड़ा।लेकिन भारत ने इस चुनौती का सामना बड़े ही समझदारी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत करते हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सहारा लिया जिससे न केवल निर्यात में वृद्धि हुई बल्कि कई देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए। नतीजतन नवंबर 2025 में भारत के कुल निर्यात में 19.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अमेरिका को निर्यात में 22% से ज्यादा उछाल आया जो एक बड़ा आश्चर्य था।
भारत ने एफटीए पर काम तेज किया
अमेरिकी टैरिफ से जूझते हुए भारत ने तेजी से मुक्त व्यापार समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत इस समय यूरोपीय संघ न्यूजीलैंड और चिली के साथ उन्नत स्तर की एफटीए वार्ता कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने ओमान के साथ पहला एफटीए समझौता करने की योजना बनाई जिस पर नवंबर में हस्ताक्षर किए गए। यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने खासकर इंजीनियरिंग उत्पादों वस्त्र फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण था।एफटीए भारत की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा
भारत की आर्थिक रणनीति में एफटीए अब एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। ये समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहरी हिस्सेदारी दिलाने निर्यात में निरंतर वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं। एफटीए के माध्यम से व्यापार टैरिफ में कटौती और स्थिर व्यापार नियम भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करते हैं साथ ही नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का अवसर भी प्रदान करते हैं।अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां
अमेरिकी टैरिफ की चुनौती के बावजूद भारत ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं से बचने के लिए एफटीए पर तेजी से काम किया। व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव के मुताबिक भारत एफटीए को एक रणनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है जिससे निर्यात बाजारों में विविधता लाई जा सके और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम किया जा सके। भारत के पास फिलहाल 26 देशों के साथ 15 एफटीए हैं और 26 अन्य देशों के साथ प्राथमिकता व्यापार समझौते हैं।भारत की एफटीए नीति से बढ़ा भरोसा
हाल के वर्षों में भारत ने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते किए हैं जिससे इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी साल मई में भारत और ब्रिटेन ने भी लंबे समय से लंबित एफटीए पर सहमति की घोषणा की थी जिसके तहत भारतीय खाद्य उत्पादों और मसालों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इन समझौतों ने तेज और स्पष्ट व्यापार ढांचे की जरूरत को और मजबूत किया है।सरकार का रुख और भविष्य की दिशा
भारत सरकार वैश्विक व्यापार में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद एफटीए वार्ताओं को आगे बढ़ा रही है। व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि आगामी वर्ष में इन समझौतों से अच्छे नतीजे मिलेंगे। हालांकि भारत के व्यापारिक साझेदारों से ज्यादा बाजार पहुंच की मांग और छोटे किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।भारत और अमेरिका के रिश्ते
भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव आए हैं खासकर रूस से रियायती कच्चे तेल की निरंतर खरीद को लेकर। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नरमी के संकेत मिले हैं। पीएम मोदी ने ट्रंप की शांति योजना की सराहना की और दोनों नेताओं ने फोन पर व्यापार और अन्य मुद्दों पर बातचीत की।कई देशों से हाथ मिलाने का कारण
वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के दौर में भारत अब एक स्थिर और आकर्षक पार्टनर के रूप में उभर रहा है। विकसित देशों जैसे ब्रिटेन यूरोपीय संघ और ईएफटीए के देशों के लिए भारत का बड़ा बाजार और सस्ते उत्पाद आकर्षण का कारण बन रहे हैं जबकि उभरते बाजार जैसे ओमान चिली क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग देख रहे हैं
भारत की एफटीए नीति वैश्विक व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच उसके निर्यात और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम साबित हो रही है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।