Tag: Indian Politics

  • पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार

    पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi राज्य में चुनाव प्रचार को नई गति देने के लिए एक ही दिन में तीन महत्वपूर्ण जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। इन रैलियों के जरिए भारतीय जनता पार्टी अपने अभियान को मजबूती देने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री की रैलियां पूर्वी बर्धमान, मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं, जिन्हें राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। इन इलाकों में अलग अलग सामाजिक और जनसंख्या समीकरण हैं, जिन पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। भाजपा इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में जुटी है, ताकि सत्तारूढ़ Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार को कड़ी चुनौती दी जा सके।

    चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद से प्रधानमंत्री का यह तीसरा दौरा है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। इससे पहले भी वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाओं के माध्यम से अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर चुके हैं। लगातार हो रहे ये दौरे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं।

    अपने पिछले संबोधनों में प्रधानमंत्री ने कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने जनता के सामने एक वैकल्पिक शासन दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए विकास और सुरक्षा से जुड़े वादों पर जोर दिया। इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    राज्य में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा माना जा रहा है। एक ओर सत्ताधारी दल अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, तो दूसरी ओर विपक्ष पूरी ताकत के साथ सत्ता परिवर्तन की कोशिश में लगा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी और रैलियों ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्य में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा और इसके बाद मतगणना होगी। इस बीच सभी राजनीतिक दल जनसभाओं, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हुए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों का मिश्रण देखने को मिल रहा है, जो परिणामों को प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री की सक्रियता और लगातार हो रही रैलियां इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं।
  • राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें

    राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी के बीच चल रहे विवाद के बीच अब सबकी निगाहें उनके अगले कदम पर लगी हैं। हाल ही में चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक रील ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है।

    सोशल मीडिया पर की रील शेयर


    चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक रील शेयर की जिसे seedhathok नाम के यूजर रिहान ने बनाया था। रील में सुझाव दिया गया कि चड्ढा को अपनी खुद की पार्टी बनानी चाहिए जिससे उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है। वीडियो में सीधे चड्ढा को संबोधित करते हुए कहा गया कि जेन-जी पार्टी या कोई अन्य उपयुक्त नाम से नई पार्टी शुरू करना युवाओं का समर्थन पाने का सही तरीका होगा।

    दूसरी पार्टी में शामिल होने का खतरा

    वीडियो में यह भी कहा गया कि अगर चड्ढा किसी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें वर्तमान समर्थन नहीं मिलेगा और जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि चड्ढा ने रील शेयर की लेकिन अभी तक उन्होंने आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की कि वे क्या कदम उठाएंगे।

    AAP ने उठाए कठोर कदम
    करीब एक हफ्ते पहले AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। इसके साथ ही उन्हें संसद में पार्टी के कोटे से बोलने की अनुमति भी नहीं मिली।

    पार्टी के आरोपों की लंबी सूची

    AAP ने चड्ढा पर कई आरोप लगाए हैं:- बीजेपी के प्रति नरम रुख: पार्टी का कहना है कि चड्ढा ने संसद में पार्टी का समय हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत जैसे मामूली मुद्दों के लिए इस्तेमाल किया।
    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग: चड्ढा ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
    अतिशी के सवाल: AAP नेता अतिशी ने चड्ढा से पूछा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी या लोकतंत्र पर हो रहे सवालों पर बोलने में क्यों डरते हैं।
    केजरीवाल की गिरफ्तारी पर गैरमौजूदगी: ED द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए।

    चड्ढा का जवाब और किताब के जरिए संदेश

    चड्ढा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी उन्हें चुप कर रही है। उन्होंने बताया कि संसद में जब भी उन्हें बोलने का मौका मिलता है वे जनता के मुद्दों को उठाते हैं। साथ ही सोमवार को उन्होंने अमेरिकी लेखक रॉबर्ट ग्रीन की किताब The 48 Laws of Power पढ़ते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा किसी ने मुझे इस हफ्ते एक किताब गिफ्ट की मैंने चैप्टर 1 पलटा नेवर आउटशाइन द मास्टर’। कुछ किताबें उसी समय पर आती हैं जब उन्हें आना होता है।

  • 94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।

    94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।


    नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और सम्मानित नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का आज सुबह 4 बजे निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उनकी यह विदाई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। उन्हें 8 अप्रैल को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनका पार्थिव शरीर नोएडा स्थित उनके आवास में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद आज शाम 5 बजे उन्हें निजामुद्दीन स्थित शवदाह गृह में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई बार लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश के मेरठ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य रहीं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और नीति निर्माण में योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके मंत्रालयों में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास शामिल थे। उनके नेतृत्व में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का कार्यान्वयन हुआ।

    कांग्रेस पार्टी में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में पार्टी संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवा नेताओं को मार्गदर्शन दिया और पार्टी के निर्णयों एवं नीतियों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई की राजनीतिक यात्रा लंबी और प्रभावशाली रही। उन्होंने हमेशा महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी नीति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी और संसद में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी अचानक विदाई से भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी एक सम्मानित नेता को खो चुकी है।

  • दतिया विधायक की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज 2015 के एफडीआर मामले में कोर्ट का फैसला कल संभव

    दतिया विधायक की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज 2015 के एफडीआर मामले में कोर्ट का फैसला कल संभव


    दतिया । मध्यप्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई भ्रष्टाचार से जुड़े एक पुराने मामले में की गई है जिसमें वर्ष 2015 में भूमि विकास बैंक से एफडीआर रिलीज से संबंधित अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं

    बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां लंबे समय से इस मामले की पड़ताल कर रही थीं और अब पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद विधायक को हिरासत में लिया गया है गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट में पेश किया जाएगा जहां इस मामले में आगे की सुनवाई होगी सूत्रों के मुताबिक कल अदालत द्वारा सजा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया जा सकता है जिससे इस पूरे प्रकरण पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी

    यह मामला वर्ष 2015 से जुड़ा हुआ है जब भूमि विकास बैंक में एफडीआर रिलीज को लेकर कथित गड़बड़ियां सामने आई थीं आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए आर्थिक अनियमितताएं की गईं जिससे वित्तीय नुकसान हुआ इस प्रकरण में जांच के दौरान कई दस्तावेजों और लेनदेन की जांच की गई जिसके आधार पर अब कार्रवाई तेज की गई है

    राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि प्रदेश स्तर पर भी सियासी असर देखने को मिल सकता है विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजरें अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं यदि अदालत सजा सुनाती है तो इसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है वहीं यदि राहत मिलती है तो यह मामला एक अलग मोड़ ले सकता है

    गिरफ्तारी के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं जहां एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ता इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर विरोधी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं हालांकि आधिकारिक रूप से जांच एजेंसियों की ओर से विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अदालत का फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह लंबे समय से लंबित एक वित्तीय अनियमितता के मामले को अंतिम दिशा देगा साथ ही यह भी तय करेगा कि आरोप कितने मजबूत हैं और उनके आधार पर सजा किस हद तक संभव है

    फिलहाल सभी की निगाहें कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हुई हैं जहां इस मामले में निर्णायक स्थिति सामने आ सकती है यह घटनाक्रम न केवल एक विधायक के राजनीतिक भविष्य के लिए बल्कि प्रदेश की राजनीति के व्यापक परिदृश्य के लिए भी अहम माना जा रहा है

  • केरल विधानसभा चुनाव 2026: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे रोड शो और रैली, राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला

    केरल विधानसभा चुनाव 2026: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे रोड शो और रैली, राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला


    नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केरल में विधानसभा चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और राजनीतिक हलकों में चुनावी गतिविधियों का शोर हर तरफ सुनाई दे रहा है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल के पलक्कड़ और त्रिशूर में चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। उन्होंने इस मौके पर कहा कि केरल के लोगों के बीच रहने का उन्हें बेसब्री से इंतजार है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि आज शाम वह पलक्कड़ में एक रैली को संबोधित करेंगे और उसके बाद त्रिशूर में रोड शो में हिस्सा लेंगे। मोदी ने कहा कि केरल में आम माहौल एनडीए के पक्ष में है और लोग एलडीएफ और यूडीएफ के कुशासन से नाखुश हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि भाजपा इस बार केरल में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

    केरल चुनाव में राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य भर में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता सक्रिय रूप से रैलियों और चुनावी कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी रविवार को पलक्कड़ जिले की चार विधानसभा सीटों पर चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह दिखाता है कि चुनावी माहौल तेज और प्रतिस्पर्धात्मक है।

    इस बार केरल विधानसभा चुनाव में कुल 140 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। वोटिंग 9 अप्रैल 2026 को होगी और मतों की गिनती और परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। केरल विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 23 मई को समाप्त होने वाला है। भारतीय निर्वाचन आयोग की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, इस चुनाव में 2.71 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल करने के पात्र हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि इस बार केरल में त्रिकोणीय मुकाबला है, जिसमें माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए आमने-सामने हैं। एलडीएफ सत्ता बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है, यूडीएफ वापसी की कोशिश में है और भाजपा को पहली बार बड़ी सफलता की उम्मीद है।

    पिछले चुनावों की बात करें तो 2021 में एलडीएफ ने 99 सीटें जीतीं, कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को 41 सीटें मिलीं और भाजपा को कोई सीट नहीं मिली थी। 2016 में भाजपा ने पहली बार केवल एक सीट जीती थी। इस बार भाजपा की रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी एनडीए की स्थिति मजबूत करने के लिए अहम मानी जा रही है।

    चुनावी माहौल हर तरफ उत्साही है। प्रधानमंत्री मोदी की पलक्कड़ और त्रिशूर की रैलियां राज्य में एनडीए के प्रचार अभियान को और गति देंगी। राजनीतिक दल हर क्षेत्र में मतदाताओं से संवाद कर रहे हैं और जनता के बीच चुनावी मुद्दों पर बहस चल रही है। राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले और जनता की बढ़ती भागीदारी के बीच आगामी चुनावों के परिणाम पर सभी की नजर है।

  • पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था

    पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सपा सरकार में नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया गया था लेकिन अब भाजपा शासन में यही नोएडा उत्तर प्रदेश के विकास का मजबूत आधार बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जेवर एयरपोर्ट से हर दो मिनट में एक विमान उड़ान भरेगा। प्रधानमंत्री ने युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश के नौजवान समझते हैं कि इस तरह की परियोजनाएं उनके भविष्य को नई दिशा और अवसर देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज विकसित यूपी विकसित भारत अभियान के तहत एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय दुनिया के कई हिस्सों में संकट की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कई देशों में खाद्य सामग्री ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में भारत भी मजबूती से इन चुनौतियों का सामना कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

    एयरपोर्ट से बढ़ती है तरक्की

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी देश में एयरपोर्ट केवल सुविधा नहीं बल्कि विकास को गति देने का माध्यम होते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2014 से पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि अब हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी तेजी से पहुंच रही है।

  • राज्यसभा में तीखी नोकझोंक: जया बच्चन और स्पीकर के बीच गरमागरम बहस

    राज्यसभा में तीखी नोकझोंक: जया बच्चन और स्पीकर के बीच गरमागरम बहस


    नई दिल्ली।बुधवार को राज्यसभा में ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन और डिप्टी कमिश्नर पैनल के सदस्य दिनेश शर्मा के बीच माहौल नोकझोंक देखने को मिली। बहस के दौरान जया बच्चन ने असंतोष जताते हुए यहां तक ​​कह दिया कि जितना समय देना है दे दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए, जिससे सदन में कुछ देर के लिए हलचल मच गई।

    बोलने के दौरान भटका ध्यान, बताते असंतोष

    दरअसल, जया बच्चन जब विधेयक पर अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुईं, उसी दौरान तनावपूर्ण बेंच के कुछ सदस्य आपसी बातचीत करने लगे। इससे उनका ध्यान भटक गया और उन्होंने बीच में ही बोलना रोक दिया। उन्होंने असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि जब कोई बोल रहा हो तो बाकी लोगों को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई और बात करेगा तो ध्यान वहीं होगा और स्पीकर की बात अनसुनी रह जाएगी।

    स्पीकर से माहौल बहस, विवाद बढ़ाएँ

    स्थिति तब और माहौल हो गई जब जया बच्चन ने स्पीकर से कहा कि उन्हें टोकने के बजाय उन सदस्यों पर कार्रवाई की जाए जो बाधाएं पैदा कर रहे हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है। लेकिन जया बच्चन इससे कार्यकर्ता नहीं दिखीं और उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि समय आपके हाथ में है, जितना देना है दे दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए, कमजोर लोगों को तो वैसे भी आश्रित जा रहा है। इस दौरान दोनों के बीच कई बार तीखे संवाद हुए।

    विपक्ष ने विधेयक पर उठाए सवाल

    इस बहस के बीच विपक्षी दलों ने ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े इस विधेयक को अन्यायपूर्ण समझाए हुए इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। जया बच्चन ने भी सवाल उठाया कि बजट सत्र के दौरान इस विधेयक को लाने की क्या जरूरत थी और कहा कि इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि यह समुदाय सामाजिक रूप से पहले ही कमजोर है और उसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    सरकार पर लगे आरोप, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

    वहीं टीकाकरण कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह दबाव में फैसला ले रही है और इस मुद्दे पर पूछताछ की जा रही है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष ने विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने इस समुदाय के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच टकराव बहस देखने को मिली।

  • राम मंदिर में दर्शन के बाद बिट्टा बोले भगवान को राजनीति से ऊपर रखें

    राम मंदिर में दर्शन के बाद बिट्टा बोले भगवान को राजनीति से ऊपर रखें


    नई दिल्ली: अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने अयोध्या धाम पहुंचकर राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी और लोगों को एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की।

    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में बिट्टा ने कहा कि वह वर्षों से भगवान राम और हनुमान जी के दर्शन करते आ रहे हैं और उनकी कृपा से ही उनका जीवन सुरक्षित रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा देश में शांति बनाए रखने का प्रयास किया और अपने जीवन में न गोली चलने दी न दंगे-फसाद होने दिए और न ही बम विस्फोट होने दिए।

    उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि भगवान राम को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनका साफ कहना था कि राम पहले हैं और सियासत बाद में। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को धर्म और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि समाज में एकता और शांति बनी रहे।

    बिट्टा ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे देश को आतंकवाद से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार ये फैसले राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

    उन्होंने अपनी पहचान को लेकर भी एक भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका धर्म भारत माता है और उनकी जाति वंदे मातरम् है। इस दौरान उन्होंने सिख समाज से भी अपील की कि वे खुलकर सामने आएं और देश विरोधी गतिविधियों का विरोध करें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज एकजुट होकर ऐसे मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगा तब तक समस्याएं बनी रहेंगी।

    फिल्म धुरंधर में सिख किरदार को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है और अब सच्चाई छिप नहीं सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए जिससे लोगों के सामने सही तथ्य आ सकें और इतिहास की वास्तविकता सामने आए।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ईरान से जुड़े युद्ध के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संघर्षों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर भी पड़ता है जिसमें भारत भी अछूता नहीं रह सकता।

    बिट्टा का यह दौरा और बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। उनके संदेश को एकता और राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सोनिया गांधी हेल्थ अपडेट एंटीबायोटिक पर इलाज जारी डॉक्टर बोले स्थिति नियंत्रण में

    सोनिया गांधी हेल्थ अपडेट एंटीबायोटिक पर इलाज जारी डॉक्टर बोले स्थिति नियंत्रण में

    नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें नई दिल्ली स्थित Sir Ganga Ram Hospital में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। ताजा जानकारी के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राहत की सांस ली है।

    अस्पताल के चेयरमैन डॉ अजय स्वरूप ने जानकारी देते हुए बताया कि सोनिया गांधी की स्थिति नियंत्रण में है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत खराब होने के पीछे पेट और यूरिन से जुड़ा संक्रमण हो सकता है जिसकी जांच की जा रही है। फिलहाल उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं और सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट भी किए जा रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी को मंगलवार देर शाम अस्पताल लाया गया था। उनकी उम्र और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते इसलिए उन्हें निगरानी में रखा गया है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी को पहले से अस्थमा की समस्या है और वह नियमित रूप से चेकअप के लिए इसी अस्पताल में आती रही हैं।

    इस बीच उनके बेटे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मां की तबीयत को देखते हुए केरल का दौरा रद्द कर दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केरल के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत को लेकर पूरे गांधी परिवार की चिंता साफ नजर आ रही है।

    राजनीतिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है। संसद में आज ईरान और अमेरिका से जुड़े मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के बड़े नेता शामिल नहीं हो सके। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी संसद में नजर नहीं आए। उनकी जगह पार्टी की ओर से लोकसभा सांसद तारिक अनवर और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक को बैठक में भेजा गया है।

    गौरतलब है कि गांधी परिवार का गंगाराम अस्पताल पर काफी भरोसा रहा है। यही वजह है कि परिवार के कई महत्वपूर्ण मेडिकल मामलों का इलाज यहीं कराया गया है। प्रियंका गांधी के बच्चों का जन्म भी इसी अस्पताल में हुआ था।

    फिलहाल डॉक्टरों की टीम सोनिया गांधी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में उनकी सेहत को लेकर और अपडेट सामने आ सकते हैं। उनके समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • बिहार की सियासत गरम अगले सीएम पर बीजेपी का बड़ा बयान और भविष्य की रणनीति

    बिहार की सियासत गरम अगले सीएम पर बीजेपी का बड़ा बयान और भविष्य की रणनीति


    नई दिल्ली : बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है क्योंकि राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बना हुआ है मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि उनके बाद राज्य की कमान कौन संभालेगा इसी बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है

    इसी क्रम में बिहार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है उन्होंने साफ किया कि वर्तमान में नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री हैं और आने वाले समय में उनके राज्यसभा जाने की बात सामने आ रही है इसके बाद आगे की राजनीतिक प्रक्रिया एनडीए और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय की जाएगी उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस निर्णय में मुख्यमंत्री की भूमिका भी अहम रहेगी

    संजय सरावगी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि फिलहाल बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई अंतिम नाम तय नहीं किया है बल्कि यह निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा एनडीए के घटक दल और पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मिलकर यह तय करेगा कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाए यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक और सहमति आधारित होगी जिससे गठबंधन की एकजुटता बनी रहे

    वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों की ओर से भी बयानबाजी जारी है नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की प्रक्रिया किसी दबाव के तहत हो रही है हालांकि एनडीए की ओर से इस दावे को लगातार खारिज किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सभी निर्णय राजनीतिक सहमति और आपसी समझ के आधार पर लिए जाएंगे

    संजय सरावगी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश और राजनीति में गंभीरता की आवश्यकता होती है उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं तब नेताओं को जिम्मेदारी के साथ बयान देने चाहिए उनका यह भी कहना था कि राजनीतिक बयानबाजी देशहित में नहीं होती

    इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति के लिए कई प्रकार की सुविधाएं और आरक्षण की व्यवस्था की गई है उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण के बाद इन सुविधाओं के संदर्भ में स्थिति बदल सकती है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस संदर्भ में उचित है

    बिहार की राजनीति में यह स्पष्ट है कि अगले मुख्यमंत्री को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और सभी की निगाहें एनडीए के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं आने वाले समय में इस पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है लेकिन फिलहाल सस्पेंस बरकरार है और राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं