

मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई बार लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश के मेरठ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य रहीं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और नीति निर्माण में योगदान दिया।
मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके मंत्रालयों में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास शामिल थे। उनके नेतृत्व में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का कार्यान्वयन हुआ।
कांग्रेस पार्टी में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में पार्टी संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवा नेताओं को मार्गदर्शन दिया और पार्टी के निर्णयों एवं नीतियों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया।
मोहसिना किदवई की राजनीतिक यात्रा लंबी और प्रभावशाली रही। उन्होंने हमेशा महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी नीति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी और संसद में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी अचानक विदाई से भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी एक सम्मानित नेता को खो चुकी है।

बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां लंबे समय से इस मामले की पड़ताल कर रही थीं और अब पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद विधायक को हिरासत में लिया गया है गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट में पेश किया जाएगा जहां इस मामले में आगे की सुनवाई होगी सूत्रों के मुताबिक कल अदालत द्वारा सजा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया जा सकता है जिससे इस पूरे प्रकरण पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी
यह मामला वर्ष 2015 से जुड़ा हुआ है जब भूमि विकास बैंक में एफडीआर रिलीज को लेकर कथित गड़बड़ियां सामने आई थीं आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए आर्थिक अनियमितताएं की गईं जिससे वित्तीय नुकसान हुआ इस प्रकरण में जांच के दौरान कई दस्तावेजों और लेनदेन की जांच की गई जिसके आधार पर अब कार्रवाई तेज की गई है
राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि प्रदेश स्तर पर भी सियासी असर देखने को मिल सकता है विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजरें अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं यदि अदालत सजा सुनाती है तो इसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है वहीं यदि राहत मिलती है तो यह मामला एक अलग मोड़ ले सकता है
गिरफ्तारी के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं जहां एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ता इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर विरोधी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं हालांकि आधिकारिक रूप से जांच एजेंसियों की ओर से विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अदालत का फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह लंबे समय से लंबित एक वित्तीय अनियमितता के मामले को अंतिम दिशा देगा साथ ही यह भी तय करेगा कि आरोप कितने मजबूत हैं और उनके आधार पर सजा किस हद तक संभव है
फिलहाल सभी की निगाहें कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हुई हैं जहां इस मामले में निर्णायक स्थिति सामने आ सकती है यह घटनाक्रम न केवल एक विधायक के राजनीतिक भविष्य के लिए बल्कि प्रदेश की राजनीति के व्यापक परिदृश्य के लिए भी अहम माना जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि आज शाम वह पलक्कड़ में एक रैली को संबोधित करेंगे और उसके बाद त्रिशूर में रोड शो में हिस्सा लेंगे। मोदी ने कहा कि केरल में आम माहौल एनडीए के पक्ष में है और लोग एलडीएफ और यूडीएफ के कुशासन से नाखुश हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि भाजपा इस बार केरल में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
केरल चुनाव में राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य भर में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता सक्रिय रूप से रैलियों और चुनावी कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी रविवार को पलक्कड़ जिले की चार विधानसभा सीटों पर चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह दिखाता है कि चुनावी माहौल तेज और प्रतिस्पर्धात्मक है।
इस बार केरल विधानसभा चुनाव में कुल 140 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। वोटिंग 9 अप्रैल 2026 को होगी और मतों की गिनती और परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। केरल विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 23 मई को समाप्त होने वाला है। भारतीय निर्वाचन आयोग की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, इस चुनाव में 2.71 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल करने के पात्र हैं।
राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि इस बार केरल में त्रिकोणीय मुकाबला है, जिसमें माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए आमने-सामने हैं। एलडीएफ सत्ता बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है, यूडीएफ वापसी की कोशिश में है और भाजपा को पहली बार बड़ी सफलता की उम्मीद है।
पिछले चुनावों की बात करें तो 2021 में एलडीएफ ने 99 सीटें जीतीं, कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को 41 सीटें मिलीं और भाजपा को कोई सीट नहीं मिली थी। 2016 में भाजपा ने पहली बार केवल एक सीट जीती थी। इस बार भाजपा की रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी एनडीए की स्थिति मजबूत करने के लिए अहम मानी जा रही है।
चुनावी माहौल हर तरफ उत्साही है। प्रधानमंत्री मोदी की पलक्कड़ और त्रिशूर की रैलियां राज्य में एनडीए के प्रचार अभियान को और गति देंगी। राजनीतिक दल हर क्षेत्र में मतदाताओं से संवाद कर रहे हैं और जनता के बीच चुनावी मुद्दों पर बहस चल रही है। राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले और जनता की बढ़ती भागीदारी के बीच आगामी चुनावों के परिणाम पर सभी की नजर है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज विकसित यूपी विकसित भारत अभियान के तहत एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय दुनिया के कई हिस्सों में संकट की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कई देशों में खाद्य सामग्री ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में भारत भी मजबूती से इन चुनौतियों का सामना कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
एयरपोर्ट से बढ़ती है तरक्की

बोलने के दौरान भटका ध्यान, बताते असंतोष
दरअसल, जया बच्चन जब विधेयक पर अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुईं, उसी दौरान तनावपूर्ण बेंच के कुछ सदस्य आपसी बातचीत करने लगे। इससे उनका ध्यान भटक गया और उन्होंने बीच में ही बोलना रोक दिया। उन्होंने असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि जब कोई बोल रहा हो तो बाकी लोगों को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई और बात करेगा तो ध्यान वहीं होगा और स्पीकर की बात अनसुनी रह जाएगी।
स्पीकर से माहौल बहस, विवाद बढ़ाएँ
स्थिति तब और माहौल हो गई जब जया बच्चन ने स्पीकर से कहा कि उन्हें टोकने के बजाय उन सदस्यों पर कार्रवाई की जाए जो बाधाएं पैदा कर रहे हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है। लेकिन जया बच्चन इससे कार्यकर्ता नहीं दिखीं और उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि समय आपके हाथ में है, जितना देना है दे दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए, कमजोर लोगों को तो वैसे भी आश्रित जा रहा है। इस दौरान दोनों के बीच कई बार तीखे संवाद हुए।
विपक्ष ने विधेयक पर उठाए सवाल
इस बहस के बीच विपक्षी दलों ने ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े इस विधेयक को अन्यायपूर्ण समझाए हुए इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। जया बच्चन ने भी सवाल उठाया कि बजट सत्र के दौरान इस विधेयक को लाने की क्या जरूरत थी और कहा कि इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि यह समुदाय सामाजिक रूप से पहले ही कमजोर है और उसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
सरकार पर लगे आरोप, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने
वहीं टीकाकरण कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह दबाव में फैसला ले रही है और इस मुद्दे पर पूछताछ की जा रही है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष ने विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने इस समुदाय के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच टकराव बहस देखने को मिली।

दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में बिट्टा ने कहा कि वह वर्षों से भगवान राम और हनुमान जी के दर्शन करते आ रहे हैं और उनकी कृपा से ही उनका जीवन सुरक्षित रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा देश में शांति बनाए रखने का प्रयास किया और अपने जीवन में न गोली चलने दी न दंगे-फसाद होने दिए और न ही बम विस्फोट होने दिए।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि भगवान राम को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनका साफ कहना था कि राम पहले हैं और सियासत बाद में। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को धर्म और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि समाज में एकता और शांति बनी रहे।
बिट्टा ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे देश को आतंकवाद से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार ये फैसले राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करते हैं।
उन्होंने अपनी पहचान को लेकर भी एक भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका धर्म भारत माता है और उनकी जाति वंदे मातरम् है। इस दौरान उन्होंने सिख समाज से भी अपील की कि वे खुलकर सामने आएं और देश विरोधी गतिविधियों का विरोध करें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज एकजुट होकर ऐसे मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगा तब तक समस्याएं बनी रहेंगी।
फिल्म धुरंधर में सिख किरदार को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है और अब सच्चाई छिप नहीं सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए जिससे लोगों के सामने सही तथ्य आ सकें और इतिहास की वास्तविकता सामने आए।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ईरान से जुड़े युद्ध के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संघर्षों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर भी पड़ता है जिसमें भारत भी अछूता नहीं रह सकता।
बिट्टा का यह दौरा और बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। उनके संदेश को एकता और राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अस्पताल के चेयरमैन डॉ अजय स्वरूप ने जानकारी देते हुए बताया कि सोनिया गांधी की स्थिति नियंत्रण में है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत खराब होने के पीछे पेट और यूरिन से जुड़ा संक्रमण हो सकता है जिसकी जांच की जा रही है। फिलहाल उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं और सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट भी किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी को मंगलवार देर शाम अस्पताल लाया गया था। उनकी उम्र और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते इसलिए उन्हें निगरानी में रखा गया है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी को पहले से अस्थमा की समस्या है और वह नियमित रूप से चेकअप के लिए इसी अस्पताल में आती रही हैं।
इस बीच उनके बेटे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मां की तबीयत को देखते हुए केरल का दौरा रद्द कर दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केरल के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत को लेकर पूरे गांधी परिवार की चिंता साफ नजर आ रही है।
राजनीतिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है। संसद में आज ईरान और अमेरिका से जुड़े मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के बड़े नेता शामिल नहीं हो सके। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी संसद में नजर नहीं आए। उनकी जगह पार्टी की ओर से लोकसभा सांसद तारिक अनवर और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक को बैठक में भेजा गया है।
गौरतलब है कि गांधी परिवार का गंगाराम अस्पताल पर काफी भरोसा रहा है। यही वजह है कि परिवार के कई महत्वपूर्ण मेडिकल मामलों का इलाज यहीं कराया गया है। प्रियंका गांधी के बच्चों का जन्म भी इसी अस्पताल में हुआ था।
फिलहाल डॉक्टरों की टीम सोनिया गांधी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में उनकी सेहत को लेकर और अपडेट सामने आ सकते हैं। उनके समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।