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  • कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश

    कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश


    नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का निर्देश मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह वही दफ्तर है जो लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस की पहचान बना रहा और पार्टी के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह रहा। सरकार की ओर से कांग्रेस को शनिवार तक इस भवन को खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे यह मामला अब सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को केवल 24 अकबर रोड ही नहीं बल्कि 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस ने पिछले वर्ष कोटला मार्ग पर अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से पुराने दफ्तर से शिफ्ट नहीं हो पाई है। पार्टी की गतिविधियां अभी भी अकबर रोड स्थित भवन में जारी हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

    कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 24 अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है, क्योंकि यह दफ्तर केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि पार्टी के इतिहास और संघर्ष का प्रतीक रहा है।

    इस दफ्तर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ब्रिटिश शासन के समय यह भवन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान था। बाद में यह म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा, जिनकी बेटी आंग सान सू की ने आगे चलकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। इस तरह यह भवन अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

    कांग्रेस के लिए यह दफ्तर 1970 के दशक के अंत से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। 1977 के चुनाव में हार के बाद जब पार्टी में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को एक नए केंद्र की जरूरत थी, तब जी वेंकटस्वामी ने अपना बंगला पार्टी को उपलब्ध कराया। यहीं से कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की कहानी शुरू हुई। इसके बाद यह दफ्तर इंदिरा गांधी के नेतृत्व से लेकर राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक पार्टी का प्रमुख केंद्र बना रहा।

    समय के साथ इस भवन को पार्टी ने अपनी जरूरतों के अनुसार विस्तार भी दिया, लेकिन हाल के वर्षों में संगठन के पुनर्गठन के चलते पार्टी ने नया मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया गया, जो अब कांग्रेस का नया ठिकाना बन चुका है।

    अब जब सरकार ने पुराने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक बदलाव भी माना जा रहा है। कांग्रेस इस आदेश को लेकर अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने पर विचार कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस आदेश पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अपने ऐतिहासिक दफ्तर को लेकर कोई कानूनी लड़ाई लड़ती है या फिर पूरी तरह से नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ से अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है।

  • बिहार दिवस पर नीतीश कुमार का संदेश विकास सांस्कृतिक गौरव और पीएम मोदी के योगदान की सराहना

    बिहार दिवस पर नीतीश कुमार का संदेश विकास सांस्कृतिक गौरव और पीएम मोदी के योगदान की सराहना


    नई दिल्ली:बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य के विकास और सांस्कृतिक गौरव पर विस्तृत संदेश साझा किया उन्होंने अपने संदेश में बिहार की समृद्ध विरासत, परंपराओं और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए इसे राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का विषय बताया

    मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास, सामाजिक न्याय, सुशासन और मजबूत आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए उनकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार का सहयोग राज्य के विकास को नई गति दे रहा है और इसी सहयोग से बिहार तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है

    नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्थन से बिहार के प्रतिभाशाली लोग राज्य और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने बिहार दिवस को राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताया उन्होंने कहा कि यह दिन बिहार के सामर्थ्य, परंपरा और गौरवशाली अतीत को याद करने का अवसर है बिहार की भूमि ने प्राचीन काल से ही ज्ञान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को दिशा दी है

    उन्होंने भगवान बुद्ध और आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की धरती ने ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है जिन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य के प्रयासों ने एक सशक्त और संगठित भारत की नींव रखी जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है

    नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों की मेहनत, ईमानदारी और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि बिहारवासियों ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, उद्योग, कला या संस्कृति हर क्षेत्र में बिहार के लोगों का योगदान उल्लेखनीय रहा है

    उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के लोग जहां भी जाते हैं अपनी संस्कृति और मूल्यों को साथ लेकर चलते हैं जिससे राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होती है उन्होंने विशेष रूप से छठ महापर्व का उल्लेख किया जो अब दुनिया भर में बिहार की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया जिसमें महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह, लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आंदोलन और जननायक कर्पूरी ठाकुर का योगदान शामिल है उन्होंने कहा कि इन महान नेताओं ने बिहार और देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    उन्होंने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा कि बिहार अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं

    अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का बिहार अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है यह यात्रा न केवल बिहार की बल्कि पूरे भारत की प्रगति और परिवर्तन की कहानी को भी दर्शाती है

  • नरेंद्र मोदी ने बनाया नया इतिहास भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार प्रमुख रहने का रिकॉर्ड

    नरेंद्र मोदी ने बनाया नया इतिहास भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार प्रमुख रहने का रिकॉर्ड

    नई दिल्ली: भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है इस उपलब्धि के साथ उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है

    पवन कुमार चामलिंग ने मुख्यमंत्री के रूप में 8930 दिनों तक कार्य किया था जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को मिलाकर 8931 दिनों का आंकड़ा पार कर लिया है यह उपलब्धि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव निरंतर जनसमर्थन और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में की थी उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की वर्ष 1985 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला इसके बाद वे लगातार चार बार 2001 2002 2007 और 2012 में मुख्यमंत्री बने और लगभग 12 साल 7 महीने तक राज्य का नेतृत्व किया उनके कार्यकाल को विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए जाना जाता है

    वर्ष 2014 में वे पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं उन्होंने 2014 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की और इस तरह वे लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने

    प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले और योजनाएं लागू की गईं जिनका उद्देश्य देश के विकास और सामाजिक सुधार को गति देना रहा उनके नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी स्थिति को मजबूत किया

    यह उपलब्धि केवल आंकड़ों का रिकॉर्ड नहीं है बल्कि यह उनके लंबे राजनीतिक जीवन निरंतरता और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है यह दर्शाता है कि भारतीय लोकतंत्र में स्थिर नेतृत्व और जनता का विश्वास कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

  • प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया नया रिकॉर्ड सीएम योगी बोले जनविश्वास का प्रतीक है यह ऐतिहासिक उपलब्धि

    प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया नया रिकॉर्ड सीएम योगी बोले जनविश्वास का प्रतीक है यह ऐतिहासिक उपलब्धि



    नई दिल्ली: 
    प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। वे अब भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं। इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने उन्हें बधाई देते हुए इसे जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि 145 करोड़ भारतीयों की सेवा में निरंतर समर्पित प्रधानमंत्री मोदी अब देश के सबसे लंबे समय तक शासन प्रमुख रहने वाले नेता बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति जनता के गहरे विश्वास और समर्थन को दर्शाती है।

    अपने संदेश में Yogi Adityanath ने यह भी उल्लेख किया कि Narendra Modi का नेतृत्व ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ जैसे मंत्रों को भारत की प्रगति का आधार बताया और कहा कि देश ने विकास और सुशासन के नए आयाम स्थापित किए हैं।

    सीएम योगी ने अपने संदेश के अंत में भगवान श्रीराम से प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे।

    इससे पहले भाजपा के आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने भी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए अब 8931 दिनों तक सार्वजनिक पद पर रहते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

    Amit Malviya के अनुसार, इस अवधि में प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि दशकों की निरंतर जनसेवा और मजबूत नेतृत्व को दर्शाती है।

    उन्होंने आगे प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि वे गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं और स्वतंत्रता के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री हैं। साथ ही वे 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार विजेता रहे हैं, जो उनके प्रति जनता के भरोसे को दर्शाता है।

    यह उपलब्धि न केवल राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नेतृत्व, अनुभव और जनसमर्थन मिलकर किसी भी नेता को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं। Narendra Modi का यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

  • बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बेटी का दुखद निधन

    बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बेटी का दुखद निधन



    भोपाल । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल का आज बुधवार को दुखद निधन हो गया है। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

    सुरभि खंडेलवाल के निधन से क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त है। उनकी अंतिम यात्रा आज शाम 5:00 बजे उनके निज निवास बैतूल गंज से कोठी बाजार मोक्ष धाम के लिए रवाना होगी। अंतिम संस्कार कोठी बाजार मोक्ष धाम में किया जाएगा। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। सामाजिक संगठनों ने भी परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं।

  • राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?

    राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?


    नई दिल्ली । देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक 26 फरवरी से 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा और उसी दिन देर शाम तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. बीजेपी और कांग्रेस दोनों सियासी की ताकत राज्यसभा में बढ़ जाएगी तो फिर किसके सियासी घाटा होगा?

    महाराष्ट्र से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 10 राज्यों की 37 सीटों पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. यह सीटें अप्रैल में खाली हो रही है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान किया है. राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सीटें बढ़ने तो विपक्ष इंडिया ब्लॉक की सीटें घटनी है, लेकिन कांग्रेस की सीटों में इजाफा हो सकता है?

    एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसके अलावा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह के लेकर उपेंद्र कुशवाहा का भी टर्म पूरा हो रहा है. ऐसे में देखना है कि इन दिग्गज नेताओं में से किसकी वापसी होती है, इसके अलावा किस दल को किसे फायदा और किसे नुकसान होगा?

    देश के किस राज्य में कितनी सीटों पर चुनाव

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर चुनाव है. महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और शरद पवार की एनसीपी के पास 2 राज्यसभा सीटें है. इसके अलावा कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और आरपीआई के पास एक-एक सीटें है.

    तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें से 4 राज्यसभा सीट डीएमके के पास है. इसके अलावा एक सीट AIADMK और एक सीट टीएमसी के पास है. पश्चिम बंगाल और बिहार पांच-पांच सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में से टीएमसी के पास 4 और एक सीट सीपीआई(एम) के कब्जे है. बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में से जेडीयू और आरजेडी के पास 2-2 सीटें और एक सीट आरएलएम के पास है.

    ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और बीजेडी के पास दो राज्यसभा सीट है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गढ़ परिषद के पास एक सीट है. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा.

    हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से दोनों ही बीजेपी के पास है तो तेलंगाना की दोनों सीटों में एक कांग्रेस और बीआरएस के पास है. छत्तीसगढ़ की दोनों सीटें कांग्रेस के कब्जे में है. हिमाचल की जिस एक सीट पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, वह सीट बीजेपी के कब्जे में है.

    राज्यसभा चुनाव किसे नफा और किसे नुकसान

    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े फिलहाल देखें तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 15 सीटें है, जिसमें बीजेपी के पास 9 सीटें, जेडीयू के पास 2 सीटें, AIADM के पास एक सीट, आरएलएम के पास एक और एक सीट आरपीआई के पास है.

    वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में है, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें है.साथ ही एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. इसके अलावा चार सीटें अन्य दलों के पास है, जिसमें दो सीटें बीजेडी, एक सीट बीआरएस और एक सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है.

    विधानसभा की स्थिति कई राज्यों में बदल गई है. इस लिहाज से एनडीए को 2 से 3 सीट का फायदा मिल सकता है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 3 से 4 घट सकती है. इसके अलावा क्षेत्रीय दलों को सबसे बड़ा झटका लगने जा रहा है. बीजेपी की सीटें बढ़ने और कांग्रेस को भी मामूली सीट की बढ़त मिलने की उम्मीद है.

    कांग्रेस की सीटें 4 से बढ़कर पांच हो सकती है तो बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती है. लेकिन आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के हाथ से सीटें निकल सकती हैं. इसके अलावा आरएलएम को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. किस राज्य में क्या होगा राज्यसभा का चुनावी सीन

    महाराष्ट्र में किसे होगा नुकसान

    महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटों पर चुनाव है, जिसमें से एनडीए के 6 सीटें मिल सकती है तो विपक्षी गठबंधन महायुति के सिर्फ एक सीट मिलने की संभावना है. राज्य में कुल 286 विधानसभा सीटें है, जिसमें से 2 सीटें खाली हैं. इस लिहाज से एक राज्यसभ सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. मौजूदा समय में बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं.

    एनडीए के 235 विधायक बन रहे हैं, जिसके दम पर 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी चार सीटें तो शिंदे और अजित पवार की पार्टी को एक-एक सीट जीत सकती है. शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की 16 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं. इस तरह से तीनों दलों के कुल 46 विधायक. सीपीआई (एम) और एसके (एम) का एक-एक विधायक है. अन्य छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन मिलने पर यह संख्या कुछ बढ़ सकती है. ऐसे में एक सीट विपक्ष मिलकर सकती है. शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस में से किसी एक दल को की यह सीट मिल सकती है, जिसके चलते शरद पवार की सीटें और उद्धव ठाकरे के लिए सियासी नुकसान होगा.

    बिहार में आरजेडी को लगेगा झटका

    बिहार की पांच राज्यसभा सीट पर चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकती है और एक सीट विपक्ष को मिल सकती है. बिहार में राज्यसभा चुनाव में 1 सीट के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. बीजेपी और जेडीयू आसानी से 2-2 सीटें जीत सकती है, लेकिन विपक्ष संयुक्त रूप से मिलकर ही एक सीट जीतने की स्थित में है. ऐसे में आरजेडी को कम से कम एक सीट का नुकसान उठाना पड़ेगा और उसे एक सीट जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का भी समर्थन हासिल करना होगा.

    तमिलनाडु और बंगाल में यथावत

    तमिलनाडु में की मौजूदा विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें जीत लेगा और एक सीट AIADMK भी बचा ले जाएगा, लेकिन एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. ऐसे ही पश्चिम बंगाल की पांच सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगा, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट से बीजेडी को संतोष करना पड़ सकता है.

    असम से हरियाणा तक कांग्रेस को फायदा

    असम की तीन राज्यसभ सीटों में से बीजेपी आसानी से दो सीटें जीत लेगी और एक सीट कांग्रेस-AIUDF के साथ मिलकर जीत सकती है. इस तरह से असम में एक सीट का नुकसान एजीपी को हो सकता है. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती है और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है.

    छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा सीट के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट गंवानी पड़ सकती है और यह सीट कांग्रेस जीत सकती है.

  • पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?

    पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?


    भोपाल :संसद में बजट पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्विजय सिंह के भाषण पर चुटकी ली और मुस्कुराते हुए कहा कि क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मैं कल एक माननीय सदस्य को सुन रहा था जो अपने आप को राजा कहलाने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन वही आर्थिक असमानता की चर्चा कर रहे थे मोदी ने सवालिया अंदाज में कहा बताइए जो खुद को राजा माने और आर्थिक असमानता की बात करे क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में सामाजिक सौहार्द और समरसता बिगड़ने के साथ आर्थिक असमानता बढ़ने की चिंता जताई थी

    संसद में विपक्ष के लगभग हर सांसद ने सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के जवाब ने ‘राजा साहब’ को सीधे तंज की जद में ला दिया

    इसी बीच लाड़ली बहनों पर विवादित बयान देने वाले मंत्री करण सिंह वर्मा ने सफाई दी और कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा उन्होंने केवल लाड़ली बहनों को भोजन पर आमंत्रित किया था उन्होंने अपने बयान पर खेद भी जताया विपक्ष ने इसकी कड़ी निंदा की वहीं इस तरह के बयान भाजपा सरकार के लिए किरकिरी का सबब बन सकते हैं इससे पहले भी मंत्री विजय शाह को लाड़ली बहनों के बयान को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा था

    सियासी हलचल श्योपुर में तब और तेज हुई जब भाजपा पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के घर चोरी की घटना सामने आई चोरों ने एसी का पंखा ही चोरी कर लिया कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने इस घटना को लेकर खुशी जाहिर की और कहा ऐसे चोर को पुरस्कार मिलना चाहिए उन्होंने तंज कसा कि जब सत्ताधारी दल के नेता के घर में सुरक्षा नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है

    भोपाल में मीडिया के सवालों से बचते हुए मंत्री विजय शाह सीधे कार में बैठे और शीशा चढ़ाकर रवाना हो गए उनका कर्नल सोफिया पर दिया गया विवादित बयान 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए तय है मंत्री की चुप्पी सियासी गलियारों में चर्चाओं को और बढ़ा रही है लोग कह रहे हैं इसे ही कहते हैं दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है वहीं कुछ का कहना है कहीं पार्टी ने मंत्री की जुबान पर ताला तो नहीं लगा दिया

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि संसद की बहस और सियासी बयानबाज़ियों ने एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है पीएम के तंज से लेकर मंत्री के बयान और मीडिया से बचने की कवायद तक ये सब राजनीतिक हलचल

  • NCP महाराष्ट्र में BJP-नेतृत्व वाले NDA के साथ बनी रहेगी, विलय की अटकलों को सुनील तटकरे ने किया खारिज

    NCP महाराष्ट्र में BJP-नेतृत्व वाले NDA के साथ बनी रहेगी, विलय की अटकलों को सुनील तटकरे ने किया खारिज


    नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन NDA का हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि संगठन दिवंगत अजित पवार की विचारधारा और मार्ग पर आगे बढ़ेगा।

    विलय की अफवाहों पर प्रतिक्रिया

    हाल ही में यह दावा किया गया था कि NCP और शरद पवार की राकांपा का विलय 12 फरवरी को घोषित किया जाएगा। इस पर तटकरे ने कहा, “हमारा रुख स्पष्ट है। पार्टी और अजित दादा की विचारधारा को हम आगे बढ़ाएंगे। राजग के साथ हमारा सहयोग कायम रहेगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अजित पवार की सहमति के बिना कोई राजनीतिक निर्णय नहीं लिया गया।

    शपथ और पार्टी संबंध
    तटकरे ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की जल्दबाजी पर कहा कि यह निर्णय महाराष्ट्र के हित में और राकांपा को मजबूत करने के लिए लिया गया। उन्होंने भाजपा की प्रशंसा करते हुए कहा कि गठबंधन में हमेशा सम्मानजनक व्यवहार रहा है।

    अस्थियों का अंतिम संस्कार और आगे की प्रक्रिया
    सुनील तटकरे ने बताया कि अजित पवार की अस्थियों को राज्य के सभी जिलों में ले जाकर श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं, राकांपा के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे ने कहा कि विलय या आगे की राजनीतिक दिशा का फैसला सुनेत्रा पवार करेंगी और उनका निर्णय पार्टी में सभी के लिए बाध्यकारी होगा।

  • चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं

    चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं


    नई दिल्ली: पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बयान को लेकर मचा हंगामा आज नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक के बाद कुछ हद तक शांत हुआ। बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई जिसमें राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों के मुताबिक चन्नी के उस बयान के बाद ही पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं को दिल्ली तलब किया गया था। बैठक में राहुल गांधी ने नेताओं को अनुशासन और जिम्मेदारी के पाठ पढ़ाते हुए साफ कर दिया कि कांग्रेस में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चन्नी के बयान पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख पदों पर कोई बदलाव नहीं होगा। राज्य अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पद ज्यों के त्यों बने रहेंगे।बैठक में शामिल नेताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी महासचिव केसी वेणुगोपाल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश सिंह बघेल सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और अन्य नेता शामिल थे।

    चन्नी ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला विंग की अध्यक्ष सभी अपर कास्ट से हैं। उनका सवाल था कि बड़े पदों पर दलितों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है जबकि पंजाब में दलित आबादी लगभग 38 प्रतिशत है। उनके इस बयान ने पार्टी में विभिन्न प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। कुछ नेताओं ने इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया तो कुछ ने इसे जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश करार दिया।विवाद बढ़ने पर चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ बात करना नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश की गई। चन्नी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दी जिन्हें उन्होंने ईमानदारी से निभाया।

    पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चन्नी के बयान ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और जातीय संतुलन के सवाल को फिर से ताजा कर दिया। हाईकमान ने स्थिति को संभालते हुए साफ किया कि पार्टी का ढांचा स्थिर रहेगा और किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।इस बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और सभी नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे पार्टी के हित में काम करें।

  • मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का लगाया आरोप

    मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का लगाया आरोप


    भोपाल । मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री विजय शाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी नाराजगी जाहिर की है। इसी कड़ी में सोमवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंत्री विजय शाह पर तत्काल केस दर्ज करने और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट रूप से केस दर्ज करने के आदेश दिए जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से कोई कदम न उठाया जाना न्यायपालिका की अवहेलना है प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई न होना बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर मंत्री को बचाने का प्रयास कर रही है। शर्मा ने कहा कि यह न केवल संविधान का खुला अपमान है, बल्कि देश की जनता और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ भी विश्वासघात है।

    अमित शर्मा ने आगे कहा कि यदि आम नागरिक के खिलाफ ऐसा कोई आदेश होता, तो तुरंत कार्रवाई कर दी जाती, लेकिन मंत्री होने के कारण विजय शाह को विशेष संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार के लिए कानून और संविधान से ऊपर उसके मंत्री हैं। कांग्रेस महासचिव ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी। प्रदर्शन में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार “कानून का राज” होने का दावा करती है, लेकिन जब बात अपने नेताओं की आती है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका के आदेश सर्वोपरि होते हैं और उनकी अवहेलना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने राज्यपाल से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक पार्टी सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।