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  • 19 दिसंबर को बदलेगा देश का प्रधानमंत्री? पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल

    19 दिसंबर को बदलेगा देश का प्रधानमंत्री? पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल


    नई दिल्‍ली । देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि 19 दिसंबर को भारत को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है, और इस बार प्रधानमंत्री मराठी समुदाय से होगा। यह बयान उन्होंने पिंपरी-चिंचवड़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने इसी महीने यह दावा दूसरी बार दोहराया है। इससे पहले सांगली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी उन्होंने इसी तरह की बात कही थी। चव्हाण का कहना है कि वे लंबे समय तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम कर चुके हैं और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को गहराई से समझते हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे उनके बयान पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    अमेरिका की घटनाओं से जोड़ा भारत का राजनीतिक भविष्य
    अपने बयान में चव्हाण ने अमेरिका की हालिया राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में एक व्यक्ति द्वारा कई बड़े नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किए गए हैं, जिनके खुलासे जल्द होने वाले हैं। चव्हाण के अनुसार, अमेरिका में प्रस्तावित एक नए कानून के तहत 19 दिसंबर को कई बड़े नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं, जिसका असर वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं पता कि वे नेता कौन हैं, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

    एपस्टीन फाइल्स का हवाला
    पृथ्वीराज चव्हाण ने अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन फाइल्स का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन फाइल्स के सामने आने से अमेरिका की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति भी इससे प्रभावित हुई है। हाल ही में डेमोक्रेटिक समिति द्वारा ट्रंप और एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

    भाजपा ने दावे को बताया अफवाह
    पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका की किसी भी घटना का भारत की सरकार या प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इस तरह की बातें जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाहें हैं।

    भाजपा का आरोप है कि मराठी प्रधानमंत्री बनने और सत्ता परिवर्तन के दावे देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हैं। पार्टी ने साफ कहा है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और ऐसे बयानों का कोई आधार नहीं है।

    फिलहाल, पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जहां कांग्रेस समर्थक इसे संभावित बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे निराधार बयानबाजी मान रही है। अब सभी की निगाहें 19 दिसंबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि यह दावा महज राजनीतिक बयान था या इसके पीछे कोई बड़ा घटनाक्रम छिपा है।

  • हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास

    हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास


    नई दिल्‍ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma)ने कांग्रेस पर एकबार फिर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह कट्टर भाजपाई (Hardcore BJP)बनने की कोशिश करते रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह भूल गए हैं कि वह कांग्रेस से भाजपा (BJP)में आए थे। उन्होंने साल 2015 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

    सरमा से जब पूछा गया कि सिर्फ असम नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों में आप भाजपा के गो टू मैन बन गए हैं, अब तो कोई यकीन भी नहीं करता कि आप कांग्रेस से आए हैं। आज तक के कार्यक्रम में पूछे गए इस सवाल का जवाब मजाकिया अंदाज में दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं भी भूल गया हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सबको भूल जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘बीजेपी से ज्यादा तो बीजेपी नहीं हो सकता पर अच्छा बीजेपी होने की कोशिश करता हूं। पूरा कट्टर बीजेपी बन जाऊं, उसका प्रयास तो होता रहता है।’

    क्यों छोड़ी कांग्रेस
    सरमा ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति के आरोप लगाए थे। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि जब से उनके बेटे गौरव गोगोई राजनीति में आए हैं, तब से वह मतलबी हो गए है। खास बात है कि वह कांग्रेस में रहते हुए मंत्री बने थे। वहीं, भाजपा में आने के बाद वह मंत्री बने और बाद में असम के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला।

    असम की सुरक्षा के लिए सामुदायिक रक्षा तंत्र तैयार करें: हिमंत
    गुरुवार को सरमा ने लोगों से अपील की कि वे राज्य की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर मिलकर रक्षा तंत्र तैयार करें। सरमा ने लोगों से आग्रह किया कि वे उन लोगों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार करें जो कथित तौर पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमें उन्हें (जो लोग अतिक्रमण करते हैं) आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन अगर वे ऊपरी असम के कुछ स्थानों पर पहले से ही मौजूद हैं, तो हम उन्हें वहां से हटा देंगे, जैसा हमने उरीयमघाट में किया था।’

    राज्य सरकार ने नगालैंड के साथ राज्य की सीमा पर उरीयमघाट में रेंगमा संरक्षित वन में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया, जिसमें लगभग 11,000 बीघे (लगभग 1,500 हेक्टेयर) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान में लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हुए, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले असम को ‘सुरक्षित’ नहीं बना सकती है। सभी को उस प्रक्रिया में योगदान देना होगा।