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  • इंदौर जैन मंदिर में बड़ी चोरी: 10 लाख से अधिक की चांदी व अष्टधातु की मूर्तियां गायब, CCTV में कैद हुए चोर

    इंदौर जैन मंदिर में बड़ी चोरी: 10 लाख से अधिक की चांदी व अष्टधातु की मूर्तियां गायब, CCTV में कैद हुए चोर


    नई दिल्ली। इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र स्थित ग्रेटर बाबा जैन मंदिर में सोमवार तड़के बड़ी चोरी की घटना सामने आई। अज्ञात चोर रात करीब 2:18 बजे मंदिर परिसर में दाखिल हुए और लगभग 42 मिनट तक अंदर रहे। इसके बाद वे 3 बजे के आसपास वहां से फरार हो गए। चोरों ने मंदिर की रेकी पहले से की थी, जिससे उन्हें वारदात को अंजाम देने में आसानी हुई।

     चांदी और अष्टधातु की मूर्तियां सहित धार्मिक सामग्री चोरी
    चोर मंदिर से भारी मात्रा में धार्मिक सामान लेकर फरार हुए। चोरी गए सामान में शामिल हैं-

    5 चांदी की मूर्तियां
    1 मिश्र धातु की मूर्ति
    1 शिला
    2 शांति धारा पात्र
    28 कलश
    पूरे सामान की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

    चौकीदार को नहीं लगी भनक, सुबह खुला मामला
    मंदिर के चौकीदार राकेश त्रिवेदी ने बताया कि रोज की तरह रात 10:30 बजे मंदिर बंद किया गया था। सुबह 5 बजे जब मंदिर खोला गया, तब गर्भगृह से मूर्तियां गायब मिलीं।
    उन्होंने बताया कि रात में किसी तरह की हलचल का पता नहीं चला और न ही उन्हें चोरी की कोई भनक लगी।

     CCTV में कैद हुई पूरी वारदात, पुलिस जांच में जुटी
    एरोड्रम थाना पुलिस के अनुसार, चोर बाइक से मंदिर परिसर पहुंचे थे। इनमें से एक आरोपी ने दीवार फांदकर अंदर प्रवेश किया और चोरी की घटना को अंजाम दिया।
    पूरी वारदात मंदिर में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान और तलाश में जुट गई है।

    फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, समाज में आक्रोश
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य एकत्र किए। जैन समाज के लोगों ने घटना पर नाराजगी जताई और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि हाल के दिनों में जैन मंदिरों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे चिंता बढ़ रही है।

    पुलिस का दावा: जल्द होगी गिरफ्तारी
    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि CCTV फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी

    जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी


    नई दिल्ली।  इंदौर में जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निगम कमिश्नर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी क्षितिज सिंघल ने कुल 289 अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
    यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के खिलाफ की गई है जो 1 मई से लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कहा है कि यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
     सख्त कार्रवाई की चेतावनी
    नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है। साथ ही जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
    प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तत्काल ड्यूटी पर लौटें और अपना जवाब 4 मई शाम 5:30 बजे तक प्रस्तुत करें। तय समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
    प्रशासन का सख्त संदेश
    अधिकारियों ने साफ किया है कि जनगणना कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह देश की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहद जरूरी डेटा संग्रह प्रक्रिया है।

    इंदौर प्रशासन की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी कार्यों में अनुशासन सर्वोपरि है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कर्मचारी समय पर जवाब देते हैं या उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है।

  • महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग

    महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के मौके पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम अब कानूनी विवाद में बदल गया है। इस मामले में 50 लाख रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया है, जिसमें श्वेताम्बर जैन महासंघ न्यास के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    नोटिस अक्षय जैन की ओर से उनके अधिवक्ता के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि महासंघ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में आधिकारिक लेटरहेड का दुरुपयोग करते हुए निराधार और अपमानजनक टिप्पणियां प्रकाशित की गईं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

    नोटिस के अनुसार, यह पत्र केवल संस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी वायरल हुआ। इससे संबंधित पक्ष की सार्वजनिक छवि को ठेस पहुंची है। दावा किया गया है कि पिछले 40 वर्षों से व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय अक्षय जैन की साख को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

    विवाद की जड़ में महावीर जन्म कल्याणक के दिन हुए नवकारसी आयोजन का एक घटनाक्रम है, जिसमें ट्रैक्टर खड़ा होने को लेकर विवाद हुआ था। नोटिस में कहा गया है कि इस घटना के लिए इवेंट कंपनी के संचालक ने पहले ही लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांग ली थी। इसके बावजूद करीब 29 दिन बाद आरोपों के साथ पत्र जारी करना दुर्भावनापूर्ण बताया गया है।

    इसके अलावा 29 अप्रैल को हुई बैठक के मिनट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संस्था के मंच का इस्तेमाल कर व्यक्तिगत आरोपों को संस्थागत रूप दिया गया, जिससे न केवल संस्था की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया गया।

    नोटिस में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 (मानहानि) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) का हवाला देते हुए इसे दंडनीय कृत्य बताया गया है। साथ ही इसे दीवानी क्षति के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है।

    नोटिस में 15 दिनों के भीतर 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति, 25 हजार रुपए विधिक खर्च, और 7 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी जारी करने की मांग की गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने और भविष्य में ऐसे कृत्यों से बचने की भी शर्त रखी गई है।

    स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि तय समयसीमा में मांगें पूरी नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा और अलग से दीवानी वाद भी दायर किया जाएगा।

  • इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। गुरुवार को कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मटका फोड़ कर अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन मोती तबेला चौराहा और छत्रीबाग क्षेत्र में किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने खाली मटके फोड़कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    इस प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह ने किया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम आम जनता से पूरे महीने का पानी का बिल वसूल रहा है, जबकि सप्लाई केवल 15 दिन ही सही तरीके से हो रही है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुंची है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज लीकेज की वजह से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।

    कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय होटलों और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है, जबकि कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। इससे शहर में असमान वितरण व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़े कई कार्य और फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कई वार्डों में जल संकट और गहरा गया है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे स्थिति और खराब होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा।

    इस प्रदर्शन ने शहर में जल संकट को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पानी की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • महू में चिप्स फैक्ट्री में बॉयलर ब्लास्ट, धमाके से मचा हड़कंप, बच्चे का चेहरा झुलसा

    महू में चिप्स फैक्ट्री में बॉयलर ब्लास्ट, धमाके से मचा हड़कंप, बच्चे का चेहरा झुलसा


    महू । मध्य प्रदेश के महू क्षेत्र के कोदरिया गांव में शनिवार सुबह एक आलू चिप्स फैक्ट्री में जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में बॉयलर फटने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में फैक्ट्री परिसर में रहने वाला एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।

    गंभीर हालत में बच्चे को किया रेफर
    घायल बच्चे की पहचान शुभम, पिता जितेंद्र मकवाना के रूप में हुई है। धमाके के तुरंत बाद उसे महू के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर इंदौर रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि उसका चेहरा बुरी तरह झुलस गया है।

    धमाके की आवाज से दहला इलाका
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि उसकी गूंज दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद बॉयलर से निकलती भाप ने हालात को और भयावह बना दिया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में घबराहट फैल गई। शुभम अपने परिवार के साथ इसी फैक्ट्री परिसर में रहता था, जहां उसके पिता भी काम करते हैं।

    अवैध फैक्ट्रियों पर उठे सवाल
    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कोदरिया और आसपास कई यूनिट बिना अनुमति के चल रही हैं, जिन पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। हादसे के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच पर सभी की नजर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध फैक्ट्रियों पर सख्ती की जाती, तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता था।

  • जमीन मुक्त कराने के नाम पर खेल, एक महीने में दो बार भेजी गई नकली NOC

    जमीन मुक्त कराने के नाम पर खेल, एक महीने में दो बार भेजी गई नकली NOC


    इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन से जुड़े कामकाज को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में फर्जी एनओसी (No Objection Certificate) का संगठित रैकेट सक्रिय होने का खुलासा हुआ है, जिसमें प्राधिकरण के अंदरूनी लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

    एक महीने में दो बार भेजी गई फर्जी NOC

    मामला योजना 97 पार्ट-4 बिजलपुर की करीब 20 हजार वर्गफुट जमीन से जुड़ा है। जमीन मालिक ने ले-आउट मंजूरी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) में आवेदन किया था।

    जांच के दौरान TNCP अधिकारियों को संदेह हुआ क्योंकि IDA से जारी NOC और उसके प्रारूप में साइन मेल नहीं खा रहे थे। जब पुष्टि के लिए IDA से संपर्क किया गया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ-ऐसी कोई NOC वहां से जारी ही नहीं हुई थी। हैरानी की बात यह है कि करीब डेढ़ महीने के भीतर दो बार फर्जी NOC भेजी गई।

     अफसरों के साइन भी निकले नकली

    भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने साफ कहा कि उनके नाम से फर्जी साइन कर NOC बनाई गई। इससे पहले कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारी के भी सिग्नेचर फर्जी पाए गए।

    इससे साफ है कि रैकेट काफी सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और दस्तावेजों को असली जैसा दिखाने के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षर तक कॉपी किए जा रहे थे।

     IDA कर्मचारी पर शक, मोबाइल बंद कर गायब

    इस पूरे मामले में IDA के विधि विभाग के बाबू शुभम श्रीवास्तव पर संदेह गहराया है। खुलासे के बाद से वह बिना सूचना के गायब है, उसका मोबाइल भी बंद है और घर से भी लापता बताया जा रहा है। इससे जांच और गंभीर हो गई है।

    करोड़ों के घोटाले की आशंका

    सूत्रों के मुताबिक, यह रैकेट पिछले करीब एक साल से सक्रिय था और जमीन की कीमत के हिसाब से NOC जारी करने के रेट तय किए जाते थे। आशंका है कि इस तरह कई मामलों में शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है। अब प्राधिकरण पुरानी NOC फाइलों की भी जांच कराने की तैयारी में है, जिससे इस घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है।

     अब पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

    मामले की गंभीरता को देखते हुए IDA के सीईओ परीक्षित झाड़े ने NOC प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो सके। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

  • इंदौर में नकली नमक का भंडाफोड़ टाटा नमक के नाम पर चल रही फैक्ट्री पर छापा

    इंदौर में नकली नमक का भंडाफोड़ टाटा नमक के नाम पर चल रही फैक्ट्री पर छापा


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है जहां ब्रांडेड नमक के नाम पर नकली उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचे जा रहे थे। एरोड्रम थाना पुलिस ने लोकनायक नगर क्षेत्र में छापेमार कार्रवाई करते हुए टाटा नमक के नाम पर चल रही एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।

    पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मौके से 840 पैकेट नकली नमक और लगभग 1850 किलो कच्चा माल जब्त किया है। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री लंबे समय से संचालित हो रही थी और लोगों को ब्रांडेड उत्पाद के नाम पर धोखा दिया जा रहा था।

    इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब टाटा कंज्यूमर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायत पुलिस को दी गई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए छापा मारा और पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक जितेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि नकली नमक बनाने के लिए कच्चा माल और पैकेजिंग सामग्री दिल्ली से मंगाई जाती थी। इसके बाद इंदौर में इसे तैयार कर टाटा नमक के नाम से पैक कर बाजार में सप्लाई किया जाता था। इस तरह आरोपी लोगों के भरोसे और ब्रांड की साख का फायदा उठाकर अवैध मुनाफा कमा रहा था।

    पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह नकली नमक किन-किन इलाकों में सप्लाई किया गया और इस धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि यह अवैध कारोबार कब से चल रहा था।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी जिससे इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि बाजार में नकली उत्पादों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय सतर्क रहने की जरूरत है।

  • सिंचाई से विवाद बढ़ा: एक्ट्रेस और कारोबारी के बीच जमीन का सियासी टकराव!

    सिंचाई से विवाद बढ़ा: एक्ट्रेस और कारोबारी के बीच जमीन का सियासी टकराव!


    इंदौर: टीवी एक्ट्रेस रेमन कक्कर ने शराब कारोबारी और क्रिकेट टीम मालिक सूरज रजक पर अपनी 300 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया है। रेमन के मुताबिक, सूरज ने पहले उनके हसबैंड और भाई से जमीन किराए पर लेने की मांग की थी, जिसे उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद भी सूरज ने जमीन पर खंभे गाड़े और शेड बनाने की कोशिश की, जिससे वह खुद मौके पर पहुंचीं।

    FIR दर्ज, पुलिस कार्रवाई

    रेमन कक्कर ने बताया कि 3 अप्रैल को मुंबई से इंदौर लौटने के बाद उन्हें पता चला कि जमीन पर कब्जा हो रहा है। उन्होंने तुरंत लसूड़िया थाने पहुंचकर शिकायत की। पुलिस ने प्रारंभ में FIR दर्ज करने में देरी की, लेकिन देर रात टीआई के आने पर मामला दर्ज किया गया।

    जमीन का इतिहास

    रेमन ने बताया कि उनकी 6.84 एकड़ जमीन देवास नाके पर है, जिसमें से 1.25 एकड़ जमीन इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) को सड़क निर्माण और विकास के लिए दी गई थी। यह जमीन उनके पिता ने 1964 में खरीदी थी। उनका कहना है कि जमीन को विकास के लिए फ्री में दिया गया था, जिसकी कीमत 70 करोड़ से अधिक है। ऐसे में वहां शराब की दुकान खोलना नियमों के खिलाफ है।

    भाई ने भी आरोपों की पुष्टि की

    रेमन के भाई रणधीर सलूजा ने कहा कि सूरज रजक ने थाने में आवेदन देकर सरकारी जमीन पर वाइन शॉप का निर्माण करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर IDA से सड़क के लिए ली गई जमीन पर कोई शराब दुकान खोलना चाहता है, तो यह गैरकानूनी है। पहले आबकारी विभाग से अलॉटमेंट लेना जरूरी है।

    विवाद की पृष्ठभूमि

    यह जमीन मुख्य सड़क पर स्थित है और इसकी कीमत 300 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सूरज रजक ने हाल ही में 150 करोड़ रुपए में शराब ठेका लिया है। रेमन का कहना है कि नियमों के बावजूद दुकान खोलने की कोशिश की गई। वहीं, 2025 में भी सूरज रजक और उनके सुरक्षाकर्मियों पर कनाड़िया क्षेत्र में किसान से मारपीट और हवाई फायरिंग के आरोप लगे थे।

    रेमन की अपील

    रेमन कक्कर ने कहा कि IDA को भी इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और FIR कराना चाहिए, ताकि जमीन पर किसी भी तरह का गैरकानूनी कब्जा रोका जा सके।

  • पुजारी परिवार में हलचल, पत्नी ने लगाए गंभीर दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप

    पुजारी परिवार में हलचल, पत्नी ने लगाए गंभीर दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप


    इंदौर । इंदौर के खजराना गणेश मंदिर के पुजारी पुनीत भट्ट के परिवार का पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक हो गया है। पुजारी की दूसरी पत्नी इंदिरा भट्ट ने अपने पति और ससुराल पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, घर से निकालने की साजिश और तलाक के लिए धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इंदिरा का कहना है कि उनके खिलाफ ऑपरेशन एग्जिट चलाया गया और उनके पति ने इस मामले में सीधे उनका विरोध किया।

    इंदिरा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनका रिश्ता सामान्य प्रक्रिया से नहीं बल्कि जल्दबाजी में तय हुआ। उनकी पहली मुलाकात से लेकर शादी तक का समय महज 17 दिन का था। वह उस समय वर्किंग महिला थीं और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि शादी की सारी व्यवस्थाएं उनके पति संभाल लेंगे। इंदिरा कहती हैं कि शादी से पहले उज्जैन में पांच घंटे की मुलाकात और बातचीत के बाद शादी हुई और उन्हें लगा कि स्वयं खजराना गणेश जी की कृपा उनके ऊपर है।

    हालात तब बदल गए जब पुनीत भट्ट के दत्तक पुत्र उदित की पत्नी गर्भवती हुई। इंदिरा का आरोप है कि संतान की चाह में ही उन्हें शादी के लिए चुना गया था। जुलाई 2025 में यह पुष्टि होने के बाद उनकी अहमियत परिवार के लिए खत्म हो गई। इंदिरा ने बताया कि उनके खिलाफ FIR उसी समय दर्ज करवाई गई जब बेटे के घर गर्भवती पत्नी के पेट में लात मारने का झूठा आरोप लगाया गया। 19 सितंबर 2025 को पुनीत भट्ट ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामला संभाल लिया जाएगा। लेकिन अगले ही दिन घर पर ताला लगा हुआ मिला और उनके जेवर और नकद राशि भी ननद ने हड़प ली।

    कहानी का नाटकीय मोड़ तब आया जब 29 दिसंबर को इंदिरा कार से जा रही थीं और पुनीत भट्ट ने बीच सड़क में उनकी गाड़ी रोककर तलाक की धमकी दी। इंदिरा ने बताया कि उनके पति ने माफी मांगी और कहा कि बस आपसी सहमति से तलाक दे दो।

    दूसरी ओर पुनीत भट्ट ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह एक गहरी साजिश है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया मामला है। पुनीत ने बताया कि उनकी पहली पत्नी का निधन 2020 में हुआ और यह दूसरी शादी देवास निवासी रिश्तेदार के माध्यम से हुई। उन्होंने दावा किया कि शादी के बाद इंदिरा ने उनके साथ “साइकोलॉजिकल गेम” खेलना शुरू कर दिया और तलाक की पहल खुद इंदिरा ने की थी।

    एसीपी खजराना कुंदन मंडलोई ने बताया कि जनसुनवाई में शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें दावा किया गया कि पुनीत भट्ट ने दहेज के रूप में फॉर्च्यूनर कार और करीब एक करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं, इस महिला के खिलाफ पहले भी मारपीट का आरोप दर्ज किया जा चुका है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और सभी पक्षों के बयानों के आधार पर कार्रवाई करेगी। इस तरह खजराना मंदिर के पुजारी परिवार का विवाद अब सार्वजनिक हो गया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

  • इंदौर के विजयनगर में पुलिस की हाईटेक निगरानी: 40 से ज्यादा CCTV कैमरे लगे, जल्द 150 कैमरों से होगी पूरे क्षेत्र की मॉनिटरिंग

    इंदौर के विजयनगर में पुलिस की हाईटेक निगरानी: 40 से ज्यादा CCTV कैमरे लगे, जल्द 150 कैमरों से होगी पूरे क्षेत्र की मॉनिटरिंग


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अपराध पर लगाम लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस लगातार नई तकनीकों का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में शहर के व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में गिने जाने वाले विजयनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने हाईटेक निगरानी व्यवस्था शुरू की है। क्षेत्र में फिलहाल 40 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनके माध्यम से पूरे इलाके की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में इन कैमरों की संख्या बढ़ाकर 150 से अधिक करने की योजना भी तैयार की गई है।

    जानकारी के मुताबिक इन सभी कैमरों का कंट्रोल सीधेमध्य प्रदेश पुलिस के विजय नगर पुलिस स्टेशन से किया जा रहा है। खास बात यह है कि थाना प्रभारी के कक्ष में ही एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है जहां से पुलिसकर्मी लगातार कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस व्यवस्था के जरिए पुलिस संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रख सकती है और किसी भी घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई कर सकती है।

    विजयनगर थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस इस्तेमाल से अपराधियों पर नजर रखना आसान हो गया है। उनके अनुसार सीसीटीवी कैमरे अपराध रोकने और वारदात के बाद आरोपियों की पहचान करने में बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। कैमरों के माध्यम से न केवल क्षेत्र की निगरानी की जा रही है बल्कि कई मामलों में अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया है।

    पुलिस अब इस निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। अगले चरण में क्षेत्र के घरों अस्पतालों मॉल दुकानों और अन्य निजी संस्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी पुलिस के कंट्रोल रूम से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह योजना सफल होती है तो पूरे विजयनगर क्षेत्र की निगरानी एक ही जगह से संभव हो सकेगी। इससे पुलिस को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

    थाना प्रभारी के मुताबिक कैमरे लगने के बाद क्षेत्र में चोरी और अन्य अपराधों की घटनाओं में कमी देखने को मिली है। कई मामलों में कैमरों में कैद फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे कैमरों की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे अपराधियों के लिए क्षेत्र में वारदात करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

    फिलहाल पुलिस का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द विजयनगर थाना क्षेत्र में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि पूरे इलाके के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सके। पुलिस का कहना है कि इस हाईटेक निगरानी व्यवस्था से न केवल अपराध पर नियंत्रण मिलेगा बल्कि आम लोगों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।