Tag: Indore News

  • इंदौर में जुटेगी सेमीकंडक्टर उद्योग की ताकत, CM मोहन यादव के शुभारंभ से निवेश और तकनीक पर टिकी नजरें

    इंदौर में जुटेगी सेमीकंडक्टर उद्योग की ताकत, CM मोहन यादव के शुभारंभ से निवेश और तकनीक पर टिकी नजरें


    इंदौर । मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंदौर में महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 अक्टूबर को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 का शुभारंभ किया। दो दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देना और देश विदेश की कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना है। सरकार की कोशिश है कि मध्य प्रदेश को तकनीक आधारित उद्योगों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाए और प्रदेश में नए औद्योगिक अवसरों के साथ रोजगार के रास्ते भी खोले जाएं।

    समिट में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। इस आयोजन में देश और विदेश की कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक उद्योग विशेषज्ञ शिक्षाविद और स्टार्टअप से जुड़े लोग भाग ले रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 50 से अधिक कंपनियां इस समिट में शामिल हैं। कंपनियां अपनी तकनीक उत्पाद और समाधान प्रदर्शित कर रही हैं। आयोजन के दौरान निवेश की संभावनाओं के साथ तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को लेकर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस तरह के आयोजन से प्रदेश में नई परियोजनाओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा।

    सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। मोबाइल फोन कंप्यूटर इलेक्ट्रिक वाहन औद्योगिक मशीनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उपकरणों में इनका व्यापक इस्तेमाल होता है। डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण दुनिया भर में चिप निर्माण और उससे जुड़ी तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ तकनीकी सेवाओं और सहायक उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

    प्रदेश सरकार ने निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2025 को मंजूरी दी है। इस नीति में पात्र निवेशकों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें 25 प्रतिशत सब्सिडी और दस वर्षों तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने का प्रावधान शामिल है। सरकार की मंशा है कि ऐसी सुविधाओं के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित किया जाए और प्रदेश में सेमीकंडक्टर से जुड़ी परियोजनाओं की स्थापना को गति मिले।

    इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं के बीच पारस सेमीकंडक्टर्स की ओर से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने के लिए 6200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से जुड़ा समझौता भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि प्रस्तावित निवेश और वास्तविक परियोजना के क्रियान्वयन के बीच अंतर होता है इसलिए इसकी प्रगति पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

    समिट में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा युवाओं को आधुनिक तकनीक के लिए प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। चिप डिजाइन निर्माण और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं के लिए भविष्य में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अब इस आयोजन की सफलता इस बात से तय होगी कि कितने निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं और कितने रोजगार के अवसर तैयार होते हैं। इंदौर में आयोजित यह समिट मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग में आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • इंदौर में आज से सेमीकंडक्टर समिट का आगाज, ₹6200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर टिकी नजरें, चिप से AI तक बनेगी रणनीति

    इंदौर में आज से सेमीकंडक्टर समिट का आगाज, ₹6200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर टिकी नजरें, चिप से AI तक बनेगी रणनीति


    इंदौर । मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने और प्रदेश को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंदौर में दो दिवसीय सेमीकंडक्टर समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार से ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुरू होने वाली इस समिट में देश की 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक उत्पाद और समाधान प्रदर्शित करेंगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए निवेश की संभावनाएं तलाशना और मध्य प्रदेश को इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार करना है। समिट में प्रस्तावित 6200 करोड़ रुपये के निवेश पर विशेष नजर रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस आयोजन में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करने का विजन प्रस्तुत करेंगे। वे प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ उद्योग से जुड़े निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में प्रदेश में निवेश की संभावनाओं तकनीकी सहयोग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सरकार की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए निवेशकों को मध्य प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

    समिट का सबसे अहम पहलू पारस सेमीकंडक्टर्स की ओर से दिया गया करीब 6200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव है। कंपनी प्रदेश में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग इकाई स्थापित करने की योजना के तहत यह प्रस्ताव लेकर आई है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को गति मिल सकती है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना भी रहेगी। हालांकि प्रस्तावित निवेश को वास्तविक परियोजना में बदलने के लिए आगे की प्रक्रिया और फैसले महत्वपूर्ण होंगे।

    दो दिवसीय समिट में चिप डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग तक कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श होगा। एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक विशेषज्ञ शिक्षाविद और स्टार्टअप से जुड़े लोग इसमें हिस्सा लेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य उद्योग की जरूरतों को समझना और प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए संभावित रास्ते तलाशना है।

    समिट में लगने वाली प्रदर्शनी भी निवेश और कारोबारी साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें 50 से अधिक कंपनियां चिप डिजाइन पैकेजिंग और टेस्टिंग उपकरण तकनीकी सामग्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से संबंधित उत्पादों और क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगी। इससे कंपनियों को संभावित निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के साथ सीधे संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलेगा। तकनीकी समाधान प्रदर्शित करने के साथ यह मंच उद्योग की जरूरतों और उपलब्ध क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकता है।

    राज्य सरकार सेमीकंडक्टर नीति 2025 के तहत इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। समिट के दौरान पैनल चर्चाओं और राउंडटेबल बैठकों में निवेश आकर्षित करने तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने और मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के उपायों पर मंथन होगा। इस उद्योग के विस्तार के लिए केवल निवेश ही नहीं बल्कि कुशल मानव संसाधन अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं भी जरूरी हैं। ऐसे में इंदौर में होने वाली यह समिट मध्य प्रदेश की औद्योगिक रणनीति के लिहाज से अहम अवसर है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चर्चाओं और निवेश प्रस्तावों से प्रदेश को कितने ठोस औद्योगिक अवसर मिलते हैं।

  • दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल

    दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में गर्म दाल से झुलसे 30 वर्षीय युवक की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिजनों ने इलाज के दौरान इंजेक्शन दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दर्द से परेशान युवक को इंजेक्शन लगाने के बाद होश नहीं आया और बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चल सकेगा।

    एमआईजी पुलिस के मुताबिक मृतक आकाश वर्मा पुत्र कन्हैयालाल वर्मा सोमनाथ की चाल का निवासी था। रविवार को वह घर में गर्म दाल से झुलस गया था। हादसे में उसके पैर बुरी तरह जल गए थे। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसे भर्ती किया गया। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार होगा लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी मौत की खबर से परिवार में शोक छा गया।

    परिजनों और रिश्तेदारों के अनुसार आकाश का परिवार एमआईजी मेन रोड पर दाल पकवान की दुकान चलाता है। दुकान के लिए दाल घर पर ही उबाली जाती है। रविवार को आकाश ऊपर बने कमरे से गर्म दाल लेकर नीचे आ रहा था। इसी दौरान वह गर्म दाल की चपेट में आ गया और उसके पैर झुलस गए। हादसे के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया।

    परिवार का आरोप है कि मंगलवार रात आकाश दर्द के कारण चिल्ला रहा था। इसी दौरान डॉक्टरों ने उसे एक इंजेक्शन लगाया। परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन दिए जाने के बाद आकाश को होश नहीं आया। बुधवार रात चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत के बाद परिवार ने उपचार के तरीके को लेकर सवाल उठाए और इंजेक्शन दिए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने की आशंका जताई। हालांकि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि इंजेक्शन और युवक की मौत के बीच कोई सीधा संबंध था। इस संबंध में चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

    पुलिस ने परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए मामले में मर्ग कायम किया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान उपचार से जुड़े तथ्यों और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    इसी बीच इंदौर के खुड़ैल क्षेत्र से भी एक अन्य मौत का मामला सामने आया है। तिल्लोर खुर्द निवासी 46 वर्षीय अजय पुत्र दयाशंकर की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस के अनुसार अजय ने जहर खा लिया था और परिजन बुधवार को उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में भी पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    दोनों घटनाओं के बाद पुलिस मौतों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। आकाश वर्मा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं इलाज के दौरान लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका

    इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका


    इंदौर इंदौर के पास खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के नजदीक बुधवार सुबह घायल हालत में तेंदुआ दिखाई देने से आसपास के इलाके में चिंता का माहौल बन गया। तेंदुआ एक रहवासी मकान के पास बैठा नजर आया। ग्रामीणों के मुताबिक उसके सिर और मुंह पर चोट के निशान थे और वह सुस्त हालत में दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से अब तक तेंदुए की मौजूदगी और उसके घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास हरिओम ठाकुर के मकान के नजदीक लोगों ने तेंदुए को बैठे देखा। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ सामान्य रूप से सक्रिय नहीं दिख रहा था। उसके चेहरे और सिर पर चोट के निशान नजर आ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई गई कि वह किसी दूसरे वन्यजीव के साथ संघर्ष के दौरान घायल हुआ होगा। हालांकि चोट लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। तेंदुए को आबादी के नजदीक देखने के बाद आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई और पुलिस तथा वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू की। तेंदुआ कुछ समय बाद वहां से भाग गया था। ऐसे में वन विभाग की टीम उसकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्चिंग कर रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल होने के कारण तेंदुआ किसी खेत या झाड़ियों में छिपा हो सकता है। यदि वह आसपास के रहवासी क्षेत्र में मौजूद है तो लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए उसकी लोकेशन का पता लगाना और स्थिति की पुष्टि करना जरूरी माना जा रहा है।

    हरिओम ठाकुर के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उनके फार्म हाउस के आसपास तेंदुआ दिखाई दिया हो। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को भी एक तेंदुआ उनके फार्म हाउस में घुस आया था और वहां मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने उसे भगाया था। अब दोबारा मकान के पास तेंदुआ दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेंदुए की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग को सतर्कता बढ़ाने और लोगों को जरूरी जानकारी देने की आवश्यकता है।

    ठाकुर के अनुसार उनके मकान के पास रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं। उनका मानना है कि पहाड़ियों से तेंदुआ आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्र और आसपास के इलाके के बीच पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। फिलहाल खेतों में पानी देने का समय है और किसान सुबह तथा देर शाम तक खेतों में काम करते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि यदि घायल तेंदुआ खेतों या रास्तों के आसपास मौजूद रहा तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बढ़ सकती है।

    इस घटना के बाद अब वन विभाग की सर्चिंग पर नजर है। सबसे जरूरी है कि तेंदुए की वास्तविक स्थिति और उसके घायल होने की पुष्टि की जाए। तब तक स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और तेंदुए के नजदीक जाने या उसे घेरने की कोशिश नहीं करने की जरूरत है। वन विभाग की टीम के सामने चुनौती तेंदुए का पता लगाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।

  • इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना

    इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी सियासी बहस के बीच भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ अभियान चलाएगी। इसके तहत पदयात्रा से लेकर प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाया जाएगा।

    भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।

    अभियान की तैयारियों को लेकर बुधवार रात इंदौर में बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत पार्टी के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में अभियान की रूपरेखा और अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। भाजपा ने तय किया है कि अभियान को केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर पार्टी अपनी बात पहुंचाएगी।

    सुमित मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा निकाली जाएगी। हालांकि पदयात्रा का शुरुआती स्थान और रूट अभी तय नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रबुद्धजनों की गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है। युवाओं के साथ संवाद और छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बातचीत के जरिए भी अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका फ्रांस बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं और देश के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल या संस्था तक सीमित नहीं है बल्कि उन ताकतों के खिलाफ भी है जो उनके मुताबिक भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अभियान के जरिए विपक्ष के कथित षड्यंत्र को जनता के सामने रखें।

    अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए भाजपा ने अलग-अलग टोलियां भी बनाई हैं। नगर स्तरीय टोली के संयोजक सुधीर कोल्हे को बनाया गया है जबकि महेश कुकरेजा कैलाश पीपले हरप्रीत सिंह बक्शी मुकेश मंगल नेहा शर्मा और दीपक बागवान को जिम्मेदारी दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की टोली में आलोक दुबे वरुण पाल रितेश शर्मा और नितीन शर्मा शामिल हैं। पदयात्रा की जिम्मेदारी विधायक रमेश मेंदोला मधु वर्मा गोलू शुक्ला पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय स्वप्निल कोठारी और अक्षय कांति बम को सौंपी गई है। वहीं राष्ट्र चिंतन संवाद टोली में सांसद शंकर लालवानी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।

    भाजपा का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान भाजपा अपने तर्कों को जनता तक किस तरह पहुंचाती है और विपक्ष इन कार्यक्रमों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • कन्या भोज के बाद इंदौर में बवाल, बच्चियों पर पैसे चोरी का आरोप लगाकर मारपीट की शिकायत, शिक्षिका ने दी सफाई

    कन्या भोज के बाद इंदौर में बवाल, बच्चियों पर पैसे चोरी का आरोप लगाकर मारपीट की शिकायत, शिक्षिका ने दी सफाई


    इंदौर । इंदौर में कन्या भोज के लिए गईं सात बच्चियों से कथित मारपीट और उन्हें फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। घटना शहनाई रेसीडेंसी की बताई जा रही है जहां परिजनों की शिकायत के बाद एमआईजी पुलिस ने 62 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका अनिता मोहता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों का आरोप है कि बच्चियों को कन्या भोज और उपहार देने के बहाने फ्लैट में ले जाया गया और वहां चोरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट की गई। वहीं शिक्षिका ने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मंदिर में रखे रुपए गायब होने के बाद उन्होंने बच्चियों से केवल पूछताछ की थी और किसी के साथ मारपीट नहीं की।

    परिजनों के मुताबिक बच्चियां कन्या पूजन के लिए शहनाई रेसीडेंसी गई थीं। वहां अलग-अलग फ्लैट में कन्या भोज और पूजन का कार्यक्रम चल रहा था। बच्चियों को खाना और उपहार मिलने की उम्मीद थी लेकिन कुछ समय बाद जब वे घर नहीं लौटीं तो परिवार के लोग परेशान हो गए। उनकी तलाश करते हुए परिजन सोसाइटी पहुंचे। उनका आरोप है कि बच्चियां एक फ्लैट से रोते हुए नीचे आईं और उन्होंने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। परिवार का दावा है कि बच्चियों को करीब चार घंटे तक फ्लैट में रोके रखा गया और उनके साथ मारपीट की गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चियों से वीडियो बनवाकर उनसे रुपए लेने की बात कहलवाई गई। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    दूसरी ओर रिटायर्ड शिक्षिका अनिता मोहता ने परिजनों के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि बच्चियां खुद उनके फ्लैट पर आई थीं और उन्होंने खाना मांगा था। इसके बाद उन्होंने बच्चियों को अंदर बैठाया और उनके लिए दाल चावल बनाने लगीं। शिक्षिका के मुताबिक बच्चियों ने बताया था कि वे सोसाइटी के दूसरे फ्लैट से आ रही हैं। बाद में उन्हें मंदिर में रखे रुपए और लिफाफे गायब होने की जानकारी मिली। अनिता का दावा है कि जब बच्चियां दोबारा उनके पास आईं तो उन्होंने रुपए के बारे में पूछा। इस दौरान बच्चियों ने एक बच्ची की ओर इशारा किया और पूछताछ में रुपए लेने की बात सामने आई। शिक्षिका ने कहा कि उन्होंने बच्चियों को नहीं पीटा और न ही उन्हें बंधक बनाया। उनके अनुसार वे खुद बच्चियों को नीचे छोड़ने गई थीं।

    सोसाइटी के कुछ रहवासियों और सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक बच्चियां दोपहर करीब 12 बजे परिसर में पहुंची थीं। वे अलग-अलग फ्लैट में कन्या पूजन के लिए गई थीं जहां उन्हें रुपए और उपहार दिए गए। रहवासियों ने बताया कि बच्चियां हर साल कन्या पूजन के लिए सोसाइटी आती हैं। हालांकि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में मेडिकल जांच की जानकारी भी सामने आई है। परिजनों ने बच्चियों के हाथ-पैरों और गालों पर चोट के आरोप लगाए थे लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में मारपीट से लगी किसी चोट की पुष्टि नहीं हुई। वहीं सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिजनों का कहना है कि परिसर में कैमरे लगे हैं जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संबंधित फ्लैट और उसी मंजिल पर कैमरे नहीं थे।

    पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर बच्चियों के बयान लिए हैं। अब जांच में शिकायतों और शिक्षिका के पक्ष के साथ उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

  • विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक

    विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक


    इंदौर । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर इंदौर की डीआरपी लाइन में शस्त्र पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में इंदौर पुलिस को होंडा कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के तहत 50 हाईटेक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इन आधुनिक बाइकों के मिलने से शहर में पुलिस की गश्त को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों को तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। इन बाइकों में पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इंदौर की डीआरपी लाइन में हर साल विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है। इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। पूजा स्थल को सजाया गया है और कार्यक्रम के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। आयोजन में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश सिंह और मयंक अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। शस्त्र पूजन विजयादशमी की परंपरा का हिस्सा है और पुलिस विभाग में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान पुलिस को मिलने वाली 50 बाइक की खासियत भी चर्चा में है। ये 350 सीसी क्षमता वाली बाइक होंगी जिनमें पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी इन बाइकों पर लगे सिस्टम के माध्यम से लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा बाइकों में हेलमेट रखने की व्यवस्था भी की गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य पुलिस की गश्त को अधिक सुविधाजनक बनाना और आपात स्थिति में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने में मदद करना है।

    शहर के कई हिस्सों में ऐसी संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं जहां बड़े पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे स्थानों पर बाइक से गश्त करना अपेक्षाकृत आसान होता है। नई बाइक मिलने के बाद पुलिसकर्मी संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में बेहतर तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर मौके तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। इससे पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस की गश्त व्यवस्था में दोपहिया वाहनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बड़े वाहनों की तुलना में बाइक से तंग रास्तों पर पहुंचना और भीड़ के बीच से निकलना आसान होता है। अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए पुलिसकर्मी भीड़ को दिशा-निर्देश देने या जरूरी सूचना प्रसारित करने का काम भी कर सकेंगे। हालांकि इन सुविधाओं का वास्तविक असर इनके उपयोग और तैनाती के तरीके पर निर्भर करेगा। पुलिस विभाग की ओर से इन बाइकों का इस्तेमाल शहर की जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।

    विजयादशमी के अवसर पर इंदौर के विभिन्न थानों में भी शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संबंधित थानों में अधिकारी अपने स्तर पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं डीआरपी लाइन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला आयोजन खास रहेगा क्योंकि इसी अवसर पर पुलिस को 50 आधुनिक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इस पहल से इंदौर पुलिस की गश्त व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के अलग-अलग इलाकों में तेजी से पहुंचने की क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।

  • नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच

    नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच


    इंदौर । इंदौर के कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला लगातार चर्चा में है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल चौहान के खिलाफ हीरा नगर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आया है। वीडियो में कमल चौहान अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक कनकेश्वरी गरबा पंडाल में नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामले में कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसके बाद हीरा नगर पुलिस ने कमल चौहान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
    प्रकरण दर्ज होने के बाद कमल चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि बालिका के पिता शराब के नशे में पंडाल पहुंचे थे और बालिका भी आयोजन स्थल के अंदर आने का प्रयास कर रही थी। कमल चौहान ने कहा कि वह कई वर्षों से गरबा आयोजन में सेवाएं देते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से हुई गलती के लिए माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
    अपने बयान में कमल चौहान ने यह भी कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजवाड़ा चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर कमल चौहान अपनी सफाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग नाबालिग से जुड़े मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आयोजन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के अनुसार घटना के कुछ समय बाद मुख्यमंत्री इसी गरबा आयोजन में पहुंचे थे और उन्होंने कन्या पूजन किया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक समय पर पहुंची थी या नहीं और पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों पर स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ लोग इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से कर रहे हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल कमल चौहान के खिलाफ दर्ज प्रकरण में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।

  • इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत

    इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत


    इंदौर। इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने अदालत में तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया कि बायपास पर मौजूद गड्ढों को भर दिया गया है और अब वहां पहले जैसी समस्या नहीं है। हालांकि सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी सवाल उठाए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मौके पर जाकर सड़क का निरीक्षण करने और वास्तविक स्थिति से अदालत को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डबल बेंच में हुई। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान NHAI से यह बताने को कहा था कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
    इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर मातृ फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से दायर इस याचिका में सड़क की खराब स्थिति और वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर बड़े-बड़े गड्ढे और खराब सर्विस रोड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। इसके अलावा खुले ड्रेनेज और जलभराव की समस्या भी सामने रखी गई है। कुछ स्थानों पर स्ट्रीट लाइट खराब या बंद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि इससे रात के समय वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। याचिका में दुर्घटना संभावित स्थानों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है।
    तीन दिन पहले हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि बायपास की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। उनका कहना था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं होने के कारण सड़क पर हादसों का खतरा बना हुआ है। हालांकि NHAI ने शुक्रवार को तस्वीरें पेश कर दावा किया कि गड्ढों को भरने का काम पूरा कर लिया गया है और समस्या दूर हो चुकी है। अब अदालत के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता मौके पर जाकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखेंगे। उनका निरीक्षण और उसके आधार पर अदालत में दी जाने वाली जानकारी अगली सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
    इस मामले में सड़क सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन भी प्रमुख मुद्दा है। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अवैध ढाबों के साथ व्यावसायिक अतिक्रमण पर नियंत्रण की मांग की गई है। इसके अलावा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। प्रकाश व्यवस्था बेहतर बनाने और यातायात की निगरानी मजबूत करने की जरूरत भी उठाई गई है। आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करना भी याचिका में उठाए गए मुद्दों में शामिल है।
    अब 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में बायपास की मौजूदा हालत और सुधार कार्यों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। NHAI के दावे और याचिकाकर्ता के मौके पर किए जाने वाले निरीक्षण के बाद अदालत के सामने सड़क की वास्तविक स्थिति से जुड़ी जानकारी आएगी। ऐसे में इंदौर-देवास बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों की नजर अब अगली सुनवाई पर रहेगी।

  • इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

    इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन


    इंदौर । इंदौर के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे डॉक्टरों नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर 175 कर्मचारियों के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। अब सभी संबंधित कर्मचारियों को अपनी मूल पदस्थापना पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मूल पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग देने के बाद ही कर्मचारियों का अक्टूबर महीने का वेतन जारी किया जाएगा।
    जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और उन्हें उनके मूल कार्यस्थल पर भेजा जाए। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय को भी देनी होगी। विभाग ने इस मामले में किसी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का उद्देश्य कर्मचारियों की तैनाती को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लागू करना और मूल पदस्थापना से जुड़े दायित्वों को सुनिश्चित करना बताया गया है।
    वेतन को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। वेतन आहरण केंद्रों से कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी जब अपनी मूल पदस्थापना पर उपस्थित होकर जॉइनिंग दे दें तभी अक्टूबर का वेतन आहरित किया जाए। इसका मतलब है कि केवल अटैचमेंट समाप्त होने का आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थिति भी दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही वेतन संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
    सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्देश जारी होने के बाद कोई अधिकारी या कर्मचारी अटैचमेंट पर काम करते हुए पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। इस निर्देश के जरिए विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आदेश के पालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
    यह आदेश जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों को भेजा गया है। इसमें सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के अलावा देपालपुर मानपुर सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भी आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
    आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसके आधार पर सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। अब विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाना है कि 175 कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर वापसी की प्रक्रिया समय पर पूरी हो और इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय तक पहुंचे।
    स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था में बदलाव होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभी संबंधित कर्मचारी कितनी जल्दी अपने मूल कार्यस्थल पर जॉइनिंग देते हैं और विभाग आदेश के पालन की निगरानी किस तरह करता है।