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  • इंदौर में दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, एक युवक ने फांसी लगाई, दूसरे की सड़क हादसे में मौत

    इंदौर में दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, एक युवक ने फांसी लगाई, दूसरे की सड़क हादसे में मौत


    इंदौर। शहर में बीती रात हुई दो अलग अलग घटनाओं में दो युवकों की मौत हो गई। आजाद नगर इलाके में 35 वर्षीय युवक घर के बाहर बने कमरे में फंदे पर मिला। वहीं तेजाजी नगर क्षेत्र में तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार युवक की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद संबंधित थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एक मामले में पुलिस युवक के इस कदम के पीछे की वजह पता कर रही है जबकि दूसरे मामले में दुर्घटना के बाद मौके से भागे कार सवारों की तलाश की जा रही है।

    आजाद नगर थाना पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान मनोज 35 वर्ष पिता मोहर सिंह ठाकुर निवासी मूसाखेड़ी के रूप में हुई है। वह गैस सिलेंडर की डिलीवरी और रिपेयरिंग का काम करता था। पुलिस के अनुसार रात करीब साढ़े 12 बजे उसने घर के बाहर वाले कमरे में फांसी लगा ली। घटना का पता उस समय चला जब उसकी पत्नी देर रात उसे देखने के लिए बाहर गई। वहां मनोज को फंदे पर लटका देखकर उसने परिजनों और पड़ोसियों को जानकारी दी।

    मनोज के भाई विनोद के अनुसार वह रात करीब 11 बजे घर से कुछ रुपए लेकर निकला था। उसने अपनी पत्नी से कुछ देर में लौटने की बात कही थी। इसके बाद वह वापस घर पहुंचा लेकिन तब तक पत्नी और बच्चे सो चुके थे। कुछ समय बाद जब पत्नी बाहर के कमरे में पहुंची तो घटना का पता चला। परिवार के मुताबिक घटना से पहले मनोज ने विदिशा में रहने वाले अपने साले से फोन पर बातचीत भी की थी। हालांकि उसके भाई ने किसी तरह के कर्ज की जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस फिलहाल घटना के कारणों और उससे पहले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    दूसरी घटना तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में हुई जहां सड़क दुर्घटना में युवक दीपक मनासिया की मौत हो गई। वह कुशलगढ़ महू का रहने वाला था और खेती किसानी से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार रात करीब 12 बजे डी मार्ट के पास तेज रफ्तार कार ने दीपक की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दीपक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

    बताया गया कि हादसे के बाद कार में सवार युवक वाहन को मौके पर छोड़कर दूसरी कार से वहां से चले गए। इसी दौरान पीछे से आ रहे दीपक के दोस्तों ने उसे सड़क पर घायल हालत में देखा। दोस्तों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को कब्जे में ले लिया है और उसके चालक तथा अन्य लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

    परिजनों के मुताबिक दीपक काम के सिलसिले में चापड़ा गया था। उसके साथ कुछ दोस्त भी अलग अलग बाइक से गए थे। वह खेती का काम करता था। परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम का माहौल है।

    दोनों मामलों में पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। आजाद नगर मामले में युवक के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है जबकि तेजाजी नगर हादसे में पुलिस वाहन और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटनाओं की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें

    भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें


    इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर के रेसीडेंसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा में हुई 36 मौतों की परिस्थितियों की जांच की है। रिपोर्ट में दूषित पानी से जुड़ी मौतों को लेकर अलग अलग निष्कर्ष सामने आए हैं। सार्वजनिक हुई रिपोर्ट के अनुसार कई प्रशासनिक और तकनीकी कमियों को भी गंभीरता से दर्ज किया गया है।

    जांच रिपोर्ट में पुराने पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग के सामने पुराने जल और सीवर नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इनमें नक्शे अलाइनमेंट प्लान इंजीनियरिंग डिजाइन वर्क ऑर्डर और निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। आयोग ने इन रिकॉर्ड के गायब होने के कारणों की अलग से जांच की जरूरत भी बताई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुराने नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव में कमियां थीं और संवेदनशील पाइपलाइन को समय पर बदलने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी।

    सिंघार ने फाइल मूवमेंट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पाइपलाइन बदलने से जुड़ी फाइल लंबे समय तक लंबित रही। उन्होंने सवाल किया कि जरूरी काम से जुड़ी फाइल इतनी लंबी अवधि तक क्यों रुकी रही। हालांकि न्यायिक जांच की रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने का आधार केवल किसी फाइल के मेयर के पास लंबित रहने को नहीं बनाया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में एक चरण पर 10 दिन की अस्पष्ट देरी हुई थी और इस देरी के लिए कुछ अधिकारियों की भूमिका पर जिम्मेदारी तय की गई।

    आयोग ने पूर्व नगर निगम आयुक्तों में से कुछ अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त किया है जबकि तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्तों और कार्यपालन यंत्री से जुड़े स्तर पर प्रशासनिक चूक को लेकर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार टेंडर की अंतिम स्वीकृति से जुड़े अधिकार संबंधित अतिरिक्त आयुक्त के स्तर पर थे। इसी आधार पर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त को उस देरी के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया। यह निष्कर्ष उन राजनीतिक आरोपों से अलग है जिनमें जनप्रतिनिधियों या शीर्ष प्रशासनिक पदों की जवाबदेही का सवाल उठाया गया है।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या सामने आने के बाद पुराने पाइप नेटवर्क को बदलने का काम शुरू किया गया था। शुरुआती दौर में प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से मौतों की संख्या को लेकर अलग अलग आंकड़े सामने आए थे। फरवरी में विधानसभा में सरकार की ओर से भी मौतों के आंकड़े को लेकर आधिकारिक जानकारी दी गई थी जबकि विपक्ष और स्थानीय लोगों ने इससे अधिक मौतों का दावा किया था। बाद में न्यायिक जांच ने 36 मौतों के मामलों की परिस्थितियों की समीक्षा की।

    जांच रिपोर्ट का व्यापक संकेत यह है कि त्रासदी को किसी एक दिन की घटना के बजाय लंबे समय से चली आ रही तकनीकी कमियों पाइपलाइन की स्थिति रखरखाव निगरानी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा गया है। रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को राहत देने से जुड़े सुझाव भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि सरकार आयोग की सिफारिशों पर किस तरह आगे बढ़ती है और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिलती है।

    सिंघार ने सरकार से इसी आधार पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं उपलब्ध न्यायिक जांच रिपोर्ट में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय मुख्य टिप्पणियां अधिकारियों तकनीकी व्यवस्था पाइपलाइन रखरखाव और प्रक्रिया में हुई देरी से संबंधित हैं।

  • बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान

    बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान


    इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े करीब 66 करोड़ रुपए के बैंक लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर की विशेष PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट यानी चालान दाखिल किया है। इसके बाद कोर्ट ने मामले से जुड़े 21 आरोपियों और संस्थाओं को नोटिस जारी करते हुए प्री कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए तलब किया है। कंपनी का मौजूदा नाम एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड बताया गया है। मामले में ED की जांच अभी जारी है।

    इस पूरे मामले की शुरुआत CBI भोपाल की FIR से हुई थी। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। CBI की FIR में रुचि ग्लोबल लिमिटेड के साथ उमेश शाहरा साकेत बरोडिया आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के नाम दर्ज किए गए थे। इसके बाद ED ने बैंकिंग लेनदेन और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।

    ED की जांच के अनुसार रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC भी शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि इन बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल संबंधित सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि उत्पाद खरीदने के नाम पर किया गया।

    जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रिसीट का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से बिल डिस्काउंट कराए गए और रकम संबंधित संस्थाओं के खातों में पहुंची। ED का दावा है कि इसके बाद रकम को कई खातों के जरिए घुमाया गया और महज एक से तीन दिन के भीतर फिर रुचि ग्लोबल के खातों में वापस पहुंचा दिया गया। एजेंसी ने इसे बैंक से हासिल क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग और रकम को लेयर करने की प्रक्रिया बताया है।

    मामले में ED ने दिसंबर 2025 में भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने 23 दिसंबर को PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी ली थी। इस दौरान 23.50 लाख रुपए की कथित बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी। कुछ बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में ED ने करीब 5.13 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों के संबंध में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया।

    ED के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम की जमीन भी शामिल है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त कथित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया गया। हालांकि संपत्ति कुर्की और आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।

    CBI की FIR में बैंक समूह की शिकायत के आधार पर कुल 188.35 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था। वहीं ED की मौजूदा जांच में करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग पर फोकस है। चालान दाखिल होने के बाद अब 21 आरोपियों और संस्थाओं को जारी नोटिस के आधार पर कोर्ट में आगे की कार्यवाही होगी। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और लेनदेन से जुड़ी अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।

  • छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप

    छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप


    इंदौर। मास्टर प्लान के तहत रोड चौड़ीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम की टीम शुक्रवार सुबह एक बार फिर छावनी क्षेत्र पहुंची। निगम के अमले ने छावनी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण में बाधक मकानों और प्रतिष्ठानों के हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान मथुरावाला प्रतिष्ठान की पुरानी बिल्डिंग के बाधक हिस्से भी तोड़े गए। कार्रवाई के लिए नगर निगम की टीम तीन पोकलेन और दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

    सुबह निगम का अमला मशीनों के साथ छावनी चौराहे पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक पहले कुछ हिस्सों को मैन्युअल तरीके से हटाने का काम किया गया। इसके बाद भारी मशीनों की मदद से सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बनी रही। फिलहाल कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विवाद या विरोध की सूचना सामने नहीं आई है।

    नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर प्रखर सिंह के मुताबिक मास्टर प्लान में शामिल छावनी रोड के चौड़ीकरण के लिए जिन हिस्सों को हटाया जाना बाकी था उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मकानों के छज्जे और अन्य बाधक हिस्से हटाए गए हैं। निगम का कहना है कि पहले से लंबित कार्रवाई को पूरा करने के बाद रोड चौड़ीकरण के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।

    छावनी क्षेत्र में रोड चौड़ीकरण को लेकर नगर निगम पहले भी कार्रवाई कर चुका है। मई में भी निगम का अमला क्षेत्र में पहुंचा था और सड़क के लिए जरूरी बाधक हिस्सों को हटाया गया था। इसके बाद रोड निर्माण और चौड़ीकरण से जुड़े काम को आगे बढ़ाया गया। उस समय कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला था। कांग्रेस की ओर से क्षेत्र में जन अधिकार यात्रा निकालकर कार्रवाई का विरोध किया गया था। अब कई महीने बाद निगम ने एक बार फिर लंबित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू की है।

    छावनी क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई के दौरान पहले हादसा भी हो चुका है। पिछली कार्रवाई के दौरान मशीन में बिजली के तार उलझ गए थे। तार हटाने के प्रयास में जेसीबी चालक ने जोर लगाया था जिसके बाद बिजली का खंभा उखड़कर नीचे गिर गया। हादसे में होम्योपैथिक डॉक्टर कपिल दीक्षित घायल हो गए थे। इस घटना के बाद बिजली लाइनों और मशीनों से जुड़ी सुरक्षा को लेकर भी सावधानी जरूरी मानी गई थी।

    छावनी की खास बात यह है कि यहां कई मकान और प्रतिष्ठान सौ साल से भी अधिक पुराने बताए जाते हैं। पुराने निर्माण और घनी आबादी वाले इलाके में रोड चौड़ीकरण की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है। शुक्रवार को जिन हिस्सों पर निगम ने कार्रवाई की उनमें मथुरावाला बिल्डिंग भी शामिल रही। यह पुरानी इमारत पांच मंजिला बताई जा रही है और इसमें बेसमेंट भी है। सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके बाधक हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई।

    नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब छावनी रोड चौड़ीकरण के काम में तेजी आने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में शेष बाधक हिस्सों को हटाने और सड़क से जुड़े निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

  • मरीजों की आवाजाही शुरू होने से पहले न्यू OPD में पहुंचा सांप, खिड़की से फर्श तक घूमता रहा, महिला गार्ड ने संभाला मोर्चा

    मरीजों की आवाजाही शुरू होने से पहले न्यू OPD में पहुंचा सांप, खिड़की से फर्श तक घूमता रहा, महिला गार्ड ने संभाला मोर्चा


    इंदौर । इंदौर के एमवाय अस्पताल की न्यू ओपीडी में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब परिसर के अंदर एक सांप दिखाई दिया। सुबह करीब 8 बजे ओपीडी शुरू होने के समय खिड़की के पास सांप नजर आने के बाद वहां मौजूद कर्मचारियों ने इसकी जानकारी सुरक्षा गार्ड को दी। इसके बाद सांप को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। कुछ देर तक सांप ओपीडी के अंदर ही फर्श और दरवाजे के आसपास घूमता रहा जिसके कारण वहां मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक सुबह न्यू ओपीडी में कर्मचारी अपने काम में जुटे थे। इसी दौरान एक कर्मचारी की नजर खिड़की के पास मौजूद सांप पर पड़ी। अचानक सांप दिखाई देने से वहां मौजूद स्टाफ सतर्क हो गया। मामले की जानकारी तत्काल सुरक्षा गार्ड को दी गई। इसके बाद गार्ड ने सांप को परिसर से बाहर निकालने का प्रयास किया।

    शुरुआती कोशिश में सांप बाहर नहीं निकला और वह ओपीडी के अंदर ही इधर उधर घूमता रहा। कभी वह दरवाजे के आसपास पहुंचा तो कभी फर्श पर दिखाई दिया। इस दौरान कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड उससे दूरी बनाकर उसे बाहर की तरफ करने का प्रयास करते रहे। बाद में महिला गार्ड और अन्य सुरक्षा कर्मचारियों की मदद से सांप को ओपीडी से बाहर निकालकर झाड़ियों की तरफ कर दिया गया।

    घटना जिस समय हुई उस वक्त न्यू ओपीडी में मरीजों और डॉक्टरों की आवाजाही शुरू होने वाली थी। ऐसे में यदि सांप कुछ देर और परिसर के अंदर रहता तो मरीजों के साथ अस्पताल के कर्मचारियों के लिए भी परेशानी की स्थिति बन सकती थी। गनीमत रही कि सांप को समय रहते बाहर कर दिया गया और किसी के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई।

    इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें अस्पताल परिसर के अंदर सांप दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सांप का पहुंचना केवल एक सामान्य घटना नहीं माना जा सकता क्योंकि यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन आते हैं।

    एमवाय अस्पताल में इससे पहले भी सांप और दूसरे जहरीले जीव दिखाई देने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अस्पताल की मर्चुरी सहित कुछ अन्य हिस्सों में भी सांप निकलने की जानकारी सामने आ चुकी है। इससे अस्पताल परिसर में साफ सफाई और आसपास की झाड़ियों की नियमित निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

    कुछ दिन पहले अस्पताल के बच्चों के वार्ड में चूहों को लेकर भी मामला सामने आया था। इस घटना के बाद अस्पताल में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे और संबंधित स्टाफ के साथ निजी कंपनी पर कार्रवाई की बात सामने आई थी। अब न्यू ओपीडी में सांप मिलने की घटना ने एक बार फिर अस्पताल परिसर की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर ध्यान खींचा है।

    न्यू ओपीडी में सांप मिलने के बाद कर्मचारियों ने तत्काल उसे बाहर कर दिया। फिलहाल इस घटना में किसी मरीज या कर्मचारी को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है। हालांकि घटना ने यह जरूर दिखाया है कि अस्पताल के ऐसे हिस्सों में नियमित निगरानी और साफ सफाई जरूरी है जहां झाड़ियों या खुले स्थानों से जीव परिसर में प्रवेश कर सकते हैं।

  • इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस

    इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस


    इंदौर  । इंदौर के नंदबाग इलाके में शनिवार देर रात पड़ोसियों के बीच हुआ विवाद मारपीट में बदल गया। इस घटना में वार्ड 16 बूथ की बीजेपी अध्यक्ष रिंकू उर्फ दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोग बाणगंगा थाने पहुंचे जहां पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने घटना के बाद संबंधित लोगों का मेडिकल परीक्षण भी कराया है।
    बाणगंगा पुलिस के मुताबिक नंदबाग इलाके में रहने वाले पड़ोसियों के बीच किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई थी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि विजय राहुल शर्मा और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने बीजेपी नेत्री दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट की। बताया गया है कि इस दौरान दोनों को सड़क पर पटककर भी पीटा गया।

    घटना के बाद मौके पर काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान दोनों पक्ष एक दूसरे के वीडियो बनाते रहे। इसके बाद मामला शांत होने पर दोनों पक्ष अपने अपने लोगों के साथ थाने पहुंचे।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत को दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतों में दोनों तरफ से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों का मेडिकल कराया है ताकि चोटों की स्थिति का भी पता लगाया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय रहवासियों की ओर से बीजेपी नेत्री को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। कुछ रहवासियों का कहना है कि दीक्षा स्थानीय पार्षद का नाम लेकर आए दिन उनके साथ बदसलूकी करती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर मारपीट से जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो और शिकायतों के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। फिलहाल मामला दोनों पक्षों की शिकायत और एफआईआर के बाद जांच के चरण में है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • BJP पार्षद पर टिप्पणी के बाद बैकफुट पर कैलाश विजयवर्गीय जताया खेद संध्या बोलीं पिता तुल्य हैं मंत्री

    BJP पार्षद पर टिप्पणी के बाद बैकफुट पर कैलाश विजयवर्गीय जताया खेद संध्या बोलीं पिता तुल्य हैं मंत्री

    इंदौर । इंदौर में भाजपा पार्षद संध्या यादव को लेकर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद मंगलवार को उनके खेद जताने के बाद नया मोड़ ले गया। विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंत्री की ओर से की गई एक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा तेज हो गई थी। इसके बाद विजयवर्गीय ने वीडियो जारी कर अपनी बात स्पष्ट की और टिप्पणी पर खेद जताया। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर उनके बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप भी लगाया।

    मामला रविवार को इंदौर विधानसभा क्रमांक एक के वार्ड छह में आयोजित विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम से जुड़ा है। यहां सात करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया था। कार्यक्रम में विधायक कैलाश विजयवर्गीय के साथ सांसद शंकर लालवानी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। इसी दौरान विजयवर्गीय ने वार्ड पार्षद संध्या यादव के काम की तारीफ करते हुए उनकी कार्यशैली और स्वभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संध्या काफी काम करती हैं और उन्हें जल्दी गुस्सा भी आता है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने संध्या की शारीरिक बनावट को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    विवाद बढ़ने के बाद विजयवर्गीय ने मंगलवार को वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संध्या यादव उनके विधानसभा क्षेत्र की सक्रिय पार्षद हैं और उनके वार्ड में काफी विकास कार्य हुए हैं। मंत्री ने कहा कि भाषण के दौरान उनके बारे में कही गई बात को कांग्रेस नेताओं ने अलग तरीके से पेश किया। उन्होंने संध्या को अपनी बेटी के समान बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में गोद में खिलाया है। विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि उनके मन में टिप्पणी को लेकर कोई गलत भावना नहीं थी और संध्या के मन में भी ऐसा कुछ नहीं था। हालांकि जिस तरह से इस बयान को राजनीतिक रूप से उठाया गया उससे उन्हें दुख हुआ। इसी के साथ उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद जताया।

    वहीं पार्षद संध्या यादव ने भी इस मामले में अपना पक्ष सामने रखा। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को पिता तुल्य बताते हुए कहा कि दोनों के बीच पिता और बेटी जैसा रिश्ता है। संध्या ने बताया कि विजयवर्गीय उन्हें बचपन से जानते हैं और उन्होंने उन्हें गोद में खिलाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल टिप्पणी को लेकर सामने आ रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दिया जाए।

    संध्या यादव ने अपने वार्ड में हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान करीब सात करोड़ दस लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन हुआ। इसके अलावा पानी की टंकी और संजीवनी क्लिनिक का लोकार्पण भी किया गया। इस दौरान क्षेत्र के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

    कार्यक्रम के दौरान विजयवर्गीय ने पार्षद संध्या यादव के काम की सराहना करते हुए कहा था कि उनके वार्ड से जुड़ी समस्याओं के पत्र अक्सर सामने आते हैं। इसी बातचीत के दौरान उनकी नजर भाजपा नेता मयंक पर गई जो संध्या यादव के पास बैठे थे। मयंक को संबोधित करते हुए उन्होंने संध्या की चौड़ाई बढ़ने को लेकर टिप्पणी की थी। इसी हिस्से का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया।

    अब मंत्री के खेद जताने और पार्षद के उन्हें पिता तुल्य बताए जाने के बाद दोनों पक्षों ने मामले को व्यक्तिगत रिश्ते और बयान के संदर्भ में स्पष्ट करने की कोशिश की है। दूसरी ओर इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई है। आने वाले दिनों में यह मामला किस तरह आगे बढ़ता है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • राहुल गांधी के 19 सितंबर के दौरे पर देवड़ा का निशाना: कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर उठाए सवाल

    राहुल गांधी के 19 सितंबर के दौरे पर देवड़ा का निशाना: कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर उठाए सवाल


    देवास । मध्य प्रदेश की सियासत में राहुल गांधी के 19 सितंबर के इंदौर दौरे से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं जहां छात्रों से शिक्षा व्यवस्था और उनसे जुड़े मुद्दों पर संवाद प्रस्तावित है। इस बीच मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। देवड़ा ने कहा कि राहुल गांधी के कितने भी दौरे हो जाएं इसका जनता पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि जनता भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा करती है और कांग्रेस के लंबे शासनकाल को भी नहीं भूली है।

    देवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान में शामिल होने पहुंचे देवड़ा ने मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने शासन के दौरान किए गए कामों का हिसाब देना चाहिए। देवड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में कई घोटाले हुए और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी बने रहे।

    उपमुख्यमंत्री ने सड़क बिजली और सिंचाई जैसे विषयों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के पुराने शासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने करीब 60 वर्षों तक देश में शासन किया और अब जनता यह जानना चाहती है कि उस दौरान आम लोगों के लिए क्या काम किए गए। देवड़ा ने गरीबों के इलाज आवास और साफ पानी जैसी सुविधाओं को लेकर भी कांग्रेस से सवाल किए।

    राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम 19 सितंबर को आयोजित होना है। छात्रों की गूंज नाम के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम का फोकस शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े अनुभवों और समस्याओं पर बताया गया है। राहुल गांधी ने छात्रों से कार्यक्रम में शामिल होने और अपनी समस्याएं साझा करने की अपील भी की है।

    इंदौर में होने वाले कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर बदलाव हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक मूल रूप से प्रस्तावित नेहरू स्टेडियम में अनुमति नहीं मिलने के बाद क्षेत्रीय पार्क के पास वैकल्पिक स्थान तय किया गया है। आयोजन के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी अनुमति और भुगतान की प्रक्रिया भी चर्चा में रही है।

    देवड़ा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा कि कांग्रेस के नेता चाहे जितने दौरे करें भाजपा सरकार को लेकर जनता का भरोसा बना हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी का इंदौर दौरा शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में है। दूसरी ओर कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सामने लाने की बात कह रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस का कार्यक्रम छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है तो दूसरी तरफ भाजपा नेता इसे लेकर कांग्रेस के पिछले शासन और मौजूदा राजनीतिक दावों पर सवाल उठा रहे हैं। अब 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों के साथ किन मुद्दों पर संवाद करते हैं और उसके बाद प्रदेश की राजनीति में किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं इस पर नजर रहेगी।

  • जिस जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे थे अब मिलेगा अधिकार नितिन नवीन करेंगे इंदौर में योजना की शुरुआत

    जिस जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे थे अब मिलेगा अधिकार नितिन नवीन करेंगे इंदौर में योजना की शुरुआत

    इंदौर । इंदौर में लंबे समय से अपनी जमीन और मकान पर रहने के बावजूद वैध दस्तावेज या पट्टा नहीं होने की समस्या झेल रहे हजारों लोगों के लिए बड़ी पहल होने जा रही है। इंदौर और आसपास के इलाकों में करीब 30 हजार लोगों को स्वामित्व का अधिकार देने की तैयारी की गई है। इस योजना की शुरुआत 17 सितंबर को इंदौर के सुपर कॉरिडोर मैदान में होने वाले कार्यक्रम से की जाएगी। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का यह मध्यप्रदेश में पहला दौरा होगा। हालांकि उनके स्वागत के लिए किसी तरह की बड़ी रैली या शोभायात्रा आयोजित नहीं की जाएगी। उनका दौरा सीमित समय का रहेगा और वे सीधे सरकारी कार्यक्रम में पहुंचेंगे। बताया गया है कि इसी दिन उनका उज्जैन और नीमच जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। हालांकि उनके पूरे दौरे का अधिकृत कार्यक्रम अभी जिला प्रशासन को नहीं मिला है।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार स्वामित्व योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को उनकी जमीन और मकान का अधिकार दिलाना है जो लंबे समय से किसी स्थान पर रह रहे हैं लेकिन उनके पास उस जमीन का वैध दस्तावेज या पट्टा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लंबे समय से यह समस्या सामने आती रही है कि कई परिवार चार दशक या उससे भी ज्यादा समय से अपनी जगह पर रह रहे हैं लेकिन जमीन के मालिकाना अधिकार से जुड़े कागजात उनके पास नहीं हैं।

    बताया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों के लिए बड़ी संख्या में मकान बनाए गए हैं। इसी दौरान ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों ने जमीन के अधिकार से जुड़ी समस्या भी सामने रखी। इसके बाद स्वामित्व योजना के जरिए ऐसे परिवारों को उसी स्थान पर अधिकार देने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया जहां वे वर्षों से रह रहे हैं।

    इंदौर के सुपर कॉरिडोर मैदान में होने वाले कार्यक्रम में 50 हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इनमें करीब 30 हजार लाभार्थी आसपास के गांवों से पहुंचेंगे। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। कार्यक्रम स्थल के साथ साथ आने जाने वाले रास्तों पार्किंग सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    लाभार्थियों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए करीब 2 हजार बसों की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है। बारिश को देखते हुए भी आयोजन स्थल पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि लोगों को परेशानी न हो। नितिन नवीन की सुरक्षा को देखते हुए उनके संभावित रूट पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी कैमरों समेत अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।

    जिला प्रशासन को दिल्ली से राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे का अंतिम कार्यक्रम मिलने के बाद सुरक्षा और ट्रैफिक प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिए लंबे समय से जमीन पर रह रहे उन लोगों को स्वामित्व का अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी जिनके पास अब तक अपने घर और जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं थे।

  • तेज रफ्तार थार ने तोड़ी ब्रिज की रेलिंग फिर 50 फीट नीचे गिरी कार में फंसे चार लोगों की ऐसे बची जान

    तेज रफ्तार थार ने तोड़ी ब्रिज की रेलिंग फिर 50 फीट नीचे गिरी कार में फंसे चार लोगों की ऐसे बची जान


    इंदौर। इंदौर में देर रात एक भीषण सड़क हादसे ने लोगों को हैरान कर दिया। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में प्रतीक सेतु ब्रिज पर तेज रफ्तार थार अचानक अनियंत्रित हो गई और ब्रिज की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 50 फीट नीचे जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि थार नीचे गिरने के बाद पलट गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के समय कार में चार लोग सवार थे जो वाहन के अंदर ही फंस गए। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे लोगों और पुलिस की मदद से चारों घायलों को बाहर निकाला गया जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जमा रही।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब साढ़े तीन बजे हुआ। ब्लैक कलर की थार अन्नपूर्णा की तरफ से बिजलपुर की ओर जा रही थी। प्रतीक सेतु ब्रिज पर पहुंचते ही कार की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। देखते ही देखते थार ब्रिज की रेलिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि रेलिंग टूट गई और कार करीब 50 फीट नीचे जा गिरी। नीचे पहुंचने के बाद थार पलट गई। हादसे के दौरान कार के एयरबैग भी खुल गए जिससे सवार लोगों को कुछ राहत मिली।

    हादसे में कार सवार आरती उम्र 25 वर्ष अभिजीत उम्र 20 वर्ष आदित्य और लावण्या घायल हुए हैं। हादसे के बाद चारों लोग कार के अंदर फंस गए थे। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और इसके बाद रेस्क्यू कर सभी को वाहन से बाहर निकाला गया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल उनकी हालत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की तस्वीरें सामने आने के बाद दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। थार पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आई। जिस जगह से कार नीचे गिरी उसके पास ही रेलवे ट्रैक भी मौजूद है। ऐसे में हादसा और भी गंभीर हो सकता था। गनीमत रही कि जिस समय थार ब्रिज से नीचे गिरी उस वक्त सड़क पर कोई दूसरा वाहन नहीं था। यदि उसी समय वहां से कोई वाहन गुजर रहा होता तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती थी।

    एसीपी निधि सक्सेना के अनुसार प्रतीक सेतु ब्रिज पर हुए इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं और सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है लेकिन चालक हादसे के समय नशे में था या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना की परिस्थितियों का पता लगा रही है।

    यह हादसा एक बार फिर रात के समय तेज रफ्तार वाहन चलाने के खतरे को सामने लाता है। ब्रिज जैसे स्थानों पर थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इस घटना में चार लोग घायल हुए हैं लेकिन राहत की बात यह है कि सभी को समय रहते वाहन से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचा दिया गया।