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  • शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान

    शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में शुक्रवार सुबह एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शोरूम में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा होते-होते टाल दिया। लसूड़िया क्षेत्र के खालसा चौक के पास स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने शोरूम में आग लगने से ऊपरी मंजिलों में रहने वाले करीब 20 लोग फंस गए। स्थानीय लोगों, पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शोरूम में खड़े सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है।

    सुबह-सुबह मची अफरा-तफरी
    घटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे की है। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम से अचानक धुआं और लपटें उठने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआं पूरी इमारत में फैलने लगा। ऊपरी मंजिलों पर बने फ्लैट्स में रहने वाले परिवार उस समय सो रहे थे। धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी होने पर लोगों की नींद खुली। जब उन्होंने नीचे देखा तो शोरूम आग की लपटों से घिरा हुआ था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इमारत की सीढ़ियां शोरूम के ठीक बगल में थीं और आग तथा धुएं की वजह से वहां से नीचे उतरना असंभव हो गया था। ऐसे में लोग अपने-अपने फ्लैट और बालकनियों में फंस गए।

    पड़ोसियों ने दिखाई सूझबूझ, छतों के बीच बनाया रास्ता
    इमारत से उठती चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पड़ोस की बहुमंजिला इमारत में रहने वालों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। लोगों ने पहले फंसे हुए परिवारों को छत पर पहुंचने के लिए कहा। इसके बाद दोनों इमारतों की छतों के बीच सीढ़ियां लगाकर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया। खिड़कियों और लोहे के एंगल से रस्सियां बांधकर दूसरी इमारत तक पहुंचाई गईं। कुछ लोग सीढ़ियों के सहारे दूसरी बिल्डिंग की छत तक पहुंचे, जबकि कई लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई और बचाव अभियान में शामिल हो गई।

    एक घंटे में पाया आग पर काबू
    फायर ब्रिगेड अधिकारी शोभाराम मालवीय ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल दल मौके पर पहुंच गया था। आग पर काबू पाने के लिए दो पानी के टैंकर लगाए गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंच सकी, जिससे लोगों का घरेलू सामान सुरक्षित बच गया। हालांकि शोरूम में रखे सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए।

    पत्थर मारकर जगाए गए लोग
    इमारत में रहने वाले भानु सिंह और निशा सिंह ने बताया कि वे गहरी नींद में थे। अचानक बाहर शोर-शराबा सुनाई दिया। जब लोगों ने खिड़कियों पर पत्थर फेंककर उन्हें जगाया, तब उन्हें आग की जानकारी मिली। भानु सिंह के अनुसार, बिल्डिंग में कुल नौ फ्लैट हैं, जिनमें कुछ परिवार ही रह रहे थे। अधिकांश लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनके परिवार सहित कुछ लोगों को विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए निकाला गया। वहीं बेंगलुरु निवासी चेतन, जो इंदौर में किराए के फ्लैट में रहते हैं, ने बताया कि वे भी लोगों के शोर सुनकर जागे और तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चला।

    चौकीदार की सतर्कता बनी मददगार
    पड़ोस की इमारत के चौकीदार प्रवीण ने बताया कि एक परिवार, जो हाल ही में दुबई से आया था, सुबह बारिश का नजारा देखने के लिए जागा हुआ था। सबसे पहले उसी परिवार ने धुआं देखा और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी। समय रहते चेतावनी मिलने से लोगों को छत तक पहुंचने और बचाव अभियान शुरू करने का मौका मिल गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    EV सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
    यह घटना ऐसे समय हुई है जब इंदौर पहले भी इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी आग की घटनाओं का सामना कर चुका है। कुछ समय पहले चार्जिंग के दौरान एक इलेक्ट्रिक कार में लगी आग ने कई लोगों की जान ले ली थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम और बैटरी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं।

  • खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी

    खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के विश्वप्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। आगामी सिंहस्थ और भविष्य में बढ़ने वाली भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत वर्तमान प्रवेश द्वार को लगभग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।

    निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • इंदौर में सनसनी: कैफे के बाहर झगड़ा बढ़ा, लड़की पर ब्लेड और कांच की बोतल से हमला

    इंदौर में सनसनी: कैफे के बाहर झगड़ा बढ़ा, लड़की पर ब्लेड और कांच की बोतल से हमला


    मध्यप्रदेश। इंदौर में शनिवार देर रात एक गंभीर वारदात सामने आई, जहां पुरानी रंजिश के चलते तीन युवतियों ने एक युवती पर ब्लेड और कांच की बोतल से हमला कर दिया। घटना एमआईजी थाना क्षेत्र स्थित सरपंच कैफे के बाहर हुई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी आरूषि अपने दो दोस्तों के साथ कैफे पर चाय पीने पहुंची थी। इसी दौरान वैष्णवी, नेहा और अच्छू नाम की तीन युवतियां वहां पहुंचीं और पुराने विवाद को लेकर उससे बहस करने लगीं। बहस कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई।

    आरोप है कि विवाद बढ़ते ही तीनों युवतियों ने आरूषि पर हमला कर दिया। वैष्णवी ने ब्लेड से उसके चेहरे और हाथ पर वार किया, जिससे वह घायल हो गई, जबकि नेहा ने कांच की बोतल उसके सिर पर मार दी। अचानक हुए हमले से मौके पर मौजूद लोग भी दहशत में आ गए।

    घटना के दौरान आरूषि के साथ मौजूद उसके दोस्तों ने बीच-बचाव की कोशिश की और किसी तरह उसे हमलावरों से अलग किया। इसके बाद उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया।

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उसकी एक सहेली और वैष्णवी के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी रंजिश के चलते उस पर हमला किया गया।

    एमआईजी थाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर वैष्णवी, नेहा और अच्छू के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ती झड़पों और युवाओं के बीच हिंसक विवादों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • इंदौर में फौजी बनकर आए युवकों का हंगामा: महिला बाउंसर और पति से मारपीट, कार डिवाइडर में घुसी

    इंदौर में फौजी बनकर आए युवकों का हंगामा: महिला बाउंसर और पति से मारपीट, कार डिवाइडर में घुसी


    मध्यप्रदेश। इंदौर में शनिवार देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां कार सवार पांच युवकों ने खुद को फौजी बताकर एक महिला बाउंसर और उसके पति के साथ मारपीट कर दी। मामला विजय नगर थाना क्षेत्र का है, जहां विवाद इतना बढ़ गया कि सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और अंत में आरोपियों की कार डिवाइडर से टकरा गई।

    जानकारी के अनुसार, महिला बाउंसर रिमझिम बारोसा अपने पति शिखर के साथ महालक्ष्मी नगर मेले से घर लौट रही थीं। इसी दौरान बॉम्बे हॉस्पिटल के पास उनकी कार को आरोपियों ने कथित तौर पर गलत तरीके से ओवरटेक करते हुए कट मारा। इस पर दंपती ने आपत्ति जताई, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया।

    थोड़ी ही देर में विवाद बढ़ता गया और सत्यसाईं चौराहे पर कार सवार युवकों ने दंपती को रोक लिया। आरोप है कि यहां उन्होंने दंपती के साथ मारपीट शुरू कर दी। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन आरोपियों का आक्रामक व्यवहार जारी रहा और उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से भी झड़प की।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब भीड़ ने हस्तक्षेप किया तो आरोपियों ने कार तेज रफ्तार से भगाने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने लोगों को टक्कर मारने का प्रयास भी किया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी फैल गई। इसी भागदौड़ में उनकी कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और क्षतिग्रस्त हो गई।

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। बाद में पुलिस ने कार को जब्त कर लिया और थाने ले जाया गया। वाहन को क्रेन की मदद से हटाया गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हंगामे और टक्कर के बाद की स्थिति दिखाई दे रही है।

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। विजय नगर थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपियों द्वारा खुद को सैन्यकर्मी बताए जाने के दावे की पुष्टि की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कार में सवार युवक वास्तव में किस पहचान से जुड़े हैं और घटना के पीछे उनका मकसद क्या था।

    फिलहाल पुलिस सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी। घटना ने इलाके में सुरक्षा और सड़क पर बढ़ते विवादों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • इंदौर के छावनी क्षेत्र में तोड़फोड़ के खिलाफ विरोध तेज, ‘न्याय रैली’ आज

    इंदौर के छावनी क्षेत्र में तोड़फोड़ के खिलाफ विरोध तेज, ‘न्याय रैली’ आज


    इंदौर।  इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हुई तोड़फोड़ को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक विरोध तेज हो गया है। जनहित पार्टी ने नगर निगम और प्रशासन की कार्रवाई को “अमानवीय” बताते हुए शनिवार शाम 7 बजे ‘न्याय रैली’ निकालने की घोषणा की है।

    पार्टी का आरोप है कि छावनी क्षेत्र की 136 साल पुरानी बसाहट को बिना उचित प्रक्रिया, बिना सहमति और बिना पर्याप्त मुआवजा दिए तोड़ दिया गया। दावा किया गया है कि कई लोगों को केवल दो दिन पहले सूचना दी गई और फिर भारी पुलिस बल व जेसीबी मशीनों के साथ कार्रवाई शुरू कर दी गई, जिससे लोगों को अपना सामान तक निकालने का समय नहीं मिला।

    विरोध कर रही पार्टी का कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के पास संपत्तियों की वैध रजिस्ट्री मौजूद है, बावजूद इसके बड़े पैमाने पर मकानों और दुकानों को ध्वस्त किया गया। आरोप यह भी है कि जहां 10 फीट तक हटाने की बात थी, वहां कई जगह 20 फीट तक निर्माण गिरा दिया गया।

    जनहित पार्टी ने मांग की है कि प्रभावित लोगों को बाजार मूल्य से दोगुना मुआवजा दिया जाए, एफएआर और टीडीआर जैसे नियमों पर पुनर्विचार हो और छोटे व्यापारियों व फेरी वालों की आजीविका सुरक्षित रखी जाए। साथ ही शहर के विकास कार्यों में पारदर्शिता और सहमति को अनिवार्य करने की मांग उठाई गई है।

    पार्टी ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं, क्योंकि उनका कहना है कि यदि ऐसे ही कार्रवाई चलती रही तो अन्य पुराने क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

    इस कार्रवाई के दौरान हुए नुकसान और विरोध के चलते मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रूप लेता जा रहा है और शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है।

  • इंदौर में स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल: निगमकर्मियों पर खुले में कचरा फेंकने और जलाने के आरोप

    इंदौर में स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल: निगमकर्मियों पर खुले में कचरा फेंकने और जलाने के आरोप


    इंदौर इंदौर में देश की सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में लगातार शीर्ष पर रहने वाली छवि पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामलों में नगर निगम के कर्मचारियों पर ही खुले में कचरा डंप करने और उसे रात के समय जलाने के आरोप लगे हैं, जिससे रहवासी इलाकों में धुआं और बदबू फैलने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    वार्ड क्रमांक-53, नेत्रराम का बगीचा और डेली कॉलेज के सामने जैसे इलाकों से सामने आए वीडियो में ट्रैक्टर-ट्रॉली से कचरा लाकर बीच रहवासी क्षेत्र में फेंका जाता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन में खुले में कचरा डाला जाता है और रात होते ही उसी कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे पूरा इलाका धुएं से भर जाता है।

    रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन निगमकर्मी नहीं मानते। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 27 मई की रात कचरे में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया और फायर ब्रिगेड को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। वहीं 28 मई को भी दरोगा की मौजूदगी में कचरा डंप किए जाने का वीडियो सामने आया है।

    सूत्रों के मुताबिक पिछले दो महीनों में शहर में कचरा जलाने की 50 से अधिक शिकायतें फायर ब्रिगेड तक पहुंच चुकी हैं। औसतन रोजाना दो से तीन ऐसी घटनाएं दर्ज हो रही हैं, जिनमें कई बार आग आसपास की दुकानों और संपत्तियों तक पहुंचकर नुकसान भी पहुंचा चुकी है।

    नगर निगम की ओर से वार्ड पार्षद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों से शिकायत की है और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की बात कही है। वहीं जोन प्रभारी ने जांच के आदेश देते हुए कहा है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सामने आने से नगर निगम की कार्यप्रणाली और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • फुटकर व्यापारी से साइबर फ्रॉड: फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर वसूले 1.36 लाख रुपए

    फुटकर व्यापारी से साइबर फ्रॉड: फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर वसूले 1.36 लाख रुपए


    नई दिल्ली। इंदौर में ऑनलाइन लोन एप के जरिए साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है। बाणगंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक फुटकर व्यापारी को इंस्टाग्राम पर दिखाए गए “स्वीट मनी” नामक लोन एप के विज्ञापन ने फंसा लिया, जिसके बाद वह धीरे-धीरे बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो गया।

    पीड़ित राहुल गिरी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि फरवरी महीने में उन्हें पैसों की तत्काल जरूरत थी। इसी दौरान उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लोन एप का विज्ञापन देखा, जिसमें आसान लोन उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्होंने एप डाउनलोड कर लिया और अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक डिटेल्स साझा कर दी।

    जानकारी देने के कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते में लगभग 4 हजार रुपए का लोन ट्रांसफर कर दिया गया। शुरुआत में यह प्रक्रिया सामान्य लगी, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला पूरी तरह बदल गया। अलग-अलग मोबाइल नंबरों और वॉट्सएप अकाउंट से उन्हें लगातार कॉल और मैसेज आने लगे।

    आरोपियों ने लोन की रकम को कई गुना बढ़ाकर मांगना शुरू कर दिया। जब राहुल ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया कि उनके मोबाइल से ली गई तस्वीरें और डाटा उनके पास मौजूद हैं। आरोपियों ने डराने के लिए कहा कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो इन तस्वीरों को एडिट कर उनके रिश्तेदारों और परिचितों को भेज दिया जाएगा।

    डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने आरोपियों द्वारा दिए गए यूपीआई अकाउंट्स में धीरे-धीरे करीब 1 लाख 36 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद ठगों की मांग खत्म नहीं हुई और वे लगातार और पैसे की मांग करते रहे।

    इसके बाद आरोपियों ने धमकी और तेज कर दी और पीड़ित के एडिट किए गए फोटो उसके रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों को भेज दिए। इस घटना से परेशान होकर राहुल ने अपना मोबाइल भी फॉर्मेट कर दिया, लेकिन तब तक वह पूरी तरह से साइबर जाल में फंस चुका था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने पहले साइबर क्राइम यूनिट में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद मामला बाणगंगा थाना पुलिस को ट्रांसफर किया गया, जहां अब एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस को पीड़ित ने आधा दर्जन से अधिक यूपीआई आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी सौंपे हैं, जिनका उपयोग ठगी में किया गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साइबर गिरोह के पीछे कौन लोग हैं और यह नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है। शुरुआती जांच में यह मामला संगठित ऑनलाइन लोन फ्रॉड और ब्लैकमेलिंग गिरोह से जुड़ा माना जा रहा है।

  • इंदौर में गुंडागर्दी: पैसे मांगने पर इनकार किया तो चाकू से हमला, मंडी में मचा हड़कंप

    इंदौर में गुंडागर्दी: पैसे मांगने पर इनकार किया तो चाकू से हमला, मंडी में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। इंदौर की चोइथराम मंडी में बुधवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई जब तीन से अधिक बदमाशों ने मंडी में काम करने वाले चार कर्मचारियों पर चाकू से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आए। घटना में चार लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

    पुलिस के अनुसार घायल कर्मचारियों की पहचान अरुण (राजा रानी नगर निवासी), सुनील, रंजीत और सूरज के रूप में हुई है। ये सभी चोइथराम मंडी की एक दुकान पर काम करते हैं और रोज की तरह काम खत्म कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान मंडी गेट के पास बने सार्वजनिक शौचालय के नजदीक अंधेरे में बैठे बदमाशों ने उन्हें रोक लिया।

    बताया जा रहा है कि बदमाशों ने कर्मचारियों से शराब पीने के लिए पैसे मांगे। जब सुनील ने पैसे देने से इनकार किया तो विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते बदमाशों ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। सुनील को बचाने आए अन्य तीन साथियों पर भी आरोपियों ने ताबड़तोड़ वार किए, जिससे चारों घायल हो गए।

    घटना के बाद मंडी परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। राजेंद्र नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बताया है कि हमलावर अहिरखेड़ी इलाके के रहने वाले हो सकते हैं और इनका मंडी क्षेत्र में पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है।

    सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध युवक दिखाई दिए हैं, जिनके आधार पर पुलिस ने उनकी पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस टीम लगातार दबिश देकर आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    इधर, मंडी क्षेत्र में एक अन्य विवाद भी सामने आया, जहां चोइथराम मंडी चौराहे पर अवैध गुमटी हटाने को लेकर देर रात झगड़ा हो गया। इस दौरान पथराव और मारपीट की घटनाएं भी हुईं। हालांकि पुलिस ने किसी बड़े संगठित संघर्ष या फायरिंग की बात से इनकार किया है।

    शराब दुकान संचालक और स्थानीय लोगों के बीच अवैध गुमटी हटाने को लेकर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है, जो समय-समय पर विवाद का रूप ले लेती है। पुलिस फिलहाल दोनों घटनाओं की अलग-अलग जांच कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

  • घर के बाहर खड़े होने से शुरू हुआ झगड़ा, पूर्व सांसद के स्टाफ तक पहुंचा मामला, क्रॉस FIR दर्ज

    घर के बाहर खड़े होने से शुरू हुआ झगड़ा, पूर्व सांसद के स्टाफ तक पहुंचा मामला, क्रॉस FIR दर्ज

    इंदौर। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी का बल्ला ऐसा गरजा है कि बड़े-बड़े दिग्गज भी पीछे छूट गए हैं। महज 15 साल की उम्र में वैभव ने ऑरेंज कैप की रेस को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबले में उन्होंने 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर न सिर्फ अपनी टीम को जीत दिलाई बल्कि ऑरेंज कैप की दौड़ में भी खुद को सबसे आगे पहुंचा दिया।

    वैभव सूर्यवंशी अब आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने 15 मैचों में 45.33 की शानदार औसत और 242.86 के तूफानी स्ट्राइक रेट से 680 रन बनाए हैं। इस सीजन उनके बल्ले से 55 चौके और 65 गगनचुंबी छक्के निकले हैं। यही नहीं वह आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे बल्लेबाज भी बन गए हैं जिन्होंने एक सीजन में 200 से ज्यादा स्ट्राइक रेट के साथ 600 रन का आंकड़ा पार किया है।

    सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उनकी 97 रनों की पारी ने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। इस पारी में उन्होंने सिर्फ चौकों से नहीं बल्कि लंबे-लंबे छक्कों से गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। वैभव ने 12 छक्के और 5 चौके लगाकर दिखा दिया कि वह सिर्फ भविष्य के स्टार नहीं बल्कि मौजूदा समय के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं।

    हालांकि ऑरेंज कैप की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। वैभव सूर्यवंशी को सबसे बड़ा खतरा गुजरात टाइटंस के ओपनर साई सुदर्शन से है। सुदर्शन इस समय 652 रनों के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद हैं और दोनों बल्लेबाजों के बीच सिर्फ 28 रनों का अंतर है। खास बात यह है कि अब राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच क्वालीफायर-2 मुकाबला खेला जाना है। ऐसे में इस मैच में तय हो सकता है कि ऑरेंज कैप आखिर किस खिलाड़ी के सिर सजने वाली है।

    साई सुदर्शन के अलावा गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल भी इस रेस में बने हुए हैं। गिल के नाम इस सीजन 618 रन हैं और अगर वह क्वालीफायर-2 में बड़ी पारी खेलते हैं तो ऑरेंज कैप की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अगर गुजरात फाइनल में पहुंचती है तो गिल और सुदर्शन दोनों को एक अतिरिक्त मैच खेलने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत हो जाएगी।

    दूसरी तरफ विराट कोहली अब इस रेस में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज ने इस सीजन 15 मैचों में 600 रन बनाए हैं और वह ऑरेंज कैप की सूची में छठे स्थान पर हैं। आरसीबी पहले ही क्वालीफायर-1 जीतकर फाइनल में पहुंच चुकी है, ऐसे में विराट के पास अपने रन बढ़ाने का सिर्फ एक ही मौका बचा है।

    यही वजह है कि अब ऑरेंज कैप की असली जंग वैभव सूर्यवंशी, साई सुदर्शन और शुभमन गिल के बीच सिमटती नजर आ रही है। मगर जिस फॉर्म में वैभव बल्लेबाजी कर रहे हैं उसे देखकर यही लग रहा है कि ऑरेंज कैप उनसे छीनना अब किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा।

  • ऑटो की किश्तें नहीं भर पाया तो ड्राइवर ने लगाई फांसी, इंदौर में दो सुसाइड केस से हड़कंप

    ऑटो की किश्तें नहीं भर पाया तो ड्राइवर ने लगाई फांसी, इंदौर में दो सुसाइड केस से हड़कंप


    नई दिल्ली। इंदौर शहर में बुधवार रात दो अलग-अलग स्थानों पर आत्महत्या के दर्दनाक मामले सामने आए, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों ही घटनाओं में शुरुआती कारण आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    पहली घटना विजयनगर थाना क्षेत्र की है, जहां अंबिका नगर निवासी 28 वर्षीय विशाल वर्मा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिवार के अनुसार विशाल ऑटो रिक्शा चलाता था और उसने फाइनेंस से वाहन लिया था। पिछले तीन वर्षों से वह नियमित रूप से किश्तें चुका रहा था, लेकिन पिछले दो महीनों से आर्थिक परेशानी के कारण वह भुगतान नहीं कर पा रहा था। इसी वजह से वह लगातार मानसिक तनाव में था। परिजनों ने बताया कि फाइनेंस कंपनी की ओर से लगातार किश्त जमा करने के लिए कॉल आ रहे थे, जिससे उसकी चिंता और बढ़ गई थी।

    परिवार ने यह भी बताया कि विशाल घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके पीछे माता-पिता, पत्नी और एक छोटी बेटी है, जिससे परिवार पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    दूसरी घटना छोटी ग्वालटोली क्षेत्र की है, जहां बजरंग होटल के कमरे में 25 वर्षीय पवन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पवन मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला था और अपने दोस्त विपिन के साथ काम के सिलसिले में इंदौर आया था।

    जानकारी के अनुसार दोनों युवक बड़वानी में एक शराब दुकान पर काम करते थे। आरोप है कि दुकान के मैनेजर द्वारा एक महीने का भुगतान नहीं किया गया और दोनों के साथ मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया गया था। इसके बाद से ही पवन मानसिक रूप से परेशान था।

    घटना से पहले पवन ने अपने चचेरे भाई को फोन कर आत्महत्या करने की बात भी कही थी। सूचना मिलने पर उसका दोस्त विपिन होटल पहुंचा, लेकिन कमरा अंदर से बंद था। होटल कर्मचारियों की मदद से दरवाजा खोला गया तो पवन फंदे पर लटका मिला। उसे तुरंत एमवाय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है। शुरुआती तौर पर आर्थिक दबाव, नौकरी की अस्थिरता और मानसिक तनाव को मुख्य कारण माना जा रहा है।