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इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई
इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण पिछले कुछ दिनों में 18 मौतें हो चुकी हैं. और अब तक 429 लोग अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। बुधवार तक 330 मरीजों को छुट्टी मिल चुकी है. लेकिन 99 मरीज अभी भी इलाजरत हैं। अस्पतालों में ICU में मरीजों की संख्या बढ़ी है. जिनमें से 3 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इस गंभीर स्थिति ने इलाके के लोगों को खौफ में डाल दिया है. और अब वे टैंकर और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बुधवार को क्षेत्र का निरीक्षण किया. और सीवरेज तथा नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज को ठीक करने के निर्देश दिए। इलाके में पानी की सप्लाई टेस्टिंग की जा रही है. और लोगों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जा रही है।स्वास्थ्य विभाग ने 61 टीमों का गठन किया था. जिनमें से 5013 घरों का सर्वे किया गया। इस सर्वे के माध्यम से 24786 लोगों को उचित सलाह दी गई और घर-घर दवाइयां भी वितरित की गईं। इसके साथ ही. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ICMR के सर्वे में पाया गया कि इलाके की 17 गलियां संक्रमित पाई गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की. और कहा कि इंदौर की छवि को इस घटना ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पानी हर नागरिक कामौलिक अधिकार है और यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषीअधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही. मुआवजे की राशि पर भी उचित निर्देश दिए जा सकते हैं।वहीं. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन की योजना बनाई है। पार्टी की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने पूरे प्रदेश में कैंडल मार्च आयोजित करने कीघोषणा की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मंगलवार को प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की। इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के सिलसिले ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है. और प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। -

इंदौर में बुजुर्गों को एटीएम ठगी का शिकार बनाने वाला गिरोह गिरफ्तार 40 हजार रुपये की चोरी
इंदौर । इंदौर शहर में बुजुर्गों को एटीएम ठगी का शिकार बनाने वाला एक गिरोह पकड़ा गया है। विजयनगर थाना क्षेत्र में इस गिरोह के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है जिसमें 86 वर्षीय बुजुर्ग का एटीएम कार्ड बदलकर आरोपियों ने खाते से 40 हजार रुपये की चोरी की। ये ठगी 2 जनवरी को हुई थी जब बुजुर्ग जगदीश पाल भमोरी स्थित स्टेट बैंक के एटीएम पर बैलेंस चेक करने पहुंचे थे।ठगी के आरोपी दो युवक थे जिन्होंने बुजुर्ग से बातचीत करने के दौरान उनका पिन नंबर देख लिया और एटीएम कार्ड बदल दिया। आरोपियों में से एक युवक ने बुजुर्ग को यह कहकर गुमराह किया कि एटीएम मशीन से पैसे नहीं निकल रहे हैं। इसके बाद बुजुर्ग बिना किसी शक के घर लौट गए। कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर लगातार बैंक ट्रांजैक्शन के मैसेज आने लगे जिससे ठगी का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 40 हजार रुपये निकाल लिए। जब पीड़ित ने अपना कार्ड चेक किया तो वह किसी कैलाश नामक व्यक्ति के नाम का निकला। इसके बाद बुजुर्ग ने विजयनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई और सोमवार को एफआईआर दर्ज की गई।
इसी दिन परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में भी इसी तरह की ठगी की वारदात हुई थी जिसमें कलेक्टर कार्यालय से सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश जोशी को निशाना बनाया गया था। इस मामले में भी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था रोहित भदौरिया निवासी भिंड हर्षवर्धन चौहान और अंकित परिहार दोनों निवासी मैनपुरी। पुलिस ने इनके कब्जे से एक बाइक भी बरामद की। पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि विजयनगर में बुजुर्ग के साथ हुई ठगी में भी वही तीनों आरोपी शामिल थे।
दोनों घटनाओं का तरीका और समय एक जैसा होने से यह गिरोह की भूमिका पुख्ता हुई है। पुलिस जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने शहर के अन्य इलाकों में भी इस तरह की ठगी की है या नहीं।पुलिस ने नागरिकों विशेषकर बुजुर्गों से अपील की है कि वे एटीएम पर किसी अनजान व्यक्ति से मदद न लें और अपना पिन नंबर किसी को न बताएं। यह मामला एटीएम ठगी के बढ़ते मामलों और सुरक्षा में सतर्कता की आवश्यकता को उजागर करता है। -

मध्यप्रदेश में घने कोहरे और शीतलहर का असर ट्रेनें 14 घंटे लेट 24 जिलों में स्कूल बंद
मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का प्रभाव देखने को मिल रहा है जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मंगलवार सुबह राज्य के कई हिस्सों में विजिबिलिटी सिर्फ 20 मीटर तक सिमट गई जिससे यातायात और रेल यात्रा पर बुरा असर पड़ा। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है।भोपाल ग्वालियर इंदौर जबलपुर उज्जैन और शहडोल सहित 30 से अधिक जिलों में घना कोहरा छाया रहा। इस वजह से सड़क पर वाहन रेंगते नजर आए और तापमान भी काफी नीचे गिर गया। शहडोल में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दतिया में 4.4 डिग्री और राजगढ़-खजुराहो में 5.4 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल का तापमान 6.8 डिग्री ग्वालियर का 6.4 डिग्री और इंदौर का 8.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
इस घने कोहरे का सबसे बड़ा असर रेल यातायात पर पड़ा है। उत्तर भारत से आने वाली कई ट्रेनें 10 से 14 घंटे तक लेट रही हैं। श्रीधाम एक्सप्रेस इटारसी 13.5 घंटे की देरी से पहुंची जबकि अगरतला-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन लगभग 14 घंटे लेट रही। कई अन्य ट्रेनें जैसे मालवा सचखंड कर्नाटक और तमिलनाडु एक्सप्रेस भी 2 से 5 घंटे तक विलंब से चलीं। इस वजह से स्टेशन पर यात्रियों को ठंड में लंबा इंतजार करना पड़ा।
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर रतलाम नीमच मंदसौर शाजापुर सहित 24 जिलों में नर्सरी से आठवीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं भोपाल धार सीहोर बड़वानी मुरैना खरगोन और अनूपपुर में स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव किया गया है और अब स्कूल सुबह 930 या 10 बजे के बाद शुरू होंगे।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाएं और नमी के कारण कोहरा और बढ़ा है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से जनवरी में ठंड का यह दौर और तेज हुआ है। नवंबर और दिसंबर में रिकॉर्ड ठंड के बाद जनवरी में भी राहत की उम्मीद कम है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें अनावश्यक यात्रा से बचें और विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर स्कूलों के बारे में और निर्णय लिया जा सकता है।
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इंदौर भागीरथपुरा कांड के खिलाफ कांग्रेस की न्याय यात्रा 11 जनवरी को जुटेंगे सभी विधायक
इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के खिलाफ कांग्रेस ने अब एक निरंतर आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा नहीं होता कांग्रेस का यह आंदोलन जारी रहेगा। पटवारी ने विजयवर्गीय को घटनाओं का सरगना बताते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।शनिवार को भागीरथपुरा में कांग्रेस नेताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने के मामले में पटवारी ने मुख्यमंत्री और मंत्री के रवैये की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह से पक्षपाती और अव्यवस्थित है। इसके अलावा कांग्रेस ने 11 जनवरी को न्याय यात्रा निकालने का निर्णय लिया है जो बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर राजवाड़ा तक जाएगी। इस यात्रा में प्रदेश भर के प्रमुख कांग्रेस नेता और सभी विधायक शामिल होंगे।
कांग्रेस की बैठक रविवार को गांधी भवन में आयोजित की गई जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस की इंदौर प्रभारी उषा नायडू पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
आंदोलन को और तेज करने के लिए कांग्रेस ने 6 जनवरी को इंदौर के सभी 85 वार्डों में प्रमुख चौराहों पर मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद 7 जनवरी को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ता मंत्री विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगी।कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
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इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट
इंदौर । इंदौर में दूषित पानी का संकट गहरा गया है जिसमें अब बोरिंग के पानी में भी फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया है। इस बैक्टीरिया के कारण हैजा टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। इस समस्या का मुख्य कारण सीवेज रिसाव माना जा रहा है जो पानी में मिलकर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार नगर निगम ने बोरिंग के कुल 69 पानी के सैंपल लिए थे जिसमें से 35 सैंपल जांच में फेल हो गए। इन सैंपलों में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है।इस बैक्टीरिया का मुख्य स्रोत सीवेज ओवरफ्लो अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज और खराब सेप्टिक टैंक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में यह बैक्टीरिया तब घुलता है जब ड्रेनेज चैंबरों से सीवेज लीक होता है और मल-मूत्र युक्त पानी बोरिंग के पानी में मिल जाता है। इस स्थिति से इंदौर शहर के भागीरथीपुरा क्षेत्र में विशेष रूप से संकट बढ़ा है। यहां 600 से अधिक बोरिंग की गई हैं जिनका पानी कई परिवारों की जीवनरेखा है। गंदे पानी के कारण अब तक 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 20 लोगों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में रखा गया है।
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का मुख्य कारण पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया का बढ़ना है जो आंतों किडनी लिवर और इम्यून सिस्टम पर प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक यह बैक्टीरिया आंतों में सूजन और कोलाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है जिससे शरीर में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इंदौर नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है ताकि पानी की गुणवत्ता सुधारी जा सके और लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।
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इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप
इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।
स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।
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इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी
इंदौर । इंदौर में इन दिनों सर्द हवाओं और घने कोहरे ने शहरवासियों को ठिठुरन का अहसास करा दिया है। रविवार की सुबह भी कोहरे ने इंदौर को अपनी चपेट में लिया और शनिवार को भी कोहरा छाया हुआ था जिसके कारण दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई थी। इस घने कोहरे के कारण इंदौर एयरपोर्ट से दो दर्जन उड़ानें प्रभावित हुईं।उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण शहरवासियों को दिन और रात दोनों समय ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में अगले एक हफ्ते तक कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। 4 से 6 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है।
वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इंदौर में नमी आ रही है और उत्तरी हवाओं की वजह से ठंडक का असर दिन में भी महसूस हो रहा है। हालांकि तीन दिन बाद हवाओं का रुख पश्चिमी होने से तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। 10 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बनेगा जिसके प्रभाव से इंदौर का तापमान बढ़ सकता है।
शुक्रवार रात तीन बजे से शनिवार सुबह 4.30 बजे तक घना कोहरा छाया रहा और इस दौरान दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई। दिन में धूप भी बहुत कम समय के लिए निकली और अधिकांश समय बादल छाए रहे। शनिवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन दिनों तक इंदौर में शीतलता बरकरार रहेगी। रविवार तक कोहरे का असर जारी रहेगा और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।
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कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया
भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:
इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।
उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा
जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।
इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।
