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  • इंदौर में गंदा पानी फैलाता है GBS महामारी, जानें इसका इलाज और बचाव के उपाय

    इंदौर में गंदा पानी फैलाता है GBS महामारी, जानें इसका इलाज और बचाव के उपाय


    इंदौर । इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। दूषित पानी के कारण शुरू हुई उल्टी और दस्त की समस्या अब एक खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी गुइलेन-बैरे सिंड्रोम में बदल चुकी है। यह बीमारी चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का कारण बन गई है क्योंकि इसके इलाज में न सिर्फ जटिलता है बल्कि खर्च भी बहुत ज्यादा है।
    इंदौर त्रासदी के आंकड़े
    अब तक इंदौर प्रशासन ने इस बीमारी से 6 मौतों की पुष्टि की है जबकि स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक यह आंकड़ा 16 तक पहुंच चुका है। लगभग 200 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और 150 से ज्यादा मरीजों का इलाज जारी है। इन मरीजों में से कई को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत है।
    गुइलेन-बैरे सिंड्रोम GBS क्या है
    चिकित्सकों के मुताबिक गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही नसों पर हमला करता है। इसका कारण दूषित पानी से पेट में संक्रमण होना होता है जिससे शुरुआत में उल्टी-दस्त होते हैं। इसके बाद मरीजों को हाथ-पैर में झुनझुनी सुन्नपन और कमजोरी महसूस होती है और स्थिति गंभीर होने पर पैरालिसिस लकवा और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।यदि समय पर इलाज न मिले तो 10% मामलों में यह बीमारी घातक साबित हो सकती है।

    इलाज और खर्च
    GBS का इलाज बेहद महंगा है। एक इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹30000 तक होती है और गंभीर मामलों में इलाज का कुल खर्च ₹10 लाख से ₹15 लाख तक पहुंच सकता है। कई मरीजों को 10 या उससे ज्यादा इंजेक्शन और वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगर इलाज समय पर शुरू किया जाए तो 70% मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।
    प्रशासन की अपील और बचाव के उपाय
    स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी के फैलने के कारण दूषित पानी को जिम्मेदार ठहराया है। विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे पानी उबालकर पियें और खाने-पीने की चीजों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति को यदि हाथ-पैर में कमजोरी झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो तो उसे सामान्य कमजोरी न समझते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
    बचाव के उपाय
    पानी उबालकर पिएं दूषित पानी से बचने के लिए यह सबसे प्रभावी तरीका है।स्वच्छता का ध्यान रखें व्यक्तिगत स्वच्छता और खाने-पीने की चीजों की सफाई पर विशेष ध्यान दें। सावधानी रखें यदि शरीर में कमजोरी या झुनझुनी महसूस हो तो इसे सामान्य न समझें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस महामारी से बचाव के लिए प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है और स्थानीय लोग भी जल्द ही इससे उबरने के उपायों को अपनाने के लिए तैयार हैं।

  • इंदौर भागीरथपुरा कांड के खिलाफ कांग्रेस की न्याय यात्रा 11 जनवरी को जुटेंगे सभी विधायक

    इंदौर भागीरथपुरा कांड के खिलाफ कांग्रेस की न्याय यात्रा 11 जनवरी को जुटेंगे सभी विधायक


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के खिलाफ कांग्रेस ने अब एक निरंतर आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा नहीं होता कांग्रेस का यह आंदोलन जारी रहेगा। पटवारी ने विजयवर्गीय को घटनाओं का सरगना बताते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

    शनिवार को भागीरथपुरा में कांग्रेस नेताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने के मामले में पटवारी ने मुख्यमंत्री और मंत्री के रवैये की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह से पक्षपाती और अव्यवस्थित है। इसके अलावा कांग्रेस ने 11 जनवरी को न्याय यात्रा निकालने का निर्णय लिया है जो बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर राजवाड़ा तक जाएगी। इस यात्रा में प्रदेश भर के प्रमुख कांग्रेस नेता और सभी विधायक शामिल होंगे।

    कांग्रेस की बैठक रविवार को गांधी भवन में आयोजित की गई जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस की इंदौर प्रभारी उषा नायडू पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

    आंदोलन को और तेज करने के लिए कांग्रेस ने 6 जनवरी को इंदौर के सभी 85 वार्डों में प्रमुख चौराहों पर मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद 7 जनवरी को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ता मंत्री विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगी।कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।

  • इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट

    इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट


    इंदौर । इंदौर में दूषित पानी का संकट गहरा गया है जिसमें अब बोरिंग के पानी में भी फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया है। इस बैक्टीरिया के कारण हैजा टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। इस समस्या का मुख्य कारण सीवेज रिसाव माना जा रहा है जो पानी में मिलकर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार नगर निगम ने बोरिंग के कुल 69 पानी के सैंपल लिए थे जिसमें से 35 सैंपल जांच में फेल हो गए। इन सैंपलों में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है।

    इस बैक्टीरिया का मुख्य स्रोत सीवेज ओवरफ्लो अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज और खराब सेप्टिक टैंक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में यह बैक्टीरिया तब घुलता है जब ड्रेनेज चैंबरों से सीवेज लीक होता है और मल-मूत्र युक्त पानी बोरिंग के पानी में मिल जाता है। इस स्थिति से इंदौर शहर के भागीरथीपुरा क्षेत्र में विशेष रूप से संकट बढ़ा है। यहां 600 से अधिक बोरिंग की गई हैं जिनका पानी कई परिवारों की जीवनरेखा है। गंदे पानी के कारण अब तक 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 20 लोगों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में रखा गया है।

    इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का मुख्य कारण पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया का बढ़ना है जो आंतों किडनी लिवर और इम्यून सिस्टम पर प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक यह बैक्टीरिया आंतों में सूजन और कोलाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है जिससे शरीर में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इंदौर नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है ताकि पानी की गुणवत्ता सुधारी जा सके और लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप

    इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

    स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।

  • इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी

    इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी


    इंदौर । इंदौर में इन दिनों सर्द हवाओं और घने कोहरे ने शहरवासियों को ठिठुरन का अहसास करा दिया है। रविवार की सुबह भी कोहरे ने इंदौर को अपनी चपेट में लिया और शनिवार को भी कोहरा छाया हुआ था जिसके कारण दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई थी। इस घने कोहरे के कारण इंदौर एयरपोर्ट से दो दर्जन उड़ानें प्रभावित हुईं।

    उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण शहरवासियों को दिन और रात दोनों समय ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में अगले एक हफ्ते तक कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। 4 से 6 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है।

    वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इंदौर में नमी आ रही है और उत्तरी हवाओं की वजह से ठंडक का असर दिन में भी महसूस हो रहा है। हालांकि तीन दिन बाद हवाओं का रुख पश्चिमी होने से तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। 10 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बनेगा जिसके प्रभाव से इंदौर का तापमान बढ़ सकता है।

    शुक्रवार रात तीन बजे से शनिवार सुबह 4.30 बजे तक घना कोहरा छाया रहा और इस दौरान दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई। दिन में धूप भी बहुत कम समय के लिए निकली और अधिकांश समय बादल छाए रहे। शनिवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन दिनों तक इंदौर में शीतलता बरकरार रहेगी। रविवार तक कोहरे का असर जारी रहेगा और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।

  • इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी

    इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी


    इंदौर । इंदौर में दूषित और जहरीले पानी के कारण हुई मौतों का मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। सरकारी तंत्र की लापरवाही और बढ़ते जनआक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़े पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई।

    स्थानीय लोगों ने पहले ही पानी में गंदगी और बदबू की शिकायत की थी लेकिन प्रशासन ने समय पर पानी की आपूर्ति को रोकने के बजाय इसे नजरअंदाज किया। इसके परिणामस्वरूप कई मौतें हुईं जिनकी संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है। मृतकों के परिजनों और अस्पतालों के अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की पुष्टि की है।

    हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने बताया कि सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। मृतकों की सूची में उर्मिला 28 दिसंबर तारा 60 नंदा 70 और हीरालाल 65 शामिल हैं। सरकार ने इसे एक “प्रारंभिक रिपोर्ट” बताया जबकि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है।

    इंदौर के अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी द्वारा की गई जांच में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। लैब रिपोर्ट में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। विशेष रूप से हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया विब्रियो कोलेरी भी पानी में मौजूद था हालांकि सरकार इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती। नगर निगम की लैब में भेजे गए सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए।इस घटनाक्रम के बाद इंदौर नगर निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त किए गए हैं। इनमें खरगोन के सीईओ आकाश सिंह आलीराजपुर के सीईओ प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक शामिल हैं।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी हो रही है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इंदौर में लोगों को “पानी नहीं जहर” बांटने का आरोप लगाया। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान भी विवादों में रहे जिससे विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंदौर के प्रभावित इलाकों में अब लोग टैंकरों बोतलबंद पानी और बोरिंग पर निर्भर हैं। प्रशासन ने पानी की आपूर्ति की निगरानी और जांच तेज करने का दावा किया है लेकिन मौतों के वास्तविक आंकड़े और जिम्मेदारी तय होने पर सवाल अभी भी खड़े हैं।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथीपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान चली गई हैजिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना के बाद 30 साल पुरानी एक भयानक घटना की यादें ताजा हो गई हैंजब सुभाष चौक इलाके में पानी की टंकी में सड़ी लाश का पानी सप्लाई होने से लोग बीमार हो गए थे।

    पानी में सड़ी लाश मिलने की घटना ने उस समय पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। टंकी में पड़ा कंकाल पानी में मिलकर पूरे इलाके में सप्लाई हो रहा थाजिससे लोग दस्तउल्टी और बुखार जैसी समस्याओं से जूझने लगे थे। हालांकिइस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थीलेकिन लोगों में गहरे डर का माहौल बन गया था।

    अब 30 साल बादभागीरथीपुरा इलाके में फिर से दूषित पानी ने लोगों की जान ली है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस घटना ने इंदौर में पानी के सिस्टम की गुणवत्ता और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है।

    इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैलेकिन स्थानीय लोग और नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इन मौतों के बादसियासी माहौल भी गर्मा गया है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।यह घटना इंदौर में पानी की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करती हैऔर यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताती है कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिल सके।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला


    इंदौर । इंदौर में गंदा पानी पीने से हुए मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 338 नए मरीजों में से 32 की हालत गंभीर है। गंदे पानी की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में आम आदमी को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है और अब भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

    इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दूषित पानी की आपूर्ति पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।