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  • थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव

    थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव


    नई दिल्ली ।
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 सितंबर को अगस्त 2026 के थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2026 में यह 9.78 प्रतिशत थी। इस तरह थोक महंगाई लगातार चौथे महीने करीब 10 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। हालांकि WPI का 9.92 प्रतिशत होना यह नहीं बताता कि बाजार में हर सामान की कीमत इतनी ही बढ़ गई है।

    WPI यानी थोक मूल्य सूचकांक उस कीमत में बदलाव को मापता है, जिस पर सामान थोक बाजार में कारोबार करता है। यह मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों पर आधारित होता है। इसके विपरीत खुदरा स्तर पर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों का आकलन CPI के जरिए किया जाता है। WPI में सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता। स्कूल फीस, डॉक्टर की फीस, किराया और मोबाइल रिचार्ज जैसी सेवाएं इसके दायरे में नहीं आतीं।

    अगस्त में WPI महंगाई 9.92 प्रतिशत रही। इसका अर्थ यह है कि अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में WPI में शामिल वस्तुओं की कीमतों में औसतन 9.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका मतलब यह नहीं है कि हर वस्तु की कीमत 9.92 प्रतिशत बढ़ी है। अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि अलग-अलग रही है और कुछ श्रेणियों में कीमतें कम भी हुई हैं।

    अगस्त की थोक महंगाई बढ़ाने में पेट्रोलियम से जुड़ी कीमतों की बड़ी भूमिका रही। पावर पेट्रोल श्रेणी में महंगाई जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 38.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 34.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    खाद्य वस्तुओं ने भी थोक महंगाई पर दबाव बढ़ाया। अगस्त में फूड इंडेक्स की महंगाई 7.05 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 प्रतिशत थी। तैयार खाद्य उत्पादों की महंगाई भी अगस्त में 9.65 प्रतिशत रही। इससे खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ पैक्ड और प्रोसेस्ड उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव दिखाई दिया।

    हालांकि सभी श्रेणियों में कीमतें नहीं बढ़ीं। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई जुलाई के 8.52 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 7.76 प्रतिशत हो गई। नॉन-फूड आर्टिकल की महंगाई 17.66 प्रतिशत से घटकर 14.79 प्रतिशत और खनिजों की महंगाई 13.28 प्रतिशत से घटकर 8.24 प्रतिशत रही। बिजली की महंगाई -1.73 प्रतिशत और कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान की महंगाई -0.47 प्रतिशत रही।

    मार्च 2026 में WPI महंगाई 3.98 प्रतिशत थी। इसके बाद अप्रैल में 8.36 प्रतिशत, मई में 9.88 प्रतिशत, जून में 9.97 प्रतिशत और अगस्त में 9.92 प्रतिशत रही। इस बढ़ोतरी में बेस इफेक्ट की भी भूमिका बताई गई है। पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच WPI महंगाई औसतन -0.20 प्रतिशत थी, जबकि इस साल इसी अवधि में औसत महंगाई करीब 9.56 प्रतिशत रही।

    WPI का असर उपभोक्ता की जेब पर सीधे नहीं पड़ता, लेकिन थोक लागत बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल, स्टील, केमिकल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने पर कंपनियां कुछ समय तक लागत खुद वहन कर सकती हैं। लगातार दबाव रहने पर कुछ उत्पादों की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    अगस्त का WPI आंकड़ा अभी अस्थायी है और 84.4 प्रतिशत महत्व-आधारित उत्तर के आधार पर तैयार हुआ है। आगे मिलने वाले आंकड़ों के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। सितंबर के WPI आंकड़े 14 अक्टूबर 2026 को जारी होंगे, जिससे पता चलेगा कि पेट्रोलियम और अन्य कच्चे माल से बना कीमतों का दबाव आगे भी बना रहता है या इसमें कमी आती है।

  • अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ब्याज दर बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों ने बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ाई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान इसमें लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सोने की कीमत में कुल 1.8 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। चांदी भी करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखी गई।

    घरेलू बाजार में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा कारोबार का सुबह का सत्र बंद रहा। एमसीएक्स पर कारोबार शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होने की जानकारी दी गई है। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,34,886 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।

    अमेरिका में शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की उम्मीदों से अधिक रही। आंकड़ों से संकेत मिला कि महंगाई पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

    महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। कारोबारी सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की करीब 88 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी ऐसी परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिनसे ब्याज आय नहीं होती।

    इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

    यमन में हौथी बलों के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जे की बात भी सामने आई है। ये बंदरगाह उस महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र के पास हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से से जुड़ा है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए।

    विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने फिलहाल सोने और चांदी में नई खरीदारी से दूरी बनाई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक और ब्याज दर संबंधी फैसले पर है। यदि फेड दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर कुछ समर्थन दे सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा फेड के फैसले तथा कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होने की संभावना है।

  • Crude Oil Price Rise: कच्चे तेल की तेजी से महंगाई 6.5 प्रतिशत पार होने का अनुमान, एसबीआई रिसर्च ने रेपो रेट बढ़ाने को कहा

    Crude Oil Price Rise: कच्चे तेल की तेजी से महंगाई 6.5 प्रतिशत पार होने का अनुमान, एसबीआई रिसर्च ने रेपो रेट बढ़ाने को कहा

    नई दिल्ली ।वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेजी के बीच भारत में महंगाई को लेकर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे भी ऊपर जा सकती है। ऐसे में रिपोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक से मौद्रिक नीति के स्तर पर दरों में बढ़ोतरी करने की सलाह दी है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक को अक्टूबर में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी करनी चाहिए। इसके बाद दिसंबर में भी 25 आधार अंक की अतिरिक्त वृद्धि का सुझाव दिया गया है। इस तरह कुल 50 आधार अंक की बढ़ोतरी की जरूरत बताई गई है। इसके पीछे मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर पड़ने वाला संभावित असर है।

    एसबीआई रिसर्च के अनुमान के मुताबिक अगस्त में महंगाई दर करीब 4.8 से 4.9 प्रतिशत के बीच रह सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहने पर आने वाले महीनों में स्थिति बदल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक रहने की संभावना बन सकती है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल का बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। अगले 15 दिनों में इसके 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की उम्मीद भी जताई गई है। कच्चे तेल की कीमतों में इस तरह की तेजी का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में लागत के रूप में दिखाई देने लगा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक खुदरा महंगाई बढ़ने के शुरुआती संकेत पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बेवरेज, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में लागत का बढ़ता बोझ अब ग्राहकों तक पहुंचने की स्थिति बन रही है। रिपोर्ट ने इन सभी परिस्थितियों को ब्याज दरों में कुल 50 आधार अंक की बढ़ोतरी के लिए अनुकूल आधार माना है।

    लिक्विडिटी के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में जुटाए गए फंड काफी हद तक बैंकिंग सिस्टम की फंडिंग जरूरतों को पूरा करते हैं। इसके साथ ही क्रेडिट की मजबूत मांग और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए मौजूदा तेजी में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद जताई गई है।

    रिपोर्ट का अनुमान है कि यदि क्रेडिट की मांग अपेक्षा के अनुरूप पूरी होती है तो वित्त वर्ष 2027 के अंत तक सिस्टम में लिक्विडिटी सामान्य स्तर पर लौट सकती है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के बाकी समय में लिक्विडिटी धीरे-धीरे कम होने की संभावना है और मार्च 2027 तक इसका स्तर आदर्श रूप से 6 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए।

    बॉन्ड बाजार को लेकर भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण अनुमान दिया गया है। कई संकेतों के आधार पर 10 साल की भारतीय बेंचमार्क यील्ड के 7.15 प्रतिशत या उससे ऊपर जाने की संभावना जताई गई है।

    वैश्विक स्तर पर भी यील्ड में तेजी का रुझान बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रमुख यील्ड पिछले दस वर्षों के उच्चतम स्तर से ऊपर जा रहे हैं। अमेरिकी यील्ड में भी तेजी देखने को मिल रही है और 10 साल की यील्ड करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि 30 साल की यील्ड घटकर 5.40 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है।

  • सोने और चांदी में गिरावट, डॉलर की मजबूती के बीच अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर, जानें बाजार का हाल

    सोने और चांदी में गिरावट, डॉलर की मजबूती के बीच अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर, जानें बाजार का हाल

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। दोनों कीमती धातुओं में करीब 1.10 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। घरेलू बाजार में कीमतों में आई इस गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर बनी हुई है, जो आने वाले समय में कीमती धातुओं की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 की डिलीवरी वाला सोने का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,341 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,571 रुपये या 1.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,50,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में इसमें कुछ सुधार दिखाई दिया।

    सुबह 9:48 बजे सोना 867 रुपये यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,51,474 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने ने 1,50,695 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,51,483 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर छुआ।

    चांदी की कीमतों में भी शुक्रवार को दबाव देखा गया। एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला चांदी का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,34,099 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,530 रुपये यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,31,569 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला।

    कारोबार के दौरान चांदी ने 2,30,270 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम स्तर और 2,32,096 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर दर्ज किया। इस तरह घरेलू वायदा बाजार में सोने के साथ चांदी पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,350 डॉलर प्रति औंस पर थी। वहीं, चांदी 1.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63.63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    जानकारों के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच डॉलर की मजबूती सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डाल रही है। दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स एक सप्ताह के उच्चतम स्तर 99.12 पर पहुंच गया है।

    बाजार में अब अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है। ये आंकड़े देर शाम जारी होने हैं और इनके बाद सोने तथा चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर बाजार की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    महंगाई के आंकड़ों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। ऐसे में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों पर आने वाले आंकड़ों और डॉलर की चाल का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सोना महंगा तो चांदी सस्ती क्यों दिख रही, गोल्ड-सिल्वर रेशियो और फेयर वैल्यू से समझिए दोनों धातुओं की कीमत का अंतर

    सोना महंगा तो चांदी सस्ती क्यों दिख रही, गोल्ड-सिल्वर रेशियो और फेयर वैल्यू से समझिए दोनों धातुओं की कीमत का अंतर

    नई दिल्ली ।मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मंगलवार, 8 सितंबर को सोने और चांदी के वायदा भाव में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर बनी उम्मीदों से कीमती धातुओं को समर्थन मिला। अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा और इसमें 0.14 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। दूसरी ओर दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स 2.38 लाख रुपये प्रति किलो पर रहा, जिसमें 0.08 प्रतिशत की गिरावट आई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,434 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 66.95 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। दोनों धातुओं पर मौजूदा आर्थिक संकेतों का प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन उनकी कीमत और वैल्यूएशन की स्थिति एक जैसी नहीं है।

    सोने की मॉडल्ड फेयर वैल्यू 3,248 से 4,595 डॉलर प्रति औंस के बीच बताई गई है। इसका मिडपॉइंट 3,922 डॉलर प्रति औंस है। अगस्त की शुरुआत में सोना करीब 4,242 डॉलर प्रति औंस पर था, जो अनुमानित मिडपॉइंट से करीब 8 प्रतिशत अधिक था। जनवरी में सोना 5,589 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचा था, जो मॉडल्ड रेंज से काफी ऊपर था।

    इसके बाद जून में सोने की कीमत लगभग 3,985 डॉलर प्रति औंस तक आई, जो अनुमानित फेयर वैल्यू के करीब थी। बाद में सोने में फिर तेजी देखने को मिली। इसका मतलब यह है कि पहले की तेज सट्टेबाजी कुछ कम हुई है, लेकिन सोना अभी भी मॉडल्ड मिडपॉइंट से ऊपर कारोबार कर रहा है।

    चांदी के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। इसकी वैल्यूएशन को गोल्ड-सिल्वर रेशियो के आधार पर देखा जा रहा है। 60:1 के सामान्य रेशियो के अनुसार चांदी की अनुमानित कीमत 54 से 77 डॉलर प्रति औंस के बीच बनती है, जिसका मिडपॉइंट 65 डॉलर है। विश्लेषण के अनुसार चांदी करीब 61.7 डॉलर प्रति औंस पर थी, यानी मिडपॉइंट से लगभग 6 प्रतिशत नीचे।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो भी चांदी की तुलनात्मक स्थिति को समझने में मदद करता है। जनवरी में यह अनुपात करीब 46 तक पहुंच गया था, जिसका मतलब था कि सोने की तुलना में चांदी महंगी हो गई थी। अब यह लगभग 69 पर पहुंच चुका है, जो 21वीं सदी के करीब 69:1 के औसत के आसपास है।

    चांदी को केवल निवेश मांग से ही समर्थन नहीं मिलता। इसका इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग का भी प्रभाव पड़ता है। रुपये की कमजोरी भी घरेलू MCX सिल्वर के लिए समर्थन देने वाला कारक मानी जा रही है।

    MCX सिल्वर के लिए 2.36 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर सपोर्ट और 2.42 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर रेजिस्टेंस बताया गया है। यदि चांदी रेजिस्टेंस के ऊपर टिकती है तो खरीदारी बढ़ने की संभावना बताई गई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर है। PPI और CPI जैसे आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। सोने के लिए 4,300 से 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी के लिए 65 से 67 डॉलर प्रति औंस के स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    भारतीय निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये की चाल भी अहम है। अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने के साथ रुपया कमजोर होने पर घरेलू सोने-चांदी की कीमतों में तेजी अधिक दिख सकती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट की स्थिति में कमजोर रुपया घरेलू कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकता है।

  • पाकिस्‍तान में खाद्य सुरक्षा का संकट, रोटी-चावल तक के लिए मोहताज हो रहे पाकिस्तानी, देखें आकड़े

    पाकिस्‍तान में खाद्य सुरक्षा का संकट, रोटी-चावल तक के लिए मोहताज हो रहे पाकिस्तानी, देखें आकड़े


    नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अब खाद्य असुरक्षा भी गंभीर होती जा रही है। पाकिस्तान सरकार के आंकड़े ही देश के बिगड़ते हालात की तस्वीर सामने रख रहे हैं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में पाकिस्तानी परिवारों ने गेहूं, चावल, मीट, दूध और चाय समेत लगभग सभी प्रमुख खाद्य श्रेणियों का सेवन कम किया है। ग्रामीण ही नहीं, शहरी परिवार भी इसकी चपेट में हैं।

    2019 में 15.92% परिवार खाद्य असुरक्षित थे, 2025 में आंकड़ा 24.35%
    ‘पाकिस्तान टुडे’ की रिपोर्ट में PBS के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पाकिस्तान में मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा वाले परिवारों की हिस्सेदारी 2019 में 15.92% थी, जो 2025 में बढ़कर 24.35% हो गई।

    वहीं, गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझने वाले परिवारों की हिस्सेदारी भी दोगुने से ज्यादा बढ़ी है। यह 2.37% से बढ़कर 5.04% हो गई। यानी अब करीब एक चौथाई पाकिस्तानी परिवार किसी न किसी स्तर पर भूख और कुपोषण का सामना कर रहे हैं।

    छोटी रोटियां, कम चावल और बच्चों के दूध में भी कटौती
    महंगाई बढ़ने के साथ पाकिस्तानी परिवारों की खाने की थाली भी सिकुड़ रही है। परिवार अब पहले की तुलना में कम मात्रा में चावल पका रहे हैं और छोटी रोटियां बना रहे हैं। मीट की खपत घट गई है, जबकि बच्चों को दिए जाने वाले दूध की मात्रा में भी कटौती की जा रही है।

    चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों का सेवन भी कम हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से परिवारों को अपनी खरीदारी की मात्रा और भोजन की विविधता दोनों में कटौती करनी पड़ रही है।

    ग्रामीण इलाकों में हालात ज्यादा खराब
    PBS के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की खपत में गिरावट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दर्ज की गई है। हालांकि ग्रामीण परिवारों पर इसका दबाव ज्यादा है। महंगे भोजन के कारण पौष्टिक आहार तक आम लोगों की पहुंच लगातार कम होती जा रही है।

    कृषि प्रधान देश, फिर भी खाद्य पदार्थों का शुद्ध आयातक
    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कृषि प्रधान माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद देश में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कम से कम 2021 से खाद्य पदार्थों का शुद्ध आयातक बना हुआ है।

    यह स्थिति पाकिस्तान के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है। भोजन की मात्रा और गुणवत्ता में लगातार गिरावट का असर आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और पोषण पर पड़ सकता है। आर्थिक संकट के साथ बढ़ती खाद्य असुरक्षा अब पाकिस्तान के सामने एक और बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

  • मुंबई में महंगाई का डबल झटका, CNG-PNG के साथ ऑटो-टैक्सी किराया भी बढ़ा

    मुंबई में महंगाई का डबल झटका, CNG-PNG के साथ ऑटो-टैक्सी किराया भी बढ़ा


    नई दिल्ली। मुंबई में एक सितंबर से आम लोगों की जेब पर महंगाई का दोहरा असर पड़ा है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी और घरेलू पीएनजी के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो रिक्शा और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया भी बढ़ गया है। दोनों बढ़ोतरी एक सितंबर से लागू हो गई हैं।

    CNG 2 रुपये और PNG 1 रुपये महंगी

    MGL के मुताबिक, मुंबई और आसपास के इलाकों में सीएनजी की कीमत 2 रुपये प्रति किलो बढ़कर 88 रुपये प्रति किलो हो गई है। घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के दाम में भी 1 रुपये प्रति एससीएम की बढ़ोतरी की गई है।

    कंपनी ने कीमत बढ़ाने के पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव को वजह बताया है। MGL के अनुसार, इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बढ़ी हैं। सीएनजी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए महंगे दाम पर आयातित स्पॉट RLNG का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

    इस बढ़ोतरी का असर मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, लातूर और धाराशिव के अलावा कर्नाटक के चित्रदुर्ग और दावणगेरे में MGL के नेटवर्क से सीएनजी लेने वाले करीब 13 लाख वाहन मालिकों पर पड़ेगा। वहीं, करीब 30 लाख घरेलू PNG उपभोक्ताओं को भी अब ज्यादा भुगतान करना होगा।

    ऑटो-टैक्सी का सफर भी हुआ महंगा

    मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो और टैक्सी से सफर करने वालों के लिए भी किराया बढ़ गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण (MMRTA) ने ऑटो रिक्शा का न्यूनतम किराया 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया 33 रुपये कर दिया है।

    ऑटो के किराए में 1 रुपये और टैक्सी के किराए में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब टैक्सी का किराया 20.66 रुपये से बढ़कर 21.90 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है, जबकि ऑटो का किराया 17.14 रुपये से बढ़कर 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है।

    टैक्सी में पहले 1.5 किलोमीटर के लिए 31 रुपये देने पड़ते थे, अब इसके लिए 33 रुपये चुकाने होंगे।

    ड्राइवरों को मीटर अपडेट कराने के लिए नवंबर तक का समय

    आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक, ड्राइवर अपने इलेक्ट्रॉनिक मीटर को नई दरों के अनुसार कैलिब्रेट करा सकते हैं। इसके अलावा आरटीओ से मंजूर किराया तालिका भी वाहन में प्रदर्शित की जा सकती है। मीटर को दोबारा कैलिब्रेट कराने के लिए ड्राइवरों को नवंबर के अंत तक का समय दिया गया है। तय अवधि में मीटर अपडेट नहीं कराने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

    ज्यादातर ऑटो-टैक्सी CNG पर निर्भर

    मुंबई महानगर क्षेत्र में 4.5 लाख से ज्यादा ऑटो रिक्शा और 50 हजार से अधिक काली-पीली टैक्सियां संचालित होती हैं। इनमें से अधिकांश वाहन सीएनजी से चलते हैं। ऐसे में ईंधन और किराया दोनों बढ़ने से यात्रियों के साथ-साथ ऑटो-टैक्सी चालकों पर भी खर्च का असर पड़ना तय है।

    मुंबई में इससे पहले ऑटो और टैक्सी का किराया फरवरी 2025 में बढ़ाया गया था। करीब 18 महीने बाद एक बार फिर किराए में बढ़ोतरी की गई है।

  • तीन साल की नई ऊंचाई पर पहुंचा चावल का निर्यात…. बढ़ती महंगाई के बीच दाम भी बढ़े

    तीन साल की नई ऊंचाई पर पहुंचा चावल का निर्यात…. बढ़ती महंगाई के बीच दाम भी बढ़े


    नई दिल्ली।
    एक तरफ जहां देश में चावल के दाम (Rice prices) में तेजी (Rise) आ रही है, वहीं इसके निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 26 प्रमुख उपभोक्ता देशों को भारत का चावल निर्यात (Rice Exports) सिर्फ पांच महीनों में तीन साल की नई उंचाई पर आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच बासमती और गैर-बासमती चावल (Non-Basmati rice) का कुल निर्यात 23,476 करोड़ रुपये और 47.9 लाख टन तक पहुंच गया।

    पश्चिम एशिया संकट के कारण खाड़ी क्षेत्रों में चावल का आयात घट गया है। इसके बावजूद भारत का निर्यात प्रभावित नहीं हुआ है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के अनुसार, पिछले तीन वर्षों की इसी अवधि (नवंबर-मार्च) के औसत की तुलना में निर्यात मूल्य में 1.1 प्रतिशत और मात्रा में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    15% बढ़े दाम तीन हफ्ते में
    पिछले दो-तीन हफ्तों में चावल की खुदरा कीमतों में करीब 15 फीसदी की तेजी आई है। कई किस्मों के चावल 15-20 रुपये प्रति किलो तक महंगे हो गए हैं। सबसे अधिक तेजी प्रीमियम बासमती में देखी जा रही है। इसका भाव 85 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। साधारण और परमल चावल की किस्मों में भी प्रति क्विंटल 100 से 500 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।

    दालों की खरीद के लिए खुलेंगे 500 नए केंद्र
    दलहन उत्पादकों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने और बिक्री की परेशानियों से बचाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड दोनों मिलकर देशभर में 500 नए केंद्र खोलेंगे। ये दोनों एजेंसियां किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधा दालों की खरीद करेंगी।

    नैफेड के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार के मुताबिक, खरीफ सीजन की दालें जल्द बाजार में आने वाली हैं। इन केंद्रों पर अरहर के साथ ही चना और उड़द जैसी प्रमुख दालों की खरीद होगी। दाल उत्पादन वाले राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश प्रमुख रूप से शामिल हैं। नैफेड देश के करीब 50 जिलों में किसानों के बीच अभियान चलाकर पोर्टल पर उनका पंजीकरण कराएगा।

  • सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का प्रोविजनल डेटा जारी किया है। आंकड़ों में अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में कीमतों के रुझान में अंतर देखने को मिला। इंश्योरेंस और टेलीकॉम सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंकिंग और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सेवाओं के मूल्य सूचकांक में गिरावट आई। हवाई यात्री सेवाओं में सबसे तेज वार्षिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की जून तिमाही में इंश्योरेंस सर्विस प्राइस इंडेक्स 102.9 रहा। इसमें सालाना आधार पर 0.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बीमा सेवाओं की कीमतों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मामूली बढ़ोतरी हुई। टेलीकॉम सर्विसेज प्राइस इंडेक्स 112.2 रहा और इसमें सालाना आधार पर 0.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सर्विस प्राइस इंडेक्स में इसके विपरीत गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में यह सूचकांक 89.9 रहा, जो सालाना आधार पर 1.32 प्रतिशत कम है। बैंकिंग सर्विस प्राइस इंडेक्स भी 100.9 पर रहा और इसमें सालाना आधार पर 3.35 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। हालांकि, बैंकिंग सर्विस कॉन्ट्रिब्यूशन इंडेक्स 134.8 रहा और इसमें सालाना आधार पर 6.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    पेंशन क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। मैनेजमेंट ऑफ पेंशन फंड्स सर्विस प्राइस इंडेक्स 113.3 रहा और इसमें सालाना आधार पर 5.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं की कीमतों में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले वृद्धि हुई है।

    हवाई यात्री सेवाओं में सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही में एयर पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 126.4 रहा, जो सालाना आधार पर 31.94 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि अन्य प्रमुख सेवा क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे हवाई यात्री सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर तेज बदलाव का पता चलता है।

    रेलवे सेवाओं के सूचकांक में भी सीमित बढ़ोतरी दर्ज हुई। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रेलवे सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.4 रहा और इसमें सालाना आधार पर 1.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रेलवे फ्रेट सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.3 रहा, जो सालाना आधार पर 0.10 प्रतिशत बढ़ा। वहीं रेलवे पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.5 रहा और इसमें 3.50 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

    सरकार के अनुसार सर्विस पीपीआई में सात प्रकार की सेवाओं को शामिल किया जाता है और इसका बेस ईयर 2022-23 निर्धारित है। हालांकि, इन सूचकांकों में सेवाओं के भारांक को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि यह पूरे सर्विस सेक्टर को कवर नहीं करते हैं। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के लिए सर्विस पीपीआई का अगला प्रोविजनल डेटा 25 नवंबर 2026 को जारी किया जाएगा।

  • चीनी के साथ प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता, सरकार के कदमों के बावजूद महंगाई का दबाव जारी

    चीनी के साथ प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता, सरकार के कदमों के बावजूद महंगाई का दबाव जारी

    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पिछले कुछ समय से तेजी देखी जा रही है। चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ गया है। खास तौर पर चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में चीनी के दाम करीब 7 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं, जबकि एक महीने में इसकी कीमत में लगभग 17 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कई बाजारों में चीनी करीब 70 रुपये किलो तक बिक रही है।

    चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर चिंता प्रमुख कारणों में शामिल है। सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा निर्धारित की गई है। घरेलू स्तर पर नई चीनी की उपलब्धता जल्दी बढ़ाने के लिए चीनी मिलों में पेराई सत्र भी सामान्य से पहले शुरू करने की तैयारी है।

    प्याज की कीमतों में भी पिछले कुछ सप्ताह में बढ़ोतरी हुई है। 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 40.79 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह लगभग 36.56 रुपये और एक महीने पहले 34.87 रुपये प्रति किलो था। इस तरह कुछ ही समय में प्याज के दाम में 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। दक्षिण भारत में आवक प्रभावित होने के साथ महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की स्थिति का भी असर पड़ा है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

    दालों की कीमतों में भी हल्की तेजी का रुख बना हुआ है। अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी प्रमुख दालों के दाम में पिछले एक महीने में लगभग 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। दलहन की बुवाई के रकबे में कमी और मानसून से जुड़ी अनिश्चितता को इसकी प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। कमजोर बारिश या फसल उत्पादन में कमी की आशंका आगे दालों की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है।

    खाद्य तेल भी महंगाई के इस दबाव से अछूते नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। उत्पादन वाले क्षेत्रों में मौसम संबंधी परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। भारत खाद्य तेल की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पिछले एक महीने में खाद्य तेलों की कीमतों में करीब 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।

    इस तरह रसोई की महंगाई के पीछे किसी एक वस्तु की समस्या नहीं बल्कि आपूर्ति, मौसम, घरेलू उत्पादन, आयात लागत और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव दिखाई दे रहा है। सरकार चीनी और प्याज की उपलब्धता बढ़ाने तथा जमाखोरी पर रोक लगाने जैसे कदम उठा रही है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा नई फसल की आवक, मानसून और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगी।