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  • लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 2 करोड़ की फिरौती, दिल्ली से सिवनी तक पहुंची जांच, मोबाइल नंबर से खुला एमपी कनेक्शन

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 2 करोड़ की फिरौती, दिल्ली से सिवनी तक पहुंची जांच, मोबाइल नंबर से खुला एमपी कनेक्शन


    नई दिल्ली ।
    लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दिल्ली के एक व्यापारी से 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तकनीकी जांच के दौरान इस मामले का कनेक्शन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से जुड़ने के बाद दिल्ली पुलिस की विशेष टीम जांच के लिए सिवनी पहुंची। फिलहाल पुलिस साइबर एंगल से मामले की गहन पड़ताल कर रही है और कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार दिल्ली के एक कारोबारी को व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी दी गई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताते हुए 2 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। व्यापारी को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई थी। घटना के बाद व्यापारी ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान पुलिस ने कॉल में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर की तकनीकी ट्रैकिंग की। प्रारंभिक जांच में पता चला कि संबंधित नंबर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के एक युवक के नाम पर पंजीकृत है। इसी जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम स्थानीय पुलिस के सहयोग से सिवनी पहुंची और संबंधित युवक से पूछताछ की।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक युवक का नाम सुनील सतनामी बताया जा रहा है। हालांकि अब तक की जांच में उसके सीधे तौर पर फिरौती मांगने या किसी संगठित आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस ने युवक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसके डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसियों का मानना है कि संभव है किसी तीसरे व्यक्ति ने अनाधिकृत तरीके से युवक के मोबाइल नंबर का उपयोग किया हो या फिर सिम कार्ड का दुरुपयोग किया गया हो। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए साइबर विशेषज्ञ कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट प्रोटोकॉल लॉग, व्हाट्सएप गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं।

    पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल वास्तव में किस लोकेशन से की गई थी और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। हाल के वर्षों में कुख्यात गैंगों के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों, डॉक्टरों और उद्योगपतियों से फिरौती मांगने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कई बार अपराधियों ने फर्जी पहचान और इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का सहारा लिया है।

    मध्य प्रदेश और दिल्ली पुलिस के बीच समन्वय बनाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर तकनीकी पहलू की जांच की जा रही है और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि जरूरत पड़ी तो जांच का दायरा अन्य राज्यों तक भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि धमकी भरी व्हाट्सएप कॉल किसने की, मोबाइल नंबर का उपयोग कैसे हुआ और क्या इसके पीछे कोई संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय है।

    मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

  • इछावर में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कूल परीक्षा के लिए निकली छात्रा गंभीर घायल, मोबाइल लॉक होने से परिजनों तक पहुंचने में मुश्किल

    इछावर में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कूल परीक्षा के लिए निकली छात्रा गंभीर घायल, मोबाइल लॉक होने से परिजनों तक पहुंचने में मुश्किल

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में शनिवार सुबह एक गंभीर सड़क दुर्घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया। परीक्षा देने स्कूल जा रही एक छात्रा और उसे बाइक से ले जा रहा युवक अज्ञात वाहन की टक्कर का शिकार हो गए। हादसा इतना भीषण था कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आसपास के लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

    जानकारी के अनुसार छात्रा जिला मुख्यालय स्थित शासकीय एक्सीलेंस स्कूल में परीक्षा देने जा रही थी। वह एक युवक के साथ बाइक पर सवार होकर निर्धारित परीक्षा केंद्र की ओर बढ़ रही थी। इसी दौरान मोगराराम जोड़ के समीप उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही बाइक असंतुलित हो गई और दोनों सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके पर रुके बिना फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दोनों घायलों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराते हुए जिला अस्पताल भिजवाया। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति भी बनी रही।

    अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों घायलों का परीक्षण किया। जांच में छात्रा के सिर सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें पाई गईं। उसकी स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार छात्रा की हालत नाजुक बनी हुई है और उसका उपचार विशेषज्ञों की निगरानी में जारी है। वहीं बाइक चला रहे युवक का भी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।

    दुर्घटना के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती घायलों की पहचान और उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की बन गई है। छात्रा के पास से एक मोबाइल फोन मिला है, लेकिन उसमें स्क्रीन लॉक लगा होने के कारण पुलिस संपर्क नंबर प्राप्त नहीं कर पा रही है। इससे परिजनों तक तुरंत सूचना पहुंचाने में कठिनाई आ रही है। अधिकारियों ने उपलब्ध अन्य दस्तावेजों और सुरागों के आधार पर पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    पुलिस को छात्रा के पास से एक प्रवेश पत्र भी मिला है। दस्तावेज में दर्ज जानकारी के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि छात्रा नसरुल्लागंज क्षेत्र की रहने वाली हो सकती है। इसी आधार पर संबंधित क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने और परिवार की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं घायल युवक की भी पूरी पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि उसके हाथ पर ‘गणेश’ नाम अंकित होने के कारण पुलिस को कुछ सुराग मिलने की उम्मीद है।

    प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों और संबंधित थानों को भी सूचना भेजी है ताकि दोनों घायलों के परिजनों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। साथ ही दुर्घटना को अंजाम देने वाले अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश भी तेज कर दी गई है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से वाहन की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकली छात्रा का इस तरह दुर्घटना का शिकार होना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास घायलों की पहचान या दुर्घटना से जुड़ी कोई जानकारी हो तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें, जिससे जांच को आगे बढ़ाने और परिजनों तक सूचना पहुंचाने में मदद मिल सके।

  • भोपाल में JEE अभ्यर्थी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता, मोबाइल और जरूरी सामान घर पर छोड़कर निकला, पुलिस की तलाश जारी

    भोपाल में JEE अभ्यर्थी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता, मोबाइल और जरूरी सामान घर पर छोड़कर निकला, पुलिस की तलाश जारी

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र के अचानक लापता हो जाने का मामला सामने आया है। छात्र के रहस्यमय परिस्थितियों में घर से गायब होने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और छात्र की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

    जानकारी के अनुसार लापता छात्र कृष धाकड़ पिछले करीब दो वर्षों से भोपाल में रहकर संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) की तैयारी कर रहा था। वह ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर रहा था और शहर के कोलार रोड क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहा था। परिवार के अनुसार उसकी पढ़ाई नियमित रूप से चल रही थी और हाल के दिनों में किसी विशेष परेशानी या विवाद की जानकारी सामने नहीं आई थी।

    परिजनों का कहना है कि बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात लगभग तीन बजे के आसपास कृष घर से बाहर निकल गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि वह अपना मोबाइल फोन, निजी दस्तावेज और अन्य आवश्यक सामान घर पर ही छोड़ गया। सुबह जब परिवार के सदस्यों ने उसे घर में नहीं पाया तो पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई।

    छात्र के अचानक लापता होने की खबर मिलने के बाद स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने छात्र के कमरे, उसके सामान और आसपास के क्षेत्र की जानकारी एकत्रित की। चूंकि छात्र का मोबाइल फोन घर पर ही मिला है, इसलिए उसकी लोकेशन या कॉल रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल कोई सुराग नहीं मिल सका। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब अन्य तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

    पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों का प्रयास है कि यह पता लगाया जा सके कि छात्र घर से निकलने के बाद किस दिशा में गया और उसके बाद उसकी गतिविधियां क्या रहीं। इसके अलावा आसपास के इलाकों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की भी जांच की जा रही है ताकि छात्र की मौजूदगी से जुड़ा कोई सुराग मिल सके।

    परिवार के सदस्य लगातार छात्र के परिचितों, मित्रों और रिश्तेदारों से संपर्क कर रहे हैं। हालांकि अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जिससे उसके संभावित ठिकाने का पता चल सके। छात्र के अचानक बिना मोबाइल और आवश्यक सामान के घर छोड़ने की घटना ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यही कारण है कि पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर अक्सर शैक्षणिक दबाव और भविष्य को लेकर मानसिक तनाव भी रहता है। हालांकि वर्तमान मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि जांच प्रारंभिक चरण में है और पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति को छात्र के संबंध में कोई जानकारी मिलती है या वह कहीं दिखाई देता है तो तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित करने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन का कहना है कि छात्र की सुरक्षित बरामदगी उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।

    फिलहाल परिवार छात्र के सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए हुए है, जबकि पुलिस जांच को लगातार आगे बढ़ा रही है। मामले से जुड़े हर संभावित सुराग की जांच की जा रही है और अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही छात्र के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकेगी।

  • मध्य प्रदेश नर्सिंग घोटाले में हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, केवल फिट घोषित कॉलेजों के छात्र ही दे सकेंगे जीएनएम थर्ड ईयर परीक्षा

    मध्य प्रदेश नर्सिंग घोटाले में हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, केवल फिट घोषित कॉलेजों के छात्र ही दे सकेंगे जीएनएम थर्ड ईयर परीक्षा

     
     मध्य प्रदेश : में चर्चित नर्सिंग कॉलेज मामले में हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दे पर स्पष्टता प्रदान कर दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि केवल वे नर्सिंग कॉलेज, जिन्हें जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर फिट घोषित किया गया है, उनके छात्र ही जीएनएम थर्ड ईयर की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके साथ ही सत्र 2022-23 के जीएनएम फर्स्ट ईयर के परिणाम जारी करने का रास्ता भी खुल गया है।

    मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों को जांच में अनफिट पाया गया है, उन्हें परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। ऐसे संस्थानों को परीक्षा संबंधी किसी भी लाभ का पात्र नहीं माना जाएगा।

    यह पूरा मामला राज्य में संचालित नर्सिंग कॉलेजों की गुणवत्ता और वैधता को लेकर उठे गंभीर सवालों के बाद सामने आया था। जांच प्रक्रिया के दौरान यह पाया गया कि कई संस्थान आवश्यक आधारभूत सुविधाओं, प्रशिक्षित शिक्षकों और निर्धारित संसाधनों के बिना संचालित हो रहे थे। इसके बाद व्यापक स्तर पर सत्यापन और निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

    जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरे शिक्षा क्षेत्र को झकझोर दिया। प्रदेश में संचालित 695 नर्सिंग कॉलेजों की समीक्षा के दौरान केवल 165 संस्थान ही निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरे उतर सके। यह आंकड़ा इस बात की ओर संकेत करता है कि बड़ी संख्या में कॉलेज आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।

    हालांकि, अदालत ने उन संस्थानों को राहत देने का अवसर भी दिया जिन्होंने अपनी कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए थे। ऐसे 89 कॉलेजों को अतिरिक्त अवसर प्रदान किया गया और बाद में उन्हें आवश्यक शर्तें पूरी करने के बाद फिट घोषित कर दिया गया। इस निर्णय से उन छात्रों को राहत मिली है जो मान्यता प्राप्त संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं और लंबे समय से परीक्षा तथा परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे थे।

    दूसरी ओर, जांच में गंभीर अनियमितताओं वाले और मानकों पर खरे न उतरने वाले शेष कॉलेजों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। ऐसे संस्थानों को संचालन के लिए अयोग्य मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन अनिवार्य है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल वर्तमान छात्रों के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में नर्सिंग शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित और योग्य नर्सिंग पेशेवरों की आवश्यकता को देखते हुए संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

    अदालत के इस आदेश के बाद अब फिट घोषित कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों के लिए परीक्षा और परिणामों से जुड़ी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो गई है। वहीं, राज्य में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मानक आधारित बनाने की दिशा में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

    अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

    नई दिल्ली । अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दुर्घटना के कारणों पर चल रही जांच के बीच पायलटों के एक प्रमुख संगठन ने आधिकारिक अंतरिम निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए नई तकनीकी जानकारी सामने रखी है। संगठन का दावा है कि उपलब्ध सिम्युलेटर परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि दुर्घटना की मुख्य वजह किसी पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि विमान में उत्पन्न हुई गंभीर विद्युत प्रणाली की विफलता हो सकती है।

    विमान दुर्घटना के बाद जारी अंतरिम जांच निष्कर्षों में यह संकेत दिया गया था कि इंजन को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति बंद होने के कारण विमान की शक्ति प्रणाली प्रभावित हुई और कुछ ही सेकेंड के भीतर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि अब पायलट संगठन ने इस निष्कर्ष को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके द्वारा कराए गए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षण आधिकारिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते।

    संगठन के अनुसार, दुर्घटना से पहले विमान के वजन, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिम्युलेटर पर कई परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में यह पाया गया कि यदि ईंधन आपूर्ति को मैन्युअल रूप से बंद किया जाए तो बैकअप पावर सिस्टम को सक्रिय होने में आधिकारिक दावे की तुलना में काफी अधिक समय लगता है। संगठन का कहना है कि यह अंतर जांच की दिशा और निष्कर्षों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विमान में विद्युत प्रणाली की व्यापक विफलता अनेक अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि उड़ान के महत्वपूर्ण चरण में अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो इंजन नियंत्रण, संचार प्रणाली और अन्य सुरक्षा तंत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। पायलट संगठन इसी संभावना की ओर संकेत करते हुए कह रहा है कि दुर्घटना की जड़ में कोई बड़ी तकनीकी खराबी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

    दुर्घटना से जुड़े कुछ विवरणों का हवाला देते हुए संगठन ने यह भी दावा किया कि विमान में उड़ान के अंतिम क्षणों से पहले विद्युत असामान्यताओं के संकेत देखे गए थे। उनके अनुसार, उपलब्ध जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि विमान में अचानक और व्यापक स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई हो सकती है। यही कारण है कि संगठन ने जांच एजेंसियों से सभी तकनीकी पहलुओं की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है।

    विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की जांच में जल्दबाजी से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। आधुनिक विमानों में हजारों तकनीकी पैरामीटर रिकॉर्ड होते हैं और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उड़ान डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, रखरखाव इतिहास और तकनीकी परीक्षणों का व्यापक अध्ययन किया जाता है। इसलिए किसी भी वैकल्पिक तकनीकी संभावना को पूरी तरह खारिज करने से पहले उसका परीक्षण आवश्यक माना जाता है।

    इस बीच पायलट संगठन ने संबंधित तकनीकी आंकड़े और परीक्षण परिणाम विमान निर्माता तथा विमानन अधिकारियों को सौंपने का दावा किया है। साथ ही संगठन ने मांग की है कि दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच न केवल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को सामने लाने के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

    अहमदाबाद विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया था। अब जांच के इस नए मोड़ ने तकनीकी विशेषज्ञों, विमानन समुदाय और आम लोगों के बीच दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अंतिम निष्कर्ष आने तक इस मामले पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

  • पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । देश की राजधानी में एक बेहद हैरान करने वाला और अब तक का सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के परिवार और उनकी कंपनी को निशाना बनाकर साइबर अपराधियों ने करीब 7.8 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय चूना लगाया है। शातिर ठगों ने इस पूरे स्कैम को व्हाट्सएप मैसेंजर के जरिए बेहद चालाकी और लंबी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया। इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर कॉर्पोरेट जगत और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

    इस बेहद शातिर ठगी की शुरुआत नरेश गुजराल की कंपनी में कार्यरत एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी के मोबाइल पर आए एक अज्ञात व्हाट्सएप मैसेज से हुई। ठगों ने चालाकी का परिचय देते हुए उस अनजान नंबर पर पूर्व सांसद नरेश गुजराल की ही प्रोफाइल फोटो यानी डीपी लगा रखी थी। वरिष्ठ अधिकारी ने जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर अपने बॉस की तस्वीर देखी, उन्हें रत्ती भर भी अंदेशा नहीं हुआ कि यह कोई जालसाज हो सकता है। ठग ने खुद को नरेश गुजराल के रूप में पेश करते हुए बेहद कड़क और पेशेवर अंदाज में अधिकारी से चैट शुरू की और कंपनी के काम का हवाला देते हुए एक अज्ञात बैंक खाते में तुरंत एक बड़ी रकम ट्रांसफर करने का सख्त निर्देश दे दिया।

    व्हाट्सएप पर मिले इस कथित निर्देश के बाद अधिकारी ने बिना कोई प्रामाणिक जांच किए तुरंत पहली किश्त के रूप में करीब 1.5 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से बताए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। ठगों का हौसला यहीं नहीं रुका; उन्होंने अधिकारी के इसी अटूट भरोसे का फायदा उठाते हुए अगले चार दिनों तक लगातार सिलसिलेवार ढंग से अलग-अलग बहानों से और पैसों की मांग की। बॉस की डीपी और उनके बात करने के लहजे से पूरी तरह आश्वस्त अधिकारी लगातार ट्रांजैक्शन करता रहा, जिसके चलते महज 96 घंटों के भीतर कंपनी के खाते से कुल 7.8 करोड़ रुपये ठगों के हवाले कर दिए गए।

    इस अभूतपूर्व वित्तीय धोखाधड़ी के दौरान सुरक्षा के तमाम दावों के बीच बैंक और कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी सीएफओ भी गच्चा खा गए। लगातार हो रहे करोड़ों रुपये के इस बड़े लेन-देन को देखकर बैंक प्रबंधन को कुछ संदेह अवश्य हुआ था, जिसके बाद उन्होंने तत्काल कंपनी के सीएफओ से इस संबंध में संपर्क भी साधा। हालांकि, सीएफओ ने भी आंतरिक रूप से बिना किसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के यह मान लिया कि यह वित्तीय निर्देश स्वयं नरेश गुजराल की ओर से ही जारी किए गए हैं, जिसके कारण यह संदिग्ध ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के जारी रहा।

    इस पूरे काले खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब 16 जून को लगातार पैसे भेजने से परेशान वरिष्ठ अधिकारी को कुछ गंभीर संदेह हुआ। उन्होंने सीधे नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता लगातार बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दे रहे हैं। यह सुनते ही दीक्षा के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई भी संदेश नहीं भेजा था। परिवार को तुरंत साइबर फ्रॉड का अहसास हुआ और उन्होंने बिना समय गंवाए उसी दिन दिल्ली पुलिस में ई-एफआईआर दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल साइबर टीम आईएफएसओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तकनीकी जांच शुरू की और उस बैंक खाते को ट्रैक कर लिया, जिसमें पैसे भेजे गए थे। पुलिस की तत्परता के चलते ठगी गई कुल राशि में से करीब 4 करोड़ रुपये को उसी खाते में समय रहते फ्रीज कर दिया गया है, जबकि शेष राशि की रिकवरी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए देशव्यापी छापेमारी जारी है।

  • ईरानी स्कूल त्रासदी पर ट्रंप का बयान, 168 छात्राओं की मौत वाले मिसाइल हमले को बताया ‘अनजाने में हुई गलती’

    ईरानी स्कूल त्रासदी पर ट्रंप का बयान, 168 छात्राओं की मौत वाले मिसाइल हमले को बताया ‘अनजाने में हुई गलती’

    नई दिल्ली । ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए विनाशकारी मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बहस के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान सामने आया है। इस हमले में 168 छात्राओं और कई शिक्षकों की मौत हुई थी, जिसके बाद पूरी दुनिया में गहरी चिंता और संवेदना व्यक्त की गई थी। अब इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था और मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है।

    फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध और सैन्य अभियानों के दौरान कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जिन्हें जानबूझकर अंजाम नहीं दिया जाता। उनके अनुसार इस मामले में भी वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी भी पक्ष पर निश्चित आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

    प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने इस हमले के लिए जवाबदेही और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए, तो ट्रंप ने अपेक्षाकृत तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर जांच एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और सभी तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रक्षा विभाग के पास इस मामले से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध है और जांच प्रक्रिया वहीं से संचालित की जा रही है।

    गौरतलब है कि फरवरी महीने में मीनाब स्थित एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल गिरने से भारी तबाही मच गई थी। इस हमले में बड़ी संख्या में छात्राओं की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश की आयु छह से तेरह वर्ष के बीच बताई गई थी। इस घटना ने न केवल ईरान बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया था। बच्चों को निशाना बनाने या उनकी मौत का कारण बनने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

    हमले के बाद विभिन्न देशों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि किसी सैन्य कार्रवाई के कारण निर्दोष नागरिकों की जान गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों और निर्णय प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसी कारण यह मामला लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है।

    घटना से जुड़े प्रारंभिक आकलनों और विभिन्न रिपोर्टों ने इस हमले की प्रकृति को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। कुछ रिपोर्टों में सैन्य गतिविधियों और मिसाइल संचालन से जुड़े संभावित पहलुओं का उल्लेख किया गया, जिसके बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया। अब सभी पक्ष अंतिम निष्कर्षों का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि त्रासदी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं होतीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत गंभीर होती हैं। निर्दोष बच्चों की मौत ने वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्षों के मानवीय प्रभावों को फिर से केंद्र में ला दिया है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद इस मामले की दिशा और इससे जुड़ी राजनीतिक तथा कूटनीतिक चर्चाओं को नया आयाम मिल सकता है।

  • संचिता उगले मौत मामले में नया मोड़, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, मानसिक दबाव की बात आई सामने

    संचिता उगले मौत मामले में नया मोड़, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, मानसिक दबाव की बात आई सामने

    नई दिल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़ी अभिनेत्री Sanchita Ugale की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 14 जून को उनके नालासोपारा स्थित आवास में मृत पाए जाने के बाद अब उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो  पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतका के पिता मछिंद्र उगले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। उन्होंने कहा कि हालांकि संचिता ने कभी स्पष्ट रूप से अपनी परेशानी साझा नहीं की, लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव लगातार देखा जा रहा था। कभी वह सामान्य और खुश नजर आती थीं, तो कभी अचानक उदास और चिंतित हो जाती थीं। परिवार को यह अंदाजा हो गया था कि वह किसी गंभीर दबाव में हैं।

    परिवार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए वे लगातार संचिता के साथ रहने की कोशिश करते थे ताकि वह अकेली न रहें। पिता ने बताया कि घर के सदस्य उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सतर्क रहते थे और उन्हें सामान्य जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते थे। हालांकि परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।

    पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर लंबे समय से किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था। उनके अनुसार, संचिता ने कुछ बातें परिवार से साझा की थीं, जिनसे यह संकेत मिलता था कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर बार-बार कुछ मांगें की जा रही थीं, जिनमें आर्थिक दबाव की बातें भी शामिल थीं। परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने उनकी बेटी को गहरे तनाव में धकेल दिया।

    घटना 14 जून की शाम नालासोपारा स्थित घर में सामने आई, जब संचिता अपने कमरे में बंद थीं। दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में परिवार द्वारा दरवाजा खोलने पर उन्हें गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

    मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना इस मामले से जुड़ा है। पुलिस सभी डिजिटल और व्यक्तिगत पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्हें अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सच सामने आए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

    यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ जुड़े आरोपों के कारण जांच का दायरा भी बढ़ गया है। पुलिस की आगे की कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    ल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़ी अभिनेत्री Sanchita Ugale की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 14 जून को उनके नालासोपारा स्थित आवास में मृत पाए जाने के बाद अब उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतका के पिता मछिंद्र उगले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। उन्होंने कहा कि हालांकि संचिता ने कभी स्पष्ट रूप से अपनी परेशानी साझा नहीं की, लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव लगातार देखा जा रहा था। कभी वह सामान्य और खुश नजर आती थीं, तो कभी अचानक उदास और चिंतित हो जाती थीं। परिवार को यह अंदाजा हो गया था कि वह किसी गंभीर दबाव में हैं।

    परिवार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए वे लगातार संचिता के साथ रहने की कोशिश करते थे ताकि वह अकेली न रहें। पिता ने बताया कि घर के सदस्य उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सतर्क रहते थे और उन्हें सामान्य जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते थे। हालांकि परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।

    पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर लंबे समय से किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था। उनके अनुसार, संचिता ने कुछ बातें परिवार से साझा की थीं, जिनसे यह संकेत मिलता था कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर बार-बार कुछ मांगें की जा रही थीं, जिनमें आर्थिक दबाव की बातें भी शामिल थीं। परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने उनकी बेटी को गहरे तनाव में धकेल दिया।

    घटना 14 जून की शाम नालासोपारा स्थित घर में सामने आई, जब संचिता अपने कमरे में बंद थीं। दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में परिवार द्वारा दरवाजा खोलने पर उन्हें गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

    मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना इस मामले से जुड़ा है। पुलिस सभी डिजिटल और व्यक्तिगत पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्हें अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सच सामने आए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

    • भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

      भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

      नई दिल्ली । टेलीविजन मनोरंजन उद्योग से आई एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर ने पूरी इंडस्ट्री सहित प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुकीं बाईस वर्षीय उभरती हुई अभिनेत्री संचिता उगले के अचानक निधन से एक बार फिर चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे छिपे मानसिक तनाव और दबाव की कड़वी सच्चाई सामने आ गई है। शुरुआती पुलिस जांच में इस घटना को कथित तौर पर आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, जिसकी बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।

      अभिनेत्री के असमय चले जाने के बाद उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों की तरफ से आ रहे बयानों ने इस मामले में दुख और आक्रोश को और बढ़ा दिया है। संचिता की सह-कलाकार और बेहद करीबी दोस्त मेघा शर्मा ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि अभिनेत्री पिछले कुछ महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही थीं। जनवरी महीने से ही उनका नियमित इलाज चल रहा था और वे अपनी कुछ निजी उलझनों को लेकर लगातार मानसिक रूप से परेशान चल रही थीं।

      करीबी सूत्रों के मुताबिक, संचिता अक्सर जिंदगी से हार मानने और हताशा से भरी बातें किया करती थीं, जिसके बाद उनके दोस्तों और परिजनों ने हमेशा उन्हें ढांढस बंधाया और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, बीते कुछ दिनों से उनका फोन लगातार बंद आ रहा था, जिसने उनके करीबियों की चिंता बढ़ा दी थी। अपनी मौत से करीब दस दिन पहले वे एक ऑडिशन के सिलसिले में अपनी दोस्त के साथ गई थीं, जहां वे अपने भविष्य और अभिनय करियर को लेकर काफी आश्वस्त और सकारात्मक नजर आ रही थीं।

      दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बीच संचिता के भाई अविनाश उगले ने मनोरंजन जगत की कार्यशैली पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उनके भाई का कहना है कि ग्लैमर की इस दुनिया में लगातार मिलने वाला मानसिक दबाव, काम की अत्यधिक कमी और कार्यस्थल पर वरिष्ठों द्वारा कथित तौर पर किया जाने वाला अपमान उनकी बहन की मानसिक स्थिति बिगड़ने की मुख्य वजह बना। वह लंबे समय से इस बेइज्जती और उपेक्षा को चुपचाप सहन कर रही थीं, जिससे उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था।

      मृतक अभिनेत्री के भाई ने इस पूरे घटनाक्रम का संबंध दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की त्रासदी से भी जोड़ा है। उन्होंने बताया कि संचिता का आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट भी सुशांत सिंह राजपूत को ही समर्पित था, जिससे यह साफ झलकता है कि वे किस कदर अंदरूनी तौर पर अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। गौरतलब है कि चौदह जून की शाम को संचिता अपने आवास पर अचेत अवस्था में पाई गई थीं, जिसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

      टेलीविजन शोज के अलावा हाल ही में एक बड़ी फिल्म का हिस्सा रहीं संचिता उगले के इस कदम ने फिल्म सिटी के भीतर कलाकारों की मानसिक सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का मुकदमा दर्ज कर शव को अंत्यपरीक्षण के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने और अभिनेत्री के कॉल डिटेल्स व सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन पड़ताल के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।

    • राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच

      राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच


      लखनऊ ।
      श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

      प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।


      अब एसआईटी आगे, सब पीछे

      मामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।

      ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं
      जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।


      एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगी

      राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

      वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी।

      इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है।

      इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।

      चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।


      चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए

      राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

      सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।