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  • वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    नई दिल्ली । वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह हथियार की जांच के दौरान अचानक गोली चलने से अफरा तफरी मच गई। घटना में एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से जुड़े दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए। दोनों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोली चलने की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, एक यात्री अपनी पत्नी के साथ मुंबई जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। यात्री के पास बंदूक थी और उसने विमान यात्रा के दौरान हथियार ले जाने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हथियार की जांच की जा रही थी।

    बताया गया है कि हथियार की जांच के दौरान अचानक बंदूक से एक राउंड फायर हो गया। गोली चलने के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना में सुरक्षा जांच का काम कर रहे दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए।

    घटना के तुरंत बाद दोनों घायल कर्मचारियों को न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घायलों की स्थिति को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर आगे जानकारी दी जा सकती है।

    जिस यात्री के हथियार से गोली चली, वह मुंबई जाने वाली IX-1810 फ्लाइट से यात्रा करने वाला था। वह अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचा था। हथियार साथ होने की जानकारी पहले से दिए जाने के बावजूद जांच के दौरान अचानक फायरिंग हो गई। इस कारण अब सुरक्षा प्रक्रिया और घटना की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके से जुड़े घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बंदूक से गोली किस परिस्थिति में चली और हथियार की जांच के समय सुरक्षा संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का किस तरह पालन किया जा रहा था।

    पुलिस और संबंधित अधिकारी यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फायरिंग के समय हथियार की स्थिति क्या थी और जांच के दौरान किन परिस्थितियों में अचानक एक राउंड फायर हुआ। मामले में उपलब्ध जानकारी और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील परिसर में हथियार की जांच के दौरान गोली चलने की घटना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान घायलों के उपचार और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।

    पुलिस की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग किस वजह से हुई और इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी या नहीं। फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है और आगे की जानकारी जांच के आधार पर सामने आने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश। में करीब 150 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के तबादलों को लेकर विवाद सामने आया है। पशु चिकित्सकों ने ट्रांसफर नीति में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव को अभ्यावेदन सौंपा है। अधिकारियों की ओर से उन्हें अभ्यावेदनों की जांच के बाद उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।

    पशु चिकित्सकों का कहना है कि तबादलों के बाद कई अधिकारियों ने अभी नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की है। इसका असर कई जिलों में पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर चिकित्सकों की संख्या कम होने से पशुओं के इलाज और विभागीय कामकाज में परेशानी आने की बात कही गई है।

    तबादलों को लेकर सबसे बड़ा आरोप सार्थक ऐप में दर्ज जानकारी और उसके आधार पर तैयार सूची को लेकर है। चिकित्सकों का दावा है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ छुट्टियों को अनुपस्थिति के तौर पर दर्ज किया गया, जिससे सेवा संबंधी जानकारी प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि इसी तरह की विसंगतियों के आधार पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना तय की गई।

    पशु चिकित्सकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और मानवीय आधारों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों को 700 से 1300 किलोमीटर तक दूर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को कथित तौर पर तबादला सूची से बाहर रखा गया। इस कारण विभाग के भीतर समान अवसर और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।

    महिला और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े मामलों को लेकर भी चिकित्सकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सीहोर में पदस्थ रहीं पशु चिकित्सक रश्मि देवी चंद्राकर ने बताया कि उन्होंने अनूपपुर के आदिवासी क्षेत्र में करीब 11 वर्ष सेवाएं दी हैं। उनका दावा है कि नीति में तलाकशुदा महिलाओं के लिए यथासंभव अनुकूल स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान होने के बावजूद उनका तबादला सिंगरौली किया जा रहा है।

    इसी तरह कुछ अन्य पशु चिकित्सकों ने बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए तबादलों से होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी है। डॉ. राखी सिंह और डॉ. कमल सिंह का कहना है कि उनके बच्चों की पढ़ाई भोपाल में चल रही है और स्कूल तथा कोचिंग के बीच अचानक दूसरे स्थान पर जाना परिवार के लिए मुश्किल होगा।

    पशु चिकित्सक उदय सिंह माहेश्वरी ने भी अपने तबादले को नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि वे सीहोर जिला पशु चिकित्सक संघ के अध्यक्ष हैं और उनके बच्चों की शिक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी उन पर हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर तबादला होने से उनके सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो गई हैं।

    चिकित्सकों ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ तबादले प्रक्रिया के अंतिम समय में किए गए और नई जगह ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके अनुसार, इतनी कम अवधि में दूरस्थ जिलों में पहुंचना कई अधिकारियों के लिए मुश्किल है। कुछ मामलों में ऑनलाइन उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के भौतिक सत्यापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    तबादलों के कारण कई जिलों में पद खाली होने की स्थिति बनने का दावा भी किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ स्थानों पर पहले से सीमित संख्या में अधिकारी तैनात थे और स्थानांतरण के बाद वहां पशु चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    विभागीय स्तर पर प्राप्त अभ्यावेदनों की जांच की जा रही है। जांच में स्थानांतरण प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और चिकित्सकों की आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद नियमों और तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। फिलहाल पशु चिकित्सकों की नजर जांच के परिणाम और संभावित संशोधन पर बनी हुई है।

  • मध्य प्रदेश के भिंड में नौ वर्षीय मासूम से गंभीर अपराध, पुलिस ने दर्ज किया केस और आरोपी की तलाश जारी।

    मध्य प्रदेश के भिंड में नौ वर्षीय मासूम से गंभीर अपराध, पुलिस ने दर्ज किया केस और आरोपी की तलाश जारी।


    मध्य प्रदेश। के भिंड जिले के अंतर्गत आने वाले मैहगांव थाना क्षेत्र में एक नौ वर्षीय बालिका के साथ गंभीर अपराध की घटना सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत और कठोर धाराओं के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालिका अपने 11 वर्षीय भाई के साथ वापस लौट रही थी। इसी दौरान 24 वर्षीय आरोपी अरविंद वाल्मीकि ने मदद का झांसा देकर दोनों बच्चों को अपनी दोपहिया वाहन पर बिठा लिया। आरोपी बच्चों को गांव के बाहरी इलाके में सुनसान झाड़ियों की ओर ले गया। वहां आरोपी ने मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

    घटना के दौरान जब बालिका के भाई ने विरोध करने और अपनी बहन की रक्षा करने का प्रयास किया, तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की। वारदात को अंजाम देने के पश्चात आरोपी दोनों बच्चों को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। डरा हुआ बालक किसी प्रकार अपने घर पहुंचा और परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

    घटना की सूचना मिलते ही परिजन तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल बालिका को इलाज के लिए पास के अस्पताल ले गए। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया है। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है, जो विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

    इसी जिले के सुरपुरा थाना क्षेत्र से जुड़े एक अन्य पुराने मामले में भी कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। सुरपुरा में एक बालिका के साथ हुए अपराध के सह-आरोपी की जमानत याचिका को स्थानीय अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

    मध्य प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस और न्यायपालिका द्वारा सख्त रुख अपनाया जा रहा है। भिंड पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मैहगांव मामले के आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

  • एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेट से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के एक यात्री विमान में हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद जारी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। हाल ही में सामने आई आंतरिक सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित उड़ान के मुख्य पायलट लंबे समय से अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त थे और इसके निवारण के लिए नींद की गोलियों का सेवन करते थे। इस घटना के दौरान विमान हवा में अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे कई यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

    उड्डयन दुर्घटना जांच ब्यूरो अर्थात एएआईबी द्वारा इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। प्रारंभिक पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि उड़ान भरने से पूर्व और उड़ान के दौरान सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा पायलट के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है, जिसमें नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच शामिल है। घटना के समय विमान में 137 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।

    जांच अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए संबंधित पायलट ने स्वीकार किया है कि वह पारिवारिक चिकित्सक की सलाह पर दवाइयों का सेवन कर रहा था। पायलट का तर्क था कि उड़ानों के अनिश्चित समय और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण उसकी नींद का चक्र प्रभावित हुआ था। हालांकि, उड्डयन नियमों के तहत किसी भी वाणिज्यिक उड़ान को संचालित करने से पहले पायलट का पूर्ण रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है।

    रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य भी सामने आया है कि जिस समय विमान टर्बुलेंस की चपेट में आया, उस दौरान मुख्य पायलट कॉकपिट में अपनी निर्धारित सीट पर मौजूद नहीं था। विमान का नियंत्रण सह-पायलट के हाथों में था। इसके अतिरिक्त, उड़ान भरने से पूर्व फुकेट में चालक दल के सदस्यों के साथ हुई गतिविधियों और बैठकों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के निर्धारित मानकों के तहत इस घटना की जांच की जा रही है। विमान निर्माता कंपनी एयरबस और फ्रांस का नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो भी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। एएआईबी ने आश्वासन दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विमान यात्रियों के बीच इस घटना के बाद उड्डयन सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

    विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा एयरलाइंस कंपनियों और उनके क्रू मेंबर्स के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल मामले से जुड़ी सभी तकनीकी और मेडिकल जांच रिपोर्टों की अंतिम समीक्षा की जा रही है।

  • विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    नई दिल्ली । फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई हालिया घटना के बाद देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा और जांच मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विमान के पायलट के नशीले पदार्थों के शुरुआती डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद विमानन नियामक ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में कुछ पदार्थों की कानूनी सुलभता एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। शराब की उपस्थिति जांचने के लिए नियमित ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य साइकोएक्टिव पदार्थों का परीक्षण अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया माना जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में विमान का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। ऐसे पदार्थों का असर शरीर में लंबे समय तक बना रहता है जिससे चालक दल की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    वर्तमान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के तहत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक एयरलाइंस को अपने कम से कम 10 प्रतिशत क्रू मेंबर्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का वार्षिक रूप से रैंडम डोप टेस्ट कराना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अब इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    विमानन अधिकारियों का मानना है कि केवल स्व-घोषणा या नशामुक्ति अभियानों के भरोसे इस समस्या से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए रैंडम डोप जांच की आवृत्ति बढ़ाने और नियमों को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि उड़ानों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

    नियामक संस्थाएं अब चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

  • ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित शिवगंगे पहाड़ियों से मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी एक युवक के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। लापता युवक की पहचान 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय के रूप में हुई है, जो बेंगलुरु के बेगुर क्षेत्र में रहकर एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों ने घने पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव अभियान प्रारंभ कर दिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, अद्वैत उपाध्याय ने शुक्रवार को सुबह ट्रेकिंग पर जाने से पूर्व अपनी मंगेतर को अपनी इस यात्रा की जानकारी दी थी। इसके बाद उसने आवागमन के लिए एक दुपहिया वाहन किराए पर लिया और शिवगंगे पहाड़ी की तलहटी में पहुंचा। सुबह लगभग साढ़े छह बजे उसने अपना वाहन पार्क किया और पहाड़ी की ओर चढ़ना शुरू किया। तलहटी के समीप स्थापित सीसीटीवी कैमरों में उसे अकेले पहाड़ी की ओर जाते हुए देखा गया है।

    पहाड़ी पर चढ़ने के कुछ समय बाद से ही अद्वैत का कोई संपर्क नहीं हो सका है और उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। लंबे समय तक सुराग न मिलने पर परिजनों ने किसी अनहोनी या राहजनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों को संदेह है कि सुनसान इलाका होने के कारण किसी आपराधिक तत्व ने उसे निशाना बनाया हो सकता है।

    घटना के संबंध में कडुगोडी पुलिस थाने में औपचारिक गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवगंगे की कठिन और दुर्गम पहाड़ियों में पुलिसकर्मियों की विशेष टीमों के साथ डॉग स्क्वायड को भी तैनात किया गया है। पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुर्घटना, राहजनी और अपहरण समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन कर रही है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी कर्नाटक पुलिस के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में अद्वैत के परिवारजन और रिश्तेदार उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। राज्य के गृह विभाग द्वारा भी इस संबंध में आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तलाशी अभियान में तेजी लाई जा सके।

    बेंगलुरु पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों और पर्यटकों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सुराग जुटाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। प्रशासन ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने और युवक को सुरक्षित ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया है।

  • मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश।  के गुना जिले से इंसानियत और सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देने वाली एक दुखद घटना सामने आई है। जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादीशुदा महिला को भगा ले जाने के बाद पीड़ित परिवार और गांव के लोगों ने आरोपी युवक के चाचा को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं। करीब सवा महीने पुराने इस घटनाक्रम का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पीड़ित व्यक्ति गहरे मानसिक सदमे में चला गया, जिससे उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

    घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय अजोड़ सिंह बंजारा के भतीजे पर आरोप था कि वह पड़ोसी गांव की एक विवाहित महिला को अपने साथ ले गया था। इस बात से आक्रोशित होकर महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने अजोड़ सिंह को धोखे से पकड़ लिया और उन्हें बंधक बना लिया। आरोपियों ने पीड़ित के हाथ-पैर बांधकर उनके साथ जमकर मारपीट की और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए उनके गले में जूते-चप्पलों की माला डालकर गांव में घुमाया।

    उस समय घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित व्यक्ति को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया था। पीड़ित परिजनों का कहना है कि इस गंभीर और अपमानजनक घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन और जनसुनवाई के माध्यम से उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई थीं। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई होती, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी।

    घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब शुक्रवार को पीड़ित किसी कार्यवश समीपस्थ कस्बे में गए थे। वहां एक परिचित व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर उसी पुरानी घटना का वायरल वीडियो दिखा दिया। वीडियो में खुद को बंधा हुआ और गले में जूतों की माला पहने देखकर पीड़ित बेहद आहत हुए। घर लौटने के बाद उन्होंने परिजनों से अपनी पीड़ा व्यक्त की कि लोग अब इस वीडियो के जरिए उनका उपहास उड़ा रहे हैं। इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

    मृतक अपने पीछे पत्नी, पांच बेटियों और एक मासूम बेटे का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे अमरपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मातम का माहौल है। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय पुलिस चौकी और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन अब वायरल वीडियो, पूर्व में हुई मारपीट और पीड़ित की मृत्यु के कारणों की व्यापक स्तर पर जांच कर रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक विचारकों का मानना है कि किसी अन्य व्यक्ति के अपराध की सजा किसी रिश्तेदार को देना और फिर सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है। गुना जिले की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराध और सामाजिक लिंचिंग के बढ़ते मामले किस प्रकार बेकसूर लोगों की जान ले रहे हैं।

  • JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट

    JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट


    नई दिल्ली । 
    झारखंड में JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। रांची में सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पुरानी परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने के संकेत मिले हैं।

    बैठक में सबसे अहम मुद्दा परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का रहा। सरकार वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने के लिए तैयार बताई जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

    छात्रों की प्रमुख मांगों में कुछ पुरानी परीक्षाओं को रद्द करना भी शामिल रहा है। बातचीत के दौरान JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की बात रखी गई। इन परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। सरकार की ओर से इन तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति की बात सामने आने के बाद बातचीत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली TDPL एजेंसी की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से TDPL एजेंसी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच करने की बात कही गई है। इससे परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, उससे जुड़े निर्णयों और संभावित अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है।

    छात्रों की मांग केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग भी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार JPSC और JSSC की परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में बदलाव की दिशा में भी काम करने की तैयारी में है।

    सरकार की ओर से भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके लिए IIM और XISS जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी युवाओं की चिंताओं को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी वजहों के कारण ही युवा आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी को सरकार ने संज्ञान में लिया है और गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अपनी बात बिना किसी डर के सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। सरकार और छात्रों के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित फैसलों को किस रूप में लागू किया जाता है। तीन परीक्षाओं को रद्द करने, वित्तीय लेनदेन की जांच और भर्ती व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई छात्र आंदोलन की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

  • JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    नई दिल्ली । रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। बातचीत के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किए जाने की संभावना भी सामने आई है।

    सरकार और छात्र संगठनों के बीच संभावित सहमति के तहत 2023 और 2025 की बैकलॉग सीटों को नहीं भरने का प्रस्ताव भी शामिल है। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से जांच और व्यवस्था में सुधार से जुड़े कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    प्रस्तावित फॉर्मूले में CID जांच को 90 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई है। जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने की संभावना भी जताई गई है। इससे परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

    परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ प्रमुख संस्थानों के इंजीनियरों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलावों की पहचान करना होगा।

    इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL की ओर से कराई गई परीक्षाओं से जुड़े पैसों के लेनदेन की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार किया जा सकता है।

    इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के प्रदर्शन और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर बयान दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है और सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ज्यादा उम्र के नहीं हैं और युवाओं की परेशानियों को समझते हैं। उन्होंने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा पर गोलियों की जरूरत हो सकती है, लेकिन यहां उसकी जरूरत नहीं है। उनका संकेत था कि युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।

    हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि देशभर में अलग-अलग राजनीतिक दल विभिन्न तरीकों से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, सच और झूठ को मिलाकर युवाओं को गुमराह करने की रणनीति अपनाई जा रही है और इस प्रक्रिया में पढ़े-लिखे तथा जानकार लोग भी शामिल हो सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे युवाओं के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई के कारण युवाओं में गलत काम को सामने लाने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं को न्याय मिलेगा और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल छात्र संगठनों और सरकार के बीच बातचीत जारी है। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा, बैकलॉग पदों, जांच की समयसीमा और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • इस्लामाबाद में लश्कर कमांडर की अचानक मौत से उठे सवाल, मस्जिद पहुंचने से पहले आखिर कहां खाया था खाना

    इस्लामाबाद में लश्कर कमांडर की अचानक मौत से उठे सवाल, मस्जिद पहुंचने से पहले आखिर कहां खाया था खाना

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक वरिष्ठ कमांडर कारी सईद अब्दुल अजीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह नमाज पढ़ने के लिए कुबा मस्जिद पहुंचा था, जहां मस्जिद के गेट के पास अचानक गिर पड़ा। उसकी मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक तौर पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    कारी सईद अब्दुल अजीज को लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख सदस्यों में शामिल बताया जाता था। उसके जिम्मे जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकवादियों के परिवारों की सहायता से जुड़ा काम था। संगठन के भीतर उसकी भूमिका को देखते हुए उसकी अचानक हुई मौत को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मस्जिद पहुंचने से पहले कारी सईद ने एक अनजान रेस्टोरेंट में खाना खाया था। इसके बाद वह नमाज के लिए कुबा मस्जिद गया। वहां पहुंचने के बाद वह अचानक गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। हालांकि, इस घटनाक्रम और उसकी मौत के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

    कारी सईद की मौत ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर चर्चा बनी हुई है। संगठन से जुड़े रिजवान हनीफ ने हाल में एक वीडियो में दावा किया था कि पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान लश्कर के करीब 30 से अधिक सदस्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मारे गए हैं।

    रिजवान के अनुसार, पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में संगठन के कई सदस्यों की हत्या हुई। उसने इन घटनाओं के पीछे अज्ञात लोगों के होने की बात कही थी। लश्कर से जुड़े किसी सदस्य की ओर से संगठन के इतने लोगों के मारे जाने की बात स्वीकार किए जाने को भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े कुछ आतंकवादियों की संदिग्ध मौत के मामलों में अज्ञात हमलावरों का जिक्र सामने आता रहा है। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं और उनके उद्देश्यों क्या हैं, इसे लेकर सार्वजनिक स्तर पर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे मामलों में ठोस निष्कर्ष के लिए जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी होती है।

    लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों और भारत विरोधी हिंसा से जुड़ा रहा है। ऐसे में उसके किसी वरिष्ठ कमांडर की पाकिस्तान में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत सुरक्षा एजेंसियों और आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े घटनाक्रम के लिहाज से भी ध्यान आकर्षित करती है।

    फिलहाल कारी सईद अब्दुल अजीज की मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। उसके द्वारा मौत से पहले किए गए संपर्कों, रेस्टोरेंट में खाने और मस्जिद पहुंचने के बीच की घटनाओं की जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। साथ ही, संगठन के अन्य सदस्यों की संदिग्ध मौतों से इस घटना का कोई संबंध है या नहीं, यह भी जांच का विषय बना हुआ है।