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  • सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल

    सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल


    नई दिल्ली ।
    सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक हाईटेक नकल गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में उम्मीदवारों को नकल कराने का काम करता था।

    पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य ChatGPT, स्पाई कैमरा, GSM डिवाइस और नैनो ईयरबड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। परीक्षा केंद्र में बैठे उम्मीदवारों को ऐसे उपकरण दिए जाते थे, जिनकी मदद से प्रश्न बाहर बैठे लोगों तक पहुंचाए जाते थे और फिर उनके जवाब उम्मीदवारों तक पहुंचाए जाते थे।

    मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 26 जुलाई को सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान दो उम्मीदवारों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा गया। परीक्षा में नकल की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।

    जांच के दौरान पुलिस ने हेमंत शर्मा, आरती, सनी, दीपक, वेद प्रकाश, वीरेंद्र और सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इस गिरोह का मुख्य संचालक था। वह चंडीगढ़ में सरकारी विभाग में फायरमैन के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। आरोप है कि नौकरी के दौरान ही उसने परीक्षा में नकल कराने का नेटवर्क तैयार किया।

    पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह पहले सरकारी नौकरियों की भर्तियों पर नजर रखता था। इसके बाद नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं से संपर्क कर उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके लिए उम्मीदवारों से 8 से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी।

    गिरोह की कार्यप्रणाली काफी आधुनिक थी। उम्मीदवारों को विशेष GSM डिवाइस, मॉडिफाइड मोबाइल फोन, शर्ट के बटन में छिपा कैमरा और छोटे आकार के ईयरबड उपलब्ध कराए जाते थे। परीक्षा के दौरान कैमरे की मदद से प्रश्नों की तस्वीरें बाहर बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थीं।

    पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इन सवालों के जवाब तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद लेता था। इसके बाद तैयार जवाबों को नैनो ईयरबड के जरिए परीक्षा दे रहे उम्मीदवारों तक पहुंचाया जाता था। पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक कार में विशेष तकनीकी व्यवस्था भी बनाई गई थी।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डिजिटल एप्लीकेशन की मदद से मोबाइल स्क्रीन और कैमरे से भेजी गई तस्वीरों को नियंत्रित करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, GSM डिवाइस, नैनो ईयरबड, टैबलेट, कार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कई उम्मीदवारों को इस तरीके से परीक्षा पास कराने में मदद कर चुके हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े मामलों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। जांच एजेंसियां बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही हैं, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    पुलिस के अनुसार, यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके संपर्क अन्य राज्यों तक फैले होने की जानकारी मिली है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।

  • माइग्रेन के इलाज के बीच होटल में मिला महिला का शव, आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटी पुलिस

    माइग्रेन के इलाज के बीच होटल में मिला महिला का शव, आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटी पुलिस


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर शहर में इलाज के लिए आई एक महिला की होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने जहर सेवन कर आत्महत्या की आशंका जताई है। हालांकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और महिला के मोबाइल सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, खंडवा निवासी 26 वर्षीय महिला माइग्रेन की समस्या से लंबे समय से परेशान थी और उपचार के लिए समय-समय पर इंदौर आती रहती थी। इसी सिलसिले में वह इस बार भी इंदौर पहुंची और विजय नगर क्षेत्र स्थित एक होटल में कमरा लेकर ठहरी थी। दिनभर इलाज के बाद वह अपने कमरे में लौट गई थी।

    देर शाम होटल कर्मचारियों को उस समय संदेह हुआ जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला। कई बार आवाज देने और संपर्क करने की कोशिश के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर होटल प्रबंधन ने मास्टर चाबी की मदद से कमरा खोला। अंदर महिला अचेत अवस्था में बिस्तर पर मिली। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस ने महिला को अस्पताल भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और घटना की सूचना परिजनों को दी गई। परिजन खंडवा से इंदौर पहुंचे, जिनसे पुलिस ने घटना के संबंध में पूछताछ भी की।

    प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने महिला का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी कॉल डिटेल, मैसेज तथा अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि महिला लंबे समय से माइग्रेन की समस्या से परेशान थी और उसका उपचार चल रहा था। हालांकि उन्होंने किसी पारिवारिक विवाद या अन्य कारण की जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस बीमारी, मानसिक स्थिति और अन्य संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।

    जांच अधिकारी होटल के कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रहे हैं। होटल में प्रवेश और निकास से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला के होटल पहुंचने के बाद क्या घटनाक्रम रहा और क्या किसी अन्य व्यक्ति का उससे संपर्क हुआ था।

    पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

  • ग्वालियर में युवक की दर्दनाक मौत से पहले लिखा 5 पन्नों का पत्र, तीन नामों के खुलासे ने बढ़ाए कई सवाल

    ग्वालियर में युवक की दर्दनाक मौत से पहले लिखा 5 पन्नों का पत्र, तीन नामों के खुलासे ने बढ़ाए कई सवाल

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर जिले में कथित लोन ठगी से परेशान एक युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान जसपाल सिंह यादव के रूप में हुई है, जिसने ट्रेन के सामने छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद पुलिस को मौके से एक विस्तृत सुसाइड नोट मिला है, जिसमें तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने नोट को जांच का महत्वपूर्ण आधार बनाते हुए संबंधित व्यक्तियों की तलाश और पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, जसपाल सिंह यादव बीते कुछ समय से आर्थिक संकट और कथित धोखाधड़ी के कारण मानसिक तनाव में था। परिजनों ने बताया कि वह शनिवार से लापता था। रविवार देर रात झांसी रोड रेलवे लाइन के पास एक शव मिलने की सूचना मिली, जिसकी सोमवार सुबह पहचान जसपाल सिंह यादव के रूप में हुई। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

    सुसाइड नोट में मृतक ने दावा किया है कि कुछ लोगों ने उसकी करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पर 3.45 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाया था। आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर उससे लगभग 23 लाख रुपये ले लिए गए। कथित तौर पर उसे बैंक का स्वीकृति पत्र भी दिखाया गया, जिससे उसे विश्वास हो गया कि लोन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, लंबे समय तक कोई कार्यवाही नहीं हुई और बाद में संबंधित लोग पैसे लौटाने से भी बचते रहे।

    मृतक ने अपने पत्र में लिखा है कि फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक उसे लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन न तो लोन मिला और न ही उसकी रकम वापस की गई। उसने यह भी उल्लेख किया कि पैसे जुटाने के लिए उसने अपनी बुलेट मोटरसाइकिल, कार, सोना और अन्य संपत्तियां गिरवी रखीं तथा ऊंची ब्याज दर पर उधार लिया। उसके अनुसार, ब्याज मिलाकर उसकी आर्थिक देनदारी लगभग 35 लाख रुपये तक पहुंच गई थी, जिससे वह पूरी तरह टूट चुका था।

    सुसाइड नोट में तीन व्यक्तियों के नाम, मोबाइल नंबर और उनसे जुड़े अन्य विवरण भी दर्ज किए गए हैं। मृतक ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोगों ने केवल उसके साथ ही नहीं बल्कि अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की कथित ठगी की है। पत्र में कुछ स्थानों और परिचितों का भी उल्लेख किया गया है, जहां आरोपियों के छिपे होने की बात कही गई है। पुलिस अब इन सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

    अपने अंतिम पत्र में जसपाल सिंह यादव ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी उल्लेख करते हुए अपील की है कि उसके परिवार को न्याय दिलाया जाए और उसके पिता को कथित रूप से फंसी हुई रकम वापस दिलाने में सहायता की जाए। उसने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को फोरेंसिक परीक्षण सहित अन्य साक्ष्यों के साथ जांच में शामिल किया गया है। पत्र में दर्ज मोबाइल नंबरों, पतों और अन्य जानकारियों के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके संगठन से जुड़े वित्तीय एवं कानूनी मामलों को लेकर नया विवाद सामने आया है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित कर अधिकारियों से कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति, पार्टी की वैधानिक स्थिति तथा हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड के वित्तीय और कर संबंधी पहलुओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया गया है।

    शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।

    इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।

    कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में आने वाले दान में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी होती है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

    राज ठाकरे ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले धन का सही उपयोग और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    एमएनएस प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में यह आशंका जताई गई है कि मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर के दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों पर व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस प्रकार के आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    राज ठाकरे के आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रसिद्ध गणेश मंदिर के बारे में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संयम के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।

    सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है। ऐसे में मंदिर के वित्तीय संचालन को लेकर लगाए गए आरोप स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

    फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर चल रही बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

  • विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर

    विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए विवादित प्रदर्शन को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले में कथित विदेशी फंडिंग डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच के आधार पर पांच से अधिक कंपनियां एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही हैं। इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो डिजिटल मार्केटिंग सोशल मीडिया कैंपेन और इंफ्लूएंसर मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए धन किस माध्यम से जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।

    सूत्रों के अनुसार बीते तीन दिनों के दौरान दिल्ली गुरुग्राम मुंबई और बेंगलुरु स्थित कई कार्यालयों और परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज डिजिटल कैंपेन का रिकॉर्ड सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के साथ हुए समझौते और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की गई। एजेंसियों ने कई डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।

    जांच में कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन लेनदेन के माध्यम से सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के प्रचार अभियान चलाए गए हो सकते हैं। इसी कारण कई सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी प्रकार के भुगतान के बदले सोशल मीडिया पर विशेष अभियान संचालित किए गए थे। जांच पूरी होने और पर्याप्त दस्तावेजी तथा डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में करीब दो हजार संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान किए जाने का दावा किया गया है। इनमें से कई अकाउंट विदेशों से संचालित बताए जा रहे हैं जबकि लगभग सात सौ अकाउंट भारत से सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। जांच का फोकस इन खातों के संचालन भुगतान और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने पर भी है ताकि पूरे डिजिटल नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    इसी बीच पश्चिम बंगाल एसटीएफ की जांच में गिरफ्तार जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से जुड़े मामले ने भी जांच को नया आयाम दिया है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि उसने कथित रूप से जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी। साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाने की योजना होने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।

    इसके अलावा कई यूट्यूबर और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर भी जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रदर्शन और उससे जुड़े डिजिटल प्रचार अभियान में उनकी भूमिका क्या थी और क्या किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या संगठित अभियान चलाया गया था। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों में किसकी क्या भूमिका रही।

  • PoK में पाक सेना की फायरिंग में 40 लोगों की मौत… भारत की जांच की मांग

    PoK में पाक सेना की फायरिंग में 40 लोगों की मौत… भारत की जांच की मांग


    नई दिल्ली।
    पाक अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) की फायरिंग में 40 लोगों की मौत पर भारत (India) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जांच की मांग की है। भारत ने कहा कि इस प्रकरण में पाकिस्तान (Pakistan) ने स्वीकारा है कि वह भारत में खून बहाने के लिए मुजाहिदीन भेजता है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेस में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में पीओके में 40 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इन लोगों को अपना दुश्मन बताया। राजनीतिक मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ने खुले तौर पर माना कि जिन मुजाहिदीन को पाकिस्तान सरकार ने ट्रेनिंग और हथियार दिए और भारत में खून बहाने के लिए भेजा,अब वे इसका इस्तेमाल पाक के खिलाफ ही करने लगे हैं। जैसवाल ने कहा, इससे पाकिस्तान ने अपनी करतूतों की पुष्टि कर दी है।

    पीओके में निहत्थे लोगों पर हमला
    पीओके में पाक की बर्बरता के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा। आरोप है कि सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबल ताकत का इस्तेमाल कर रहे। लोग मारे जा रहे हैं, मीडिया पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शुक्रवार को लोग पाक के खिलाफ सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। रावलकोट के रहने वाले सरदार अमन खान कश्मीरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील ने बयान जारी कर बताया कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग कर रहा। दोनों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से स्थिति की जमीनी हकीकत के बारे में बताने की अपील की है।

    अमन खान ने पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों को आतंकी बताया जा रहा। पाक रेंजर, फ्रंटियर कॉर्प्स और अन्य सुरक्षाबल घरों की छतों पर तैनात हैं और बेकसूर लोगों को निशाना बना रहे। अमन खान ने बताया कि सुरक्षाबल राष्ट्रीय सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले घातक हथियारों का इस्तेमाल निहत्थे लोगों पर कर रहे हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।

    एक प्रश्न के उत्तर में जैसवाल ने कहा कि रूसी सेना से अब तक 139 भारतीयों की रिहाई हो चुकी है। अभी 24 भारतीयों के वहां होने की खबर है। सरकार उनकी रिहाई की कोशिश कपीओके में पाक की बर्बरता के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा। आरोप है कि सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबल ताकत का इस्तेमाल कर रहे। लोग मारे जा रहे हैं, मीडिया पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

    अमेरिकी समाचार पत्र द्वारा पीओके को पाकिस्तानी कश्मीर बताने वाली रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओके पर अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मीडिया संस्थानों को कानूनी नामों का इस्तेमाल करना होगा। जम्मू- कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है, था और हमेशा रहेगा।

  • मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपए की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। सुकेश ने निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की है, जिसमें उसके खिलाफ मकोका के तहत आरोप तय किए गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।

    सुकेश चंद्रशेखर की याचिका में कहा गया है कि उसके खिलाफ लगाए गए मकोका के आरोपों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि इस कानून के तहत कार्रवाई को लेकर नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता है। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा और तय करेगा कि मकोका आरोपों को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    यह पूरा मामला करीब 200 करोड़ रुपए की कथित वसूली और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक कारोबारी परिवार से बड़ी रकम हासिल की। आरोप है कि उसने प्रभावशाली लोगों से संपर्क होने और कानूनी मामलों को सुलझाने का भरोसा दिलाकर पैसे की मांग की थी।

    मामला उस समय सामने आया जब फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया। उसने उनके पति से जुड़े कानूनी मामलों में मदद दिलाने का दावा किया और इसके बदले बड़ी रकम की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की।

    जांच में एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में कई लोग शामिल थे और सरकारी अधिकारियों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान करीब 217 करोड़ रुपए तक की रकम अलग-अलग माध्यमों से हासिल किए जाने का दावा किया गया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

    जांच आगे बढ़ने के बाद सुकेश चंद्रशेखर की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप था कि वह जेल के अंदर रहते हुए भी अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों ने उसके पास से मोबाइल फोन मिलने का भी दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की।

    महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका का इस्तेमाल संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किया जाता है। इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस को यह दिखाना होता है कि अपराध किसी संगठित गिरोह या लगातार आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस का आरोप रहा है कि सुकेश ने अकेले नहीं बल्कि एक समूह के साथ मिलकर कथित अपराध को अंजाम दिया।

    अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई इस बात पर केंद्रित होगी कि सुकेश के खिलाफ मकोका के तहत लगाए गए आरोप कानूनी रूप से सही हैं या नहीं। दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी एक गंभीर घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। इस दंपति ने अपनी इंसानियत और सतर्कता का परिचय देते हुए एक युवती को बंधक बनाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी घरेलू सहायिका की बहन की जान बचाने के लिए इस दंपति को पूरी रात मुंबई के पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनेत्री की घरेलू सहायिका ने रोते हुए अपनी बहन के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी बहन को मुंबई के खारघर इलाके में स्थित एक मकान में एक एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। वहां उसे दर्जनों पालतू जानवरों की देखभाल के लिए रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया। जब युवती ने काम करने में असमर्थता जताई, तो आरोपी दंपत्ति ने उसे घर में ही बंधक बना लिया। आरोप है कि युवती को खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पहचान पत्र और कपड़े छीन लिए गए और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिनेत्री और उनके पति तुरंत हरकत में आए। उन्होंने पहले फोन के माध्यम से संबंधित पक्षों से संपर्क कर युवती को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से बेहद मशक्कत के बाद पीड़िता को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर लाया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति काफी दयनीय थी और वह अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने खुद को बचाने और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पीड़िता पर ही झूठे आरोप लगाने की कोशिश की। इसके बाद अभिनेत्री और उनके पति स्वयं आधी रात को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने पूरी रात पुलिस स्टेशन में रुककर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। काफी मशक्कत और सबूत पेश किए जाने के बाद सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।

    इस पूरी घटना का विवरण दंपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घरेलू सहायिका और उसके परिवार ने अभिनेत्री और उनके पति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे समय पर ढाल बनकर नहीं खड़े होते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

  • राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को गति देते हुए जांच का दायरा ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों तक बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से जल्द पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी उनके बयान के साथ बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी पहले ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब जांच टीम उन अधिकारियों और पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका दान राशि के प्रबंधन और रिकॉर्ड से जुड़ी रही है। इसी क्रम में डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान बैंक लेनदेन, वित्तीय दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल किए जा सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इनमें गोपाल राव का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। टीम में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया। सरकार का उद्देश्य जांच को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना बताया गया है।

    हालांकि एसआईटी की औपचारिक बैठक अभी तक आयोजित नहीं हुई है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच कार्य लगातार जारी है। साक्ष्य जुटाने, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। इसी क्रम में 26 जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का आधिकारिक पुनर्गठन भी किया, ताकि जांच को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

    दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी हाल ही में आयोजित विशेष बैठक में कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं। ट्रस्ट ने फिलहाल पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति टालने का निर्णय लिया है। साथ ही पूर्णकालिक महासचिव और प्रवक्ता नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से धार्मिक समिति के पुनर्गठन का भी फैसला लिया गया है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल एसआईटी सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम लोगों से पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।