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  • NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने

    NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने


    नई दिल्ली ।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों की पहचान मिली है, जिन्हें कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था।

    जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला किसी एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के माध्यम से इसे कई राज्यों में फैलाया गया। शुरुआती कड़ी महाराष्ट्र से जुड़ती नजर आई, जहां से प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई, जिसके बाद यह हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंचा।

    सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने प्रश्नपत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया। आरोप है कि डिजिटल माध्यमों और कुछ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सिस्टम के जरिए प्रश्नपत्र साझा किया गया, जिससे इसकी पहचान और ट्रैकिंग कठिन हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर छात्रों को परीक्षा की तैयारी के नाम पर ऐसे प्रश्न दिए गए, जो असली प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे। कई मामलों में प्रश्नों की संरचना, भाषा और पैटर्न लगभग समान पाए गए, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि पेपर पहले से ही लीक हो चुका था।

    इसके अलावा, कुछ एजेंटों और मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जो कथित रूप से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और आर्थिक लेन-देन में शामिल थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोग जुड़े हुए थे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के लाखों छात्रों पर बड़ा असर पड़ा है, जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षा रद्द होने से छात्रों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है।

    इसी बीच, मामला अब न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। परीक्षा को दोबारा कराने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसी स्वतंत्र व्यवस्था के तहत करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर सबसे पहले कैसे बाहर आया और किन-किन स्तरों पर इसे आगे बढ़ाया गया। कई स्थानों पर पूछताछ और कार्रवाई भी जारी है।

    यह पूरा मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में पेपर लीक जैसे मामलों को रोकना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अब सभी की नजरें आगे की जांच और अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।

  • यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया

    यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया



    नई दिल्ली। यूपी में पिछले कुछ वर्षों में एटीएस और पुलिस की जांचों के दौरान एक ऐसा गंभीर और जटिल पैटर्न सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया, हनीट्रैप, आर्थिक लालच और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को पहले प्रभावित किया गया और फिर कथित रूप से उन्हें अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक संगठित तरीके से काम करता है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके ब्रेनवॉश और संपर्क स्थापित किए जाते हैं।

    रिपोर्ट्स और जांचों के मुताबिक कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में ऐसे युवाओं को शामिल किया गया जिनकी पहचान बदलकर या फर्जी नामों के जरिए उन्हें आगे इस्तेमाल किया गया। एटीएस की कार्रवाई में कुछ ऐसे मॉड्यूल पकड़े गए हैं जिनमें धर्मांतरण से जुड़े मामलों के साथ-साथ संदिग्ध विदेशी संपर्क और फंडिंग के संकेत मिले हैं।

    वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि ये लोग विदेशी फंडिंग के जरिए ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल कर रहे थे। इसी तरह मौलाना कलीम सिद्दीकी का नाम भी एक अलग मामले में सामने आया था, जिसमें जांच एजेंसियों ने अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोप लगाए थे।

    हाल के वर्षों में बलरामपुर और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाकर लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। कुछ मामलों में विदेश से फंडिंग और संपर्क के संकेत भी जांच एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, हालांकि हर केस की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे नेटवर्क आमतौर पर तीन चरणों में काम करते हैं—पहला भावनात्मक या डिजिटल संपर्क, दूसरा आर्थिक या सामाजिक प्रलोभन, और तीसरा विचारधारा आधारित प्रभाव। इसके लिए टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

    एटीएस का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, जिसकी जांच लगातार जारी है और कई मामलों में गिरफ्तारियां और पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, हर मामले में निष्कर्ष अदालत और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    इंदौर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में इंदौर (Indore) के सांवेर-उज्जैन रोड (Sanwer-Ujjain Road) पर गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे पड़े तीन लावारिस बैगों (Unclaimed bags) से करोड़ों रुपये की संदिग्ध नकदी बरामद हुई. बैगों में 500 रुपये के नोटों की सैकड़ों गड्डियां मिलीं, लेकिन जांच में सामने आया कि कई गड्डियों में असली नोटों के साथ नकली नोट और रंगीन कागज भी रखे गए थे।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. दरअसल इंदौर जिले के सांवेर-उज्जैन रोड स्थित भुट्टा चौराहे के पास गुरुवार सुबह एक संदिग्ध मामला सामने आया. सड़क किनारे पेड़ के नीचे रखे तीन लावारिस बैगों को देखकर स्थानीय किसान को शक हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बैगों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. जब बैग खोले गए तो उनके अंदर 500 रुपये के नोटों की बड़ी संख्या में गड्डियां मिलीं. शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल रकम करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये बताई जा रही है. हालांकि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गड्डियों के ऊपर रखे कुछ नोट असली दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर नकली नोटों के साथ रंगीन सादे कागज भरे गए थे।

    आशंका जताई जा रही है कि किसी बड़ी ठगी या अवैध लेनदेन के लिए इन बैगों को तैयार किया गया होगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. हाईवे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैग वहां कौन छोड़कर गया और इसके पीछे क्या मकसद था. फिलहाल पुलिस ने संदिग्ध नोटों को जब्त कर लिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • किसानों के पैसे पर हाथ साफ, 41 लाख के घोटाले में 4 गिरफ्तार, 35 लाख जमीन में छिपाए मिले

    किसानों के पैसे पर हाथ साफ, 41 लाख के घोटाले में 4 गिरफ्तार, 35 लाख जमीन में छिपाए मिले


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सहकारी समिति से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां करीब 41 लाख रुपए के गबन के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला ईटखेड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति रायपुर से जुड़ा है, जहां किसानों से वसूली गई रकम में भारी गड़बड़ी सामने आई।

    जानकारी के अनुसार 26 और 27 मार्च को किसानों से लगभग 41 लाख 94 हजार रुपए की ऋण वसूली की गई थी। लेकिन इस राशि को बैंक या समिति के खाते में जमा करने के बजाय उसमें हेरफेर कर दिया गया। 2 अप्रैल को जब मामले की शिकायत समिति के प्रशासक रामचरण सिलावट ने दर्ज कराई तो पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने शिकायत के बाद विशेष टीम का गठन किया और जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले। करीब 100 से अधिक कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के बाद पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

    जांच में चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जमीन में गाड़ी गई एक लोहे की पेटी से भारी मात्रा में नकदी बरामद की। बताया जा रहा है कि लगभग 35 लाख रुपए इसी तरह जमीन में छिपाकर रखे गए थे। इसके अलावा कुल 33 लाख 46 हजार 430 रुपए की नगद बरामदगी पुलिस ने की है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस घोटाले में अभी और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिसकी जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और नरेश नागर नाम के एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की गई है।

    इस पूरे मामले ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत की कमाई में हुई इस तरह की गड़बड़ी ने स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी बढ़ा दी है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि गबन की योजना कितने समय से चल रही थी और इसमें किन किन लोगों की भूमिका रही है।

  • TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज

    TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज


    नासिक।
    टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) (Tata Consultancy Services – TCS) में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए गठित विशेष जांच दल ने अब राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी) (State Intelligence Department – SID)), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) (Anti-Terrorism Squad -ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से तकनीकी सहायता मांगी है। उधर, जांच एजेंसियों ने फरार एचआर मैनेजर निदा खान की तलाश तेज कर दी है। 

    पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने बताया कि आरोपियों के संपर्कों और गतिविधियों की गहन छानबीन के लिए जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर सभी विवरण सौंप दिए गए हैं। अब तक कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, धमकी देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले में अब तक छह कर्मचारियों और यूनिट ऑपरेशन मैनेजर अश्विनी चैनानी को गिरफ्तार किया है, जो 28 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में हैं। हालांकि, मुख्य साजिशकर्ता एचआर मैनेजर निदा खान अभी भी फरार है।

    सुरक्षा के चलते वर्क फ्रॉम होम के निर्देश
    मामले के तूल पकड़ने के बाद टीसीएस ने नासिक कार्यालय में बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओ) का परिचालन अस्थाई रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। कंपनी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

  • वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं

    वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं


    खरगोन। प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

    प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू

    कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू


    कोलकाता। इंडिगो के एक पार्क किए गए विमान को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मंगलवार को हादसे का सामना करना पड़ा, जब एक कैटरिंग ट्रक विमान के इंजन से टकरा गया। टक्कर से विमान को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि घटना के समय विमान खाली खड़ा था।

    बे नंबर 51 पर हुआ हादसा

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट के बे नंबर 51 पर खड़ा विमान उस समय ऑपरेशन में नहीं था। इसी दौरान कैटरिंग वाहन स्टार्ट करते वक्त अचानक आगे बढ़ गया और सीधे इंजन से जा टकराया। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने तुरंत स्थिति संभाल ली।

    कोई हताहत नहीं

    हादसे में किसी यात्री या स्टाफ के घायल होने की सूचना नहीं है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एजेंसियों ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।

    इंडिगो का बयान

    इंडिगो ने कहा कि 7 अप्रैल को एप्रन पर चल रहा थर्ड-पार्टी मानव रहित वाहन खड़े विमान से टकरा गया। विमान को फिलहाल ग्राउंड कर दिया गया है और विस्तृत जांच व मरम्मत के बाद ही दोबारा उड़ान की अनुमति दी जाएगी।

    यह विमान कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाली फ्लाइट 6E 6663 के रूप में संचालित होने वाला था। एयरलाइन ने यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था कर दी है।

  • बृजेश्वरी कॉलोनी अग्निकांड का खुलासा शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, जांच जारी

    बृजेश्वरी कॉलोनी अग्निकांड का खुलासा शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, जांच जारी


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित बृजेश्वरी एनएक्स कॉलोनी में 18 मार्च को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था उस समय एक ही परिवार के आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और इस घटना की वजह लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन अब पुलिस जांच में अहम सुराग सामने आए हैं और स्पष्ट हुआ है कि यह हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ था

    जांच के दौरान पुलिस को बताया गया कि घर में खड़ी इलेक्ट्रिक कार को रोजाना की तरह रात में चार्ज पर लगाया गया था परिवार के सदस्यों सौरभ पुगलिया सौमिल पुगलिया और हर्षित पुगलिया ने पुलिस को बयान दिया कि भले ही सौरभ ने कार की चार्जिंग बंद कर दी थी लेकिन रात करीब 11 बजे हर्षित ने कार को फिर से चार्ज पर लगा दिया इसी दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी और देखते ही देखते पूरा घर अपनी चपेट में आ गया

    इस दर्दनाक हादसे में मनोज पुगलिया उनकी बहू सिमरन और अन्य परिवार के छह सदस्य समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई जिसमें बच्चे भी शामिल थे इस घटना ने पूरे इलाके में मातम और शोक की लहर दौड़ा दी आग लगने के तुरंत बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया

    शुरुआती दौर में परिवार की ओर से आग लगने की वजह घर के पास स्थित इलेक्ट्रिक पोल बताई गई थी लेकिन अब जांच में स्पष्ट हो गया कि असली कारण घर के भीतर चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से आग भड़की थी इसके बाद जब परिवार के सदस्य जले हुए घर में सामान देखने पहुंचे तो उन्हें कुछ अवशेष मिले जिन्हें पुलिस की मौजूदगी में परिवार ने दफना दिया

    एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग से जुड़े नियमों और सुरक्षा उपायों की सख्ती से निगरानी की जाएगी ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके

    इस घटना ने इलेक्ट्रिक वाहनों और घरों में चार्जिंग की सुरक्षा के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि छोटे से लापरवाही का कितना भयावह परिणाम हो सकता है इंदौर अग्निकांड ने सभी को आग और इलेक्ट्रिक सुरक्षा के प्रति सचेत किया है और प्रशासन की जांच आगे इसे रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

  • इंदौर अग्निकांड: सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, SOP बनाने के दिए संकेत

    इंदौर अग्निकांड: सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, SOP बनाने के दिए संकेत


    भोपाल। डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर गहरा शोक व्यक्त किया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान पीड़ित परिवारों ने फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के देर से पहुंचने की शिकायत भी की जिस पर मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीर जांच का आश्वासन दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के मद्देनजर ईवी चार्जिंग इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग को लेकर एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक के साथ नई चुनौतियां सामने आ रही हैं और सरकार इनसे निपटने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

    घटना के तुरंत बाद सीएम ने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए थे और भोपाल से विशेषज्ञों की टीम इंदौर भेजी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल लॉक और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं आधुनिक जीवन का हिस्सा हैं लेकिन इनके उपयोग में सावधानी बेहद जरूरी है।

    गौरतलब है कि इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र में बुधवार तड़के एक भीषण हादसा हुआ था। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट हुआ जिससे आग लग गई। देखते ही देखते आग ने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में मनोज पुगलिया उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत कुल 8 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को राहत देना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते समय सतर्कता बरतें।

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।