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  • रीवा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, ससुराल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पति पर हत्या का आरोप..

    रीवा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, ससुराल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पति पर हत्या का आरोप..

    मध्य प्रदेश के रीवा में एक नवविवाहिता की गंभीर चोटों के चलते उपचार के दौरान मौत हो गई। महिला को गंभीर हालत में संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उसके शरीर पर कई जगह धारदार हथियार से किए गए वार के निशान मिले हैं। मृतका की मां ने अपने दामाद पर बेटी की हत्या करने का आरोप लगाया है।

    मृतका की पहचान काजल साकेत के रूप में हुई है। उसका मायका मझगवां में बताया गया है। परिजनों के अनुसार काजल का विवाह 18 अप्रैल 2025 को मैहर जिले के मिरगौती निवासी राजेंद्र साकेत के साथ हुआ था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे काजल को उसके मिरगौती स्थित ससुराल पहुंचाया गया था।

    परिजनों का कहना है कि ससुराल पहुंचने के कुछ ही समय बाद काजल का मोबाइल फोन बंद हो गया। इससे मायके पक्ष को चिंता हुई और उन्हें किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से परिजनों को जानकारी मिली कि काजल के साथ गंभीर मारपीट हुई है और उसे इलाज के लिए रीवा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    जानकारी मिलने के बाद काजल की मां अनूपा साकेत अस्पताल पहुंचीं। वहां उन्होंने बेटी को गंभीर हालत में देखा। परिजनों के अनुसार काजल के सिर पर गंभीर चोट थी। इसके अलावा नाक, दोनों हाथों, पैरों, कंधे और पेट सहित शरीर के कई हिस्सों पर धारदार हथियार से वार के निशान मिले।

    गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण काजल की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। अस्पताल में चिकित्सकीय उपचार के दौरान कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में भी लोगों की भीड़ जुट गई।

    मृतका की मां ने आरोप लगाया है कि उसके पति राजेंद्र साकेत ने विवाद के बाद धारदार हथियार से काजल पर हमला किया। मायके पक्ष का कहना है कि घटना के बाद ससुराल पक्ष ने उन्हें तत्काल जानकारी नहीं दी और उन्हें दूसरे व्यक्ति के माध्यम से बेटी के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिली।

    घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल चौकी पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और मर्ग कायम किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवाया गया। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने और घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।

    चूंकि घटना मैहर जिले के मिरगौती क्षेत्र से संबंधित बताई जा रही है, इसलिए मामले की जांच में संबंधित थाना पुलिस के साथ समन्वय किया जा रहा है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस की जांच में मृतका के मायके पक्ष के बयान, चोटों की प्रकृति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल हत्या के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। मामले में आरोपी पति समेत संबंधित लोगों से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

  • मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    नई दिल्ली । मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार तड़के एक तेज रफ्तार BMW कार के ब्रिज से नीचे गिरने से बड़ा सड़क हादसा हो गया। दुर्घटना में कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। घायल का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    जानकारी के मुताबिक काले रंग की BMW कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। सुबह करीब 5:20 बजे कार अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद वाहन ने ब्रिज की बाउंड्री वॉल और रेलिंग को टक्कर मारी और उसे तोड़ते हुए नीचे जा गिरा।

    हादसा इतना भीषण था कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के बाद वाहन के कई हिस्से टूट गए। घटनास्थल की तस्वीरों में कार की स्थिति से टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बताया गया है कि कार में कुल चार लोग सवार थे। हादसे के बाद तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक करीब 20 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे उपचार के लिए नायर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है।

    मृतकों में 21 वर्षीय शनाय गज्जल और 17 वर्षीय धैर्य सेठ की पहचान हुई है। तीसरे मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। करीब 25 वर्षीय इस युवक को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद मृत घोषित किया गया।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम किया गया। दुर्घटनाग्रस्त BMW को हटाने और मौके पर मौजूद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संबंधित टीमों ने कार्रवाई की। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में इलाज जारी है।

    प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट में BMW की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि तेज गति के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। हालांकि हादसे की परिस्थितियों और वाहन की वास्तविक गति से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार अनियंत्रित होने के बाद कार पहले सड़क के डिवाइडर से टकराई। इसके बाद यह कोस्टल रोड के किनारे लगे बिजली के खंभे से टकराई और फिर ब्रिज की संरचना को नुकसान पहुंचाते हुए नीचे जा गिरी।

    हादसे के कारण कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन किस परिस्थिति में अनियंत्रित हुआ और हादसे से पहले सड़क पर उसकी गति कितनी थी।

    मुंबई कोस्टल रोड शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है और यहां वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में तेज गति से वाहन चलाने की स्थिति में नियंत्रण खोने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

    रविवार सुबह हुए इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया और दुर्घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच आगे जारी है।

  • नाइजीरिया में जहरीली शराब का कहर, 48 लोगों की मौत; 100 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती, कई की हालत गंभीर

    नाइजीरिया में जहरीली शराब का कहर, 48 लोगों की मौत; 100 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती, कई की हालत गंभीर

    नई दिल्ली ।नाइजीरिया के दक्षिणी राज्य ओंडो में जहरीली शराब पीने से 48 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। प्रभावित लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और कई मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अभियान शुरू कर दिया है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

    अधिकारियों के मुताबिक, ओंडो राज्य के ओडिगबो और झरेले इलाकों में पिछले कुछ दिनों के दौरान यह घटना सामने आई। बताया गया कि शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। शुरुआती लक्षणों में आंखों के सामने अंधेरा छाना, उल्टी और सिरदर्द जैसी परेशानियां शामिल थीं। इसके बाद कई लोगों की हालत तेजी से गंभीर हो गई।

    राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त बंजी अजाका के अनुसार, जहरीली शराब पीने के बाद 100 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें कई मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मरीजों को बचाने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें लगातार उपचार में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में विशेष मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है, ताकि नए मामलों की पहचान जल्द की जा सके और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

    घटना के बाद पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक व्यक्ति पर जहरीली शराब तैयार करने का आरोप भी लगाया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है, ताकि शराब तैयार करने और उसकी आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।

    जांच में शराब में मेथनॉल मिलाए जाने की आशंका सामने आई है। मेथनॉल एक जहरीला रसायन है और इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अधिकारियों की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि कथित तौर पर तैयार की गई जहरीली शराब किन-किन इलाकों में पहुंचाई गई और इसके सेवन से कितने लोग प्रभावित हुए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मेडिकल टीमों को संभावित नए मरीजों की पहचान करने और उन्हें उपचार उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया है। वहीं, पुलिस शराब की आपूर्ति और इसे तैयार करने से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और जहरीली शराब की आपूर्ति के दायरे का पता लगाने के लिए कार्रवाई जारी है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का प्रयास है कि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए और जहरीली शराब की आगे की आपूर्ति को रोका जा सके।

    ओंडो राज्य में हुई इस घटना ने शराब की गुणवत्ता और अवैध रूप से तैयार की जाने वाली शराब से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मामले की जांच के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हुई हैं।

  • मणिपुर हिंसा के बाद राहत कैंपों में असामान्य मौतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, FIR और सुरक्षा पर जोर

    मणिपुर हिंसा के बाद राहत कैंपों में असामान्य मौतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, FIR और सुरक्षा पर जोर

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के दौरान विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों में हुई मौतों के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को इन मौतों की जांच, आपराधिक कार्रवाई और राहत कैंपों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के माध्यम से देने का निर्देश दिया है।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मणिपुर सरकार से कई सवाल किए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर राज्य सरकार से पूछा कि सामने आए मामलों पर अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण यानी MSLSA को भी मामले पर अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राहत कैंपों में हुई असामान्य मौतों के मामलों में तेजी से एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। इसके साथ ही विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी सामने रखनी होगी।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जस्टिस गीता मित्तल कमेटी और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आए। इन रिपोर्टों में मणिपुर के राहत कैंपों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया था। इनमें एक मौत कथित यौन उत्पीड़न के बाद होने की बात भी सामने आई थी।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने राहत कैंपों में हुई कुल 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराए जाने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि सभी मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। मौतों की परिस्थितियों और उनके कारणों की जांच को लेकर भी राज्य से जवाब मांगा गया।

    पीठ ने राहत कैंपों में रहने वाले विस्थापित लोगों की असामान्य मौतों के बाद दिए गए मुआवजे पर भी सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को केवल 20 से 30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया। इस मुद्दे पर भी राज्य को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

    अदालत ने यह भी कहा कि राहत कैंपों में रहने वाले विस्थापित लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। असामान्य मौतों के मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। MSLSA को भी अपनी रिपोर्ट के जरिए संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई और स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में वर्ष 2023 की हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर भी उम्मीद जताई कि केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों के लिए गठित दो विशेष अदालतें मुकदमों को तेजी से पूरा करेंगी। अदालत के निर्देशों के बाद अब मुख्य सचिव और MSLSA की स्टेटस रिपोर्ट में राहत कैंपों में हुई मौतों, जांच, एफआईआर, सुरक्षा और मुआवजे से जुड़े पहलुओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • अमेरिका के बाल्टिमोर में रात करीब नौ बजे गोलीबारी, पांच लोगों को लगी गोली; पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की

    अमेरिका के बाल्टिमोर में रात करीब नौ बजे गोलीबारी, पांच लोगों को लगी गोली; पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की

    नई दिल्ली ।अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टिमोर शहर में बुधवार रात गोलीबारी की घटना सामने आई, जिसमें पांच लोगों को गोली लगने की जानकारी है। घटना पूर्वी बाल्टिमोर के 1400 ब्लॉक ईस्ट फायेट स्ट्रीट में हुई। सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी में घायलों की उम्र, उनकी चोटों की गंभीरता और उन्हें किन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    पुलिस के मुताबिक अधिकारियों को रात करीब नौ बजे गोलीबारी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और आसपास के इलाके को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद स्थिति का जायजा लेने के साथ गोलीबारी से जुड़े साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।

    बाल्टिमोर मेयर कार्यालय के एक प्रवक्ता के अनुसार इस घटना में पांच लोगों को गोली लगी है। हालांकि शुरुआती जानकारी में घायलों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। पुलिस ने भी घटना में कई लोगों के घायल होने की पुष्टि की है, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों में पीड़ितों की स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आई थी।

    गोलीबारी के बाद पुलिस ने ईस्ट फायेट स्ट्रीट और कैरोलिन स्ट्रीट को बंद कर दिया। इन सड़कों पर आवाजाही रोककर घटनास्थल को सुरक्षित किया गया। पुलिस अधिकारी इलाके में मौजूद रहे और घटना से जुड़े सबूत जुटाने के साथ पूरे मामले की परिस्थितियों की जांच करते रहे।

    जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि गोलीबारी किस वजह से हुई और घटना में कितने लोग शामिल थे। शुरुआती जानकारी के आधार पर किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी। गोलीबारी के पीछे की वजह के बारे में भी पुलिस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई।

    घटना के बाद इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई। अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित रखते हुए जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई। फिलहाल मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी ही सामने आई है और घायलों की स्थिति तथा घटना के अन्य पहलुओं से संबंधित जानकारी बाद में स्पष्ट होने की संभावना है।

    बाल्टिमोर में हुई इस गोलीबारी की घटना के संबंध में पुलिस की जांच जारी है। अधिकारियों की ओर से घटना की परिस्थितियों, संभावित संदिग्धों और गोलीबारी के कारण का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पांच लोगों को गोली लगी है, जबकि उनकी चोटों की गंभीरता और इलाज से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना के बाद पुलिस ने संबंधित सड़कों को बंद कर दिया और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी में यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि गोलीबारी में कितने लोग शामिल थे। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में घायलों की स्थिति और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • रायसेन में खेत में मिले चाचा-भतीजे के शव, फूल लेने गए थे दोनों, बिजली के तारों की चपेट में आने की आशंका

    रायसेन में खेत में मिले चाचा-भतीजे के शव, फूल लेने गए थे दोनों, बिजली के तारों की चपेट में आने की आशंका

    मध्य प्रदेश। के रायसेन जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में एक खेत से चाचा-भतीजे के शव मिलने का मामला सामने आया है। दोनों मंगलवार को फूल लेने के लिए घर से खेत की ओर गए थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर खोजबीन की, जिसके बाद दोनों के शव गांव के पास नदी किनारे स्थित एक खेत में मिले।

    मामला बेरखेड़ी राजाराम गांव का है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय अशोक अहिरवार मंगलवार दोपहर अपने 16 वर्षीय भतीजे संजय अहिरवार के साथ फूल लेने खेत की ओर गए थे। काफी समय बीतने के बाद भी दोनों घर नहीं पहुंचे तो परिवार के लोगों को चिंता हुई। उन्होंने गांव और आसपास के इलाकों में दोनों की तलाश की। परिजनों ने उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का भी प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    इसके बाद परिवार ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन के आधार पर तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान पुलिस टीम गांव के नजदीक नदी किनारे ग्राम चौकीदार नर्मदा चढ़ार के खेत तक पहुंची। वहां चाचा और भतीजे के शव खेत में पड़े मिले। दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से इलाके में भी लोगों की भीड़ जुट गई।

    घटनास्थल पर शवों की स्थिति को देखते हुए करंट लगने की आशंका सामने आई है। परिजनों का कहना है कि मृतक अशोक के हाथ में बिजली का तार लिपटा हुआ मिला था। परिवार ने आरोप लगाया कि खेत में जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए बिजली प्रवाहित तार लगाए गए थे। परिजनों को आशंका है कि इन्हीं तारों की चपेट में आने से दोनों की मौत हुई।

    हालांकि, पुलिस ने अभी मौत की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद सुल्तानगंज के तहसीलदार देवेंद्र शुक्ला भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई तथा हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

    सुल्तानगंज थाना प्रभारी दिनेश सिंह रघुवंशी के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि खेत में बिजली का तार किस उद्देश्य से लगाया गया था और वह किस तरह सक्रिय था। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। चाचा-भतीजे की एक साथ मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

  • गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    नई दिल्ली । गंगा स्नान से जुड़े दो वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। दोनों वीडियो में एक महिला गंगा में स्नान करती दिखाई दे रही है, लेकिन महिला के पहनावे और दृश्य में स्पष्ट अंतर नजर आता है। एक वीडियो में महिला बेहद कम कपड़ों में दिखाई दे रही है, जबकि दूसरे वीडियो में वह सलवार सूट पहने हुए गंगा स्नान करती नजर आती है। दोनों वीडियो सामने आने के बाद इनकी वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों में महिला के बाद एक युवक गंगा में स्नान करने के लिए जाता दिखाई देता है। इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति भी गंगा की ओर जाता नजर आता है। घटनाओं और गतिविधियों का यह क्रम दोनों वीडियो में काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। महिला के दृश्य में अंतर होने के कारण अब वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।

    पहले वीडियो में महिला गंगा में स्नान करती और डुबकी लगाती दिखाई देती है। इसी दौरान एक युवक भी गंगा स्नान के लिए आगे बढ़ता है। उसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा की ओर जाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसे किस स्थान पर बनाया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए दिखाई देती है। इस वीडियो में भी महिला के स्नान के बाद युवक और बुजुर्ग के गंगा की ओर जाने की गतिविधियां पहले वीडियो से मिलती-जुलती नजर आती हैं। यही समानता दोनों वीडियो की सत्यता को लेकर चर्चा का प्रमुख कारण बनी हुई है।

    दोनों वीडियो में महिला के दृश्य में अंतर और बाकी गतिविधियों की समानता को देखते हुए इनके AI की मदद से तैयार किए जाने या डिजिटल तरीके से बदले जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो वास्तव में AI से बनाए गए हैं या इनमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    वीडियो के वायरल होने के बाद श्रीगंगा सभा की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई है। संस्था के अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री नितिन गौतम ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया पर ये वीडियो देखे हैं। उनका कहना है कि यदि AI के जरिए महिलाओं के चित्र या वीडियो को इस तरह गंगा के बीच दिखाया जा रहा है तो यह निंदनीय है।

    नितिन गौतम ने ऐसे वीडियो को तीर्थ और महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के तहत भी मामला दर्ज किए जाने की मांग रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के कारण इस तरह की सामग्री तैयार करना आसान हो गया है और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।

    फिलहाल दोनों वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनके रिकॉर्ड होने की तारीख, वास्तविक स्थान और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्य मानने से पहले आधिकारिक या तकनीकी जांच का इंतजार करना जरूरी है। वीडियो में दिखाई देने वाली समान गतिविधियां AI से छेड़छाड़ की आशंका जरूर पैदा करती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार चार अज्ञात हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया और गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गए। मारे गए व्यक्ति को लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी बताया जा रहा है।

    घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू की। एजेंसियों ने हमलावरों की तलाश के साथ-साथ हत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए भी जांच शुरू कर दी है।

    अभी तक मारे गए आतंकी की पहचान को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, इस बारे में भी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल जांच एजेंसियां वारदात से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हैं।

    बताया गया है कि हमलावर बाइक पर सवार थे और उनकी संख्या चार थी। उन्होंने लश्कर से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाया और वारदात को अंजाम देने के बाद वहां से निकल गए। हमले के पीछे कौन लोग थे, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इस हत्या के पीछे किसी प्रतिद्वंद्वी आतंकी गुट का हाथ था या इसके पीछे कोई अन्य कारण रहा। सुरक्षा एजेंसियां इसी दिशा में भी जानकारी जुटा रही हैं। अभी किसी संभावित गुट या व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है।

    कराची में हुई इस घटना को पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में हत्या की वास्तविक वजह और हमलावरों के उद्देश्य के बारे में जांच पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटना के बाद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चार अज्ञात हमलावरों द्वारा संगठन से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने हमले की पूरी कड़ी का पता लगाने की चुनौती है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान और उनकी तलाश पर काम कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या की योजना किस तरह बनाई गई और इसके पीछे क्या मकसद था। मारे गए व्यक्ति की पहचान तथा लश्कर-ए-तैयबा में उसकी भूमिका से जुड़ी जानकारी भी जांच के दौरान स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    मामले में अभी तक आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी ही सामने आई है। इसलिए हत्या के पीछे किसी विशेष संगठन, व्यक्ति या वजह की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच आगे बढ़ने के साथ ही वारदात से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • बाबा नीम करौली के पैतृक घर पर विवाद, पोतियों ने लगाए अवैध कब्जे के आरोप; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

    बाबा नीम करौली के पैतृक घर पर विवाद, पोतियों ने लगाए अवैध कब्जे के आरोप; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

    नई दिल्ली । बाबा नीम करौली महाराज के फिरोजाबाद स्थित अकबरपुर गांव के पैतृक घर को लेकर विवाद बढ़ गया है। उनकी पोतियों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत देकर एक ट्रस्ट पर संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अरविंद कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में टूंडला उपजिलाधिकारी दिव्या सिंह और जिला पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव को भी शामिल किया गया है।

    विवाद अकबरपुर गांव में स्थित मकान नंबर 154 और आसपास की संरचनाओं से जुड़ा है। यही स्थान संत के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। वर्तमान में इस स्थल को पर्यटक आकर्षण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां संत का ध्यान कक्ष, भोजन क्षेत्र, अतिथि क्वार्टर और शयनकक्ष जैसी संरचनाएं मौजूद हैं।

    पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, विवाद 24 अगस्त को हुए एक पारिवारिक कार्यक्रम के बाद सामने आया। आरोप है कि संत के दिवंगत बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों को घर के कमरों में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई। यह मकान एक डुप्लेक्स है और करीब 4000 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले भूखंड पर बना हुआ है।

    मामले को लेकर छह पोतियों सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, रितु तिवारी और ऋचा रावत ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पैतृक निवास को ट्रस्ट के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की है। भावना रावत के पति मनोज रावत ने बताया कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जांच समिति को सौंपे जा चुके हैं।

    श्री नीम करौली महाराज ट्रस्ट की अध्यक्ष वर्तमान में संत की बेटी गिरिजा देवी भटेले हैं। उनकी दिवंगत पत्नी रामबेटी पहले ट्रस्ट की अध्यक्ष रह चुकी हैं। शिकायत के बाद अब संपत्ति से जुड़े दावों और दस्तावेजों की जांच प्रशासनिक समिति करेगी।

    हालांकि, परिवार के एक अन्य सदस्य धनंजय शर्मा ने इन आरोपों से दूरी बनाई है। वह संत के दूसरे दिवंगत बेटे अनेक सिंह शर्मा के बेटे हैं। उनका कहना है कि संपत्ति बाबा नीम करौली की इच्छा के अनुसार ट्रस्ट को सौंपी गई थी। उन्होंने परिवार के बीच पैदा हुए विवाद पर चिंता जताते हुए मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की अपील की है।

    वहीं ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता ने किसी भी अवैध कब्जे या ट्रस्ट के भीतर विवाद से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें धर्म नारायण शर्मा ने नियुक्त किया था और वह संस्था की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

    पैतृक घर से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बाबा नीम करौली महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ रिलीज होने के बाद चर्चा में है। सात अगस्त 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने एक महीने के भीतर दुनिया भर में 150 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।

    अब पैतृक संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच तीन सदस्यीय समिति करेगी। जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, ट्रस्ट के नियंत्रण और परिवार की ओर से किए गए दावों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू होने के बाद इस विवाद के आगे की दिशा समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

  • सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर जिले के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब से जुड़ी दुखद घटना के बाद मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनके परिवार से एक व्यक्ति को कथित तौर पर जोड़कर किए जा रहे दावों पर सफाई दी है। मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में जिस व्यक्ति को उनके परिवार या रिश्तेदार से संबंधित बताया जा रहा है, उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बंडा क्षेत्र की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हृदयविदारक घटना है और वह इससे बेहद दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय का सामना करने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।

    मंत्री ने कहा कि घटना के बीच कुछ लोगों द्वारा एक गांव के व्यक्ति को उनके परिवार से जोड़ने का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति उनका कोई रिश्तेदार नहीं है और उनके नाम को मामले से जोड़कर जानकारी प्रसारित करना गलत है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने स्वयं सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल व्यक्ति की पहचान या उसका किसी से संबंध कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि आरोपी किसी का रिश्तेदार या नातेदार हो अथवा किसी राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव से जुड़ा हो, कानून के सामने किसी को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि सागर जिला उनके परिवार को अच्छी तरह जानता है। मंत्री के अनुसार उनका पूरा परिवार शराब, सट्टा और जुआ जैसी गतिविधियों से हमेशा दूर रहा है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्यकर्ता को इस प्रकार की गतिविधियों में सहयोग या संरक्षण देने के पक्ष में नहीं हैं।

    मंत्री ने गंभीर घटना के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सच्चाई सामने लाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील स्थिति में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति या परिवार को बदनाम करने वाली जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं की जानी चाहिए।

    गोविंद सिंह राजपूत ने दोहराया कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को बदनाम करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है, तो ऐसी गतिविधियों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    बंडा क्षेत्र की घटना को लेकर मंत्री की सफाई का मुख्य केंद्र उनके परिवार से संबंधित बताए जा रहे व्यक्ति के आरोपों को खारिज करना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग है। उन्होंने जांच में किसी भी तरह के प्रभाव या संबंध को आड़े नहीं आने देने की बात कही है।

    मंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि घटना में वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और अफवाहों के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान में घटना की गंभीरता के बीच तथ्य सामने लाने और कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया गया।