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  • भारत पर नया टैरिफ लगा सकता है, अमेरिका…कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू

    भारत पर नया टैरिफ लगा सकता है, अमेरिका…कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की सरकार ने 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की उन व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं के खिलाफ नई जांच शुरू की है, जिन्हें अमेरिका (America) ‘अनुचित’ मानता है। इस कदम से भारत (India) सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ (Additional Tariff.) और अन्य जुर्माने लगने का रास्ता साफ हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा ट्रंप की ओर से पहले लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद वह अब नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।


    जांच के दायरे में भारत और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं

    औद्योगिक क्षमता से अधिक उत्पादन को लेकर की जा रही इस जांच के निशाने पर मुख्य रूप से भारत के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU), चीन, जापान और कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। अमेरिका के इस कड़े कदम से इन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ उसके संबंधों में तनाव बढ़ने की पूरी संभावना है।


    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कड़ा रुख

    न्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) के हवाले से, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने बताया कि ट्रंप प्रशासन दो अलग-अलग जांचें शुरू कर रहा है। पहली जांच जरूरत से ज्यादा उत्पादन पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को लेकर है। उन्होंने कहा कि इस गर्मियों तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको के खिलाफ नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस सूची में ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी शामिल हैं। अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को इस जांच से बाहर रखा गया है।

    अपने रुख को स्पष्ट करते हुए ग्रीर ने कहा- हमें अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करनी है और हमें यह सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत है कि हमारे व्यापारिक साझेदारों के साथ हमारा व्यापार पूरी तरह से निष्पक्ष हो। उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा- अगर इस समस्या को हल करने के लिए हमें टैरिफ लगाने की जरूरत पड़ी, तो हम ऐसा जरूर करेंगे। हालांकि, ग्रीर ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भविष्य में लगाए जाने वाले संभावित जुर्माने या टैरिफ अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग होंगे या एक समान।

    ग्रीर के अनुसार, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादन क्षमता उसकी घरेलू मांग से कहीं अधिक है। फिर भी, वहां की शीर्ष ईवी निर्माता कंपनी BYD आक्रामक रूप से उज्बेकिस्तान, थाइलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में अपने कारखाने स्थापित कर रही है और यूरोप में भी विस्तार करने की योजना बना रही है।

    जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष को यूरोपीय संघ की अतिरिक्त क्षमता का सबूत माना गया है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ व्यापार घाटे के बावजूद सिंगापुर में सेमीकंडक्टर की अतिरिक्त वैश्विक क्षमता है, और नॉर्वे में ईंधन व समुद्री भोजन के भारी निर्यात को इसका सबूत माना गया है।


    60 देशों पर पड़ेगा असर

    जबरन मजदूरी को लेकर जो दूसरी जांच की जा रही है, उसके बारे में ग्रीर ने बताया कि यह जांच कल दोपहर के बाद किसी भी समय शुरू हो सकती है। इस जांच की जद में लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देश आएंगे, जिससे ग्लोबल सप्लाई चैन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हस्ताक्षरित ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत पहले ही चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए लेबर कैंप बनाए हैं (हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है)। अब इस जांच का दायरा अन्य देशों तक भी बढ़ाया जा सकता है।


    ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से ठीक पहले उठाया गया कदम

    ट्रंप प्रशासन का यह ताजा व्यापारिक कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अप्रैल महीने में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस नई जांच का असर दोनों नेताओं की आगामी बातचीत पर भी देखने को मिल सकता है।

  • सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

    सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान


    उज्जैन । अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में बीते डेढ़ माह के भीतर 11 बच्चों की मौत ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच हुई इन मौतों में अधिकांश बच्चे बहु-दिव्यांग थे और 10 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में आते थे। बच्चों को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान बचाई नहीं जा सकी।

    इस मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव आयुक्त कलेक्टर उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

    शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 और जनवरी 2026 में 2 बच्चों की मौत हुई। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि अधिकांश बच्चों में एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियां पाई गईं और कुछ को मृत अवस्था में लाया गया जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई।

    अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं जिनमें से 50 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे स्वयं चलने-उठने या भोजन करने में असमर्थ हैं।

    करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों के बाद प्रशासन ने उस आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया जिनमें अधिकांश मृतक भी शामिल थे।

    सुधीर भाई गोयल ने कहा कि मृतक बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। उनमें सांस लेने में कठिनाई खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों का इलाज पहले से ही विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा था और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा गया।

    मामले की संवेदनशीलता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत के नोटिस के बाद आश्रम और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी और कड़ी करने की संभावना जताई जा रही है।

  • सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार

    सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार


    दतिया/ सेवढ़ा। अंगद सरकार मंदिर के पास स्थित व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में हुई एक सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 17 फरवरी की यह वारदात पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है। हत्या के मुख्य आरोपी रवि बघेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने अखलेश यादव पर हमला करने के लिए मौका देख कर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

    घटना के समय क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। वारदात का तरीका और स्थान यह संकेत दे रहे थे कि हत्या पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। मंदिर परिसर के पास हत्या के दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों में डर और दहशत फैल गई थी। पुलिस ने तुरंत ही क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

    पुलिस अधीक्षक के अनुसार, घटना स्थल और साक्ष्यों को देखकर हमें शक हुआ कि यह किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा है। आरोपी की पहचान और उसके इरादों का पता लगाने के लिए तकनीकी और फील्ड साक्ष्यों का उपयोग किया गया। पुलिस ने लगातार दबिश दी और 25 फरवरी को पुख्ता सूचना मिलने पर रवि बघेल को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि यह हत्या पुरानी दुश्मनी के चलते की गई थी। उसने स्पष्ट किया कि उसका मकसद अखलेश यादव को रास्ते से हटाना था और मौका मिलते ही उसने पत्थर से हमला कर हत्या को अंजाम दिया। इस खुलासे के बाद इलाके में कुछ हद तक राहत महसूस की गई, क्योंकि मुख्य आरोपी अब पकड़ में आ चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह भी जांच कर रही है कि इस हत्या में और कौन-कौन शामिल थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रवि बघेल के अलावा अन्य किसी की भूमिका है या नहीं, इसे लेकर छानबीन जारी है। सभी पहलुओं पर ध्यान देकर हम सुनिश्चित करेंगे कि न्याय के मार्ग में कोई बाधा न आए।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मामले से संबंधित किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करें ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। यह हत्या मामले ने एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत रंजिश कभी-कभी जानलेवा हो सकती है। 

  • जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन

    जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन


    जबलपुर । शहर के बरगी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार की मौत हो जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई। परिजनों और व्यापारियों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप थाने के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया तभी प्रदर्शन शांत हुआ।

    घटना बरगी थाना अंतर्गत पटेल चौराहे की बताई जा रही है। मंगलवार शाम को राजस्व और पुलिस की टीम कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान दुकानदार को हार्ट अटैक आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग भड़क उठे। परिजनों का आरोप था कि प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान अत्यधिक दबाव बनाया जिससे दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

    दुकानदार की मौत की खबर फैलते ही आसपास के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बरगी थाने के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने थाने के सामने शव रखकर नारेबाजी की और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन का रवैया अत्यधिक कठोर था और इससे मौत हुई है।

    विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास किए। बरगी थाना प्रभारी ने लोगों को आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद लोगों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त हुआ।

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उचित सावधानियां बरती गईं या नहीं। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की जा रही थी लेकिन परिजनों का आरोप है कि दबाव और तनाव के कारण दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई।

    अब इस मामले की जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है। जांच में यह देखना होगा कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं और क्या प्रशासन की गलती से मौत हुई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा और चिकित्सा आपातकालीन इंतजाम थे या नहीं।

    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उसके दौरान हुई मौत ने शहर में गर्मागरम बहस छेड़ दी है। लोग प्रशासन की कार्रवाई और जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं जबकि प्रशासन मामले की जांच और निष्पक्षता की बात कर रहा है।

  • आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच

    आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के भोपाल जोनल ऑफिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश सरवटे के खिलाफ PMLA 2002 के तहत 11.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है। यह कार्रवाई भोपाल जोनल ऑफिस की ओर से आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी जिसमें संपत्ति के स्रोत और उसके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    जगदीश सरवटे मध्यप्रदेश के जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात रहे हैं। उनके खिलाफ यह मामला आय से अधिक संपत्ति के संदेह पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि उनके पास घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति पाई गई है जिसके चलते विभाग ने PMLA की धाराओं के तहत यह कठोर कदम उठाया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति के वैध दस्तावेज और स्रोत की पुष्टि होने पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    यह कार्रवाई EOW की पिछली कार्रवाई से जुड़ी हुई है जब जबलपुर EOW की टीम ने छापेमारी के दौरान करोड़ों की संपत्ति के साथ बाघ की खाल भी बरामद की थी। उस जांच में EOW को आरोपी की आय से अधिक करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने की जानकारी मिली थी।

    अब इस मामले में PMLA के तहत अटैचमेंट की प्रक्रिया पूरी की गई है जिससे आरोपी की संपत्ति को किसी भी तरह की बिक्री या हस्तांतरण से रोक दिया गया है। PMLA 2002 के तहत अटैचमेंट का अर्थ है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से सीज कर दिया जाता है ताकि जांच पूरी होने तक उसका उपयोग या हेरफेर न हो सके।

    इस मामले में EOW की जांच जारी है और आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि आरोपी ने संपत्ति के स्रोत को सही तरीके से दिखाया या नहीं। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ संपत्ति को फॉरफिट भी किया जा सकता है। मामले की गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है क्योंकि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है।

  • खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया

    खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया


    खंडवा । जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर धरमपुरी की नंद मोहन समिति गौशाला में एक महीना से लगातार गायों की मौत का सिलसिला चल रहा है। बुधवार को गौशाला के पास लगभग छह गायों के शव और छह के कंकाल मिलने से मामला सार्वजनिक हुआ तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सरकारी अनुदान से संचालित इस गौशाला में गायों की मौत की खबर फैलते ही कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान गौशाला की स्थिति बेहद खराब मिली। फर्श टूटा हुआ पानी की टंकी लीकेज में और चरनौई भूमि पर चारे की बजाय गेहूं की फसल उगती हुई दिखी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत गायों के शवों को दफनाने की बजाय वन विभाग की जमीन पर खुले में छोड़ दिया गया था। इससे प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई और कलेक्टर ने संबंधित इंजीनियरों और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि धरमपुरी की गौशाला मुख्य मार्ग से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। वहां पहले भी कुछ गायों के मृत और बचे हुए कंकाल मिलने की शिकायत आई थी। उस समय निरीक्षण के बाद गौशाला के संचालकों और ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव को बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर महीने गौशाला का दौरा करने वाले डॉक्टर को भी नोटिस जारी किया गया है।

    गौशाला के संचालक जब कलेक्टर से पूछे गए तो नंद मोहन गौशाला के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य आशीष बरोले ने कहा कि आसपास के गांवों के लोग मृत गायों को यहां छोड़ जाते हैं हम क्या कर सकते हैं। इस बयान के बाद ग्रामीणों ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि गायों की मौत गौशाला के खराब प्रबंधन और खाने-पीने की कमी से हुई है।

    पशु चिकित्सा विभाग के उप-संचालक हेमंत शाह ने बताया कि गायों की मौत एक दिन में नहीं हुई बल्कि लगभग 15 दिनों के अंतराल में यह घटना सामने आई है। मौके पर सिर्फ एक गाय का शव मिला जबकि अन्य के कंकाल पाए गए जिन्हें सही तरीके से डिस्पोजल कराया गया। उन्होंने कहा कि पूरी जांच की रिपोर्ट कलेक्टर को दे दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा जारी है और अब इस गौशाला के प्रबंधन पानी-चारे की व्यवस्था और विभागीय लापरवाही की जाँच की जा रही है।

  • मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के बंगले के बाहर फायरिंग… जांच में जुटी पुलिस, भारी सुरक्षाबल तैनात

    मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के बंगले के बाहर फायरिंग… जांच में जुटी पुलिस, भारी सुरक्षाबल तैनात


    मुम्बई।
    बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक (Famous Bollywood Producer-Director) रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) के जुहू (Juhu) स्थित आवास के बाहर फायरिंग की खबर सामने आ रही है। इस खबर ने हर तरफ हड़कंप मच गया। पुलिस के मुताबिक, उनके घर के बाहर चार राउंड फायरिंग (Four Rounds Firing) की गई है। फायरिंग की खबर सामने आते ही मुंबई पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल, पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है। इसके साथ रोहित के घर के बाहर पुलिस ने सुरक्षा को बढ़ा दिया है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।


    अज्ञात हमलावरों ने की चार राउंड फायरिंग

    रोहित शेट्टी के करीबी ने बताया कि उनके घर के बाहर से एक अज्ञात शख्स ने गोलीबारी की और मौके से भाग निकला। मुंबई पुलिस ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि रोहित शेट्टी के घर के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने चार राउंड फायरिंग की। इसके बाद जुहू में रोहित शेट्टी के घर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। राहत की राहत की बात यह है कि इस गोलीबारी में अब तक किसी के घायल होने की खबर नहीं मिली है।


    इस घटना से फैंस परेशान

    बता दें कि फिलहाल अभी तक पता नहीं चला कि आखिरकार डायरेक्टर के घर के बाहर फायरिंग क्यों और किस वजह से की गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने सेलिब्रिटीज की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर अपना ध्यान खींचा है। वहीं, दूसरी तरफ फैंस इस घटना से काफी परेशान हैं। वहीं, अभी तक रोहित शेट्टी या उनके परिवार की तरफ से इस पूरे मामले को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

  • ग्वालियर: रिटायर्ड अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1 करोड़ 12 लाख की ठगी, पुलिस जांच में जुटी

    ग्वालियर: रिटायर्ड अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1 करोड़ 12 लाख की ठगी, पुलिस जांच में जुटी


    ग्वालियर । साइबर क्राइम के प्रति पुलिस और सरकार की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर का सामने आया है, जहां रिटायर्ड रजिस्ट्रार अधिकारी से एक करोड़ 12 लाख रुपए की ठगी हो गई। ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर चार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।

    दरअसल, रिटायर्ड अधिकारी बिहारी लाल गुप्ता 75 को साइबर अपराधियों ने पुलिस अधिकारी बनकर फंसाया। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में अरेस्ट करने का डर दिखाते हुए उन्हें झांसे में लिया और डिजिटल अरेस्ट का हवाला देकर एक करोड़ 12 लाख रुपये की ठगी कर डाली। ठगी का एहसास तब हुआ जब गुप्ता साहब ने हाल ही में साइबर जागरूकता से संबंधित एक वीडियो देखा। वीडियो में ठगी के तरीके और सावधानियां बताई गई थीं, जिससे उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।

    16 नवंबर 2025 को ठगों का पहला कॉल आया था, जबकि गुप्ता साहब ने 3 जनवरी 2026 तक ठगों के साथ आखिरी ट्रांजैक्शन किया।जब गुप्ता साहब को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का एक और उदाहरण है, जो साइबर अपराधियों के बढ़ते मंसूबों को दर्शाता है।

  • सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

    सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई


    कांकेर । कांकेर जिले के ग्राम मूंगवाल में स्थित सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब हो गया है। यह चावल स्थानीय राशन कार्ड धारकों को वितरण के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन चावल के गायब होने की जानकारी के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच के आदेश तो दिए गए हैं, लेकिन तीन साल का समय गुजरने के बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    सेल्समैन का बयान

    दुकान के सेल्समैन, परमेश्वर तेता, ने कहा कि वह पिछले तीन साल से दुकान का संचालन कर रहे हैं और जब उन्हें यह दुकान सौंपी गई थी, तब से ही स्टॉक में कमी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। सेल्समैन का दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह के घोटाले या अनियमितताओं में शामिल होने की बात से इनकार किया और कहा कि स्टॉक की कमी का कारण दुकान की शुरुआत में ही था।

    कलेक्टर का आश्वासन

    कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस मामले में शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जांच के परिणाम के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा।

    सरपंच की शिकायत

    ग्राम पंचायत के सरपंच, जैसारो कोर्राम ने भी इस मामले में खाद्य विभाग से शिकायत की है। उनका कहना है कि यह मामला ग्रामवासियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है और अगर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाएंगे यह मामला सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहां राशन कार्ड धारकों को निर्धारित चावल वितरित नहीं किया जा सका। इस मामले की तीन साल बाद भी सही से जांच नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी सिस्टम में यह तरह की अनियमितताएं सामान्य हो गई हैं। अब तक जांच की प्रक्रिया लंबी खींची गई है, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।