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  • सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ रही दोनों कीमती धातुओं के भाव में अचानक बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई। वहीं, सोने की कीमत में 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई और यह 1,38,419 रुपये पर पहुंच गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस रह गई, जबकि स्पॉट सिल्वर में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका भाव 49.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।

    इस गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। महंगी ऊर्जा के कारण दुनिया भर में महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना भी बाजार की चिंता का हिस्सा बनी हुई है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने और चांदी जैसी संपत्तियों का आकर्षण प्रभावित होता है। इन धातुओं से नियमित ब्याज या निश्चित आय नहीं मिलती। इसके विपरीत, फिक्स्ड इनकम और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न की संभावना पेश करते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में निवेश करना पसंद कर सकते हैं। इसी बदलाव ने सोने-चांदी पर बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।

    वैश्विक शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। बाजार में नुकसान झेल रहे बड़े निवेशकों और संस्थागत कारोबारियों ने नकदी जुटाने तथा घाटे की भरपाई के लिए सोने-चांदी जैसी आसानी से बेची जा सकने वाली संपत्तियों में बिकवाली की। बाजार में इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहा जाता है।

    चीन से जुड़ी गतिविधियों ने भी दबाव बढ़ाया है। दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोने की बिक्री किए जाने की खबरों ने बाजार की धारणा प्रभावित की। चांदी में गिरावट सोने से अधिक रही, क्योंकि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और शेयर बाजार की अस्थिरता ने इसकी कीमतों को ज्यादा प्रभावित किया।

    कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा पुराने रिकॉर्ड से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। मौजूदा भाव के आधार पर यह अपने शिखर से 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुकी है। वर्ष 2025 में चांदी ने करीब 170 प्रतिशत का रिटर्न दिया था। इसी तरह जनवरी 2026 में सोने का भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह अपने उच्चतम स्तर से 42,321 रुपये नीचे आ चुका है। इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,40,054 रुपये रह गई है।

    हालांकि, घरेलू बाजार में आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिलने की उम्मीद है। नवंबर में धनतेरस, दिवाली और शादी-विवाह के सीजन के कारण आभूषणों तथा भौतिक सोने की खरीदारी बढ़ सकती है। 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण बाजार को त्योहारी खरीदारी से विशेष उम्मीद है।

    इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार अपने भंडार में सोना शामिल कर रहे हैं। उनकी खरीदारी से सोने की दीर्घकालिक मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों की स्थिति पर निर्भर करेगी। त्योहारी मांग और औद्योगिक खपत से सुधार की संभावना जरूर है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।

  • सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    नई दिल्ली । देश में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 31 अक्टूबर 2026 को सोने के वायदा भाव में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शनिवार सुबह तक 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 66 रुपये यानी 0.05 प्रतिशत घटकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी दिन यह 1,38,485 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहने के कारण अब कारोबार अगले कारोबारी सत्र में होगा।

    बुलियंस के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,830 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3,884.90 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सोने की कीमत गिरकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस दर में सभी कर शामिल हैं। दूसरी ओर, शहरों के खुदरा भाव के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,410 रुपये, 22 कैरेट की 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट की 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    देश के अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर, चंडीगढ़ और अमृतसर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,410 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इन शहरों में 22 कैरेट सोना 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर और गुवाहाटी जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,260 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यहां 22 कैरेट सोना 1,30,400 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तमिलनाडु के कई अन्य शहरों में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,06,670 रुपये दर्ज की गई है।

    पटना, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 24 कैरेट सोना 1,42,310 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। इन शहरों में 22 कैरेट का भाव 1,30,450 रुपये और 18 कैरेट का 1,06,740 रुपये है। नासिक, वसई-विरार, भिवंडी और लातूर में 24 कैरेट सोना 1,42,290 रुपये, 22 कैरेट 1,30,430 रुपये और 18 कैरेट 1,06,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। बृहस्पतिवार को इसकी कीमत 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 122.06 डॉलर यानी 3.04 प्रतिशत गिरकर 3,899.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था और 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे बना रहा।

    वायदा बाजार में भी शुक्रवार को सोने पर दबाव दिखाई दिया। कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों का आकार घटाया। इसके चलते एमसीएक्स पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध का भाव 976 रुपये यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 1,41,620 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। न्यूयॉर्क के बाजार में सोना 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,983.99 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता रहा।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल कारकों के चलते बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी पड़ा और शुक्रवार को गिरावट जारी रही। कमजोर हाजिर मांग को भी वायदा कीमतों में कमी की प्रमुख वजह बताया गया। इस तरह 31 अक्टूबर को वायदा भाव में मामूली गिरावट के साथ सोना 1.38 लाख रुपये के स्तर के करीब बना रहा, जबकि सर्राफा और खुदरा बाजार में अलग-अलग दरें दर्ज की गईं।

  • दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    नई दिल्ली । दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.59 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में करीब 1.96 प्रतिशत की गिरावट आई। कारोबार के दौरान चांदी 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। वैश्विक बाजार में कमजोर रुख और अमेरिका की आर्थिक परिस्थितियों को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले कारोबारी बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 843 रुपये नीचे आकर 1,41,753 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें लगभग 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी का भाव पिछले बंद स्तर 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 1,85,723 रुपये पर आ गया। इसमें 3,730 रुपये यानी करीब 1.96 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों का असर सोने-चांदी की मांग पर पड़ रहा है।

    बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अमेरिका में महंगाई के आंकड़े हैं। सितंबर में अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उपलब्ध बाजार अनुमानों के अनुसार, इस संभावना को 80 प्रतिशत से अधिक माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों का रुझान उन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज मिलता है। सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग प्रभावित होती है।

    तकनीकी स्तरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमत इस दायरे से नीचे जाती है तो इसमें 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है। चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है।

    चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल बने रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई और अब यह अपने रिकॉर्ड स्तर के आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।

    इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल सकते हैं।

    अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 8 और 9 दिसंबर को होने वाली बैठक पर है। साथ ही महंगाई और रोजगार से जुड़े आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत महंगाई के मजबूत आंकड़े आने पर गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों को लेकर निवेशकों और खरीदारों की नजर बाजार के नए संकेतों पर है। इस बीच गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर करीब 76 तक पहुंच गया है। इस बदलाव ने दोनों कीमती धातुओं के प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। बाजार के जानकारों के अनुसार, मौजूदा अनुपात बताता है कि सोने की तुलना में चांदी अपेक्षाकृत सस्ती हो गई है। ऐसे में आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, यह अनुपात अपने आप में कीमतों की दिशा तय करने वाला संकेत नहीं है।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल सोने और चांदी की तुलनात्मक कीमत समझने के लिए किया जाता है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि रेशियो 76 है तो एक औंस सोने के बराबर कीमत हासिल करने के लिए लगभग 76 औंस चांदी चाहिए। इस अनुपात में बढ़ोतरी का अर्थ है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा हो रहा है या चांदी का प्रदर्शन कमजोर पड़ रहा है। इसके विपरीत रेशियो घटने पर चांदी की स्थिति मजबूत मानी जाती है।

    मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो इस साल करीब 27 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक महीने में ही इसमें लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका स्तर लंबे समय के औसत 65 से 70 के दायरे से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने सोने के मुकाबले उसे सस्ता बना दिया है।

    साल 2026 की शुरुआत में दोनों धातुओं के अनुपात में इसके उलट स्थिति देखने को मिली थी। उस समय चांदी की कीमत बढ़कर 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके चलते गोल्ड-सिल्वर रेशियो गिरकर लगभग 43.6 रह गया था। यह स्तर एक दशक से अधिक समय में सबसे कम था। इसके बाद बाजार में परिस्थितियां बदलीं और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई।

    आंकड़ों के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 55 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। इस साल इसकी कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह करीब 52.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। दूसरी ओर सोने की कीमत में इस साल लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई है और इसका भाव करीब 4,027 डॉलर प्रति औंस बताया गया है। दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट की रफ्तार अलग-अलग रहने से रेशियो में बढ़ोतरी हुई है।

    कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो को खरीदारी या बिकवाली का अंतिम संकेत मानने के बजाय निवेश की रणनीति समझने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चला जाता है, तब निवेशक सोने की तुलना में चांदी में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, रेशियो बहुत नीचे आने पर चांदी में कुछ मुनाफा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    इतिहास में भी इस अनुपात के आधार पर बाजार के बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 126 तक पहुंच गया था। इसके बाद अगले पांच महीनों में चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। आमतौर पर 80 से ऊपर का अनुपात चांदी के लिए अनुकूल स्थिति का संकेत माना जाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर सोने के बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा करता है।

    निवेशकों के लिए इस अनुपात का एक अन्य उपयोग पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत सोने और चांदी में निवेश का एक निश्चित हिस्सा तय किया जा सकता है। रेशियो में बड़ा बदलाव आने पर उसी के अनुसार निवेश का अनुपात बदला जा सकता है। हालांकि, केवल एक संकेतक के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय चरणबद्ध निवेश और जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है।

  • भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में पर्यटन और रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देने के लिए डेला ग्रुप ने 2250 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित योजना के तहत 220 एकड़ क्षेत्र में विला, ब्रांडेड आवास और पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट विकसित करने की तैयारी है। इस परियोजना को लेकर भोपाल में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के संस्थापक और क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

    डेला ग्रुप के संस्थापक जिमी मिस्त्री ने मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान प्रस्तावित ‘डेला रेसकोर्स भोपाल’ परियोजना की जानकारी सामने आई। इसका विकास मूल्य 2250 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    योजना के अनुसार, 220 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में 930 विला बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त 128 ब्रांडेड आवास और 300 से अधिक कमरों वाला पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट भी विकसित करने की योजना है। परियोजना में घुड़सवारी और पोलो जैसी गतिविधियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की परिकल्पना भी शामिल है। इन सुविधाओं के जरिए पर्यटन, आवास और मनोरंजन को एक ही परिसर में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    भोपाल के आसपास पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए ‘डेला रातापानी रिजर्व टाउनशिप’ विकसित करने की योजना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। इसे आधुनिक जीवनशैली, स्वास्थ्य और वेलनेस सुविधाओं के साथ जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए मास्टर प्लानिंग, आवागमन और पर्यटकों को विशेष अनुभव देने वाली सुविधाओं पर ध्यान देने की परिकल्पना की गई है। परियोजना की योजना में भोपाल के आसपास के प्राकृतिक परिवेश और पर्यटन क्षमता को उपयोग में लाने पर जोर दिया गया है।

    क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वस्तरीय पर्यटन और आवास सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों के भोपाल तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक समय तक रुकने की संभावना बढ़ सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। उनके अनुसार, पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने से होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

    मीक ने यह भी कहा कि भोपाल की खूबियों को निवेश, रोजगार और स्थानीय लोगों की समृद्धि से जोड़ना जरूरी है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान का उद्देश्य राजधानी की पहचान और संभावनाओं को सामने लाना तथा उन्हें आर्थिक विकास से जोड़ना है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास विभाग और जिमी मिस्त्री की पहल की सराहना की।

    हालांकि, पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा। मनोज मीक ने प्राकृतिक संसाधनों और जल-संपदा को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रस्तावित परियोजना में निवेश, आवास और पर्यटन से जुड़ी कई सुविधाओं की योजना सामने आई है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन निर्माण की प्रगति, पर्यावरणीय व्यवस्थाओं और स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले अवसरों के आधार पर किया जा सकेगा।

    भोपाल में प्रस्तावित यह परियोजना पर्यटन और रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना सामने लाती है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न स्थानीय कारोबारों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

  • एलआरएस के तहत विदेशी शेयर-बॉन्ड में भारतीयों का निवेश 111% बढ़ा, अगस्त में 321.53 मिलियन डॉलर पहुंचा

    एलआरएस के तहत विदेशी शेयर-बॉन्ड में भारतीयों का निवेश 111% बढ़ा, अगस्त में 321.53 मिलियन डॉलर पहुंचा


    नई दिल्ली । विदेशी शेयर और बॉन्ड बाजारों में भारतीयों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में भारतीयों का निवेश सालाना आधार पर 111 प्रतिशत बढ़कर 321.53 मिलियन डॉलर पहुंच गया। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 152.18 मिलियन डॉलर था। एक साल के भीतर निवेश में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारतीय निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाती है।

    हालांकि, मासिक आधार पर विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश में लगभग सात प्रतिशत की गिरावट आई। इससे पहले जून 2026 में इस श्रेणी में निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस लिहाज से अगस्त में दर्ज आंकड़ा जून के उच्चतम स्तर से कम रहा, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय वृद्धि बनी रही।

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत कुल बाहरी प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा। अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में निवेश का हिस्सा कुल एलआरएस प्रेषण का लगभग 11.7 प्रतिशत था। अगस्त 2025 में यह अनुपात केवल 5.8 प्रतिशत रहा था। यानी कुल प्रेषण में विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की हिस्सेदारी एक साल में दोगुने से अधिक हो गई।

    एलआरएस के तहत सभी श्रेणियों में किए गए कुल बाहरी प्रेषण में भी वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त 2026 में यह राशि बढ़कर 2.74 अरब डॉलर हो गई, जबकि अगस्त 2025 में 2.64 अरब डॉलर थी। इस तरह सालाना आधार पर कुल प्रेषण में 3.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जुलाई 2026 के 2.58 अरब डॉलर के मुकाबले अगस्त में यह लगभग छह प्रतिशत अधिक रहा।

    विदेश यात्रा एलआरएस के तहत खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी हुई है। अगस्त 2026 में भारतीयों ने विदेश यात्रा पर 1.63 अरब डॉलर खर्च किए, जो कुल बाहरी प्रेषण का करीब 59 प्रतिशत था। यह खर्च पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक प्रतिशत और जुलाई 2026 के मुकाबले 11.4 प्रतिशत अधिक रहा। आंकड़े बताते हैं कि विदेश यात्रा से जुड़े भुगतान कुल प्रेषण में सबसे बड़ा हिस्सा बनाए हुए हैं।

    कारोबारी यात्रा पर खर्च में सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी देखने को मिली। जुलाई 2026 में इस मद में 10.9 मिलियन डॉलर भेजे गए थे, जबकि अगस्त में यह राशि बढ़कर 51 मिलियन डॉलर हो गई। इस प्रकार एक महीने के भीतर कारोबारी यात्रा से संबंधित प्रेषण लगभग पांच गुना बढ़ गया।

    अन्य श्रेणियों में उपहार के रूप में विदेश भेजी गई राशि अगस्त में 215.72 मिलियन डॉलर रही। निकट संबंधियों के भरण-पोषण के लिए 275.43 मिलियन डॉलर भेजे गए। वहीं, विदेश में अचल संपत्ति खरीदने के लिए 39.59 मिलियन डॉलर और विदेशी बैंकों में जमा करने के लिए 50.78 मिलियन डॉलर का प्रेषण दर्ज किया गया।

    विदेश में चिकित्सा उपचार के लिए भेजी गई राशि में भी वृद्धि हुई। अगस्त 2026 में इस उद्देश्य से किया गया प्रेषण सालाना आधार पर 21.3 प्रतिशत बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुंच गया। कुल आंकड़ों से स्पष्ट है कि एलआरएस के तहत भारतीयों का पैसा विदेश यात्रा, परिवार के भरण-पोषण, संपत्ति खरीद और विदेशी वित्तीय बाजारों में निवेश जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए भेजा जा रहा है। इनमें विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी अगस्त के आंकड़ों का एक प्रमुख पहलू रही।

  • सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 6,799 रुपये टूटी, दो लाख के नीचे पहुंचा भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 6,799 रुपये टूटी, दो लाख के नीचे पहुंचा भाव

    नई दिल्ली । कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के भाव में एक बार फिर बड़ी कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। घरेलू वायदा बाजार में चांदी की कीमत गिरकर दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे आ गई, जबकि सोना भी अपने पिछले बंद स्तर से काफी नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर में डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,43,309 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह 1,251 रुपये यानी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,058 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से इसका भाव 1,41,806 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर सोने में पिछले बंद भाव के मुकाबले 1,503 रुपये यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ सुधार हुआ। कारोबार के दौरान सोना 629 रुपये यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ था।

    चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 1,99,599 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। शुक्रवार को यह 3,012 रुपये यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 1,96,587 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। दिन के कारोबार में गिरावट तेज हुई और इसका भाव 6,799 रुपये यानी 3.40 प्रतिशत फिसलकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस गिरावट के साथ चांदी दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई। हालांकि, बाद में कुछ खरीदारी लौटने से कीमत में आंशिक सुधार हुआ और चांदी 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।

    बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजहों में महंगी ऊर्जा और उससे बढ़ने वाली महंगाई की चिंता शामिल है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने के कारण निवेशकों को आशंका है कि महंगाई पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से सोने जैसी ऐसी संपत्तियों पर दबाव पड़ता है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होने से भी निवेशकों का रुझान प्रभावित हुआ है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.65 प्रतिशत टूटकर 4,034 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, चांदी करीब 1.30 प्रतिशत गिरकर 54.29 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही। वैश्विक बाजार में सोने का भाव 4,000 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचने से कीमती धातुओं में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।

    हालांकि, डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आने पर सोने-चांदी को कुछ समर्थन मिल सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, चीन की अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।

    इस साल सोने ने घरेलू वायदा बाजार में 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जबकि चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंची थी। मौजूदा भाव की तुलना में दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। विशेष रूप से चांदी की कीमत अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है। आगे कीमतों की दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

  • पीयूष गोयल ने जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश का दिया न्योता, विनिर्माण और नवाचार में बताए बड़े अवसर

    पीयूष गोयल ने जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश का दिया न्योता, विनिर्माण और नवाचार में बताए बड़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं के साथ बैठकों के दौरान भारत में निवेश, विनिर्माण और नवाचार की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत जर्मन कंपनियों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी विकसित करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। गोयल ने दोनों देशों के उद्योग जगत से सहयोग बढ़ाने और नए कारोबारी अवसर तलाशने का आह्वान किया।

    बर्लिन दौरे के दौरान गोयल ने फ्रेसेनियस ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल सेन के साथ बैठक की। इसमें भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती मांग तथा मजबूत विनिर्माण क्षमताओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने विचार किया कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय जरूरतों को भी पूरा किया जा सकता है।

    गोयल ने भारत की कुशल प्रतिभा और उत्पादन क्षमता को जर्मन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, कंपनियां भारत में उपलब्ध योग्य कर्मचारियों और विश्वस्तरीय विनिर्माण सुविधाओं का लाभ उठाकर घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में अपनी पहुंच मजबूत कर सकती हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं के विकास में भी सहयोग की संभावनाएं हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने बेयर के फार्मास्यूटिकल्स प्रभाग के अध्यक्ष स्टीफन ओएलरिख के साथ भी चर्चा की। इस बैठक में भारत में बेयर की विस्तार योजनाओं और देश के विकसित होते स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश की संभावनाओं पर विचार किया गया। बातचीत में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने से जुड़े अवसर भी शामिल रहे। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया।

    गोयल ने बर्लिन में नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मुरात अकयिलदिज के साथ बैठक में भी भाग लिया। इसमें भारत में कंपनी के विनिर्माण विस्तार, टिकाऊ निर्माण सामग्री और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण और आर्थिक बदलावों के बीच निर्माण क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया। टिकाऊ निर्माण सामग्री और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े अवसर इस बातचीत के प्रमुख विषय रहे।

    इससे पहले गोयल ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (डीजीएपी) के इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे भी मौजूद थीं। गोयल ने कहा कि यह केंद्र भारत-जर्मनी संबंधों की बढ़ती मजबूती और आपसी सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

    अपने संबोधन में गोयल ने दोनों देशों की पूरक क्षमताओं को महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों के लिए मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता आर्थिक साझेदारी को नई गति दे सकता है। उनके अनुसार, भारत और जर्मनी मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत और लचीली मूल्य शृंखलाएं विकसित कर सकते हैं। इसके लिए दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को पारस्परिक लाभ वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

    बर्लिन स्थित ईएसएमटी बर्लिन की ओर से आयोजित बिजनेस लीडर्स राउंडटेबल में भी गोयल ने प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक तथा आर्थिक संबंधों के भविष्य को लेकर विश्वास जताया। इन बैठकों के जरिए निवेश, उत्पादन, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण सामग्री और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को सामने रखा गया।

  • भारत-न्यूजीलैंड एफटीए लागू, सभी भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क, 20 अरब डॉलर के निवेश से खुलेंगे नए अवसर

    भारत-न्यूजीलैंड एफटीए लागू, सभी भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क, 20 अरब डॉलर के निवेश से खुलेंगे नए अवसर


    नई दिल्ली । भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने के साथ भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुल गए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को कहा कि इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड में भारतीय वस्तुओं को सभी टैरिफ श्रेणियों में शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलने और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    पीयूष गोयल के अनुसार, समझौते के लागू होने से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी भारतीय निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क छूट का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद अब न्यूजीलैंड के बाजार में बिना आयात शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे। इससे वहां भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर होने और निर्यातकों को नए खरीदारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की संभावना है।

    मंत्री ने यह भी बताया कि समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को सुगम बनाएगा। इस निवेश से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर तैयार करने और दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को व्यापक बनाने की उम्मीद है। हालांकि, निवेश की वास्तविक मात्रा और उसके क्षेत्रवार वितरण का प्रभाव समझौते के क्रियान्वयन तथा निवेश संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा।

    भारत ने इस समझौते में संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। गोयल ने स्पष्ट किया कि डेयरी, प्रमुख कृषि उत्पादों और पशु-आधारित उत्पादों जैसे क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है। उनके अनुसार, किसानों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और व्यापार विस्तार के साथ घरेलू कृषि हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है।

    व्यापारी संगठनों ने भी समझौते का स्वागत किया है। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इसे भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, यह समझौता ‘लोकल टू ग्लोबल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

    इस समझौते से वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा और फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, दवाइयों, रसायनों, कृषि उत्पादों तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे क्षेत्रों को निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क पर प्रवेश से भारतीय उत्पादों की कीमत संबंधी प्रतिस्पर्धा बेहतर हो सकती है। इसका लाभ विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), कारीगरों, निर्माताओं, किसानों, महिला उद्यमियों और निर्यातकों तक पहुंचने की संभावना है।

    समझौते के तहत निवेश को बढ़ावा देने के साथ भारतीय पेशेवरों और युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। व्यापारिक गतिविधियों में विस्तार से विनिर्माण, सेवाओं और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर आने वाले समय में व्यापार और निवेश के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।

    भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि शुल्क-मुक्त पहुंच और निवेश को प्रोत्साहन मिलने से इस लक्ष्य की दिशा में प्रगति तेज होगी। खंडेलवाल ने व्यापारियों, निर्माताओं और एमएसएमई से इस अवसर का लाभ उठाकर ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया है।

  • रुपए को मजबूती देने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों को एसोचैम का समर्थन

    रुपए को मजबूती देने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों को एसोचैम का समर्थन


    नई दिल्ली:  
    रुपए में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश के रुझानों के बीच सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों को उद्योग संगठन एसोचैम ने समर्थन दिया है। संगठन का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रुपए को सहारा देने, निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयास सही दिशा में हैं। एसोचैम के मुताबिक, भारत की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बनाए रखते हुए स्थायी पूंजी प्रवाह बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

    एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के मौजूदा दौर में व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार और आरबीआई के समन्वित प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने रुपए की दीर्घकालिक मजबूती को देश की आर्थिक स्थिति और लगातार विदेशी पूंजी आकर्षित करने की क्षमता से जोड़कर देखा। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि केवल अस्थायी पूंजी प्रवाह के बजाय लंबे समय तक टिकने वाले निवेश को बढ़ावा देना जरूरी है।

    मिंडा ने पूर्व आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव के विचारों का भी समर्थन किया। सुब्बाराव ने कहा था कि रुपए की दीर्घकालिक मजबूती अंततः भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। एसोचैम अध्यक्ष के अनुसार, संगठन इस विचार से सहमत है और सरकार तथा आरबीआई की ओर से पहले ही उठाए गए कदमों को महत्वपूर्ण मानता है।

    एसोचैम ने दावा किया कि हाल में किए गए उपायों से रुपया अपने हालिया निचले स्तरों से उबरने में सफल रहा है। संगठन ने 31 अगस्त को समाप्त हुई 133 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) मोबिलाइजेशन विंडो का भी उल्लेख किया। इस पहल को विदेशी मुद्रा जुटाने से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में अहम बताया गया।

    संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। इसके प्रमुख आधारों में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई का 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए अपनाई गई संतुलित मौद्रिक नीति शामिल हैं। उनके मुताबिक, ये कारक देश की आर्थिक स्थिरता को समर्थन देते हैं।

    एसोचैम ने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से हाल में घोषित कदमों का भी स्वागत किया। इनमें आयकर संशोधन अध्यादेश, 2026 शामिल है। इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई के निवेश पर मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट का प्रावधान किया गया है। संगठन ने इसे विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।

    इसके अलावा, एसोचैम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी के दौरान दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर यानी एलटीसीजी और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी को लेकर निवेशकों की राय पर विचार करने की बात कही थी।

    हालांकि, संगठन ने कर व्यवस्था में और सुधार की जरूरत भी बताई। एसोचैम के अनुसार, कर ढांचे को अधिक तर्कसंगत बनाने, नियमों की व्याख्या सरल करने और दीर्घकालिक इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने अल्पकालिक पूंजी प्रवाह की तुलना में लंबे समय तक बने रहने वाले निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

    एसोचैम ने कहा कि भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से वह सरकार, आरबीआई और बाजार नियामक सेबी के साथ मिलकर काम जारी रखेगा। संगठन का मानना है कि स्थिर आर्थिक नीतियां, स्पष्ट कर व्यवस्था और भरोसेमंद निवेश माहौल दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।