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  • बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे

    बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे


    पटना।
    बिहार (Bihar) आज भी निवेश (Investment) आकर्षित करने की कसौटी पर सबसे पिछड़ा राज्य है। आधारभूत संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, कारोबारी माहौल और जमीन आवंटन की जटिलता के मोर्चे पर राज्य आज भी पिछड़ा है। नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रैकिंग रिपोर्ट (Ranking Report) में बिहार देश के बड़े 17 राज्यों में सबसे नीचे 17वें स्थान पर और 36 राज्यों में 26वें स्थान पर है। नीति आयोग द्वारा जुलाई 2026 में जारी निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार को देश के तीसरे श्रेणी के राज्यों में शामिल किया गया है।

    रिपोर्ट में राज्य को सौ अंकों में कुल 41.2 अंक ही प्राप्त हुए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में मानकों के अनुरूप राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। तीसरी श्रेणी (40 से 45 अंक) में बिहार के साथ झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुदुचेरी शामिल हैं। वहीं, उच्च प्रदर्शन (50 से अधिक अंक) वाले पांच राज्यों में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तामिलनाडु शामिल हैं।


    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में निचले पायदान पर

    निवेश अनुकूल सूचकांक में बताया गया है कि बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सिर्फ 0.16 मिलियन डॉलर रहा जबकि इसी वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र में 15,116 मिलियन डॉलर, दिल्ली में 6523.43 मिलियन डॉलर और कर्नाटक में 6571 मिलियन डॉलर रहा। कुल एफडीआई का 85 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तामिलनाडु को मिल जाता है। इसी तरह पेटेंट के मामले में भी बिहार फिसड्डी रहा। रिपोर्ट के अनुसार बिहार से वित्तीय वर्ष 2023 में कंपनियों द्वारा कुल दाखिल पेटेंट का 0.48 प्रतिशत ही दाखिल हो सका।

    जबकि देश के बड़े राज्यों का औसत पेटेंट दाखिल करने की दर 3.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में राज्य में समर्पित(डेडिकेटेड) औद्योगिक पार्क, औद्योगिक आधारभूत संरचना के अलावा निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा की दिशा में काम करने की सलाह दी गई है। आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियां, विनियामक सुगमता, वित्तीय सेहत, संस्थागत वातावरण (इंस्टीटयूशनल इन्वायरमेंट) और पर्यावरणीय लचीलापन की बात भी कही गई।


    दूरगामी रणनीति अपनानाी होगी

    अर्थशास्त्री और नालंदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर सुधांशु कुमार के अनुसार निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार की खराब स्थिति चिंता का विषय है। बड़े राज्यों में सबसे नीचे बिहार की स्थिति राज्य की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करती है जो पहले भी कई अध्ययनों में सामने आती रही हैं। नवाचार और एमएसएमई आधार दोनों ही पिछड़े हैं, जबकि सुरक्षा, भूमि आवंटन और रोजगार की कमी निवेशकों को रोकती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति जीएसडीपी बड़े राज्यों के औसत से 72 फीसदी कम है। निर्णायक दृष्टि और समयबद्ध दूरगामी रणनीति अपनाकर बिहार निम्न विकास के जाल से बाहर निकल सकता है और एक सशक्त आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ सकता है।


    क्या है निवेश अनुकूल सूचकांक

    निवेश अनुकूल सूचकांक के तहत देश के विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में निवेशक और व्यवसाय के लिए कितना अनुकूल माहौल है। इसका मूल्यांकन किया गया है। नीति आयोग ने देश में पहली बार राज्यों की निवेश तैयारियों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट और रैंकिंग जुलाई 2026 में जारी की है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश में मजबूत निवेश पारिस्थितिकी तंत्र(इकोसिस्टम) विकसित कर देश को 2047 तक विकसित देश बनाने के उद्देश्य से इस सूचकांक को जारी किया गया है। इसमें देश के सभी 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश को विभिन्न श्रेणियों के तहत शामिल किया गया है।


    कमियां गिनाईं, सुझाव दिये

    1. बिहार में भूमि आवंटन प्रक्रिया जटिल और उलझाऊ है
    2. रोजगार के अवसर सीमित हैं।
    3. राज्य के द्वितीय और तृतीय श्रेणी वाले शहरों में वायु संपर्कता कम है
    4. बिजली की निर्बाध उपलब्धता के लिए अभी और काम करने की जरूरत है
    5. निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा पर फोकस करने की जरुरत

  • जापान में पीयूष गोयल की बड़ी कारोबारी बैठकें, भारत में निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय और औद्योगिक अवसरों पर जोर

    जापान में पीयूष गोयल की बड़ी कारोबारी बैठकें, भारत में निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय और औद्योगिक अवसरों पर जोर

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के तीसरे दिन देश के प्रमुख कारोबारी और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत में निवेश बढ़ाने, व्यापारिक भागीदारी मजबूत करने और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देने से जुड़े अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    गोयल ने जापान के प्रमुख कारोबारी समूह टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन यानी एसएमबीसी ग्रुप, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप यानी एमयूएफजी तथा निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बातचीत में अलग-अलग क्षेत्रों में भारत की बढ़ती संभावनाओं और जापानी कंपनियों के लिए उपलब्ध कारोबारी अवसरों को सामने रखा गया।

    टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तोशिमित्सु इमाई के साथ बैठक में भारत में व्यापार, मोबिलिटी और औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनी की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इस दौरान भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में देश की भूमिका को मजबूत करने के अवसरों पर विशेष जोर दिया गया।

    भारत सरकार जापानी कंपनियों को देश में उत्पादन, कारोबार और निर्यात से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ऐसे में औद्योगिक और मोबिलिटी क्षेत्र में जापानी कंपनियों की भागीदारी बढ़ना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत कर सकता है।

    गोयल ने एसएमबीसी ग्रुप के डिप्टी प्रेसिडेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर योशिहिरो हयाकुतोमे के साथ भी बैठक की। इसमें बैंकिंग क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और भारत-जापान के वित्तीय संबंधों को अधिक मजबूत बनाने के अवसरों पर चर्चा हुई। भारत के तेजी से विकसित होते वित्तीय क्षेत्र को जापानी वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में पेश किया गया।

    इसके बाद गोयल ने एमयूएफजी के डिप्टी चेयरमैन यासुशी इतागाकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की। बैठक में बैंकिंग, वाणिज्यिक वित्त और निवेश के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। भारतीय बाजार की बढ़ती जरूरतों और वित्तीय क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।

    निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और ग्लोबल बिजनेस प्रमुख मिनोरू किमुरा के साथ बैठक में बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार हुआ। गोयल ने भारत के तेजी से विस्तार कर रहे बीमा बाजार में जापानी संस्थानों के लिए मौजूद संभावनाओं को रेखांकित किया।

    इन बैठकों के माध्यम से भारत ने जापान के प्रमुख कारोबारी और वित्तीय समूहों के सामने निवेश के विभिन्न अवसरों को स्पष्ट किया। व्यापार, औद्योगिक उत्पादन, मोबिलिटी, बैंकिंग, वाणिज्यिक वित्त, बीमा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी पहले से ही कई क्षेत्रों में व्यापक है। भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था, बढ़ती औद्योगिक क्षमता और वैश्विक निर्यात केंद्र बनने की दिशा में जारी प्रयास जापानी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वहीं, जापान की पूंजी, तकनीकी क्षमता और वित्तीय विशेषज्ञता भारत की विकास जरूरतों के साथ महत्वपूर्ण तालमेल बना सकती है।

    पीयूष गोयल की जापान यात्रा के दौरान हुई इन बैठकों का प्रमुख उद्देश्य कारोबारी संबंधों को मजबूत करना और जापानी निवेशकों को भारत में उपलब्ध अवसरों से जोड़ना रहा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में संवाद को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक और उभरते क्षेत्रों में भारत के अवसरों का लाभ उठाने को कहा

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक और उभरते क्षेत्रों में भारत के अवसरों का लाभ उठाने को कहा


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। टोरंटो में भारतीय प्रवासी कारोबारी समुदाय के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह में उन्होंने भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों और विभिन्न उभरते क्षेत्रों की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक मजबूत स्थिति में हैं और बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश हो रहा है।

    उन्होंने कनाडाई निवेशकों से भारत के साथ व्यापक आर्थिक और कारोबारी जुड़ाव स्थापित करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती क्रय शक्ति, मजबूत घरेलू खपत और लगातार विकसित होती मांग देश को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बाजार बनाती है।

    सीतारमण ने इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर यानी आईएफएससी गिफ्ट सिटी को भी अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी पहले ही कई विदेशी बैंकों को आकर्षित कर चुकी है और आने वाले समय में अधिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए यहां कारोबार स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

    वित्त मंत्री के मुताबिक, गिफ्ट सिटी का नियामकीय और कर ढांचा सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को भारत के साथ जुड़ने और व्यापक क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए देश को आधार बनाने का अवसर मिल सकता है।

    बीमा क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। अब भारत में बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है। सरकार की इस व्यवस्था से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बीमा बाजार में भागीदारी का दायरा बढ़ा है।

    फिनटेक क्षेत्र को सीतारमण ने भारत की प्रमुख ताकतों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर विकसित हो रहा भारतीय फिनटेक क्षेत्र वैश्विक पूंजी के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है। डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों ने इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाया है।

    इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, मैग्नेट और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे उभरते क्षेत्रों को भी कनाडाई निवेशकों के लिए संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया गया। इन क्षेत्रों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और रणनीतिक विनिर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक बाजारों के लिए भरोसेमंद और लागत प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला के विकल्प उपलब्ध करा सकता है। इससे भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को घरेलू बाजार के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक कारोबारी गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।

    उन्होंने कनाडाई संस्थागत निवेशकों के लिए भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय गतिविधियों के संभावित मंच के रूप में देखने पर जोर दिया। वित्त मंत्री का यह आह्वान भारत और कनाडा के कारोबारी समुदायों के बीच निवेश संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत सरकार की ओर से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में निवेश अवसरों को सामने रखना इस बात को दर्शाता है कि देश वैश्विक पूंजी को अपनी विकास प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दे रहा है। कनाडाई निवेशकों के लिए इन क्षेत्रों में मौजूद अवसर भारत की आर्थिक क्षमता और बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच नए कारोबारी विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं।

  • नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रीमियर और वित्त मंत्री नतालियो डी. व्हीटली से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय एवं आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन, निवेश प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

    नतालियो व्हीटली भारत की यात्रा पर वित्तीय सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के साथ आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में नई दिल्ली के अलावा गिफ्ट सिटी, मुंबई और बेंगलुरु का दौरा भी शामिल है।

    बैठक के दौरान व्हीटली ने भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने वित्तीय सेवाओं के साथ फिनटेक, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, व्यापार, निवेश संवर्धन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

    वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और डिजिटल माध्यमों के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए फिनटेक सहयोग को दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। डिजिटल परिवर्तन के साथ वित्तीय सेवाओं में नवाचार और निवेश के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं। क्षमता निर्माण के जरिए विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने की संभावनाएं भी इस साझेदारी को मजबूत कर सकती हैं।

    निर्मला सीतारमण ने भारत को वित्तीय सेवाओं और निवेश के लिए दुनिया के सबसे बड़े तथा तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया। उन्होंने साझा हित वाले क्षेत्रों में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का स्वागत किया। बैठक में दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।

    गिफ्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर से जुड़े अवसर भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल का गिफ्ट सिटी दौरा वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े संभावित सहयोग को समझने का अवसर प्रदान कर सकता है। मुंबई और बेंगलुरु में होने वाली बातचीत से वित्तीय क्षेत्र और तकनीकी क्षमताओं से जुड़े अन्य अवसरों पर भी चर्चा आगे बढ़ सकती है।

    इस बीच, निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ दोनों देशों की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना तथा वैश्विक आर्थिक प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाना है।

    कनाडा के टोरंटो में सीतारमण कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी। इस दौरान व्यापक आर्थिक विकास, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।

    कनाडा यात्रा के दौरान वित्त मंत्री एक विशेष निवेश राउंडटेबल में भी शामिल होंगी। इसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बातचीत का उद्देश्य नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

    भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में निवेश की संभावनाएं भी चर्चा का हिस्सा रहेंगी। इस तरह ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ हुई बैठक और आगामी विदेश यात्रा, दोनों ही वित्तीय सेवाओं, निवेश और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को विस्तार देने की व्यापक दिशा से जुड़ी हैं।

  • SIP Rule-40 से 40 साल तक 2 करोड़ का लक्ष्य, 21 साल की उम्र में कितनी मासिक SIP से शुरू करें निवेश

    SIP Rule-40 से 40 साल तक 2 करोड़ का लक्ष्य, 21 साल की उम्र में कितनी मासिक SIP से शुरू करें निवेश

    नई दिल्ली । कम उम्र में निवेश शुरू करने वालों के लिए SIP Rule-40 एक ऐसी निवेश रणनीति के तौर पर चर्चा में है, जिसमें नियमित निवेश के साथ हर साल SIP की राशि बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। इस तरीके में 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का फंड तैयार करने का लक्ष्य रखा जाता है। इसके लिए गणना में औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न और हर वर्ष SIP में 10 फीसदी बढ़ोतरी को आधार माना गया है।

    SIP यानी Systematic Investment Plan के जरिए म्यूचुअल फंड में एक तय राशि नियमित अंतराल पर निवेश की जाती है। Rule-40 की अवधारणा में शुरुआत में एक निश्चित मासिक रकम से निवेश शुरू किया जाता है और इसके बाद हर साल SIP की राशि 10 फीसदी बढ़ाई जाती है। इसका उद्देश्य बढ़ती आय के साथ निवेश की क्षमता बढ़ाना और लंबे समय में कंपाउंडिंग का लाभ लेना है।

    इस रणनीति में निवेश शुरू करने की उम्र बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उदाहरण के तौर पर 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए 21 साल की उम्र में शुरुआत करने पर करीब 11,796 रुपये की मासिक SIP की जरूरत बताई गई है। अगर शुरुआत 22 साल की उम्र में होती है तो यह राशि करीब 13,875 रुपये प्रति माह हो जाती है।

    इसी तरह 23 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर करीब 16,370 रुपये, 24 साल की उम्र में करीब 19,379 रुपये और 25 साल की उम्र में लगभग 23,031 रुपये की शुरुआती मासिक SIP की जरूरत पड़ सकती है। इससे स्पष्ट होता है कि निवेश शुरू करने में देरी होने पर शुरुआती निवेश राशि बढ़ती जाती है।

    21 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले व्यक्ति के मामले में इस गणना के अनुसार करीब 19 वर्षों तक निवेश जारी रखना होगा। 10 फीसदी सालाना स्टेप-अप के साथ कुल निवेश लगभग 72.42 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। 12 फीसदी औसत अनुमानित रिटर्न के आधार पर यह राशि बढ़कर करीब 2 करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस गणना में लगभग 1.28 करोड़ रुपये का हिस्सा अनुमानित रिटर्न से जुड़ा हो सकता है।

    इस रणनीति का फायदा खासतौर पर उन युवाओं को हो सकता है जो अपने करियर की शुरुआत में हैं और भविष्य में आय बढ़ने की संभावना रखते हैं। शुरुआत में आय सीमित होने के कारण बड़ी रकम निवेश करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन छोटी SIP से शुरुआत करके हर वर्ष राशि बढ़ाने से निवेश का आकार धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

    हालांकि, 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य निश्चित या गारंटीड रकम नहीं है। 12 फीसदी सालाना रिटर्न केवल अनुमान के तौर पर लिया गया है और बाजार आधारित निवेश में वास्तविक रिटर्न समय के साथ बदल सकता है। इसलिए निवेशक को अपनी आय, खर्च, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।

    SIP Rule-40 का मूल विचार जल्द शुरुआत, नियमित निवेश और बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाने पर आधारित है। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने और बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद अनुशासन कायम रखने से कंपाउंडिंग को अधिक समय मिल सकता है। यही कारण है कि निवेश की शुरुआत की उम्र इस तरह की लंबी अवधि की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • SIP Tips: रोजाना, मंथली या सालाना निवेश में क्या है बेहतर विकल्प, जानिए किस कमाई के लिए कौन सी SIP सही

    SIP Tips: रोजाना, मंथली या सालाना निवेश में क्या है बेहतर विकल्प, जानिए किस कमाई के लिए कौन सी SIP सही

    नई दिल्ली ।म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के बीच सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP काफी लोकप्रिय विकल्प बन चुका है। इसमें निवेशक एक तय रकम को नियमित अंतराल पर म्यूचुअल फंड में लगाता है। आम तौर पर मासिक SIP सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है, लेकिन कई जगह रोजाना और सालाना निवेश के विकल्प भी उपलब्ध होते हैं। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल रहता है कि इन तीनों में से कौन सा तरीका ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

    रोजाना SIP में निवेशक प्रत्येक कारोबारी दिन एक छोटी निर्धारित राशि निवेश करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज 100 रुपये निवेश करता है तो कारोबारी दिनों की संख्या के आधार पर महीने में लगभग दो हजार रुपये से अधिक निवेश हो सकता है। इस तरीके में रकम छोटी-छोटी किश्तों में निवेश होती है और बाजार के अलग-अलग स्तरों पर म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदने का अवसर मिलता है।

    रोजाना निवेश का एक फायदा यह हो सकता है कि निवेशक अपने छोटे-छोटे नियमित कैश फ्लो के अनुसार रकम अलग कर सके। यह तरीका उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जिनकी आमदनी रोजाना या बार-बार प्राप्त होती है। हालांकि, केवल निवेश की आवृत्ति बढ़ाने से ज्यादा रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। रिटर्न पर बाजार की स्थिति, चुनी गई योजना और निवेश की अवधि जैसे कारकों का प्रभाव रहता है।

    मंथली SIP सबसे सामान्य और सुविधाजनक विकल्पों में शामिल है। इसमें निवेशक हर महीने एक निर्धारित तारीख को तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है। उदाहरण के लिए, पांच हजार रुपये की मासिक SIP करने पर एक साल में कुल 60 हजार रुपये का निवेश होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह तरीका सुविधाजनक हो सकता है, क्योंकि आम तौर पर वेतन हर महीने मिलता है और उसी के अनुरूप निवेश की राशि तय की जा सकती है।

    मासिक SIP का एक बड़ा फायदा निवेश में अनुशासन है। बैंक खाते से तय राशि निर्धारित तारीख पर अपने आप निवेश हो सकती है, जिससे हर महीने अलग से निवेश करने का फैसला लेने की जरूरत कम हो जाती है। बाजार में तेजी या गिरावट के बावजूद निवेश जारी रहने से अलग-अलग कीमतों पर यूनिट खरीदने का अवसर मिलता रहता है।

    सालाना SIP में निवेशक साल में एक बार बड़ी रकम निवेश करता है। यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा सालाना बोनस, कारोबारी लाभ या किसी अन्य एकमुश्त भुगतान के रूप में आता है। ऐसे निवेशकों के लिए पूरे साल नियमित रकम अलग रखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए सालाना निवेश उनके कैश फ्लो के अनुरूप बैठ सकता है।

    हालांकि, जिस व्यक्ति के पास हर महीने निवेश करने की क्षमता है, उसके लिए साल में केवल एक बार निवेश करना जरूरी नहीं कि बेहतर विकल्प हो। नियमित मासिक निवेश बाजार में अलग-अलग समय पर निवेश करने का अवसर देता है और एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के मुकाबले निवेश की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बना सकता है।

    यह समझना जरूरी है कि रोजाना, मासिक या सालाना SIP में से कोई भी तरीका अपने आप अधिक रिटर्न की गारंटी नहीं देता। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन होता है और पिछले प्रदर्शन को भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। इसलिए SIP की आवृत्ति चुनते समय निवेशक को अपनी आय, खर्च, उपलब्ध नकदी, वित्तीय लक्ष्य और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को हर महीने नियमित वेतन मिलता है तो मासिक SIP एक सरल विकल्प हो सकती है। रोजाना आय वाले व्यक्ति के लिए दैनिक निवेश कैश फ्लो के अनुकूल हो सकता है, जबकि सालाना बोनस या अनियमित आय पाने वाले व्यक्ति के लिए सालाना निवेश सुविधाजनक हो सकता है। आखिरकार सबसे महत्वपूर्ण बात निवेश की आवृत्ति नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार नियमित निवेश बनाए रखना और वित्तीय लक्ष्य के अनुरूप लंबे समय तक निवेशित रहना है।

  • पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल

    पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल


    नई दिल्ली । 
    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का जापान दौरा सोमवार से शुरू हो गया है। चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने, निवेश के अवसर बढ़ाने और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर रहेगा।

    पीयूष गोयल 27 अगस्त तक जापान में रहेंगे। इस दौरान वह टोक्यो, नागोया और ओसाका का दौरा करेंगे। उनके नेतृत्व में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा है, जिसमें 200 से अधिक बिजनेस प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न प्रमुख औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी शामिल हैं।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और स्टील जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के अलावा ऑटोमोटिव, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े कारोबारी भी शामिल हैं। इससे दौरे के दौरान होने वाली चर्चाओं का दायरा व्यापक रहने की उम्मीद है।

    टोक्यो पहुंचने के बाद गोयल ने जापान की प्रमुख कंपनी सुमितोमो कॉरपोरेशन के प्रेसिडेंट और सीईओ शिंगो उएनो के साथ बैठक की। दोनों पक्षों ने एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन, मोबिलिटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ कंपनी के जुड़ाव को और गहरा करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    बैठक के दौरान भारत में निवेश आधारित आर्थिक विकास और तेजी से विस्तार कर रहे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर रेखांकित किया गया। भारत की औद्योगिक क्षमता और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर रहा।

    गोयल ने मेइजी सेइका फार्मा कंपनी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर तोशियाकी नागासातो से भी मुलाकात की। इस बैठक में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने और भारत में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों का विस्तार करने के अवसरों पर बातचीत हुई।

    भारत का फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम जापानी कंपनियों के लिए बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास के अवसर उपलब्ध कराता है। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    गोयल की जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। जापान भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच तकनीक, निवेश, विनिर्माण तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

    इस दौरे के दौरान कारोबारी बैठकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। 200 से अधिक भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस यात्रा को व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। इससे भारतीय कंपनियों और जापानी उद्योग जगत के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है।

    दौरे का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को आर्थिक स्तर पर और मजबूत करना है। निवेश, तकनीक, उत्पादन और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में आगे बढ़ने से भारत-जापान संबंधों को नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं।

  • भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ा, छह वर्षों में लाइव आईटी क्षमता चार गुना होकर 1.7 गीगावाट पहुंची

    भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ा, छह वर्षों में लाइव आईटी क्षमता चार गुना होकर 1.7 गीगावाट पहुंची

    नई दिल्ली ।भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद सबसे बड़े डेटा सेंटर बाजार के रूप में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता करीब चार गुना बढ़कर 1.7 गीगावाट हो गई है। डेटा सेंटर क्षेत्र में बढ़ती मांग, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और विस्तार की उम्मीद है।

    भारत में डेटा सेंटर परियोजनाओं की एक बड़ी पाइपलाइन भी तैयार हो चुकी है। वर्तमान में करीब 1.3 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है। इसके अलावा लगभग 3.2 गीगावाट क्षमता वाली ऐसी परियोजनाएं भी मौजूद हैं, जिनके लिए जमीन, बिजली और निर्माण से संबंधित जरूरी मंजूरियां हासिल की जा चुकी हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में देश की डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

    डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार में बिजली की उपलब्धता और फाइबर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। भारत में इंटरनेट उपयोग, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा स्टोरेज तथा प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि वैश्विक और घरेलू कंपनियां भारत में बड़े स्तर पर निवेश की योजनाएं बना रही हैं।

    महाराष्ट्र देश का सबसे प्रमुख डेटा सेंटर बाजार बना हुआ है। भारत की कुल लाइव आईटी क्षमता में राज्य की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। निर्माण शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियां प्राप्त कर चुकी परियोजनाओं की सबसे बड़ी पाइपलाइन भी महाराष्ट्र में मौजूद है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पहले से विकसित डिजिटल और बिजली संबंधी बुनियादी ढांचा इस क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    डेटा सेंटर विकास का अगला चरण केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहने वाला है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी कंपनियां बड़े निवेश और नई परियोजनाओं की घोषणाएं कर रही हैं। इन राज्यों में जमीन, बिजली, कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के कारण भविष्य में नई क्षमता विकसित होने की संभावना है।

    घरेलू कारोबारी समूहों ने देश में डेटा सेंटर विकास के लिए करीब 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह घोषित कुल निवेश का लगभग 45 प्रतिशत है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र का विकास केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि घरेलू उद्योग भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार में बड़े निवेश की तैयारी कर रही हैं। गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने मिलकर करीब 84 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। घोषित कुल निवेश का लगभग 95 प्रतिशत बड़े हाइपरस्केल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैंपस से जुड़ा है।

    डेटा सेंटर के विस्तार का सीधा असर बिजली की मांग पर भी पड़ेगा। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली खपत 2025 में करीब 11 टेरावाट-घंटे से बढ़कर 2035 तक 91 टेरावाट-घंटे पहुंचने का अनुमान है। यानी एक दशक में मांग आठ गुना से अधिक बढ़ सकती है।

    बढ़ती बिजली जरूरत के बीच अक्षय ऊर्जा की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। कई बड़ी हाइपरस्केल कंपनियों ने वर्ष 2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य निर्धारित किए हैं। ऐसे में डेटा सेंटर संचालन के लिए सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 2021 से अब तक 7.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है।

  • भारत-ईयू एफटीए से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद, यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को उत्साहित

    भारत-ईयू एफटीए से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद, यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को उत्साहित

    नई दिल्ली ।भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के कारोबार और निवेश के लिए नए अवसर खोल सकता है। फिनलैंड दूतावास के ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी ने कहा कि यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ अधिक गहराई से सहयोग करने को लेकर उत्साहित हैं और समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी होने की उम्मीद कर रही हैं।

    हेरलेवी के मुताबिक भारत और यूरोप के कारोबारी संबंधों के लिए मौजूदा वर्ष महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के बीच व्यापार विस्तार, निवेश और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाएं बढ़ी हैं। यूरोपीय कारोबारी भारतीय बाजार और यहां के उद्योगों के साथ अधिक नजदीकी से काम करने में रुचि दिखा रहे हैं।

    मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच कारोबार को आसान बनाना और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ने की संभावना है। साथ ही भारत और यूरोप के बीच निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ा सहयोग भी मजबूत हो सकता है।

    हेरलेवी ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के संदर्भ में भी भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। बदलते वैश्विक कारोबारी वातावरण में कंपनियां अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में भारत और यूरोपीय देशों के बीच औद्योगिक सहयोग दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।

    फिनलैंड के ट्रेड काउंसलर ने भारत के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में फिनलैंड के अनुभव को भी महत्वपूर्ण बताया। चक्रीय अर्थव्यवस्था में संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल, उत्पादों का लंबे समय तक उपयोग और कचरे को कम करने पर जोर दिया जाता है। इस मॉडल में इस्तेमाल हो चुकी सामग्री को दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश की जाती है।

    उनके अनुसार फिनलैंड और अन्य यूरोपीय देशों ने संसाधनों के पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों के विकास में लंबे समय तक काम किया है। भारत और फिनलैंड की कंपनियों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से संसाधनों की खपत कम करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

    चक्रीय अर्थव्यवस्था का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता। संसाधनों का कम इस्तेमाल करने से कंपनियों की लागत घट सकती है और उत्पादन प्रक्रिया में ऊर्जा तथा पानी की खपत भी कम की जा सकती है। साथ ही नई कच्ची सामग्री पर निर्भरता कम होने से उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को घटाने में मदद मिल सकती है।

    हेरलेवी ने इस बदलाव की शुरुआत उत्पाद के डिजाइन चरण से करने पर जोर दिया। उनके अनुसार कंपनियों को ऐसे उत्पाद तैयार करने चाहिए जिनमें कम सामग्री की जरूरत हो, जिनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सके और जिन्हें इस्तेमाल के बाद आसानी से पुनर्चक्रित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और शुरुआती स्तर पर सही उत्पाद डिजाइन चक्रीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन सकता है। इस दृष्टिकोण से कंपनियां उत्पादन के साथ-साथ उत्पाद के पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखकर काम कर सकती हैं।

    भारत-ईयू एफटीए और टिकाऊ उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से आने वाले समय में दोनों पक्षों के कारोबारी संबंधों को व्यापक आधार मिलने की संभावना है। व्यापार, निवेश, तकनीक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन में साझेदारी बढ़ने से भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी रास्ते खुल सकते हैं।

  • ई20 ईंधन दौर में माइलेज बढ़ाने के लिए किआ की बड़ी योजना, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक एसयूवी करेगी लॉन्च

    ई20 ईंधन दौर में माइलेज बढ़ाने के लिए किआ की बड़ी योजना, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक एसयूवी करेगी लॉन्च


    नई दिल्ली । 
    भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ई20 पेट्रोल के बढ़ते चलन के बीच वाहन निर्माताओं ने गाड़ियों के माइलेज को बेहतर बनाने के लिए रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। ईंधन की बदलती संरचना के कारण उपभोक्ताओं को मिलने वाले माइलेज पर पड़ रहे प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वाहन कंपनियां अब हाइब्रिड तकनीकों पर बड़ा दांव लगा रही हैं। इसी क्रम में किआ मोटर्स ने भारतीय बाजार के लिए अपनी भविष्य की योजनाओं की घोषणा की है, जिसके तहत कंपनी अपनी लोकप्रिय कारों को हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ उतारने की तैयारी कर रही है।

    कंपनी के वार्षिक वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान किआ के शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय बाजार में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार की पुष्टि की। कंपनी की योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में किआ सोनेट और कारेन्स को हाइब्रिड इंजन विकल्प के साथ बाजार में पेश किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कंपनी भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक स्थानीय रूप से विकसित बी-सेगमेंट इलेक्ट्रिक एसयूवी लाने पर भी काम कर रही है।

    कंपनी के रणनीति रोडमैप के तहत वर्ष 2027 से भारतीय बाजार में उपलब्ध लोकप्रिय मॉडलों जैसे सोनेट, कारेन्स और सेल्टॉस के लिए हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल विकल्प चरणबद्ध तरीके से पेश किए जाएंगे। सोनेट कंपनी के सबसे किफायती मॉडलों में से एक है, इसलिए इसके हाइब्रिड संस्करण को मजबूत पावरट्रेन के साथ तैयार किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2028 या 2029 तक इस किफायती एसयूवी को हाइब्रिड तकनीक से लैस करके ग्राहकों के लिए पेश करना है।

    नई पीढ़ी की सोनेट को उन्नत के1 प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाने की संभावना है। यह नया प्लेटफॉर्म न केवल हाइब्रिड पावरट्रेन को सपोर्ट करने में सक्षम है, बल्कि इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स आर्किटेक्चर, ओवर-द-एयर अपडेट और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इसके अलावा इस प्लेटफॉर्म की मदद से वाहन के केबिन के भीतर रियर सीट स्पेस और आराम को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है, जो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।

    हाइब्रिड तकनीक के आने से मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में यात्रा करने वाले वाहन चालकों को बेहतर ईंधन दक्षता मिलेगी। मौजूदा समय में किआ कारेन्स विभिन्न ईंधन विकल्पों जैसे पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल, डीजल और ऑल-इलेक्ट्रिक में उपलब्ध है, जिसे आने वाले समय में हाइब्रिड अवतार देकर और अधिक कुशल बनाने की योजना है। ऑटो विशेषज्ञ मानते हैं कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन से न केवल माइलेज में बढ़ोतरी होगी बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी देखने को मिलेगी।

    ई20 पेट्रोल की उपस्थिति में पारंपरिक इंजनों की माइलेज क्षमता पर पड़ रहे असर को देखते हुए हाइब्रिड वाहन भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकते हैं। किआ द्वारा उठाए गए इन कदमों से स्पष्ट है कि कंपनी भारतीय बाजार में पर्यावरण अनुकूल और लागत प्रभावी ड्राइविंग अनुभव प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।