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  • कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी

    कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार की नई गोबरधन यानी राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार के अनुसार, योजना के जरिए देश में कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाएगा। इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने का अनुमान है।

    सरकार का कहना है कि योजना अगले दस वर्षों में सीबीजी उत्पादन को करीब दस गुना बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही निजी निवेश को आकर्षित करने, जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल और सर्कुलर बायोइकोनॉमी को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इस क्षेत्र से राष्ट्रीय जीडीपी में 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक के योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रोजगार सृजन भी है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से सीबीजी उत्पादन बढ़ने पर लगभग 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। संयंत्रों के संचालन के अलावा कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, जैविक खाद उत्पादन और कचरा प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ने की संभावना है।

    गोबरधन योजना के तहत तैयार होने वाली स्वदेशी गैस जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल की जा सकेगी। अनुमान है कि इसके जरिए करीब एक करोड़ मीट्रिक टन जीवाश्म ईंधन की खपत को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इससे ऊर्जा आयात पर दबाव कम होने के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

    जैविक कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने पर 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके अलावा करीब 250 मिलियन मीट्रिक टन जैविक उर्वरक के उत्पादन का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।

    सीबीजी उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गैस खरीद की गारंटी से जुड़ा ढांचा तैयार किया है। सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित कीमत निर्धारित की गई है। परियोजनाओं को क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता देने का प्रावधान है। एमएसएमई इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ भी दिया जाएगा।

    सीबीजी रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में बड़े बदलाव के बिना शामिल किया जा सकता है। इससे परिवहन, घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बढ़ती गैस मांग को घरेलू उत्पादन से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के जरिए सीबीजी मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। ये लक्ष्य परिवहन में सीएनजी और घरेलू उपयोग में पीएनजी श्रेणियों पर लागू होंगे।

    देश में सीबीजी क्षेत्र का मौजूदा आधार भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 1,908 सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 217 संयंत्र चालू हैं, जबकि 339 निर्माणाधीन हैं। चालू संयंत्र प्रतिदिन करीब 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली गोबरधन योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य सीबीजी को देश के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है। सरकार की योजना कचरे को संसाधन में बदलकर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, निवेश और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने की है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत

    सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत


    नई दिल्ली ।
    घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम ₹2,735 बढ़कर ₹1,48,361 पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत ₹931 की बढ़त के साथ ₹2,25,493 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। अगस्त महीने की शुरुआत से अब तक केवल छह दिनों के भीतर सोना ₹5,501 और चांदी ₹7,198 महंगी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आभूषण खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में भाव कुछ कम रहने के बावजूद रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बने हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरे देश में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल कायम है।

    कैरेट के आधार पर भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,361, 22 कैरेट का ₹1,35,899, 18 कैरेट का ₹1,11,271 और 14 कैरेट सोने का भाव ₹86,791 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। शुद्धता के अनुसार कीमतों में यह अंतर उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और बजट के अनुरूप विकल्प चुनने का अवसर देता है।

    यदि पूरे वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹15 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹1.48 लाख के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि चांदी की कीमत साल की शुरुआत की तुलना में अभी भी कुछ नीचे बनी हुई है। वर्ष के दौरान दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर भी छुए थे, जिसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर भी सोना और चांदी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि निवेश एकमुश्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जाए, जिससे कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। उनका अनुमान है कि यदि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष के अंत तक सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।

    जो निवेशक भौतिक सोना या चांदी खरीदने के बजाय बाजार आधारित विकल्प चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड और सिल्वर ETF भी एक प्रभावी माध्यम माने जा रहे हैं। इन योजनाओं में निवेश शेयर बाजार की तरह डीमैट खाते के माध्यम से किया जा सकता है। इसमें वास्तविक धातु की डिलीवरी नहीं मिलती, बल्कि निवेशक को उस समय के बाजार मूल्य के अनुसार लाभ या हानि प्राप्त होती है। कम राशि से निवेश शुरू करने की सुविधा के कारण यह विकल्प छोटे निवेशकों के बीच भी लगातार लोकप्रिय हो रहा है।

  • ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के लिए मुम्बई में प्राप्त हुए 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के लिए मुम्बई में प्राप्त हुए 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव


    भोपाल।
    केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में मंगलवार को मुम्बई में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के लिए 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स ने 700 करोड़, अनंत सिस्टम्स ने 400 करोड़, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड ने 200 करोड़, वीएनटी ने 150 करोड़ और टेसकॉम ने 100 करोड़ के निवेस का प्रस्ताव दिया है।

    यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दी। यह कॉन्फ्रेंस ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफेक्चरिंग जोन में उद्योगपति और निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए आयोजित की थी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार ने मिलकर ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन स्थापित किया है। गत ढाई वर्ष में राज्य सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों- नियमों के कारण मध्य प्रदेश में लगभग हर क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ है। यह क्रम निरंतर जारी है। पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये अनेक निवेश अनुकूल और आकर्षक नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों से मध्य प्रदेश को देश-विदेश के निवेशकों का अभूतपूर्व विश्वास प्राप्त हुआ है और बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव मिले हैं।

    उन्होंने कहा कि उद्योग जगत का यह विश्वास प्रदेश की पारदर्शी नीतियों और सुशासन का सबसे बड़ा प्रमाण है। मध्य प्रदेश सभी सेक्टर्स में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। देश-दुनिया के निवेशकों का भरोसा हमारे साथ है। भारत और दुनिया की सबसे सस्ती बिजली मध्य प्रदेश में मिलती है। औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए कौशल युक्त श्रमिक मध्य प्रदेश में उपलब्ध हैं। अगर रोजगार आधारित उद्योग शुरू किये जाएं तो सरकार 5 से 10 वर्ष तक वेतन में भी सहयोग प्रदान करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेक इन एमपी’ और ‘फेथ इन एमपी’ के विश्वास पर पिछले दिनों दिल्ली में हुई पहली राउंड टेबल मीटिंग में 3 हजार 500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जिसके फलस्वरूप 14 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह केंद्र और राज्य सरकार के साथ पहली इन्वेस्टर राउंड टेबल मिटिंग थी, जिसमें अभूतपूर्व सफलता मिली। मध्य प्रदेश सरकार ने देश के अलग-अलग शहरों में निवेश आकर्षित करने के लिए रोड-शो आयोजित किए हैं। मध्य प्रदेश सभी औद्योगिक घरानों और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। एक बार जो यहां आकर व्यापार-व्यवसाय करता है, यहां की निवेश उन्मुख सुविधाओं और शासन-प्रशासन की सुविधाओं से प्रभावित होकर मध्य प्रदेश का ही बनकर रह जाता है।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण कोई किसी भी दिशा में जाएं, मध्य प्रदेश से जरूर गुजरता है। मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था सबसे बेहतर है। यहां श्रमिकों की समस्या नहीं है। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता के बाद अगले वर्ष फिर जीआईएस-2027 का आयोजन होने जा रहा है। नर्मदापुरम जिले में बाबई-मोहासा में इलेक्ट्रिकल उपकरण पार्क में भूमि-पूजन के दिन ही 1000 एकड़ क्षेत्र में भूखंड आवंटित हो गए। धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल सेक्टर का देश का सबसे बड़ा क्लस्टर है। यहां भी भूमि-पूजन के होते ही सभी भूखंड आवंटित हो गए। लगभग 170 एकड़ क्षेत्र में प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किये जाना वाला टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनकर उभरेगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दूरसंचार विनिर्माण, अनुसंधान, डिजाइन, टेस्टिंग एवं इनोवेशन को एक ही परिसर में विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन एक नई और विशेष सौगात है, जो नई दिल्ली-एनसीआर से ज्यादा दूर नहीं है। ग्वालियर शहर को सिंधिया राजघराने का भी सहयोग मिलता रहा है। बदलते दौर में राज्यों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाते हुए मध्य प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। तीन राज्यों के साथ नदी जोड़ो परियोजना के अनुबंध करके जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। राजस्थान के साथ करीब 40 साल पुराने जल बंटवारे के विवाद को आपसी सहमति से हल करते हुए पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना पर हम आगे बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार सभी क्षेत्रों में भारत सरकार के सहयोग से कार्य करते हुए प्रदेश के तीव्र विकास के लिए कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्य प्रदेश में एमएसएमई, विनिर्माण, इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अनेक क्षेत्रों में तेज़ी से निवेश बढ़ रहा है। ‘मेक इन एमपी’ और ‘मेड इन एमपी’ जैसे अभियान उद्योग जगत का व्यापक विश्वास अर्जित करने में सफल रहे हैं। दिल्ली में आयोजित पहले राउंड टेबल मीटिंग सहित विभिन्न निवेशक बैठकों और रोड-शो के माध्यम से प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन की संभावनाएं बनी हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता केवल उसकी भौगोलिक स्थिति नहीं, बल्कि निवेशकों के प्रति सरकार की साझेदारी की भावना है। राज्य सरकार उद्योगों को केवल स्थापित नहीं कराती, बल्कि उनके दीर्घकालिक विकास और विस्तार में भी सहभागी बनती है। यही कारण है कि प्रदेश के औद्योगिक पार्कों और क्लस्टर्स को निवेशकों का लगातार उत्कृष्ट प्रतिसाद मिल रहा है। साथ ही भूमि आवंटन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय गति आई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन दूरसंचार उद्योग के लिए आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक स्तर की विनिर्माण सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इससे निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा भारत की डिजिटल और औद्योगिक प्रगति को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे मध्य प्रदेश को अपने उद्योगों के विस्तार का विश्वसनीय भागीदार बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्य प्रदेश में निवेश करने का यही सबसे उपयुक्त समय है। मध्य प्रदेश आइए, हमारे विकास के सहभागी बनिए और विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाइए।

  • रिकॉर्ड स्तर से नरम पड़े सोने के दाम, छोटे निवेशकों में नियमित डिजिटल गोल्ड खरीदारी का बढ़ा रुझान

    रिकॉर्ड स्तर से नरम पड़े सोने के दाम, छोटे निवेशकों में नियमित डिजिटल गोल्ड खरीदारी का बढ़ा रुझान

    नई दिल्ली । सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से नीचे आने के बावजूद लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। इसी कारण बड़ी राशि एकमुश्त निवेश करने के बजाय अब बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक छोटी-छोटी रकम के नियमित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोने में निवेश का चलन तेजी से बढ़ रहा है और इसे बदलते बाजार माहौल में अपेक्षाकृत संतुलित विकल्प माना जा रहा है।

    घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव मंगलवार को करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। यह कीमत इस वर्ष जनवरी के अंत में दर्ज हुए लगभग 1.78 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है। उस समय वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश की बढ़ी मांग के कारण सोने ने ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की थी। इसके बाद बाजार में कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों की संभावित दिशा, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सीधा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने के बाद भी निवेशकों की नजर आगामी मौद्रिक नीति पर बनी हुई है। इसी वजह से सोने के बाजार में अनिश्चितता का माहौल कायम है।

    बाजार विश्लेषकों ने भले ही निकट अवधि के लिए अपने अनुमान में कुछ संशोधन किया हो, लेकिन मध्यम अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अभी भी बरकरार है। इसका प्रमुख कारण विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की मांग को माना जा रहा है। हालांकि मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड समय-समय पर कीमतों पर दबाव भी बना सकती हैं।

    ऐसे वातावरण में निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर खरीदारी की रहती है। यदि कोई निवेशक एक साथ बड़ी राशि लगाता है तो ऊंचे भाव पर खरीदारी का जोखिम रहता है, जबकि अधिक इंतजार करने पर कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। इस स्थिति में नियमित अंतराल पर छोटी राशि का निवेश अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी का अवसर देता है और औसत लागत को संतुलित करने में मदद करता है।

    डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म इसी रणनीति को आसान बना रहे हैं। निवेशक बेहद कम राशि से भी 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं और नियमित निवेश के लिए स्वचालित योजना का लाभ उठा सकते हैं। इससे छोटे निवेशकों को अपनी आय और बचत के अनुसार धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने की सुविधा मिल रही है।

    डिजिटल गोल्ड में खरीदे गए सोने के बराबर भौतिक सोना सुरक्षित वॉल्ट में संरक्षित रखा जाता है। निवेशक जरूरत पड़ने पर अपनी होल्डिंग बाजार भाव पर बेच सकते हैं या निर्धारित शर्तों के अनुसार उसे प्रमाणित भौतिक सोने में बदलकर घर भी मंगवा सकते हैं। इस सुविधा ने डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बना दिया है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सोने को पूरे निवेश का आधार नहीं बल्कि विविधीकृत निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा माना जाना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है, लेकिन नियमित और छोटी राशि के निवेश की रणनीति जोखिम को संतुलित करने का एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रही है। इसी कारण बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक अब सही समय का इंतजार करने के बजाय अनुशासित और नियमित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    नई दिल्ली ।भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को मजबूत करना है।

    एसोचैम के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से विभिन्न देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश के अवसरों की पहचान, नई तकनीकों के उपयोग और संयुक्त कारोबारी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    बिजनेस फ्रांस के साथ हुए समझौते में भारत और फ्रांस की कंपनियों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दोनों संस्थाएं तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और व्यापारिक आयोजनों के संयुक्त संचालन में सहयोग करेंगी।

    समझौते के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और अन्य कारोबारी गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के उद्यमों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अरब देशों के साथ हुई ये साझेदारियां मजबूत संस्थागत संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कंपनियों को नए बाजार तलाशने, निवेश बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

    बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने इस साझेदारी को भारत और फ्रांस के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता भारत और अरब क्षेत्र के बीच व्यापारिक संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके जरिए निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

    इस समझौते के तहत व्यापारिक सूचनाओं का साझा उपयोग, निवेश संबंधी अवसरों की पहचान, संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां तेजी से बदल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के समझौते भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति

    सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर विदेशी बाजारों की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के संकेत मौजूद हैं इसलिए कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली थी लेकिन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा अभी भी भारतीय बाजार को सहारा दे रहा है। अगर विदेशी बाजारों से अच्छे संकेत मिलते हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार दबाव में भी आ सकता है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी बाजार को ऊपर ले जाने में मदद कर सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर अमेरिकी बाजार और डॉलर की चाल का असर देखने को मिल सकता है। ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े और इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों की रुचि बढ़ा सकती हैं। फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर परिणाम देने वाली कंपनियों में दबाव बन सकता है। ऐसे में केवल अफवाहों के आधार पर निवेश करने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश आता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में होने वाले बदलाव का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा।

    जानकारों का मानना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसलिए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वालों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाले उतार चढ़ाव से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में मिश्रित लेकिन सक्रिय कारोबार देखने को मिल सकता है। वैश्विक संकेत यदि अनुकूल रहे तो बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर के चलते दबाव भी बन सकता है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य बनाए रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए और केवल विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही निवेश करना चाहिए।

  • शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

    शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल


    नई दिल्ली । 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों वैश्विक बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेगी। ऐसे में बाजार खुलने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता बढ़ती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों को हर खबर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    इन दिनों कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर होंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार को मजबूती मिलती है जबकि बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती या कमजोरी और रुपये की स्थिति भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तेजी या गिरावट में भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। जिन लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है उन्हें एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    30 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई नए अवसर लेकर आ सकता है लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी होगा। सही जानकारी मजबूत रिसर्च और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है।

  • कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    नई दिल्ली । भारतीय बुलियन और सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वर्ष की शुरुआत में सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद अब सोने के दामों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रिकॉर्ड स्तर से करीब 37 हजार रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या यह नए निवेश का सही समय है या अभी कीमतों में और सुधार देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक बाजार के रुझानों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण सोने की वैश्विक दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जनवरी महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब घटकर करीब 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इसी के प्रभाव से भारतीय बाजार में भी कीमतें एक लाख अस्सी हजार रुपये के पीक स्तर से गिरकर एक लाख तैंतालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में इस नरमी का मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां हैं। अमेरिका में महंगाई पर नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही कड़ी मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर होने के कारण निवेशक फिक्स्ड रिटर्न देने वाले अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि सोना कोई प्रत्यक्ष ब्याज या लाभांश प्रदान नहीं करता, इसलिए उच्च ब्याज दर के दौर में इसकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

    बाजार के दीर्घकालिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि सोने ने ऐतिहासिक रूप से निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न दिया है। पिछले तीन दशकों के दौरान इस पीली धातु के मूल्यों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। यद्यपि अल्पकालिक अवधि में भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक नीतियों के कारण इसमें बड़े उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से इसे हमेशा से एक मजबूत परिसंपत्ति माना जाता रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से किस्तों में खरीदारी करना अधिक जोखिम-रहित रणनीति हो सकती है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार के रुझानों और नीतिगत निर्णयों के आधार पर कीमतों में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • 18 साल पहले अधूरा रह गया सुनील शेट्टी का आईपीएल सपना, बोले- आर्थिक सहयोग मिलता तो आज मेरी भी होती टीम

    18 साल पहले अधूरा रह गया सुनील शेट्टी का आईपीएल सपना, बोले- आर्थिक सहयोग मिलता तो आज मेरी भी होती टीम


    नई दिल्ली । अभिनेता सुनील शेट्टी ने इंडियन प्रीमियर लीग के शुरुआती दौर से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2008 में वह भी आईपीएल टीम खरीदने की इच्छा रखते थे, लेकिन पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय उन्हें सही निवेशक और वित्तीय साझेदार मिल जाते तो वह भी लीग की किसी फ्रेंचाइजी के मालिक बन सकते थे। उनके इस खुलासे ने आईपीएल के शुरुआती दौर की कारोबारी परिस्थितियों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

    सुनील शेट्टी ने बताया कि आईपीएल की शुरुआत के समय आज जैसी निवेश की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। वर्तमान में बड़े निवेशक और फंडिंग पार्टनर खेल और मनोरंजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए आसानी से आगे आ जाते हैं, लेकिन उस दौर में इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं था। यही वजह रही कि चाहने के बावजूद वह अपनी योजना को अमल में नहीं ला सके।

    उन्होंने कहा कि उस समय अकेले इतनी बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी उठाना संभव नहीं था। यदि किसी मजबूत निवेशक का साथ मिल जाता तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। उनके अनुसार उस दौर में आईपीएल जैसी नई लीग में निवेश को लेकर भी लोगों के मन में काफी अनिश्चितता थी, जबकि आज यह दुनिया की सबसे सफल क्रिकेट लीगों में शामिल है और इसकी फ्रेंचाइजी का मूल्य कई गुना बढ़ चुका है।

    बातचीत के दौरान सुनील शेट्टी ने अभिनेता शाहरुख खान की व्यावसायिक सोच की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान ने सही समय पर सही निर्णय लिया और उपयुक्त साझेदारों के साथ मिलकर कोलकाता नाइट राइडर्स फ्रेंचाइजी में निवेश किया। उनके अनुसार दूरदर्शिता और सही समय पर लिया गया फैसला किसी भी बड़े व्यवसाय की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शाहरुख ने अपने करियर में जिस भी क्षेत्र में कदम रखा, वहां पूरी तैयारी और स्पष्ट सोच के साथ आगे बढ़े।

    सुनील शेट्टी लंबे समय से क्रिकेट के बड़े प्रशंसक रहे हैं और खेल से उनका जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों पर क्रिकेट के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया है। उनका मानना है कि खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और टीमवर्क की सीख भी देता है। यही कारण था कि वह आईपीएल जैसी प्रतिष्ठित लीग का हिस्सा बनना चाहते थे।

    अभिनय के मोर्चे पर भी सुनील शेट्टी लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में वह मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ में नजर आए, जिसमें कई प्रमुख कलाकारों ने साथ काम किया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त की। इसके साथ ही सुनील शेट्टी आने वाले समय में भी विभिन्न फिल्मों और नए प्रोजेक्ट्स के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करते नजर आएंगे।

    सुनील शेट्टी का यह खुलासा इस बात की याद दिलाता है कि बड़े अवसर केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि सही समय, मजबूत आर्थिक सहयोग और दूरदर्शी फैसलों से भी जुड़े होते हैं। आईपीएल की शुरुआती यात्रा में जो सपना अधूरा रह गया, वह आज भारतीय खेल और मनोरंजन उद्योग के विकास की एक दिलचस्प कहानी बन चुका है।

  • टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के कारोबारी माहौल और बदलते वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर बनी हुई है। इसी क्रम में बाजार विशेषज्ञों ने कई चर्चित शेयरों पर अपनी रणनीति साझा की है। उनके अनुसार, मेटल, बैंकिंग, ज्वेलरी और उपभोक्ता क्षेत्र के कुछ शेयर आने वाले समय में निवेशकों के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्तरों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।

    बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।