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  • यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा, नीतियों और बुनियादी ढांचे पर गिनाईं उपलब्धियां

    यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा, नीतियों और बुनियादी ढांचे पर गिनाईं उपलब्धियां

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के प्रमुख उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ हुई राउंड टेबल मीटिंग में राज्य में निवेश की संभावनाओं को सामने रखा। यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से उत्तर प्रदेश में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेश की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी और औद्योगिक वातावरण के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। उनके अनुसार इन सुधारों के कारण राज्य में कारोबार के लिए परिस्थितियां पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हुई हैं। उन्होंने निवेशकों के सामने प्रदेश में उपलब्ध अवसरों और सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को भी रखा।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने वाली कंपनियों को सरकारी स्तर पर जरूरी सहयोग दिया जाएगा। निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर देने की बात उन्होंने कही। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को भरोसा दिया कि निवेशकों की व्यावहारिक जरूरतों और सामने आने वाली समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा।

    राउंड टेबल बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से रखे गए सुझावों और अपेक्षाओं को भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निवेशकों द्वारा उठाए गए विषयों पर सरकार की टीम ध्यान दे रही है। जिन क्षेत्रों में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आएंगी, वहां समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के लिए व्यापक मानव संसाधन उपलब्ध है। सरकार युवाओं को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। बेहतर संपर्क व्यवस्था के साथ कुशल मानव संसाधन और कारोबारी माहौल तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में लगातार सुधार से निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करना और उसका विस्तार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार और औद्योगिक वातावरण को मजबूत करने के साथ निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    इन्वेस्टमेंट मीट को मुख्यमंत्री ने सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार ऐसे आयोजनों से निवेशकों की वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। साथ ही उद्योग प्रतिनिधियों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध कारोबारी अवसरों, आधारभूत सुविधाओं और नीतिगत सहयोग की जानकारी भी मिलती है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश में प्रमुख उद्योग समूहों की बढ़ती रुचि से आने वाले समय में नए निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर अपनी प्राथमिकता में बदलाव करते हुए अब केवल मंजूरी देने के बजाय उन्हें समय पर पूरा कराने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू कराने पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि किसी परियोजना की वास्तविक सफलता उसकी घोषणा या स्वीकृति से नहीं, बल्कि जमीन पर उसके क्रियान्वयन और आर्थिक गतिविधियों में बदलने से तय होती है।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास की शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राज्यों से भूमि उपलब्धता, परिवहन संपर्क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं, वैधानिक मंजूरियों तथा परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों से जुड़ी बाधाओं को तेजी से दूर करने पर जोर दिया गया।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन, सड़क और परिवहन संपर्क, आवश्यक उपयोगिताओं तथा नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी अड़चनों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से समेकित योजना बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल भूमि आवंटन व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    सरकार की योजना औद्योगिक विकास को केवल फैक्टरियों और उत्पादन इकाइयों तक सीमित रखने की नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इससे उद्योगों के आसपास एक ऐसा समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश है, जिसमें कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।

    केंद्र सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, राज्यों को सहायता और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बेहतर ऋण सुविधा के माध्यम से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कर और सीमा शुल्क से जुड़े उपायों के जरिए देश में विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़कर समेकित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक नोड्स की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर दिया। उनका कहना है कि वैश्विक निवेश के अवसरों को आकर्षित करने के लिए परियोजनाओं को निवेशकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

    मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्री, श्रमिक आवास और आर्थिक-सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार औद्योगिक व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया।

    पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि जलमार्गों को औद्योगिक विकास की रीढ़ के रूप में विकसित करने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में भी बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया।

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने परियोजना एसपीवी को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार मिलने से औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सकेगा। सरकार का नया फोकस स्पष्ट रूप से मंजूरी से आगे बढ़कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उन्हें वास्तविक आर्थिक गतिविधि में बदलने पर केंद्रित है।

  • निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च

    निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च


    भोपाल । मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मोहन सरकार ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट NICDIT की तीसरी एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में औद्योगिक विस्तार का रोडमैप सामने रखा। केंद्र सरकार की भव्य यानी BHAVYA योजना के तहत मध्य प्रदेश में 11 नए आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं पर करीब 8144.35 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इसके जरिए 9 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।

    सरकार का जोर केवल नए उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर भी है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को रणनीतिक रूप से अलग अलग शहरों और क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा ताकि रोजगार और निवेश के अवसर कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहें। इन पार्कों में प्लग एंड प्ले मॉडल के तहत कंपनियों को पहले से तैयार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि निवेश करने वाली कंपनियों को जमीन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी शुरुआती अड़चनों को कम करने में मदद मिलेगी और वे अपेक्षाकृत तेजी से उत्पादन या अपनी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकेंगी।

    प्रस्तावित 11 औद्योगिक पार्क उज्जैन के अवंतिका इंडस्ट्रियल सेंटर धार के भेंसोला देवास और शाजापुर के पिपलरावांन पालीकालन रतलाम के पलसोड़ी सीहोर के आष्टा इंडस्ट्रियल क्लस्टर सागर के मसवासी ग्रांट गुना के चैनपुरा ग्वालियर के मोहना जबलपुर के धरमपुरा कटनी के सिमरा और रीवा के शिवसागर में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन औद्योगिक क्षेत्रों के जरिए अलग अलग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है।

    धार के भेंसोला में प्रस्तावित पार्क को खास तौर पर टेक्सटाइल सेक्टर से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यह क्षेत्र पहले से मौजूद पीएम मित्रा पार्क के विस्तार के रूप में काम करेगा। इसके अलावा दूसरे औद्योगिक पार्कों में फार्मा ऑटोमोबाइल रिन्यूएबल एनर्जी सेमीकंडक्टर और आईटी एवं आईटीईएस जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की योजना है। इससे प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों के साथ नए दौर की तकनीक आधारित इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    औद्योगिक विकास के साथ सरकार ने महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी डे केयर सेंटर स्वास्थ्य सुविधाएं आधुनिक कैंटीन और विशेष हॉस्टल जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल तैयार करना है ताकि उद्योगों में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।

    नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मध्य प्रदेश के औद्योगिक विस्तार और निवेश को लेकर प्रस्तुत किए गए विजन पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से इन परियोजनाओं को गति मिलेगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश में नए उद्योग निवेश और रोजगार के बड़े अवसर तैयार हो सकते हैं।

  • भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सोमवार को सैन फ्रांसिस्को पहुंच गए। उनके साथ राज्य का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी अमेरिका पहुंचा है। यह दौरा गुजरात में विदेशी निवेश आकर्षित करने और जनवरी 2027 में प्रस्तावित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर गुजराती समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद पटेल अपने अमेरिकी कार्यक्रमों की शुरुआत सैन फ्रांसिस्को में गुजराती समुदाय के सदस्यों के साथ बैठक से करेंगे। इस दौरान गुजरात के आर्थिक विकास, निवेश की संभावनाओं और राज्य के साथ वैश्विक कारोबारी समुदाय के संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा 17 से 24 अगस्त तक अमेरिका और कनाडा में चलेगा। अमेरिकी चरण के दौरान सैन फ्रांसिस्को के अलावा वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में भी निवेशकों, उद्योग संगठनों, तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल कनाडा के टोरंटो जाएगा।

    दौरे के दौरान राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और आमने-सामने की कारोबारी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में गुजरात को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य में विदेशी कंपनियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से विनिर्माण, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर रहने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री के साथ गुजरात सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी दौरे पर हैं। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एम.के. दास, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. नटराजन, उद्योग एवं खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा, प्रधान सचिव संजीव कुमार और मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. विक्रांत पांडे शामिल हैं।

    इस यात्रा में गुजरात के व्यापार और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है। उद्योग प्रतिनिधिमंडल में 22 कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें विनिर्माण, केमिकल, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हैं। इससे सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ उद्योग जगत की सीधी भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य की निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनवरी 2027 में होने वाले अगले संस्करण से पहले गुजरात सरकार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    बताया जा रहा है कि 25 से अधिक वर्षों के बाद गुजरात के किसी मौजूदा मुख्यमंत्री का यह पहला आधिकारिक अमेरिका दौरा है। ऐसे में इस यात्रा को राज्य सरकार की वैश्विक निवेश पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    गुजरात सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश के साथ-साथ राज्य के उद्योगों को वैश्विक कारोबारी नेटवर्क से जोड़ना भी है। अमेरिका और कनाडा में होने वाली बैठकों के दौरान संभावित निवेश, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और गुजरात में नई परियोजनाओं की संभावनाओं पर बातचीत होगी।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब राज्य सरकार वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अगले संस्करण की तैयारियों को गति दे रही है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ शुरुआती बातचीत से संभावित भागीदारी और निवेश प्रस्तावों को समिट से पहले आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इससे गुजरात की औद्योगिक और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में भी मदद मिलने की संभावना है।

  • एंथ्रोपिक CEO की पत्नी के एपस्टीन से कारोबारी संपर्क का दावा, ईमेल में निवेश मदद मांगने की जानकारी सामने आई

    एंथ्रोपिक CEO की पत्नी के एपस्टीन से कारोबारी संपर्क का दावा, ईमेल में निवेश मदद मांगने की जानकारी सामने आई


    नई दिल्ली ।
    एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई की पत्नी और उनकी करीबी रणनीतिक सलाहकार केमी क्लार्क का नाम जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्लार्क ने अपनी कंपनी में निवेश हासिल करने के उद्देश्य से एपस्टीन से संपर्क किया था। इस संबंध में ईमेल संवाद का हवाला दिया जा रहा है, जिनके सामने आने के बाद दोनों के बीच कारोबारी संपर्क को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    बताया गया है कि यह संपर्क उस समय हुआ जब क्लार्क अपनी कंपनी के लिए निवेश और कारोबारी अवसर तलाश रही थीं। उन्होंने अपनी कंपनी को महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नई तरह की एडल्ट एंटरटेनमेंट कंपनी के रूप में पेश किया था। कथित ईमेल संवाद में कंपनी के लिए आवश्यक धनराशि से संबंधित जानकारी भी एपस्टीन के साथ साझा किए जाने की बात सामने आई है।

    क्लार्क का एपस्टीन से परिचय लेखक और साहित्यिक एजेंट जॉन ब्रॉकमैन के माध्यम से होने की जानकारी दी गई है। मार्च 2011 में ब्रॉकमैन ने क्लार्क और एपस्टीन के बीच मुलाकात कराने की पहल की थी। उस समय तक एपस्टीन का नाम यौन अपराधों से जुड़े मामले में सामने आ चुका था और 2008 में उसे यौन अपराध तथा वेश्यावृत्ति के लिए लोगों को उकसाने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया जा चुका था।

    दस्तावेजों से जुड़े विवरण के अनुसार, ब्रॉकमैन ने क्लार्क और उनकी कारोबारी साझेदार मिशेल कैपोसेफालो के साथ एपस्टीन की मुलाकात का सुझाव दिया था। इसके बाद क्लार्क की ओर से जवाब भेजे जाने और शाम को एपस्टीन के साथ डिनर करने की इच्छा जताए जाने का उल्लेख किया गया है।

    अगले दिन हुए कथित ईमेल संवाद में क्लार्क ने अपनी कंपनी के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता की जानकारी एपस्टीन को भेजी। उन्होंने पिछली शाम की मुलाकात का उल्लेख करते हुए उसके लिए धन्यवाद भी दिया था। इसके बाद दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर ईमेल के जरिए बातचीत होने की जानकारी सामने आई है।

    केमी क्लार्क का नाम डारियो अमोडेई के पेशेवर जीवन से भी जुड़ा रहा है। जानकारी के अनुसार, जब अमोडेई 2016 में ओपनएआई से जुड़े थे, तब क्लार्क उनकी रणनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर रही थीं। बाद में दोनों ने 2022 में विवाह किया। हालांकि, क्लार्क आधिकारिक तौर पर एंथ्रोपिक की कर्मचारी नहीं हैं।

    इसके बावजूद सार्वजनिक और कारोबारी आयोजनों में वह अमोडेई के साथ नजर आती रही हैं। बड़े निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी का उल्लेख किया जाता रहा है। दावोस और अमेरिका के सन वैली में आयोजित होने वाले बड़े कारोबारी आयोजनों में भी उनकी भागीदारी की जानकारी सामने आई है।

    इस वर्ष नई दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान भी क्लार्क अपने पति के साथ भारत आई थीं। एंथ्रोपिक के नेतृत्व और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अमोडेई की भूमिका के कारण उनके परिवार और पेशेवर नेटवर्क से जुड़े किसी भी पुराने कारोबारी संपर्क पर स्वाभाविक रूप से ध्यान जाता है।

    हालांकि, एपस्टीन से जुड़े किसी व्यक्ति के साथ संपर्क या ईमेल संवाद अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। सामने आई जानकारी मुख्य रूप से कथित कारोबारी संपर्क, निवेश की संभावनाओं और ईमेल संवाद से संबंधित है। किसी व्यक्ति पर आपराधिक आरोप तय करने के लिए अलग और पुष्ट प्रमाण आवश्यक होते हैं।

    एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में अलग-अलग लोगों के नाम और संपर्क सामने आने के बाद कई पुराने कारोबारी और सामाजिक संबंधों की दोबारा चर्चा हो रही है। केमी क्लार्क से जुड़ा मामला भी इसी व्यापक संदर्भ में सामने आया है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में मुख्य सवाल यह है कि उस समय प्रस्तावित कारोबारी संपर्क किस स्तर तक आगे बढ़ा और क्या निवेश संबंधी कोई वास्तविक समझौता हुआ था।

  • भारत में वित्त वर्ष 2027 में 95 अरब डॉलर तक आ सकता है पूंजी प्रवाह, मजबूत एफसीएनआर निवेश से भुगतान संतुलन होगा बेहतर

    भारत में वित्त वर्ष 2027 में 95 अरब डॉलर तक आ सकता है पूंजी प्रवाह, मजबूत एफसीएनआर निवेश से भुगतान संतुलन होगा बेहतर

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में बाहरी वित्तीय मोर्चे पर राहत की उम्मीद बढ़ गई है। मजबूत फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक यानी एफसीएनआर (बी) जमा प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए किए गए नीतिगत उपायों के चलते देश में 90 से 95 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह आने का अनुमान है। इससे भारत की बाहरी स्थिति मजबूत होने के साथ भुगतान संतुलन में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

    एक आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट्स करीब 64 अरब डॉलर के अधिशेष में रह सकता है। यह अनुमान पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2026 में भारत का भुगतान संतुलन 23.6 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा था, जबकि वित्त वर्ष 2025 में करीब 5 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया था।

    अनुमान के मुताबिक एफसीएनआर (बी) के जरिए करीब 80 अरब डॉलर का प्रवाह हो सकता है। इसके अलावा बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा में बाहरी स्रोतों से मिलने वाली पूंजी से 10 से 15 अरब डॉलर अतिरिक्त आने की संभावना है। इन दोनों माध्यमों से आने वाले धन से देश के पूंजी खाते की स्थिति में भी बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।

    पूंजी खाते का अधिशेष वित्त वर्ष 2027 में करीब 108 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह केवल लगभग 2 अरब डॉलर रहा था। यदि यह अनुमान वास्तविक प्रवाह में बदलता है तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, वित्तीय स्थिरता और बाहरी भुगतान क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

    विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए जून 2026 में घोषित नीतिगत उपायों का शुरुआती असर भी दिखाई दे रहा है। एफसीएनआर (बी) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा में बाहरी उधारी के लिए रियायती स्वैप व्यवस्था शुरू किए जाने के बाद विदेशी निवेशकों और बैंकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

    5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच इन उपायों के माध्यम से कुल 40.8 अरब डॉलर की पूंजी आकर्षित होने का अनुमान है। इसमें एफसीएनआर (बी) जमा का हिस्सा 36.7 अरब डॉलर रहा, जबकि बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा आधारित बाहरी उधारी से करीब 4.1 अरब डॉलर आए।

    एफसीएनआर जमा को आकर्षक बनाने में ब्याज दरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़े बैंक फिलहाल एफसीएनआर जमा पर लगभग 6 से 6.5 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे और नए बैंक करीब 7 प्रतिशत तक की दर पेश कर रहे हैं। इससे प्रवासी भारतीयों और विदेशी मुद्रा रखने वाले निवेशकों के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली में धन रखने की दिलचस्पी बढ़ सकती है।

    मजबूत पूंजी प्रवाह का असर घरेलू बैंकिंग प्रणाली की तरलता पर भी पड़ने की संभावना है। जुलाई में बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये रही थी, जो अगस्त में अब तक बढ़कर लगभग 3 लाख करोड़ रुपये हो गई है। महीने के अंत में आने वाले विदेशी पूंजी प्रवाह ने भी तरलता बढ़ाने में योगदान दिया है।

    भारत के लिए यह स्थिति ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक बाजारों में आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। मजबूत पूंजी प्रवाह से देश को विदेशी भुगतान दायित्वों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और वैश्विक अस्थिरता के दौरान बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता बेहतर हो सकती है। हालांकि पूंजी प्रवाह का वास्तविक स्तर वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की धारणा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने अगस्त समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार में किया बड़ा फेरबदल, 31 अगस्त से प्रभावी होंगे बदलाव।

    वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने अगस्त समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार में किया बड़ा फेरबदल, 31 अगस्त से प्रभावी होंगे बदलाव।


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई अर्थात मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल ने अपनी अगस्त की आवधिक समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। इस नवीनतम समीक्षा के अंतर्गत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित चार नई कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में स्थान दिया गया है। इसके विपरीत तीन कंपनियों को इस सूचकांक से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह सभी पुनर्संतुलन 31 अगस्त के कारोबार की समाप्ति के पश्चात आधिकारिक रूप से प्रभावी कर दिए जाएंगे।

    एमएससीआई द्वारा जारी विवरण के अनुसार, मुख्य सूचकांक में शामिल की गई अन्य कंपनियां मुख्य रूप से पूंजी बाजार और फार्मास्यूटिकल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबद्ध रखती हैं। वैश्विक सूचकांक में कंपनियों का चयन उनके बाजार पूंजीकरण, तरलता और फ्री-फ्लोट जैसे कड़े वैश्विक मानकों के आधार पर किया जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर यह निर्धारित होता है कि किस कंपनी का सूचकांक में प्रवेश होगा अथवा किसे बाहर किया जाएगा।

    मुख्य सूचकांक के साथ-साथ एमएससीआई इंडिया डोमेस्टिक स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बड़ा पुनर्गठन देखने को मिला है। इस स्मॉल कैप सूचकांक में 12 नए शेयरों को स्थान दिया गया है, जबकि 19 शेयरों को सूचकांक से हटा दिया गया है। इस प्रकार स्मॉल कैप श्रेणी में सात कंपनियों की शुद्ध कमी दर्ज की गई है। इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन की प्रक्रिया प्रारंभ होने की संभावना है।

    एमएससीआई इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक और पैसिव फंड मुख्य बेंचमार्क के रूप में उपयोग करते हैं। जब भी इस सूचकांक में कोई बदलाव होता है, तब अंतरराष्ट्रीय फंड प्रबंधक अपने पोर्टफोलियो को नए वेटेज के अनुसार पुनर्संतुलित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप संबंधित कंपनियों के शेयरों में भारी मात्रा में विदेशी पूंजी का आगमन या निकासी देखने को मिलती है। एमएससीआई का भारत केंद्रित सूचकांक भारतीय इक्विटी बाजार के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

    बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस समीक्षा के बाद भारतीय शेयर बाजार में अरबों रुपये का पैसिव निवेश प्रवाह आ सकता है। पूर्व में भी यह संभावना व्यक्त की गई थी कि कुछ बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां स्मॉल कैप श्रेणी से पदोन्नत होकर स्टैंडर्ड इंडेक्स का हिस्सा बन सकती हैं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजरें इन बदलावों के बाद होने वाले पूंजी प्रवाह पर टिकी हुई हैं।

    एमएससीआई की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद संबंधित कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी का रुझान देखा गया। विशेष रूप से अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में शुरुआती सत्र में ही बढ़त दर्ज की गई। लंबे समय के वित्तीय प्रदर्शन के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कंपनी के शेयर ने पिछले वर्षों में निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न प्रदान किया है। इस वैश्विक सूचकांक में शामिल होने से कंपनी के शेयरों में अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रवाह और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए के निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति

    पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए के निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुजरात के साथ मध्यप्रदेश के संबंधों को और प्रगाढ़ करते हुए अरविंद समूह द्वारा मध्यप्रदेश में भी अपनी इकाई स्थापित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप पीएम मित्र पार्क में अगले वर्ष तक उत्पादन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अरविंद समूह द्वारा 3 स्थानों पर अपनी इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इनमें देवास के निकट बरलाई, धार स्थित पीएम मित्र पार्क और इंदौर का बेटमा शामिल हैं। कंपनी इन स्थानों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है। इन औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से प्रदेश में युवाओं के लिये रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन श्री कुलीन लालभाई से चर्चा के बाद कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच सहयोग से दोनों राज्यों के संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे। औद्योगिक निवेश से एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उद्योगों से प्राप्त होने वाले कर राजस्व से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के विकास को और गति मिलेगी। उन्होंने इस पहल के लिए अरविंद समूह को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मध्यप्रदेश में कंपनी के प्रस्तावित निवेश, पीएम मित्र पार्क में उद्योग की स्थापना, रोजगार सृजन, वस्त्र एवं परिधान (टेक्सटाइल) क्षेत्र में निवेश, औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग तथा सिंहस्थ-2028 के लिए आधुनिक संचार व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, उद्योग श्री नीरज मंडलोई, सचिव, उद्योग श्री जॉन किंसले तथा एमडी, एमपीआईडीसी श्री चंद्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे।

    पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित

    अरविंद लिमिटेड द्वारा पीएम मित्र पार्क में लगभग 1200 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसके लिए कंपनी को 105 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इंदौर में संचालित पेपकोन प्रायवेट लिमिटेड के साथ कंपनी के अनुबंध के तहत प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख परिधानों का निर्माण किया जाता है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम मित्र पार्क में उद्योग की स्थापना और निवेश प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा की। सीसीआईपी के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने तथा शासन स्तर पर प्रस्ताव के त्वरित परीक्षण एवं अनुमोदन की दिशा में आवश्यक कार्यवाही पर भी विचार-विमर्श हुआ। वस्त्र एवं परिधान उद्योगों के लिए उपलब्ध निवेश प्रोत्साहनों की जानकारी भी दी गई। इनमें पूंजी अनुदान, ब्याज अनुदान, स्टॉम्प एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति, ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं के लिए सहायता सहित अन्य प्रावधान शामिल हैं।

    औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग को मिलेगा बढ़ावा

    औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज समाधान की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे 90 से अधिक औद्योगिक पार्कों में टेक्सटाइल, फार्मा एवं अन्य औद्योगिक क्लस्टरों में कॉमन जेडएलडी प्रणालियों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की गई। औद्योगिक पार्कों को निकटवर्ती नगर निगमों के एसटीपी से जोड़कर सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी’ मॉडल विकसित करने के सुझाव पर भी विचार हुआ।

    सिंहस्थ-2028 में आधुनिक संचार व्यवस्था के उपयोग की तैयारी

    सिंहस्थ-2028 में मिशन-क्रिटिकल कम्युनिकेशन नेटवर्क के उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। अरविंद लिमिटेड एवं जेएम बक्सी समूह के संयुक्त उद्यम आर्य ऑम्निटॉक सॉल्यूशंस द्वारा मिशन-क्रिटिकल वायरलेस कम्युनिकेशन, वॉकी-टॉकी नेटवर्क, पीएमआरटी तथा सार्वजनिक सुरक्षा संचार समाधान उपलब्ध कराए जाते हैं।सिंहस्थ-2028 में पुलिस, सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आयोजन प्रबंधन के लिए इस प्रकार के मिशन-क्रिटिकल कम्युनिकेशन नेटवर्क के उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस-2027 के लिए किया आमंत्रित

    मुख्यमंत्री डॉ. न्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 में सहभागिता के लिए भी आमंत्रित किया।

    अरविंद लिमिटेड देश के प्रमुख टेक्सटाइल समूहों में शामिल है। वर्ष 1931 में स्थापित कंपनी का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी डेनिम, परिधान, फैब्रिक्स एवं टेक्सटाइल वैल्यू चेन के क्षेत्र में कार्यरत है। समूह की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में 60 हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है तथा कंपनी एक लाख से अधिक कपास उत्पादन करने वाले कृषकों से कच्चे माल की खरीद करती है।

  • पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    नई दिल्ली ।बचत की रकम को सुरक्षित जगह निवेश कर नियमित आय हासिल करने की योजना बना रहे लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम एक विकल्प है। इस योजना में एकमुश्त राशि जमा करने के बाद निवेश पर मिलने वाले ब्याज का भुगतान हर महीने किया जा सकता है। बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों की तुलना में यह योजना उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जो नियमित आय के साथ अपेक्षाकृत स्थिर निवेश व्यवस्था चाहते हैं।

    पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम यानी MIS छोटी बचत योजनाओं के तहत संचालित होती है। इन योजनाओं में निवेश को सरकारी समर्थन प्राप्त होता है। यही वजह है कि जोखिम को लेकर सतर्क रहने वाले निवेशकों, खासकर नियमित आय चाहने वाले लोगों के बीच ऐसी योजनाओं में रुचि बनी रहती है। हालांकि किसी भी निवेश से पहले लागू नियमों और ब्याज दरों की जानकारी देखना जरूरी है।

    इस योजना में फिलहाल 7.4 फीसदी सालाना ब्याज दर का उल्लेख किया गया है। इसमें मिलने वाला ब्याज मासिक आधार पर लिया जा सकता है। निवेशक को शुरुआत में कम से कम 1,000 रुपये से खाता खोलने की सुविधा मिलती है। योजना में व्यक्तिगत खाते के साथ संयुक्त खाता खोलने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    मंथली इनकम स्कीम में निवेश की अधिकतम सीमा भी निर्धारित है। व्यक्तिगत यानी सिंगल अकाउंट में निवेशक अधिकतम 9 लाख रुपये तक जमा कर सकता है। वहीं संयुक्त खाते में अधिकतम 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। निवेश की राशि के आधार पर हर महीने मिलने वाली ब्याज आय अलग-अलग होगी।

    अगर कोई निवेशक सिंगल अकाउंट में अधिकतम 9 लाख रुपये जमा करता है और 7.4 फीसदी की ब्याज दर लागू रहती है, तो सालाना ब्याज के आधार पर उसकी मासिक आय करीब 5,550 रुपये बनती है। इस तरह पांच साल की अवधि के दौरान ब्याज से नियमित मासिक भुगतान प्राप्त किया जा सकता है। वहीं संयुक्त खाते में 15 लाख रुपये निवेश करने पर इसी दर से मासिक ब्याज करीब 9,250 रुपये बैठता है।

    इस गणना में यह समझना जरूरी है कि 5,550 रुपये या 9,250 रुपये की रकम मूल निवेश पर मिलने वाला मासिक ब्याज है। मूलधन और ब्याज की वास्तविक प्राप्ति योजना के नियमों और चुने गए भुगतान विकल्प के अनुसार होगी। निवेशक अपनी जरूरत के मुताबिक ब्याज की राशि प्राप्त करने का तरीका चुन सकता है।

    MIS की परिपक्वता अवधि पांच साल निर्धारित है। इसका मतलब है कि योजना को तय अवधि तक जारी रखने पर निवेशक को निर्धारित नियमों के अनुसार निवेशित राशि से संबंधित लाभ मिलता है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जिन्हें एकमुश्त बचत से नियमित नकदी प्रवाह की जरूरत होती है।

    हालांकि, निवेश करने से पहले समय से पहले खाता बंद कराने से जुड़े नियमों को समझना भी जरूरी है। उपलब्ध नियमों के अनुसार, खाता खुलने के एक से तीन साल के भीतर बंद कराने पर मूलधन का 2 फीसदी हिस्सा काटा जा सकता है। वहीं तीन साल पूरे होने के बाद और पांच साल से पहले खाता बंद कराने पर 1 फीसदी की कटौती का प्रावधान बताया गया है।

    योजना में ब्याज से मिलने वाली आय को मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर लेने का विकल्प भी बताया गया है। ऐसे में निवेशक अपनी वित्तीय जरूरत के अनुसार भुगतान का तरीका चुन सकता है। हालांकि निवेश से पहले मौजूदा ब्याज दर, निवेश सीमा, समयपूर्व निकासी और अन्य नियमों की ताजा जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

  • Nifty vs Sensex: कौन सा इंडेक्स देता है बेहतर निवेश का मौका? समझें आसान भाषा में पूरा फर्क

    Nifty vs Sensex: कौन सा इंडेक्स देता है बेहतर निवेश का मौका? समझें आसान भाषा में पूरा फर्क


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि निफ्टी और सेंसेक्स में से कौन सा बेहतर है। दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स हैं और देश की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। हालांकि दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें समझना किसी भी निवेशक के लिए जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि निफ्टी और सेंसेक्स सीधे तौर पर निवेश के साधन नहीं बल्कि बाजार के प्रदर्शन को मापने वाले प्रमुख सूचकांक हैं। इनके आधार पर कई इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश किया जा सकता है।

    सेंसेक्स बीएसई यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स है। इसमें देश की 30 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इन कंपनियों का चयन बाजार पूंजीकरण और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। सेंसेक्स का प्रदर्शन इन कंपनियों के शेयरों में होने वाली तेजी और गिरावट से प्रभावित होता है। दूसरी तरफ निफ्टी 50 एनएसई यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स है। इसमें 50 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इसलिए निफ्टी में सेंसेक्स की तुलना में कंपनियों की संख्या अधिक होती है और इसका दायरा भी थोड़ा व्यापक माना जाता है।

    दोनों इंडेक्स में भारत की प्रमुख कंपनियां शामिल रहती हैं और कई बड़ी कंपनियां दोनों में भी मौजूद होती हैं। यही वजह है कि लंबे समय में दोनों के प्रदर्शन में बहुत ज्यादा अंतर देखने को जरूरी नहीं है। हालांकि किसी खास समय में सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन के कारण दोनों इंडेक्स के रिटर्न में अंतर आ सकता है। उदाहरण के लिए यदि निफ्टी में शामिल किसी विशेष सेक्टर की कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो निफ्टी को उसका फायदा मिल सकता है। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से सेंसेक्स मजबूत हो सकता है।

    अगर निवेश के नजरिए से देखा जाए तो किसी एक इंडेक्स को हर निवेशक के लिए बेहतर बताना सही नहीं होगा। निवेशक को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला करना चाहिए। जो व्यक्ति लंबे समय के लिए बाजार में निवेश करना चाहता है और अलग-अलग बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन में भागीदारी चाहता है वह निफ्टी 50 या सेंसेक्स आधारित इंडेक्स फंड पर विचार कर सकता है। दोनों ही विकल्प बाजार की बड़ी कंपनियों में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश का अवसर देते हैं।

    नए निवेशकों के लिए इंडेक्स आधारित निवेश का एक फायदा यह है कि इसमें किसी एक कंपनी के शेयर चुनने का जोखिम अपेक्षाकृत कम हो सकता है क्योंकि निवेश कई कंपनियों में फैला होता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें जोखिम नहीं होता। शेयर बाजार से जुड़े निवेश में बाजार की स्थिति के अनुसार उतार-चढ़ाव बना रहता है और निवेश की रकम घट या बढ़ सकती है।

    निफ्टी और सेंसेक्स में चुनाव करते समय केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला करना भी उचित नहीं है। निवेशक को फंड का खर्च अनुपात ट्रैकिंग एरर निवेश की अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा निवेश शुरू करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता समझना और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद लेना बेहतर रहता है।

    कुल मिलाकर निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के मजबूत और महत्वपूर्ण इंडेक्स हैं। किसी एक को हमेशा दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा। लंबे समय के निवेश के लिए दोनों से जुड़े इंडेक्स फंड या अन्य निवेश विकल्प उपयोगी हो सकते हैं लेकिन अंतिम फैसला निवेशक के लक्ष्य जोखिम और निवेश अवधि के आधार पर होना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि केवल इंडेक्स का नाम देखकर निवेश करने के बजाय उसके पीछे की कंपनियों बाजार की स्थिति और निवेश उत्पाद की लागत को समझकर ही फैसला लेना चाहिए।