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  • इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    मध्य प्रदेश: में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

    समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग की विभिन्न तकनीकों, विनिर्माण की संभावनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा होगी। चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

    समिट के दौरान 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी। प्रदर्शनी में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, तकनीकी उपकरण, विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कंपनियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में आठ पैनल चर्चाएं, पांच राउंडटेबल बैठकें और दो मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से उद्योग की जरूरतों, तकनीकी विकास और निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    पहले दिन की चर्चाओं में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा फैबलेस इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी अधोसंरचना, बौद्धिक संपदा और इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    दूसरे दिन का कार्यक्रम चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े विषयों पर बैठकें होंगी। इन चर्चाओं में तकनीकी नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रम के समापन समारोह में मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। इससे इस क्षेत्र में नए उद्यमों को सामने लाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

    सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत पात्र निवेश परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी और 10 साल तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन प्रोत्साहनों के जरिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

    इसी क्षेत्र में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं। समिट में निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा के साथ उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। तकनीकी अधोसंरचना, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का विकास इस क्षेत्र के विस्तार से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।

  • अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव

    अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह कई अहम संकेत लेकर आने वाला है। सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में एक बार फिर दबाव देखने को मिलता है।

    बीते सप्ताह निफ्टी 50 में 2.77 प्रतिशत और सेंसेक्स में 3.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में नई खरीदारी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव में कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे सत्र में तेजी रही। इससे हालिया गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी को मजबूती मिली।

    शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 148.80 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,146.15 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 2,256.94 अंक और निफ्टी में 625.7 अंक की बढ़त रही। अब बाजार की नजर इस तेजी के आगे बने रहने की संभावनाओं पर है।

    अगले सप्ताह सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होंगे। बाजार यह आकलन करेगा कि हालिया तेजी केवल आईटी शेयरों तक सीमित रहती है या बैंकिंग, उपभोक्ता और औद्योगिक क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुझान दिखाई देता है। कंपनियों के राजस्व, मुनाफे, मार्जिन और मांग की स्थिति से जुड़े आंकड़ों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

    कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियां और आने वाली तिमाहियों के लिए जारी किया जाने वाला कारोबारी मार्गदर्शन भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। बेहतर नतीजे और सकारात्मक भविष्य के संकेत शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, कमजोर वित्तीय प्रदर्शन या कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान निवेशकों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई का रुख भी बाजार के लिए अहम रहेगा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कुछ कमी आने से बाजार को राहत मिली है, लेकिन आगे उनकी गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली दोबारा बढ़ती है, तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

    वैश्विक बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत होगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयरों का मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसके विपरीत, बॉन्ड यील्ड में नरमी आने पर जोखिम वाले निवेश विकल्पों में रुचि बढ़ने की संभावना रहती है। मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदें भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

    कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और लाभ मार्जिन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं, वैश्विक तनाव बढ़ने से वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है।

    कुल मिलाकर, अगले सप्ताह शेयर बाजार में कंपनियों के नतीजों और घरेलू-वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। बीते सप्ताह की तेजी के बाद बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह काफी हद तक इन कारकों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगा।

  • मुरैना में 1500 करोड़ की ग्लास फैक्ट्री से रोजगार की उम्मीद, 2000 युवाओं को मिल सकता है काम, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा

    मुरैना में 1500 करोड़ की ग्लास फैक्ट्री से रोजगार की उम्मीद, 2000 युवाओं को मिल सकता है काम, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा

    मध्य प्रदेश। के मुरैना जिले में औद्योगिक निवेश और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश से ग्लास फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। इस परियोजना से लगभग 2000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना के दौरे के दौरान विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    ग्लास फैक्ट्री को जिले में निवेश और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, इससे 2000 लोगों को रोजगार मिलने की बात फिलहाल एक संभावना है। वास्तविक रोजगार के अवसर परियोजना की प्रगति और संचालन से जुड़ी परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। सरकार का जोर इस बात पर है कि जिले में उद्योगों का विस्तार होने के साथ स्थानीय युवाओं को भी काम के अवसर मिलें।

    मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और संबंधित अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में जिले में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर जोर दिया। जानकारी के अनुसार, जिले में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित की गई है। इनमें से कुछ उद्योगों ने निर्धारित समय के अनुसार निर्माण कार्य पूरा कर उत्पादन भी शुरू कर दिया है। सरकार का उद्देश्य नए निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।

    स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की योजना पर भी जोर दिया गया। इसके तहत उद्यमियों और अधिकारियों को पहले से यह आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले समय में उद्योगों को कितने कर्मचारियों की जरूरत होगी और उनके पास किस तरह का कौशल होना चाहिए। इस जानकारी के आधार पर युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। इसके अलावा चंबल एक्सप्रेसवे के आसपास आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की पहल पर भी चर्चा हुई। इस योजना के माध्यम से ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में उद्योग तथा कारोबार से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की संभावना है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मुरैना के लिए कई परियोजनाओं का उल्लेख किया गया। जिले में 75 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक कॉलेज बनाने की तैयारी है। इसके साथ निजी क्षेत्र में स्थापित नए मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण भी किया गया। इन परियोजनाओं का संबंध जिले में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से है।

    खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मुरैना में फूड पार्क विकसित करने की जरूरत बताई। इसका उद्देश्य कृषि उपज से खाद्य उत्पाद तैयार करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को गति देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी एनडीडीबी की मदद से प्रयास किए जा रहे हैं।

    खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार राशि की भी घोषणा की गई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दो-दो लाख रुपये देने की बात कही गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए एक-एक लाख रुपये की राशि घोषित की गई। राज्य स्तर के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

    दौरे के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की समीक्षा भी की गई। जहां आवश्यक समझा गया, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कलेक्टरों से विधानसभा क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करने को भी कहा गया। इसके अलावा घड़ियाल अभयारण्य सहित जिले की पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा हुई। मेडिकल टूरिज्म, वेलनेस सेंटर और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

  • त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम

    त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ने से पहले कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) से जुड़े फंड-ऑफ-फंड्स (एफओएफ) में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह व्यवस्था 16 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत नए एकमुश्त निवेश, नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के पंजीकरण और पहले से चल रही एसआईपी में अतिरिक्त निवेश से जुड़े कुछ अनुरोधों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    निवेशकों को भेजी गई सूचनाओं के अनुसार, यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। कुछ फंड हाउसों ने इसके दायरे में स्विच-इन लेनदेन और नई सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के पंजीकरण को भी शामिल किया है। हालांकि, सभी कंपनियों के नियम और प्रतिबंधों का दायरा एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। निवेशकों को संबंधित फंड हाउस की ओर से जारी सूचना के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले लेने होंगे।
    गोल्ड ईटीएफ एफओएफ ऐसी म्यूचुअल फंड योजनाएं होती हैं, जो मुख्य रूप से गोल्ड ईटीएफ की इकाइयों में निवेश करती हैं। इनके माध्यम से निवेशक सीधे सोने के आभूषण या सिक्के खरीदे बिना सोने की कीमतों से जुड़े निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। नए निवेश पर रोक का मतलब यह नहीं है कि इन योजनाओं में पहले से निवेश करने वाले सभी निवेशकों का पैसा निकालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
    फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध लागू होने से पहले पंजीकृत एसआईपी और एसटीपी की निर्धारित किस्तों का लेनदेन सामान्य रूप से जारी रहेगा। यानी पहले से पंजीकृत योजनाओं के तहत होने वाले नियमित निवेश पर सामान्य तौर पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, मौजूदा एसआईपी में अतिरिक्त राशि जोड़ने या निवेश बढ़ाने के अनुरोधों पर रोक लागू हो सकती है।
    निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि रिडेम्प्शन यानी निवेश की रकम वापस लेने और स्विच-आउट के अनुरोधों पर इन प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले से निवेश कर चुके लोगों के लिए अपनी इकाइयां भुनाने या दूसरी योजना में स्थानांतरित करने का विकल्प बना रहेगा। संबंधित कंपनियों ने यह भी बताया है कि निर्धारित कट-ऑफ समय के बाद जमा किए गए कुछ आवेदन अस्वीकार किए जा सकते हैं और निवेशकों की राशि वापस की जा सकती है।
    हालांकि, म्यूचुअल फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में नए निवेश पर रोक लगाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। एक फंड हाउस ने इसे नियामकीय स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद उद्योग के माध्यम से मिले निर्देशों के अनुरूप उठाया गया कदम बताया है। इसलिए इस फैसले के पीछे किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
    यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान भारत में सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस अवधि में लोग आभूषणों और अन्य रूपों में सोना खरीदते हैं। भारत घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने के आयात पर निर्भर है। आयात में बढ़ोतरी से व्यापार घाटे पर दबाव पड़ सकता है और रुपये की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
    इस वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की अपील की थी। उन्होंने नागरिकों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने समारोहों और अन्य अवसरों पर सोने के आभूषण नहीं खरीदने का संकल्प लेने की बात कही थी।
    फिलहाल गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर लगी रोक अस्थायी है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। निवेश करने या एसआईपी में बदलाव करने की योजना बना रहे लोगों के लिए संबंधित म्यूचुअल फंड कंपनी की ताजा सूचना और लागू शर्तों की जांच करना जरूरी होगा।
  • भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश

    भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश


    नई दिल्ली।
    भारत और कनाडा (India and Canada) के बीच कारोबारी रिश्तों को बढ़ावा देने की दिशा में आईडीबीआई बैंक का सौदा (IDBI Bank Deal) अहम माना जा रहा है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू (Maninder Sidhu) ने कहा है कि उनका देश भारत में निवेश और बढ़ाने की संभावनाएं देख रहा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये का है और इसमें कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भूमिका अहम है। सिद्धू के मुताबिक, भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कनाडाई कंपनियों के लिए काफी अवसर हैं।

    सिद्धू ने कहा कि कनाडा अब तक भारत में करीब 107 अरब अमेरिकी डॉलर (107 Billion US Dollars) का निवेश कर चुका है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि कनाडाई कंपनियां, संस्थान और पेंशन फंड भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे रहे हैं। सिद्धू ने फेयरफैक्स और उसके प्रमुख प्रेम वत्स की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में हवाई अड्डों के विकास में मदद कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की विकास योजनाएं कनाडा के लिए निवेश के नए रास्ते खोल सकती हैं।


    निर्मला सीतारमण बोलीं- बैंकिंग व्यवस्था होगी मजबूत

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी मिलने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे बैंक को विकास के अगले चरण में पहुंचने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) हासिल करने में मदद मिलेगी। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी। इस सौदे के बाद भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी घटकर 19 प्रतिशत रह जाएगी। सीतारमण के मुताबिक, इस कदम से देश का बैंकिंग तंत्र मजबूत होगा और बैंकिंग सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस फैसले से वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ेगा और छोटे कारोबारियों तथा उद्यमियों के लिए नए अवसर बनेंगे। सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। सौदे के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बैंक की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। इसका सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात सितंबर 2018 के 31.78 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 2.32 प्रतिशत रह गया। शुद्ध एनपीए भी 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। खराब वित्तीय स्थिति के कारण मई 2017 में आरबीआई ने बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा था, जिसे सुधार के बाद मार्च 2021 में हटा दिया गया।


    आईडीबीआई बैंक के सौदे में क्या हुआ और कनाडा की भूमिका क्यों अहम है?

    केंद्र सरकार की कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये है। इस प्रक्रिया के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 19 प्रतिशत करने वाला है। वहीं, कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भागीदारी से बैंक के स्वामित्व में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह सौदा भारत के बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की कोशिशों का अहम हिस्सा है। इसके साथ ही भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान गया है।


    भारत में किन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना चाहता है कनाडा?

    सिद्धू ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कनाडा के लिए निवेश के बड़े अवसर हैं। उन्होंने भारत की हवाई यातायात और परिवहन से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश 100 और हवाई अड्डे बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा भारत को करीब 2,000 और विमानों की जरूरत होगी। सिद्धू के अनुसार, कनाडा का विमानन उद्योग, बुनियादी ढांचे से जुड़ी विशेषज्ञता और ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता इन जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे सकती है।


    भारतीय बुनियादी ढांचे में कनाडाई पेंशन फंड कैसे मदद कर रहे हैं?

    कनाडा के मंत्री ने बताया कि उनके देश के पेंशन फंड भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भागीदारी कर रहे हैं। इनमें राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। पेंशन फंड ऐसे निवेश को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं, जिससे बड़ी परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। सिद्धू ने भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के लिए उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, भारत की विकास जरूरतें और कनाडा की निवेश क्षमता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ा सकती हैं।


    क्या आईडीबीआई बैंक सौदे से दोनों देशों का निवेश संबंध मजबूत होगा?

    सिद्धू ने भरोसा जताया कि भारत और कनाडा के बीच निवेश आने वाले समय में और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कनाडा पहले ही भारत में बड़ी रकम निवेश कर चुका है, लेकिन अवसर अभी खत्म नहीं हुए हैं। आईडीबीआई बैंक का सौदा ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस सौदे के बाद कितना अतिरिक्त निवेश आएगा, इसकी कोई निश्चित राशि या समयसीमा मंत्री ने नहीं बताई। फिलहाल बुनियादी ढांचा, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों के संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।

  • आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर अनुमान से भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा मजबूत, विशेषज्ञों ने खपत, निवेश और युवा आबादी को बताया बड़ी ताकत

    आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर अनुमान से भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा मजबूत, विशेषज्ञों ने खपत, निवेश और युवा आबादी को बताया बड़ी ताकत

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने के अनुमान को अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों ने देश की आर्थिक क्षमता पर वैश्विक भरोसे का संकेत बताया है। इस अनुमान के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश की विशाल आबादी, मजबूत घरेलू खपत, निवेश की संभावनाएं और सरकारी नीतियां आर्थिक विस्तार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

    अर्थशास्त्री विजय सरदाना के मुताबिक, 1.5 अरब से अधिक आबादी वाले भारत में विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि देश के मौजूदा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े इसकी आर्थिक क्षमता को दर्शाते हैं। भारत का बाजार निवेश और कारोबार के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव के दौर में भी देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सरदाना ने घरेलू खपत को भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकत बताया। उनके अनुसार, बड़ी आबादी की रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों की गतिविधियों को समर्थन देता है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ का अनुमान आर्थिक विश्वास बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन केवल जीडीपी की वृद्धि से आम लोगों के जीवन में बदलाव सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और लोगों की आय में सुधार जरूरी है।

    अर्थशास्त्री और कर विशेषज्ञ सीए योगेंद्र कपूर का मानना है कि भारत में 7 प्रतिशत या इससे अधिक की विकास दर बनाए रखने की क्षमता है। उनके अनुसार, डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है। आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार बढ़ोतरी को उन्होंने अर्थव्यवस्था के औपचारिक ढांचे की ओर बढ़ने का संकेत बताया। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होने में भी मदद मिली है।

    हालांकि, कपूर ने महंगाई को अर्थव्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौती बताया। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में विकास की गति बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना जरूरी होगा।

    बाजार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखी है। उन्होंने सरकार की नीतियों, बेहतर कारोबारी माहौल और बढ़ते निजी निवेश को अर्थव्यवस्था के लिए सहायक बताया। शुक्ला के अनुसार, भारत की युवा आबादी भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने वाली प्रमुख ताकत है।

    अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ विनोद रावल ने आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर के अनुमान को भारत के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर में राहत देने के फैसले से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रहा विकास भी भविष्य में अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकता है। रावल ने पेट्रोल की कीमतों के पहले के स्तर पर लौटने की संभावना भी जताई, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। उन्होंने घरेलू मांग, सरकारी नीतियों और नई तकनीकों में विकास को आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण आधार बताया।

  • भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार इस साल डॉलर के लिहाज से 15.6 प्रतिशत गिरावट के बावजूद अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। अगले वित्त वर्ष में कंपनियों की आय में 17 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। बाजार में गिरावट के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि, बैंक ऋण, कॉरपोरेट कर्ज और मशीनरी आयात से जुड़े आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहे हैं। इन संकेतकों के आधार पर भारतीय बाजार की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया गया है।

    एक वैश्विक इक्विटी रणनीति रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में भारत को अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाले जेफरीज के इक्विटी रणनीति विभाग के ग्लोबल प्रमुख क्रिस वुड ने एमएससीआई एशिया पैसिफिक, जापान को छोड़कर, इंडेक्स में भारत के लिए 12 प्रतिशत आवंटन की सिफारिश की। इस इंडेक्स में भारत का भार 10.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में गिरावट के बावजूद देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं बनी हुई हैं और उपलब्ध आर्थिक आंकड़े भी मजबूत स्थिति दर्शाते हैं।

    स्थानीय मुद्रा में निफ्टी इस साल 13.4 प्रतिशत नीचे है। इस प्रदर्शन के आधार पर इंडोनेशिया के बाद भारतीय बाजार क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में दूसरे स्थान पर है। इंडोनेशिया के बाजार में इस अवधि के दौरान 42.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के आधार पर भारतीय बाजार की गिरावट 15.6 प्रतिशत बताई गई है। इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की संरचनात्मक विकास की कहानी बरकरार है। इस आकलन में आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की आय में संभावित बढ़ोतरी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 11 से 12 प्रतिशत रहने की संभावना बताई गई है। कॉरपोरेट आय के मामले में चालू वित्त वर्ष के दौरान 14 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह दर बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कंपनियों की आय में संभावित तेजी शेयर बाजार के प्रदर्शन के लिए अहम संकेतक मानी जा रही है। हालांकि, ये आंकड़े अनुमान हैं और वास्तविक वृद्धि आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    बैंकिंग क्षेत्र के आंकड़ों में भी ऋण गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाई गई है। सितंबर के मध्य तक बैंक ऋण में सालाना आधार पर 18.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त में कॉरपोरेट ऋण 21.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को दिए गए कर्ज में 25.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी अवधि में जमा राशि 17.3 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट ऋण में यह वृद्धि इस संभावना की ओर संकेत करती है कि निजी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित पूंजीगत व्यय का चक्र शुरू हो सकता है।

    मशीनरी आयात के आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में बदलाव का संकेत देते हैं। अगस्त में समाप्त 12 महीनों के दौरान भारत का मशीनरी आयात 66 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 29 अरब डॉलर था। इसके अलावा, रिपोर्ट में भारतीय रुपये को लेकर भी आकलन प्रस्तुत किया गया है। क्रिस वुड के मुताबिक, वर्ष 2025 की शुरुआत से 10.7 प्रतिशत गिरावट के बाद रुपया संभवतः अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के लिए अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है।

  • मोहन यादव से मिले हर्ष गोयनका, जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन में निवेश की संभावनाओं पर हुई अहम चर्चा

    मोहन यादव से मिले हर्ष गोयनका, जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन में निवेश की संभावनाओं पर हुई अहम चर्चा

    मध्यप्रदेश । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई के होटल द सेंट रेजिस में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम के तहत आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका से मुलाकात की। बैठक में मध्यप्रदेश में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान संभावित निवेश परियोजनाओं और उनके लिए उपयुक्त स्थानों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में हर्ष गोयनका ने जबलपुर में निवेश कर विद्युत पारेषण क्षेत्र में काम करने की इच्छा व्यक्त की। इस दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति, कुशल कार्यबल और राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों के आधार पर नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। जबलपुर में ट्रांसमिशन क्षेत्र से जुड़े निवेश को लेकर आगे की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    आरपीजी समूह ने मध्यप्रदेश में टायर निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावना पर भी चर्चा की। इसके लिए राज्य की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और कच्चे माल की उपलब्धता को महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा गया। बातचीत में रतलाम, सागर और जबलपुर को संभावित निवेश स्थलों के तौर पर रखा गया। इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।

    सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को लेकर भी बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई। आरपीजी समूह की टीम ने संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करने की इच्छा जताई। इस क्रम में उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क में उपलब्ध प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावना पर भी विचार किया गया। तैयार बुनियादी ढांचे के जरिए समूह को आईटी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

    बैठक में संभावित परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि, आवश्यक अनुमतियों, निवेश प्रोत्साहनों और एकल-खिड़की व्यवस्था के जरिए सहयोग उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। प्राथमिकता वाले निवेश प्रस्तावों और संभावित स्थानों की पहचान कर आगे की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया। इससे प्रस्तावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर विचार किया गया।

    आरपीजी समूह अवसंरचना, मोबिलिटी, टायर, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा समाधान और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करता है। समूह के प्रमुख व्यवसायों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह की वैश्विक उपस्थिति छह महाद्वीपों के 135 से अधिक देशों में बताई गई है।

    आरपीजी समूह का मध्यप्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वर्ष 1951 से आरपीजी ट्रांसमिशन लिमिटेड के माध्यम से समूह की राज्य में उपस्थिति रही है। इसकी प्रमुख कंपनी केईसी इंटरनेशनल ने नीमच अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली सहित मध्यप्रदेश की विद्युत पारेषण अवसंरचना के विकास में योगदान दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और हर्ष गोयनका के बीच हुई बैठक में ट्रांसमिशन, टायर निर्माण और आईटी क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

  • पीयूष गोयल की अमेरिकी कंपनियों से अहम मुलाकातें, भारत में निवेश बढ़ाने को लेकर इन क्षेत्रों पर हुई चर्चा

    पीयूष गोयल की अमेरिकी कंपनियों से अहम मुलाकातें, भारत में निवेश बढ़ाने को लेकर इन क्षेत्रों पर हुई चर्चा

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में भारत में निवेश बढ़ाने, कारोबार के विस्तार और दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं और भारत में कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया गया।

    पीयूष गोयल ने ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जोनाथन ग्रे और अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इक्विटी कारोबार के चेयरमैन प्रकाश मेलवानी के साथ बैठक की। इसमें भारत में निवेश और साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में भारत में कारोबार के लिए मौजूद अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    उन्होंने न्यूबर्गर बरमन के चेयरमैन एवं सीईओ जॉर्ज वॉकर और उनकी नेतृत्व टीम से भी मुलाकात की। इस दौरान वित्तीय सेवाओं और वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में निवेश सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर बातचीत हुई। भारत में इन क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी अवसरों और भविष्य की साझेदारी की संभावनाओं को चर्चा में शामिल किया गया।

    एस्टी लॉडर कंपनीज के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टेफान डी फावेरी के साथ हुई बैठक में भारत के तेजी से बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार पर चर्चा की गई। इस दौरान भारत में विनिर्माण गतिविधियों और स्थानीय सोर्सिंग को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। बैठक में भारतीय बाजार की जरूरतों और कंपनी की संभावित भागीदारी से जुड़े विषयों पर बातचीत की गई।

    आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा के साथ बैठक में भारत में कंपनी की भागीदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार किया गया। तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर भी चर्चा का हिस्सा रहे।

    पीयूष गोयल ने मेटलाइफ के अध्यक्ष एवं सीईओ मिशेल ए. खलाफ से भी मुलाकात की। बैठक में भारत के बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा कंपनी के संभावित विस्तार पर चर्चा हुई। इसके अलावा जनरल अटलांटिक के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम ई. फोर्ड के साथ निवेश और व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    एआईए ग्रुप के गैर-कार्यकारी चेयरमैन मार्क टकर के साथ हुई बातचीत में भारत के बीमा और वित्तीय सेवाओं के अवसरों पर चर्चा की गई। इस दौरान वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को भी रेखांकित किया गया। बैठक में इस क्षेत्र में निवेश और कारोबारी भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार हुआ।

    इन बैठकों में वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निवेश से जुड़े अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई। भारत में अमेरिकी कंपनियों की कारोबारी भागीदारी बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

  • MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद

    MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जनवरी 2027 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) (Global Investors Summit – GIS) से पहले सरकार ने निवेशकों से सीधा संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) 8 अक्तूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। मुंबई देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उद्योगपतियों से सीधे संवाद का मकसद मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी देने के साथ ही कंपनियों की जरूरत और उनके निवेश प्रस्तावों को समझना भी है।


    उद्योगपतियों के सामने रखेंगे एमपी का रोडमैप

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी जाएगी। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण देंगे। सरकार की ओर से निवेशकों को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़े फायदे भी बताए जाएंगे। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण बड़े बाजारों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की जाएगी।


    वन-टू-वन बैठक में निवेशकों की जरूरत समझेंगे सीएम

    मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ होने वाली व्यक्तिगत बैठकों को इस संवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, उनकी व्यावसायिक जरूरतें और प्रदेश में निवेश को लेकर आने वाली संभावित दिक्कतों पर सीधे चर्चा होगी। सरकार निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने, जरूरी अनुमतियों को सुगम करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी भी निवेशकों को देगी। अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा होगी।