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  • मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए

    मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए


    जबलपुर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी दूर करने और लंबित मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। प्रस्तावित नामों में सात वकील और पांच न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। यदि सभी नियुक्तियों को मंजूरी मिल जाती है तो हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी। इससे जबलपुर स्थित मुख्य पीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से की गई इस सिफारिश को मध्यप्रदेश की न्याय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा सामने आता रहा है। ऐसे में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मुकदमों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।

    पांच न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल

    कॉलेजियम ने न्यायिक सेवा कोटे से पांच वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की है। इनमें रेणुका कंचन कृष्णमूर्ति मिश्रा वीरेंद्र सिंह राजपूत ममता जैन और अशिता श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। ये सभी न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी हैं और अब इनके नामों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    बार कोटे से सात वकीलों की सिफारिश

    वकीलों के कोटे से जिन सात नामों की सिफारिश की गई है उनमें डॉ. विवेक शरण राजेश कुमार शुक्ला कनकलता सिंह भक्ति व्यास श्रेयस पंडित मृणाल केलकर और अविनाश जरगर शामिल हैं। इन नामों को कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया के अगले चरण में भेजा जाएगा। इस तरह न्यायिक सेवा और बार दोनों वर्गों से नए न्यायाधीशों के चयन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगी नियुक्ति

    कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियुक्ति से जुड़ी फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाएगी। राष्ट्रपति की मंजूरी और नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी।

    नई नियुक्तियों का असर केवल जबलपुर की मुख्य पीठ तक सीमित नहीं रहेगा। इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को इससे मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि लंबित मुकदमों की संख्या कम होने और सुनवाई की गति बढ़ने का वास्तविक असर नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब सभी की नजर नियुक्ति की अगली प्रक्रिया पर टिकी है।

  • धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर उठी दुकानें बंद कराने की मांग, दूध के बढ़ते दामों पर भी जताई नाराजगी

    धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर उठी दुकानें बंद कराने की मांग, दूध के बढ़ते दामों पर भी जताई नाराजगी


    जबलपुर । जबलपुर में देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के नाम पर संचालित मांस और मछली की दुकानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू धधार्मिकर्म सेना ने ऐसी दुकानों के नाम पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े नामों का इस्तेमाल मांस और मछली की दुकानों के लिए किया जाना उचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर संगठन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दुकानों के नाम बदलवाने के साथ ही दूध की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग भी उठाई गई।

    हिंदू धर्म सेना के अध्यक्ष नीरज राजपूत ने कहा कि शहर के घंटाघर सहित कई इलाकों में मांस और मछली बेचने वाली दुकानों के नाम देवी-देवताओं और पवित्र प्रतीकों से जुड़े हुए हैं। संगठन के मुताबिक ऐसे नामों से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। ज्ञापन में घंटाघर क्षेत्र की शुभ नॉनवेज दुकान और एक अन्य स्थान पर संचालित लक्ष्मी चिकन दुकान का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। संगठन ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाने की मांग की है।

    संगठन की मांग है कि शहर में ऐसी सभी दुकानों की सूची तैयार कराई जाए जिनके नाम धार्मिक मान्यताओं और देवी-देवताओं से जुड़े हैं। इसके बाद संबंधित दुकान संचालकों को नोटिस जारी कर नाम बदलने के लिए कहा जाए। हिंदू धर्म सेना का कहना है कि भविष्य में मांस और मटन की दुकानों के नाम रखने के दौरान भी धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संगठन ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे आगे इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

    ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन ने चेतावनी भी दी कि यदि प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो हिंदू धर्म सेना खुद कदम उठाने के लिए मजबूर होगी। हालांकि संगठन की ओर से उठाई गई मांगों पर प्रशासन की ओर से किसी कार्रवाई या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। अब इस मामले में प्रशासन क्या रुख अपनाता है इस पर सभी की नजर रहेगी।

    ज्ञापन में केवल दुकानों के नाम का मुद्दा ही नहीं उठाया गया बल्कि आम लोगों से जुड़ी एक दूसरी समस्या पर भी ध्यान दिलाया गया। संगठन ने दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से दाम नियंत्रित करने की मांग की। नीरज राजपूत ने कहा कि दूध के दाम अचानक बढ़ने से आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। दूध रोजमर्रा की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने का असर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी पर पड़ता है।

    संगठन का कहना है कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है। इसलिए प्रशासन को इस दिशा में भी जरूरी कदम उठाने चाहिए। हिंदू धर्म सेना ने मांग की है कि दूध के दामों की समीक्षा कर आम उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। अब जबलपुर प्रशासन के सामने एक ही ज्ञापन के जरिए धार्मिक भावनाओं और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े दो मुद्दे रखे गए हैं। इन मांगों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।

  • जबलपुर में देवी जागरण और भंडारे में खूनी बवाल, बुलेट धीरे चलाने की बात पर लौटे 6-7 युवक और मचा दिया तांडव

    जबलपुर में देवी जागरण और भंडारे में खूनी बवाल, बुलेट धीरे चलाने की बात पर लौटे 6-7 युवक और मचा दिया तांडव


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में देवी जागरण और भंडारे के दौरान मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद हिंसक हो गया। रांझी थाना क्षेत्र के आजाद नगर में रविवार देर रात कुछ युवकों ने लाठी डंडों और धारदार हथियारों से लोगों पर हमला कर दिया। इस घटना में दो महिलाओं सहित आठ लोग घायल हो गए। घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

    जानकारी के मुताबिक आजाद नगर में दुर्गा उत्सव के समापन के अवसर पर देवी जागरण और भंडारे का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए थे। रात करीब एक बजे जब जागरण चल रहा था और भंडारे में लोगों की भीड़ मौजूद थी तभी बुलेट पर सवार दो युवक तेज रफ्तार से वहां से निकले। आयोजन स्थल पर बच्चे और महिलाएं भी मौजूद थे। ऐसे में लोगों ने दोनों युवकों को रोककर बाइक धीरे चलाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ देर तक कहासुनी होने के बाद दोनों युवक वहां से चले गए।

    प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार विवाद खत्म होने के करीब 15 से 20 मिनट बाद छह से सात युवक लाठी डंडे और धारदार हथियार लेकर वापस पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से कार्यक्रम में अफरा तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे। हमले में रवि गोटिंया रागिनी गोटिंया पप्पू वर्मा अनुज कोल पारस यादव आदि गोटिंया बिट्टू झारिया और मनीषा गोटिंया घायल हुए हैं। घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। स्थानीय निवासी और पार्षद पति राजेश कुमार यादव ने बताया कि यहां हर साल दुर्गा उत्सव के समापन पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें आसपास के क्षेत्रों से भी लोग शामिल होते हैं। उनके मुताबिक इस बार भी जागरण और भंडारे में काफी भीड़ थी। बाइक तेज गति से निकालने से रोकने पर विवाद शुरू हुआ और बाद में आरोपियों ने लौटकर हमला कर दिया।

    राजेश यादव ने बताया कि घटना के पीछे किसी पुरानी रंजिश की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने पुलिस से आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई में देरी होती है तो स्थानीय लोग प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

    रांझी थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी के मुताबिक शुरुआती जांच में समीर वंशकार का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस के अनुसार पहले कुछ लोगों पर हमला किया गया और जब अन्य लोग बीच बचाव करने पहुंचे तो उन्हें भी निशाना बनाया गया। आरोप है कि हमलावरों में से एक ने धारदार हथियार से वार किया। पुलिस सभी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।

    घटना से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई है कि जिस देवी जागरण में विवाद हुआ वहां स्थानीय विधायक भी शामिल हुए थे। हालांकि वे घटना से कुछ देर पहले ही कार्यक्रम स्थल से निकल चुके थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

  • जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना

    जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में विजयादशमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया जिसमें पुलिस विभाग के अधिकारियों और जवानों ने विधि-विधान से अपने हथियारों की पूजा की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान परंपरा के निर्वहन के साथ पुलिस बल के अनुशासन सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

    पुलिस लाइन में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी अवसर पर पुलिस तथा सुरक्षा बल अपने हथियारों का पूजन कर अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण व्यक्त करते हैं। कार्यक्रम में धार्मिक मान्यताओं और विभागीय अनुशासन का संगम देखने को मिला।

    पूजन के दौरान हथियारों की साफ-सफाई रखरखाव और सुरक्षित उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया। पुलिस बल के लिए हथियार केवल सुरक्षा का साधन नहीं बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की रक्षा करने की जिम्मेदारी का प्रतीक भी हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए जवानों को अपने उपकरणों की देखभाल के प्रति सजग रहने और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करने का संदेश दिया जाता है।

    कार्यक्रम में शामिल मंत्री राकेश सिंह और पुलिस अधिकारियों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजन में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पुलिस विभाग की टीम और प्रदेशवासियों के लिए सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। आयोजन का उद्देश्य विजयादशमी की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ पुलिस बल में कर्तव्यनिष्ठा और एकजुटता की भावना को मजबूत करना भी रहा।

    विजयादशमी पर शस्त्र पूजन देश के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बल इस दिन अपने हथियारों तथा उपकरणों का पूजन करते हैं। यह आयोजन उन्हें अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाने और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति सतर्कता बनाए रखने का अवसर भी देता है। जबलपुर पुलिस लाइन में हुए कार्यक्रम में भी धार्मिक आस्था और पुलिस अनुशासन दोनों का महत्व सामने आया। अधिकारियों और जवानों ने इस अवसर पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प दोहराया।

  • जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

    जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति


    जबलपुर । जबलपुर में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई जिसमें उन्होंने दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो जाने की बात लिखी। पोस्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बीच विधायक ने अपनी पोस्ट हटा दी लेकिन तबादले को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    राज्य शासन की ओर से दो दिन पहले अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाया गया है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विधायक अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो गया। पोस्ट में रामप्रकाश अहिरवार के नाम में राम शब्द को लेकर भगवान श्रीराम से तुलना किए जाने का अर्थ निकाला गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    पोस्ट वायरल होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि रामप्रकाश अहिरवार की तुलना भगवान श्रीराम से क्यों की गई। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक विश्नोई ने बाद में अपनी पोस्ट हटा दी। इसके बावजूद यह मामला शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इस घटनाक्रम में नगर निगम आयुक्त का तबादला और उस पर की गई राजनीतिक टिप्पणी दोनों चर्चा के केंद्र में हैं। अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाए जाने के बाद जबलपुर में नए प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। वहीं विधायक की पोस्ट ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई जबकि पोस्ट हटाए जाने के बाद विवाद की चर्चा सोशल मीडिया पर जारी रही।

    इस मामले में एक तथ्यात्मक गलती भी सामने आई। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने अपनी पोस्ट में अजय विश्नोई को कांग्रेस का विधायक बता दिया जबकि विश्नोई भाजपा के नेता हैं और पाटन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में विवाद के बीच राजनीतिक पहचान को लेकर भी गलत जानकारी साझा होने का मामला सामने आया।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विधायक अजय विश्नोई की पोस्ट हटाए जाने और कांग्रेस नेताओं की आपत्ति की बात सामने आई है। नगर निगम आयुक्त का तबादला शासन के आदेश के तहत हुआ है जबकि पोस्ट को लेकर उठे सवाल राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक फेरबदल के साथ दशहरे के धार्मिक संदर्भ को जोड़कर नई बहस पैदा कर दी है।

  • अवैध खनन के आरोपों से जुड़े मामले में संजय पाठक की फर्म की याचिका खारिज, अब कलेक्टर के सामने रखना होगा पक्ष

    अवैध खनन के आरोपों से जुड़े मामले में संजय पाठक की फर्म की याचिका खारिज, अब कलेक्टर के सामने रखना होगा पक्ष


    जबलपुर। मध्यप्रदेश में कथित अवैध लौह अयस्क खनन से जुड़े मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक से संबंधित एक और फर्म को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पैसिफिक एक्सपोर्ट की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी। इस याचिका के जरिए फर्म ने जबलपुर कलेक्टर की ओर से जारी 81.73 करोड़ रुपये के रिकवरी नोटिस को चुनौती दी थी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में कार्रवाई करने का अधिकार कलेक्टर के पास है। साथ ही फर्म को अपना पक्ष कलेक्टर के समक्ष रखने की छूट दी गई है। कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वह चार महीने के भीतर मामले का निराकरण करें।
    यह मामला संजय पाठक से संबंधित फर्मों के खिलाफ की जा रही करीब 443 करोड़ रुपये की रिकवरी कार्रवाई से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त देय जीएसटी की वसूली का मामला भी इसमें शामिल बताया गया है। अधिवक्ता पंकज कुमार दुबे के मुताबिक अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामला वर्ष 2004 से 2017 के बीच का है। आरोप है कि इस अवधि में संबंधित फर्मों ने निर्धारित सीमा से अधिक लौह अयस्क का खनन किया था। इसी कथित अतिरिक्त खनन को लेकर प्रशासन की ओर से रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल यह मामला जबलपुर कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है।
    पैसिफिक एक्सपोर्ट के खिलाफ करीब 81.73 करोड़ रुपये की रिकवरी का मामला है। फर्म के डायरेक्टर सुमित अग्रवाल बताए गए हैं। रिकवरी नोटिस को चुनौती देते हुए फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज करते हुए फर्म को संबंधित प्रशासनिक प्राधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने का विकल्प दिया है। इसका अर्थ है कि अब फर्म को कलेक्टर के समक्ष अपने दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत करनी होंगी। इसके बाद कलेक्टर को निर्धारित समय सीमा के भीतर मामले पर निर्णय लेना होगा।
    इस प्रकरण में इससे पहले भी संजय पाठक से संबंधित एक अन्य फर्म आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी। 8 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज कर दी थी। उस बेंच में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा शामिल थे। अब पैसिफिक एक्सपोर्ट की याचिका खारिज होने के बाद इसी मामले से संबंधित एक और फर्म को प्रशासनिक स्तर पर अपना पक्ष रखना होगा। मामले से जुड़े पांच प्रकरणों में अलग-अलग याचिकाओं पर कार्रवाई की जा रही है।
    सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात भी रखी गई कि पैसिफिक एक्सपोर्ट को वर्ष 2025 से नोटिस जारी किए जा रहे थे और जवाब देने के लिए कई बार समय दिया गया था। इसके बावजूद फर्म की ओर से अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही कलेक्टर के समक्ष उपस्थिति दर्ज कराई गई। अदालत ने इसी संदर्भ में फर्म को कलेक्टर के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया और चार महीने में निर्णय लेने के निर्देश जारी किए।
    अधिवक्ता पंकज कुमार दुबे के अनुसार मामला पिछले छह से आठ महीने से लंबित है। उन्होंने कहा कि हस्तक्षेप आवेदन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासकीय राजस्व से जुड़े बड़े मामले में अनावश्यक देरी न हो और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। अब इस पूरे प्रकरण में कलेक्टर की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। चार महीने के भीतर होने वाले निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि रिकवरी संबंधी दावों और फर्म के पक्ष पर प्रशासन क्या निष्कर्ष निकालता है।

  • स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

    स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में प्रशासनिक व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए संभागायुक्त धनंजय सिंह ने शुक्रवार को अचानक मझौली तहसील का दौरा किया। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत किए गए इस निरीक्षण में उन्होंने स्कूल से लेकर स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी तक विभिन्न सरकारी संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सबसे ज्यादा चर्चा पौंडा गांव के शासकीय स्कूल के निरीक्षण की रही जहां कमिश्नर खुद छात्र बनकर बेंच पर बैठ गए और शिक्षकों से पढ़ाई की स्थिति जानी। जब उन्हें अध्यापन का स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिला तो उन्होंने शिक्षकों को फटकार लगाई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कई अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार की जरूरत सामने आई।
    पौंडा गांव के शासकीय स्कूल में संभागायुक्त ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और रोजाना होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि बच्चों को कक्षा में किस तरह पढ़ाया जाता है और उनके भविष्य को लेकर करियर काउंसलिंग की क्या व्यवस्था है। निरीक्षण के दौरान अध्यापन कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने शिक्षकों को अपनी कार्यशैली सुधारने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ और विकासखंड स्रोत समन्वयक यानी बीआरसी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा। इस निरीक्षण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को परखना था।
    इसके बाद संभागायुक्त ने पौंडा स्थित सहकारी संस्था का निरीक्षण किया और खाद वितरण की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया की स्थिति जानने के साथ संयुक्त आयुक्त सहकारिता को वितरण का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। खाद वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
    स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानने के लिए धनंजय सिंह ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने चिकित्सकीय स्टाफ और मरीजों से बातचीत कर उपचार की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता एएनसी पंजीयन और मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण की स्थिति की समीक्षा की। इसके अलावा ओपीडी पंजी का निरीक्षण कर टीकाकरण जननी सुरक्षा योजना और प्रसूति सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाओं को निर्देश दिए कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और जरूरी दवाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहे। गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।
    संभागायुक्त ने आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों के पोषण वजन खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया। केंद्र के संचालन की पर्याप्त निगरानी नहीं होने पर उन्होंने संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने गौशाला का निरीक्षण कर संचालकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत गांव में चल रही एकल नलजल योजना की भी समीक्षा की गई। काम समयसीमा में पूरा नहीं होने और उचित मॉनिटरिंग की कमी के मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
    दौरे के दौरान संभागायुक्त ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पेयजल खाद और राशन की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को जनहित से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी संस्थाओं में लापरवाही और निगरानी की कमी को गंभीरता से लिया जाएगा। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे कमियों को दूर करें और शिक्षा स्वास्थ्य पोषण तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाएं।
  • चीफ जस्टिस के बंगले से चंद कदम दूर सनसनीखेज घटना, लूट की कोशिश के बाद एक्टिवा से फरार हुए 5 युवक

    चीफ जस्टिस के बंगले से चंद कदम दूर सनसनीखेज घटना, लूट की कोशिश के बाद एक्टिवा से फरार हुए 5 युवक


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण इलाके में लूट की कोशिश का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के बंगले से कुछ ही दूरी पर पांच युवकों ने एक युवक को रोककर लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपियों ने चाकू निकाल लिया और युवक की ओर बढ़ने लगे। अपनी जान को खतरा देखकर पीड़ित को मौके से भागना पड़ा। घटना के बाद पीड़ित ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। वारदात से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।

    जानकारी के मुताबिक रांझी निवासी वैभव दुबे एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। 12 अक्टूबर की रात करीब 1 बजकर 52 मिनट पर वह एक्टिवा से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान जब वह सिविल लाइन चौराहे पर पहुंचा तो दो एक्टिवा पर सवार पांच युवकों ने उसे रोक लिया। अचानक रास्ता रोके जाने से वैभव मुश्किल स्थिति में आ गया। आरोपियों में से एक युवक अपनी गाड़ी से उतरकर उसके करीब पहुंचा। वैभव ने हिम्मत दिखाते हुए उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन हालात जल्द ही बदल गए।

    बताया गया है कि वैभव के विरोध करने पर आरोपी वहां से हटने लगे। हालांकि कुछ दूरी पर जाकर वे फिर रुक गए। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने के मुताबिक आरोपियों ने चाकू निकाला और वैभव की ओर बढ़ने लगे। बदमाशों के हाथ में चाकू देखकर वैभव को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ और उसने वहां से दौड़ लगा दी। करीब 56 सेकेंड के फुटेज में आरोपी एक्टिवा पर सवार होकर तेज रफ्तार से इंद्रा मार्केट की ओर भागते नजर आ रहे हैं।

    घटना के बाद वैभव किसी तरह सिविल लाइन थाने पहुंचा और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। मामला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के बंगले के नजदीक का होने के कारण भी इलाके की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि और आरोपियों की भूमिका का पता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक पांच आरोपियों में से मास्क पहने एक युवक की पहचान करने में सफलता मिली है। बाकी आरोपियों की पहचान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। सिविल लाइन थाना प्रभारी शशि धुर्वे के अनुसार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द हिरासत में लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    इस घटना में राहत की बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार युवक आरोपियों के चंगुल से निकलने में सफल रहा। अब पुलिस के सामने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी संदिग्धों की पहचान करने और घटना की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों का मुख्य उद्देश्य लूट था और वारदात की योजना किस तरह बनाई गई थी।

  • जबलपुर के भेड़ाघाट में पर्यटकों को मिलेगी नौका विहार की सुविधा, नर्मदा उत्सव के लिए विशेष इंतजाम, सुरक्षा पर प्रशासन का जोर

    जबलपुर के भेड़ाघाट में पर्यटकों को मिलेगी नौका विहार की सुविधा, नर्मदा उत्सव के लिए विशेष इंतजाम, सुरक्षा पर प्रशासन का जोर


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में नर्मदा उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस उत्सव से पहले नगर परिषद पंचवटी क्षेत्र में नौका विहार की सुविधा दोबारा शुरू करने जा रही है। बरसात के कारण बंद नौका विहार सोमवार से शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके साथ ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। नगर परिषद ने नौका विहार के लिए 300 लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई हैं। वहीं पंचकोसी यात्रा और नर्मदा परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त लाइफ जैकेट भी मंगाई गई हैं।
    भेड़ाघाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और नर्मदा नदी के मनमोहक दृश्यों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां स्थित पंचवटी क्षेत्र में नौका विहार पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। बरसात के दौरान नदी के जलस्तर और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए नौका विहार बंद कर दिया गया था। अब मौसम और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से शुरू करने की तैयारी की गई है। नौका विहार शुरू होने से यहां आने वाले पर्यटक नर्मदा के प्राकृतिक सौंदर्य का करीब से आनंद ले सकेंगे।
    24 और 25 अक्टूबर को होने वाले नर्मदा उत्सव को लेकर नगर परिषद की ओर से आयोजन स्थल पर व्यवस्थाएं बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। नौकाओं की व्यवस्था से लेकर साफ सफाई और पर्यटकों की सुविधाओं तक विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। नगर परिषद अध्यक्ष चतुर सिंह लोधी ने बताया कि उत्सव को देखते हुए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने लोगों से भेड़ाघाट पहुंचकर नौका विहार और नर्मदा उत्सव का आनंद लेने की अपील भी की है।
    नौका विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसके लिए 300 लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई गई हैं ताकि नौकाओं में बैठने वाले लोगों को सुरक्षा उपकरण मिल सकें। पंचकोसी यात्रा और नर्मदा परिक्रमा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त लाइफ जैकेट भी मंगाई गई हैं। प्रशासन का प्रयास है कि धार्मिक यात्राओं और पर्यटन गतिविधियों के दौरान लोगों को आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध रहें।
    पंचकोसी यात्रा के दौरान पंचवटी से भेड़ाघाट के बीच नौकाओं का संचालन किया जाता है। इस दौरान नौकाओं में गोताखोरों की टीम भी तैनात रहती है ताकि किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। नदी में नौका विहार के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होता है। लाइफ जैकेट का इस्तेमाल और नौका संचालकों के निर्देशों का पालन संभावित दुर्घटनाओं से बचाव में मदद कर सकता है।
    नगर परिषद अध्यक्ष चतुर सिंह लोधी के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नौका विहार शुरू करने से पहले जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। नर्मदा उत्सव के दौरान भेड़ाघाट में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में साफ सफाई सुरक्षा और यातायात सहित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखना जरूरी होगा।
    नौका विहार दोबारा शुरू होने और नर्मदा उत्सव की तैयारियों के साथ भेड़ाघाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन की तैयारियों के बीच पर्यटकों से भी अपील है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और नर्मदा की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग दें।

  • MBBS छात्रों जितना स्टाइपेंड मांग रहे आयुष डॉक्टर, जबलपुर में 200 विद्यार्थियों ने निकाला कैंडल मार्च, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    MBBS छात्रों जितना स्टाइपेंड मांग रहे आयुष डॉक्टर, जबलपुर में 200 विद्यार्थियों ने निकाला कैंडल मार्च, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान फिलहाल 9,383 रुपए मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है जो मौजूदा समय में उनके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वे इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों के बराबर 21,500 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग को लेकर विद्यार्थियों ने शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से झंडा चौक तक कैंडल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में करीब 150 से 200 छात्र शामिल हुए। झंडा चौक पहुंचकर विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाई और स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई।
    प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आयुष और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने वाले छात्रों के स्टाइपेंड में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक दोनों ही क्षेत्रों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान मेहनत करते हैं और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपना अनुभव बढ़ाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता में समानता होनी चाहिए। विद्यार्थियों ने समान काम के लिए समान आर्थिक लाभ की मांग उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्टाइपेंड से पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है।
    छात्रों के मुताबिक महंगाई के कारण भोजन आवास और अन्य जरूरी जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 9,383 रुपए की मासिक राशि में सभी आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। उनका मानना है कि स्टाइपेंड बढ़ने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान आर्थिक दबाव कम होना जरूरी है ताकि वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें।
    कैंडल मार्च के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का सहयोग भी मिला है। विद्यार्थियों के अनुसार आयुष मंत्रालय के स्तर पर भी स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर बातचीत की गई है। इसके बावजूद अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं लेकिन निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
    विद्यार्थियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। विद्यार्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द कोई सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।
    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है।