Tag: Jabalpur news

  • जबलपुर क्रूज हादसा: “मम्मी ने हाथ पकड़ा था, लेकिन छूट गया” – 9 की मौत, कई परिवार बिखरे

    जबलपुर क्रूज हादसा: “मम्मी ने हाथ पकड़ा था, लेकिन छूट गया” – 9 की मौत, कई परिवार बिखरे


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है। तेज आंधी और करीब 74 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के बीच क्रूज पलट गया, जिसमें 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 लोग अब भी लापता हैं।

    हादसे में बचे लोगों की कहानियां दिल दहला देने वाली हैं। 13 साल की तनिष्का ने रोते हुए बताया कि हादसे के वक्त उसकी मां ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था, लेकिन अचानक क्रूज पलटने पर वह छूट गया। “मम्मी ने हमें पकड़ा था… फिर सब कुछ खत्म हो गया,” यह कहते हुए वह सदमे में है।

    एक अन्य परिवार के रोशन आनंद ने बताया कि क्रूज पलटते ही वे किसी तरह अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ बाहर निकल पाए, लेकिन बाकी लोग बिछड़ गए। उन्होंने बताया कि कई घंटों तक उन्होंने अपने बच्चे की तलाश की और बाद में वह सुरक्षित मिला, लेकिन उस भयावह अनुभव ने उन्हें अंदर तक हिला दिया।

    इसी हादसे में दिल्ली से आई 13 साल की सिया ने अपनी मां, छोटे भाई और नानी को खो दिया। सिया ने बताया कि शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन अचानक मौसम बदल गया और क्रूज में पानी भरने लगा। लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग लाइफ जैकेट तक नहीं पहन पाए।

    परिजनों का आरोप है कि क्रूज पर मौजूद स्टाफ ने समय रहते मदद नहीं की और लाइफ बोट भी देर से पहुंची। उनका कहना है कि अगर बचाव दल समय पर पहुंचता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

    कामराज नाम के एक यात्री का परिवार भी इस हादसे की चपेट में आ गया। उनकी पत्नी और भाभी की मौत हो चुकी है, जबकि बेटा और कुछ रिश्तेदार अब भी लापता हैं। किनारे खड़े परिजन लहरों में फंसे अपने अपनों को बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके।

    हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। प्रशासन द्वारा सर्च ऑपरेशन जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण कई बार रेस्क्यू कार्य रोकना पड़ा है।

    यह हादसा न सिर्फ एक पर्यटन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कई परिवारों को गहरे सदमे में छोड़ गया है, जहां अब सिर्फ यादें और दर्द बाकी है।

  • मासूमों पर मंडराया खतरा फेल हुई बच्चों की दवा पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन

    मासूमों पर मंडराया खतरा फेल हुई बच्चों की दवा पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां बच्चों को दी जाने वाली एक दवा जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरी है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए संबंधित सिरप के उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। यह मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण पूरे स्वास्थ्य तंत्र में हलचल मच गई है और अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।

    जानकारी के अनुसार पैरासिटामॉल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी 125mg 5ml नाम की सिरप जांच के दौरान फेल पाई गई है। यह दवा बच्चों को बुखार और दर्द में दी जाती है और सरकारी अस्पतालों में भी इसकी सप्लाई की गई थी। जैसे ही जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी अस्पतालों और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवीन कोठारी ने सभी संबंधित संस्थानों को पत्र लिखकर इस विशेष बैच की दवा के उपयोग और वितरण को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों और क्लिनिक को अपने स्टॉक की जांच करने और संदिग्ध बैच को अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह से यह दवा मरीजों तक न पहुंचे।

    इस दवा का निर्माण इंदौर स्थित मेसर्स जेनिथ ड्रग्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। बताया जा रहा है कि दवा का सैंपल कुछ समय पहले जांच के लिए भोपाल भेजा गया था जहां परीक्षण के दौरान यह मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बिना देरी किए इसे प्रतिबंधित कर दिया।

    सीएमएचओ नवीन कोठारी ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है। स्टोर में रखी दवाओं का समय समय पर परीक्षण किया जाता है और एनएबीएल रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें उपयोग में लाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित सिरप में क्लंपिंग की समस्या पाई गई है जिससे उसमें क्रिस्टलाइजेशन हो रहा था और यह निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।

    हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह दवा पूरी तरह खराब नहीं है लेकिन तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने के कारण इसे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है और केवल सरकारी स्टॉक में ही थी जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

    स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को यह विशेष सिरप न दें और यदि उनके पास इस बैच की दवा है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता कितनी जरूरी है खासकर जब मामला बच्चों की सेहत से जुड़ा हो।

    इस कार्रवाई से साफ है कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर गंभीर है और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अब आगे इस मामले में विस्तृत जांच के बाद और भी कदम उठाए जा सकते हैं।

  • जबलपुर में मामूली विवाद बना जानलेवा, शादी में घोड़ी हटाने को लेकर युवक की चाकू मारकर हत्या

    जबलपुर में मामूली विवाद बना जानलेवा, शादी में घोड़ी हटाने को लेकर युवक की चाकू मारकर हत्या


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक मामूली विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। शादी समारोह के दौरान हुई कहासुनी के बाद 33 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वारदात सोमवार देर रात की है, जहां पांच बदमाशों ने युवक को घेरकर उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए।

    जानिए क्‍या है मामला

    जानकारी के मुताबिक, हनुमानताल निवासी मोनू उर्फ सादिल शादियों में दूल्हे के लिए घोड़ी उपलब्ध कराने का काम करता था। सोमवार रात वह घमापुर इलाके में एक शादी समारोह में घोड़ी लेकर पहुंचा था। इसी दौरान कुछ युवक बाइक से वहां से निकल रहे थे। भीड़ अधिक होने के कारण मोनू ने उन्हें घोड़ी से दूर रहने को कहा, ताकि कोई हादसा न हो। इसी बात को लेकर आरोपियों से उसका विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया, जिसके बाद आरोपी वहां से चले गए।

    बारात खत्म होने के बाद देर रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच मोनू घर लौटा। घोड़ी बांधकर जैसे ही वह घर के अंदर जाने लगा, तभी बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे और उस पर चाकू से हमला कर दिया। हमलावरों ने उसे घेरकर कई वार किए और खून से लथपथ हालत में सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। कुछ देर बाद राहगीरों ने घायल मोनू को देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। हनुमानताल और घमापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।

    परिवार की जिम्मेदारी थी मृतक पर

    मृतक के भाई मोहम्मद साबिर के अनुसार, परिवार हमलावरों को नहीं जानता। विवाद की वजह सिर्फ इतनी थी कि मोनू ने घोड़ी से दूर रहने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि मोनू ही पूरे परिवार का सहारा था और शादी-विवाह में घोड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

    प्रारंभिक जांच में जीशान नाम के युवक और उसके साथियों की संलिप्तता सामने आई है। हनुमानताल थाना पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • शिक्षा व्यवस्था से लेकर अपराध तक जबलपुर में कई मोर्चों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी के मामले उजागर

    शिक्षा व्यवस्था से लेकर अपराध तक जबलपुर में कई मोर्चों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी के मामले उजागर

    जबलपुर में एक साथ कई अलग अलग घटनाओं ने प्रशासन और आम लोगों को सतर्क कर दिया है जहां एक ओर शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर सख्त रुख अपनाया है वहीं दूसरी ओर ठगी और धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं

    शिक्षा विभाग की ओर से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने पर 400 से अधिक प्राचार्यों और शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है जिला शिक्षा अधिकारी ने उन शिक्षकों से जवाब मांगा है जो निर्धारित समय पर मूल्यांकन केंद्रों पर उपस्थित नहीं हुए 22 फरवरी से शुरू हुए इस कार्य में करीब 441 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए जिनमें पीएम श्री और मॉडल स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं यदि इन नोटिसों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है इस सख्ती से शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया गया है

    दूसरी ओर शहर में धोखाधड़ी के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है कोतवाली थाना क्षेत्र में एक ज्वेलर्स पर 35 लाख रुपये की ठगी का आरोप सामने आया है आरोपी ने चांदी में मुनाफे का झांसा देकर निवेश के नाम पर यह रकम ली पीड़ित मनोज पांडे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है इस मामले में आरोपी विनोद सोनी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है

    इसी तरह संजीवनी नगर थाना क्षेत्र में एक और गंभीर मामला सामने आया है जहां एक सहकर्मी युवती को शादी का झांसा देकर आरोपी ने उससे 17 लाख रुपये ऐंठ लिए पीड़िता के अनुसार आरोपी ने न केवल पैसे लिए बल्कि शादी के नाम पर शारीरिक संबंध भी बनाए बाद में शादी से इनकार कर दिया और जब पीड़िता ने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने उसे ब्लॉक कर दिया इतना ही नहीं दिए गए चेक भी बाउंस करा दिए गए जिससे मामला और गंभीर हो गया

    इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर में एक तरफ जहां शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बरती जा रही है वहीं दूसरी तरफ धोखाधड़ी और अपराध के मामलों पर भी पुलिस सक्रिय हो गई है प्रशासन अब ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके और आम जनता को सुरक्षित माहौल मिल सके

  • गौरीघाट की नर्मदा महाआरती में बड़ा बदलाव गंगा आरती मॉडल से बनेगी पारदर्शी फंडिंग व्यवस्था

    गौरीघाट की नर्मदा महाआरती में बड़ा बदलाव गंगा आरती मॉडल से बनेगी पारदर्शी फंडिंग व्यवस्था

    जबलपुर के गौरीघाट में होने वाली प्रसिद्ध नर्मदा महाआरती की व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है प्रशासन अब इसकी वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में सक्रिय हो गया है हाल ही में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जांच के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे

    प्रशासन का साफ कहना है कि धार्मिक गतिविधियों में किसी तरह का अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा लेकिन यदि फंडिंग और प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है उद्देश्य यह है कि महाआरती से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पारदर्शी हो और आम लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे

    इस सुधार प्रक्रिया में वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती को मॉडल के रूप में अपनाने की योजना बनाई जा रही है वाराणसी में गंगा आरती का संचालन मुख्य रूप से दान स्थानीय समितियों और श्रद्धालुओं के स्वैच्छिक योगदान से होता है इसके अलावा विशेष अवसरों और VIP बैठने की व्यवस्था के लिए शुल्क भी लिया जाता है जिससे आयोजन के लिए आवश्यक धन जुटाया जाता है

    वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर होने वाली आरती में चंदा और बुकिंग की सुव्यवस्थित प्रणाली है जिसे स्थानीय समितियां और पुजारी मिलकर संचालित करते हैं वहीं गंगा सेवा निधि जैसी संस्थाएं पूरे आयोजन के प्रबंधन और वित्तीय संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जरूरत पड़ने पर घाटों के विकास के लिए सरकारी सहयोग भी लिया जाता है

    इसी व्यवस्था से प्रेरणा लेते हुए जबलपुर में भी नर्मदा महाआरती के लिए एक संगठित और जवाबदेह तंत्र तैयार करने की योजना है जिससे दान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश खत्म हो

    नर्मदा महाआरती का इतिहास भी काफी दिलचस्प है वर्ष 2012 में इसकी शुरुआत हुई थी जब स्थानीय निवासी सुधीर अग्रवाल और उनकी नर्मदा भक्त मंडली ने 28 जनवरी को पहली बार आरती का आयोजन किया था बाद में 3 फरवरी को इसे भव्य रूप दिया गया शुरुआती आयोजन के दौरान बारिश होने जैसी घटनाएं भी हुईं लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने इसे एक बड़े धार्मिक आयोजन में बदल दिया

    हालांकि हाल के दिनों में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों पर महाआरती की व्यवस्था देख रहे ओंकार दुबे ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है और जो भी धनराशि प्राप्त होती है उसका बड़ा हिस्सा दैनिक और विशेष आयोजनों में खर्च हो जाता है

    अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच और प्रस्तावित सुधारों के बाद नर्मदा महाआरती का प्रबंधन किस तरह से नया स्वरूप लेता है लेकिन इतना तय है कि पारदर्शिता बढ़ने से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा और यह आयोजन और भी व्यवस्थित रूप में सामने आएगा

  • जबलपुर में बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही पर 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा, एसपी ने दर्ज कराया सर्विस रिकॉर्ड में दंड

    जबलपुर में बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही पर 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा, एसपी ने दर्ज कराया सर्विस रिकॉर्ड में दंड


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से पुलिस विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। यहां पुलिस अधीक्षक ने काम में लापरवाही बरतने वाले 26 थाना प्रभारियों टीआई के खिलाफ एक साथ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें निंदा की सजा सुनाई है। इस कार्रवाई में शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के थाना प्रभारी शामिल हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में टीआई पर की गई कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और इसे अनुशासनात्मक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने जिले में कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पाया कि कई थाना क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों में कमी आई है। विशेष रूप से अपराध रोकथाम के लिए की जाने वाली कार्रवाई जैसे शांति भंग की आशंका पर गिरफ्तारी बाउंड ओवर की कार्रवाई और अन्य एहतियाती कदम अपेक्षाकृत कम किए गए। इसे पुलिस अधीक्षक ने गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

    इसी के तहत 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा दी गई है। यह सजा भले ही सेवा नियमों के अनुसार लघु दंड की श्रेणी में आती है लेकिन इसका प्रभाव अधिकारी के पूरे करियर पर पड़ सकता है। सरकारी सेवा में निंदा का अर्थ है कि कर्मचारी के खिलाफ औपचारिक रूप से लिखित चेतावनी जारी की जाती है और इसे उसके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। यह प्रविष्टि भविष्य में पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों के दौरान महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    पुलिस विभाग के जानकारों के अनुसार निंदा की कार्रवाई भले ही निलंबन या वेतन कटौती जैसी कठोर सजा नहीं होती लेकिन यह अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। कई मामलों में इस तरह की प्रविष्टि होने से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और अधिकारी को आगे की सेवा में सावधानी बरतने की चेतावनी के रूप में भी देखा जाता है।

    बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि थाना स्तर पर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीरता बनी रहे और अधिकारी अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक कार्रवाई समय पर करें। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अपराध रोकने का एक अहम माध्यम होती है और इसमें कमी आने से कानून व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल है। कई थाना प्रभारियों को उम्मीद नहीं थी कि समीक्षा के बाद इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कार्रवाई होगी। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कदम अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई को विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्पष्ट संकेत दिया गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध रोकने के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत

    रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत


    जबलपुर के उपनगरीय क्षेत्र रणझी में स्थित सिविल अस्पताल जिसे लोग वर्षों से छोटी विक्टोरिया के नाम से जानते हैं अब इतिहास रचने जा रहा है यह वही अस्पताल है जो अब तक केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया था लेकिन अब इसकी पहचान पूरी तरह बदलने वाली है करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार चार मंजिला हाईटेक 100 बिस्तरों वाला नया अस्पताल भवन क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है

    इस अस्पताल के शुरू होने के बाद रणझी और आसपास के इलाकों के लगभग दो लाख लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी अब तक हार्ट अटैक ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था इस प्रक्रिया में 20 से 25 मिनट का कीमती समय निकल जाता था जो कई बार मरीज की जान के लिए खतरा बन जाता था

    नए भवन के संचालन में आने के बाद हालात पूरी तरह बदलने की उम्मीद है अस्पताल में आधुनिक जांच मशीनें स्थापित की गई हैं 100 बिस्तरों की सुविधा शुरू होने के साथ ही डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भी पर्याप्त तैनाती होगी इससे सामान्य बीमारियों के साथ साथ गंभीर रोगों का इलाज भी यहीं संभव हो सकेगा

    रणझी सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 300 से 350 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण अब तक उन्हें सीमित सुविधाएं ही मिल पाती थीं नए अस्पताल भवन के शुरू होने से मरीजों को बेहतर जांच सही समय पर उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलेगी

    रणझी के छह वार्डों के अलावा मटामर सोनपुर मानेगांव मोहनिया खमरिया पिपरिया और उमरिया जैसे क्षेत्रों की बड़ी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं है मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के अनुसार नए भवन के चालू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी बढ़ जाएगा अस्पताल में जरूरी जांच सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सक और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा

    इस चार मंजिला अस्पताल भवन की संरचना भी पूरी तरह आधुनिक है पहली मंजिल पर प्रशासनिक ब्लॉक बनाया गया है दूसरी मंजिल पर पुरुष और महिला वार्ड की सुविधा है तीसरी मंजिल पर अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं भवन में सीढ़ी रैंप और तीन लिफ्ट की सुविधा दी गई है साथ ही बाहर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है

    अस्पताल में दो आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं जहां माइनर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध होगी इसके अलावा एक पैथोलॉजी लैब भी बनाई गई है जिसमें जरूरी जांच की सुविधाएं होंगी नई ओपीडी वार्ड इमरजेंसी वार्ड और अन्य संसाधन भी मरीजों को उपलब्ध कराए जाएंगे कुल मिलाकर छोटी विक्टोरिया के नाम से पहचाने जाने वाले इस अस्पताल का यह नया रूप रणझी और आसपास के इलाकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई शुरुआत साबित होगा जहां समय पर इलाज मिलने से न सिर्फ लोगों की जान बचेगी बल्कि शहर पर स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव भी कम होगा

  • जलपक्षियों की राजधानी बना जबलपुर एशियाई वॉटरबर्ड गणना में प्रदेश में नंबर वन

    जलपक्षियों की राजधानी बना जबलपुर एशियाई वॉटरबर्ड गणना में प्रदेश में नंबर वन


    जबलपुर /मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर ने एक बार फिर अपनी प्राकृतिक समृद्धि का लोहा मनवाया है। एशियाई वॉटरबर्ड सेंसरस में जबलपुर पूरे प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है। जलपक्षियों के लिए जबलपुर अब सबसे सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाने के रूप में उभर कर सामने आया है। हाल ही में संपन्न हुई 40वीं एशियाई वॉटरबर्ड गणना के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जबलपुर के जलाशय जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध हैं।

    इस वॉटरबर्ड सेंसरस में मध्यप्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व और वन मंडलों को शामिल किया गया था। पहली बार पूरे प्रदेश में स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों की एक साथ वैज्ञानिक तरीके से गणना की गई। इस व्यापक सर्वेक्षण में जबलपुर वन मंडल ने सबसे अधिक जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है जबकि राजधानी भोपाल दूसरे नंबर पर रहा।

    जबलपुर वन मंडल के एसडीओ एम एल बरकड़े के अनुसार यह गणना पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से की गई। ई बर्ड ऐप के जरिए पक्षियों की प्रजातियों और संख्या को डिजिटल रूप से दर्ज किया गया जिससे आंकड़े अधिक सटीक और पारदर्शी बन सके। यह तरीका न केवल विश्वसनीय है बल्कि भविष्य में जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा।

    सर्वेक्षण में जबलपुर के पनागर क्षेत्र स्थित मोहारी तालाब जलपक्षियों का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। यहां कुल 139 प्रजातियों के देशी और विदेशी जलपक्षी देखे गए। बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों ने इस तालाब को अपना अस्थायी बसेरा बनाया है जो इस क्षेत्र की अनुकूल जलवायु और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है।

    मोहारी तालाब में इंडियन स्पॉट बिल्ड डक साइबेरियन और यूरेशियन प्रजातियों के पक्षी ग्रेलेग गूज नॉर्दर्न पिंटेल गार्गेनी पर्पल मूरहेन कॉमन कूट ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट रेड वॉटल्ड लैपविंग लिटिल ग्रीब इंडियन कॉर्मोरेंट डार्टर ग्रे हेरॉन व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर स्टॉर्क बिल्ड किंगफिशर और पाइड किंगफिशर जैसे कई दुर्लभ और आकर्षक पक्षी देखे गए। इन पक्षियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि मोहारी तालाब अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जबलपुर के जलाशयों में पर्याप्त पानी स्वच्छ वातावरण और मानवीय हस्तक्षेप की सीमित मौजूदगी ने इन पक्षियों को आकर्षित किया है। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जबलपुर की बड़ी सफलता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि यदि जल स्रोतों का सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो जैव विविधता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    एशियाई वॉटरबर्ड सेंसरस में मिली यह उपलब्धि जबलपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली है। यह न केवल पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता को भी मजबूत करेगी। जलपक्षियों की यह बढ़ती संख्या आने वाले समय में जबलपुर को बर्ड वॉचिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।

  • बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप

    बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप


    जबलपुर । भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में घिरे सेंट्रल जीएसटी के पूर्व अधीक्षक सोमेन गोस्वामी को विभाग ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। यह फैसला उस बहुचर्चित मामले के बाद लिया गया है, जिसमें सीबीआई ने साल 2023 में उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

    दरअसल, यह पूरा मामला राजस्थान के एक कारोबारी त्रिलोकचंद से जुड़ा है, जिनकी पान मसाला फैक्ट्री को सीजीएसटी विभाग ने सील कर दिया था। फैक्ट्री को दोबारा खोलने के एवज में कारोबारी से 35 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इस डील के तहत 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सीबीआई ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और CGST के चार अधिकारियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था।

    सीबीआई की विस्तृत जांच में सामने आया कि तत्कालीन अधीक्षक सोमेन गोस्वामी न सिर्फ रिश्वतखोरी में शामिल थे, बल्कि उनके पास आय से 155 प्रतिशत अधिक संपत्ति भी पाई गई। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग से मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई, जिसका नतीजा अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के रूप में सामने आया है।

    सोमेन गोस्वामी के साथ इस मामले में सहायक अधीक्षक कपिल काम्बले, इंस्पेक्टर प्रदीप हजारी, विकास गुप्ता और वीरेंद्र जैन को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इन सभी पर रिश्वत मांगने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे। फिलहाल विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन अन्य अधिकारियों पर भी आने वाले समय में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    अनिवार्य सेवानिवृत्ति को सरकारी सेवा में एक बड़ी सजा माना जाता है, क्योंकि इसमें अधिकारी को समय से पहले सेवा से हटा दिया जाता है और उसकी छवि पर स्थायी दाग लग जाता है। विभाग का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा और सरकारी महकमे में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद यह एक बार फिर साबित हुआ है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जांच एजेंसियां और विभाग अब ज्यादा सख्ती बरत रहे हैं। वहीं, व्यापारियों और आम जनता के बीच यह कार्रवाई एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

    फिलहाल सीबीआई की जांच प्रक्रिया जारी है और आय से अधिक संपत्ति के मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

  • जबलपुर में सनसनी: रिटायर्ड महिला डॉक्टर के अपहरण का आरोप, करोड़ों की संपत्ति पर भू-माफिया की नजर

    जबलपुर में सनसनी: रिटायर्ड महिला डॉक्टर के अपहरण का आरोप, करोड़ों की संपत्ति पर भू-माफिया की नजर


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर के पॉश इलाके राइट टाउन से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ रहने वाली 70 वर्षीय रिटायर्ड महिला डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के अपहरण के आरोपों ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ अज्ञात लोग महिला डॉक्टर को उनके ही घर से जबरन उठाकर एक कार में बिठाकर ले गए। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ संदिग्ध लोग उन्हें ले जाते हुए नजर आ रहे हैं।

    डॉ. हेमलता की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में गहरी साजिश और अपहरण की आशंका जताई है। घटना के दौरान जब पड़ोसी डॉ. मुखर्जी ने हस्तक्षेप कर पूछताछ करने की कोशिश की, तो इन अज्ञात लोगों ने उनके साथ भी बदतमीजी की और खुद को किसी बड़े प्रसिद्ध मंदिर के ट्रस्ट से जुड़ा हुआ बताया। हालांकि, स्थानीय लोगों और चिकित्सा जगत के जानकारों का मानना है कि यह कोई धार्मिक सेवा नहीं, बल्कि महिला की करोड़ों की बेशकीमती संपत्ति को हड़पने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश है।

    पीड़ित डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की स्थिति इस समय बेहद नाजुक है। हाल ही में एक महीने पहले उनके पति का निधन हुआ है और कुछ साल पहले वे अपने इकलौते डॉक्टर बेटे को भी खो चुकी हैं। घर में अकेली रहने वाली डॉक्टर फिलहाल मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं, जिसका फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। राइट टाउन जैसे महंगे इलाके में उनके बंगले और जमीन की कीमत करोड़ों में है, जिसे कब्जाने के लिए भू-माफिया और आपराधिक तत्व सक्रिय हो गए हैं।

    IMA के हस्तक्षेप के बाद जबलपुर का मदन महल थाना पुलिस हरकत में आया है। पुलिस ने फिलहाल शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और वायरल वीडियो के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुट गई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वास्तव में वे लोग किसी मंदिर से जुड़े हैं या केवल जायदाद के दस्तावेजों पर अंगूठे लगवाने के लिए यह नाटक रचा गया है। आने वाले घंटों में पुलिस की जांच यह साफ करेगी कि डॉ. हेमलता सुरक्षित हैं या वे किसी बड़े भू-माफिया सिंडिकेट के चंगुल में फंस चुकी हैं।