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  • दुर्गा पंडाल लगाने पर सड़क पर संग्राम, कांग्रेस नेता की पुलिस को खुली चुनौती, TI बोले- यातायात रोकने की अनुमति नहीं

    दुर्गा पंडाल लगाने पर सड़क पर संग्राम, कांग्रेस नेता की पुलिस को खुली चुनौती, TI बोले- यातायात रोकने की अनुमति नहीं


    जबलपुर ।  मध्य प्रदेश के जबलपुर में दुर्गा पंडाल लगाने को लेकर पुलिस और युवा कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जितिन राज के बीच विवाद सामने आया है। विजय नगर में शुक्रवार रात टेंट लगाने के दौरान शुरू हुई बहस कुछ ही देर में तीखी नोकझोंक में बदल गई। पुलिस का कहना था कि पंडाल का टेंट सड़क पर आ रहा है जिससे यातायात बाधित हो सकता है। इसलिए टेंट को पीछे करने के लिए कहा गया था। वहीं जितिन राज का तर्क था कि वह कई वर्षों से इसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने जितिन राज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। घटना के बाद दुर्गा पंडाल लगाने और सड़क पर धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात जितिन राज अपने समर्थकों के साथ विजय नगर में दुर्गा पंडाल के लिए टेंट लगवा रहे थे। इसी दौरान थाना प्रभारी धीरज कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने टेंट की स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह सड़क की ओर आ रहा है और इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। पुलिस ने टेंट को पीछे करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर जितिन राज और टीआई के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ता और पुलिस आमने-सामने आ गए।
    विवाद के दौरान जितिन राज ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से उसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं और पहले भी यहां आयोजन होते रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि टेंट तो इसी जगह लगेगा और जिसे कार्रवाई करनी है वह कर सकता है। उनके इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया। जितिन राज ने भाजपा विधायक के जन्मदिन पर हुए एक कार्यक्रम का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि उस दौरान मुख्य मार्ग पर करीब ढाई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था लेकिन तब कार्रवाई को लेकर ऐसे सवाल नहीं उठाए गए।
    जितिन राज ने सवाल किया कि जबलपुर-अमरकंटक रोड पर भाजपा विधायक अशोक रोहाणी के जन्मदिन के आयोजन के दौरान यातायात बाधित होने पर क्या इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़क पर होने वाली गतिविधियों को लेकर नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए। हालांकि विधायक के जन्मदिन के आयोजन को लेकर लगाए गए उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
    दूसरी ओर थाना प्रभारी धीरज कुमार ने पुलिस की कार्रवाई का पक्ष रखते हुए कहा कि सड़क पर टेंट लगाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। उनके मुताबिक पुलिस ने इसी वजह से टेंट पीछे करने के लिए कहा था। टीआई का आरोप है कि जितिन राज ने पुलिस के साथ बहस की और कार्रवाई करने की चुनौती दी। उन्होंने विवाद के दौरान गाली गलौज होने की बात भी कही। पुलिस का कहना है कि सड़क पर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और नियमों के अनुसार ही आयोजन की व्यवस्था होनी चाहिए।
    मौके पर काफी देर तक बहस चलने के बाद पुलिस ने जितिन राज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। कार्रवाई के पीछे सड़क पर टेंट लगाने से यातायात प्रभावित होने और पुलिस के साथ हुए विवाद को वजह बताया गया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नवरात्र के दौरान शहर में कई स्थानों पर दुर्गा पंडाल और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए अहम चुनौती होती है। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आयोजकों की आपत्तियों को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है इस पर नजर रहेगी
  • जबलपुर की रैना यादव ने एशियन गेम्स में निभाई खास जिम्मेदारी, गोल्ड के बाद अब ओलंपिक जीत का सपना

    जबलपुर की रैना यादव ने एशियन गेम्स में निभाई खास जिम्मेदारी, गोल्ड के बाद अब ओलंपिक जीत का सपना


    जबलपुर । जबलपुर की रैना यादव ने भारतीय महिला हॉकी टीम की सहायक कोच के रूप में एशियन गेम्स में ऐतिहासिक सफलता का हिस्सा बनकर शहर का नाम रोशन किया है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में 44 साल बाद स्वर्ण पदक अपने नाम किया और इसके साथ ही टीम ने ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद मंगलवार को जब रैना यादव जापान से बेंगलुरु होते हुए जबलपुर पहुंचीं तो शहर में उनका जोरदार स्वागत किया गया। परिवार के सदस्यों के साथ साथी खिलाड़ियों और शुभचिंतकों ने भी उन्हें बधाई दी।

    एशियन गेम्स में भारतीय टीम के प्रदर्शन के पीछे लंबे समय से की गई तैयारी और रणनीति की अहम भूमिका रही। रैना यादव ने बताया कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टीम का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट था। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का पूरा ध्यान स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर था। टीम ने हर मुकाबले को इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए खेला और फाइनल तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

    फाइनल मुकाबला चीन की टीम के खिलाफ था। चीन पिछले ओलंपिक में रजत पदक जीत चुका था और इसलिए भारतीय टीम के सामने बड़ी चुनौती थी। रैना ने बताया कि टीम ने चीन के खिलाफ मुकाबले को लेकर पहले से रणनीति तैयार कर रखी थी। सेमीफाइनल में जब चीन और जापान आमने सामने थे तब भारतीय टीम चाहती थी कि चीन ही फाइनल में पहुंचे क्योंकि टीम की तैयारी चीन को ध्यान में रखकर की गई थी। चीन के फाइनल में पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को अपनी तैयार रणनीति के मुताबिक खेलने का मौका मिला।

    रैना के मुताबिक फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में दबाव होना स्वाभाविक था लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने इस दबाव को सकारात्मक तरीके से लिया। टीम ने मैदान पर अपनी रणनीति को लागू किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस जीत ने भारतीय महिला हॉकी के लिए एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की और ओलंपिक का टिकट भी पक्का किया।

    रैना ने बताया कि भारतीय महिला हॉकी टीम की तैयारी केवल किसी एक टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है। टीम का वर्ष 2028 तक का कार्यक्रम और मैच शेड्यूल पहले से तय है। खिलाड़ियों के लिए हर दिन अलग तरह की तैयारी होती है जिसमें तकनीकी और टैक्टिकल अभ्यास के साथ वीडियो सेशन स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग तथा रिकवरी पर भी ध्यान दिया जाता है। लंबे समय की योजना के अनुसार खिलाड़ियों को बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार किया जा रहा है।

    सहायक कोच के रूप में रैना का सफर भी मेहनत और तैयारी से जुड़ा रहा है। उन्होंने अप्रैल में हॉकी इंडिया के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक खुद को तैयार किया। उनके पास इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन के विभिन्न स्तरों के कोर्स और कोचिंग से जुड़े प्रमाणपत्र हैं। इसके अलावा उन्होंने पटियाला से डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग भी किया है।

    रैना अपने सफर को संघर्षपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि आगे बढ़ने के रास्ते में प्रोत्साहित करने वाले लोगों के साथ हतोत्साहित करने वाले लोग भी मिलते हैं लेकिन आलोचनाओं और मुश्किल परिस्थितियों ने उन्हें और मजबूती से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। एशियन गेम्स का स्वर्ण उनके सफर की बड़ी उपलब्धि है लेकिन अब उनकी नजर अगले बड़े लक्ष्य पर है। रैना का सपना 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ बेहतर प्रदर्शन करना और स्वर्ण पदक जीतना है।

  • रात में अचानक ढहा 100 साल पुराना मकान, मलबे में बुजुर्ग-बच्चों समेत 10 लोग फंसे, मचा हड़कंप

    रात में अचानक ढहा 100 साल पुराना मकान, मलबे में बुजुर्ग-बच्चों समेत 10 लोग फंसे, मचा हड़कंप


    जबलपुर । जबलपुर शहर के नया मोहल्ला स्थित तिलक वार्ड में सोमवार रात एक पुराने दो मंजिला मकान का अगला हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मकान के अंदर चार परिवार मौजूद थे। मलबा गिरने के कारण बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया और बुजुर्गों महिलाओं तथा बच्चों समेत करीब 10 लोग अंदर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद सभी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई।

    जानकारी के मुताबिक जिस मकान में यह हादसा हुआ वह करीब 80 से 100 साल पुराना बताया जा रहा है। मकान का अगला हिस्सा काफी समय से जर्जर हालत में था। सोमवार रात अचानक इसका एक बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। मलबा गिरने के बाद मकान से बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। अंदर मौजूद लोगों के लिए स्थिति मुश्किल हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा।

    रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मकान तक पहुंचने का रास्ता था। मकान जिस गली में स्थित है वह काफी संकरी है। इसके कारण बचाव दल और मशीनों को अंदर ले जाने में परेशानी हुई। स्थिति को देखते हुए सबसे पहले आसपास की बिजली आपूर्ति बंद कराई गई ताकि टूटे हुए हिस्से और मलबे के बीच किसी तरह के शॉर्ट सर्किट का खतरा न रहे। इसके बाद नगर निगम की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया।

    संकरी गली के कारण जेसीबी मशीन को भी मौके तक पहुंचाने में काफी मुश्किल हुई। रेस्क्यू टीम ने मकान से बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने का फैसला किया। इसके लिए बाड़े की पिछली दीवार को तोड़ा गया। रास्ता बनने के बाद बचाव दल अंदर पहुंच सका और एक एक करके फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान के बाद बुजुर्गों महिलाओं और बच्चों समेत सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    मकान में रहने वाले चंदन सिंह ने बताया कि उनके अलावा लाल सिंह विक्रम सिंह और ईश्वर सिंह के परिवार भी इसी बाड़े में रहते हैं। मकान का अगला हिस्सा गिरने के बाद बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया था। अंदर मौजूद परिवारों में बुजुर्गों और बच्चों के होने के कारण चिंता और बढ़ गई थी। राहत दल की मदद से सभी को बाहर निकाला गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम के अपर आयुक्त सौरभ सिंह भी मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। देर रात तक मकान का मलबा हटाने का काम जारी रहा। प्रशासन की ओर से आसपास के हिस्से की स्थिति का भी जायजा लिया गया।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक तिलक वार्ड में बड़ी संख्या में पुराने और जर्जर मकान मौजूद हैं। इनमें कई मकान 70 से 100 साल पुराने बताए जाते हैं। बारिश के बाद ऐसे मकानों की स्थिति और कमजोर होने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर मकानों को लेकर पहले भी नगर निगम से शिकायतें की गई हैं।

    अपर आयुक्त सौरभ सिंह ने बताया कि नगर निगम अब अभियान चलाकर जर्जर मकानों को चिन्हित करेगा। जरूरत के अनुसार ऐसे मकानों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की आशंका को कम किया जा सके।

  • RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री

    RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पिछले पौने तीन साल के दौरान विश्वविद्यालय में छह कुलसचिव बदल चुके हैं। किसी अधिकारी ने करीब छह महीने तक जिम्मेदारी संभाली तो किसी का कार्यकाल आठ महीने के आसपास रहा। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुछ समय के लिए बायो साइंस विभाग के प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था लेकिन कुछ ही घंटों बाद उच्च शिक्षा विभाग की ओर से डीके बग्गा को नया कुलसचिव बनाए जाने का आदेश जारी हो गया। अब प्रोफेसर संधू नए कुलसचिव के ज्वाइन करने तक ही यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

    रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पांच जिलों के करीब 163 कॉलेज जुड़े हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में कुलसचिव का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। लगातार बदलाव के कारण प्रशासनिक कामकाज में स्थायित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुलगुरु के आदेश पर प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था। हालांकि देर रात भोपाल से उच्च शिक्षा विभाग का आदेश आने के बाद यह व्यवस्था भी अस्थायी साबित हुई और डीके बग्गा को नया कुलसचिव नियुक्त कर दिया गया।

    पिछले करीब पौने तीन साल में प्रोफेसर रश्मि टंडन डॉ. संतोष जाटव डॉ. रत्नेश कुरलिया आरएस बघेल प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह और डॉ. रविशंकर सोनवाल कुलसचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें आरएस बघेल की नियुक्ति शासन स्तर पर कुलसचिव के तौर पर हुई थी। उन्होंने करीब 11 महीने तक पद संभाला और इसके बाद सेवानिवृत्त हो गए। वहीं डॉ. रत्नेश कुरलिया को शासन की ओर से अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। अब नए कुलसचिव के रूप में डीके बग्गा की नियुक्ति हुई है।

    विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। यहां करीब छह हजार सीटें हैं और 29 से ज्यादा विभाग संचालित हो रहे हैं लेकिन नियमित प्राध्यापकों की संख्या महज 16 बताई जा रही है। विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के 156 पद स्वीकृत हैं। कई विभागों में नियमित शिक्षक नहीं होने के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ऐसे में नियमित शिक्षकों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपे जाने से अकादमिक और शोध कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    विश्वविद्यालय में उपकुलसचिव के अलावा तीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार फाइनेंस कंट्रोलर और परीक्षा नियंत्रक जैसे पद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए शिक्षकों की सेवाएं लेने का मामला सामने आया है। छात्रों का कहना है कि कुलसचिव की जिम्मेदारी बार बार बदलने से विश्वविद्यालय के कामकाज पर असर पड़ रहा है। परीक्षा और परिणामों को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासनिक नेतृत्व में स्थायित्व को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    इस बीच पूर्व कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल का चार दिन पहले गुना तबादला किया गया है। इससे पहले उन्होंने कुलगुरु और राज्यपाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में काम करने के माहौल को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि एक कर्मचारी को निलंबित करने के बाद उनके खिलाफ षड्यंत्र रचे जाने की आशंका है।

    अब विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव डीके बग्गा के कार्यभार संभालने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है इस पर नजर रहेगी। साथ ही शिक्षकों के रिक्त पद भरने की प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम से जुड़े मामलों में सुधार को लेकर भी विश्वविद्यालय के अगले कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • अस्पतालों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, 5 जनहित याचिकाओं पर सरकार से मांगा ताजा स्टेटस रिपोर्ट

    अस्पतालों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, 5 जनहित याचिकाओं पर सरकार से मांगा ताजा स्टेटस रिपोर्ट


    जबलपुर  । मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मौजूदा स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय मांगा गया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। इस दौरान सरकार की ओर से दी जाने वाली ताजा रिपोर्ट में अब तक की कार्रवाई और मौजूदा स्थिति का ब्यौरा सामने आने की उम्मीद है।

    लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं में प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरटीआई के जरिए मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया है कि जबलपुर शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इनमें से 63 संस्थानों का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए जाने की जानकारी सामने आई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन पंजीयन प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं इसकी जांच जरूरी है।

    जनहित याचिकाओं में जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में निजी अस्पतालों के पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नए अस्पतालों और नर्सिंग होम का भौतिक सत्यापन किए बिना केवल ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं के पंजीयन से पहले जरूरी मानकों की जांच होना महत्वपूर्ण है।

    मामले में फायर सेफ्टी की अनुमति भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि किसी निजी अस्पताल के पास जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी उपलब्ध नहीं है तो उसे पंजीयन किस आधार पर दिया गया। इसी तरह नगर निगम से मिलने वाली आवश्यक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जनहित याचिकाओं में अस्पतालों के पंजीयन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने और संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि सरकार पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर चुकी है। हालांकि मामले की वर्तमान स्थिति बताने वाली ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार दिन का समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने सरकार को समय देते हुए यह भी निर्देश दिया कि नई रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पक्ष रखा। अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट के सामने सरकार की ताजा स्टेटस रिपोर्ट होगी। इसके आधार पर अदालत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन को लेकर लगाए गए आरोपों तथा सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर आगे विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि पंजीयन प्रक्रिया को लेकर सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और आगे किन स्तरों पर कार्रवाई की जानी है।

  • बरेला में अचानक रुका CM मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय, फ्री कोचिंग देने वाले युवा का किया सम्मान

    बरेला में अचानक रुका CM मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय, फ्री कोचिंग देने वाले युवा का किया सम्मान


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार रात मंडला से सड़क मार्ग के जरिए जबलपुर लौट रहे थे। इसी दौरान बरेला में उनका काफिला अचानक रुक गया। मुख्यमंत्री ने सड़क किनारे स्थित चाय की दुकान पर पहुंचकर चाय पी और स्थानीय लोगों से बातचीत की। करीब रात 10 बजे हुए इस अचानक चाय स्टॉप के दौरान मुख्यमंत्री के साथ भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने बच्चों को निशुल्क कोचिंग देने वाले युवा मयंक साहू का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया और उसके प्रयास की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंडला में आयोजित तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कार से डुमना विमानतल की ओर जा रहे थे। बरेला में शारदा माता मंदिर के सामने बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए जमा थे। जब मुख्यमंत्री की नजर लोगों पर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। इसके बाद वे सड़क किनारे स्थित अग्रवाल होटल नाम की चाय की दुकान पर पहुंचे और वहां बैठकर चाय पी।

    मुख्यमंत्री के अचानक दुकान पर पहुंचने से वहां मौजूद लोग भी उत्साहित नजर आए। मुख्यमंत्री ने दुकान संचालक से बातचीत की और चाय के पैसे भी खुद चुकाए। इस दौरान स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मौके पर भाजपा के जबलपुर नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर और भाजपा दिव्यांगजन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप रजक सहित अन्य नेता और अधिकारी मौजूद थे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला बरेला के सनराइज फैमिली ढाबे पर भी रुका। यहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने ढाबे पर भी चाय पी और संचालक परिवार से बातचीत की। यह ढाबा सास और बहू द्वारा मिलकर संचालित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने ढाबा संचालक आरती दुबे और उनकी बहू सुरभि दुबे से मुलाकात कर परिवार के सदस्यों का हालचाल जाना।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने बरेला के बच्चों के लिए निशुल्क कोचिंग चलाने वाले युवा मयंक साहू को भी सम्मानित किया। डॉ. मोहन यादव ने मयंक को शॉल ओढ़ाया और बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के उसके प्रयास की तारीफ की। मयंक स्थानीय बच्चों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाने का काम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उसके इस प्रयास को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए प्रोत्साहित किया।

    मुख्यमंत्री के इस अचानक रुकने से बरेला में मौजूद लोगों के लिए यह रात खास बन गई। आमतौर पर सुरक्षा घेरे और निर्धारित कार्यक्रमों के बीच चलने वाले मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों के बीच रुककर चाय पी और उनसे बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में सामाजिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे युवा को सम्मान देकर उसका उत्साह भी बढ़ाया। मुख्यमंत्री का यह दौरा किसी निर्धारित कार्यक्रम के बजाय रास्ते में अचानक लिए गए इन छोटे पड़ावों के कारण चर्चा में रहा।

  • वेंटिलेटर पर थी 23 साल की दीक्षा, बोल नहीं पाई तो भाई के हाथ पर लिखे तीन नामों के संकेत, ससुराल पर गंभीर आरोप

    वेंटिलेटर पर थी 23 साल की दीक्षा, बोल नहीं पाई तो भाई के हाथ पर लिखे तीन नामों के संकेत, ससुराल पर गंभीर आरोप


    जबलपुर ।जबलपुर में 23 वर्षीय नवविवाहिता की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। मायके वालों ने दीक्षा पांडे की मौत को लेकर उसके पति अक्षय उर्फ सतीष मिश्रा सास उमा मिश्रा और ननद सोनम पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि शादी के करीब डेढ़ साल बाद भी बच्चा नहीं होने को लेकर दीक्षा को लगातार ताने दिए जा रहे थे। हालत बिगड़ने के बाद उसे जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां वह वेंटिलेटर पर थी। बोलने की स्थिति में नहीं होने के कारण उसने भाई से लिखकर बातचीत करने की कोशिश की।

    दीक्षा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर की रहने वाली थी। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी छतरपुर निवासी अक्षय से हुई थी। अक्षय सीआरपीएफ में नागपुर में पदस्थ है। परिवार के मुताबिक 24 सितंबर को अक्षय दीक्षा को लेकर छतरपुर आया था। इसके बाद 27 सितंबर को परिवार के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दोनों हटा थाना क्षेत्र के ग्राम पाटन स्थित चाचा ससुर के घर पहुंचे थे।

    मायके पक्ष के अनुसार 29 सितंबर की दोपहर दीक्षा अपनी मां से फोन पर बातचीत कर रही थी। इसी दौरान उसकी ननद सोनम से विवाद होने की बात सामने आई। भाई भूपेंद्र का आरोप है कि सोनम दीक्षा को जबरन घर से बाहर ले जाने लगी। परिवार का दावा है कि फोन पर बातचीत के दौरान उसकी मां ने दीक्षा की आवाज सुनी थी। इसके बाद कथित तौर पर उसका मुंह दबाने और गला दबाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    घटना के बाद दीक्षा की हालत गंभीर बताई गई और उसे जबलपुर के बड़ेरिया प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने स्थिति नाजुक होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा। जानकारी मिलने के बाद उसका भाई भूपेंद्र झांसी से जबलपुर पहुंचा। दीक्षा बोल नहीं पा रही थी इसलिए भाई ने उससे लिखकर बातचीत करने की कोशिश की।

    भूपेंद्र के मुताबिक इसी दौरान दीक्षा ने अपनी हथेली पर पेन से S U और A अक्षर लिखे। मायके वालों ने इन अक्षरों को सोनम उमा और अक्षय के नाम से जोड़ते हुए दावा किया कि दीक्षा ने अपनी हालत के बावजूद आरोपियों की ओर संकेत करने की कोशिश की थी। परिवार ने इसे घटना से जुड़ा अहम संकेत बताया है। हालांकि इन अक्षरों का वास्तविक अर्थ क्या था और इन्हें किस संदर्भ में लिखा गया था यह जांच का विषय है।

    मायके पक्ष ने दीक्षा के गले पर निशान होने का भी दावा किया है। परिवार का आरोप है कि बच्चा नहीं होने की वजह से उसे ससुराल में मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। परिजनों के मुताबिक लगातार तनाव के कारण दीक्षा कुछ समय अपने पति के साथ नागपुर में रहने लगी थी। उनका आरोप है कि वहां रहने के दौरान भी उसे फोन के जरिए परेशान किया जाता था।

    दीक्षा को 30 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार सोमवार को झांसी में अंतिम संस्कार करेगा।

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गोहलपुर थाना प्रभारी रीतेश पांडे के अनुसार घटनास्थल हटा थाना क्षेत्र में आता है। गोहलपुर पुलिस ने जीरो पर मर्ग कायम किया है और मर्ग डायरी जांच के लिए हटा थाने भेजी जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब परिवार के आरोपों के साथ घटनास्थल और मेडिकल साक्ष्यों की भी जांच करेगी।

  • ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार

    ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार


    जबलपुर । गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को देशभर में ड्राई डे रहा लेकिन जबलपुर में इस दौरान शराब बिक्री के कथित मामले सामने आने से सवाल खड़े हो गए हैं। रांझी क्षेत्र में शराब दुकान बंद होने के बाद भी अंदर से शराब बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दुकान के भीतर बनी कथित गुप्त खिड़की के जरिए ग्राहकों को शराब दिए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान शराब निर्धारित कीमत से अधिक यानी ओवररेट में बेची गई। हालांकि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामला रांझी के बड़ा पत्थर स्थित शराब दुकान से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 2 अक्टूबर को दुकान बंद रहने के बावजूद यहां दिन से लेकर देर रात तक शराब की कथित बिक्री की गई। दुकान नय्यर एंड कोहली ग्रुप की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ड्राई डे के दौरान शराब दुकानों को बंद रखने के नियम के बावजूद यदि बिक्री हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।

    वायरल वीडियो में दुकान के अंदर से एक छोटे रास्ते या कथित गुप्त खिड़की के जरिए शराब दिए जाने का दावा किया गया है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ग्राहकों से शराब की एमआरपी से ज्यादा रकम ली गई। हालांकि इस पूरे मामले में वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चर्चा तेज है और लोग ड्राई डे के दौरान दुकानों की निगरानी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    इसी बीच जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्र बरगी में भी शराब बिक्री से जुड़ा एक मामला सामने आया। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष संजू लाल ने कथित तौर पर शराब बेच रहे दो युवकों को पकड़े जाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर बरगी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को शराब के साथ थाने ले जाया गया। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई गई थी और किस उद्देश्य से बेची जा रही थी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगी नगर चौकी क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में ड्राई डे के दिन सामने आए इस मामले ने एक बार फिर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित दिन पर शराब बिक्री रोकने के लिए प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद यदि शराब बिक्री के मामले सामने आते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

    फिलहाल रांझी में वायरल वीडियो और बरगी में पकड़े गए दोनों युवकों के मामले में जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं और शराब बिक्री किस स्तर पर हुई इसकी पुष्टि जांच के आधार पर होगी। इस घटना ने ड्राई डे पर शराब दुकानों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन के सामने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

  • शव के पास पति के आंसू और पीछे छिपा था बड़ा राज, 70 लाख के बीमे के लिए पत्नी की हत्या का खुलासा

    शव के पास पति के आंसू और पीछे छिपा था बड़ा राज, 70 लाख के बीमे के लिए पत्नी की हत्या का खुलासा

    जबलपुर । जबलपुर जिले के पाटन में गर्भवती कविता चौधरी की मौत के 28 दिन बाद पुलिस ने मामले का चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस घटना को शुरुआत में सड़क हादसा माना जा रहा था वह पुलिस जांच में सुनियोजित हत्या निकली। आरोप है कि कविता के पति प्रयास पांडे ने करीब 70 लाख रुपए की बीमा राशि हासिल करने के लिए उसकी हत्या की साजिश रची और पांच लाख रुपए में सुपारी देकर वारदात को अंजाम दिलवाया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि कथित मास्टरमाइंड पति और उसका साथी अभी फरार बताए जा रहे हैं।

    पुलिस जांच के मुताबिक प्रयास पांडे ने वर्ष 2022 में कविता चौधरी से प्रेम विवाह किया था। दोनों की शादी अलग समाज में होने के कारण परिवार में इस रिश्ते को लेकर विरोध और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इसी बीच प्रयास को जानकारी हुई कि कविता के नाम करीब 70 लाख रुपए की बीमा पॉलिसी है। पुलिस के अनुसार इसके बाद उसने पत्नी से छुटकारा पाने और बीमा राशि हासिल करने की योजना बनाई। हत्या की साजिश कथित तौर पर घटना से करीब दो महीने पहले शुरू की गई थी।

    बताया गया कि प्रयास ने सबसे पहले पाटन की शराब दुकान के पास दो युवकों से संपर्क कर पत्नी की हत्या के लिए रकम की पेशकश की लेकिन दोनों ने इस काम से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके दोस्त मान सिंह के जरिए चौधरी मोहल्ले के धनीराम रामजी और विक्रम अहिरवार से संपर्क हुआ। पुलिस के अनुसार पांच लाख रुपए में हत्या का सौदा तय हुआ और प्रयास ने एक लाख रुपए एडवांस के तौर पर दिए।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने घटना को सड़क हादसा दिखाने के लिए पहले से तैयारी की थी। इसके लिए उन्होंने तीन से चार बार घटनास्थल के आसपास जाकर पूरी योजना की प्रैक्टिस की। वारदात में इस्तेमाल करने के लिए करीब 20 हजार रुपए देकर एक पिकअप वाहन किराए पर लिया गया था। घटना वाले दिन प्रयास फोन पर कविता से लगातार बात करता रहा और उसकी लोकेशन अपने साथियों तक पहुंचाता रहा।

    4 सितंबर की रात करीब 9 बजे कविता एक्टिवा से रानीताल पुलिया के पास पहुंची। पुलिस के अनुसार इसी दौरान विक्रम ने पिकअप से पीछे से एक्टिवा को टक्कर मारी। टक्कर लगने के बाद कविता सड़क पर गिर गई और आरोप है कि उसके ऊपर वाहन चढ़ा दिया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी पिकअप को नहर में ले जाकर धोने के बाद वापस कर आए।

    घटना के बाद प्रयास मौके पर पहुंचा और पुलिस तथा परिजनों के सामने पत्नी की मौत पर शोक जताता रहा। वह अंतिम संस्कार तक पुलिस के साथ मौजूद रहा। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे अज्ञात वाहन से हुआ सड़क हादसा माना था लेकिन बाद में एक मुखबिर से मिली सूचना ने जांच की दिशा बदल दी। पुलिस को जानकारी मिली कि प्रयास कुछ दिन पहले शराब दुकान के पास पत्नी की हत्या को लेकर बातचीत कर रहा था।

    इसके बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की साजिश और वारदात से जुड़ी जानकारी दी। इसके आधार पर धनीराम रामजी और विक्रम अहिरवार को गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस फरार प्रयास पांडे और उसके साथी मान सिंह की तलाश कर रही है। मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बीमा पॉलिसी से जुड़ी जानकारी और हत्या की साजिश के बीच क्या पूरा संबंध था।

  • आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार ने बताया 6 महीने में 15 हजार का आंकड़ा, 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

    आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार ने बताया 6 महीने में 15 हजार का आंकड़ा, 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई


    जबलपुर। मध्यप्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी रखी गई। अब इस मामले में 3 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे फिर सुनवाई होगी। इसके बाद हाईकोर्ट की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी जहां मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को प्रस्तावित है।

    मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा ने सरकार की ओर से पेश की गई कार्रवाई और इंतजामों को संतोषजनक बताया। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर को सरकार की रिपोर्ट पर विस्तार से विचार किया जाएगा और जरूरत के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

    दरअसल आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई निर्देश जारी कर चुका है। 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे से जुड़े दिशा निर्देश दिए थे। इसके बाद 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इस समस्या के समाधान तक मामले की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए थे। इसी क्रम में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले को संज्ञान में लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा।

    हाईकोर्ट के सामने सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। सरकार के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान 15 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है। सरकार ने सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा और कुत्तों के नियंत्रण से जुड़े दूसरे उपायों की जानकारी भी अदालत के सामने रखी।

    सरकार ने कचरा प्रबंधन और आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर भोजन मिलने की समस्या को लेकर भी कदम उठाने की बात कही है। खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडरों को खाद्य अपशिष्ट का उचित निपटान करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्हें कचरा बंद डस्टबिन में रखने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही खान-पान के स्टॉल के आसपास आवारा कुत्तों को भोजन नहीं कराने के लिए भी कहा जा रहा है।

    अब हाईकोर्ट 3 नवंबर को सरकार की ओर से पेश आंकड़ों और उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा। इसके बाद अदालत की ओर से जरूरी निर्देश जारी किए जा सकते हैं। हाईकोर्ट की रिपोर्ट आगे सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी और 17 नवंबर को शीर्ष अदालत में इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी।