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  • ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम

    ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम


    जबलपुर । जबलपुर के परसवाड़ा निवासी 27 वर्षीय दीपक उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने घटना को लेकर कई सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दीपक की मां उमा पटेल का कहना है कि उनका बेटा करीब दो साल पहले वृंदावन गया था और उसके बाद परिवार उसकी एक झलक के लिए भी तरसता रहा। परिवार का दावा है कि वे कई बार वृंदावन पहुंचे लेकिन उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया। अब उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।

    परिवार के मुताबिक दीपक पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसने लिखित परीक्षा और दौड़ में सफलता हासिल की थी लेकिन शारीरिक परीक्षा में वह चयनित नहीं हो सका। इसके बाद उसका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा। वह गांव में भजन और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहने लगा था। साल 2023 में वह भय्याजी सरकार दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा सेवा टोली से भी जुड़ा था।

    करीब आठ महीने बाद जब दीपक जबलपुर लौटा तो उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह बार बार वृंदावन जाने की इच्छा जताता था। परिवार की ओर से आपत्ति के बावजूद फरवरी 2024 में वह वृंदावन चला गया और वहां आश्रम में सेवा करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपने माता पिता को फोन कर गुरु दीक्षा लेने की जानकारी दी। उसने परिवार से कहा था कि उसका जबलपुर में मन नहीं लगता और वह आश्रम में रहकर सेवा करना चाहता है।

    परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटे की इच्छा का सम्मान किया। बाद में दीपक कुछ समय के लिए जबलपुर भी आया लेकिन धीरे धीरे परिवार से उसका संपर्क कम होता गया। उसके पास मोबाइल नहीं रहता था और करीब चार महीने बाद संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। जुलाई 2024 में माता पिता और उसका छोटा भाई वृंदावन पहुंचे लेकिन परिवार के अनुसार उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया।

    परिजनों का दावा है कि इसके बाद वे कई बार वृंदावन गए। परिवार के मुताबिक 10 से ज्यादा बार आश्रम पहुंचने के बावजूद उन्हें गेट से ही वापस लौटना पड़ा। जून 2026 में 17 से अधिक परिजन एक साथ वृंदावन पहुंचे थे लेकिन तब भी दीपक से मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान परिवार को जानकारी मिली कि आश्रम में दीपक का नाम रसिक दुलारी शरण हो गया है। परिवार का कहना है कि यह नाम कब बदला गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

    दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार की परेशानी और बढ़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें फोन पर बताया गया कि दीपक के साथ हादसा हुआ है और वह इमारत से गिर गया है। इसके बाद परिवार वृंदावन के लिए रवाना हुआ। परिवार का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें यह पता लगाने में भी काफी परेशानी हुई कि दीपक को किस अस्पताल में ले जाया गया है और उसका शव कहां रखा है।

    काफी तलाश के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें दीपक का शव मिला। परिवार का कहना है कि शुरुआत में उन्हें केवल हादसे और उपचार की जानकारी दी गई थी। बाद में सामने आई मौत की जानकारी ने परिवार को झकझोर दिया। दीपक की मां का कहना है कि उनका बेटा सेना में जाना चाहता था लेकिन बाद में भक्ति की राह पर चला गया और अब परिवार के पास उसकी यादें ही बची हैं।

    परिवार ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दीपक दो साल से परिवार से दूर था और कई बार वृंदावन जाने के बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। अब वे यह जानना चाहते हैं कि उसके साथ आखिर क्या हुआ और उसकी मौत से पहले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। मामले में जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ

    RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय यानी आरडीवीवी में कुलसचिव की सुरक्षा को लेकर मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने निलंबित चौकीदार रविंद्र तिवारी से खुद को खतरा बताते हुए कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा को दो पत्र लिखे हैं। कुलसचिव ने 21 सितंबर और फिर 24 सितंबर को सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। दोनों पत्रों की प्रतियां सिविल लाइन थाना प्रभारी अपर सचिव उच्च शिक्षा विभाग और कुलगुरु के निज सचिव को भी भेजी गई हैं।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में बताया कि रविंद्र तिवारी को कार्य में कथित कदाचरण के मामले में उनके स्तर से निलंबित किया गया है। पत्र के अनुसार कुलसचिव को आशंका है कि निलंबन के बाद उनके खिलाफ किसी तरह का षड्यंत्र रचा जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि उनके खिलाफ झूठी शिकायत की जा सकती है या उन्हें किसी तरह नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में चौकीदार के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रविंद्र तिवारी स्वभाव से उग्र है और कई बार नशे की हालत में रहता है। पत्र के मुताबिक वह पहले भी कुलसचिव कार्यालय में नशे की हालत में आया था। उस समय कर्मचारियों ने उसे समझाइश देकर वापस भेज दिया था।

    21 सितंबर को लिखे पत्र में कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के पूर्व सहायक कुलसचिव पवन साहू के साथ हुए कथित विवाद का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार रविंद्र तिवारी का पवन साहू के साथ झूमाझटकी गाली गलौज और अभद्र व्यवहार का विवाद हुआ था। पत्र में यह भी आरोप है कि पवन साहू के घर जाकर गाली गलौज करने और दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया गया था।

    कुलसचिव के पत्र के मुताबिक रविंद्र तिवारी ने पवन साहू पर महिला उत्पीड़न से जुड़े आरोप भी लगाए थे। कुलसचिव ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और पवन साहू ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सिविल लाइन थाना पुलिस को भी आवेदन दिया था। इन घटनाओं का हवाला देते हुए कुलसचिव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।

    कुलसचिव ने यह भी बताया कि वह वर्तमान में जबलपुर में अकेले रह रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह भयग्रस्त हैं और इस वजह से कार्यालयीन कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कुलगुरु से कार्यालय और निवास दोनों जगह सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    24 सितंबर को लिखे दूसरे पत्र में कुलसचिव ने कहा कि 21 सितंबर को दिए गए आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई या आदेश नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने दोबारा अपनी सुरक्षा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह लगातार डर और तनाव की स्थिति में हैं।

    इसी बीच कुलसचिव ने कर्मचारी नेता और पूर्व महासचिव राजेंद्र शुक्ला को भी 25 सितंबर को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने समाचारों की कटिंग एक वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट की जिससे कुलसचिव की छवि प्रभावित हुई। नोटिस में उनसे इस संबंध में दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    मामले में कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल कुलसचिव की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद विश्वविद्यालय का यह मामला चर्चा में है।

  • जबलपुर में शराब दुकान के बाहर धरना और 60 हजार की मांग का आरोप कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज

    जबलपुर में शराब दुकान के बाहर धरना और 60 हजार की मांग का आरोप कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज


    जबलपुर । जबलपुर में शराब दुकान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। धनवंतरी नगर क्षेत्रJabalpur News, Congress Leader FIR, Liquor Shop Dispute, Abhishek Pathak, Madhya Pradesh News की शराब दुकानों के संचालक की शिकायत पर गढ़ा पुलिस ने कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष अभिषेक पाठक के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ता निखिल सोनी ने आरोप लगाया है कि उनसे तीन शराब दुकानों के लिए कुल 60 हजार रुपए प्रतिमाह मांगे जा रहे थे। रकम देने से इनकार करने के बाद दुकान के सामने धरना प्रदर्शन किया गया और दुकान बंद कराने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस ने 22 सितंबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शराब दुकान संचालक का आरोप है कि पिछले करीब तीन वर्षों से अलग अलग मौकों पर प्रतिमाह 20 हजार रुपए दिए जाते थे। शिकायत के मुताबिक अब तीनों दुकानों के लिए अलग अलग 20 हजार रुपए मांगे गए जिससे कुल रकम 60 हजार रुपए हो जाती है। संचालक का कहना है कि जब उन्होंने यह रकम देने से इनकार किया तो अभिषेक पाठक अपने साथियों के साथ शराब दुकान के सामने पहुंच गए और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान दुकानों से अवैध और नकली शराब बिक्री किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि रकम नहीं देने पर दुकान बंद कराने और कारोबार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इसी विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक कथित AI वीडियो भी वायरल होने की बात सामने आई है। दुकान संचालक का आरोप है कि रकम की मांग पूरी नहीं होने पर शराब की गलत बिक्री से जुड़ा आरोप लगाते हुए यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। पुलिस अब वीडियो के स्रोत और उसकी वास्तविकता की जांच करेगी।

    मामले में करीब एक मिनट 32 सेकेंड का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस ऑडियो में प्रति दुकान 20 हजार रुपए की रकम को लेकर बातचीत सुनाई देती है। इसमें 40 हजार रुपए भेजने और बाकी रकम बाद में देने की बात होने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि ऑडियो असली है या उसमें किसी तरह की काट छांट या एडिटिंग की गई है इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    वहीं कांग्रेस नेता अभिषेक पाठक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वायरल ऑडियो को काट छांटकर पेश किया गया है। पाठक के मुताबिक ऑडियो में 40 हजार रुपए की जो चर्चा है वह शराब दुकान के किराए को लेकर थी और इसका किसी तरह की अवैध वसूली से संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि दुकान संचालक किराए की पूरी रकम नहीं दे रहे थे और इसी को लेकर बातचीत हुई थी।

    पुलिस ने अभिषेक पाठक के खिलाफ BNS की धारा 308(2) और 351(2) के तहत FIR दर्ज की है। FIR में घटना की अवधि 25 अप्रैल से 22 सितंबर 2026 तक बताई गई है। अब पुलिस शिकायतकर्ता के बयान के साथ कथित ऑडियो और वीडियो तथा दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। फिलहाल FIR दर्ज होना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की वास्तविकता और घटनाक्रम से जुड़े तथ्य पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

  • हाईकोर्ट से विदाई के साथ समाजसेवा का संकल्प: पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह PM राहत कोष में देंगे एक करोड़ रुपए

    हाईकोर्ट से विदाई के साथ समाजसेवा का संकल्प: पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह PM राहत कोष में देंगे एक करोड़ रुपए


    जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने रिटायरमेंट के मौके पर समाजसेवा से जुड़ा बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष में एक करोड़ एक लाख रुपए देने की घोषणा की है। यह रकम उन्हें अपने जनरल प्रोविडेंट फंड यानी GPF से प्राप्त होगी। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी इंदिरा के साथ देहदान करने का भी संकल्प लिया है। जस्टिस सिंह ने यह घोषणा गुरुवार को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल कार्यक्रम के दौरान की। इसी दिन वह न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए।

    फेयरवेल कार्यक्रम में जस्टिस सिंह ने अपने इस फैसले के पीछे पत्नी इंदिरा की इच्छा को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी चाहती थीं कि रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए कुछ किया जाए। इसी भावना का सम्मान करते हुए दोनों ने यह संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि GPF की राशि उनके बैंक खाते में आते ही उसे प्रधानमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। उनका यह फैसला कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    जस्टिस सिंह ने अपने जीवन से जुड़ा एक भावुक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह सिर्फ छह महीने के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पिता के साथ उनकी मौसी स्वर्गीय निर्मला बुच और मौसा स्वर्गीय महेश नीलकंठ बुच ने उन्हें बेटे की तरह पाला। निर्मला बुच मध्य प्रदेश की मुख्य सचिव भी रह चुकी थीं। जस्टिस सिंह ने अपने पालन पोषण और जीवन निर्माण में परिवार की भूमिका को याद करते हुए अपनी बात रखी।

    फेयरवेल के दौरान उन्होंने न्याय व्यवस्था में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले अदालतों में मुकदमों की सुनवाई मुख्य रूप से फिजिकल मोड में होती थी लेकिन अब वर्चुअल सुनवाई ने न्यायिक प्रक्रिया को कई स्तर पर आसान बनाया है। तकनीक के इस्तेमाल से अदालतों की कार्यप्रणाली में बदलाव आया है और न्यायिक प्रक्रिया के सामने मौजूद कई व्यावहारिक चुनौतियों को कम करने में मदद मिली है।

    कार्यक्रम के दौरान पत्नी इंदिरा का जिक्र करते हुए जस्टिस सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में पत्नी की बातों का सम्मान किया है। अब रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए देहदान करने का उनका संकल्प है और वह इस इच्छा को भी पूरा करेंगे। जैसे ही उन्होंने यह बात कही पूरा कोर्ट रूम तालियों से गूंज उठा।

    फेयरवेल कार्यक्रम को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने भी संबोधित किया। उन्होंने जस्टिस सिंह के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारियां दी गईं उन्होंने उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया। जस्टिस सिंह ने हाईकोर्ट के जज के रूप में करीब तीन साल काम किया और इस दौरान कुल 8788 मुकदमों का निपटारा किया।

    चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि किसी जज के काम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उन्होंने कितने मामलों का निपटारा किया बल्कि उनके फैसलों की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है। इस तरह जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की विदाई उनके न्यायिक कार्यकाल के आंकड़ों के साथ समाजसेवा और देहदान के संकल्प के लिए भी याद की जाएगी।

  • 100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क

    100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क


    जबलपुर । ज्जबलपुर जिले के दुर्गानगर गांव में सड़क की समस्या ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया कि अब उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद सड़क सुधारने का फैसला किया है। करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपना घर बार छोड़कर यहां बसे ग्रामीण आज अपने गांव की करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए गैंती फावड़ा और तसला उठा रहे हैं। गांव के 100 से ज्यादा महिला पुरुष बच्चे और दिव्यांग रोज सुबह श्रमदान कर सड़क को बारिश में चलने लायक बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर मुरम और पत्थर की व्यवस्था कर रास्ते में डाल रहे हैं।

    जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क बारिश शुरू होते ही कीचड़ में बदल जाती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    सड़क की बदहाली का गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव के नजदीक पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव में जाकर रहने की मजबूरी होती है ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने जाने की परेशानी नहीं बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।

    दुर्गानगर के ग्रामीण बताते हैं कि वे लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत की बैठकों में भी सड़क का मुद्दा कई बार उठाया गया। जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव देने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। इसके बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुद रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

    ग्रामीण भीमा बाई के मुताबिक सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब गांव के लोगों को इसे खुद ही बनाने के लिए आगे आना पड़ा। गांव के कई लोग मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। इसके बावजूद वे रोज सुबह मजदूरी पर जाने से पहले करीब दो से तीन घंटे सड़क सुधारने में लगा रहे हैं। पहले सड़क पर काम किया जाता है और इसके बाद लोग रोजी रोटी कमाने के लिए निकलते हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में स्थानीय विधायक से लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई लेकिन हर बार निरीक्षण और जल्द कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि खराब रास्ते के कारण उनका स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।

    मामला सामने आने के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान कराने की बात कही है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास करने की बात कही है।

    फिलहाल दुर्गानगर के ग्रामीण अपने श्रम और संसाधनों से रास्ता सुधार रहे हैं। जिन लोगों ने चार दशक पहले विकास परियोजना के लिए अपना घर गांव और जमीन छोड़ी थी वे आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।

  • जबलपुर में घर के अंदर सांप ने उड़ाई परिवार की नींद ढाई फीट लंबे बुल स्नेक को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा

    जबलपुर में घर के अंदर सांप ने उड़ाई परिवार की नींद ढाई फीट लंबे बुल स्नेक को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा


    जबलपुर। जबलपुर के गढ़ा बाजार इलाके में एक कच्चे मकान में पिछले तीन दिनों से सांप की मौजूदगी ने पूरे परिवार की चिंता बढ़ा दी थी। कभी वॉशरूम तो कभी रसोई और कभी बिस्तर पर दिखाई देने वाले सांप के कारण परिवार के लोग डर के माहौल में रहने को मजबूर थे। सांप करीब ढाई फीट लंबा था और उसका रंग बादामी बताया गया है। उसके शरीर पर पीले रंग की गोल धारियां दिखाई दे रही थीं। लगातार तीन दिन तक घर के अलग अलग हिस्सों में नजर आने के बाद परिवार ने आखिरकार सर्प और वन्य प्राणी विशेषज्ञ से मदद मांगी।

    मामला गढ़ा बाजार में पुराने स्टेट बैंक के पास जवाहर लाल सेन के घर का है। रविवार सुबह करीब 10 बजे जवाहर लाल सेन ने सर्प और वन्य प्राणी विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे को सांप के घर में छिपे होने की सूचना दी। जानकारी मिलते ही गजेंद्र दुबे मौके पर पहुंचे और काफी सावधानी के साथ सांप की तलाश शुरू की। कुछ देर की मशक्कत के बाद उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। सांप के पकड़े जाने के बाद परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली।

    सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे के मुताबिक पकड़ा गया सांप गनैता प्रजाति का है जिसे बुल स्नेक भी कहा जाता है। यह सांप जहरीला नहीं होता लेकिन इसका स्वभाव काफी गुस्सैल और आक्रामक माना जाता है। खतरा महसूस होने या छेड़छाड़ किए जाने पर यह पीछे हटने के बजाय हमला करने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि घर में सांप दिखाई देने के बाद परिवार के लोगों ने खुद उसे पकड़ने का प्रयास नहीं किया और विशेषज्ञ को बुलाकर सुरक्षित रेस्क्यू कराया।

    विशेषज्ञ के अनुसार इस सांप के करीब 50 दांत होते हैं। इसका भोजन मुख्य रूप से छिपकली चिड़िया के अंडे और चूहों के बच्चे होते हैं। भोजन की तलाश में ऐसे सांप कई बार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। खासकर मौसम में उमस बढ़ने के दौरान सांप ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। इसी वजह से वे ईंट गिट्टी कचरे के ढेर और घर के आसपास मौजूद अंधेरी जगहों में छिप सकते हैं।

    सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद उसे उसके प्राकृतिक वातावरण यानी जंगल में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञ ने लोगों से अपील की कि घर के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें। ईंट गिट्टी और कचरे के ढेर को लंबे समय तक जमा करके न रखें क्योंकि ऐसी जगहें सांपों के छिपने का ठिकाना बन सकती हैं। घर की नालियों में फिनाइल डालने के साथ दीवारों में मौजूद दरारों को भी बंद करने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांप को छेड़ने से वह आक्रामक हो सकता है और ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। बेहतर है कि सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तुरंत प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ या संबंधित विभाग को सूचना दी जाए। गढ़ा में तीन दिन तक परिवार के लिए परेशानी बने सांप के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद अब घरवालों ने राहत की सांस ली है।

  • जबलपुर में साहित्य संवाद में भाषा और समाज के बदलते रिश्तों पर मंथन महाभोज और राग दरबारी के किरदारों ने खींचा ध्यान

    जबलपुर में साहित्य संवाद में भाषा और समाज के बदलते रिश्तों पर मंथन महाभोज और राग दरबारी के किरदारों ने खींचा ध्यान


    जबलपुर । जबलपुर में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित साहित्य संवाद में भाषा और समाज के बदलते रिश्तों पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम में साहित्यकारों और इतिहासकारों ने इस बात पर विचार रखा कि समय के साथ समाज की सोच उसकी परिस्थितियां और जीवनशैली बदलती रहती है और इन बदलावों का सीधा असर भाषा और साहित्य पर भी दिखाई देता है। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि वह अपने समय के समाज की तस्वीर भी सामने रखता है। किसी दौर को समझने के लिए उस दौर में लिखे गए साहित्य को पढ़ना बेहद जरूरी है।

    संवाद के दौरान हिंदी साहित्य की चर्चित रचनाओं और उनके यादगार किरदारों को भी चर्चा के केंद्र में रखा गया। मन्नू भंडारी के उपन्यास महाभोज के दा साहब और श्रीलाल शुक्ल के राग दरबारी के रूपन बाबू जैसे पात्रों का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने बताया कि साहित्य में गढ़े गए किरदार केवल कहानी का हिस्सा नहीं होते बल्कि वे अपने समय की सामाजिक व्यवस्था राजनीतिक परिस्थितियों और लोगों की मानसिकता को भी सामने लाते हैं। इन पात्रों के जरिए उस दौर के समाज में मौजूद जटिलताओं और बदलावों को समझने का अवसर मिलता है।

    कार्यक्रम में साहित्य और लेखन के लिए पढ़ने की आदत को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। साहित्यकारों ने कहा कि बेहतर लेखन केवल शब्दों को जोड़ने से नहीं आता बल्कि इसके लिए लगातार पढ़ना और अलग अलग विषयों को समझना जरूरी है। किताबें व्यक्ति को नई जानकारी देने के साथ उसके विचारों को विस्तार देती हैं। पढ़ने से भाषा समृद्ध होती है और किसी विषय को देखने का नजरिया भी व्यापक होता है। यही कारण है कि पुराने साहित्य और क्लासिक किताबों की उपयोगिता आज के दौर में भी बनी हुई है।

    वक्ताओं ने मौजूदा दौर में सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने माना कि इन माध्यमों ने कहानी और घटनाओं को देखने और समझने का तरीका काफी बदल दिया है। विजुअल माध्यम किसी घटना या कहानी को तुरंत सामने ला सकते हैं लेकिन किताबें पाठक को उसके भीतर उतरकर सोचने और परिस्थितियों को अलग नजरिए से समझने का अवसर देती हैं। साहित्य के माध्यम से समाज की बारीकियों को जिस गहराई से महसूस किया जा सकता है वह केवल दृश्य माध्यमों से हमेशा संभव नहीं होता।

    साहित्य संवाद में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। युवाओं ने साहित्यकारों और इतिहासकारों के साथ हिंदी साहित्य की किताबों कहानियों और चर्चित पात्रों को लेकर बातचीत की। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि पुराने साहित्य में दिखाई देने वाला समाज आज के दौर से किस तरह अलग है और किन परिस्थितियों में बदलाव आया है। संवाद के दौरान साहित्य को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने पर भी विचार हुआ।

    वक्ताओं ने कहा कि समय बदलने के बावजूद अच्छा साहित्य अपनी प्रासंगिकता नहीं खोता। कई दशक पहले लिखी गई किताबें आज भी पाठकों को प्रभावित करती हैं क्योंकि उनमें समाज और मनुष्य के व्यवहार से जुड़े ऐसे सवाल मौजूद होते हैं जो समय के साथ खत्म नहीं होते। साहित्य पुरानी पीढ़ियों के अनुभवों से जोड़ने के साथ वर्तमान को समझने की दृष्टि भी देता है। इसलिए भाषा और साहित्य को मजबूत बनाए रखने के लिए पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी है।

  • एक हफ्ते से पानी भरे प्लॉट में छिपा था मगरमच्छ: सड़क पर निकलते ही मचा हड़कंप वन विभाग ने किया रेस्क्यू

    एक हफ्ते से पानी भरे प्लॉट में छिपा था मगरमच्छ: सड़क पर निकलते ही मचा हड़कंप वन विभाग ने किया रेस्क्यू


    जबलपुर। जबलपुर के पनागर स्थित द्वारका परिसर में करीब एक सप्ताह से दहशत का कारण बना मगरमच्छ आखिरकार वन विभाग की टीम के हाथ लग गया। करीब 5 फीट लंबे मगरमच्छ के कॉलोनी के एक खाली प्लॉट में भरे पानी में छिपे होने की जानकारी सामने आने के बाद से ही वन विभाग की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। शुक्रवार सुबह पानी खाली करने की प्रक्रिया के दौरान मगरमच्छ अचानक प्लॉट से निकलकर सड़क की ओर आने लगा। पहले से तैयार वन विभाग की टीम ने उसे घेर लिया और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया। मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद कॉलोनी के रहवासियों ने राहत की सांस ली।

    बताया गया है कि द्वारका परिसर में 5 सितंबर को मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना वन विभाग को मिली थी। इसके बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शर्मा के निर्देश पर 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम बनाई गई। टीम ने खाली प्लॉट के आसपास लगातार निगरानी शुरू की। प्लॉट में काफी मात्रा में पानी भरा होने के कारण मगरमच्छ को पकड़ना आसान नहीं था। वह पानी के भीतर छिपा रहता था और टीम के पहुंचने पर दिखाई नहीं देता था।

    वन कर्मी शैलेश कुमार गौतम के मुताबिक शुरुआती तौर पर आशंका जताई गई कि मानसून के दौरान परियट नदी और आसपास की नहरों में तेज बहाव के कारण मगरमच्छ बहकर रिहायशी इलाके तक पहुंचा होगा। पानी के बहाव के साथ वह कॉलोनी के खाली प्लॉट में पहुंच गया और वहां जमा पानी में छिप गया। मगरमच्छ की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल था।

    रेस्क्यू टीम ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए कई प्रयास किए। टीम के सदस्य कमर तक पानी में उतरकर जाल लेकर उसे तलाशते रहे। कई बार जाल डालकर उसे पकड़ने की कोशिश की गई लेकिन मगरमच्छ पानी में छिपकर टीम को चकमा देता रहा। इसके बाद प्लॉट का पानी पंप की मदद से खाली कराने की योजना बनाई गई। लगातार कई दिनों तक निगरानी और प्रयास के बावजूद मगरमच्छ पकड़ में नहीं आया।

    शुक्रवार सुबह जब प्लॉट का पानी बाहर निकाला जा रहा था तभी मगरमच्छ पानी से बाहर निकल आया। वह सड़क की ओर बढ़ने लगा। वन विभाग की टीम पहले से मौके पर मौजूद थी इसलिए कर्मचारियों ने तुरंत उसे चारों तरफ से घेर लिया। सावधानी के साथ जाल की मदद से मगरमच्छ को पकड़ लिया गया। रेस्क्यू के दौरान टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि मगरमच्छ को किसी तरह की चोट न पहुंचे और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे।

    मगरमच्छ के सुरक्षित पकड़े जाने के बाद वन विभाग की टीम उसे परियट नदी के पास ले गई। अधिकारियों के मुताबिक रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ को शुक्रवार सुबह ही सुरक्षित तरीके से परियट नदी में छोड़ दिया गया। करीब एक सप्ताह से चली आ रही तलाश पूरी होने के बाद कॉलोनी के लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान वन विभाग की टीम ने लगातार निगरानी और सावधानी के साथ अभियान चलाया और आखिरकार मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की।

  • जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम

    जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें मोबाइल अचानक बंद होने के बाद युवक को लगा कि फोन में तकनीकी खराबी आ गई है लेकिन कुछ देर बाद जब वह नया मोबाइल खरीदने पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। बैंक खाते में करीब 88 हजार रुपए होने के बावजूद मोबाइल से भुगतान नहीं हो सका। खाते में सिर्फ 36 पैसे बचे थे। जब मिनी स्टेटमेंट निकलवाया गया तो पता चला कि खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 88 हजार 542 रुपए निकाले जा चुके हैं।

    मामला राजीव गांधी नगर निवासी 46 वर्षीय वीरेन्द्र बावरिया का है। वीरेन्द्र जबलपुर नगर निगम में ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत कैंट थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 9 अगस्त की बताई जा रही है। वीरेन्द्र काम पर जाने से पहले भैंसासुर रोड स्थित एक दुकान पर रुके थे। वहां उन्होंने QR कोड स्कैन कर 150 रुपए का UPI भुगतान किया। इसके बाद वह तीन पत्ती चौक स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। दोपहर करीब डेढ़ बजे उनका ओप्पो एंड्रॉयड मोबाइल अचानक ऑटो अपडेट होने लगा। अपडेट की प्रक्रिया के दौरान फोन बंद हो गया और इसके बाद दोबारा चालू नहीं हुआ।

    वीरेन्द्र को लगा कि फोन की बैटरी या सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आ गई है। वह फोन लेकर ITI माढ़ोताल स्थित कटंगी रोड की एक मोबाइल दुकान पर पहुंचे। दुकानदार ने फोन चेक करने के बाद बताया कि बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज है और पुरानी बैटरी ठीक से काम नहीं कर रही है। फोन की समस्या के चलते वीरेन्द्र ने नया मोबाइल खरीदने का फैसला किया।

    उन्होंने उसी दुकान से करीब 14 हजार रुपए का नया मोबाइल लेने की बात तय की। भुगतान के लिए उन्होंने PhonePe का इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन स्क्रीन पर बैलेंस कम होने का मैसेज दिखाई दिया। यह देखकर वह हैरान रह गए क्योंकि उन्हें खाते में पर्याप्त रकम होने की उम्मीद थी। बैंक खाते की जानकारी लेने पर पता चला कि उसमें सिर्फ 36 पैसे बचे हैं।

    इसके बाद वीरेन्द्र पास के SBI ATM पहुंचे और मिनी स्टेटमेंट निकाला। स्टेटमेंट देखते ही उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली। उनके Union Bank of India की सदर शाखा के खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन किए गए थे। पहले 29 हजार रुपए फिर 50 हजार रुपए और इसके बाद 9 हजार 542 रुपए खाते से ट्रांसफर किए गए। कुल 88 हजार 542 रुपए की रकम उनके खाते से निकल चुकी थी।

    वीरेन्द्र का कहना है कि उन्होंने ये ट्रांजैक्शन नहीं किए थे। मोबाइल बंद होने और खाते से रकम निकलने के बीच संबंध को लेकर अब पुलिस साइबर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल बंद होने के दौरान खाते तक ठगों की पहुंच कैसे बनी और UPI ट्रांजैक्शन किस माध्यम से किए गए।

    इस घटना ने मोबाइल यूजर्स के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। अचानक मोबाइल बंद होने या अपडेट होने जैसी स्थिति में लोग अक्सर इसे सामान्य तकनीकी समस्या मान लेते हैं। लेकिन इस मामले में मोबाइल की खराबी सामने आने के बाद बैंक खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चला। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजैक्शन की जानकारी के आधार पर साइबर ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

  • 5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

    5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। जबलपुर में प्रमुख पेंशनर संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के साथ आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई। पेंशनरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के करीब 5 लाख पेंशनर भोपाल में विशाल रैली निकालेंगे। संगठन ने जरूरत पड़ने पर अर्धनग्न प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है।

    जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के मीटिंग हॉल में हुई बैठक में नगर निगम विद्युत मंडल और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत का लंबित एरियर रहा। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई राहत के एरियर का भुगतान रुका हुआ है और पेंशनरों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से एरियर सहित भुगतान जल्द करने की मांग की है।

    पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि 5 लाख रुपए तक के आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बावजूद कई पेंशनरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में इलाज से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश बिहार और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशनरों के लिए बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाए ताकि इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    बैठक में नेताओं को मिलने वाली पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। पेंशनर संगठनों ने देश में एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू करने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि एक कर्मचारी को जीवनभर एक पेंशन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि कई नेताओं को अलग-अलग पदों के आधार पर एक से अधिक पेंशन मिलने की व्यवस्था है। संगठन ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू होने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।

    पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सितंबर के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके बाद नवंबर में जबलपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी है। इसी सम्मेलन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

    बैठक में शामिल पेंशनर संगठनों ने सरकार से टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के पेंशनर एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।