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  • जबलपुर में फर्जीवाड़ा: ‘समाजसेवी’ बनकर करता था ठगी, एएसपी के पास पहुंचे पीड़ित

    जबलपुर में फर्जीवाड़ा: ‘समाजसेवी’ बनकर करता था ठगी, एएसपी के पास पहुंचे पीड़ित


    जबलपुर । जबलपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां खुद को समाजसेवी बताने वाले रघु तिवारी पर लोगों से लाखों रुपए ऐंठने के आरोप लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपनी नजदीकी बताकर उन्हें भरोसे में लेता था और नौकरी लगवाने का झांसा देकर पैसे वसूलता था।

    मामला तब सामने आया जब दो पीड़ित बुधवार को एएसपी सूर्यकांत शर्मा के पास पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने अनुकंपा नियुक्ति और पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर कुल 1.26 लाख रुपए लिए। एक पीड़ित से पिता की जगह नौकरी दिलाने के लिए 1.10 लाख रुपए वसूले गए, जबकि दूसरे से 16 हजार रुपए लिए गए।

    पीड़ितों के अनुसार, आरोपी शुरुआत में भरोसा दिलाता रहा कि उसके ऊंचे संपर्क हैं और जल्द ही काम हो जाएगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब लोगों ने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपी टालमटोल करने लगा और बाद में धमकाने भी लगा।

    आरोपी रघु तिवारी के बारे में यह भी सामने आया है कि उसने महापौर सहित कई नेताओं और अफसरों के साथ तस्वीरें खिंचवा रखी हैं, जिनका इस्तेमाल वह लोगों को प्रभावित करने के लिए करता था। इसी आधार पर वह खुद को प्रभावशाली बताकर लोगों को जाल में फंसाता था।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी ने बेलबाग थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने दोनों शिकायतों को आधार बनाकर जांच शुरू कर दी है और आरोपी के संपर्कों व लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि जांच के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी की भूमिका और अन्य संभावित पीड़ितों की भी तलाश की जा रही है।

  • जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस

    जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस


    जबलपुर । जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की तत्परता से एक होमगार्ड सैनिक की जान बचा ली गई। यह घटना 25 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे गाड़ी संख्या 22189 जबलपुर-रीवा इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन की गति बढ़ने और संतुलन बिगड़ने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक जगह पर गिर गया।

    जैसे ही यह घटना हुई, मौके पर मौजूद RPF जवानों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। ड्यूटी पर तैनात सहायक उप निरीक्षक धीरज कुमार और प्रधान आरक्षक भाग सिंह ने बिना देर किए यात्री की ओर दौड़ लगाई और उसे पकड़कर सुरक्षित बाहर खींच लिया। उनकी तेज प्रतिक्रिया और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।

    गिरने वाले यात्री की पहचान गुनागार तिवारी (56) के रूप में हुई है, जो वार्ड नंबर-16, खितोला बाजार, सिहोरा, जिला जबलपुर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वे होमगार्ड मुख्यालय, जबलपुर में पदस्थ हैं और उसी दौरान सिहोरा की ओर यात्रा कर रहे थे।

    घटना के दौरान यात्री को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वह कुछ देर तक घबराया हुआ था। RPF जवानों ने तुरंत उसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाकर प्राथमिक सहायता दी और उसकी स्थिति सामान्य की।

    पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे यात्री ट्रेन में चढ़ते समय फिसलता है और RPF जवान तुरंत उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

    स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी RPF जवानों की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।

    फिलहाल रेलवे प्रशासन ने भी जवानों की इस सतर्कता की प्रशंसा की है और यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि यह जानलेवा हो सकता है।

  • जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला

    जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला


    जबलपुर। जबलपुर जिले के सिहोरा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 स्थित गढ़िया मोहल्ले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के दौरान एक बेटे ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। यह पूरी वारदात सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे की बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, आरोपी करण कोल देर रात शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचते ही उसने अपनी पत्नी कांति बाई कोल से खाना बनाने को कहा। पत्नी ने देर रात होने के कारण खाना बनाने से मना कर दिया, जिस पर वह गुस्से में आ गया और पत्नी के साथ मारपीट करने लगा।

    इस दौरान घर के दूसरे कमरे में सो रही उसकी मां गिरानी बाई कोल (65) ने आवाज सुनकर बीच-बचाव करने की कोशिश की। वह मौके पर पहुंचीं और बेटे को डांटते हुए शांत रहने और सोने को कहा। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जाता है कि मां ने जब उसे बार-बार समझाने की कोशिश की, तो आरोपी और अधिक आक्रोशित हो गया। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान गुस्से में आरोपी ने पास में रखा टेबल फैन उठाया और अपनी मां के सिर पर जोरदार वार कर दिया।

    हमले के बाद भी आरोपी लगातार मां पर हमला करता रहा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस बीच पत्नी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट की। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के बड़े बेटे दशरथ को सूचना दी गई। वह तुरंत मौके पर पहुंचा और अपनी मां को खून से लथपथ हालत में पाया। परिजन उन्हें तत्काल सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी करण कोल की तलाश शुरू कर दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान मां बीच-बचाव करने आई थीं, जिसके चलते आरोपी ने गुस्से में आकर हमला कर दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है। फिलहाल पूरा मामला घरेलू हिंसा और नशे के कारण हुई त्रासदी के रूप में सामने आ रहा है।

  • जबलपुर में पिस्टल लहराकर डांस करने वाला बदमाश गिरफ्तार, आर्म्स एक्ट में केस दर्ज

    जबलपुर में पिस्टल लहराकर डांस करने वाला बदमाश गिरफ्तार, आर्म्स एक्ट में केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । जबलपुर में सोशल मीडिया पर हथियार लहराते हुए डांस करने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। यह मामला कैंट थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी ने बीच बाजार में पिस्टल हाथ में लेकर डांस किया और उसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर भी डाल दिया था। वीडियो सामने आते ही मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद एसपी संपत उपाध्याय ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    वीडियो में सदर बाजार निवासी शानू अंसारी पिस्टल लहराते हुए डांस करता नजर आ रहा था। जांच के दौरान पुलिस ने शुक्रवार रात पेंटीनाका चौराहे के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल भी बरामद की।

    कैंट थाना पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो अपलोड कर रहा था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह इलाके में अपना खौफ फैलाने और दबदबा कायम करने के लिए इस तरह के वीडियो बनाता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शानू अंसारी के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी हथियारों के साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल चुका है, जिससे वह अपनी छवि एक डर फैलाने वाले बदमाश के रूप में स्थापित करना चाहता था। इसी पैटर्न को देखते हुए पुलिस ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

    थाना प्रभारी पुष्पेंद्र पटले ने बताया कि आरोपी की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी और वायरल वीडियो के आधार पर उसे दबोच लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उसके पास हथियार कहां से आया और क्या इसमें किसी गिरोह का भी हाथ है।

    इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन कर दहशत फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी

    जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी


    जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बाराती बस पर ₹51,500 का जुर्माना लगाया और उसे जब्त कर लिया। यह कार्रवाई आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश पर उड़नदस्ता टीम द्वारा की गई।

    बिना परमिट चल रही थी बाराती बस
    जांच के दौरान सामने आया कि मंडला से जबलपुर जा रही राधिका ट्रैवल्स की बस (MP 13 P 1949) बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रही थी। बस के पास-
    वैध परमिट नहीं था
    बीमा (Insurance) नहीं था
    प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) भी नहीं था
    इस गंभीर लापरवाही के बाद कार्रवाई की गई।

    बरगी के पास रोकी गई बस
    उड़नदस्ता प्रभारी के अनुसार बस को बरगी क्षेत्र के पास रोका गया। जब चालक से दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद मौके पर ही बस को जब्त कर लिया गया।

    बस जब्त, यात्रियों को सुरक्षित भेजा गया
    कार्रवाई के बाद बस को आरटीओ परिसर में खड़ा कराया गया। साथ ही बस में सवार यात्रियों को किसी अन्य वाहन से उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

    हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
    हाल ही में मध्य प्रदेश में इंदौर से शिवपुरी जा रही एक बस में आग लगने की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें एक 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिवहन विभाग ने राज्यभर में बसों की जांच तेज कर दी है।

    कई जिलों में चल रहा जांच अभियान
    परिवहन मंत्री और विभागीय निर्देशों के बाद जबलपुर, सिवनी और मंडला में बसों की सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बिना फिटनेस और दस्तावेजों के चल रहे वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
     
    प्रशासन की चेतावनी
    परिवहन विभाग ने सभी वाहन संचालकों को चेतावनी दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज—परमिट, बीमा और PUC—अद्यतन रखें। नियमों का उल्लंघन करने पर भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जबलपुर में हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। बिना वैध दस्तावेजों के चलने वाले वाहनों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत खनन और राज्य मछली महाशीर के अवैध शिकार को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी, ईओडब्ल्यू और जिला खनिज अधिकारी सहित कई विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

    जनहित याचिका से सामने आया गंभीर मामला
    यह मामला जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नर्मदा नदी के खिरहनी घाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का शिकार लगातार जारी है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि महाशीर को वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा दिया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

    ब्रीडिंग सीजन में भी जारी शिकार, विलुप्ति का खतरा
    याचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से प्रजनन काल के दौरान महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अवैध मत्स्याखेट जारी है। इसके कारण यह दुर्लभ प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही नर्मदा नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को भी पर्यावरण और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।

    रेत खनन और धमकी के आरोप भी पहुंचे कोर्ट
    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खिरहनी घाट पर पहले भी प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन उसके बाद भी अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि जब्त रेत को लेकर उपसरपंच को धमकाया गया और बाद में वह सामग्री चोरी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    जैव विविधता संरक्षण पर बड़ा सवाल
    हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी अहम है।

    जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला नर्मदा नदी और उसकी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी रोक लगती है।

  • जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला

    जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सेंट एलायसिस स्कूल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां काम कर रही महिला सफाई कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। मामला सामने आने के बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    नौकरी के बदले धर्म परिवर्तन का आरोप, महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
    पीड़ित महिला कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल प्रशासन की ओर से उन पर चर्च जाने और ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कहा गया “अगर यहां काम करना है तो धर्म बदलना होगा, वरना नौकरी छोड़नी पड़ेगी। महिलाओं ने बताया कि दबाव मानने से इनकार करने पर उन्हें काम से हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं और कार्रवाई की मांग की।

    2024 से काम कर रही थीं महिलाएं, फादर बदलने के बाद बढ़ा दबाव
    शिकायतकर्ता दीपा पटेल के अनुसार वह वर्ष 2024 से स्कूल में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रही थीं और पहले स्थिति सामान्य थी। उनके अनुसार पहले फादर वाल्टर के समय कोई समस्या नहीं थी, लेकिन नए फादर सोमी जैकब के आने के बाद दबाव बढ़ गया। दीपा का आरोप है कि उन्हें और अन्य महिला कर्मचारियों को चर्च जाने के लिए कहा गया, और मना करने पर नौकरी से निकाल दिया गया।

    12 साल की नौकरी, फिर अचानक निकाला गया: एक और आरोप
    एक अन्य कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने स्कूल में 12 साल तक काम किया, लेकिन छोटी छुट्टी लेने के बाद उसे वापस काम पर नहीं आने दिया गया। आरोप है कि उनसे भी धर्म परिवर्तन की बात कही गई और विरोध करने पर नौकरी समाप्त कर दी गई।

    हिंदू संगठनों का विरोध, कार्रवाई की मांग
    मामले को लेकर हिंदू धर्म सेना समेत कई संगठनों ने विरोध जताया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि शहर में कुछ स्कूलों में नौकरी के नाम पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    पुलिस जांच शुरू, स्कूल प्रशासन से नहीं मिला जवाब
    मामले की शिकायत पुलिस और एएसपी तक पहुंच चुकी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच विजय नगर थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। स्कूल प्रशासन की ओर से फादर सोमी जैकब का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

    जबलपुर का यह मामला अब सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर पीड़ित कर्मचारी न्याय की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जांच के बाद ही सच्चाई सामने आने की बात कही जा रही है। फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है।

  • जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे

    जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे


    जबलपुर। मध्य प्रदेश का जबलपुर शुक्रवार को देश की न्याय व्यवस्था के डिजिटल भविष्य का केंद्र बन गया, जहां ‘फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका, सरकार और कानून व्यवस्था से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे बेहद अहम बना दिया। कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जजों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी भाग लिया।

    सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की मौजूदगी, हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी शामिल
    सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा, सतीश चंद्र शर्मा, पीबी वराले, एन. कोटेश्वर सिंह, आर. महादेवन, मनमोहन और आलोक आराधे सहित कई न्यायाधीश उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा सहित सभी न्यायाधीशों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि देश की न्याय व्यवस्था में तकनीक आधारित बदलाव को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।

    डिजिटल न्याय प्रणाली पर केंद्रित रहा सेमिनार
    इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में तकनीक के उपयोग को बढ़ाना और सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना रहा। इसमें ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, केस मैनेजमेंट और यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीमित काफिला चर्चा में
    कार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला भी सादगीपूर्ण रहा, जिसमें केवल छह वाहन शामिल थे। प्रशासन ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष तैयारी की थी।

    भविष्य की न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने की कोशिश
    यह सेमिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे देश में न्यायिक प्रक्रियाओं की गति और पारदर्शिता दोनों में सुधार संभव है।

    जबलपुर का यह आयोजन न्यायपालिका और तकनीक के संगम का प्रतीक बनकर उभरा है। शीर्ष न्यायाधीशों और सरकार की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत की न्याय व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ सकती है।

  • कानून और तकनीक का संगम: जबलपुर में CJI और जजों की अहम बैठक, सीएम-कानून मंत्री भी शामिल

    कानून और तकनीक का संगम: जबलपुर में CJI और जजों की अहम बैठक, सीएम-कानून मंत्री भी शामिल



    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश का जबलपुर शनिवार को देश की न्यायपालिका के एक महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। हाईकोर्ट द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीश शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री और मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।

    यह सेमिनार “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” विषय पर आधारित है, जिसका उद्देश्य न्याय व्यवस्था में तकनीक और डिजिटल एकीकरण को मजबूत करना है। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

    मुख्य अतिथि के रूप में CJI की उपस्थिति रहेगी, जबकि राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्रीय कानून मंत्री विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीश भी इस सेमिनार का हिस्सा बनेंगे।

    इस आयोजन में ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक के माध्यम से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेमिनार देश में डिजिटल न्याय प्रणाली के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    कार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

  • हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें

    हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले पर सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है, जो 2018 के एक चुनावी भाषण पर आधारित है।

    यह मामला झाबुआ में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों का नाम लिया था। इसी बयान को लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने एमपी-एमएलए विशेष अदालत भोपाल में मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाद में विशेष अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने Jabalpur हाईकोर्ट का रुख किया। राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में समन और पूरे परिवाद को निरस्त करने की मांग की गई है।

    पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गई थीं। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह परिवाद तथ्यात्मक रूप से कमजोर है और इसमें लगाए गए आरोप ठोस सबूतों पर आधारित नहीं हैं।

    वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में अपने भाषण के दौरान पनामा पेपर्स लीक का उल्लेख करते हुए कथित रूप से गलत जानकारी दी थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश में भी ऐसी कार्रवाई न होने की बात कही थी, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष को आपत्ति है।

    हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया था कि बयान के दौरान उनसे नाम को लेकर भ्रम हो गया था और उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति से था।

    Jabalpur हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पहले भी हो चुकी है, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। पिछली सुनवाई में समय मांगने पर अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया था।

    आज की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि यह अंतिम चरण हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकता है कि ट्रायल जारी रहेगा या नहीं। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर नजर बनी हुई है।