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  • जमीन सीमांकन के नाम पर 80 हजार की डील, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

    जमीन सीमांकन के नाम पर 80 हजार की डील, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई


    मध्य प्रदेश । जबलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने राजस्व विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। मामला Jabalpur का है, जहां राजस्व निरीक्षक करण सिंह लोधी को 80 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

    जानकारी के अनुसार, व्यापारी रोहित जैन ने अपने साथियों के साथ शहपुरा तहसील के ग्राम क्लोन में मटर प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदी थी। जमीन का नामांतरण पूरा हो चुका था, लेकिन सीमांकन की प्रक्रिया लंबित थी। इसी काम के लिए उन्होंने राजस्व निरीक्षक से संपर्क किया था।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद आरोपी ने सीमांकन के बदले पहले एक लाख रुपये की मांग की। पिछले करीब दो महीने से वह लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहा था, लेकिन हर बार किसी न किसी बहाने से काम टाल दिया जाता था।

    परेशान होकर व्यापारी ने लोकायुक्त एसपी से लिखित शिकायत की। शिकायत की जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। तय कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को आरोपी ने रतन कॉलोनी स्थित अपने घर के पास शिकायतकर्ता को पैसे लेकर बुलाया।

    जैसे ही व्यापारी ने उसे 80 हजार रुपये दिए और आरोपी ने रकम स्वीकार की, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • जबलपुर में महिला जेल प्रहरी का गंभीर आरोप, नौकरी छोड़ने को हुई मजबूर

    जबलपुर में महिला जेल प्रहरी का गंभीर आरोप, नौकरी छोड़ने को हुई मजबूर


    जबलपुर। पाटन सब जेल में पदस्थ एक महिला जेल प्रहरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके कारण वह नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गई है। महिला प्रहरी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत की है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद भी उसका पीछा किया जाता है और उसे मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।

    पूरा विवाद वर्ष 2024 में जेल परिसर में हुई एक घटना से शुरू हुआ बताया जा रहा है, जब एक व्यक्ति बिना अनुमति मुलाकात कक्ष की ओर जाने लगा था। महिला प्रहरी द्वारा नियमों के अनुसार रोके जाने के बाद विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद से लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

    महिला प्रहरी का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है और धमकियां भी दी जा रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी द्वारा उसे कहा जाता है कि “तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा।” साथ ही यह भी आरोप है कि उसके खिलाफ दबाव बनाने और समझौते के लिए मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।

    जेल प्रशासन के अनुसार, महिला कर्मचारी 2018 से पदस्थ है और पहले स्थिति सामान्य थी, लेकिन 2024 के बाद से विवाद बढ़ा है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जानकारी पुलिस और उच्च अधिकारियों सहित मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंचाई गई है। इस संबंध में 17 जनवरी 2026 को एफआईआर भी दर्ज की गई, हालांकि पुलिस ने आरोपी को जमानत दे दी थी।

    सब जेलर का कहना है कि महिला प्रहरी अकेले सरकारी आवास में रहती है और लगातार तनाव व दबाव से गुजर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है।

    वहीं, आरोपित पक्ष का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं और वे स्वयं जेल में कथित अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है और यदि किसी प्रकार के आरोप हैं तो उसके सबूत पेश किए जाएं।

    जेल प्रशासन ने एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया है, जिसमें एक बंदी द्वारा खुद को चोट पहुंचाने की घटना सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बंदी ने स्वयं को घायल किया था और बाद में इस मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

    फिलहाल, मामला पुलिस जांच और विभागीय स्तर पर समीक्षा में है। महिला प्रहरी ने सुरक्षा और मानसिक तनाव के चलते नौकरी छोड़ने तक का संकेत दिया है।

  • आत्महत्या या हत्या? ट्विशा केस में CBI जोड़ रही हर कड़ी, समर्थ से हो रही लंबी पूछताछ

    आत्महत्या या हत्या? ट्विशा केस में CBI जोड़ रही हर कड़ी, समर्थ से हो रही लंबी पूछताछ


    मध्य प्रदेश । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। मामले में आरोपी समर्थ की फरारी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी को मिले शुरुआती तथ्यों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ तत्काल शहर नहीं छोड़ पाया था और करीब तीन दिनों तक भोपाल में ही अलग-अलग स्थानों पर रुका रहा। इसके बाद वह जबलपुर पहुंचा, जहां उसने लगभग पांच दिनों तक अपनी मौजूदगी छिपाए रखी। अब सीबीआई इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

    जांच एजेंसी का मुख्य फोकस यह जानने पर है कि फरारी के दौरान समर्थ कहां-कहां रुका, किन लोगों के संपर्क में रहा और उसे किस-किस व्यक्ति ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुंचाई। इसके लिए उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और डिजिटल चैट्स की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से फरारी के दौरान की गतिविधियों की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

    मामले में एक नया पहलू ट्विशा की कथित प्रेग्नेंसी और गर्भपात से भी जुड़ा हुआ है। इसी क्रम में सीबीआई ने उस डॉक्टर को भी पूछताछ के लिए तलब किया है, जिसने कथित तौर पर ट्विशा को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी यानी गर्भपात की सलाह दी थी। जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि प्रेग्नेंसी और गर्भपात को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें कितनी सच्चाई है और उनका इस पूरे मामले से क्या संबंध हो सकता है।

    सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान समर्थ लगातार यह दावा कर रहा है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या का मामला है। उसका कहना है कि गर्भपात के बाद ट्विशा मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रही थी, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि जांच एजेंसी केवल उसके बयानों पर निर्भर नहीं है और हर दावे को वैज्ञानिक तथा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर परख रही है।

    सीबीआई इस मामले को आत्महत्या और हत्या दोनों संभावनाओं के दृष्टिकोण से देख रही है। जांचकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि घटना से पहले दोनों के संबंधों की स्थिति क्या थी, क्या किसी प्रकार का विवाद या मारपीट हुई थी और घटनास्थल से मिले साक्ष्य क्या संकेत देते हैं। यदि यह आत्महत्या थी तो उसके पीछे तत्काल कारण क्या था और यदि नहीं, तो फिर वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा।

    जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक की पूरी टाइमलाइन तैयार करना भी है। सीबीआई समर्थ से लगातार पूछताछ कर रही है कि उसने सबसे पहले ट्विशा को किस अवस्था में देखा, उसे फंदे से किसने उतारा, उस समय घर में कौन-कौन मौजूद था और अस्पताल ले जाने तक क्या-क्या घटनाएं हुईं। इन सभी बयानों का मिलान फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है।

    इसके अलावा जांच एजेंसी उन लोगों की भी पहचान करने में जुटी है जिन्होंने एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ को फरार रहने में मदद की हो सकती है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    ट्विशा शर्मा मौत मामला शुरुआत से ही कई सवालों और विवादों के घेरे में रहा है। अब सीबीआई हर एंगल से जांच कर रही है ताकि घटनाओं की वास्तविक श्रृंखला सामने लाई जा सके और यह स्पष्ट हो सके कि यह मामला आत्महत्या का था या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी हुई है।

  • जबलपुर में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, किसान पर जानलेवा हमला; गिरफ्तारी की मांग तेज

    जबलपुर में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, किसान पर जानलेवा हमला; गिरफ्तारी की मांग तेज

    जबलपुर । जबलपुर जिले के बेलखेड़ा थाना क्षेत्र के मातनपुर गांव में जमीन विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। यहां एक किसान पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है, जबकि पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

    जानकारी के अनुसार, किसान भगवान सिंह ने गांव के ही एक व्यक्ति से लगभग डेढ़ एकड़ जमीन खरीदी थी। इसी जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग इस जमीन को खुद खरीदना चाहते थे, और बिक्री के बाद से ही वे पीड़ित किसान से रंजिश रखने लगे।

    घटना 25 मई की बताई जा रही है, जब भगवान सिंह ट्रैक्टर से खेत से लौट रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने रास्ते में उन्हें रोक लिया और बातचीत के बहाने खड़ा रखा। इसी बीच अन्य आरोपियों ने वहां पहुंचकर लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया। परिजनों का आरोप है कि हमला इतना गंभीर था कि किसान बेहोश होकर गिर पड़े और आरोपी तब तक मारपीट करते रहे।

    हमले के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल को पहले बेलखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र और फिर जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उनके सिर में 20 टांके लगाए। इलाज के बाद उन्हें 28 मई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    परिवार का आरोप है कि हमले के बाद भी दबंग लगातार धमकियां दे रहे हैं और खुलेआम गांव में घूम रहे हैं। इससे पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है और उन्होंने खेत जाना भी बंद कर दिया है।

    पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनके खेत में तोड़फोड़ की और फसल व संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। परिवार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई भी संतोषजनक नहीं रही। आरोप है कि पुलिस गांव पहुंची लेकिन बिना किसी ठोस कदम के वापस लौट गई।

    इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने गुरुवार को एएसपी कार्यालय पहुंचकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है।

    वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले में नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धाराएं बढ़ाई जा रही हैं। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

    फिलहाल गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

  • जबलपुर में फर्जीवाड़ा: ‘समाजसेवी’ बनकर करता था ठगी, एएसपी के पास पहुंचे पीड़ित

    जबलपुर में फर्जीवाड़ा: ‘समाजसेवी’ बनकर करता था ठगी, एएसपी के पास पहुंचे पीड़ित


    जबलपुर । जबलपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां खुद को समाजसेवी बताने वाले रघु तिवारी पर लोगों से लाखों रुपए ऐंठने के आरोप लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपनी नजदीकी बताकर उन्हें भरोसे में लेता था और नौकरी लगवाने का झांसा देकर पैसे वसूलता था।

    मामला तब सामने आया जब दो पीड़ित बुधवार को एएसपी सूर्यकांत शर्मा के पास पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने अनुकंपा नियुक्ति और पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर कुल 1.26 लाख रुपए लिए। एक पीड़ित से पिता की जगह नौकरी दिलाने के लिए 1.10 लाख रुपए वसूले गए, जबकि दूसरे से 16 हजार रुपए लिए गए।

    पीड़ितों के अनुसार, आरोपी शुरुआत में भरोसा दिलाता रहा कि उसके ऊंचे संपर्क हैं और जल्द ही काम हो जाएगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब लोगों ने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपी टालमटोल करने लगा और बाद में धमकाने भी लगा।

    आरोपी रघु तिवारी के बारे में यह भी सामने आया है कि उसने महापौर सहित कई नेताओं और अफसरों के साथ तस्वीरें खिंचवा रखी हैं, जिनका इस्तेमाल वह लोगों को प्रभावित करने के लिए करता था। इसी आधार पर वह खुद को प्रभावशाली बताकर लोगों को जाल में फंसाता था।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी ने बेलबाग थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने दोनों शिकायतों को आधार बनाकर जांच शुरू कर दी है और आरोपी के संपर्कों व लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि जांच के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी की भूमिका और अन्य संभावित पीड़ितों की भी तलाश की जा रही है।

  • जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस

    जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस


    जबलपुर । जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की तत्परता से एक होमगार्ड सैनिक की जान बचा ली गई। यह घटना 25 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे गाड़ी संख्या 22189 जबलपुर-रीवा इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन की गति बढ़ने और संतुलन बिगड़ने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक जगह पर गिर गया।

    जैसे ही यह घटना हुई, मौके पर मौजूद RPF जवानों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। ड्यूटी पर तैनात सहायक उप निरीक्षक धीरज कुमार और प्रधान आरक्षक भाग सिंह ने बिना देर किए यात्री की ओर दौड़ लगाई और उसे पकड़कर सुरक्षित बाहर खींच लिया। उनकी तेज प्रतिक्रिया और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।

    गिरने वाले यात्री की पहचान गुनागार तिवारी (56) के रूप में हुई है, जो वार्ड नंबर-16, खितोला बाजार, सिहोरा, जिला जबलपुर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वे होमगार्ड मुख्यालय, जबलपुर में पदस्थ हैं और उसी दौरान सिहोरा की ओर यात्रा कर रहे थे।

    घटना के दौरान यात्री को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वह कुछ देर तक घबराया हुआ था। RPF जवानों ने तुरंत उसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाकर प्राथमिक सहायता दी और उसकी स्थिति सामान्य की।

    पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे यात्री ट्रेन में चढ़ते समय फिसलता है और RPF जवान तुरंत उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

    स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी RPF जवानों की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।

    फिलहाल रेलवे प्रशासन ने भी जवानों की इस सतर्कता की प्रशंसा की है और यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि यह जानलेवा हो सकता है।

  • जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला

    जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला


    जबलपुर। जबलपुर जिले के सिहोरा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 स्थित गढ़िया मोहल्ले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के दौरान एक बेटे ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। यह पूरी वारदात सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे की बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, आरोपी करण कोल देर रात शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचते ही उसने अपनी पत्नी कांति बाई कोल से खाना बनाने को कहा। पत्नी ने देर रात होने के कारण खाना बनाने से मना कर दिया, जिस पर वह गुस्से में आ गया और पत्नी के साथ मारपीट करने लगा।

    इस दौरान घर के दूसरे कमरे में सो रही उसकी मां गिरानी बाई कोल (65) ने आवाज सुनकर बीच-बचाव करने की कोशिश की। वह मौके पर पहुंचीं और बेटे को डांटते हुए शांत रहने और सोने को कहा। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जाता है कि मां ने जब उसे बार-बार समझाने की कोशिश की, तो आरोपी और अधिक आक्रोशित हो गया। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान गुस्से में आरोपी ने पास में रखा टेबल फैन उठाया और अपनी मां के सिर पर जोरदार वार कर दिया।

    हमले के बाद भी आरोपी लगातार मां पर हमला करता रहा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस बीच पत्नी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट की। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के बड़े बेटे दशरथ को सूचना दी गई। वह तुरंत मौके पर पहुंचा और अपनी मां को खून से लथपथ हालत में पाया। परिजन उन्हें तत्काल सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी करण कोल की तलाश शुरू कर दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान मां बीच-बचाव करने आई थीं, जिसके चलते आरोपी ने गुस्से में आकर हमला कर दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है। फिलहाल पूरा मामला घरेलू हिंसा और नशे के कारण हुई त्रासदी के रूप में सामने आ रहा है।

  • जबलपुर में पिस्टल लहराकर डांस करने वाला बदमाश गिरफ्तार, आर्म्स एक्ट में केस दर्ज

    जबलपुर में पिस्टल लहराकर डांस करने वाला बदमाश गिरफ्तार, आर्म्स एक्ट में केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । जबलपुर में सोशल मीडिया पर हथियार लहराते हुए डांस करने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। यह मामला कैंट थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी ने बीच बाजार में पिस्टल हाथ में लेकर डांस किया और उसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर भी डाल दिया था। वीडियो सामने आते ही मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद एसपी संपत उपाध्याय ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    वीडियो में सदर बाजार निवासी शानू अंसारी पिस्टल लहराते हुए डांस करता नजर आ रहा था। जांच के दौरान पुलिस ने शुक्रवार रात पेंटीनाका चौराहे के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल भी बरामद की।

    कैंट थाना पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो अपलोड कर रहा था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह इलाके में अपना खौफ फैलाने और दबदबा कायम करने के लिए इस तरह के वीडियो बनाता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शानू अंसारी के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी हथियारों के साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल चुका है, जिससे वह अपनी छवि एक डर फैलाने वाले बदमाश के रूप में स्थापित करना चाहता था। इसी पैटर्न को देखते हुए पुलिस ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

    थाना प्रभारी पुष्पेंद्र पटले ने बताया कि आरोपी की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी और वायरल वीडियो के आधार पर उसे दबोच लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उसके पास हथियार कहां से आया और क्या इसमें किसी गिरोह का भी हाथ है।

    इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन कर दहशत फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी

    जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी


    जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बाराती बस पर ₹51,500 का जुर्माना लगाया और उसे जब्त कर लिया। यह कार्रवाई आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश पर उड़नदस्ता टीम द्वारा की गई।

    बिना परमिट चल रही थी बाराती बस
    जांच के दौरान सामने आया कि मंडला से जबलपुर जा रही राधिका ट्रैवल्स की बस (MP 13 P 1949) बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रही थी। बस के पास-
    वैध परमिट नहीं था
    बीमा (Insurance) नहीं था
    प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) भी नहीं था
    इस गंभीर लापरवाही के बाद कार्रवाई की गई।

    बरगी के पास रोकी गई बस
    उड़नदस्ता प्रभारी के अनुसार बस को बरगी क्षेत्र के पास रोका गया। जब चालक से दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद मौके पर ही बस को जब्त कर लिया गया।

    बस जब्त, यात्रियों को सुरक्षित भेजा गया
    कार्रवाई के बाद बस को आरटीओ परिसर में खड़ा कराया गया। साथ ही बस में सवार यात्रियों को किसी अन्य वाहन से उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

    हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
    हाल ही में मध्य प्रदेश में इंदौर से शिवपुरी जा रही एक बस में आग लगने की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें एक 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिवहन विभाग ने राज्यभर में बसों की जांच तेज कर दी है।

    कई जिलों में चल रहा जांच अभियान
    परिवहन मंत्री और विभागीय निर्देशों के बाद जबलपुर, सिवनी और मंडला में बसों की सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बिना फिटनेस और दस्तावेजों के चल रहे वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
     
    प्रशासन की चेतावनी
    परिवहन विभाग ने सभी वाहन संचालकों को चेतावनी दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज—परमिट, बीमा और PUC—अद्यतन रखें। नियमों का उल्लंघन करने पर भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जबलपुर में हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। बिना वैध दस्तावेजों के चलने वाले वाहनों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत खनन और राज्य मछली महाशीर के अवैध शिकार को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी, ईओडब्ल्यू और जिला खनिज अधिकारी सहित कई विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

    जनहित याचिका से सामने आया गंभीर मामला
    यह मामला जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नर्मदा नदी के खिरहनी घाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का शिकार लगातार जारी है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि महाशीर को वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा दिया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

    ब्रीडिंग सीजन में भी जारी शिकार, विलुप्ति का खतरा
    याचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से प्रजनन काल के दौरान महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अवैध मत्स्याखेट जारी है। इसके कारण यह दुर्लभ प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही नर्मदा नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को भी पर्यावरण और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।

    रेत खनन और धमकी के आरोप भी पहुंचे कोर्ट
    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खिरहनी घाट पर पहले भी प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन उसके बाद भी अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि जब्त रेत को लेकर उपसरपंच को धमकाया गया और बाद में वह सामग्री चोरी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    जैव विविधता संरक्षण पर बड़ा सवाल
    हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी अहम है।

    जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला नर्मदा नदी और उसकी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी रोक लगती है।