Tag: Madhya Pradesh News

  • खंडवा में विवादित पोस्टिंग घोटाला असिस्टेंट कमिश्नर की योजना नाकाम

    खंडवा में विवादित पोस्टिंग घोटाला असिस्टेंट कमिश्नर की योजना नाकाम


    खंडवा । खंडवा जनजातीय कार्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला अब विवादों के घेरे में हैं क्योंकि रिटायरमेंट के आखिरी सप्ताह में उन्होंने अपने चहेते टीचर को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए नोटशीट चलायी जो प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र से टकरा गयी शुक्ला ने जिस तरह से थोकबंद ट्रांसफर पोस्टिंग आर्डर निकालकर अपनी पसंद की सिफारिश कलेक्टर स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया वह मामला अब बड़े स्तर पर उभर गया है जब यह खबर दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद सार्वजनिक हुई तो प्रभारी मंत्री ने शुक्ला के जारी किये गये आदेशों को निरस्त करवा दिया

    सूत्र बताते हैं कि रिटायर होने से पहले शुक्ला ने सिर्फ अपने विभागीय आदेश जारी नहीं किये बल्कि उन्होंने यह भी तय कर लिया कि रिटायरमेंट के बाद कौन अधिकारी उनके स्थान पर कार्यभार संभालेगा इस कड़ी में एक नोटशीट तैयार की गयी जिसमें उन्होंने अपने चहेते टीचर का नाम असिस्टेंट कमिश्नर के पद के लिए आगे बढ़ाया यह फाइल जिला पंचायत से होते हुए कलेक्टर कार्यालय तक आयी

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने नोटशीट में दर्ज नाम के स्थान पर विभाग में सेकंड पोजीशन पर पदस्थ नीरज पाराशर का नाम दर्ज कराया और उन्हीं को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज देने की अनुशंसा की इस कदम ने शुक्ला की योजना पर त्वरित विराम लगा दिया क्योंकि पाराशर और शुक्ला के बीच पहले से आपसी खींचतान चल रही थी

    कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद जब मामला मंत्री स्तर तक पहुंचा तो प्रभारी मंत्री ने शुक्ला के जारी किये गये ट्रांसफर पोस्टिंग आर्डर को निरस्त करने का आदेश दिया और साथ ही शुक्ला के कार्यकाल में हुई पोस्टिंग ट्रांसफर गतिविधियों की जांच के लिए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में कमेटी भी बना दी गयी

    जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार शुक्ला ने अपने रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर पोस्टिंग आदेश जारी किये जिनमें उनके चहेते कर्मचारी को लाभ देने की कोशिश स्पष्ट रूप से दर्ज है यह बात प्रशासनिक दायरे में तथा कर्मचारियों की प्रतिक्रियाओं में भी चर्चा का विषय बनी हुई है

    कलेक्टर ने जो निर्णय लिया वह विभागीय नियमों के अनुरूप बताया जा रहा है अधिकारियों का कहना है कि जब किसी अधिकारी का रिटायरमेंट निश्चित हो तो उनके अधिकार सीमित हो जाते हैं और ऐसे मामलों में उच्च प्रशासनिक स्तर के दिशा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है शुक्ला द्वारा नोटशीट में नाम आगे बढ़ाये जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाये जा रहे हैं

    मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिये कि विभागीय आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाये और मामले की गहन जांच करायी जाये ताकि इस प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप और पॉलिटिकल दबाव की सच्चाई सामने आये जांच कमेटी जल्द ही अपना कार्य प्रारम्भ करेगी और इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों से पूछताछ करेगी

    प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की पोस्टिंग सिफारिश का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह जांच का विषय बन गया है कि क्या रिटायर हो रहे अधिकारी ने पद के दुरुपयोग के अलावा अन्य किस तरह से अपनी पसंद की नियुक्ति कराने का प्रयास किया

    इस विवाद ने स्थानीय प्रशासनिक माहौल को भी प्रभावित किया है कर्मचारियों के बीच इस प्रकार की सिफारिश और हस्तक्षेप को गलत माना जा रहा है और यह भी चर्चा में है कि यदि ऐसी कोशिशें छूट गयीं तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की बानगी और अधिक बढ़ सकती है

    अब देखना यह है कि जांच कमेटी क्या निष्कर्ष निकालती है और किन अधिकारियों कर्मचारियों की भूमिका प्रकाश में आती है इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन किस हद तक महत्वपूर्ण है और किस प्रकार गलत प्रयासों को रोकने वाले संस्थागत उपाय प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं

    इस प्रकार संतोष शुक्ला की अंतिम सिफारिश ने प्रशासनिक नियमों की परीक्षा ली और कलेक्टर द्वारा उचित कदम उठाये जाने से यह मामला नियंत्रण में आ गया है जबकि जांच के परिणाम से भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम और भी सशक्त होगी 

  • नर्मदा घाट पर पानी में डूबा युवक, खोज अभियान जारी

    नर्मदा घाट पर पानी में डूबा युवक, खोज अभियान जारी


    नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित पीपरपानी नर्मदा घाट पर आज सुबह एक युवक डूबने की घटना सामने आई। जानकारी के अनुसार युवक रमेश दलित निवासी छेना कछार गांव चीचली ब्लॉक अपने परिवार के साथ अपने रिश्तेदार के घर आया हुआ था। नहाने के दौरान वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूब गया।

    घटना के तुरंत बाद परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने युवक को बचाने का प्रयास किया लेकिन गहराई और बहाव के कारण वह पानी में दिखाई नहीं दिया। घटना के बाद से ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा युवक की तलाश जारी है। मौके पर पीएससी और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ कुछ स्वयंसेवी लोग भी मदद कर रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि नर्मदा नदी का यह हिस्सा बारिश और पानी के बहाव के कारण खतरनाक माना जाता है। घाट पर सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं होने के कारण ऐसे हादसे अक्सर होते रहते हैं। पुलिस ने परिवार को शांति बनाए रखने और घटनास्थल पर सहयोग करने की सलाह दी है।

    पुलिस ने बताया कि तलाश अभियान रात और दिन दोनों समय जारी रहेगा। डुबे हुए युवक को निकालने के लिए गोताखोरों और स्थानीय प्रशासन की टीम लगाए गए हैं। नदी के आसपास के इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कोई और दुर्घटना न हो।

    स्थानीय प्रशासन ने अपील की है कि लोग नदी के गहरे हिस्सों में न जाएं और बच्चों या युवाओं को अकेले न जाने दें। साथ ही उन्होंने नहाने के लिए सुरक्षित घाटों का ही उपयोग करने की चेतावनी दी है।

    परिवार ने बताया कि रमेश दलित अपने रिश्तेदार के घर आया हुआ था और वे सब नर्मदा घाट पर नहाने आए थे। वह अचानक गहरे पानी में चला गया और उसके डूबने के बाद से उसे खोजा जा रहा है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और सभी सदस्यों ने प्रशासन से पूरी मदद की अपील की है।

    घटना ने स्थानीय लोगों में सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन और पुलिस ने कहा है कि नदी और घाट पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए जल्द ही कुछ उपाय किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    इस बीच डूबे युवक की तलाश जारी है और गोताखोर एवं पुलिस टीम सभी प्रयास कर रही है कि रमेश दलित को सुरक्षित निकाला जा सके। यह हादसा नर्मदा घाटों पर सुरक्षा के अभाव और नदी के खतरनाक बहाव को लेकर एक चेतावनी भी है।

  • एक मंडप तीन दुल्हनें अनोखी शादी ने मचाया तहलका मध्यप्रदेश से आई चौंकाने वाली कहानी

    एक मंडप तीन दुल्हनें अनोखी शादी ने मचाया तहलका मध्यप्रदेश से आई चौंकाने वाली कहानी

    अलीराजपुर । मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के नानपुर गांव से सामने आई एक अनोखी शादी इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है जहां एक शख्स ने अपनी एक नहीं बल्कि तीन प्रेमिकाओं के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लेकर सबको हैरान कर दिया। यह शादी सिर्फ एक निजी समारोह नहीं रही बल्कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती हुई एक ऐसी कहानी बन गई जिसने परंपरा समाज और रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    समरथ मौर्य नाम के इस व्यक्ति ने अपनी तीनों प्रेमिकाओं के साथ जनजातीय रीति रिवाजों के अनुसार विवाह किया। यह विवाह एक दिन का नहीं बल्कि पूरे तीन दिनों तक चलने वाला आयोजन था जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए और इस अनोखे पल के गवाह बने। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस शादी में उनके छह बच्चे भी शामिल हुए जिन्होंने अपने पिता की बारात में जमकर नृत्य किया और इस आयोजन को एक अलग ही रंग दे दिया।

    बताया जाता है कि समरथ मौर्य का अपनी पहली प्रेमिका के साथ रिश्ता साल 2003 से जुड़ा हुआ था और समय के साथ बाकी दो महिलाएं भी उनके जीवन का हिस्सा बन गईं। पिछले करीब 15 वर्षों से ये सभी एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे और एक परिवार की तरह जीवन बिता रहे थे। लंबे समय तक बिना शादी के साथ रहने के बाद आखिरकार उन्होंने सामाजिक मान्यता और पारिवारिक पहचान के लिए विवाह करने का निर्णय लिया।

    इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला यह कि उनके बच्चों को समाज में किसी तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े और उन्हें एक स्पष्ट पहचान मिल सके। दूसरा कारण जनजातीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है जहां किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विवाहित होना आवश्यक माना जाता है। ऐसे में इस परिवार ने अपने रिश्ते को औपचारिक रूप देने का रास्ता चुना।

    इस अनोखी शादी को लेकर कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा तेज हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में एक से अधिक विवाह भारतीय कानून के तहत मान्य नहीं होते लेकिन जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार कुछ विशेष छूट दी गई है। इसी वजह से यह विवाह उस समाज की परंपराओं के अंतर्गत वैध माना जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर इस शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई इसे प्रेम और जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहा है तो कोई इसे सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ मानकर सवाल उठा रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि भारत के अलग अलग हिस्सों में परंपराएं और सामाजिक संरचनाएं आज भी विविधता से भरी हुई हैं जहां रिश्तों को देखने का नजरिया भी अलग अलग हो सकता है।

    यह शादी अब सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं रही बल्कि एक ऐसी कहानी बन गई है जो यह दिखाती है कि बदलते समय के बीच भी परंपराएं किस तरह लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं और कैसे लोग अपने हालात और सामाजिक जरूरतों के अनुसार फैसले लेते हैं।

  • इंदौरः महू में दर्दनाक हादसा, कार में आग लगने से 4 वर्षीय बच्चे की जलकर मौत

    इंदौरः महू में दर्दनाक हादसा, कार में आग लगने से 4 वर्षीय बच्चे की जलकर मौत


    इंदौर । जिले के महू क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में चार वर्षीय बच्चे की कार में जलकर मौत हो गई। घटना सिमरोल थाना क्षेत्र की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिराग नामक बच्चा अपने पिता संजय बढ़िया के साथ इंदौर-खंडवा रोड स्थित एक कार्यस्थल पर गया था। संजय, जो पेशे से मैकेनिक हैं, कार के बाहर काम में व्यस्त थे, जबकि बच्चा वाहन के अंदर बैठा हुआ था।
    इसी दौरान अचानक कार से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी कार कुछ ही देर में जलकर खाक हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लपटों की तीव्रता के कारण वे सफल नहीं हो सके।

    सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। आग बुझाने के बाद कार के अंदर से बच्चे का जला हुआ शव बरामद किया गया। थाना प्रभारी कुलदीप खत्री के अनुसार, टीम के पहुंचने से पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया था।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए महू सिविल अस्पताल भेजा गया है। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

  • शादी की खुशियां मातम में बदलीं: भाइयों के बीच 'गन्ने के पैसों' का विवाद बना बहन का काल, जहर खाकर दी जान

    शादी की खुशियां मातम में बदलीं: भाइयों के बीच 'गन्ने के पैसों' का विवाद बना बहन का काल, जहर खाकर दी जान


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जहाँ एक ओर परिवार में बेटी के हाथ पीले करने की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही थीं और घर में मंगल गीतों की गूंज होनी थी वहीं अब वहाँ चीख-पुकार और मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है। आमला थाना क्षेत्र के खरपड़ा खेड़ी गांव में एक युवती ने पारिवारिक कलह से तंग आकर मौत का रास्ता चुन लिया जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 वर्षीय बबली बघेल की शादी आगामी 28 अप्रैल को तय हुई थी। घर में शादी का कार्ड बंटने से लेकर मेहमानों के स्वागत तक की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। खुशियों के इस माहौल के बीच घर की आर्थिक स्थिति और शादी के खर्चों को लेकर उपजा विवाद अंततः एक बड़ी त्रासदी में बदल गया। पुलिस सूत्रों और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विवाद की जड़ में गन्ने की फसल की बिक्री से मिली राशि थी।

    बताया जा रहा है कि युवती के बड़े भाई ने हाल ही में गन्ने की फसल बेची थी जिसका पैसा घर आया था। नियत योजना के अनुसार इसी राशि से बबली की शादी की खरीदारी और अन्य इंतज़ाम किए जाने थे। इसी बीच छोटे भाई ने शादी के खर्चों के नाम पर बड़े भाई से पैसों की मांग शुरू कर दी जिसे लेकर दोनों भाइयों के बीच कहासुनी हो गई। धीरे-धीरे यह मामूली बहस एक उग्र विवाद में तब्दील हो गई और घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    बबली जो अपनी आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजाए बैठी थी अपने भाइयों को आपस में लड़ते देख गहरे मानसिक आघात में चली गई। उसने बीच-बचाव करने और दोनों को समझाने की पुरजोर कोशिश की कि उसकी शादी की खुशियों में इस तरह का झगड़ा शोभा नहीं देता लेकिन भाइयों के बीच अहं और पैसों की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही थी। भाइयों की जिद और घर के बिगड़ते हालात से आहत होकर बबली ने गुरुवार को आत्मघाती कदम उठाते हुए घर में रखा जहर खा लिया।

    जब तक परिजनों को इस बात की भनक लगी और उसे उपचार के लिए ले जाया गया तब तक काफी देर हो चुकी थी। बबली की मौत की खबर मिलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। जिस आंगन में मंडप सजने वाला था वहाँ अब उसकी अर्थी को कंधा देने की तैयारी हो रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपसी कलह और आवेश में लिए गए फैसले न केवल रिश्तों को खत्म करते हैं बल्कि मासूमों की जान के दुश्मन भी बन जाते हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने संत श्री सुंदर दास की जयंती पर किया श्रद्धांजलि व नागरिकों के लिए प्रेरणा का संदेश

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने संत श्री सुंदर दास की जयंती पर किया श्रद्धांजलि व नागरिकों के लिए प्रेरणा का संदेश


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान कवि और राष्ट्रसंत 1008 श्री सुंदर दास जी महाराज की 430वीं जयंती पर उनका पुण्य स्मरण कर नमन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत श्री सुंदर दास जी का जीवन सभी नागरिकों के लिए ज्ञान, भक्ति और राष्ट्र सेवा का प्रेरणास्त्रोत रहेगा। उन्होंने संत श्री की जयंती पर खंडेलवाल समाज को शुभकामनाएं भी दीं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संत के संदेश को याद करते हुए सभी से उनकी शिक्षाओं को अपनाने और समाज में सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

  • सागर में डंपरों का खूनी तांडव: 24 घंटे में पांच युवकों की दर्दनाक मौत

    सागर में डंपरों का खूनी तांडव: 24 घंटे में पांच युवकों की दर्दनाक मौत


    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीते 24 घंटे मौत का पैगाम लेकर आए। शहर की सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे भारी वाहनों ने पांच हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझा दिए। रफ्तार के इस खूनी खेल में दो अलग-अलग घटनाओं ने न केवल शहर को शोक में डुबो दिया है, बल्कि प्रशासन की लचर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह था कि हादसों का मंजर इतना खौफनाक था कि जिसने भी देखा, उसका दिल दहल उठा।

    पहली हृदयविदारक घटना सागर के बंडा रोड पर घटित हुई। यहाँ एक तेज रफ्तार डंपर ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बाइक पर सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो डंपर की गति इतनी अधिक थी कि बाइक सवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, ये तीनों मृतक बंडा क्षेत्र के ही निवासी थे, जो किसी काम से बाहर निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर वापसी का रास्ता मौत की गली से होकर गुजरेगा।

    अभी बंडा रोड की घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि देर रात सागर शहर के खेल परिसर के पास एक और वीभत्स हादसा हो गया। यहाँ से गुजर रहे एक अनियंत्रित ट्राले क्रमांक RJ 06 GD 2973 ने बाइक सवार दो युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक ट्राले के पहियों के नीचे आ गए। टक्कर के बाद का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि सड़क पर मांस के टुकड़े बिखरे पड़े थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने इकट्ठा किया। मृतकों की पहचान गोपालगंज निवासी के रूप में हुई है।

    हादसे की खबर मिलते ही गोपालगंज और कोतवाली पुलिस सहित सीएसपी ललित कश्यप दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाइक सवार अपनी सही दिशा में जा रहे थे, लेकिन पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें बेरहमी से कुचल दिया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है।

    हैरानी की बात यह है कि सागर के मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों का बेखौफ दौड़ना अब एक आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीली कोठी से डिग्री कॉलेज चौराहे के बीच का मार्ग ‘डेथ जोन’ बनता जा रहा है। यहाँ आए दिन सड़क हादसे होते हैं, कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले इन भारी वाहनों पर न तो गति सीमा का नियंत्रण है और न ही इनके प्रवेश के समय का कोई सख्ती से पालन हो रहा है।

    इन पांच मौतों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो सागर की सड़कें इसी तरह मासूमों के खून से लाल होती रहेंगी। फिलहाल, पुलिस ने मामलों को जांच में लिया है, लेकिन सवाल वही बरकरार है इन मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है? वह डंपर चालक जो अपनी रफ्तार के नशे में था या वह तंत्र जिसने इन भारी वाहनों को शहर की छाती पर तांडव करने की खुली छूट दे रखी है?

  • प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा

    प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार कड़े फैसले लेते नजर आ रहे हैं। अपने सवा दो साल के कार्यकाल में उन्होंने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में गुना के एसपी अंकित सोनी और सीधी के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाने की कार्रवाई इसी सख्ती का ताजा उदाहरण है।

    13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही डॉ. यादव ने प्रशासन में जवाबदेही तय करने की दिशा में आक्रामक रुख अपनाया है। अब तक उनके कार्यकाल में 10 आईएएस और 8 आईपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन कार्रवाइयों में कई कलेक्टर और एसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं जो प्रशासनिक ढांचे में बेहद अहम माने जाते हैं।

    गुना में हाल ही में सामने आए मामले में एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये की जब्ती के बाद कथित रूप से 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने और उचित कार्रवाई न करने के आरोपों के चलते एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। इस मामले में थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है। वहीं सीधी में कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित रूप से उपस्थित न रहने और जनसुनवाई में लापरवाही के आरोप लगे जिसके बाद उन्हें पद से हटाया गया।

    इससे पहले भी कई बड़े मामलों में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई मौतों के बाद नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त पर कार्रवाई की गई। हरदा में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट और सागर में दीवार गिरने जैसी घटनाओं में भी कलेक्टर और एसपी को हटाया गया। मऊगंज हत्याकांड और सिवनी में गोवंश हत्या के मामलों में भी प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाया गया।

    शाजापुर में एक कलेक्टर द्वारा ड्राइवर से अपमानजनक व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई की गई थी। वहीं कटनी में विवादों में घिरे एसपी को भी हटाकर स्पष्ट संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रशासनिक कार्य।

    इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री का यह रुख प्रशासनिक मशीनरी में अनुशासन और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में यह एक नया प्रशासनिक ट्रेंड बनता दिख रहा है जहां लापरवाही या विवाद सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इससे एक ओर जहां अधिकारियों में सतर्कता बढ़ी है वहीं आम जनता के बीच यह संदेश भी गया है कि शासन अब गंभीर मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

  • सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा

    सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में मिलावटी दूध के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। लोगों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार को कनाडिया क्षेत्र में छापेमारी कर कई डेयरियों की जांच की।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कनाडिया रोड और आसपास के इलाकों में सघन अभियान चलाते हुए जोशी दूध दही भंडार ओसवाल डेरी गणेश दूध दही भंडार और पूजा डेयरी सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने अलग अलग डेयरियों से दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र किए ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान जोशी दूध दही भंडार से 4 ओसवाल डेरी से 3 गणेश दूध दही भंडार से 3 और पूजा डेयरी से दूध व मावा के 2 नमूने लिए गए। इस तरह कुल 12 सैंपल जब्त किए गए हैं जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने मौके पर ही डेयरी संचालकों को साफ सफाई बनाए रखने और मिलावट से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने डेयरी संचालकों को चेतावनी दी कि अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कानूनी कार्रवाई तय है।

    खाद्य विभाग के अनुसार सभी नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे जिसमें जुर्माना से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

    प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की छापेमारी कर मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पाद बेचने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।

    कुल मिलाकर इंदौर प्रशासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लोगों की सेहत से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्ती लगातार बढ़ती रहेगी।

  • भोपाल के कटारा हिल्स में भीषण आग: 20 फीट तक उठीं लपटें, दमकल देरी से पहुंचने पर नाराजगी

    भोपाल के कटारा हिल्स में भीषण आग: 20 फीट तक उठीं लपटें, दमकल देरी से पहुंचने पर नाराजगी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में देर रात एक भीषण आगजनी की घटना सामने आई जिसने स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया। स्प्रिंग वैली क्षेत्र में स्थित रजाई गद्दे की एक दुकान में लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग की लपटें करीब 20 फीट तक ऊपर उठ रही थीं जिससे आसपास के इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। जिस दुकान में आग लगी वह श्री वृंदावन फास्ट फूड एंड रेस्टोरेंट के पास स्थित है। आग लगते ही आसपास मौजूद लोगों और राहगीरों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी लेकिन आरोप है कि दमकल की गाड़ियां करीब 45 मिनट की देरी से मौके पर पहुंचीं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दमकल समय पर पहुंच जाती तो आग को जल्दी काबू में किया जा सकता था और नुकसान कम होता। देरी के कारण आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते सारा सामान जलकर राख हो गया।

    मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के बाद लोग लगातार मदद के लिए फोन करते रहे लेकिन काफी देर तक कोई राहत नहीं मिली। एक महिला ने बताया कि जब दमकल की गाड़ी पहुंची तो उसमें तकनीकी खराबी बताई गई। इसके बाद कर्मचारियों को मौके पर ही संसाधन जुटाकर गाड़ी को दुरुस्त करना पड़ा जिससे आग बुझाने में और देरी हुई।

    इस पूरी घटना का वीडियो भी स्थानीय लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया जो अब सामने आ रहा है। वीडियो में आग की भयावहता साफ दिखाई दे रही है जहां तेज लपटें आसमान की ओर उठती नजर आ रही हैं। हालांकि काफी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया लेकिन तब तक दुकान पूरी तरह जल चुकी थी। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में दमकल विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि आपात स्थिति में इस तरह की लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।