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  • बस हादसों पर RTO की सख्ती: जबलपुर में बस बॉडी मेकिंग कारखानों पर ताबड़तोड़ छापे. एक यूनिट सील

    बस हादसों पर RTO की सख्ती: जबलपुर में बस बॉडी मेकिंग कारखानों पर ताबड़तोड़ छापे. एक यूनिट सील


    जबलपुर । हाल के दिनों में यात्री बसों में आग लगने की घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इन हादसों में कई मासूम लोगों की जान जा चुकी है और कई परिवार उजड़ गए हैं। इन घटनाओं से सबक लेते हुए अब जबलपुर का परिवहन विभाग पूरी तरह सख्ती के मूड में नजर आ रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आरटीओ ने बस बॉडी मेकिंग कारखानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में आरटीओ संतोष पॉल के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम ने महानद्दा क्षेत्र स्थित ‘दिक्षु बस बॉडी मेकिंग’ कारखाने पर अचानक छापा मारा। जांच के दौरान कारखाने में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
    सबसे अहम बात यह रही कि यूनिट के पास अनिवार्य सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी. जो बस बॉडी निर्माण के लिए जरूरी मानी जाती है। इसके अलावा मौके पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी देखी गई।जांच में यह भी पाया गया कि कारखाने में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और निर्माण प्रक्रिया में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। इन गंभीर खामियों को देखते हुए परिवहन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बस बॉडी मेकिंग यूनिट को सील कर दिया। आरटीओ की इस सख्त कार्रवाई से बस बॉडी निर्माताओं में हड़कंप मच गया है।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई बस बॉडी सेंटर्स ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तय मापदंडों की अनदेखी कर रहे हैं। यही लापरवाही आगे चलकर बड़े हादसों की वजह बन रही है। नियमों के उल्लंघन के तहत घटिया क्वालिटी की वायरिंग. ज्वलनशील मटेरियल का उपयोग. इमरजेंसी गेट की कमी और फायर सेफ्टी मानकों में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ कारखाने बिना ARAI सर्टिफिकेशन के ही बस बॉडी का निर्माण कर रहे हैं. जो सीधे तौर पर यात्रियों की जान को खतरे में डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बसों में लगने वाली आग की बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट और खराब वायरिंग होती है. जिसकी जड़ इन्हीं अवैध और लापरवाह निर्माण प्रक्रियाओं में छिपी है।

    परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आरटीओ का कहना है कि जो भी बस बॉडी निर्माता नियमों का पालन नहीं करेगा. उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. चाहे वह सीलिंग हो या कानूनी कार्रवाई। आने वाले दिनों में जबलपुर के अन्य बस बॉडी मेकिंग सेंटर्स पर भी इसी तरह की जांच और छापेमारी की जाएगी। विभाग की इस सख्ती से यह उम्मीद की जा रही है कि बस निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा और भविष्य में बसों में होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं पर प्रभावी रूप से रोक लग सकेगी। यात्रियों की जान बचाने के लिए उठाया गया यह कदम परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की बधाई. बोले– देश के युवा अब जॉब सीकर नहीं. जॉब क्रिएटर बन रहे

    राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की बधाई. बोले– देश के युवा अब जॉब सीकर नहीं. जॉब क्रिएटर बन रहे


    भोपाल । राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश और देश के युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए स्टार्टअप संस्कृति की सराहना की है। उन्होंने कहा कि आज का युवा आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत कर रहा है और रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनकर सफलता के नए अध्याय लिख रहा है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 में आज ही के दिन राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत की थी।
    यह पहल देश में नवाचार. उद्यमिता और निवेश आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। सीएम ने लिखा कि राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमारे देश के युवा नौकरी मांगने वाले नहीं. बल्कि नौकरी देने वाले बनकर सफलता के नित नए अध्याय लिख रहे हैं। स्टार्टअप के लिए समर्पित सभी युवाओं के लिए मेरी मंगलकामनाएं हैं।सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया अभियान ने युवाओं की सोच को बदला है। आज युवा अपने विचारों और नवाचार के दम पर न केवल स्वयं आगे बढ़ रहे हैं. बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में मजबूत कदम है।

    उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की शुरुआत देश में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने और इसे महानगरों से निकालकर दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करना. नए रोजगार के अवसर पैदा करना और भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। स्टार्टअप दिवस के माध्यम से सरकार नवाचार आधारित सोच. तकनीकी विकास और निवेश को प्रोत्साहित करती है।स्टार्टअप इंडिया के तहत अब तक हजारों स्टार्टअप्स को मान्यता मिल चुकी है. जिससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। शिक्षा. स्वास्थ्य. कृषि. आईटी. फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश सरकार स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य में स्टार्टअप नीति. इनक्यूबेशन सेंटर और फंडिंग सपोर्ट के जरिए युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में प्रदेश के युवा नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।कुल मिलाकर. राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं. बल्कि यह युवाओं की सोच. आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है. जिसमें देश का युवा भविष्य की अर्थव्यवस्था को आकार दे रहा है।

  • खंडवा में फ्लोराइड पानी से स्वास्थ्य संकट,बच्चों के दांत और हड्डियां कमजोर, कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    खंडवा में फ्लोराइड पानी से स्वास्थ्य संकट,बच्चों के दांत और हड्डियां कमजोर, कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    खंडवा। जिले के किल्लौद विकासखंड के कई गांवों में पेयजल में अत्यधिक फ्लोराइड मिलने से स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण और बच्चों में दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं, वहीं हड्डियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर ऋषव गुप्ता को ज्ञापन सौंपा।

    बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित
    ज्ञापन में बताया गया कि फ्लोराइड युक्त पानी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही उनके दांत खराब और पीले हो रहे हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। साथ ही कई ग्रामीण हड्डियों की समस्याओं से जूझ रहे हैं। पूरे क्षेत्र में जनस्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने लगी है और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    विधायक की चुप्पी पर कांग्रेस का हमला
    कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी ने क्षेत्रीय विधायक नारायण पटेल की चुप्पी को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, जिम्मेदार विधायक के मौन से यह स्पष्ट होता है कि वह अपने कार्यों के प्रति कितने उत्तरदायी हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

    प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें
    जनसुनवाई में कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं:

    किल्लौद ब्लॉक के सभी गांवों के पेयजल स्रोतों की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए।

    प्रभावित लोगों के लिए फ्लोराइड मुक्त और सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था शीघ्र की जाए।

    बच्चों और नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएं।

    समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालीन ठोस कार्ययोजना बनाई जाए और उसे लागू किया जाए।

    स्थानीय स्थिति और प्रशासनिक कदम
    ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से न केवल स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के भविष्य को भी खतरे में डाल रहा है। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और जल सुरक्षा के लिए विशेष पहल करने की मांग की।

    सभी गांवों में नियमित जल परीक्षण और निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो कांग्रेस और ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

    खंडवा के किल्लौद में इस पहल से यह संदेश गया कि स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जनता की इन मांगों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

  • भोपाल में शुरू हुई 'जल सुनवाई', लोगों ने लगाया कार्बाइड वाले पानी का आरोप

    भोपाल में शुरू हुई 'जल सुनवाई', लोगों ने लगाया कार्बाइड वाले पानी का आरोप



    भोपाल। शहर के 85 वार्डों में मंगलवार को पहली बार ‘जल सुनवाई’ आयोजित की गई। यह सुनवाई सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर 1 बजे तक चली। इस दौरान आमजन ने पानी से जुड़ी अपनी शिकायतें सीधे नगर निगम अधिकारियों के सामने रखीं।
    ब्रिज विहार और निशातपुरा के रहवासियों ने निगम के आईएसबीटी स्थित कार्यालय में पहुंचकर नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि नगर निगम उन्हें कार्बाइड का जहरीला पानी पीने को मजबूर कर रहा है। मोहल्ले के लोगों ने अपने मांगपत्र के साथ कार्यालय के बाहर नारेबाजी भी की।
    प्रदेश में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है।
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लगभग 23 लोगों की मौत हो चुकी है। भोपाल के आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव जैसे क्षेत्रों में भी पानी दूषित पाया गया है, जिसके चलते भूजल के उपयोग पर रोक लगा दी गई है।
    सरकार ने इस समस्या को देखते हुए हर मंगलवार को ‘जल सुनवाई’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस दौरान अधिकारी और एक्सपर्ट्स मिलकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे और जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देंगे।
    जल सुनवाई में क्या होगा शामिल
    जल के नमूनों का परीक्षण विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं
    रंग, स्वाद, गंध
    पीएच, कुल क्षारीयता, क्लोराइड
    कुल कठोरता, कैल्शियम कठोरता, मैग्नेशियम कठोरता
    टीडीएस, टरबीडिटी
    रेसिडुअल क्लोरीन, कोलीफार्म, ई-कोलाई

    हर वार्ड में होगी सुनवाई
    नगर निगम के कमिश्नर संस्कृति जैन ने निर्देश दिया है कि सभी वार्ड कार्यालय में जल सुनवाई आयोजित की जाए। लोग अपने पानी के नमूने भी संबंधित वार्ड कार्यालय में जमा करवा सकेंगे।
    इस पहल से जनता को यह सुविधा मिलेगी कि वे सीधे अधिकारियों को अपनी शिकायतें बता सकें और जल की गुणवत्ता पर निगरानी रख सकें। यह कदम भोपाल में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • ग्वालियर में देर रात बाइक सवार बदमाशों का तांडव, डंडों से एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों के कांच फोड़े

    ग्वालियर में देर रात बाइक सवार बदमाशों का तांडव, डंडों से एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों के कांच फोड़े


    ग्वालियर /मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में देर रात बाइक सवार बदमाशों ने जमकर आतंक मचाया। थाना क्षेत्र में रात करीब एक बजे तीन बदमाशों ने सड़कों पर उत्पात मचाते हुए घरों के बाहर और सड़क किनारे खड़ी एक दर्जन से अधिक गाड़ियों के कांच तोड़ दिए। अचानक हुई इस तोड़फोड़ से इलाके में दहशत का माहौल बन गया और सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो टूटे कांच देखकर सन्न रह गए।

    घटना ग्वालियर थाना क्षेत्र के रामटापुरा इलाके से शुरू हुई, जहां से बाइक सवार बदमाश सेवा नगर होते हुए किला गेट तक पहुंचे। इस पूरे रास्ते में जहां-जहां उन्हें कार, लोडिंग वाहन या अन्य गाड़ियां खड़ी मिलीं, उन्होंने बिना किसी डर के डंडों से उनके शीशे तोड़ दिए। बदमाश लगातार चलते रहे और पीछे तबाही के निशान छोड़ते गए।सुबह जब वाहन मालिकों ने अपनी गाड़ियों को देखा तो कई कारों के आगे और साइड के कांच टूटे हुए थे। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

    इस मामले में एक अहम सुराग उस समय मिला जब रामटापुरा इलाके में लगे एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सामने आई। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बदमाश बाइक से उतरकर हाथ में डंडा लिए दौड़ रहे हैं और एक घर के बाहर खड़ी लोडिंग गाड़ी के कांच बेरहमी से तोड़ रहे हैं। वीडियो में बदमाशों की हरकतें इतनी बेखौफ नजर आईं कि लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ गए।सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में बदमाशों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने इस वारदात को क्यों अंजाम दिया। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे कोई आपसी रंजिश, नशे की हालत या किसी अन्य कारण की भूमिका तो नहीं है।

    गाड़ी मालिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं आम लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। उनका आरोप है कि रात के समय पुलिस गश्त और निगरानी मजबूत होती तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती। पीड़ितों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस न कर सके।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चारों संदिग्धों के खिलाफ वाहन क्षति और सार्वजनिक शांति भंग करने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी।

  • मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने 2 साल बाद भूपेंद्र के क्षेत्र का किया पहला दौरा; राजपूत भी रहे मौजूद

    मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने 2 साल बाद भूपेंद्र के क्षेत्र का किया पहला दौरा; राजपूत भी रहे मौजूद

    भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को खुरई पहुंचे, यह उनका अपने पद संभालने के दो साल बाद भूपेंद्र सिंह के क्षेत्र का पहला दौरा था। इस अवसर पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भी यादव के साथ मौजूद रहे। खुरई में आयोजित रोड शो और जनसैलाब ने मुख्यमंत्री को काफी भावुक कर दिया।

    मुख्यमंत्री यादव ने खुरई के लिए 312 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की घोषणा की। यादव ने स्वागत और उत्साह देख कर कहा कि वह यहां ठहरने का मन कर रहे थे। यादव ने पिछले दो सालों में लगभग सभी भाजपा विधायकों के क्षेत्रों का दौरा किया है, लेकिन भूपेंद्र सिंह इस दौरान ज्यादातर दौरों में अनुपस्थित रहे।

    राजनीतिक माहौल पर नजर डालें तो सागर में पिछले दो साल से भूपेंद्र और गोविंद के बीच सियासी प्रतिस्पर्धा जारी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सागर दौरे के दौरान दोनों नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की थी। इस दौरे के दौरान दोनों नेताओं को एक साथ मंच पर देखा गया।

    राजपूत का भाषण विवाद

    कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री यादव को भाषण के बाद फोन किया। लेकिन इसके बावजूद गोविंद सिंह राजपूत ने अपना भाषण दे दिया। भूपेंद्र ने समय की कमी का हवाला दिया, बावजूद इसके राजपूत ने अपनी बात रखी, जिससे हल्का विवाद देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव का खुरई दौरा दो वर्षों के बाद भूपेंद्र सिंह के क्षेत्र में विकास योजनाओं की घोषणाओं और राजनीतिक समीकरणों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंच पर दोनों नेताओं की उपस्थिति और राजपूत का भाषण विवाद इस दौरे की चर्चा का प्रमुख हिस्सा बना।

  • अंबेडकर पोस्टर प्रकरण: अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत, तत्काल रिहाई..

    अंबेडकर पोस्टर प्रकरण: अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत, तत्काल रिहाई..


    ग्वालियर। हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एडवोकेट अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और समान राशि की जमानत पर तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया। चार दिनों से न्यायिक हिरासत में बंद मिश्रा की रिहाई अब सुनिश्चित हो गई है यह मामला ग्वालियर से जुड़ा है, जहां सोशल मीडिया पर कथित पोस्टर जलाने की घटना के बाद साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई की। इस प्रकरण में अनिल मिश्रा समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

    हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई आपत्ति

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि एफआईआर में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर अनिल मिश्रा को नोटिस देकर पूछताछ की जा सकती थी। हिरासत लेना अंतिम विकल्प होना चाहिए था, जबकि इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी से पहले वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की गई, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा संवेदनशील विषय है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसी आधार पर जमानत प्रदान की गई। हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि अन्य सह-आरोपियों को भी राहत मिल सकती है, बशर्ते उनके मामलों में परिस्थितियां समान हों।

    एफआईआर रद्द करने की मांग पर अलग सुनवाई
    अनिल मिश्रा की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि दर्ज एफआईआर कानूनन टिकाऊ नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर निरस्त करने की मांग को अलग प्रक्रिया के तहत सुना जाएगा। फिलहाल केवल जमानत याचिका पर निर्णय लेते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।

    पुलिस जांच जारी

    ग्वालियर साइबर पुलिस का कहना है कि प्रकरण की जांच अभी भी जारी है और सोशल मीडिया से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली पर जवाबदेह रहना होगा।

    कानूनी हलकों में चर्चा

    इस फैसले के बाद प्रदेश के कानूनी और अधिवक्ता समुदाय में चर्चा तेज हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की वैधानिक सीमाओं को रेखांकित करता है। पुलिस को यह संदेश जाता है कि संवेदनशील मामलों में भी कानून की प्रक्रिया से समझौता नहीं किया जा सकता।
  • फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा

    फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा



    इंदौर। इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सवाल पूछने वाले एक पत्रकार से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बदसलूकी और अपशब्दों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे इंदौर को शर्मसार करने वाला बताते हुए विजयवर्गीय से तत्काल इस्तीफा लेने की मांग की है।

    पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

    जो जिम्मेदारी सरकार की थी, वह मीडिया ने निभाई। उन्होंने पत्रकारों का आभार जताते हुए कहा कि मंत्री ने मुफ्त इलाज के दावे किए, लेकिन जब उसी पर एक पत्रकार ने सवाल पूछा तो उसे गालियां दी गईं। कांग्रेस उस पत्रकार के साथ खड़ी है और उसके सम्मान में कोई कमी नहीं आने देगी।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि पहले 25 बच्चों की मौत हुई, अब 13 और लोगों की जान चली गई, लेकिन आज तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली।

    पटवारी ने भाजपा सरकार को हत्यारी सरकार बताते हुए कहा कि जिस इंदौर को जनता ने स्वच्छता का तमगा दिलाया, उसी शहर की जनता को जहर मिला पानी पिलाया गया।

    कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए दो पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। पटवारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और घायलों को बेहतर व निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।

    इस बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में गलती मानने की बजाय चोरी और सीनाजोरी की जाती है। हर घटना का ठीकरा विपक्ष या पुराने नेताओं पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने देशभर में बढ़ती हिंसा और कथित घोटालों का जिक्र करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

    घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    दरअसल, बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक रिपोर्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज खर्च के रिफंड को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कहा, फोकट सवाल मत पूछो। रिपोर्टर के विरोध करने पर विजयवर्गीय ने आपा खोते हुए अपशब्द कह दिए। हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने शब्दों को लेकर खेद भी जताया, लेकिन तब तक यह मामला सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका था।

  • कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा

    कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा



    खंडवा। खंडवा जिले को जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति पुरस्कार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जहां एक चर्चित अखबार के पड़ताल के बाद भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल मंगलवार को खंडवा पहुंचा और मौके पर जाकर तथाकथित जल संरचनाओं का ‘रियलिटी चेक’ किया। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।

    जांच दल चर्चित अखबार के रिपोर्ट के आधार परहरसूद जनपद समेत कई गांवों में पहुंचा।

    कहीं कागजों में तालाब मिले, तो जमीन पर सिर्फ मिट्टी का ढेर। कहीं 6 फीट गहरे सोख्ता गड्ढों का दावा था, लेकिन हकीकत में 1 फीट से भी कम गहराई निकली। टीम ने किसानों और ग्रामीणों से बात की, खुद गड्ढे खुदवाकर देखे और कई जगह देखकर चौंक गई।

    डोटखेड़ा गांव में खेत के बीच कागजों में तालाब दिखाया गया था, लेकिन मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। सिर्फ मिट्टी फैलाकर तालाब का रूप देने की कोशिश की गई थी।

    पलानी माल गांव में ग्रामीणों ने खुद अधिकारियों को उन जगहों पर ले जाकर दिखाया, जहां सरकारी रिकॉर्ड और जमीन की सच्चाई बिल्कुल अलग थी। आंगनवाड़ी भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा मिला, पाइप ही गायब था। आरोग्य केंद्र में सोख्ता गड्ढा नाममात्र का निकला, जिसे बारिश में ओवरफ्लो के बाद तोड़ दिया गया था।

    सबसे चौंकाने वाला मामला शाहपुरा माल गांव में सामने आया, जहां जांच दल के आने की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने सुबह-सुबह जेसीबी से नया गड्ढा खुदवा दिया।

    जबकि रिकॉर्ड में उसका भुगतान पहले ही हो चुका था। तय साइज 10×10 फीट था, लेकिन मौके पर सिर्फ 1 फीट गहरा गड्ढा मिला, वो भी खेत के ऐसे कोने में जहां उसका कोई मतलब नहीं था।

    पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए नेशनल वाटर अवॉर्ड और 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। प्रशासन ने 1.29 लाख जल संरचनाओं के निर्माण का दावा किया था। लेकिन जांच में सामने आया कि कई तालाब, डक वैल और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में थे। कुछ तस्वीरें तो एआई द्वारा जनरेटेड पाई गईं। कहीं 150 सोख्ता गड्ढे दिखाए गए, तो जमीन पर 1–2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप नजर आए। कहीं 11 तालाबों का दावा था, लेकिन एक भी मौजूद नहीं था।

    अखबार के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन फर्जीवाड़ों की आधिकारिक तस्दीक कर रही है।

    साफ है कि खंडवा को मिला यह पुरस्कार जल संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि कागजी आंकड़ों और झूठे दावों पर खड़ा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सरकारी भ्रम साबित हो रहा है।

    खंडवा के नारायण नगर इलाके में सामने आया मामला जल संरक्षण के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े की एक और बानगी बन गया है।

    यहां रहने वाली शिक्षिका संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया था कि वह अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

    जांच में सामने आया कि संध्या राजपूत के घर पर कोई वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद नहीं था। इसके बजाय उनके घर से कुछ मकान दूर स्थित एक अन्य घर की छत से लगी पाइप को ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर पेश कर दिया गया। यह पाइप दरअसल छत का पानी सीधे नाली में पहुंचाने के लिए लगाई गई थी, जिसका जल संरक्षण या रिचार्ज से कोई लेना-देना नहीं था।

    इसके बावजूद उसी मकान की फोटो खींचकर प्रशासन को सौंप दी गई और कागजों में इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में दर्ज कर दिया गया। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे जमीनी हकीकत को दरकिनार कर सिर्फ फोटो और फाइलों के सहारे योजनाओं की सफलता दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में जल संरक्षण का कोई काम नहीं हुआ।

  • पराशरी श्मशान घाट के पास नवजात का शव मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच

    पराशरी श्मशान घाट के पास नवजात का शव मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच


    विदिशा।मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से रविवार को एक अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया, जिसने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया। पराशरी श्मशान घाट के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वहां मौजूद लोगों ने एक आवारा कुत्ते को नवजात शिशु का शव लेकर घूमते हुए देखा। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।यह घटना 28 दिसंबर की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय कुछ लोग पराशरी श्मशान घाट में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर आसपास घूम रहे एक कुत्ते पर पड़ी। पहले तो किसी को स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, लेकिन जब लोगों ने ध्यान से देखा तो उन्हें समझ आया कि कुत्ते के मुंह में नवजात शिशु का शव है। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

    पुलिस ने संभाली स्थिति

    सूचना मिलने के बाद गंज बासौदा देहात थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने सावधानीपूर्वक शव को अपने कब्जे में लिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। घटना की खबर फैलते ही इलाके में भय और चिंता का माहौल बन गया। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए।

    प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया

    गंज बासौदा देहात थाना प्रभारी मनोज दुबे ने बताया कि प्रारंभिक जांच में नवजात की उम्र करीब चार से पांच महीने के आसपास प्रतीत हो रही है। उन्होंने बताया कि कई बार सामाजिक दबाव, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से नवजात शिशुओं को श्मशान घाट या आसपास के इलाकों में अस्थायी रूप से दफना दिया जाता है। बाद में जानवरों द्वारा जमीन खोदने पर ऐसे मामले सामने आ जाते हैं।हालांकि पुलिस इस घटना को केवल लापरवाही मानकर नहीं चल रही है। थाना प्रभारी के अनुसार यह भी जांच की जा रही है कि शव वहां किस परिस्थिति में पहुंचा और क्या इसके पीछे कोई आपराधिक कृत्य जुड़ा हुआ है।

    जांच के दायरे में कई पहलू

    पुलिस आसपास के इलाकों में पूछताछ कर रही है और हाल के दिनों में हुए किसी संदिग्ध प्रसव या नवजात से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह मामला अवैध दफन या किसी सामाजिक अपराध से जुड़ा हो सकता है।पुलिस ने नवजात के शव का विधि-विधान और कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार कराया। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह घटना किन परिस्थितियों में हुई।

    समाज और प्रशासन के लिए चेतावनी

    इस घटना ने समाज में संवेदनशील मुद्दों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान घाट और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई कर रही है।