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  • भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद

    भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद


    भोपाल । भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सोमवार से तीन दिवसीय सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्युदय 2026 का आगाज होने जा रहा है। इस बार आयोजन को मैं और मेरा विश्वविद्यालय थीम के साथ खास रूप दिया गया है। कार्यक्रम के पहले दिन 18 अगस्त को बॉलीवुड और रंगमंच के चर्चित अभिनेता लेखक गीतकार और गायक पीयूष मिश्रा विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। वह सुबह 10:30 बजे विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।

    अभ्युदय 2026 को इस बार केवल नए सत्र के स्वागत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के बीच संवाद का बड़ा मंच बनाया गया है। विश्वविद्यालय के मीडिया हेड डॉ. पवित्र श्रीवास्तव के अनुसार आयोजन की सबसे खास बात यह रहेगी कि एमसीयू के करीब 35 वर्षों के इतिहास में पढ़कर निकले लगभग 50 पूर्व विद्यार्थी पहली बार एक साथ सत्रारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके ये पूर्व छात्र नए विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के साथ करियर की दिशा समझने में मदद करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान पूर्व विद्यार्थियों के लिए दस अलग अलग संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में पूर्व छात्र अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करेंगे। साथ ही मीडिया और संचार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच रोजगार और करियर की नई संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे नए विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलेगा कि विश्वविद्यालय में हासिल की गई शिक्षा को व्यावहारिक दुनिया में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अभ्युदय 2026 की एक और खासियत इसका अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव है। इस बार एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी अमेरिका ब्रिटेन कनाडा ऑस्ट्रेलिया दुबई सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित सात देशों से कार्यक्रम से जुड़ेंगे। विदेशों में अपनी पेशेवर पहचान बनाने वाले ये पूर्व छात्र भी नए विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें प्रिंट मीडिया टेलीविजन डिजिटल मीडिया मीडिया मैनेजमेंट विज्ञापन जनसंपर्क प्रशासन और राजनीति जैसे अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रहे पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    पहले दिन पीयूष मिश्रा की मौजूदगी भी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। अभिनेता के साथ साथ लेखक गीतकार और गायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पीयूष मिश्रा युवाओं के बीच अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका रचनात्मक सफर और रंगमंच से लेकर सिनेमा तक का अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है। उनके संवाद के जरिए विद्यार्थियों को रचनात्मक क्षेत्रों में करियर की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    तीन दिनों तक चलने वाले अभ्युदय 2026 का समापन 20 अगस्त को होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद रजनीश होंगे। खास बात यह है कि वह भी एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। ऐसे में आयोजन का समापन भी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच जुड़ाव की भावना को मजबूत करने वाला होगा।

    कुल मिलाकर अभ्युदय 2026 नए विद्यार्थियों के लिए केवल सत्रारंभ कार्यक्रम नहीं बल्कि अनुभवों से सीखने और करियर की नई दिशाओं को समझने का अवसर बनने जा रहा है। वरिष्ठ कलाकारों से संवाद और देश विदेश में सक्रिय पूर्व छात्रों की मौजूदगी के जरिए विश्वविद्यालय इस आयोजन को अपने 35 वर्षों के सफर और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके

    एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाए जाने वाले UDID यानी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान कार्ड की प्रक्रिया की धीमी रफ्तार चिंता का कारण बन गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में दिव्यांग व्यक्ति को UDID कार्ड या दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए औसतन 253 दिन यानी करीब साढ़े आठ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति उन लोगों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रही है जिन्हें पेंशन शिक्षा रोजगार या दूसरी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत होती है। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े भी बताते हैं कि UDID कार्ड के प्रसंस्करण का समय राज्यों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध मानव संसाधन और दिव्यांग आबादी के आधार पर अलग-अलग रहता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 12 हजार 213 आवेदन ऐसे हैं जो छह महीने से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं तीन महीने से अधिक समय से लंबित आवेदनों की संख्या 14 हजार 288 बताई गई है। कुल मिलाकर पोर्टल पर 18 हजार 510 आवेदन अलग-अलग चरणों में लंबित बताए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दिव्यांग हितों से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण पहचान व्यवस्था में आवेदन निपटाने की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।

    वर्ष 2021 से 5 अगस्त 2026 तक मध्य प्रदेश से कुल 4 लाख 58 हजार 156 UDID कार्ड के आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 4 लाख 2 हजार 819 कार्ड बनाए जा चुके हैं जबकि 16 हजार 396 आवेदनों को खारिज किया गया। इसके बावजूद हजारों आवेदन लंबे समय से प्रक्रिया में अटके हुए हैं। UDID कार्ड का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को एक ऐसी डिजिटल पहचान उपलब्ध कराना है जिसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किया जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया में जिला मेडिकल बोर्ड की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। दिव्यांगता का आकलन और प्रमाणन मेडिकल जांच के बाद किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की उपलब्धता और मेडिकल बोर्ड की बैठकें सीधे तौर पर आवेदन के निपटारे की गति को प्रभावित कर सकती हैं। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि जिला चिकित्सा बोर्ड की बैठकों का समय और उनकी आवृत्ति राज्यों तथा संबंधित अस्पतालों की स्थानीय जरूरतों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। पूरे देश के लिए बोर्ड बैठकों की कोई एक समान अनिवार्य आवृत्ति तय नहीं की गई है।

    मध्य प्रदेश में यह समस्या इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार के अपने रिकॉर्ड में भी UDID व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन और मैपिंग से जुड़ा काम सामने आया है। अगस्त 2025 के राज्य स्तरीय रिकॉर्ड में 9 लाख 56 हजार से अधिक दिव्यांगों की पहचान और 9 लाख 61 हजार से ज्यादा UDID जनरेशन दर्ज था जबकि UDID मैपिंग का आंकड़ा करीब 5 लाख 71 हजार था। इससे पता चलता है कि कार्ड बनने के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट और मैप करने की चुनौती बनी हुई है।

    केंद्र सरकार की ओर से UDID पोर्टल को अपग्रेड करने डेटाबेस को आधार से जोड़ने और मेडिकल बोर्ड में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देने जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी लंबित आवेदनों की संख्या बड़ी है। आधिकारिक दस्तावेज में मार्च 2026 तक देश का औसत UDID प्रसंस्करण समय 214 दिन बताया गया था।

    दिव्यांगों के लिए UDID कार्ड सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं बल्कि कई सरकारी सुविधाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में मध्य प्रदेश में आवेदन निपटाने की गति बढ़ाना जरूरी है ताकि पात्र लोगों को महीनों तक अपनी पहचान और अधिकारों से जुड़े दस्तावेज के लिए इंतजार न करना पड़े। अब जरूरत इस बात की है कि लंबित आवेदनों की जिला स्तर पर समीक्षा हो और मेडिकल बोर्ड तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।

  • विभाजन विभीषिका दिवस पर CM का बड़ा संदेश, बोले- बंटवारे का दर्द आज भी व्यथित करता है मन

    विभाजन विभीषिका दिवस पर CM का बड़ा संदेश, बोले- बंटवारे का दर्द आज भी व्यथित करता है मन


    भोपाल। विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल के शौर्य स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने तथा विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद किया। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक परिसर में नवनिर्मित डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारंभ भी किया। इस डिजिटल लाइब्रेरी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और देश के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने लाइब्रेरी की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और वहां मौजूद डिजिटल सामग्री के बारे में जानकारी ली।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की तिरंगा यात्रा को शौर्य स्मारक तिराहे से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा भारत माता चौराहा यानी डिपो चौराहा तक पहुंची। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहा हर घर तिरंगा अभियान देशभर में राष्ट्रभक्ति और जनभागीदारी का उत्सव बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश के अलग अलग हिस्सों में तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ लहरा रहा है।

    विभाजन विभीषिका दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने 1947 के उस दौर को याद किया जब भारत के विभाजन के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर और संपत्ति छोड़कर पलायन करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया और इस त्रासदी की पीड़ा को याद कर आज भी मन व्यथित हो उठता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय से सीख लेते हुए देशवासियों को एकता भाईचारे और अखंड राष्ट्रीय भावना को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन केवल सीमाओं के बदलने की घटना नहीं थी बल्कि इससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए। लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा और अनेक परिवारों ने अपनों को खोया। ऐसे में विभाजन विभीषिका दिवस का उद्देश्य इतिहास की उस त्रासदी को याद करना और आने वाली पीढ़ियों को उसके बारे में जानकारी देना भी है। शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम के जरिए इसी इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम और देश के इतिहास से जुड़ी सामग्री को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। इससे युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पहलुओं और देश के लिए बलिदान देने वाली विभूतियों के योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कांग्रेस पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सत्य को नहीं जानती तो सत्याग्रह की बात कैसे करेगी। उन्होंने पार्टी को आत्ममंथन और आत्ममूल्यांकन करने की सलाह देते हुए अपने राजनीतिक विचार रखे। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य केंद्र विभाजन की त्रासदी को याद करना और राष्ट्रभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता का संदेश देना रहा।

    डॉ. मोहन यादव ने भारत के भविष्य को लेकर भी अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और युवा देश है तथा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ राष्ट्रीय विकास में भागीदारी की बात कही।

    शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम ने स्वतंत्रता दिवस से पहले भोपाल में राष्ट्रभक्ति का माहौल और मजबूत किया। एक तरफ विभाजन की पीड़ा को याद कर इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया गया तो दूसरी ओर तिरंगा यात्रा के जरिए देश के प्रति सम्मान और एकता की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से राष्ट्रीय एकता भाईचारे और देश की अखंडता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।

  • लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?

    लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?


    इंदौर। इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2021 से अब तक लापता हुई महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों का विस्तृत रिकॉर्ड राज्य सरकार से मांगा है। डबल बेंच ने सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए यह बताने को कहा है कि इस अवधि में कितने लोग लापता हुए हैं। इनमें से कितनों को पुलिस बरामद कर चुकी है और कितने मामले अभी भी लंबित हैं। अदालत ने उन मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मांगी है जिनमें अब तक लापता महिलाओं और बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लगातार लापता होने तथा उनकी तलाश में देरी का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ लापता होने के मामलों की संख्या सामने रखना पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन ने उनकी तलाश के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है। खासतौर पर लंबे समय से लंबित मामलों में जांच किस स्तर पर पहुंची है और संबंधित अधिकारियों ने उन्हें सुलझाने के लिए क्या प्रयास किए हैं इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार को इन सभी पहलुओं पर जवाब देना होगा।

    याचिकाकर्ता की ओर से लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसे मामलों की नियमित और स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ रही है और किन मामलों में अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर इन प्रकरणों की समय समय पर समीक्षा करने की मांग भी रखी गई है। साथ ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को अधिक प्रभावी बनाने और पुलिस प्रशासन तथा दूसरे संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।

    मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश केवल एक सामान्य पुलिस प्रक्रिया नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा संवेदनशील विषय है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी महिला या बच्चे के लापता होने के बाद शुरुआती समय में तेजी से कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक मामला लंबित रहने पर परिवार की चिंता बढ़ने के साथ तलाश की प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    इस मामले में विशेषज्ञ समिति बनाने के साथ केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों के प्रभावी पालन की मांग भी की गई है। अदालत से यह आग्रह किया गया है कि लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए और जिलेवार आंकड़ों को नियमित रूप से सामने लाया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार याचिका में सरकारी आंकड़ों की उपलब्धता और उन्हें सार्वजनिक किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों को वर्ष 2021 से अब तक के मामलों का विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने रखना होगा। इसमें लापता महिलाओं और बच्चों की संख्या बरामदगी की स्थिति लंबित मामलों की संख्या और उनकी तलाश के लिए की गई कार्रवाई शामिल हो सकती है। आगामी सुनवाई में इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई किस स्थिति में है और लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

  • MP में एनालॉग पनीर पर सरकार की सख्ती, CM मोहन यादव बोले- अब चलेगा सिर्फ प्राकृतिक दूध का पनीर

    MP में एनालॉग पनीर पर सरकार की सख्ती, CM मोहन यादव बोले- अब चलेगा सिर्फ प्राकृतिक दूध का पनीर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि मध्य प्रदेश में प्राकृतिक दूध से तैयार होने वाले पनीर और दूसरे दुग्ध उत्पादों को ही प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का जोर दूध उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों के जरिए प्रदेश की अलग पहचान बनाने पर है। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री से जुड़े कारोबार पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। सरकार इस तरह के उत्पादों को हतोत्साहित करेगी और प्राकृतिक दूध से बने पनीर को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करेगी। उनका कहना है कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। प्राकृतिक दूध से तैयार उत्पादों को बढ़ावा देकर राज्य की अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

    एनालॉग पनीर को लेकर देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है। सामान्य पनीर दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में दूध के साथ या उसकी जगह वनस्पति वसा, प्रोटीन और दूसरे खाद्य घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों की संरचना और इस्तेमाल किए गए घटक सामान्य दूध से बने पनीर से अलग हो सकते हैं। इसी वजह से खाद्य गुणवत्ता और लेबलिंग को लेकर भी इस तरह के उत्पादों पर लगातार चर्चा होती रही है।

    मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले को प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों की मजबूत संभावनाएं हैं और सरकार इन्हीं उत्पादों के आधार पर राज्य की पहचान को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों और दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा सकता है।

    एनालॉग पनीर को लेकर हाल में मध्य प्रदेश से जुड़ा एक मामला भी सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश की एक कंपनी के उत्पाद को रायपुर में जब्त किया गया था और उस पर एनालॉग पनीर होने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में जांच रिपोर्ट में कंपनी को क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई। इसके बावजूद एनालॉग पनीर को लेकर देशभर में बहस तेज हुई और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का मुद्दा सामने आया।

    सरकार के फैसले के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध को किस तरह लागू किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजारों में बिकने वाले पनीर की जांच और उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। कारोबारियों के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे उत्पाद की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल सामग्री से जुड़े नियमों का पालन करें।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार प्राकृतिक दूध के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे किसानों और पशुपालकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। अगर दूध उत्पादन बढ़ता है और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों की मांग को मजबूत बाजार मिलता है तो इसका फायदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। फिलहाल एनालॉग पनीर पर सरकार के फैसले ने खाद्य बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके क्रियान्वयन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • दूषित पानी और संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला गरमाया, दिग्विजय बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई

    दूषित पानी और संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला गरमाया, दिग्विजय बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। बालाघाट जिले के आदिवासी विकासखंड बिरसा में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने का मामला गंभीर होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने कथित दूषित पानी और संक्रमण से पैदा हुई बीमारियों की राज्य स्तर पर जांच कराने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कराने की भी मांग रखी है।

    दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में दावा किया है कि बिरसा क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह के दौरान 11 आदिवासी बच्चों की बीमारी से मौत हुई है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक सात बच्चों की मौत की पुष्टि किए जाने की बात पत्र में कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार अन्य बच्चों की मौत की जानकारी सामने नहीं लाई जा रही है। उनके मुताबिक बालाघाट जिला चिकित्सालय में 100 से अधिक बच्चों को भर्ती कराया गया है और इनमें कई बच्चों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।

    बिरसा क्षेत्र के कई गांवों में बुखार और संक्रमण से लोग परेशान बताए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने पत्र में कहा है कि मलेरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी और चर्म रोग जैसी बीमारियों का असर कई गांवों में देखने को मिल रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका से जुड़े टोले-मजरों में बीमारी को लेकर डर का माहौल बताया गया है। पत्र के मुताबिक कई परिवारों में बच्चे तेज बुखार से जूझ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उईके के हवाले से जिला अस्पताल की स्थिति का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार अस्पताल का बच्चा वार्ड बीमार बच्चों से भर गया है। उन्होंने बोंदारी गांव के समारू धुर्वे के बच्चों साहिल और नामिन की निमोनिया से मौत का जिक्र करते हुए कहा कि बीमारी ने कई गरीब परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। वहीं अन्य प्रभावित परिवारों के बच्चों की मौत का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।

    इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रभावित परिवारों से मिलने और उपचार की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात भी सामने आई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल बैगा आदिवासी परिवारों के सामने बीमारी ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने इसे केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और साफ पानी की उपलब्धता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम प्रभावित गांवों का दौरा करे। उन्होंने संक्रमित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी है।

    दिग्विजय सिंह ने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के बेहतर चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराने और उनका पूरा इलाज राज्य सरकार की ओर से कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और राज्य स्तरीय जांच के बाद यदि किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

  • भोपाल में पुलिस आरक्षक को बनाया बंधक! रातभर कार में घुमाया और जंगल में फेंकने की दी धमकी

    भोपाल में पुलिस आरक्षक को बनाया बंधक! रातभर कार में घुमाया और जंगल में फेंकने की दी धमकी


    भोपाल । भोपाल में नाइट गश्त के दौरान खुले में शराब पी रहे दो युवकों को रोकना एक पुलिस आरक्षक के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ। शाहपुरा थाना क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों ने जब कार में शराब पी रहे युवकों को थाने चलने के लिए कहा तो आरोपियों ने आरक्षक को ही अपनी कार में बैठा लिया और थाने ले जाने के बजाय उसे रातभर शहर में घुमाते रहे। इस दौरान आरक्षक के साथ मारपीट की गई और उसे जंगल में ले जाकर फेंकने की धमकी भी दी गई। हालांकि आरक्षक ने हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए अपने साथी को मोबाइल से लाइव लोकेशन भेज दी जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

    घटना 8 और 9 अगस्त की दरमियानी रात की बताई जा रही है। शाहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक सुंदर पटेल और आरक्षक मयंक ठाकुर नाइट रूटीन ड्यूटी पर थे। गश्त के दौरान दोनों पुलिसकर्मी दाना पानी रेस्टोरेंट के सामने पहुंचे। यहां उन्हें एक कार में दो युवक शराब पीते हुए दिखाई दिए। पुलिसकर्मियों ने दोनों युवकों से पूछताछ की और उन्हें थाने चलने के लिए कहा।

    इसके बाद आरक्षक मयंक ठाकुर बाइक से थाने की ओर निकल गए जबकि आरक्षक सुंदर पटेल दोनों युवकों की कार में बैठ गए। पुलिस के मुताबिक कार में सवार भूपेंद्र शर्मा और ऋषि नामदेव ने आरक्षक को शाहपुरा थाने ले जाने के बजाय कार को दूसरी दिशा में दौड़ा दिया। आरक्षक को कुछ समझ आता उससे पहले ही दोनों आरोपी उसे लेकर एमपी नगर की तरफ निकल गए।

    कार के भीतर आरक्षक के साथ मारपीट की गई। आरोपियों ने उसे जंगल में ले जाकर फेंकने की धमकी भी दी। खतरे को भांपते हुए सुंदर पटेल ने किसी तरह अपने साथी आरक्षक को मोबाइल से अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर दी। जब आरोपियों को इसका पता चला तो उन्होंने आरक्षक के साथ दोबारा मारपीट शुरू कर दी। इसके बावजूद आरक्षक ने हिम्मत नहीं छोड़ी।

    आरक्षक मयंक ठाकुर को मिली लोकेशन के आधार पर उन्होंने बाइक से कार का पीछा शुरू कर दिया। आरोपी गणेश मंदिर होते हुए डीबी मॉल की तरफ पहुंचे। जीजी फ्लाईओवर के पास ट्रैफिक और पुलिस की घेराबंदी के कारण कार की रफ्तार धीमी हुई। इसी मौके का फायदा उठाकर सुंदर पटेल ने कार का दरवाजा खोला और बाहर कूद गए। आरोपियों ने कार रोकी और उन्हें फ्लाईओवर के पास उतारकर वहां से फरार हो गए।

    घटना के बाद पुलिस ने कार के नंबर और आसपास लगे CCTV कैमरों की मदद से दोनों आरोपियों की पहचान की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भूपेंद्र शर्मा और ऋषि नामदेव को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ अपहरण शासकीय कार्य में बाधा डालने मारपीट और धमकी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार भूपेंद्र शर्मा मूल रूप से गंजबासौदा का रहने वाला है और उसके खिलाफ विदिशा में हत्या के प्रयास का मामला पहले से दर्ज है। वह हाल ही में कोलार इलाके में रहने आया था। दूसरा आरोपी ऋषि नामदेव बावड़िया कला क्षेत्र का निवासी बताया गया है। दोनों आरोपी ड्राइवरी का काम करते हैं। पुलिस के मुताबिक घटना में इस्तेमाल कार एक ट्रैवल्स कंपनी से अटैच है।

    शाहपुरा पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में अपहरण शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब घटना के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। आरोप सिद्ध होने पर संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों को कई वर्षों तक की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

  • जेल पहुंचने के 48 घंटे बाद बंदी ने तोड़ा दम, शरीर पर मिले चोट के निशान; पुलिस पर गंभीर आरोप

    जेल पहुंचने के 48 घंटे बाद बंदी ने तोड़ा दम, शरीर पर मिले चोट के निशान; पुलिस पर गंभीर आरोप


    भोपाल भोपाल सेंट्रल जेल में बंद 35 वर्षीय बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान नीरज धाकड़ पुत्र केसर सिंह धाकड़ निवासी देवरी गांव तहसील गौहरगंज जिला रायसेन के रूप में हुई है। नीरज को सूखी सेवनिया पुलिस ने 7 अगस्त को सीमेंट चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे मेडिकल परीक्षण कराया गया और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया। जेल पहुंचने के महज दो दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान रविवार सुबह हमीदिया अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजन का दावा है कि गिरफ्तारी के दौरान नीरज के साथ मारपीट की गई थी और उसके शरीर पर चोटों के निशान थे। उनका आरोप है कि पुलिस की कथित मारपीट के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई। हालांकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों से अलग जानकारी दी है।

    सूखी सेवनिया थाने के प्रभारी अरुण शर्मा के अनुसार नीरज को सीमेंट चोरी के मामले में 7 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी का नियमानुसार मेडिकल परीक्षण कराया गया था और इसके बाद उसे भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया। दूसरी ओर नीरज की पत्नी पूजा ने आरोप लगाया है कि पति के शरीर पर चोट के निशान थे। उनका कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से ही नीरज की तबीयत खराब थी और जेल पहुंचने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। परिजन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    वहीं भोपाल सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट मानवेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि नीरज को सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी। उसकी स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे तत्काल उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा था। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था लेकिन रविवार सुबह उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी को उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।

    बंदी की मौत के बाद मामले में न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान नीरज की गिरफ्तारी से लेकर थाने में रखे जाने की अवधि मेडिकल परीक्षण जेल में दाखिले और अस्पताल में उपचार तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही परिजन की ओर से पुलिस पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की भी जांच होगी। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम किया है। नीरज की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम साबित होगी और यह साफ हो सकेगा कि बंदी की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

  • टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

    टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा


    भोपाल । भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था से नाराज टैक्सी चालकों ने शनिवार को दोपहर 12 बजे लिंक रोड नंबर-1 स्थित चेनार पार्क में महाबैठक बुलाई है। भोपाल टैक्सी चालक संघ भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में शहरभर के ड्राइवर शामिल होंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने किराया व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाया जा सकता है और अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला भी लिया जा सकता है।

    टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।

    ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।

    संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।

    टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।