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  • देवास नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हंगामा, पार्षद ने दिया धरना; जनता के लिए काम कराने पर अड़े

    देवास नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हंगामा, पार्षद ने दिया धरना; जनता के लिए काम कराने पर अड़े


    देवास । देवास में वार्ड क्रमांक 9 के विकास कार्यों को लेकर नगर निगम और पार्षद के बीच विवाद सामने आया है। बुधवार को वार्ड पार्षद दीपेश कानूनगो ने बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और महिलाओं के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। पार्षद और उनके साथ पहुंचे लोगों ने निगम परिसर की सीढ़ियों पर बैठकर नारेबाजी की। इस दौरान नगर निगम प्रशासन के साथ महापौर और महापौर प्रतिनिधि के खिलाफ भी नारे लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने वार्ड में विकास कार्यों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    पार्षद दीपेश कानूनगो का कहना है कि वार्ड क्रमांक 9 के लोगों को पिछले करीब एक साल से विकास कार्यों का इंतजार है। उनके मुताबिक इस अवधि में वार्ड के लिए कोई नया विकास कार्य मंजूर नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में करीब 450 विकास कार्यों के टेंडर किए गए हैं लेकिन इनमें वार्ड क्रमांक 9 का एक भी काम शामिल नहीं है। पार्षद का आरोप है कि इस स्थिति के कारण वार्ड के लोगों को मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने कहा कि वार्ड की समस्याओं को लेकर वे लगातार नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करते रहे हैं। कई बार समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त को पूरे मामले की जानकारी दी है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    पार्षद के अनुसार महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल से भी उन्होंने वार्ड के विकास को लेकर बातचीत करने की कोशिश की है। उनका आरोप है कि अब महापौर प्रतिनिधि उनका फोन तक नहीं उठा रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ निगम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने भी वार्ड की समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि लंबे समय से विकास कार्यों की जरूरत महसूस की जा रही है लेकिन लोगों को केवल आश्वासन मिल रहे हैं। महिलाओं ने कहा कि जनता को सिर्फ भरोसा दिलाने के बजाय धरातल पर काम शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने निगम प्रशासन से वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द निराकरण करने की मांग की।

    वहीं नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार ने पार्षद की ओर से रखी गई मांगों को लेकर कहा कि पार्षद ने कुछ मुद्दे सामने रखे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड में पहले भी विकास कार्य कराए गए हैं। निगम आयुक्त के इस बयान के बाद अब वार्ड में विकास कार्यों को लेकर पार्षद और निगम प्रशासन के दावों में अंतर सामने आया है। प्रदर्शन के जरिए पार्षद ने वार्ड की समस्याओं को लेकर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ाया है। अब देखना होगा कि निगम की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और वार्ड क्रमांक 9 में नए विकास कार्यों को लेकर कब तक स्थिति स्पष्ट होती है।

  • दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध

    दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध


    रीवा । रीवा सीधी मार्ग पर गुढ़ थाना क्षेत्र के गुढ़वा पेट्रोल पंप के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे करीब 6 से 7 गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि पांच गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य गोवंश घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों और गौ सेवा से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। हादसे को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    घटना से नाराज लोग सड़क पर बैठकर कीर्तन करने लगे। प्रदर्शन के कारण रीवा सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सड़क पर घायल अवस्था में पड़े गोवंश के उपचार की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की। साथ ही हादसे में मारे गए गोवंश को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क पर खुले में घूमने वाले गोवंश की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों और गौ सेवकों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से घायल गोवंश को उपचार उपलब्ध कराने और मृत गोवंश को सम्मानजनक तरीके से हटाने की मांग की। इसके साथ ही हादसे को अंजाम देने वाले अज्ञात वाहन की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।

    गोसेवकों के मुताबिक यह इस मार्ग पर लगातार दूसरा बड़ा हादसा है। इससे एक दिन पहले भी रीवा सीधी मार्ग पर कसई स्टैंड के पास करीब 12 गोवंश अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए थे। लगातार दो दिनों में बड़ी संख्या में गोवंश के सड़क हादसों का शिकार होने से गौ सेवा से जुड़े लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

    गोसेवक राधा मोहन ने भी लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क पर खुले में घूम रहे गोवंश के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन को अभियान चलाकर ऐसे गोवंश को सुरक्षित तरीके से गौशालाओं तक पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समस्या के स्थायी समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।

    प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें घायल गोवंश का तत्काल इलाज कराने के साथ सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और हादसे के जिम्मेदार वाहन की पहचान कर कार्रवाई करना शामिल है। मांगों को लेकर लोगों ने कुछ समय तक चक्काजाम किया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने लोगों को समझाइश दी जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

    लगातार दो दिनों में हुए हादसों ने सड़क सुरक्षा के साथ आवारा गोवंश की समस्या को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या स्थायी कदम उठाता है और अज्ञात वाहन की पहचान कर उसके चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन

    कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन


    रीवा । रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर उनके पिता की भूख हड़ताल लगातार जारी है। गुरुवार को अनशन के नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्वास्थ्य में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे हैं। कमजोरी बढ़ने के कारण उन्हें लेटकर ही अनशन करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने से उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    कल्पना मिश्रा के पिता रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पहले वे बैठकर भूख हड़ताल कर रहे थे लेकिन अब कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि उनके लिए बैठना भी मुश्किल हो गया है। परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी बातचीत करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि जब तक कल्पना को न्याय नहीं मिलता और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    कल्पना मिश्रा की मौत के बाद से ही परिवार की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। इसी को लेकर कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। परिवार की ओर से अलग अलग स्तर पर विरोध और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अब पिता की लगातार बिगड़ती सेहत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

    इधर कल्पना मिश्रा मामले को लेकर कांग्रेस का आंदोलन भी जारी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार को रीवा पहुंचे और अग्रसेन चौराहे पर पार्टी की ओर से चलाए जा रहे धरने में शामिल हुए। उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि पहले भी इस धरने में पहुंच चुके हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवालों और कल्पना मिश्रा मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।

    कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम लोगों को बेहतर इलाज और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था मिलनी चाहिए। वहीं कल्पना मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    सिरमौर चौराहे पर पिता की बिगड़ती हालत के बीच परिवार और समर्थकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। नौ दिन से चल रही भूख हड़ताल का उनके स्वास्थ्य पर साफ असर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक अनशन समाप्त नहीं करेंगे। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और परिवार की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई

    भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत के इस आदेश के बाद ऐसे लोगों और प्रतिष्ठानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो आवासीय जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया है कि यदि उनके पास आवासीय भूखंड पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैध अनुमति है तो उसके दस्तावेज सात दिन के भीतर भोपाल नगर निगम के सामने पेश करने होंगे। इसके बाद नगर निगम दस्तावेजों की जांच करेगा और यदि अनुमति वैध नहीं पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।

    हाईकोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब रिहायशी इलाकों में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर होटल मॉल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय रहवासियों की ओर से लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं कि इस तरह की गतिविधियों से उनके इलाकों की व्यवस्था प्रभावित होती है। खासकर ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या के साथ शोर और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की बात कही जाती रही है।

    अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में वैध अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या मामले में वर्ष 2024 में दिए गए फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। इससे अब नगर निगम के लिए भी आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है।

    इस मामले में याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों को व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार से बचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार अब नगर निगम के सामने न्यायिक निर्देश मौजूद हैं जिसके आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जा सकती है।

    रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इस आदेश से उम्मीद जगी है। रहवासी लवनीश भाटी का कहना है कि कई इलाकों में लंबे समय से ट्रैफिक पार्किंग और दूसरी समस्याएं बनी हुई हैं। शिकायतों के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि नगर निगम जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करेगा।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी अदालत के आदेश का स्वागत किया है। समिति ने नगर निगम से मांग की है कि रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जाए। जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध अनुमति नहीं है उनके खिलाफ नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल आने वाले सात दिनों में संबंधित पक्षों को अपने दस्तावेज नगर निगम के सामने प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच और उनकी वैधता के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • गणेश चतुर्थी से पहले शिवपुरी में उठी बड़ी मांग 12 दिनों तक मांस-मटन की दुकानें बंद कराने की अपील कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    गणेश चतुर्थी से पहले शिवपुरी में उठी बड़ी मांग 12 दिनों तक मांस-मटन की दुकानें बंद कराने की अपील कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    शिवपुरी । शिवपुरी में गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर राष्ट्रीय सनातन सेना भारत ने प्रशासन के सामने एक अहम मांग रखी है। संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गणेश चतुर्थी उत्सव की 12 दिनों की अवधि में शहर की मांस और मटन की दुकानों को बंद रखने की मांग की है। संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं और शहर में धार्मिक वातावरण बना रहता है। ऐसे में प्रशासन को भी इस अवधि में विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।

    राष्ट्रीय सनातन सेना भारत के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र शर्मा के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें गणेश चतुर्थी के दौरान मांस और मटन की दुकानों को बंद रखने के लिए प्रशासनिक आदेश जारी करने की अपील की गई है। संगठन ने अपनी मांग को धार्मिक आस्था के साथ शहर की स्वच्छता और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ते हुए प्रशासन से सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

    संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान शहर में जगह जगह भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही भी रहती है। ऐसे में संगठन चाहता है कि उत्सव के दौरान शहर का वातावरण धार्मिक आयोजनों के अनुरूप बना रहे।

    ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि मांस और मटन की दुकानें बंद रखने की मांग किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं की गई है। संगठन ने इसे धार्मिक आस्था और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान से जुड़ा विषय बताया है। साथ ही स्वच्छता को भी अपनी मांग का एक आधार बताया गया है।

    राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रशासन से अपील की है कि गणेश चतुर्थी की 12 दिनों की अवधि के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। संगठन ने संबंधित क्षेत्रों में आदेश के पालन की निगरानी के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग भी की है ताकि पर्व के दौरान प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

    गणेश उत्सव के दौरान शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर भी संगठन ने प्रशासन और नगर पालिका से विशेष इंतजाम करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि धार्मिक स्थलों और गणेश पंडालों के आसपास नियमित सफाई होनी चाहिए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

    पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। इसलिए प्रशासन को श्रद्धालुओं की भावनाओं और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए जरूरी कदम उठाने चाहिए। अब संगठन की इस मांग पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त

    भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त


    भोपाल। भोपाल में अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ लिया है। कजलीखेड़ा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्कॉर्पियो के जरिए बड़ी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन पर नजर रखना शुरू किया और उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखकर चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसे तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो का पीछा शुरू कर दिया।

    पुलिस के पीछा करने के दौरान चालक ने वाहन को बचाकर निकालने का प्रयास किया लेकिन कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में चालक को मामूली चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। जब पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसके अंदर बड़ी मात्रा में शराब रखी मिली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन से करीब 40 पेटी शराब बरामद की गई है।

    पुलिस ने शराब के साथ स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है। कार्रवाई के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब किस जगह से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। इसके साथ ही शराब के अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वाहन चालक से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के जरिए यह जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है कि स्कॉर्पियो में शराब किसके कहने पर भरी गई थी और इसके पीछे किसी बड़े शराब तस्करी नेटवर्क का हाथ तो नहीं है। पुलिस शराब की कुल मात्रा और उसकी अनुमानित कीमत का भी पता लगा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब वाहन से जुड़े दस्तावेजों और शराब के संबंध में उपलब्ध जानकारी की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि बरामद शराब वैध तरीके से खरीदी गई थी या इसे अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल कजलीखेड़ा पुलिस ने स्कॉर्पियो और उसमें मिली शराब को जब्त कर लिया है। चालक से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं। अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बड़ी मात्रा में शराब एक वाहन के जरिए ले जाई जा रही थी। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

  • मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई

    मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी दौरान करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन सड़क की जद में आया जिसके बाद मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के कुछ हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। दावा किया गया कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे हनुमान जी का दैवीय चमत्कार बताया जाने लगा।

    मामला तेजी से बढ़ा तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संत समाज भी इस मुद्दे पर सामने आया और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई। संतों का कहना था कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बाद भी वह अपनी जगह पर बनी हुई है तो इसे आस्था से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई और दर्शन करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

    इस बीच कांग्रेस भी इस मामले को लेकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना का विरोध किया। वहां रामधुन गाई गई और हनुमान चालीसा का पाठ कर पूजा अर्चना की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।

    अब इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आया बयान चर्चा का नया विषय बन गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। यानी जिस प्रतिमा को हटाने की कोशिश और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने की चर्चा पिछले दिनों से चल रही थी उस पर प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। इस बयान के बाद पूरे मामले में प्रशासन के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    मंदिर की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी काफी गहरा है। चाहरदीवारी का हिस्सा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।

    मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा की प्राचीनता से जुड़ा है। बताया गया है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराने होने की संभावना जताई गई है हालांकि इसकी वास्तविक उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की चुनौती भी है। फिलहाल संत समाज संवाद से समाधान चाहता है जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।

  • दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण

    दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण


    भोपाल । दुबई में मध्यप्रदेश ने निवेश की संभावनाओं को लेकर बड़ा असर छोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के तीसरे दिन प्रदेश को 53 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई है। ग्रीन एनर्जी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शिक्षा मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों और कारोबारी समूहों ने मध्यप्रदेश में रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से वन टू वन मुलाकात कर प्रदेश की खूबियां गिनाईं और साफ संदेश दिया कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने निवेशकों को अगले साल जनवरी में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि वेलकम टू मध्यप्रदेश।

    दुबई दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की मुलाकात कई बड़े कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों से हुई। इनमें राणा होल्डिंग्स जेम्स एजुकेशन क्रेसेंट ग्रुप प्योर हेल्थ शराफ ग्रुप चोइथराम्स डीपी वर्ल्ड ब्यूमर्क कॉरपोरेशन वेस्ट जोन केजीके ग्रुप विस्टास मीडिया कैपिटल वीएफएस ग्लोबल और एनआईडीआई सर्विसेज से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठकों का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को अलग अलग सेक्टर में सामने रखना और संभावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाना रहा।

    इनमें राणा होल्डिंग्स की ओर से सबसे बड़े प्रस्तावों में रुचि दिखाई गई। कंपनी ने मध्यप्रदेश में 2000 मेगावॉट के सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावॉट के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट 50 मेगावॉट क्षमता के एआई और कंप्यूट डेटा सेंटर क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी एवं रीसाइक्लिंग कॉम्प्लेक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब जैसी परियोजनाओं में रुचि दिखाई। इन प्रस्तावित परियोजनाओं से करीब 35 हजार 200 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना बताई गई है।

    इसके अलावा औद्योगिक स्तर के एआई कंप्यूट कैंपस और सॉवरेन एआई फैक्ट्री को लेकर भी चर्चा हुई। 50 मेगावॉट क्षमता वाले एआई फैक्ट्री प्रोजेक्ट के लिए करीब 1.5 से 2 अरब डॉलर यानी लगभग 18 हजार करोड़ रुपए के निवेश का कॉन्सेप्ट सामने रखा गया। भविष्य में इसकी क्षमता को 100 मेगावॉट से अधिक तक बढ़ाने की संभावना भी बताई गई है। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों के साथ साथ एआई डेटा सेंटर और हाई टेक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए क्षेत्रों पर भी अपना फोकस बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री की बातचीत केवल ऊर्जा और तकनीक तक सीमित नहीं रही। हेल्थ सेक्टर में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल डिजिटल हेल्थ टेलीमेडिसिन मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा हुई। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क वेयरहाउसिंग कोल्ड चेन और ग्लोबल सप्लाई चेन से मध्यप्रदेश को जोड़ने पर जोर दिया गया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण रिटेल कृषि उत्पादों की खरीद वितरण नेटवर्क और कोल्ड चेन को लेकर भी निवेश की संभावनाएं तलाशीं गईं।

    शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ हुई बैठक में भी मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें लॉजिस्टिक्स फूड प्रोसेसिंग टेक्सटाइल फार्मास्यूटिकल्स पर्यटन नवीकरणीय ऊर्जा और एसएमई सहयोग जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री ने शारजाह के निवेशकों को भी मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

    दुबई दौरे में मुख्यमंत्री ने वेस्ट टू एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़ी परियोजनाओं को भी करीब से समझा। बीईईएएच के साथ इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सर्कुलर इकोनॉमी स्मार्ट सिटी और हरित ऊर्जा को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं एमार समूह की लीडरशिप से मुलाकात में इंदौर पीथमपुर उज्जैन डेवलपमेंट कॉरिडोर के साथ टाउनशिप हॉस्पिटैलिटी और आधुनिक शहरी विकास परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई।

    इस पूरे दौरे में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता को वैश्विक मंच पर पेश करने के साथ राज्य की निवेश नीति इंफ्रास्ट्रक्चर भूमि उपलब्धता लॉजिस्टिक्स और सिंगल विंडो व्यवस्था को भी प्रमुखता से बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार निवेशकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है।

    इसी दौरान मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को एआईएम इन्वेस्टमेंट अवॉर्ड्स 2026 में विनर एशिया सम्मान भी मिला। यह पुरस्कार निवेश संवर्धन विदेशी निवेश आकर्षित करने रोजगार सृजन नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए दिया गया। ऐसे में दुबई दौरे से मिले 53 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश के लिए बड़ी संभावनाओं का संकेत जरूर हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की होगी।

  • तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज

    तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज


    भोपाल । मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है। सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत के बाद स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21 हजार 500 रुपए प्रतिमाह करने पर सहमति बनी है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक में इस मुद्दे पर सकारात्मक समाधान निकला। हालांकि बढ़ी हुई राशि कब से लागू होगी और इसके लिए औपचारिक आदेश कब जारी होगा इसकी स्थिति सरकारी आदेश के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर आंदोलन कर रहे थे। भोपाल में आंदोलन ने उस समय बड़ा रूप ले लिया था जब डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड को 14 हजार 337 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की थी। डॉक्टरों का कहना था कि मौजूदा राशि उनके काम के बोझ और बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी कम है।

    आंदोलन के दौरान सोमवार को हमीदिया अस्पताल के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। डॉक्टरों के मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद कुछ इंटर्न डॉक्टरों के घायल होने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर मेडिकल संगठनों और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई थी। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा जिसके बाद पुलिस कार्रवाई की जांच के निर्देश दिए गए।

    इसके बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन को और तेज कर दिया। भोपाल में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया गया और कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। डॉक्टरों का कहना था कि जब तक सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने और पुलिस कार्रवाई के मामले में लिखित तौर पर ठोस कदम नहीं उठाती तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। गांधी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों से जुड़े इंटर्न्स ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया।

    इसी बीच बुधवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत में स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ ही प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के इलाज का मुद्दा भी उठाया गया। बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    बैठक में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को कार्रवाई का भरोसा दिया। शुरुआती जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी दी गई है। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के लिए जांच टीम भी बनाई गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे आंदोलन कर रहे डॉक्टरों को भी यह भरोसा मिला कि पुलिस कार्रवाई के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

    बैठक के दौरान प्रदर्शन में घायल हुए इंटर्न डॉक्टरों के उपचार को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से घायल छात्रों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। JUDA और MTA प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर संतोष जताया।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मुद्दा अब 21 हजार 500 रुपए के स्टाइपेंड पर बनी सहमति है। इंटर्न डॉक्टर भले ही 30 हजार रुपए की मांग कर रहे थे लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए पर सहमति बनने से आंदोलन खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल गया है। अब निगाहें औपचारिक आदेश पर हैं क्योंकि आदेश जारी होने के बाद ही नई राशि के लागू होने की तारीख और दूसरी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच टकराव के बाद बातचीत से निकला यह समाधान चिकित्सा छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

  • सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन

    सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले कई दिनों से चल रहा MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे इंटर्न डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा गतिरोध मंगलवार को बातचीत के बाद खत्म हो गया। मंत्रालय में हुई अहम बैठक के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बन गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद निकले इस समाधान को इंटर्न डॉक्टरों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रभावित हुई स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ मंत्रालय में अहम बैठक हुई। इस बैठक में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन यानी JUDA और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन यानी MTA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच स्टाइपेंड की राशि को लेकर सहमति बन गई और आखिरकार 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड तय किया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।

    बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों को 18,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में लंबे समय तक काम करने की जिम्मेदारी को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे जिसके बाद सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत हुई। अंततः सरकार ने अपने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दी और इसी पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।

    इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा की गई जिसके बाद समाधान का रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। JUDA और MTA के प्रतिनिधियों ने भी बैठक के बाद सकारात्मक बातचीत पर संतोष जताया और कहा कि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का समाधान बातचीत के जरिए निकलना महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का भी आभार व्यक्त किया।

    बैठक में केवल स्टाइपेंड का मुद्दा ही नहीं बल्कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए अलग से टीम भी गठित की गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के समुचित इलाज का भरोसा भी दिया है।

    दरअसल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। आंदोलन के कारण कई अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा था। हालात उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया जिसके बाद डॉक्टरों और छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई थी।

    अब 21,500 रुपये स्टाइपेंड पर सहमति बनने और पुलिस कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। यह फैसला न केवल इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती का समाधान साबित हुआ है। आने वाले दिनों में इंटर्न डॉक्टरों के ड्यूटी पर लौटने के साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।