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  • अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी

    अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी


    भोपाल । भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के गोरेगांव में रियल एस्टेट कारोबारी के घर के बाहर फायरिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जमीन और कथित अवैध प्लॉटिंग से जुड़े विवाद में पहले कारोबारी को फोन पर धमकियां मिलने का दावा किया गया और इसके बाद देर रात उनके घर के बाहर गोलियां चलाने की घटना सामने आई। अब फरियादी पक्ष की ओर से जारी किए गए छह कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। इन ऑडियो में एक व्यक्ति कथित तौर पर कारोबारी को गाली गलौज करते हुए भोपाल में काम नहीं करने की धमकी देता सुनाई दे रहा है। वह खुद को मुरैना निवासी सौरभ चौहान बताता है और ग्वालियर से जमीन का काम करने की बात कहता है। हालांकि इन ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मामला 60 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी संतोष सिंह तोमर से जुड़ा है। फरियादी के अनुसार गोरेगांव में कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर शिकायत करने के बाद उनका कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच उन्हें कथित तौर पर फोन पर धमकियां दी गईं। इसके बाद 10 सितंबर की दरमियानी रात करीब ढाई बजे एक SUV में आधा दर्जन से ज्यादा लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि घर के गेट के बाहर कई राउंड फायरिंग की गई और जान से मारने की धमकी देकर आरोपी मौके से फरार हो गए।

    फरियादी पक्ष का दावा है कि फायरिंग की घटना अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पहले से ही धमकियों का सिलसिला चल रहा था। जारी किए गए छह ऑडियो में कथित तौर पर जमीन विवाद को लेकर बातचीत और धमकी जैसी बातें सामने आती हैं। एक ऑडियो में खुद को सौरभ चौहान बताने वाला व्यक्ति कारोबारी को चुनौती देता सुनाई देता है। बातचीत में वह भोपाल में काम नहीं करने की बात कहता है। हालांकि पुलिस जांच में इन ऑडियो की वास्तविकता और कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि होना बाकी है।

    फायरिंग के बाद पुलिस को रात करीब 2 बजकर 55 मिनट पर डायल 112 के जरिए सूचना दी गई। इसके करीब आधे घंटे बाद फरियादी पक्ष रातीबड़ थाने पहुंच गया। इसके बावजूद FIR अगले दिन 11 सितंबर की शाम करीब 5 बजे दर्ज होने की बात सामने आई है। FIR में फिलहाल किसी आरोपी को नामजद नहीं किया गया है। पुलिस ने मामले में उस SUV के नंबर MP 13 ZD 5656 का उल्लेख किया है जिससे आरोपी मौके पर पहुंचे थे।

    फरियादी ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। कारोबारी ने गांव में रहने वाले लखन मारण पर भी संदेह जताया है। पुलिस अब जमीन विवाद से लेकर धमकी वाले कथित ऑडियो और फायरिंग तक की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि फायरिंग से पहले किन लोगों ने फरियादी से संपर्क किया था और वारदात के बाद किन नंबरों से उन्हें धमकी या दबाव देने की कोशिश की गई।

    इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। क्या फायरिंग जमीन विवाद के चलते हुई थी। कथित ऑडियो में आवाज किस व्यक्ति की है। SUV से मौके पर कौन लोग पहुंचे थे और फायरिंग में कितने हथियारों का इस्तेमाल हुआ। इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल धमकी के कथित ऑडियो और घर के बाहर हुई फायरिंग ने भोपाल के इस जमीन विवाद को गंभीर बना दिया है और पुलिस की जांच अब घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने पर केंद्रित है।

  • स्वाइन फ्लू को लेकर भोपाल में अलर्ट पहली मौत के बाद बढ़ी चिंता जानिए किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा

    स्वाइन फ्लू को लेकर भोपाल में अलर्ट पहली मौत के बाद बढ़ी चिंता जानिए किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा


    भोपाल । भोपाल में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल राजधानी में स्वाइन फ्लू से पहली मौत सामने आई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय राम सिंह की गंभीर सांस संबंधी बीमारी के चलते मौत हो गई। वे पहले से ही हृदय रोग हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। डॉक्टरों के मुताबिक उम्र के साथ पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण ऐसे मरीजों में फ्लू का संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

    भोपाल में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 65 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 45 मरीज पिछले 12 दिनों के दौरान मिले हैं। यानी कुल मामलों का करीब 70 फीसदी हिस्सा बेहद कम समय में सामने आया है। मौसम में बदलाव नमी और ठंडक के बीच सर्दी खांसी बुखार और सांस से जुड़ी परेशानियों वाले मरीजों की संख्या भी अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ रही है। ऐसे में वायरल रेस्पिरेटरी संक्रमण को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।

    फिलहाल भोपाल में एच1एन1 की जांच सिर्फ एम्स में हो रही है। गांधी मेडिकल कॉलेज में नियमित जांच की सुविधा अभी शुरू नहीं हुई है। स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक गंभीर लक्षण वाले 232 मरीजों की जांच की जा चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि हर सर्दी खांसी या बुखार वाले मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। मरीज की उम्र उसकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं।

    गांधी मेडिकल कॉलेज में आरआईआरडी के अधीक्षक और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे के अनुसार मौसम में बदलाव और नमी के कारण वायरल रेस्पिरेटरी बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं। एच1एन1 भी इसी तरह के संक्रमण का एक कारण है। हालांकि मौजूदा स्थिति को महामारी जैसी स्थिति नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञ के मुताबिक इंफ्लूएंजा के करीब 95 फीसदी मामले बिना अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो जाते हैं।

    फिर भी बुजुर्गों और हृदय रोग डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया जैसी जटिलता हो सकती है। सांस लेने में परेशानी ऑक्सीजन का स्तर कम होना या लक्षणों का तेजी से बढ़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऑक्सीजन की कमी वाले गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर आईसीयू सपोर्ट की जरूरत भी पड़ सकती है।

    स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को खुद को अन्य लोगों से अलग रखना चाहिए। पर्याप्त आराम करने के साथ तरल पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। मास्क लगाने और हाथों को नियमित रूप से साफ रखने से संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद मिल सकती है। सर्दी खांसी या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा लेना उचित नहीं है। एंटीवायरल दवा डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए और निर्धारित दवा का पूरा कोर्स करना जरूरी है।

    एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन भी उपलब्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार हाई रिस्क वाले लोग डॉक्टर की सलाह से वैक्सीन लगवा सकते हैं। इसका सुरक्षा प्रभाव करीब 60 से 70 फीसदी तक बताया जाता है। एग एलर्जी वाले लोगों को वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। राजधानी में तेजी से सामने आ रहे मामलों को देखते हुए खासकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

  • MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल

    MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल


    इंदौर । इंदौर में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पार्षद कमलेश कालरा ने जीतू यादव की मेयर इन काउंसिल यानी MIC में दोबारा नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को कालरा अपनी पत्नी अरुणा मां देवकी और बेटे के साथ राजबाड़ा पहुंचे और देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। हाथों में तख्तियां लेकर परिवार ने न्याय की मांग की। कालरा का कहना है कि जिस व्यक्ति पर उनके परिवार से जुड़े गंभीर मामले में आरोप लगे थे उसे दोबारा पार्टी में जगह देने के बाद MIC जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

    दरअसल महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर जीतू यादव को एक बार फिर MIC का सदस्य नियुक्त किया है। उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। जीतू यादव की वापसी के साथ ही करीब डेढ़ साल पुराना कालरा और जीतू विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस विवाद के बाद भाजपा ने जीतू यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया था और उनकी MIC सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी। बाद में पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद उनकी भाजपा में वापसी हुई और अब उन्हें MIC में भी दोबारा जिम्मेदारी मिल गई है।

    कमलेश कालरा का कहना है कि जनवरी 2025 में उनके घर पर हमला हुआ था और इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आए थे। कालरा ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान उनके परिवार को डराया गया और उनके बच्चे के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने लगातार न्याय की मांग की है लेकिन अब जीतू यादव को पार्टी में वापस लाने के साथ ही MIC में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है।

    कालरा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी मामले में पुलिस ने चालान पेश किया है तो अंतिम निर्णय अदालत को करना होता है। उनका कहना है कि उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। अब वे इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उनका सवाल है कि आखिर जीतू यादव को पार्टी में वापसी और MIC की जिम्मेदारी देने का फैसला किन आधारों पर किया गया।

    कालरा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत दुश्मनी के तौर पर नहीं है बल्कि वे इसे न्याय की लड़ाई मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के निर्वाचित पार्षद हैं और पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। उनके मुताबिक यदि एक पक्ष की बात सुनी जा रही है तो पीड़ित पक्ष की शिकायतों और सवालों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

    राजबाड़ा पर परिवार के साथ धरने पर बैठने के बाद कालरा ने संकेत दिया कि उनका विरोध अभी खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बात पार्टी और सरकार के जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंचती तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। जरूरत पड़ने पर वे प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने की बात भी कह चुके हैं।

    जीतू यादव की MIC में वापसी के बाद शुरू हुआ यह नया विवाद इंदौर भाजपा की राजनीति में आने वाले दिनों में और हलचल पैदा कर सकता है। एक तरफ संगठन ने जीतू यादव को फिर से जिम्मेदारी दी है वहीं दूसरी तरफ भाजपा के ही निर्वाचित पार्षद कमलेश कालरा खुले तौर पर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व कालरा के विरोध और उनकी न्याय की मांग पर क्या रुख अपनाता है।

  • तेज रफ्तार थार ने तोड़ी ब्रिज की रेलिंग फिर 50 फीट नीचे गिरी कार में फंसे चार लोगों की ऐसे बची जान

    तेज रफ्तार थार ने तोड़ी ब्रिज की रेलिंग फिर 50 फीट नीचे गिरी कार में फंसे चार लोगों की ऐसे बची जान


    इंदौर। इंदौर में देर रात एक भीषण सड़क हादसे ने लोगों को हैरान कर दिया। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में प्रतीक सेतु ब्रिज पर तेज रफ्तार थार अचानक अनियंत्रित हो गई और ब्रिज की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 50 फीट नीचे जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि थार नीचे गिरने के बाद पलट गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के समय कार में चार लोग सवार थे जो वाहन के अंदर ही फंस गए। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे लोगों और पुलिस की मदद से चारों घायलों को बाहर निकाला गया जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जमा रही।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब साढ़े तीन बजे हुआ। ब्लैक कलर की थार अन्नपूर्णा की तरफ से बिजलपुर की ओर जा रही थी। प्रतीक सेतु ब्रिज पर पहुंचते ही कार की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। देखते ही देखते थार ब्रिज की रेलिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि रेलिंग टूट गई और कार करीब 50 फीट नीचे जा गिरी। नीचे पहुंचने के बाद थार पलट गई। हादसे के दौरान कार के एयरबैग भी खुल गए जिससे सवार लोगों को कुछ राहत मिली।

    हादसे में कार सवार आरती उम्र 25 वर्ष अभिजीत उम्र 20 वर्ष आदित्य और लावण्या घायल हुए हैं। हादसे के बाद चारों लोग कार के अंदर फंस गए थे। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और इसके बाद रेस्क्यू कर सभी को वाहन से बाहर निकाला गया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल उनकी हालत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की तस्वीरें सामने आने के बाद दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। थार पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आई। जिस जगह से कार नीचे गिरी उसके पास ही रेलवे ट्रैक भी मौजूद है। ऐसे में हादसा और भी गंभीर हो सकता था। गनीमत रही कि जिस समय थार ब्रिज से नीचे गिरी उस वक्त सड़क पर कोई दूसरा वाहन नहीं था। यदि उसी समय वहां से कोई वाहन गुजर रहा होता तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती थी।

    एसीपी निधि सक्सेना के अनुसार प्रतीक सेतु ब्रिज पर हुए इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं और सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है लेकिन चालक हादसे के समय नशे में था या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना की परिस्थितियों का पता लगा रही है।

    यह हादसा एक बार फिर रात के समय तेज रफ्तार वाहन चलाने के खतरे को सामने लाता है। ब्रिज जैसे स्थानों पर थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इस घटना में चार लोग घायल हुए हैं लेकिन राहत की बात यह है कि सभी को समय रहते वाहन से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचा दिया गया।

  • शराब के खिलाफ शिवपुरी में भड़का गुस्सा दुकान में घुसकर तोड़फोड़ और बोतलें फोड़ीं 15 लोगों पर केस उमा भारती बोलीं समर्थन करें

    शराब के खिलाफ शिवपुरी में भड़का गुस्सा दुकान में घुसकर तोड़फोड़ और बोतलें फोड़ीं 15 लोगों पर केस उमा भारती बोलीं समर्थन करें


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शराब दुकानों के विरोध का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जिले के अलग अलग गांवों में महिलाएं और ग्रामीण शराब बिक्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच इंदार थाना क्षेत्र के कुटवारा गांव में शराब दुकान में तोड़फोड़ और शराब की बोतलें फोड़ने का मामला सामने आया है। सेल्समैन की शिकायत पर पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों में महिलाएं भी शामिल बताई गई हैं।

    बताया गया कि 11 सितंबर की शाम करीब साढ़े पांच बजे कुटवारा गांव स्थित शराब दुकान पर सेल्समैन बल्लू शिवहरे अपने साथी मनोज शिवहरे के साथ मौजूद था। इसी दौरान करीब 15 से 20 महिला और पुरुष लाठी डंडे लेकर वहां पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने शराब दुकान बंद कराने की मांग की और कथित तौर पर गाली गलौज भी की। इसके बाद कुछ लोग दुकान के अंदर घुस गए और वहां रखी शराब की पेटियों को बाहर निकालने लगे।

    सेल्समैन के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने शराब की कांच की बोतलों को जमीन पर पटककर तोड़ दिया। दुकान में देशी शराब के साथ अंग्रेजी शराब और बीयर की पेटियां भी रखी थीं। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कई पेटियां तोड़कर शराब नष्ट कर दी। सेल्समैन और उसके साथी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन भीड़ ने विरोध जारी रखा।

    इस घटना से शराब ठेकेदार को करीब चार लाख रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और घटना में शामिल लोगों की पहचान तथा उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि तोड़फोड़ में कितने लोग शामिल थे और वास्तविक नुकसान कितना हुआ है।

    शिवपुरी में शराब दुकानों के खिलाफ विरोध केवल कुटवारा तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ दिनों से जिले के कई गांवों में महिलाएं शराब बिक्री और कथित अवैध शराब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। कई स्थानों पर महिलाओं ने शराब की पेटियां दुकानों से बाहर निकालकर नष्ट की हैं। कुछ जगहों पर सड़क जाम करने और थानों तक प्रदर्शन करने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इस पूरे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का बयान भी सामने आया है। उन्होंने शिवपुरी में शराब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और लोगों से इन महिलाओं का समर्थन करने की अपील की। उमा भारती लंबे समय से शराबबंदी और शराब की बिक्री को लेकर मुखर रही हैं। उनके समर्थन से शिवपुरी में चल रहे इस विरोध को राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा मिल गई है।

    हालांकि शराब दुकानों के खिलाफ विरोध कर रहे लोगों की मांगों को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से अलग अलग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है। दूसरी ओर शराब कारोबारियों ने भी दुकानों और कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। कुछ ठेकेदारों ने सुरक्षा नहीं मिलने की स्थिति में लाइसेंस सरेंडर करने तक की चेतावनी दी है।

    शिवपुरी में लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने शराब बिक्री को लेकर स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष को सामने ला दिया है। अब पुलिस की जांच के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की शिकायतों और शराब दुकानों से जुड़े नियमों पर क्या कदम उठाता है।

  • भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां

    भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां


    भोपाल । भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए संचालित कैंटीन में खाद्य सुरक्षा और साफ सफाई को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान कैंटीन में सड़ी हुई प्याज मिली जबकि सैंडविच तैयार करने के लिए ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि करीब 10 दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने वाली कैंटीन में इस तरह की अनियमितताएं मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संचालकों को सुधार सूचना पत्र जारी कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने कॉलेज परिसर में संचालित नवीन कैंटीन का निरीक्षण किया था। इस दौरान खाद्य पदार्थों के निर्माण और उनके भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा गया। जांच के दौरान कैंटीन में साफ सफाई और हाइजीन की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी। इसके अलावा भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और उसके भंडारण को लेकर भी कई कमियां सामने आईं।

    निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला सैंडविच ब्रेड से जुड़ा सामने आया। कैंटीन में ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि लगभग 10 दिन पहले समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद उससे विद्यार्थियों के लिए सैंडविच तैयार किए जा रहे थे। कैंटीन में सड़ी हुई प्याज भी रखी मिली। खाद्य सामग्री की ऐसी स्थिति विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है क्योंकि कॉलेज कैंटीन में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र भोजन और नाश्ता करते हैं।

    अधिकारियों ने कैंटीन में इस्तेमाल होने वाले पेयजल की व्यवस्था की भी जांच की। इसके लिए आरओ और वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम तथा पानी की गुणवत्ता से संबंधित व्यवस्थाओं को देखा गया। निरीक्षण के दौरान कॉलेज परिसर में संचालित एक अन्य कैंटीन में भी स्वच्छता और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी कमियां सामने आईं। यहां भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों की वेशभूषा भी निर्धारित स्वच्छता मानकों के अनुरूप नहीं मिली।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों कैंटीन संचालकों को कमियों को गंभीरता से लेते हुए सुधार सूचना पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित व्यवस्थाओं को नियमानुसार सुधारने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए दोनों कैंटीन से भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के नमूने भी लिए गए हैं।

    जांच के दौरान मटर का आटा और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत लिए गए हैं। इन नमूनों को खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद उसमें सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई के बाद अब कैंटीन संचालकों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही विद्यार्थियों की सेहत से जुड़े खाद्य मानकों को लेकर कॉलेज परिसर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी सामने आई है।

  • MP में 40 हजार बैंक कर्मचारी हड़ताल पर शाखाओं के नहीं खुले ताले 5 डे वीक की मांग से आज से 3 दिन तक रहेगा असर

    MP में 40 हजार बैंक कर्मचारी हड़ताल पर शाखाओं के नहीं खुले ताले 5 डे वीक की मांग से आज से 3 दिन तक रहेगा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह यानी 5 डे वीक लागू करने की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी काम से दूर रहे। इसके चलते भोपाल सहित कई शहरों में बैंक शाखाओं के ताले नहीं खुले। भोपाल के एमपी नगर में बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। हालांकि हड़ताल केवल एक दिन की है लेकिन इसका असर लगातार तीन दिनों तक देखने को मिल सकता है क्योंकि शनिवार और रविवार को बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल में मध्य प्रदेश के बैंक कर्मचारी भी शामिल हुए हैं। कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों के बैंकिंग कामकाज पर पड़ रहा है। बैंक शाखाएं बंद रहने से चेक जमा करने और उनके क्लियरेंस जैसे काम प्रभावित होंगे। इसके अलावा शाखाओं से जुड़े कई दूसरे नियमित काम भी अटक सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाएं अलग माध्यम से जारी रह सकती हैं लेकिन जिन कामों के लिए शाखा जाना जरूरी है उनके लिए ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

    हड़ताल से पहले बैंक यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत भी हुई थी लेकिन किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद यूनियनों ने हड़ताल को जारी रखने का फैसला किया। बैंक कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग हर शनिवार को बैंक अवकाश घोषित कर पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की है। फिलहाल बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है जबकि अन्य शनिवार को सामान्य कामकाज होता है।

    यूनियनों का प्रस्ताव है कि शनिवार की छुट्टी के बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कामकाज का समय करीब 40 मिनट बढ़ाया जा सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू होने के बावजूद बैंकिंग कामकाज और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 5 डे वीक के साथ स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना को वापस लेने की मांग भी उठाई है। यूनियनों का आरोप है कि यह योजना बैंक कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ाने वाली है। उनका कहना है कि अधिकारियों के एक सीमित वर्ग को ज्यादा लाभ देने वाली इस व्यवस्था को लागू करने के बजाय कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    बैंक कर्मचारियों की ओर से पेंशन अपडेट करने और पेंशनभोगियों के एक्स ग्रेशिया की समीक्षा की मांग भी उठाई जा रही है। इसके अलावा NPS को OPS में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान महंगाई भत्ता व्यवस्था लागू करने की मांग लंबित बताई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क सब स्टाफ और आर्म्ड गार्ड की भर्ती भी जरूरी है।

    सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार का अवकाश है जबकि 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल का आह्वान किया गया है। ऐसे में लगातार पांच दिन बैंक शाखाएं बंद रह सकती हैं। इससे पहले शुक्रवार की हड़ताल ने ही ग्राहकों को बैंक से जुड़े जरूरी काम जल्द निपटाने की चुनौती दे दी है।

  • शिवपुरी में हाईवे पर बड़ा हादसा टला चलती कार से निकली आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पूरी वर्ना जलकर राख

    शिवपुरी में हाईवे पर बड़ा हादसा टला चलती कार से निकली आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पूरी वर्ना जलकर राख


    शिवपुरी । शिवपुरी में गुरुवार रात एनएच-46 पर एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। भैंसोंरा गांव के पास सड़क पर चल रही Hyundai Verna कार में अचानक आग लग गई। कार से तेज लपटें उठती देखकर चालक ने बिना देर किए वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद कार में सवार दोनों लोग तुरंत बाहर निकल आए। कुछ ही मिनटों में आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी कार उसकी चपेट में आ गई और देखते ही देखते वर्ना जलकर पूरी तरह खाक हो गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में कार सवार दोनों लोग सुरक्षित बच गए।

    घटना रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। कार में ग्वालियर निवासी 26 वर्षीय प्रेम गुप्ता और देव करारा सवार थे। दोनों चिकित्सा से जुड़ा सामान लेकर इंदौर की ओर जा रहे थे। बताया गया कि जब कार भैंसोंरा गांव के पास पहुंची तो अचानक उसमें से आग की लपटें निकलने लगीं। कार में आग लगते ही दोनों यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। चालक ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। दोनों लोग किसी तरह कार से बाहर निकले और सुरक्षित दूरी पर पहुंच गए।

    कार से निकलने के कुछ ही समय बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते लपटें पूरी कार में फैल गईं। हाईवे पर चल रहे दूसरे वाहन चालकों ने भी आग का यह खतरनाक मंजर देखा। आग के कारण मौके पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन गई। सूचना मिलने के बाद सुभाषपुरा थाना प्रभारी अरविंद चौहान पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

    पुलिस ने सबसे पहले हाईवे पर यातायात को नियंत्रित किया ताकि आग की वजह से कोई दूसरा हादसा न हो। वाहनों को दूसरी लेन से निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने आग की सूचना फायर ब्रिगेड को दी। मोहना से फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद कार में लगी आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी।

    हादसे में प्रेम गुप्ता और देव करारा को किसी तरह की चोट नहीं आई। दोनों समय रहते कार से बाहर निकल गए थे। अगर आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकलने में थोड़ी भी देरी होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटाने के साथ आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल शुरुआती जांच में आग लगने की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है।

    हाईवे पर चलती कार में अचानक आग लगने की यह घटना एक बार फिर बताती है कि वाहन में किसी तरह की असामान्य स्थिति नजर आते ही उसे सुरक्षित स्थान पर रोकना कितना जरूरी है। समय रहते कार से बाहर निकलने के कारण दोनों यात्रियों की जान बच गई जबकि उनकी कार पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।

  • एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी

    एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले की जांच अब भोपाल तक पहुंच गई है। STF की जांच में गोविंदपुरा क्षेत्र स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ का पता भी सामने आया है। दावा है कि इसी एक पते का इस्तेमाल 40 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने के लिए किया गया। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो गया है। आखिर एक ही पते पर रहने वाले अलग अलग लोगों के नाम से इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट के आवेदन कैसे आगे बढ़े और सत्यापन के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई।

     टीम ने मामले की पड़ताल के लिए अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंचकर वहां मौजूद भंते कश्यप आनंद से बातचीत की। भंते के मुताबिक उन्हें मठ के पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और करीब दो दिन पहले ही मठ में आए हैं। उनके आने के बाद अब तक न STF की टीम जांच के लिए मठ पहुंची और न ही किसी दूसरी जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले में पूछताछ की है।

    भंते कश्यप आनंद ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि मठ के पते से कितने लोगों के पासपोर्ट बनाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने मठ का पता देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया होगा तो नियमानुसार पुलिस को पते का सत्यापन करना चाहिए था। हालांकि उनकी जानकारी में ऐसा कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार वह भोजन के लिए मठ से बाहर चले जाते हैं इसलिए उनकी गैरमौजूदगी में कोई टीम आई हो इसकी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन मठ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने भी उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।

    यही बात अब STF की जांच को और गंभीर बना रही है। अगर जांच एजेंसी के मुताबिक एक ही मठ के पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट बने हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन आवेदनों में दिए गए दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। पुलिस वेरिफिकेशन में आवेदकों की पहचान और उनके वास्तविक निवास की पुष्टि कैसे की गई। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मठ का पता पासपोर्ट आवेदनों में किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।

    इस पूरे मामले की शुरुआत डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के पते से सामने आए संदिग्ध पासपोर्ट से हुई थी। जांच आगे बढ़ी तो मध्य प्रदेश के अलग अलग स्थानों के पतों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई। STF के मुताबिक इनमें 22 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है। जांच में फर्जी आधार कार्ड वोटर आईडी निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    STF ने मामले में रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार रियाल कई पासपोर्ट में गवाह बना था और उसके नाम से भी चार पासपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के कनेक्शन असम समेत दूसरे राज्यों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। STF अब इस मामले में संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में भी जांच कर रही है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मठ के एक पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया में यह असामान्य स्थिति पकड़ में क्यों नहीं आई। अब STF पासपोर्ट आवेदन से लेकर दस्तावेज तैयार होने और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि मठ का पता किसने इस्तेमाल किया दस्तावेज कहां तैयार हुए और इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने के पीछे असली नेटवर्क कितना बड़ा है।

  • देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट

    देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट


    देवास। देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर खाद्य विभाग ने गुरुवार को बड़ी जांच कार्रवाई की। खाद्य विभाग राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने उज्जैन रोड स्थित कई दूध डेयरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उज्जैन से पहुंची चलित प्रयोगशाला की मदद से करीब छह डेयरियों में दूध की रैपिड किट के जरिए जांच की गई। जांच के दौरान ज्यादातर डेयरियों में दूध निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। हालांकि एक डेयरी के दूध की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को आशंका हुई जिसके बाद वहां से सैंपल लेकर विस्तृत जांच के लिए भोपाल भेजा गया है।

    अधिकारियों के मुताबिक मौके पर की गई प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध की गुणवत्ता को लेकर जहां संदेह सामने आया वहां से नमूना सुरक्षित तरीके से लिया गया। अब इस सैंपल की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। भोपाल से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दूध में वास्तव में किसी तरह की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कमी है या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयुक्त जांच टीम में नायब तहसीलदार हरिओम ठाकुर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने डेयरियों में पहुंचकर दूध की गुणवत्ता की जांच करने के साथ वहां उपलब्ध अन्य दूध उत्पादों को भी देखा। अधिकारियों ने बताया कि जांच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और दूध तथा दूध से बने उत्पादों में किसी तरह की मिलावट की संभावना को सामने लाना है।

    जांच के दौरान डेयरियों में मौजूद दूध उत्पादों की भी पड़ताल की गई। इनमें सुक्रोज की मात्रा की जांच भी शामिल रही। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध उत्पादों से जुड़े जरूरी तथ्यों को दर्ज किया। इस तरह की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे दूध और अन्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

    खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान ज्यादातर दुकानों पर दूध तय मानकों के अनुसार मिला। हालांकि एक डेयरी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी डेयरी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। भोपाल से आने वाली प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    दूध रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा खाद्य पदार्थ है और बड़ी संख्या में लोग इसका सीधे सेवन करते हैं। ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर समय समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। देवास में हुई इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में दूध मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित डेयरी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।