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  • भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल 14.69 लाख के टैक्स घोटाले में आरोपी जेल पहुंचे लेकिन नौकरी बरकरार

    भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल 14.69 लाख के टैक्स घोटाले में आरोपी जेल पहुंचे लेकिन नौकरी बरकरार


    भोपाल । भोपाल नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर वसूली से जुड़ा 14 लाख 69 हजार 798 रुपए का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को मार्च महीने में ही मिल गई थी लेकिन इसके बावजूद लगभग चार महीने तक कार्रवाई नहीं की गई और मामला फाइलों में दबा रहा। आखिरकार 5 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई जिसके बाद दोनों आरोपी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि अब तक नगर निगम ने उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की हैं।

    जांच के अनुसार यह पूरा फर्जीवाड़ा नेशनल लोक अदालत के दौरान अंजाम दिया गया। 14 मार्च 2026 को वार्ड 33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी की यूजर आईडी का दुरुपयोग कर 106 फर्जी प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर रसीदें जारी की गईं। इन रसीदों में करीब 14.69 लाख रुपए टैक्स जमा होना दर्शाया गया जबकि बैंक खातों के मिलान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई तो घोटाले की परतें खुलती चली गईं।

    जांच में सामने आया कि वार्ड 24 में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर शिराज उलहक और योजना शाखा में कार्यरत मोहम्मद समीर खान ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। आरोप है कि दोनों संपत्ति मालिकों को आधे टैक्स में भुगतान कराने का लालच देते थे। इसके लिए उन्होंने वार्ड 24 की एक ऑपरेटर के माध्यम से वार्ड 33 के प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल किए और उसी का उपयोग कर फर्जी रसीदें जारी कर दीं। लोगों से वसूली गई रकम सरकारी खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प ली गई।

    इस घोटाले ने नगर निगम के ऑनलाइन टैक्स सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वार्ड की यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग दूसरे वार्ड में कर इतनी बड़ी संख्या में फर्जी रसीदें जारी होना तकनीकी व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है। अब पूरे सिस्टम के तकनीकी ऑडिट और अन्य वार्डों के रिकॉर्ड की भी जांच की मांग उठने लगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसी तरह की अनियमितताएं अन्य स्थानों पर भी तो नहीं हुई हैं।

    इस मामले का सबसे बड़ा नुकसान उन नागरिकों को हुआ जिन्होंने आरोपियों को टैक्स की राशि देकर वैध समझकर रसीदें प्राप्त कर ली थीं। बाद में उनके खातों में वही टैक्स दोबारा बकाया दिखाया गया। यानी जिन्होंने भुगतान किया वही दोबारा निगम के रिकॉर्ड में बकायादार बन गए। इससे आम लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    हालांकि दोनों आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं लेकिन अब तक नगर निगम ने उनसे गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू नहीं की है और न ही उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार ने कहा है कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नगर निगम दोषियों के खिलाफ कितनी तेजी और सख्ती से आगे की कार्रवाई करता है।

  • अपराधियों पर पुलिस की कड़ी नजर पुराने भोपाल में रातभर चला चेकिंग अभियान कई वाहनों की जांच

    अपराधियों पर पुलिस की कड़ी नजर पुराने भोपाल में रातभर चला चेकिंग अभियान कई वाहनों की जांच


    भोपाल । भोपाल के पुराने शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा अपराधियों पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से मंगलवार देर रात पुलिस ने व्यापक चेकिंग और सर्च अभियान चलाया। अभियान के दौरान शहर के कई थाना क्षेत्रों में प्रमुख चौराहों बाजारों और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेड्स लगाकर आने जाने वाले वाहनों की गहन जांच की गई। पुलिस की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना अपराधियों में कानून का भय बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

    रातभर चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने बिना किसी ठोस कारण देर रात सड़कों पर घूम रहे लोगों से पूछताछ की। उनकी पहचान की पुष्टि की गई और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों पर विशेष नजर रखी गई। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की गई ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

    अभियान के दौरान दोपहिया और चारपहिया वाहनों की भी सघन जांच की गई। वाहन चालकों से ड्राइविंग लाइसेंस वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई। जिन लोगों ने यातायात नियमों का उल्लंघन किया उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने बिना हेलमेट वाहन चलाने ओवरलोडिंग और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी सख्ती दिखाई।

    सिर्फ वाहन जांच तक ही अभियान सीमित नहीं रहा बल्कि पुलिस टीमों ने पुराने भोपाल के संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त भी की। बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मौजूद लोगों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई। पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

    डीसीपी आयुष गुप्ता ने बताया कि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में कानून का डर कायम रखने के लिए इस तरह के विशेष अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना भी है। इसके साथ ही यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए भी नियमित रूप से विशेष अभियान जारी रहेंगे।

    भोपाल पुलिस का मानना है कि लगातार निगरानी सघन चेकिंग और आम जनता के सहयोग से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत भविष्य में भी शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे अभियान चलाए जाते रहेंगे ताकि राजधानी में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और नागरिक सुरक्षित वातावरण में रह सकें।

  • मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को लेकर बढ़ा विवाद गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में तेज हुआ आंदोलन

    मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को लेकर बढ़ा विवाद गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में तेज हुआ आंदोलन


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस फैसले का विरोध करते हुए अब सीधे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के मुख्य संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने से मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी को लेकर दोनों संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को पत्र भेजकर मौजूदा आदेश को वापस लेने और बोर्ड का नए सिरे से पुनर्गठन करने की मांग की गई है।

    शमशुल हसन ने कहा कि संगठन को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनव्वर पटेल या अन्य मुस्लिम सदस्यों के कामकाज पर कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध केवल उन दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर है जिन्हें बोर्ड में शामिल किया गया है। उनका कहना है कि वक्फ इस्लाम से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक संस्था है इसलिए इसके संचालन और प्रबंधन में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की ही भागीदारी होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग कर समाज की भावनाओं के अनुरूप नए बोर्ड का गठन किया जाए। उनका विश्वास है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में भी जनभावनाओं को देखते हुए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर पुनर्विचार किया गया है इसलिए इस मामले में भी सरकार सकारात्मक कदम उठा सकती है।

    इस मुद्दे पर शमशुल हसन ने उन उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड और उसके अध्यक्ष का स्वागत किया है। उनका कहना है कि धार्मिक नेतृत्व को समाज की भावनाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरान और हदीस की शिक्षाओं से परिचित होने के बावजूद यदि कोई ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो इससे समाज में नाराजगी बढ़ती है। उन्होंने धार्मिक नेतृत्व से अपने रुख पर पुनर्विचार करने की अपील भी की।

    शमशुल हसन ने कहा कि इतिहास में मुस्लिम उलेमाओं ने समाज और धार्मिक संस्थाओं की रक्षा के लिए कई संघर्ष किए हैं। आज भी धार्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल बयान देने तक सीमित नहीं है बल्कि समुदाय के अधिकारों और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर चुप हैं या समर्थन कर रहे हैं उन्हें इतिहास से सीख लेते हुए समाज के हित में आवाज उठानी चाहिए।

    संगठन का दावा है कि केवल मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समाज इस फैसले से असंतुष्ट है। उनका कहना है कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि एक ऐसे निर्णय के विरोध में है जिसे समुदाय अपनी धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगा।

    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए पहली बार दो गैर मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया है। इसी फैसले के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने का सिलसिला लगातार जारी है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। पन्ना, छतरपुर और खंडवा समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मंगलवार को तेज बारिश के कारण कई सड़क मार्ग बंद हो गए, जबकि नदियां उफान पर रहीं।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र के अनुसार, प्रदेश में अगले चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक वर्षा हो सकती है।

    बुधवार के लिए श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सागर और टीकमगढ़ जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, दमोह, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, आगर-मालवा, उज्जैन, इंदौर, धार, झाबुआ, नीमच और मंदसौर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    इसके अलावा आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, भोपाल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर और सिंगरौली जिलों में हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    कई जिलों में बारिश से बढ़ी परेशानी
    मंगलवार को हुई तेज बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात देखने को मिले। इंदौर के खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में सड़क धंस जाने से स्कूली बच्चों की आवाजाही प्रभावित हुई। वहीं, खजुराहो में कई मार्ग बंद हो गए और पन्ना में जलभराव की स्थिति बनी रही।

    मंगलवार को प्रदेश के 29 जिलों में वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक पौने दो इंच बारिश छतरपुर के खजुराहो में हुई। धार में डेढ़ इंच से अधिक, राजगढ़ में सवा इंच, रतलाम और उज्जैन में पौन इंच, जबकि भोपाल, सागर और खरगोन में करीब आधा इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    बारिश से तापमान में आई गिरावट
    लगातार बारिश के चलते प्रदेशभर में मौसम सुहावना हो गया है और दिन के तापमान में भी कमी दर्ज की गई। पांच प्रमुख शहरों में इंदौर का अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस, जबलपुर 30.6 डिग्री, भोपाल 31 डिग्री, उज्जैन 31.5 डिग्री और ग्वालियर 33.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    सबसे अधिक तापमान श्योपुर में 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि मलाजखंड सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सिवनी, धार, नौगांव, दमोह, खंडवा, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, खरगोन, टीकमगढ़ और सतना में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    सामान्य से 5 प्रतिशत अधिक हुई बारिश
    प्रदेश में जून महीने से ही आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। 6 जुलाई तक हुई वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 200.5 मिमी (करीब 8 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य 191.3 मिमी (7.7 इंच) वर्षा की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। हालांकि प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

  • शिवपुरी में आत्मदाह की कोशिश से मचा हड़कंप, महिला ने ससुराल पर लगाए गंभीर आरोप

    शिवपुरी में आत्मदाह की कोशिश से मचा हड़कंप, महिला ने ससुराल पर लगाए गंभीर आरोप


    शिवपुरी  । शिवपुरी में मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम के बाहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक महिला अपने पति के साथ हाथ में पेट्रोल से भरी बोतल लेकर पहुंची और आत्मदाह की चेतावनी देने लगी। मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने तत्काल सतर्कता दिखाते हुए उसके हाथ से बोतल छीन ली और काफी देर तक समझाइश देकर उसे शांत कराया। समय रहते पुलिस की सक्रियता से एक बड़ा हादसा टल गया।

    महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित किया गया। ससुराल पक्ष मायके से पैसे लाने का दबाव बनाता था और विरोध करने पर मानसिक तथा शारीरिक रूप से परेशान करता था। महिला का कहना है कि उसके एक लाख रुपए और सोने-चांदी के जेवर भी ससुराल वालों ने अपने कब्जे में रख लिए हैं और अब उन्हें लौटाने से इनकार कर रहे हैं।

    महिला के अनुसार, उसे और उसके पति को जिस मकान में रहने का अधिकार है, उसी मकान से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। उसने दावा किया कि मकान का निर्माण उसके पति और ससुर की कमाई से हुआ था, लेकिन रजिस्ट्री सास के नाम कराई गई। अब परिवार के लोग उन्हें घर से निकालना चाहते हैं। इतना ही नहीं, उनके उपयोग में आने वाले कॉमन शौचालय पर भी ताला लगा दिया गया है, जिससे उन्हें रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    महिला ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 को उसके साथ मारपीट की घटना हुई थी। उसने पहले फिजिकल थाना और बाद में महिला थाना में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उसके अनुसार पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। न्याय नहीं मिलने से निराश होकर वह पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंची, लेकिन वहां भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया।

    महिला के पति ने भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वे पिछले दो दिनों से पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि जिस मकान से उन्हें निकाला जा रहा है, उसके निर्माण में उनकी मेहनत और कमाई का बड़ा योगदान है। लगातार अनदेखी से परेशान होकर उनकी पत्नी ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने महिला और उसके पति से बातचीत की। महिला को समझाकर शांत कराया गया और उसका आवेदन लेकर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस का कहना है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर घरेलू विवादों, दहेज प्रताड़ना और शिकायतों के समय पर निराकरण की आवश्यकता को उजागर करती है। यदि पारिवारिक विवादों और शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो, तो ऐसे गंभीर और आत्मघाती कदम उठाने की नौबत आने से रोका जा सकता है।

  • 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान को मिली रफ्तार: देवास में मैराथन निकालकर पुलिस ने लोगों को किया साइबर अपराधों के प्रति जागरूक

    'सेफ क्लिक 2.0' अभियान को मिली रफ्तार: देवास में मैराथन निकालकर पुलिस ने लोगों को किया साइबर अपराधों के प्रति जागरूक


    इंदौर । बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के बीच देवास पुलिस लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रही है। इसी कड़ी में मंगलवार सुबह ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत शहर में एक जागरूकता मैराथन का आयोजन किया गया। इस मैराथन में पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी, पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लेकर साइबर सुरक्षा का संदेश दिया।

    सुबह छह बजे भोपाल चौराहे से शुरू हुई मैराथन को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए औद्योगिक क्षेत्र थाना परिसर तक पहुंची। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने साइबर अपराधों से बचाव से जुड़े संदेश दिए और नागरिकों से सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने की अपील की। अभियान का उद्देश्य लोगों को इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय सतर्क रहने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को बताया कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध संदेश, फर्जी कॉल या ईमेल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। साथ ही बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

    पुलिस ने यह भी बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए या नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर सेल से तुरंत संपर्क करना चाहिए। समय पर शिकायत दर्ज कराने से कई मामलों में ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

    देवास पुलिस का ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान पिछले चौदह दिनों से लगातार चल रहा है। इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पुलिस टीम लोगों को डिजिटल फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं, सोशल मीडिया ठगी, फिशिंग लिंक, केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाले धोखाधड़ी के मामलों और ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब आम नागरिक भी जागरूक और सतर्क रहें। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। देवास पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत सूचना दें और सुरक्षित डिजिटल आदतों को अपनाकर स्वयं के साथ अपने परिवार को भी साइबर अपराधों से सुरक्षित रखें।

  • बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

    बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश सरकार ने बेतवा नदी को आने वाले तीन दशकों तक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों को नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की संभावित आबादी, शहरी विस्तार और बढ़ने वाले सीवेज भार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा स्थायी सिस्टम विकसित करना है, जिससे भविष्य में बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता न पड़े और नदी की जल गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।

    भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनेगा पूरा नेटवर्क

    योजना के तहत सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन नेटवर्क की क्षमता भविष्य की आबादी के अनुसार तय की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त क्षमता भी रखी जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो।

    नदी में गिरने से पहले रोका जाएगा गंदा पानी

    परियोजना का सबसे अहम हिस्सा यह है कि बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी तक पहुंचने से पहले रोक लिया जाएगा। पाइपलाइन के माध्यम से इस पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से उसका शोधन होगा। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं होगी, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    मंडीदीप और विदिशा सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

    प्रस्तुतीकरण में सामने आया कि बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) उपलब्ध नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना शोधन वाला पानी भी सीधे बेतवा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

    15 वर्षों तक होगी डिजिटल निगरानी

    परियोजना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आधुनिक SCADA और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की मदद से पानी की गुणवत्ता और एसटीपी के संचालन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। किसी भी तकनीकी खराबी या प्रदूषण की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

    वैज्ञानिक सर्वे के बाद बनेगी डीपीआर

    डीपीआर तैयार करने से पहले नदी, नालों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसमें नदी और नालों का सर्वे, मिट्टी और भू-आकृति का परीक्षण, सीवेज की मात्रा का आकलन, उपयुक्त ट्रीटमेंट तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, परियोजना लागत और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    लंबी अवधि के संरक्षण पर रहेगा फोकस

    सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतवा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था विकसित करना है। योजना में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने, संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी की जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • एमपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय, आज 31 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय, आज 31 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और जुलाई की शुरुआत से ही लगातार तेज बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले छह दिनों से हो रही बारिश के चलते प्रदेश में औसत वर्षा का आंकड़ा करीब 7 इंच (179.6 मिमी) तक पहुंच गया है। यह सामान्य औसत 181.6 मिमी से केवल 1 प्रतिशत कम है, जबकि जून महीने में बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम दर्ज की गई थी।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, विशेष रूप से भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों के अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। देवास जिले में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    5 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
    मंगलवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर और छतरपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, मैहर, दमोह, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, सीहोर, हरदा, आगर-मालवा, राजगढ़, झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
    श्योपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, भोपाल, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर और रतलाम में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    डिंडौरी में बढ़ा नदी-नालों का जलस्तर, कई गांवों का संपर्क टूटा
    डिंडौरी जिले में लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। तुड़ार नदी की पुलिया पर पानी बहने से करंजिया ब्लॉक के कई गांवों का संपर्क कट गया है। वहीं, 11 मकानों में पानी घुसने से लोगों के घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा है।

    इन जिलों में दर्ज हुई बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार श्योपुर में सबसे अधिक सवा इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। खजुराहो और मंडला में 1 इंच, जबकि नौगांव और दमोह में पौन इंच बारिश हुई। छिंदवाड़ा, सिवनी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया और रीवा में करीब आधा इंच वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा जबलपुर, बैतूल, दतिया, नर्मदापुरम, खरगोन, सागर, सतना, सीहोर, छतरपुर और पांढुर्णा में भी अच्छी बारिश हुई।

    तापमान में आई गिरावट
    लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। मलाजखंड सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा सिवनी (28°), बैतूल (28.2°), पचमढ़ी (28.6°), खंडवा (29.1°), छिंदवाड़ा (29.3°) और खरगोन (29.6°) दर्ज किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में जबलपुर का अधिकतम तापमान 31.3 डिग्री, भोपाल में 33.4 डिग्री, इंदौर में 33.8 डिग्री, उज्जैन में 34 डिग्री और ग्वालियर में 36.7 डिग्री सेल्सियस रहा।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक बारिश
    इस वर्ष जून महीने से ही प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला बना हुआ है। 6 जुलाई तक प्रदेश में कुल 179.6 मिमी (करीब 7 इंच) बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। यह सामान्य औसत 181.6 मिमी से सिर्फ 1 प्रतिशत कम है। हालांकि, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 22 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। ब्यावरा के जगनियापुरा गांव स्थित पानी से भरी क्रेशर खदान में डूबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में पांच वर्षीय मासूम निखरा पारदी उसकी ग्यारह वर्षीय बहन नम्रता पारदी और दोनों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी पैंतीस वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।

    बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई।

    यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।

  • सीहोर में भीषण सड़क हादसा बोलेरो और ट्रक की आमने सामने टक्कर में पांच की मौत चार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे

    सीहोर में भीषण सड़क हादसा बोलेरो और ट्रक की आमने सामने टक्कर में पांच की मौत चार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सोमवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने पांच परिवारों की खुशियां छीन लीं। आष्टा और शुजालपुर मार्ग पर मेना गोदी गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक और बोलेरो की आमने सामने हुई जोरदार टक्कर में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार कई लोग वाहन के अंदर ही फंस गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा तफरी मच गई और आसपास के ग्रामीण तुरंत राहत कार्य में जुट गए।

    जानकारी के अनुसार दुर्घटना सोमवार दोपहर करीब पौने तीन बजे हुई। बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे जो राजगढ़ जिले के कालीपीठ थाना क्षेत्र के भियापुरा गांव से इलाज के लिए आष्टा जा रहे थे। रास्ते में मेना गोदी गांव के पास सामने से आ रहे ट्रक से उनकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर का प्रभाव इतना जबरदस्त था कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए और तीन लोग वाहन से कई फीट दूर जाकर सड़क किनारे गिर पड़े। चालक वाहन में बुरी तरह फंस गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कई घायल दर्द से तड़पते रहे। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए पुलिस को सूचना दी और खुद भी राहत कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर क्षतिग्रस्त बोलेरो में फंसे लोगों को बाहर निकाला। कई घायलों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि कुछ के हाथ पैर भी टूट गए थे। एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को पहले आष्टा के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सीहोर जिला अस्पताल और फिर भोपाल रेफर किया गया।

    आष्टा पुलिस के अनुसार हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

    मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक कुछ घायलों की पहचान इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है जबकि अन्य की पहचान और परिजनों को सूचना देने का काम जारी है।

    इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यातायात नियमों का पालन सुरक्षित गति से वाहन चलाना और लंबी यात्रा के दौरान पूरी सतर्कता बरतना ऐसे हादसों को काफी हद तक रोक सकता है। प्रशासन ने भी लोगों से सड़क पर सावधानी बरतने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।